जीजाजी का लौड़ा हाथ में लेते ही चूत मे खुजली होने लगी

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मेरा नाम डोली हैं और मैं पंजाब के लुधियाना से हूँ, मेरी उम्र 19 साल की हैं और यह सच्ची घटना 9 महीने पहले की हैं. मेरे घर में मेरे अलावा दो बहने हैं छोटी का नाम कुलदीप हैं और उसकी उम्र 16 साल हैं.

मेरे से बड़ी दीदी गुरनाम की शादी हो चुकी हैं और वो 23 की हैं. मेरे जीजा बल्लू ब्रार चंडीगढ़ में रहते हैं और उनका आईफोन का बिजनेस हैं.

उस रात को मैं कैसे भूला दूँ जब जीजा बल्लू ने मेरे कुंवारेपन की झिल्ली फाड़ी और अपना मजबूत लौड़ा मेरी चूत में गाड़ दिया.
कभी कभी मैं नींद से जाग जाती हूँ क्यूंकि मुझे आज भी वो लौड़ा याद आता हैं; लेकिन मज़बूरी हैं और वो लौड़ा अब मुझे कभी नहीं मिलेंगा.

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आइये आप को अब उस रात और उसके पहले और बाद की घटना बताऊँ.
मेरी दीदी गुरनाम का एक दिन फोन आया. उसकी आवाज हलकी सी ढीली और जैसे की वो बीमार हो ऐसी लग रही थी.

मैंने उसे पूछा की क्या हुआ तो वो बोली की वो बहुत बीमार हैं, उसे चिकुनगुनिया हुआ था और वो चल नहीं सकती थी. मुझ से यह सुन के रहा नहीं गया.

मैं: अरे दीदी, अगर आप कहो तो मैं आ जाऊं. मेरे कोलेज में 10 दिन की छुट्टी वैसे भी हैं.
गुरनाम: अगर तू आ सकती हैं तो आजा. पर तेरे जीजा का काम अभी बहुत लगा पड़ा हैं इसलिए वो लेने नहीं आ सकेंगे.
मैं: कोई बात नहीं दी, मैं डेड के साथ आ जाउंगी.
गुरनाम: ठीक हैं, कल ही आ जा.
दुसरे दिन सुबह सवेरे मुझे डेड ट्रेन में बिठा के आ गए. मेरी उम्र के हिसाब से मेरा कद और काठी काफी बड़ा हैं और मैं किसी मॉडल से कम सुंदर नहीं हूँ.

बस के अंदर एक एक लौड़ा मुझे देख रहा था. पर मेरे मन में इस से गुस्सा नहीं बल्कि घमंड आ रहा था. मेरे मन में तो अपने पति को ले के बहुत बड़े बड़े सपने थे. मुझे ऐसा पति चाहिए थे जो शाहरुख़ जितना सेक्सी और सलमान जितना चौड़ा हो. चंडीगढ़ आते आते शाम हो गई. दीदी के घर में ऑटो ले के चली गई.

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मैंने देखा की दीदी के दोनों हाथ मुड गए थे और उसे बहुत तकलीफ हो रही थी. मैंने उसे दवाई वगेरह के लिए पूछा तो उसने बताया की दवाई चालू ही हैं.
मैं: जीजा कहा हैं.
दीदी: अरे अभी आईफोन का 5 नंबर लॉन्च हुआ है उसमे लगे पड़े हैं. उन्होंने तो मुझे बताया की काम पर नहीं जाता हूँ, पर मैंने उन्हें जबरदस्ती से भेज दिया हैं. एकदिन में अभी 20 हजार कमाने का मौका हैं; वो थोड़ी बार बार आता हैं.
मैं: ठीक हैं दी अब तू घबरा मत, मैं यही हूँ कुछ दिन. तेरा और मेरे जीजा का पूरा ख्याल रखूंगी.
दीदी: अच्छा हैं तू आ गई, कल तो मुझे होटल से खाना मंगवाना पड़ा.
मैं: चल मैं आज तेरी पसंद के राजमा चावल बनाती हूँ.
मैं फ्रेश हो के किचन में गई और राजमा बनाने लगी. गुरनाम को राजमा पहले से बहुत पसंद हैं. रात के 8 बजे तक मैं खाना बना चुकी थी. खाना बन ने के बाद मैंने कहा की जीजा की राह देखेंगे, लेकिन गुरनाम ने कहा की उनका अभी कोई ठिकाना नहीं हैं. इसलिए मैंने और उसने खाना खा लिया.

