मेरी तड़प और दोस्तों की अय्याशी

loading...

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम रिकी है और में 23 साल का हूँ, मेरी बॉडी स्लिम और स्किन फेयर है, इसी वजह से मेरे दोस्त मुझे लड़की बुलाते थे और मुझे छेड़ते थे और मुझे धीरे-धीरे लड़को में रूचि आने लगी, मेरी छाती और बॉडी पर बाल नहीं है, इसलिए कुछ लोग मुझे चिकनी लड़की भी कहते थे.

ये स्टोरी तब कि है जब में 12वीं क्लास में पढ़ता था और में अपने पेरेंट्स का एक ही लड़का हूँ, मेरे पापा की मौत के बाद मुझे और माँ को सरकारी क्वॉर्टर छोड़कर दिल्ली आना पड़ा. मेरी माँ का नाम उर्मिला है और वो हाउसवाईफ है, उनकी उम्र 35 साल है, उनका फिगर 36-32-38 है, स्किन गोरी है और हाईट 5 फुट 5 इंच है.

अब हमारी घर की स्थिति कमजोर हो गई थी तो माँ ने एक नर्सिंग होम में नर्स की जॉब कर ली. फिर कुछ दिनों में नर्सिंग होम वालों की मदद से हमें दो कमरों का घर मिल गया, अब में और माँ वहीं रहने लगे. वो जगह नर्सिंग होम के पास ही थी, अब में कभी-कभी माँ के साथ में नर्सिंग होम जाता था.

loading...

फिर एक दिन मैंने देखा कि दो वार्डबॉय मेरी माँ के बारे में कुछ बात कर रहे हैं तो में चुपचाप जाकर उनकी बातें सुनने लगा. फिर उनमें से एक बोला साली ये उर्मिला रोज़ मेरे लंड को तड़पाती है तो दूसरा बोला क्यों भाई? इसने क्या कर दिया? तो पहले ने कहा कि अरे साली को 2 महीने से दाना डाल रहा हूँ, लेकिन अभी तक बस बूब्स दबाने को मिले हैं.

फिर दूसरा बोला भाई मुझको तो साली देखने भी नहीं देती है, तो पहला बोला कि अरे कब तक बचेगी एक दिन में इसकी चूत और गांड को ज़रूर चोदूंगा, तो दूसरे ने बोला कि भाई जब तुझे मिल जाए तो मुझे भी दिलवा देना.

अब में ये सब सुनकर दंग रह गया, अब मुझे अजीब सा लग रहा था. मैंने कभी पहले ऐसा माँ के लिए नहीं सुना था. अब वो दोनों बात ही कर रहे थे कि उन्होंने मेरी माँ को आते देखा, अब में खिड़की से सब सुन और देख रहा था.

फिर माँ कमरे में आईं और बोली कि ठाकुर मेरा बेटा यहाँ नर्सिंग होम आया है, तुमने उसे इधर कहीं देखा है. फिर उनमें से जो ठाकुर था तो उसने माँ को गाली देते हुए कहा कि साली तुने मुझे क्या समझा हुआ है? में तेरे बेटे को देखता रहूँ तो माँ चुप होकर जाने लगी. तभी उसने माँ से बोला कि मैंने तुझे जो 1500 रुपये दिए थे, वो वापस कब देगी?

loading...

माँ ने कहा कि सैलरी मिलते ही दे दूँगी. फिर वो माँ के पास आ गया और बोला कि नहीं मुझे अभी चाहिए तो माँ ने उसे बोला कि मेरे पास अभी नहीं हैं और तुमने बहुत पी रखी है.

