पड़ोसन की खूबसूरत चूत

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हैल्लो दोस्तों मेरा नाम विकास है और में दिल्ली का रहने वाला हूँ. मेरी उम्र 25 है, दोस्तों मुझे शुरू से ही सेक्स करना और सेक्सी कहानियाँ पढ़ना बहुत अच्छा लगता था और में बहुत सालों से इस पर सेक्सी कहानियाँ पढ़ता आ रहा हूँ और मुझे ऐसा करना बहुत अच्छा लगता है. दोस्तों यह बात आज से तीन साल पहले की है.

मेरे घर के सामने वाले घर में एक औरत कुछ समय पहले किराए पर रहने आई, वो शादीशुदा थी और उसकी एक बेटी थी और उसका पति कहीं बाहर रहकर अपनी नौकरी किया करता था. दोस्तों में जब भी अपनी बालकनी में खड़ा होता वो हमेशा मुझे देखती रहती थी. हमारा घर रोड पर है तो वहाँ पर एक दिन बहुत देर से ट्रॅफिक जाम हो रहा था और वो शाम का टाईम था तो मैंने देखा कि भी अपनी छत पर खड़ी हुई थी और मुझे पता नहीं अचानक से क्या हुआ?

मैंने उसे बिना कुछ सोचे समझे छेड़ दिया और फिर उसे पता नहीं क्या हुआ उसने मुझसे बोला कि आपको क्या कुछ समस्या है? तो मैंने कहा नहीं मुझे तो कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन शायद आपको है? अब मैंने उसे यह सब बोल तो दिया, लेकिन में कुछ देर बाद बहुत डरने लगा और वैसे उस वक़्त मेरे घर पर कोई नहीं था. मेरी गांड फटी कि अब पता नहीं क्या होगा? और में सीधा उसी टाईम घर से बाहर चला गया और अब मेरी गांड बहुत फटने लगी कि ना जाने अब क्या होगा? फिर में रात को दस बजे तक अपने घर पर नहीं गया मैंने सोचा कि अगर कुछ पंगा होगा तो मेरे मोबाईल पर किसी का भी फोन आ जाएगा, लेकिन मेरे बहुत इंतजार करने के बाद भी ऐसा कुछ भी नहीं हुआ.

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फिर उसके थोड़े दिनों बाद दिवाली से चार पांच दिन पहले मेरे घर के लेंडलाईन पर फोन आया किसी लड़के का वो कहने लगा कि क्या घर पर विकास है, में उसका दोस्त अजय बोल रहा हूँ? तो मेरे भाई ने फोन उठाया और उसने उससे बोला कि आप उसका मोबाईल नंबर ले लो वो इस समय घर पर कम ही मिलता है. फिर जब में अपने घर पर आया तो मेरे भाई ने मुझे बताया कि तेरे किसी दोस्त का फोन आया था और उसका नाम अजय है.

मैंने कहा कि यार मेरा तो कोई भी दोस्त अजय नाम का नहीं है और फिर मैंने उससे कहा कि चल ठीक है वो जो भी होगा अपने आप मेरे नंबर पर फोन कर लेगा. फिर उसके थोड़े ही दिनों के बाद में दिवाली वाली रात को पूजा में बैठा हुआ था कि मेरे पास एक मैसेज आया कि मेरी तरफ से तुम्हारी पूरी फेमिली को और तुम्हे वेरी वेरी हैप्पी दिवाली और अब मैंने बहुत सोचा कि यह बिना जाना पहचाना नंबर किसका हो सकता है जो मुझे दिवाली की बधाईयाँ दे रहा है? और फिर हमारी मैसेज पर दो तीन दिन तक लगातार बात चलती रही और उसके बाद उसने मुझे बताया कि वो मेरी सामने वाली पड़ोसन है. दोस्तों यह बात सुनकर में बहुत खुश हुआ जैसे कि मेरी तो लाटरी ही लग गयी और फिर हमारी बात चीत फोन पर होने लगी और कई कई बार तो देर रात तक हमारी बात होती थी. एक बार हम बाहर भी मिले वो मेरे लिए चोकलेट लेकर आई और फिर एक बार हम फिल्म गये. वो फिल्म तो क्या देखनी थी, वो तो एक बहाना था.

दोस्तो बस मुझे तो उसके साथ मज़े लेने थे. मैंने ना फिल्म देखी और ना उसको देखने दिया, मैंने बस उसके साथ बहुत मज़े लिए. उसके बाद हमारी ऐसे ही हर दिन फोन पर बात चलती रही क्योंकि ना तो में उसे अपने घर बुला सकता था और ना ही वो मुझे अपने घर बुला सकती थी, क्योंकि उसकी बेटी हमेशा घर पर होती थी और साथ में मकान मालिक भी. में बस ऐसे ही उससे फोन पर बात करके अपना समय गुज़ारने लगा और अब हम दोनों फोन पर बहुत देर तक बातें करने लगे थे जिसकी वजह से वो मुझे बहुत अच्छी लगने लगी और मुझे उसे पाने की और भी इच्छा करने लगी.

फिर एक दिन भगवान ने मेरे मन की बात सुन ली. उसे किसी काम से दिल्ली से बाहर जयपुर जाना था क्योंकि उसकी बेटी पिछले कुछ दिनों से उसकी नानी के घर पर जयपुर थी तो उसे भी वहाँ पर जाना था और फिर मेरे दिमाग में एक बहुत अच्छा आइडिया आया. मैंने सोचा कि क्यों ना उसके जयपुर जाने से पहले इसे चोदा जाए. फिर जिस दिन उसे जाना था हमने सुबह अपना एक प्रोग्राम बनाया और वो मुझे सुबह दस बजे मिल गयी. में ईस्ट दिल्ली में रहता हूँ जहाँ पर जगह की थोड़ी समस्या थी, लेकिन मुझे एक जगह पता थी जहाँ पर रूम बहुत आसानी लिया जा सकता था. फिर हम वहाँ से फरीदाबाद को निकल गये और वहाँ पर जब में पहुंचा तो उसने मुझसे पूछा कि हम कहाँ पर जा रहे हैं? तो मैंने बोला कि यहाँ पर जगह मिलती है हम यहाँ पर अकेले कुछ देर थोड़ा आराम से बैठेंगे और कॉफी पियेंगे फिर चले जाएँगे, लेकिन दोस्तों मेरे दिमाग़ में तो आज उसे चोदने का प्लान था.

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