गुरनाम को दवाई दे के मैंने सुला दिया और ड्राइंग रूम में जा के मैं डिस्कवरी देखने लगी. टीवी देखते देखते 10 कब बजे पता ही नहीं चला. इतने में घर का मुख्य दरवाजा खुला और जीजा अंदर आये.

उसने मुझे देखा नहीं और वो फोन पे किसी से लड़ रहे थे.
जीजा: लौड़ा मेरा, साले तुम लोग पार्सल के रेट मन चाहें तरीके से बढ़ा देते हो. अगर ऐसा ही चला तो मुझे नहीं मंगवाना कुछ भी अब.
उन्होंने मुझे देख के तुरंत फोन कट किया और बोले: अरे डोली कब आई तू. मुझे बताया भी नहीं, मैं गाडी ले के आ जाता.
मैं: नहीं जीजा जी आप बीजी हैं दी ने बताया मुझे.
जीजा: अरे साली के लिए क्या बीजी क्या फ्री.
मैंने देखा की जीजा जी को चलने में तकलीफ हो रही थी. उसके पाँव इधर उधर होने लगे थे. वो शायद शराब पी के आया था. और यह बात की पुष्टि तब हुई जब वो मेरे पास आके सोफे पे बैठा. उसके मुहं से शराब की स्मेल आ रही थी. उस से सही बैठे भी नहीं जा रहा था. मैंने उसे खाने के लिए पूछा: जीजा जी खाना लगाऊं.
जीजा: नहीं मैं बहार खा के आया हूँ, तेरी दीदी जाग रही हैं.
मैं: नहीं दीदी को सोये तो काफी समय हो गया हैं.
जीजा: ओके…!!
उसने अपनी टाँगे सोफे पे लम्बाई और वो आँखे बंध कर के लेट गया. उसने अपने जूते, कपडे ऐसे ही पहने हुए थे और वो सो गया. मैंने उसे कहा यह सब उतारने के लिए लेकिन वो कुछ बोला ही नहीं. वो शायद नशे में सो चूका था. .

मैंने सोचा चलो मैं ही जीजा के जूते उतार देती हूँ. मैंने जीजा के पाँव अपनी गोद में लिए और उसके शूज़ की डोरी खोल के उन्हें उतार फेंके. मैंने देखा की जीजे की पेंट के उपर की बेल्ट बहुत टाईट बंधी हुई थी. मैंने सोचा की लाओ उसे भी खोल दूँ.

मैं उसके बेल्ट को खोल रही थी तभी मेरी नजर उसके निचे पड़ी जहाँ एक बड़ा पर्वत जैसा आकार बना हुआ था. क्या जीजा का लौड़ा इतना बड़ा था…..!!!! पता नहीं क्यूँ पर मेरे मन में गुदगुदी होने लगी.

मेरा मन कूद रहा था अंदर से ही. मैंने इस से पहले लौड़ा सिर्फ चुपके से देखि हुई मूवीज में ही देखा था. लेकिन जीजा का लौड़ा तो पेंट के उपर इतना बड़ा आकार बना के बैठा था की देख के ही मुझे ख़ुशी मिल रही थी.
मैंने बेल्ट को खोलने के साथ साथ उसके लौड़े के उपर हलके से अपने हाथ का पीछे वाला हिस्सा लगा दिया.

