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गीता भाभी की चुदाई

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मैं मुंबई के एक उपनगर डोम्बीवली का रहने वाला हूँ, मेरी उम्र २३ साल है। मेरा कद 5’6″, रंग सांवला और बदन कसरत की वजह से अच्छा कसा हुआ है, मेरा लण्ड 8 इंच लम्बा और 3 इंच मोटा है।

यह मेरी पहली और सच्ची कहानी है।

जब मैं बीस साल का था और बी कॉम के आखिरी साल की पढ़ाई कर रहा था।

यह कहानी एक गुजराती भाभी की है जो मेरी ही बिल्डिंग में हमारे नीचे वाली मंजिल पर रहती थी। उसका नाम लीना है वो अपने परिवार के साथ दो साल पहले ही आई थी। उसके परिवार में वो, उसके पति और दो साल का बेटा थे। उसके पति कपड़े के व्यापारी थे। भाभी दिखने में एकदम क़यामत थी उनकी उम्र तब 27 -28 साल की होगी। वो बदनसे एकदम भरी हुई थी, उनकी फीगर 38-28-38 की होगी और जब वो चलती थी तब उनके दोनों कूल्हे ऐसे हिलते थे कि देखकर तो कोई भी अपने होश खो बैठे।

उनके परिवार और मेरे परिवार में अच्छा मेलजोल था और हमारे परिवार एक साथ कई बार खाना खाने और पिकनिक पर जा चुके थे।

मैं तो मन ही मन उन्हें चोदने के सपने देखता रहता था पर मुझे कोई मौका नहीं मिल पा रहा था। पर एक दिन भगवान ने मेरी सुन ली और भाभी के पति को बिज़नस के सिलसिले में आठ दिन के लिए गुजरात जाना पड़ा।

जाने से पहले दिन भाभी के पति ने मेरे पिताजी को पूछा- अगर आपको कोई दिक्कत न हो तो वैभव को मेरे घर सोने के लिए भेज दें !

अच्छे सम्बन्ध होने के कारण पिताजी ने भी हाँ कर दी। जब मुझे यह बात पता चली तो मैं मन ही मन भाभी को चोदने के सपने देखने लगा।

पहले दिन जब मैं भाभी के घर सोने गया तब भाभी खाना खा रही थी और उनका बेटा सो चुका था। भाभी ने गुलाबी रंग का नाइट गाऊन पहन रखा था, क्या मस्त दिख रही थी वो ! गाऊन में उनके चूतड़ और चूचे इतने अच्छे दिख रहे थे कि देखते ही मेरे लौड़े ने सलामी दे दी।

पर मैं चुपचाप जाकर भाभी के सामने वाली कुर्सी पर बैठ गया।

भाभी ने पूछा- क्यों वैभव? खाना खा लिया?

तो मैंने कहा- जी खा लिया !

फ़िर इधर उधर की बातें करके हम सो गए। भाभी अपने बेडरूम में और मैं हाल में सो गया। उस रात मैंने भाभी को सोचकर मुठ मार ली और कुछ नहीं कर सका।

दूसरी रात भी कुछ नहीं हुआ पर मैंने तो मन में ठान ली थी कि मैं भाभी को चोद कर रहूँगा।

जब तीसरे दिन मैं भाभी के घर सोने गया तब मैंने पहले से ही एक ब्लू फिल्म की डीवीडी अपने एक दोस्त से ले ली थी। जब मैं उनके घर गया तब भाभी खाना खा चुकी थी और अपने बालों में नारीयल का तेल लगा रही थी।

मुझे देखा तो बोली- आओ वैभव, खाना हो गया?

तो मैंने कहा- जी भाभी !

