बहन की गांड शहद के साथ

 
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हैल्लो दोस्तों.. मेरा नाम तेज है और में एक छोटे से शहर का रहने वाला हूँ। और मैंने भी आप ही की तरह इस साईट पर बहुत सी सेक्सी कहानियाँ पढ़ी है। में इस साईट का बहुत बड़ा फेन हूँ। एक दिन मैंने भी सोचा कि क्यों ना में भी अपनी स्टोरी आप सभी के सामने रखूं। यह कहानी मेरी और मेरी छोटी बहन की एक सच्ची घटना है। अभी मेरी बहन की उम्र 22 साल है और मेरी 24 साल। दोस्तों यह कहानी तब की है जब में 21 साल का था तो में अपनी माँ को नंगा देखने को बहुत उत्सुक रहता था। क्योंकि उस समय मेरी बहन के पास वो सब नहीं था जो कि मेरी माँ के पास था। जब भी मेरी माँ नहाने जाती थी तो में बाथरूम में उनको नहाते हुए छुपकर देखता था। एक दिन मेरी माँ ने मुझे यह सब देखते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया और मुझे बहुत डांटा.. तब से लेकर आज तक मुझे मेरी माँ से बहुत डर लगता है। वो मेरे पहले की बात थी.. लेकिन अब में बड़ा हो चुका हूँ और मेरे लंड का साईज़ 7 इंच और उसकी मोटाई लगभग 3 इंच है।

जब में 21 साल का हुआ तो मेरी बहन की उम्र 19 साल थी.. उस वक़्त मेरी बहन के बूब्स काफी बड़े हो गए थे और में उसके बूब्स को देखकर उसकी तरफ आकर्षित होने लगा था। एक दिन जब में दोपहर को अपनी बहन के साथ सो रहा था। उस दिन घर पर सिर्फ़ पापा थे और मेरी माँ पड़ोस की एक आंटी के यहाँ पर किसी काम से गई हुई थी। उस दिन क्रिकेट का मेच आ रहा था। तो पापा मेच देखने में व्यस्त थे और मुझे मेच देखने का कोई शौक नहीं था। तो में बेड पर जाकर लेट गया और उधर मेरी बहन भी सो रही थी और उसने अपने ऊपर एक चादर डाली हुई थी। मैंने भी अपने ऊपर उसकी थोड़ी सी चादर डाल ली.. मेरी बहन उस समय बहुत गहरी नींद में सोई हुई थी। दोस्तों.. बचपन से ही मुझे सेक्स का बहुत शौक था और मैंने कई बार मुठ भी मारी है। आज मेरे पास एक बहुत अच्छा मौका था.. मेरी बहन का रंग गोरा है और वो दिखने में ठीक ठाक है। जब में उसके पास लेटा तो उसने स्कर्ट और टॉप पहना हुआ था.. में उसके पास में उससे चिपककर लेट गया।

मैंने धीरे से उसके टॉप के अंदर हाथ डाला तो.. मुझे कुछ गर्मी सी महसूस हुई और मेरा हाथ कांप रहा था.. लेकिन फिर मैंने थोड़ी हिम्मत करके अंदर हाथ डाला पहले मैंने धीरे से उसके पेट पर हाथ रखा और फिर मुझे यकीन हो गया कि वो गहरी नींद में सोई हुई है। फिर मेरी हिम्मत और बढ़ गई.. तो मैंने अपना हाथ धीरे से ऊपर की तरफ बढ़ाया तो मुझे कुछ मुलायम मुलायम सा महसूस हुआ और मुझे बहुत अच्छा लगने लगा। में धीरे धीरे उन मुलायम मुलायम बूब्स को दबाने लगा और अब मेरा लंड पूरी तरह से टाईट हो चुका था और अब में एक हाथ से दोनों बूब्स को बारी बारी से दबा रहा था। मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे आज स्वर्ग यहीं धरती पर उतर आया हो और मुझे ऐसा करते करते 10 मिनट हो चुके थे.. में और जोश में आने लगा और ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा। तभी मेरी बहन की नींद खुलने लगी और मुझे लगा कि अभी मुझे थोड़ी देर रुक जाना चाहिए। में रुक गया और सोने का नाटक करने लगा और फिर थोड़ी देर के बाद मेरी बहन जाग गई और उसको शायद अपने बूब्स पर दर्द हो रहा था। वो उठकर सीधे बाथरूम में चली गई और फिर 5 मिनट के बाद बाहर निकलकर आई और थोड़ी देर बाद मुझे नींद आ गई और में गहरी नींद में सो गया। मेरी बहन का फिगर भी बहुत मस्त है.. बिल्कुल कोई आईटम माल जैसे ही है।

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फिर मेरे अंदर और तेज़ सेक्स चढ़ने लगा है। वो जब भी बाथरूम में जाती है.. तो में हमेशा यही सोचता रहता हूँ कि अब वो अंदर क्या कर रही होगी? कई बार मैंने उसको होल से बाथरूम में नंगा देखा है और उसकी चूत पर छोटे छोटे सुनहरे बाल है। मेरा तो मन करता है.. जाकर उनको चूम लूँ और फिर जब भी मेरी बहन सोती थी.. तो में रोज़ उसके टॉप के अंदर से उसके कबूतरों को पकड़ कर बहुत मज़े लेता था.. लेकिन अब मेरी बहन को शक होने लगा था क्योंकि कई बार वो ब्रा पहनकर सोती थी तो सुबह उसको उसकी ब्रा खुली मिलती थी.. लेकिन वो कुछ कर भी नहीं पाती थी और अब यह खेल बहुत आगे बढ़ चुका था। एक दिन की बात है मेरी बहन रात को सो रही थी.. तो मैंने सोचा कि शायद वो गहरी नींद में सो रही है तो मैंने अपना लंड निकाला और मुठ मारने लगा। फिर मैंने अपने एक हाथ से उसके बूब्स दबाने शुरू कर दिए और फिर अपना लंड अपनी बहन के हाथ में रखा और सारा का सारा वीर्य उसके हाथों पर निकाल दिया और सुबह तक मेरा वीर्य सूख चुका था और उसको कुछ पता नहीं चला.. लेकिन ऐसा करते करते मुझे बहुत दिन हो गये थे।

एक दिन में अपनी बहन के बूब्स दबा रहा था और मुठ मारने में व्यस्त था और अचानक मेरी बहन ने मुझे रंगे हाथों पकड़ लिया.. वो घबराकर उठ गई और अभी भी मेरा लंड उसके हाथ में था। में बहुत घबरा गया और मेरा लंड एकदम से ढीला होकर छोटा हो गया और में बहुत डर गया था.. लेकिन उस समय मेरी बहन ने मुझसे कुछ नहीं कहा और उठकर सीधे बाथरूम में चली गई और फिर थोड़ी देर बाद वो बाहर आई। हम एक दूसरे से नज़रे नहीं मिला पा रहे थे। फिर वो मुझसे थोड़ा नाराज़ रहने लगी और लगभग तीन महीने ऐसे ही बीत गये और उसने इस घटना के बारे में घर पर किसी को नहीं बताया और जब तीन महीने बाद मेरी बहन का गुस्सा थोड़ा शांत हुआ और वो यह बात भूलने लगी फिर मुझे कुछ कुछ होने लगा। मेरी आदत तो बदल नहीं सकती थी.. फिर एक दिन मेरी माँ और पापा को आचनक से कोई ज़रूरी काम आने के कारण कुछ दिनों के लिए बाहर जाना पड़ा। में और मेरी बहन घर पर अकेले थे।


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