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बस में आंटी की चूत का भोसड़ा बनाया

हैल्लो दोस्तों, में इस साईट का बहुत पुराना पाठक हूँ और मैंने इस साईट पर बहुत सारी स्टोरी पढ़ी है और मुठ भी मारी है और आज में आपको मेरी सच्ची कहानी सुनाने जा रहा हूँ. मुझे जब अहमदाबाद से पूना काम के सिलसिले में जाना था तो मैंने एक ट्रेवेल्स में ए.सी. की स्लीपर बुक कर दी. शायद 14 घंटे का रास्ता था और ट्रेन में बुकिंग नहीं हो पाई थी, क्योंकि दीवाली का समय जो था. मुझे बस में टिकट बुक करनी पड़ी, वैसे बस तो बहुत ही बढ़िया थी और 2X1 थी, लेकिन मुझे जब सीट मिली तब सिर्फ़ एक ही 2 साईज़ का सोफा खाली था तो मुझसे 500 रुपये ज़्यादा लिए और बोला कि अगर कोई मिल गया तो आपको 500 रुपयें वापस कर देंगे, वरना आपको ही 500 ज़्यादा भरना पड़ेगा.

अब मेरे पास कोई चारा नहीं था और में पहले से ही 3 ट्रेवेल्स में पूछ चुका था, लेकिन सब बुक थी तो मैंने भी मज़बूरी में हाँ बोल दिया. अब अहमदाबाद से बैठने के बाद में स्लीपर में सेट हुआ और नाईट का सफ़र होने की वजह से में थोड़ा म्यूज़िक लगाकर थोड़ी देर टाईम पास करने लगा. अब बस करीब अहमदाबाद से बाहरी इलाक़े में पहुँची थी तो बस वहाँ पर रुकी.

फिर मेरे कैबिन में दस्तक हुई. फिर मैंने कैबिन खोला और पाया कि क्लीनर एक लेडी को लेकर आया था और मुझे बोला कि इनको आपकी बाजू वाली सीट दी है. अब मेरे तो आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा. फिर क्लीनर ने तभी मुझे मेरे 500 रुपये वापस कर दिए और हंसकर चला गया. फिर मैंने उस औरत को विंडो साईड जाने दिया.

फिर उसने अपना थोड़ा सामान इधर-उधर किया और फिर पीठ को टिकाकर बैठ गयी. अब उसको मैंने ध्यान से देखा तो वो खूबसूरत थी, उम्र करीब 35 साल के आस पास होगी और रंग मीडियम, होंठ पिंक रंग की लिपस्टिक से सजे हुए और स्तन भी आकर्षक थे, करीब 36 की साईज़ का, हिप्स भी बड़े दिख रहे थे कोई 36-38 के होंगे, उसके बदन से लेडीस पर्फ्यूम की स्मेल आ रही थी और जो हमारी कैबिन को सुगंधित बना रही थी. फिर उसने बस में सेट होने के बाद मुझसे पूछा कि आपको कहाँ जाना है?

में : जी, मुझे पूना तक और आपको?

वो बोली : मुझे भी पूना ही जाना है.

में : क्या आप वहाँ की ही रहने वाली है?

वो : नहीं, में अहमदाबाद में ही रहती हूँ, लेकिन वहाँ मेरी चचेरी बहन की शादी है और दीवाली की छुट्टियाँ भी है तो वहाँ जा रही हूँ और आप?

में : जी, में एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता हूँ और काम के सिलसिले में ही पूना जा रहा हूँ.

वो बोली : ओके.

में : मेडम आपका पर्फ्यूम बड़ा ही अच्छा है पूरी कैबिन सुगंधित हो गया है.

मैंने फिर उससे पूछा : क्या आपके पतिदेव शादी में नहीं जा रहे है?

वो : जी, वो तो जब शादी होगी तब दो दिन पहले आयेंगे और बच्चे भी स्कूल की वजह से शादी के टाईम ही आयेंगे और मेरी बहन की शादी है तो काम-काज करने के लिए मुझे थोड़ा जल्दी जाना पड़ रहा है.

में : ओह तो आपके बच्चे आपके बिना कैसे रहेंगे?

वो : क्यों नहीं रह सकते? मेरी लड़की अब 15 साल की है और वो आराम से घर संभाल सकती है.

में : क्या? आपकी इतनी बड़ी बेटी है? आपकी उम्र देखकर लगता नहीं कि आपकी इतनी बड़ी बेटी होगी.

फिर वो शर्मा गयी, आप भी ना, में इतनी भी जवान नहीं कि जो आप मेरी झूठी तारीफ कर रहे है.

