आंटी के साथ मस्ती के पल

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हेलो दोस्तों, मेरा नाम विक्की है और मैं हरियाणा का रहने वाला हु. मेरी ऐज २६ साल है, मेरी हाइट ५’ ११” और मैं कंप्यूटर इंजिनियर हु. आज जो कहानी मैं आप लोगो को बताने जा रहा हु, वो मेरी सच्ची कहानी है. मैं शुरू से ही भाभियों और आंटी लोगो को पसंद करता हु. वो भाभी और आंटी, जो थोड़ी मोटी होती है, वो मुझे बेहद पसंद है और मुझे उतेजित करती है. जब भी मैं किसी मोटी आंटी या भाभी को देखता हु और उसकी बाहर निकली गांड को देखता हु; तो मेरे मन में हलचल सी हो जाती है और मेरा लंड अपने काबू में नहीं रहता है. मेरे घर के साथ वाले घर में एक आंटी है पायल (नाम चेंज). वो थोड़े ही दिन पहले हमारे साथ वाले घर में रेंट पर अपनी बेटी और बेटे के साथ रहने आई थी. उनकी उम्र होगी कोई ४५ ० ४६ साल. फिगर का तो मैं बता नहीं सकता, बट उनके बूब्स ज्यादा नहीं है. लेकिन उनकी गांड काफी मोटी है. वो हमेशा ही साड़ी पहनती है और उसमें वो बहुत सुंदर लगती है. उनकी बेटी कॉलेज में पढ़ती है और उनका बीटा किसी कंपनी में काम करता है.

उनके पति की १० -१२ साल पहले ही मौत हो चुकी थी. अब मैं स्टोरी पर आता हु. एकदिन, मैं दोपहर में छत पर कपड़े उतारने के लिए गया. हमारी छत आंटी की छत टच है. वो भी इत्तेफाक से कपड़े उतार रही थी. मेरी नज़र पहली बार, उनसे मिली और मैं उन्हें देखता ही रह गया. मैंने उन्हें नमस्ते किया और पूछने लगा, कि कब आई.. वगैरह – वगैरह और ऐसे ही मैं १० – १५ मिनट तक हम बात करते रहे और आंटी ने मुझे शाम को घर आने के लिए बोला. मैंने हाँ बोल दिया और नीचे आ गया. शाम को मैं उनके घर गया, तो उनकी बेटी ने दरवाजा खोला. मैंने उसको हाई बोला और आंटी के बारे में पूछा. उसने बताया, मम्मी नहा रही है और मुझे रूम में बैठने को बोला और वो दुसरे कमरे में जाकर फ़ोन पर बात करने लगी. मुझे लग रहा था, कि वो अपने बॉयफ्रेंड से लगी हुई है. १० मिनट तक, मैं ऐसे ही बैठा रहा उर फिर अचानक बाथरूम का दरवाजा खुला और आंटी टॉवल में खुद को लपेटे हुए सीधी रूम में आ गयी. शायद उन्हें मेरे आने के बारे में पता नहीं था.

मैं उनके रूम के दरवाजे के साइड में बैठा हुआ था. उनका फेस मेरी तरफ नहीं था और उन्होंने रूम में आते ही, टॉवल उतार दिया और अपना सिर पूछने लगी. मेरी तो आँखे फटी रह गयी. पहली बार में ही इतना अच्छा वेलकम. उनकी मोटी गांड मेरे सामने थी. मेरा दिल जोरो से धड़क रहा था. कुछ ही सेकंड में इतना कुछ हो गया, कि मुझे कुछ समझ ही नहीं आ रहा था. आंटी जैसे ही पीछे मुड़ी और मुझे देखा, तो फ़ौरन से अपना नंगा जिस्म टॉवल से छिपाने लगी. मैंने अब उनकी चूत और बूब्स के भी दर्शन कर लिए थे. वो एकदम घबरा गयी और पूछा, तुम यहाँ? तुमने बताया भी नहीं. मैं उठा और बाहर चला गया. मेरे बाहर निकलते ही, आंटी ने फटाक से दरवाजा बंद किया. मुझे कुछ समझ नहीं आया और मैं सीधे अपने घर चला गया. पूरी रात मेरी दिमाग में वही चलता रहा और आंटी का नंगा बदन मेरी आँखों के था. रात को १२ बजे के करीब बाथरूम में जाकर मुठ मारी, तब जाकर चैन मिला और मैंने मन ही मन में ठान लिया, कि अब तो आंटी को चोदना ही है.

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अगले दिन रात को मैं खाना खाकर छत पर घुमने गया, तो देखा कि आंटी और उनकी बेटी भी अपनी छत पर घूम रहे थे. मुझे देखकर उनकी लड़की बोली – मम्मी, कल भैया आये थे. लेकिन आपसे बिना मिले ही चले गये. ये कहकर वो वहां से नीचे चली गयी. तब मैं अपनी छत पर था और आंटी अपनी. २ मिनट बाद, आंटी ने कहा – कि कल वाली बात तुमने किसी को बताई तो नहीं? मैने कहा – नहीं. ये कोई बताने वाली बात थोड़ी है. ये बात आप के और मेरे ही बीच में रहेगी हमेशा. तक जाकर उन्हें सांस में सांस आई. उन्होंने फिर मुझे अपनी छत पर आने को कहा. मैं तो चाहता ही यही था. फिर उन्होंने बोला, बेटा मैंने उन्हें तुरंत रोक दिया और कहा – प्लीज आप मुझे बेटा नहीं कहिये. तो उन्होंने पूछा – क्यों? मैंने कहा – पता नहीं. बस प्लीज बेटा नहीं. वो थोड़ी देर के लिए सोच कर बोली – चलो फिर हम दोस्त बन जाते है. ये सही है, मैंने खुश होते हुए बोला. हमने हैण्ड शेक किया और हमारी दोस्ती शुरू हो गयी. अब मैं किसी भी समय उनके घर चले जाता और उनके साथ हंसी – मजाक भी कर लेता था. वो भी मुझसे काफी फ्रेंक हो गयी थी.

मैं किसी ना किसी बहाने से उनका हाथ पकड़ लेता था या कभी उनके गालो को पकड़ता. ऐसे ही महिना गुजर गया और हमारी दोस्ती काफी रंग लायी. सैटरडे, मेरी ऑफिस से छुट्टी होती थी. तो एक रात मैंने मम्मी को बोला, आज मैं यहाँ छत पर ही सोऊंगा और मैं बिस्तर लेकर छत पर आ गया. मैंने छत का दरवाजा बंद कर दिया. आंटी भी आ गयी थी और हम बातें करने लगे. मैंने सोच लिया था, कि आज मैं अपने दिल की बात बोलकर ही रहूँगा. मैं उनके पास बैठ गया और उनसे पूछा – एक बात पुछु? उन्होंने कहा – हाँ. मैंने कहा – मुझे आपकी सुहागरात की कहानी सुन्नी है. इसपर वो थोड़ी हंसी और बोली – अब क्या फायदा. अब तो मैं बुड्डी हो गयी हु. मैंने कहा – बोलो ना, यार. दोस्त कहती हो और बात भी नहीं मानती. तो उन्होंने कहानी बंतानी शुरू की और वो चूत को कह रही थी मेरा मैं पॉइंट और लंड को उनका मैं पॉइंट. फिर भी मुझे सुनने में मज़ा आ रहा था. रात का १ बज चूका था और हमारी बातें ही ख़तम नहीं हो रही थी. फिर उन्होंने कहा, कि मैं सोने जा रही हु.


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