ऑफिस फ्रेंड छाया की चुदाई

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हाय दोस्तों ! मेरा नाम कुमार है, और फिर से आप लोगो के सामने लेकर आया हु अपनी दूसरी चुदाई स्टोरी जो की मेरी और मेरे ऑफिस की एक फ्रेंड के साथ है, जिसका नाम छाया ( बदला हुआ नाम) है. छाया दिखने में इतनी कुछ ख़ास तो नहीं है लेकिन एक नंबर की माल है, उसका फिगर तो क्या गजब का है, एक दम भरा हुआ बदन, बड़े बड़े बूब्स, पतली कमर, उभरी हुई मोटी गांड. देख के ही चुदाई का मन कर जाए किसी का भी!

जब जीन्स और टॉप पहन के आती है तो पूरा फिगर दीखता है, टाइट जीन्स और टाइट टॉप अगर पहनी हुई हो तो सच में दोस्तों मन करता है जा कर  उसके बड़े बड़े बूब्स को दबा दू  उससे लिक्क करूँ और चुदाई शुरू कर दू.

ये थी बात छाया के बारे में, अब आप सब को सुनाता हु की कैसे मैंने उसे पहली बार चोदा.

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में कुछ सालो से छाया का एक अच्छा दोस्त था लेकिन कभी उसे चोदने का ख्याल मेरे दिमाग में नहीं आया था और वो भी मुझे एक अच्छा दोस्त मानती थी. उसका कोई बॉयफ्रेंड नहीं था और मेरी भी कोई गर्लफ्रेंड नहीं थी.

हुआ यु की, एक दिन वो ऑफिस में एक दम टाइट जीन्स और टाइट टॉप पहन के आई, जिससे उसके बड़े बड़े बूब्स और उभरे हुए दिख रहे थे,  मोटी गांड और और चूत का शेप साफ़ दिख रहा था. यह सब देख कर में तो जैसे पागल हो गया था. और उसे देखता ही रह गया, मेरे अंदर कुछ होने लगा और मेरा ७ इंच का लंड भी खड़ा हो गया.

उसका फिगर में में जब खोया हुआ था तो उसने मुझे देख लिया और आकर पूछने लगी की इतना घुर घुर कर क्यों देख रहे हो, मैंने कहा- छाया आज तुम क़यामत लग रही हो.

ये कह कर उसने थैंक यू कहा और छोटी सी स्माइल देकर चली गयी.

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फिर मेरे दिमाग में उसे चोदने का ख्याल आने लगा, पूरा दिन उसकी बूब्स, गांड और चूत का शेप मेरे सामने आ रहा था, में तो कण्ट्रोल नहीं कर पा रहा था खुद को. और मेरे लंड को ऐसा लग रहा था की एक चूत की जरुरत है उसे चोदने के लिए, और वो चूत थी छाया की.

उस दिन मैंने पुछा की इस वीकेंड क्या कर रही हो, तो उसने कुछ ख़ास नहीं कहा. फिर मैंने उससे कहा की चलो फिर कोई मूवी चलते हैं, उसने हाँ बोला.

मैंने मूवी की २ टिकट्स निकाली हंटर की, एक दम कार्नर की सीट बुक कर ली, वीकेंड आया और मैंने उसका थिएटर के पास वेट किया , वो आई और उसे देखते ही मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया. मैंने सोचा आज तो इसे चोद कर ही रहूँगा.

हम लोग अंदर गए, मूवी शुरू हो गयी, मूवी में एक हॉट सीन आया, जिसे देख कर में गरम हो गया और मेरा हाथ उसकी जांघो पर चला गया और मैंने उसकी जांघो को सहलाने लगा. उसने कुछ नहीं बोला, क्यूंकि उससे भी मज़ा आने लगा था, वो हॉट सेन देख कर वो भी गरम हो गयी थी.

उसके जांघो को सहलाते सहलाते अपना हाथ उसकी चूत के पास ले गया, उसने अपनी आँखे बंद कर ली, मैं अपना हाथ धीरे धीरे उसकी चूत में ले गया, और उसकी चूत सहलाने लगा.उसने जीन्स पहनी हुयी थी, उसकी जीन्स की बटन और ज़िप खोल के मैंने अपना हाथ अंदर दाल के उसकी चूत में ऊँगली करने लगा, और वो मों करने लगी, उससे अब कण्ट्रोल नहीं हो रहा था और न ही मुझ से कण्ट्रोल हो रहा था.

उसने मेरे कानो में धीरे से कहा “ कुमार, चलो न तुम्हारे घर चलते है”.


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