में : नहीं मेडम जी, सच में आप 25-27 साल से ज़्यादा की नहीं दिखती है.

वो : खाली मक्खन मत लगाइये, मुझे भी सब मालूम है.

में : नहीं मेडम जी, सच में मुझे यकीन ही नहीं हो रहा है.

वो : छोड़िए वो सब, लेकिन आप बताइयें कि आप अहमदाबाद में क्या करते हो?

में : जी, में एक फ़ार्मा कंपनी में हूँ और मुझे कई बार कस्टमर के यहाँ महीने में एक दो बार जाना पड़ता है, फीडबैक लाने और नई प्रोडक्ट के बारे में जानकारी देने के लिए.

वो : बहुत अच्छा जॉब है आपका, क्या आपकी शादी हो गई है?

में : नहीं जी, अभी तो में सिर्फ़ 23 साल का हूँ, मेरा अगले 3-4 साल तक तो कोई इरादा नहीं है और जब सेट हो जाऊंगा तो करूँगा, लेकिन मेडम जी हमने इतनी बात के बाद भी एक दूसरे के नाम नहीं जानते, क्या में आपका नाम जान सकता हूँ?

वो : जी, में वीना और आपका नाम?

में : जी, में रोहित.

वीना : रोहित, तुम मुझे मेडम जी मेडम जी मत बुलाया करो में कोई मेडम नहीं सिंपल हाउस वाईफ हूँ, तुम सिर्फ़ मुझे भाभी या वीना बोलोगे तो भी चलेगा.

में : ठीक है भाभी.

फिर इधर-उधर की बातें करके हम सोने की तैयारी करने लगे और एक दूसरे को गुड नाईट बोलकर सो गये. फिर मैंने देखा कि भाभी भी उल्टी पीठ करके सो गई, अब में सीधा सोया हुआ था. फिर थोड़ी देर यानी आधा घंटा हुआ, लेकिन मुझे भाभी की गांड देखकर नींद नहीं आ रही थी. अब भाभी थोड़ी नींद में होगी, क्योंकि वो हिल नहीं रही थी. मेरी हाईट ज़्यादा थी तो मेरे पैर सामने टकरा जाते थे.

फिर मैंने अपने पैरों को मोड़ा और भाभी की पीठ की तरफ मुँह रखकर सो गया, जिससे मेरे घुटने भाभी की गांड से टच हो गये और मुझे पीछे से भाभी के गहरे गले के ब्लाउज से उसकी पीठ दिखने लगी. अब मेरा 8 इंच का लंड पेंट में तंबू बनने लगा था. अब मेरे बदन में एक कंपकपी उठ गयी और उतेज्जना से मेरा बदन कांपने लगा और मेरे घुटने से उसकी गांड की नरमाई मुझे आनंद दे रही थी.

अब भाभी की साड़ी कमर पर नहीं थी. उसकी कमर का कटाव कोई गहरे खड्डे जैसे बनकर ऊपर गांड पर फिर से अचानक उठ जाता था. अब भाभी सीधी हुई और मेरी साईड सर घुमाकर सो गयी. अब वो नींद में ही ऐसे घूमी थी और उसकी छाती से साड़ी का पल्लू हट चुका था और उसके बड़े-बड़े स्तन अब मेरी नज़र के सामने थे, नीचे वाला स्तन तो सीट पर दबकर फैल गया था और ऊपर का अपनी नौकदार ऊँचाइयों से ब्लाउज फाड़ने को बेताब हो ऐसे ब्लाउज से चिपका हुआ था.

अब एक नज़र में लगता कि ये अभी फाड़कर बाहर आ जायेगा. फिर मैंने नीचे नज़र की तो देखा कि उसके ब्लाउज के 2 हुक खुले हुए थे और ऊपर के सिर्फ़ 3 हुक से ही उसके बूब्स संभले हुए थे. फिर मेरा मन हुआ कि अभी पकड़कर मसल डालूं और चूस-चूसकर उसका दूध निकाल दूँ, लेकिन मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी. फिर थोड़ी देर हुई कि उसको ठंड लगने लगी तो उसने बैठकर कंबल निकाला और ओढ़ लिया. अब मेरा बदन ठंड और उत्तेजना से कांप रहा था, शायद उसकी नज़र मुझ पर पड़ी और उसने मुझसे पूछा कि आप कंबल नहीं लाए?

