बुआ की प्यास

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सुनीता बुआ हमारी बुआ की दूर के रिश्ते में देवरानी लगती हैं, इस नाते हम उन्हें भी बुआजी ही कहते हैं। फूफाजी सेना में कर्नल पद पर थे और ज्यादातर पोस्टिंग पर सुदूर सीमा पर ही रहते थे। इस कारण परिवार साथ नहीं रहता था। सुनीता बुआ के दो बच्चे थे बड़ा लड़का पांच साल का और लड़की ढाई साल की। स्टेशन गया तो पता लगा कि उस तारीख में स्लीपर क्लास 200 वेटिंग में है। मैं वापस आ गया तो पापा बोले- अरे बेवकूफ, ऐ सी कोच में बुक करा लेता ! फिर गया और ऐ सी कोच में टिकट बुक करा कर आ गया। नियत समय पर यहाँ से गाडी चल दी। पापा छोड़ने आए थे, आखिर तक समझाते रहे कि मथुरा से सुनीता को लेना है।

गाडी में ऐ सी कोच में कोई ज्यादा भीड़ नहीं थी और हमें जो सीट मिली थी वो एक फ़ैमिली केबिन था। टिकट चेकर आया पूछने लगा- बाकी सवारियाँ कहाँ हैं? तो मैंने उससे कहा- वो मथुरा से बैठेंगे ! गाड़ी समय पर मथुरा स्टेशन पहुँच गई। मैं गेट पर खड़ा हो गया। अपनी शादी के बाद अब देखा था पर मैंने उन्हें पहचान लिया और आवाज देकर उन्हें आराम से केबिन में लाकर बिठा दिया। गाड़ी चल दी। टिकट चेकर फिर आया और सवारी चेक करके चला गया। हमने केबिन का दरवाजा बंद कर लिया बच्चे थोड़ी देर तो खेलते रहे, फिर सोने लगे। रात के बारह बज चुके थे, बच्चे नीचे बर्थ पर ही सो गए थे। बच्चों को एक ही बर्थ पर लिटाकर मैंने बुआजी से कहा- मैं ऊपर जाकर सो जाता हूँ,

आप नीचे इस बर्थ पर सो जाओ ! तो वो बोली- नींद कहाँ आ रही है, अभी आ, थोड़ी देर बात करते हैं, फिर सो जाना ! मैं वहीं बैठ गया। कुछ देर हम बात करते रहे, फिर उन्होंने पैर उठा कर सीट पर लम्बे कर लिए। मैं उठने लगा तो बोली- क्या करेगा ऊपर जाकर ! यहीं पर अडजस्ट हो जाएँगे ! मैं भी अधलेटा सा हो गया और वो लेट गई। मेरी आँख लग गई, कुछ देर बाद मुझे महसूस हुआ कि मेरे लंड को कोई सहला रहा है। मैंने आँख खोलकर देखा तो बुआजी आँखें बंद करे लेटी हैं और पैर के अंगूठे से मेरे लंड को ऊपर से सहला रही हैं। विश्वास नहीं हुआ कि यह हो रहा है पर प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती। मैंने पूरी तरह से सीधे पैर किए तो मेरे पैर उनके उभारों के पास पहुँच गए और चुप लेट गया जैसे कुछ हुआ ही नहीं है। थोड़ी देर बाद वो अपने उभारों को मेरे पैर के अंगूठे पर रगड़ने लगी।

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उसका असर यह हुआ कि मेरा लंड अकड़ने लगा और तैयार हो गया। मुझसे नहीं रहा गया, क्योंकि एक तो रिश्ता ऐसा, उस पर यह हरकत मेरे गले नहीं उतर रही थी। सो मैं एकदम से उठकर बैठ गया। जाग तो वो भी रही थी, तो बोली- क्या हुआ? मैंने कहा- कुछ नहीं ! मैं ऊपर जा रहा हूँ सोने ! उस बात की प्रतिक्रिया में जो उन्होंने किया वो मेरे लिए चौंकाने वाली बात थी क्योंकि उन्होंने एकदम से मेरा हाथ पकड़कर अपनी तरफ खींचा और मेरा हाथ सीधा उनके उभारों से टकराया। गिरने से बचना चाह रहा था सो हाथ पूरा खुला हुआ था पूरी तरह से दाईं चूची से टकराया। उफ़ ! क्या टाईट चूचियाँ थी ! बोली- मेरा शरीर जल रहा है, तुम यहाँ पर रहोगे तो कुछ शांति रहेगी ! पर मैं बोला- बुआ, यह गलत है ! वो बजाए कुछ कहने के फफक-फफक कर रोने लगी। मैंने उन्हें शांत कराया, फिर पूछा- क्या बात है ?


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