आखिर सुप्रिया को मना कर चोद ही दिया

loading...

दोस्तो, एक बार फिर आप सबके सामने आपका प्यारा शरद एक नई कहानी के साथ हाजिर है।

आप तैयार हैं न.. इस नई कहानी को पढ़ने के लिए..

मैंने एक पार्ट टाइम जॉब पकड़ लिया जिसकी टाईमिंग शाम को 4 बजे से 8 बजे तक की है, उसमें मैं एक कम्प्यूटर ऑपरेटर का काम करता हूँ। वहाँ पर जो मेरी मैनेजर है.. उसका नाम सुप्रिया है, मेरा और उसका केबिन एक ही है.. बस बगल-बगल में ही हम दोनों की टेबिल लगी हैं.. और दोनों टेबल के बीच की दूरी एक फिट से ज्यादा नहीं होगी।

loading...

इसका मतलब मैं उसके एक-एक अंग को बड़े ही करीब से देख सकता था। एक बार मैं अपने कम्प्यूटर पर कुछ काम कर रहा था.. तभी उसने एक पेन उठाया और धीरे से नीचे ले जाकर अपनी बुर को खुजलाने लगी।

चूँकि मैं नया था, तो चुपचाप उसकी हरकत को देखकर चुप रहा।
सुप्रिया एक साधारण नाक-नक्श वाली लड़की है। उसके लम्बे बाल उसकी खूबसूरती में चार चाँद लगा देते हैं।

उसकी फिगर का नाप शायद 30-28-32 का होगा.. क्योंकि उसकी गाण्ड पीछे से कुछ ज्यादा ही उभार लिए हुए थी। उसकी गाण्ड कुछ अंडाकार किस्म की उठी हुई थी.. जिसके कारण उसमें कुछ ज्यादा ही सेक्स अपील थी।
मुझे नहीं लगता कि कोई मर्द उसको देखे.. खासकर उसके पीछे के हिस्से को देखे.. और उसका लण्ड उसके गाण्ड को सलामी न दे।

जब वो जींस और टॉप पहन कर आती थी.. तो और कयामत लगती थी.. क्योंकि तब उसके एक-एक अंग का आकार समझ में आता था। उसकी कमर के नीचे का हिस्सा यानि उसकी चूत भी उठी हुई दिखती थी.. क्योंकि पेट अन्दर की ओर घुसा हुआ था।
कुल मिलाकर उसकी जींस से ही उसके चूत के आकार का पता चल जाता था।

loading...

हाँ.. उसके अंदाज में एक खास बात यह थी कि वो बातों को बड़े ही हल्के ढंग से लेती थी.. शायद उसे ये पता था कि जिस जगह भी वो जॉब करेगी.. उस जगह पर मर्दों की संख्या ज्यादा होगी.. इसलिए वो द्विअर्थी बातों का जबाव भी वो द्विअर्थी संवाद से देती थी।

लेकिन इस सब के बावजूद भी.. क्या मजाल कि कोई उसके जिस्म को टच कर पाए। उसका कहना था कि लड़कियाँ जब तक न चाहें.. तब तक कोई उसको स्पर्श भी नहीं कर सकता है।
हमारे ऑफिस में कई जनाब ऐसे भी हैं.. जो उससे द्विअर्थी बातें करते थे और वो उसका जबाव भी उसी अंदाज में दे दिया करती थी.. पर किसी की हिम्मत उससे आगे बढ़ने की नहीं होती थी।

धीरे-धीरे मैं भी उससे खुलने लगा.. मेरे घर और उसके घर का रास्ता एक ही था.. मैंने बहुत कोशिश की.. लेकिन वो कभी मेरे साथ नहीं आई.. फिर भी मैंने कोशिश नहीं छोड़ी।

एक दिन वो स्लेक्स और टॉप पहन कर आई थी.. जिसका गला काफी खुला हुआ था। उसके टॉप में से उसकी चूचियों के दीदार बड़े आराम से हो रहे थे।
मैंने मुस्कुराते हुए बोला- आज आप बड़ी क्यूट और सेक्सी लग रही हैं..

उसने भी मुस्कुराते हुए ‘थैंक्स’ कहा.. लेकिन आज मेरा मन उसको छेड़ने का हो रहा था.. सो मैं उसकी तरफ देख कर अपने लौड़े को खुजाने लगा।

उसकी नजर मेरी हरकत पर पड़ी.. तो बोल उठी- पब्लिकली मत खुजलाओ.. टॉयलेट चले जाओ.. वहाँ खुजला कर आओ।
मैंने तुरन्त ही कहा- यह क्या बात हुई.. तुम खुजलाती हो.. तो मैंने तो कुछ नहीं बोला और मेरे खुजाने में आबजेक्शन?
‘ओहो.. तो तुम्हारी नजर मेरे पर ज्यादा और काम पर कम रहती है?’
‘तुम हो ही इतनी खूबसूरत कि किसी की मजाल कि उसका काम में मन लग पाए!’

हमारी बातें यहीं खत्म हो गईं.. मैं अपने काम में और वो अपने काम में व्यस्त हो गए।
इस तरह से तीन महीने बीत गए।

एक दिन अचानक सुप्रिया चीखते हुए मेरे ऊपर गिर पड़ी। मैंने उसे सम्भालने के लिए उसे जकड़ लिया और मेरा एक हाथ उसकी पीठ पर.. दूसरा उसके नितम्ब को सहला रहा था।
यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !

अचानक से जैसे सुप्रिया को याद आया और वो झटके से हटी और मुझे घूरते हुए बोली- क्यों मिस्टर.. ये क्या हो रहा था?
मैंने उसकी बात को नजरअंदाज करते हुए बोला- वो जाने दो.. तुम चीखी क्यों?
उसने दीवार की ओर इशारा करते हुए कहा- छिपकली है वहाँ.. और वो मुझ पर गिरने वाली थी।

मैंने हँसते हुए कहा- इसका मतलब मुझे उस छिपकली का अहसान मानना चाहिए.. जिसकी वजह से हुस्न की मलिका मेरे ऊपर गिर पड़ी।
‘ही ही ही.. सो फन्नी..’ अपने दाँत दिखाते हुए वो बोली।

मेरे नीचे वाले साहब ने अपना काम बाथरूम में जाकर लगा लिया। मैं जैसे ही बाहर आया.. वो समझ चुकी थी कि मैं मुठ्ठ मार कर आ रहा हूँ।

‘पता नहीं तुम लड़कों को क्या मिलता है.. जो हर समय एक ही सोच रखते हो।’

लेकिन उस दिन के बाद से हमारी नजदीकियाँ बढ़ती गईं। अब वो मुझसे अपनी बातें शेयर करने लगी। एक दिन वो पेशाब करने गई.. लेकिन 2 मिनट में ही वापस आ गई।

थोड़ी देर बाद वो मुझसे वाशरूम से छिपकली को हटाने के लिए बोली।
मैंने कहा- चलिए.. देखते हैं।

मैं उसके साथ वाशरूम में गया और छिपकली को हटा दिया लेकिन अब ये मसला लगभग हर दूसरे या तीसरे दिन का हो गया।
आखिर एक दिन जब वो मुझसे वो छिपकली हटाने के लिए बोली.. तो मैंने ‘मेहनताने’ की फरमाईश रख दी।


जिसकी कहानी पढ़ी उसका नंबर यह से डाउनलोड करलो Install [Download]

और कहानिया

loading...