जीजाजी का लौड़ा बहुत टाईट लग रहा था; तभी तो मुझे हाथ के उपर खडक जैसा अहेसास हुआ. उसके लौड़े को छूने के बावजूद जीजा हिला नहीं और इस से मेरी हिम्मत बढ़ गई.
मैंने अब अपना हाथ पूरा रख के लौड़े को अहेसास लिया. लौड़ा काफी गरम था और मुझे उसको हाथ लगाते ही चूत के अंदर खुजली होने लगी. मैं तब तक तो वर्जिन ही थी; और मैंने केवल ऊँगली डाल के हस्तमैथुन किया था बस. सच में बार भारी लौड़ा था.
मेरे मन में लौड़ा देखने के भयानक विचार आने लगे. मैंने सोचा की जीजा तो वैसे भी नशे में हैं तो उसके पेंट खोली तो उसे थोड़ी पता चलेगा. मैंने हलके से उसकी ज़िप खोली और देखा की लौड़ा अंदर अंडरवेर में छिपा बैठा था. मैंने बटन खोल के जीजा की पेंट उतार दी. पता नहीं मुझे क्या हुआ था, मुझे अच्छे बुरे की कोई समझ नहीं रही थी.
मैं अपने हाथ को लौड़े के उपर रख के उसे दबाने लगी. फिर मैंने धीरे से अंडरवेर को खिंचा और बालो के गुच्छे के बिच में बिराजमान महाराजा को देखा. अच्छा तो यह हीन लौड़ा. मैंने पहली बार लाईव लौड़ा देखा था, बिलकुल मेरी आँखों के सामने जो आधे से भी ज्यादा ताना हुआ था.
मेरे हाथ रुके नहीं और मेरे दिल में आया की उसे छू लूँ एक बार. जैसे ही मैंने लौड़ा हाथ में लिया जीजा की आँख खुल गई. और वो बोला.
जीजा: डोली, क्या कर रही हैं.
मैं: कुछ नहीं जीजा जी, आप के कपडे खोल रही थी. आप नींद में थे और आप ने जूते वगेरह कुछ नहीं उतारा था.
जीजा: मुझे पता हैं तू क्या कर रही थी. मैं सोया था लेकिन तूने हाथ लगा के सहलाया तब मेरी नींद उड़ गई थी और फिर में सिर्फ आँखे बंध कर के लेटा हुआ था.
मैं डर गई की कहीं जीजा दी को ना बता दे. लेकिन उसके बाद जीजा जो बोला वो बहुत ही अलग और आश्चर्यजनक था.
जीजा: इतना ही लौड़ा लेने का सौख हैं तो कपडे उतार दे देता हूँ.
मैं क्या बोलती, मुझे लौड़ा सिर्फ देखना था लेकिन अब जीजा थोड़ी मानने वाला था. मुझे कभी ना कभी तो नथ उतरवानी थी फिर आज क्यों नहीं. मैं कुछ नहीं बोली, लेकिन जीजा के हाथ अब मेरे स्तन के उपर थे और वो उन्हें जोर से दबा रहा था.
मैंने आँखे बंध कर दी. जीजा सोफे से खड़ा हुआ और शर्ट उतारने लगा. वो बिलकुल नंगा हो गया और उसने मुझे कंधे से पकड़ के मेरी नाईटी उतारने के लिए हाथ उपर करवा दिए. मैं दूसरी मिनिट में उसके सामने नंगी हो गई. जीजा मेरे चुंचो को अपने मुहं में ले के चूसने लगा. उसके गरम गरम होंठ का अहेसास किलिंग था. मुझे अजब सी खुमारी छा रही थी.

मैंने देखा की जीजा के हाथ अब कमर के उपर होते हुए मेरी गांड तक पहुंचे और उसने मुझे अपनी तरफ खिंचा. जीजा का लौड़ा मेरी चूत वाले हिस्से के बिलकुल समीप आ गया और मुझे जैसे की 1000 वाल्ट का करंट लगा हो.


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One Comment
  1. kuldeep
    September 4, 2016 |