फ़िर भाभी ने कहा- आओ मैं तुम्हारे बालों में भी थोड़ा तेल लगाकर मसाज़ कर देती हूँ।

तो मैंने भी हाँ कर दी, इसी बहाने से भाभी को छूने का मौका मिल गया।

भाभी मेरे बालों में तेल लगा रही थी तो मैंने भी उन्हें तीन चार बार छू लिया। इस वजह से मेरे छोटे नवाब खड़े हो गए और बरमूडा पहने होने की वजह से उसका उभार दिखने लगा था।

एक दो बार भाभी की नजर भी उस पर पड़ गई। फ़िर भाभी ने कहा- अब चाहो तो तुम सो जाओ !

मैंने कहा- नहीं भाभी, कल रविवार है तो मैं थोड़ी देर टीवी देखूँगा। फ़िर सो जाऊँगा। आप सो जाओ।

भाभी बेडरूम में सोने चली गई और मैंने टीवी चला लिया। आधे घंटे के बाद जब मैंने देखा कि भाभी गहरी नींद में सो रही हैं मैंने ब्लू फिल्म की डीवीडी प्लयेर में डालकर चालू कर दी। उसमें अच्छा दृश्य चल रहा था और मैं भी अपना लण्ड निकाल कर हिला रहा था।

अचानक मुझे कुछ हलचल महसूस हुई तो मैंने पीछे मुड़कर देखा कि भाभी खड़ी हैं और वो भी ब्लू फिल्म देख रही हैं।

तो मैं डर गया और टीवी बन्द कर दिया और भाभी के सामने गर्दन झुकाए खड़ा हो गया।

भाभी ने पूछा- वैभव, यह क्या देख रहे थे?

तो मैंने कहा- कुछ नहीं भाभी, मेरे एक दोस्त ने एक पिक्चर की डीवीडी मुझे दी थी, मुझे नहीं मालूम था कि इसमें यह सब है।

इस पर भाभी सिर्फ मुस्कुराई और कहा- झूठ मत बोलो वैभव ! जब मैं तुम्हारे बालों में तेल लगा रही थी तो मैंने भी देखा था तुम्हारे बरमूडा का तम्बू हो गया है।

और फ़िर पूछा- यह सब सिर्फ देखते ही हो या कुछ किया भी है?

तो मैंने झूठ ही कहा- नहीं भाभी, मैंने कभी ऐसा नहीं किया।

असल में मैं तो कई बार चोद चुका था।

भाभी ने कहा- चलो मेरे साथ मेरे कमरे में ! मैं तुझे आज सब सिखाती हूँ।

फ़िर क्या था ! मुझे तो इसी का इंतजार था ! मेरी तमन्ना आज पूरी होने वाली थी। मैं भाभी के पीछे उनके बेडरूम में चला गया।

जैसे ही भाभी बेड पर लेटी, मैं उन पर चढ़ गया और उनके होंटों को चूसना चालू कर दिया।

भाभी की सांसें तेज़ हो रही थी और मैं एक हाथ से उनके चूचों को मसल रहा था। उन्होंने तो ब्रा भी नहीं पहनी थी।

भाभी ने कहा- वैभव, मेरे संतरों की जरा तेल से मालिश कर दो !

तो मैंने ड्रेससिंग टेबल से तेल की शीशी ली और उनके बड़े बड़े दो संतरे गाऊन से आज़ाद कर दिए।

क्या क़यामत के गोरे और बड़े थे उनके चूचे ! और चुचूक तो एकदम गुलाबी और मोटे हो गए थे।

मैंने थोड़ा तेल उन पर डाला और जोर जोर से मसलने लगा। भाभी भी अब गर्म हो गई थी और मेरे लण्ड को अपने हाथ से सहला रही थी।

फ़िर भाभी ने कहा- चूस लो मेरे इन आमों को !

और मैं भी एक बच्चे की तरह उनके चुचूक चूसने लगा। मैं एक हाथ से उनका दूसरा चुचूक निचोड़ रहा था और दूसरे हाथ से उनकी पैंटी मैंने उतार दी और उनकी चूत में ऊँगली करने लगा।

(TBC)…

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