आंटी के लिए बड़ा लंड

 
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मै एक इंजिनियर हु और मेरा नाम विजय (बदला हुआ नाम) है. ये बात तब की है, जब मैं बंगलौर में था और वहां जब कर रहा था. मेरा ऑफिस और घर थोडा पास में ही था. तो मुझे कोई परेशानी नहीं होती थी ट्रेवल करने में और मेरा काफी समय सेव हो जाता था. मैं करीब ६:३० PM तक मेरे रूम पर पहुँच जाता था. अपार्टमेंट में, मैने ग्राउंडफ्लोर पर एक २ BHK ब्लाक रेंट पर लिया था. वो पूरी बिल्डिंग ही नयी बनी हुई थी. जिसमे रहने वाला, मैं पहला रेजिडेंट था.

कुछ दिन के बाद, मेरी ही बिल्डिंग में एक कपल रहने आ गया, बिल्डिंग के ३rd फ्लोर पर. वो लोग राजस्थानी थे और वो दोनों न्यूली मैरिड कपल थे. दोनों स्टेयर (ऊपर जाने की सीढ़िया) मेरे ही फ्लैट के बगल में थे, तो वो मेरे ही ब्लाक से होकर गुज़रते थे. चुकि, पूरी बिल्डिंग में हम दोनों ही लोग थे, हम लोगो की आपस में बातचीत शुरू हो गयी थी और वो मेरे घर भी आने लगे थे. अक्सर सन्डे को या छुट्टी वाले दिन, टाइम मिलने पर वो मेरे घर आ जाते टाइम पास करने के लिए और हम टीवी देखकर या बातें करके अपना टाइम पास करते. ऐसे ही समय बीत रहा था.

थोड़े ही दिनों में, हम लोगो की अच्छी फ्रेंडशिप हो गयी और एक दिन राजेश ने मुझसे से कहा – “अरे विजय तुम तो दिन भर ऑफिस में रहते हो और मैं भी शॉप में ही रहता हु और मेरी वाइफ, निकिता पूरा दिन घर अकेली रहती है और पुरे दिन बोर होती है”. तो मैने बोला – “हाँ, तो मै क्या कर सकता हु???” तो राजेश ने बोला – “कुछ नहीं अगर तुम बुरा नहीं मानोगे, तो एक रिक्वेस्ट है”. मैने बोला – “हाँ, बताओ तो सही”. तो उसने पूछा – “तुम्हारे घर की चाबी अगर तुम मेरी वाइफ को दे सकते हो, तो अच्छा रहेगा. जब भी वो बोर होगी, तो वो आके टीवी देख लेगी, तुम्हारे घर पर”. मैने कहा – “ओके, नो प्रॉब्लम. लेकिन, थोडा ध्यान से .. बैचलर का रूम है. हर चीज़ इधर-उधर पड़ी रहती है”.

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वैसे ही डेज पास्ड और एक दिन मेरा ऑफिस थोडा जल्दी ख़तम हो गया और मैं ५ बजे ही घर पहुँच गया. उसदिन, निकिता बैठी हुई थी मेरे घर पर और टीवी देख रही थी. जब मैं अन्दर घुसा, तो मुझे शौक लग गया, वो मेरी ब्लूफिल्म की डीवीडी लगा कर देख रही थी. मुझे अचानक देखकर वो डर गयी और उसने डीवीडी प्लेयर बंद कर दिया और नार्मल टीवी चालू कर दिया और अपने घर जाने लगी. मैने उसे रोका और बोला – “बैठो ना, नो प्रॉब्लम. कुछ गलत नहीं है”. फिर वो मेरे कहने पर रुक गयी और डरी हुई सी बैठ गयी और बोली – “विजय, प्लीज ये बात किसी को नहीं बताना और तुम भी इसी बात को इग्नोर कर देना प्लीज”. मैने बोला – “ठीक है” और वो चली गयी. वो अगले दिन से रोज़ मैने आने तक मेरे ही घर पर बैठी रहती और जब मैं आता, तो मेरे लिए चाय बनाके लती और दोनों देर तक बातें करते और फिर मैं सिगरट पीता और उसको भी उसके स्मोक से कोई प्रॉब्लम नहीं थी.

एकदिन, वैसे ही जब मैं आया, तो वो फिर से मेरी वो ब्लूफिल्म वाली डीवीडी लगा कर देख रही थी, तो मैने वो देखा और शौक हो कर पूछा – “क्या हुआ, बहुत ब्लूफिल्म देखने का शौक चड़ा है तुम्हें”. तो उसने पुरे डेरिंग से बोला – “हाँ कुछ ऐसा ही समझ लो, रियल लाइफ में तो कुछ ज्यादा मिलता नहीं”. तो हमारा कन्वर्सेशन कुछ ऐसे चला.

मैं – “क्यों क्या हुआ?”

निकी – “कुछ नहीं, बस मेरे हँजबेंड को से के लिए टाइम ही नहीं मिलता”.

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मैं – क्यों?

निकी – वो आते रात को ११ बजे तक और तब तक मुझे बहुत ही नीद आती है और मैं सोयी रहती हु. वो आके खाना खाते ही सो जाते है और मुझे सेक्स करने का बहुत ही इंटरेस्ट है, लेकिन उनके पास मेरे लिए टाइम ही नहीं है.

मैं – ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह तो अब क्या करना चाहती हो?

निकी – कुछ नहीं


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