में : जी, में वो नोन ए.सी. का प्लानिंग करके ही निकला था तो नहीं लिया था. फिर उसने बोला कि कोई बात नहीं आप मेरा कंबल शेयर कर लीजिये वरना ठंड लग जायेगी और उन्होंने ए.सी. बहुत ही स्लो कर दिया और एक साईड मुझे ओढ़ने को दिया. अब में उसके कंबल में दाखिल हो गया और अब भी वो मेरी साईड सर रखकर सोई थी और में भी उसकी साईड पर था.

फिर थोड़ी देर में अपनी आँखे बंद करके सोया और वो भी सोने की कोशिश करने लगी, अब एक कंबल में होने से अब मुझे कंबल के अंदर गर्मी महसूस होने लगी थी. फिर करीब आधे घंटे के बाद मैंने हल्की आँखे खोली तो देखा कि वो सो गई है और उसके बदन से कंबल बिल्कुल ही हट गया है. अब वो सीधी सोई हुई थी और सांसो के साथ उसकी दो बड़ी चूचियां ऊपर नीचे हो रही थी.

फिर मैंने सोचा कि बेटा अगर हिम्मत नहीं करेगा तो फिर कभी चूत नहीं मिलेगी और अगर पकड़े गये और डांट पड़ी तो नींद का बहाना बनाकर सॉरी बोल दूँगा, मगर ट्राई नहीं किया तो में मर्द किस काम का? फिर ये सोचकर में उसकी साईड थोड़ा खिसका और टेढ़ा सोकर वैसे पैरों को एक कोने में कर दिया और मेरा सर उसकी बगल के बाजू में ला दिया.

अब वो अपना हाथ सर के नीचे रखकर सोई थी तो उसकी बगल मेरे चेहरे से सिर्फ़ 2 इंच की दूरी पर थी. अब में मेरी नाक को उसकी बगल के करीब ले गया और उसे सूंघने लगा, वाऊऊव्वववव ओह माई गॉड क्या स्मेल थी? अभी भी याद करके मेरा लंड खड़ा हो जाता है. उसकी बगलों में एक भी बाल नहीं था, अब में तो अपनी नाक टच करकर उसे स्मेल करने लगा था. फिर मैंने अपना सर थोड़ा अलग किया और एक हाथ उसकी बगल से ऊपर रहे वैसे हथेली उल्टी करके उसके बूब्स को छुआ, लेकिन मुझे कुछ मज़ा नहीं आया, क्योंकि हथेली तो उल्टी थी और फीलिंग तो सीधी हथेली में ही आती है. फिर मैंने सीधी हथेली करकर जैसे नींद में ही उस पर हाथ गिरा हो वैसे उसके बूब्स पर हाथ रख दिया. फिर भी वो नहीं हिली. फिर मैंने उसके बूब्स की पूरी गोलाई पर हाथ घुमाया और उसकी नर्माहट महसूस करके पागल हो गया.

अब मेरा 8 इंच का लंड पेंट में नहीं समा रहा था. फिर अचानक वो मेरी साईड पलटी तो मेरा सर उसकी छाती में समा गया, मतलब उसकी गर्दन पर और मेरी नाक उसकी दो घाटियों के बीच में टच हो रही थी. अब मुझे लगा कि वो अब जाग गयी है और सोने का नाटक कर रही है तो में भी वैसे ही सोए हुए उसकी घाटियों की खुशबू सूंघने लगा. अब उसके घूमने से मेरा हाथ जो कि उसके बूब्स पर था, वो सीधा ही उसके घूमने से उसके ऊपर के बूब्स से दब गया.

फिर मैंने अपने हाथों को सीधा किया और उसके बूब्स को थोड़ा प्रेस किया तो मुझे हल्की सिसकी की आवाज़ सुनाई दी तो में समझ गया था कि वो जाग रही थी. फिर मैंने उसके बूब्स को हथेली से दुबारा दबाया तो उसकी फिर से सिसकी निकल गयी. फिर उसने अपना एक हाथ मेरे सर पर रखकर मेरे सर को अपनी छाती पर दबा दिया. अब कुछ समझना बाकी नहीं था. फिर मैंने थोड़ा दूर हटकर सीधे ही उसके ब्लाउज के हुक खोलने लगा और फटाफट तीनों हुक खोल दिए और उसकी ब्रा के ऊपर से ही बूब्स दबाने लगा, उसके बूब्स रुई से भी नर्म और किसी भट्टी की तरह गर्म थे.