फिर उसने बोला कि हाँ और मेरे पैसे वापस कर अभी, नहीं तो में तुझे जाने नहीं दूँगा और ये कहकर उसने दूसरे वार्डबॉय को जाने को कहा. उसकी बॉडी थोड़ी बहुत तगड़ी थी और उसे देखकर लग रहा था कि वो सभी वार्डबॉय का लीडर है. अब दूसरा वार्डबॉय चुपचाप वहाँ से चला गया है और अनीश ने कमरे का दरवाज़ा अंदर से बंद कर दिया और माँ से बोला कि साली अब बता देती है पैसे.

फिर माँ ने बोला कि अभी मेरे पास नहीं है. फिर उसने माँ से बोला कि अच्छा चल ठीक है, आज मेरी एक तमन्ना पूरी कर दे, मुझे तुझे अभी चोदना है. फिर माँ ने बोला कि अरे ये क्या कह रहे हो अनीश? फिर उसने बोला कि साली नाटक मत कर तुझे इतने दिन से दाना डाल रहा हूँ और उस दिन तो तूने अपने बूब्स भी दबवाये थे, जब तू पैसे लेकर गई थी.

फिर माँ ने बोला कि प्लीज मुझे जाने दो, मेरा लड़का यहाँ पर ही है वो देख लेगा. फिर उसने बोला कि चुपकर साली अपने कपड़े उतार और ये बोलकर उसने माँ को पीछे से पकड़ लिया और ब्लाउज के ऊपर से ही माँ के बूब्स दबाने लगा. अब माँ उससे छूटने की कोशिश करने लगी, इतने में उसने माँ का ब्लाउज खोल दिया और ब्रा निकाल दी.

अब ब्रा के निकलते ही उनके दो बड़े-बड़े, गोरे बूब्स बाहर आ गये. अब ये देखते ही मुझे कुछ होने लगा था, पता नहीं क्यों? लेकिन अब मुझे मज़ा आने लगा था. मैंने पहले कभी माँ को ऐसे नहीं देखा था, अब उनके दोनों बूब्स चमक रहे थे. फिर अनीश माँ के बूब्स को अपने हाथ में लेकर दबाने लगा, अब माँ कुछ भी नहीं कर पा रही थी.

फिर कुछ देर तक दबाने के बाद उसने माँ को पलट दिया और उनके बूब्स चूसने की कोशिश करने लगा. फिर माँ ने उसको बोला कि ऐसे जल्दी-जल्दी में कुछ नहीं हो पायेगा और कोई आ भी सकता है, तुम मेरे घर पर आकर करना जो भी करना आराम से बिस्तर पर करना.

अब ये सुनते ही में समझ गया कि माँ क्या चाहती है? फिर उसने बोला कि घर पर तो तेरा लड़का रहता है, उसका क्या? तो माँ ने बोला कि में उसे स्कूल में डलवा रही हूँ, फिर घर खाली रहेगा. अब ये सुनते ही अनीश की आँखों में चमक आ गई और उसने माँ को अपनी पकड़ से आज़ाद कर दिया.

फिर माँ ने अपनी ब्रा पहनी और ब्लाउज पहनकर जाने लगी. तभी अनीश ने बोला कि यहीं पास में एक लड़को का सरकारी स्कूल है वहीं डलवा दे अपने लड़के को. फिर माँ ने बोला कि ठीक है और मुझे लड़को के सरकारी स्कूल में डलवा दिया गया.

इस सबके बाद मेरे मन में अजीब सी हलचल होने लगी, उस दिन के बाद से में माँ को अलग नज़र से देखने लगा. अब में कभी-कभी अपनी माँ को नंगे नहाता हुआ देखता, लेकिन मुझे औरतो से ज़्यादा मर्दों में रूचि होने लगी थी. फिर ऐसे ही 1 महीना बीत गया, अब में स्कूल जाने लगा था. में 10वीं क्लास में था और मेरी क्लास में सब लड़के थे, क्योंकि वो लड़को का सरकारी स्कूल था.


जिसकी कहानी पढ़ी उसका नंबर यह से डाउनलोड करलो Install [Download]
loading...

और कहानिया

loading...