में पहली बार गैर मर्द से चुदी

loading...

हैल्लो दोस्तों मेरा नाम कीर्ति है और मेरी उम्र 30 साल है में लखनऊ में रहती हूँ और मेरी शादी को तीन साल हो गये है. मेरे घर पर मेरे पति और मेरा एक साल का बेटा रहता है. मेरे फिगर का साईज 34-32-36 है और मेरा रंग गोरा, बड़ी बड़ी काली आखें, गुलाबी होंठ, उभरी हुई गांड, बड़े आकार के बूब्स जिनका हर कोई दीवाना बन जाता है. वैसे मुझे शुरू से ही अच्छे दिखने का बहुत शौक था और में अपनी शादी होने के पहले हमेशा बिल्कुल तंग कपड़े पहनती थी जिससे मेरे हर एक अंग का आकार बाहर से साफ साफ नजर आता था और उसी वजह से हर कोई मेरी जवानी के पीछे पागल था.

दोस्तों में आज आप सभी चाहने वालों को अपनी एक सच्ची कहानी सुनाने जा रही हूँ, जो मेरे जीवन की एक सच्ची घटना है और जिसमे में पहली बार किसी अंजान आदमी से चुदी और मैंने उसके साथ सेक्स के मज़े लिए. किसी गैर मर्द के साथ चुदना तो बहुत दूर की बात है मैंने तो कभी अपने पति के अलावा किसी और को अपनी उस नजर से नहीं देखा, लेकिन बाद में जब मेरी चुदाई हो चुकी थी तब मैंने उसके बारे में बहुत सोचा कि यह सब कैसे हो गया और इस बात का मुझे भी आज तक पता नहीं चला.

दोस्तों यह बात उस टाईम की है जब मेरे पति को अचानक अपने ऑफिस के किसी जरूरी काम से एक सप्ताह के लिए बेंगलोर जाना पड़ गया. तो में उनके जाने से बहुत उदास सी हो गई और मुझे अपने घर में बहुत अजीब सा लगने लगा था, दिन तो जैसे तैसे कट जाता था, लेकिन मेरी रातें बहुत मुश्किल से गुजरने लगी थी. मैंने अपने दो दिन, रातें बहुत मुश्किल से बिताई और ठीक उसी समय मेरे घर के सामने वाले घर में एक शादी आ गई. दोस्तों वो लोग बहुत अच्छे लोग थे, उनका व्यहवार और स्वभाव दोनों ही बहुत अच्छे थे. उस घर में मेरा हर कभी किसी ना किसी काम से आना जाना लगा रहता था और यह बात मेरे पति को भी बहुत अच्छी तरह से पता थी इसलिए मेरे पति ने बाहर जाते समय मुझसे बोला कि उनकी कोई भी मदद हो तो कर देना.

loading...

में उस घर में कभी भी चली जाती और उनकी मदद करवा देती थी, क्योंकि अब उनके मेहमान भी आने लगे थे इसलिए काम थोड़ा सा बड़ गया था, लेकिन हम बहुत मज़े के साथ अपना सभी काम खत्म करते थे. दोस्तों उन्ही मेहमानों में से एक आदमी जिनका नाम संजय था जिसकी उम्र करीब 40 साल होगी और वो दिखने में मजबूत शरीर और सुंदर थे. वो उस घर में जिस लड़की की शादी होने वाली थी उसके रिश्ते में मामा जी लगते थे और फिर में धीरे धीरे सभी मेहमानों में घुल मिल गई और अब मेरी संजय से भी बात होने लगी थी. उनमे से कुछ मेहमान मेरे घर पर सुबह के समय फ्रेश होने भी आ जाते थे और मुझे उनकी मदद करना, अपने घर पर बुलाना, बातें करना, वो शादी का माहोल बहुत अच्छा लगने लगा था.

मुझे अब बिल्कुल भी अकेलापन महसूस नहीं हो रहा था और ना ही मुझे अपने पति की याद आ रही थी. तो शादी के एक दिन पहले लड़की की माँ ने मुझसे शाम के समय बोला कि कीर्ति मेरे कुछ मेहमान को शायद रात में सोने की थोड़ी समस्या होगी, क्योंकि अब तुम्हे भी बहुत अच्छी तरह से पता है कि मेहमान अब बहुत ज्यादा बढ़ गए है तो इसलिए घर छोटा लगने लगा है और अगर तुम चाहो तो दो चार लोगों को अपने यहाँ पर जगह दे सकती हो. दोस्तों में उनकी इस बात से बिल्कुल भी मना नहीं कर सकती थी, क्योंकि मेरा घर दो मंजिल में बना हुआ था और उस घर में रहने वाले हम केवल चार लोग थे और मेरा घर आकार में बहुत बड़ा था तो मैंने बिना कुछ सोचे समझे उससे हाँ कर दिया और फिर में घर पर जाकर उनके सोने का इंतज़ाम करने लगी.

मैंने सभी के लिए पहले से ही बिस्तर लगा दिए और पीने के पानी का इंतजाम कर दिया और कुछ काम करने लगी. इतने में संजय मेरे पीछे आ गए और वो मुझसे पूछने लगे कि अगर तुम्हे मुझसे कोई भी मदद चाहिए तो बता दो. मैंने उनसे बिस्तर पर बेडशीट बिछाने में मेरी मदद करके के लिए कहा और बेडशीट बिछाते समय मैंने देखा कि उनकी नज़र मेरी छाती पर है क्योंकि में उस समय पूरी झुकी हुई थी और मेरे ब्लाउज से मेरे बड़े बड़े बूब्स लटकते हुए साफ साफ झलक रहे थे, जिनको देखकर उसे शायद बहुत मज़ा आ रहा था.

तभी मैंने अपना पल्लू ठीक किया और अपना काम करने लगी, वो अब किसी ना किसी बहाने से मुझे छूने लगा था और मुझे उसकी मेरे ऊपर पड़ती हुई गंदी नियत का पूरा अंदाजा हो गया था, लेकिन फिर भी मैंने उस पर इतना ध्यान नहीं दिया और फिर में अपना सभी काम जल्दी से खत्म करके नीचे आकर शादी वाले घर पर पहुंच गई थी.

loading...

अब धीरे धीरे शाम होने लगी थी और में वहां के कामों को भी खत्म करके अपने घर पर आ गई थी. उसके कुछ देर बाद तीन लोग जिनमे एक कपल था और संजय रात में सोने के लिए मेरे घर पर आ गये. मैंने उन सभी को अपने ऊपर के गेस्ट रूम में ले जाकर छोड़ दिया और उसके बाद में नीचे आ गई और फिर मैंने अपने कपड़े बदल लिए, दोस्तों उस समय गर्मी होने की वजह से मैंने एक हल्की सी मेक्सी पहन ली और उसके अंदर मैंने ब्रा भी नहीं पहनी थी.

फिर रात में करीब दस बजे मुझे कुछ आवाज़ आने लगी तो में उठकर ऊपर की तरफ चली गई. मैंने वहां पर पहुंचकर देखा तो संजय उस समय केवल अपने रात के कपड़ो में आंगन में टहल रहे थे, मैंने उनसे पूछा कि क्यों नींद नहीं आ रही? तो वो बोले कि मुझे पीने का पानी चाहिए था जो पानी रखा हुआ था वो अब तक बहुत गरम हो चुका है.


जिसकी कहानी पढ़ी उसका नंबर यह से डाउनलोड करलो Install [Download]
loading...

और कहानिया

loading...