फिर मैंने अपना मुँह ऊपर किया और अपने होंठो को उसके होंठो से चिपका दिया तो वो कुछ नहीं बोली और मेरा साथ देने लगी. अब उसने मेरी जीभ के स्वागत में अपना पूरा मुँह खोल दिया और अपनी जीभ से मेरी जीभ रगड़ने लगी. फिर उसने पीछे हाथ डालकर अपनी ब्रा के हुक को भी खोल दिया और मुझे बोला कि चूस राजा इस फड़फडाते कबूतरो को भी चूस, अब मेरी तड़प मिटा दे राजा, अहह ज़रा धीरे दबा राजा, अब मेरे दबाते ही उसके मुँह से आह्ह्ह निकल गई. उसके बूब्स इतने बड़े थे कि मेरी पूरी हथेली में एक भी नहीं आता था, अब में उसकी निप्पल को चुटकी में भरकर मसल देता तो उसकी सिसकी और निकल जाती, अब उसके मुँह से हल्की- हल्की सिसकियां निकल रही थी.

फिर मैंने नीचे हाथ डालकर उसके पेटीकोट के अंदर अपना हाथ डालना चाहा, लेकिन वो टाईट बँधा हुआ था तो मैंने थोड़ा और झुककर उसे नीचे से ऊपर तक उठा लिया और उसकी नर्म जांघो को सहलाने लगा. अब वो काबू से बाहर थी और मेरे बालों को पकड़कर मुझे लगातार किस किए जा रही थी. फिर मैंने नीचे उसकी जांघो से ऊपर हाथ ले जाकर उसकी नर्म चूत पर पूरी हथेली रख दी और अपनी हथेली में चूत को भींच लिया. अब उसकी चूत पानी छोड़ने लगी थी और उसकी पेंटी ऊपर से गीली हो गई थी.

फिर मैंने उसकी पेंटी को साईड में करके अपनी उंगली से उसकी चूत के छेद को छेड़ा और अपनी उंगली से उसकी चूत के होंठ सहलाने लगा और लंबाई में उंगली फेरने लगा. अब वो सीधी हो चुकी थी और में उसके ऊपर सोते हुए उसको लगातार किस कर रहा था. अब मेरा लेफ्ट हाथ उसके बूब्स को मसलने में व्यस्त था और सीधा हाथ उसकी चूत को सहलाने में व्यस्त था.

फिर मैंने उसकी पेंटी के अंदर हाथ डालकर नंगी चूत के ऊपर हाथ रख दिया और उसे भींच लिया. अब मेरी पूरी हथेली गीली हो गयी थी. अब उसकी चूत लंड लेने को बिल्कुल तैयार थी और वो ना जाने कब से मेरे और उसके शरीर के बीच में हाथ डालकर मेरे लंड को पेंट के ऊपर से ही टटोल रही थी और अपनी हथेली में भरकर दबा रही थी. फिर मैंने उसके दोनों बूब्स को अपनी हथेली में भींचना चालू किया और उसके ऊपर आ गया. फिर उसने खुद ही अपनी गांड ऊँची करके अपनी पेंटी पूरी निकाल दी और मुझे अपनी दोनों टांगो के बीच में ले लिया. फिर उसने अपने हाथ से मेरे लंड को चूत के छेद पर टिकाया और फिर मेरी गांड पर हाथ रखकर मुझे अपनी और खींचने लगी.

फिर मैंने एक ज़ोर का धक्का देकर अपना पूरा लंड उसकी चूत में डाल दिया तो उसकी चीख निकलते- निकलते बच गयी, वैसे वो चुदी हुई होने से उसे ज़्यादा तकलीफ़ नहीं हुई. अब में उसे दे दनादन चोदने लगा, वो तो अच्छा था कि में नीचे की स्लीपर सीट में था वरना मेरे धक्को से सीट टूट ही पड़ती. अब लगातार धक्को से वो निढाल हो गई और ठंडी पड़ गयी, लेकिन मेरा अभी बाकी था तो मैंने अपना लंड निकाल कर उसके मुँह में ज़बरदस्ती घुसा दिया. अब वो ना-नु कर रही थी, लेकिन यहाँ उसकी सुनने वाला कौन था? अब में उसके मुँह को चोदने लगा और अब उसके मुँह की गर्मी में मेरा लंड भी थक गया और अपना पानी छोड़ने लगा.

फिर हमने और एक राउंड भी लिया. फिर उसने मुझसे मेरा नम्बर माँगा तो मैंने उसे दे दिया. अब जब भी वो घर पर अकेली रहती है तो मुझे घर पर बुला लेती है या फिर कई बार हम कोई होटल में भी स्वर्ग के सुख को भोगते है. वाह भगवान ने चूत बनाई ही ऐसी है कि कोई भी मर्द उसमें खो जाए, इतना आनंद प्रदान करने वाली एक चूत ही तो है.

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