मेरे भाई और उसके दोस्त ने मुझे चुदक्कड बना दिया

loading...

हेल्लो मेरा नाम अनुपमा पाठक है और यह कहानी मेरे बारे में है की कैसे मेरे भाई और उस के दोस्तों ने मेरे बॉय फ्रेंड के बजाय उन लोगो ने जबरदस्ती मेरी सील तोड़ी. चुदने बैठी थे अपने बॉय फ्रेंड से और चोद दिया भाई और उस के दोस्तों ने मस्ताराम.नेट वेब साईट मेरे भाई ने मुझे बताई थी यहाँ की कहानिया पढ़ के ऐसा लगा की मुझे भी अपनी कहानी लिखनी चाहिए. मेरे भाई ने ही मुझे चुदक्कड बना दिया है मतलब की चालू भाषा में मुझे उसने चुदेल बना दिया है अब तो चुदे बिना ऐसा लगता ही नहीं की जिन्दगी है बस चुदवाते रहो हर तरीके से लंड लेते रहो बस चले तो २४ घंटे चूत का बजा बजवाते रहो.एक दिन की बात है की मम्मी पापा दो दिनों के लिए बाहर जाने वाले थे तो उन्होंने मेरे भाई से कहा की घर का ख्याल रखना कही जाना नहीं तुम और अनुपमा को ही रहना है दो दिन अकेले तो उस पर ऋषि (भाई ) ने कहा की पापा आज मेरा क्रिकेट मेच है मैं नहीं रुकुंगा शाम को वापस आ जाऊंगा तो पापा ने कहा की बेटा अनुपमा ऐसा करना की शाम तक के लिए किसी सहेली को बुला लेना मैंने कहा ठीक है पापा वोह लोग ११ बजे की ट्रेन से चले गए और भाई भी आधे घंटे बाद यह कह के चला गया की मैं जा रहा हूँ तू किसी सहेली को बुला ले मैं पांच या छः बजे तक आ जाऊंगा. मैंने भी सोचा की क्या फर्क पड़ता है अकेले रह लुंगी जाने देती हूँ ऋषि को. मैं उसके जाने के बाद टी वी देखने बैठ गई थोड़ी देर बाद मैंने सोचा की अब १ बज रहा है नहा धो लेती हूँ फिर कुछ बना लूंगी खाने के लिए तो मैंने अपने ब्रा पेंटी उठाये तोवेल लिया और बाथरूम में घुस गई कपडे उतार के घर में कोई था नहीं तो कोई टेंशन भी नहीं थीजवान तो मैं हो ही गई थी पर कमाल की बात थी की मैंने अभी तक किसी से चुदवाया नहीं था बस कभी कभी अपनी चूत में ऊँगली डाल के उस को मज़े दिला लेती थी आज भी अकेली थी तो बाथरूम में जब मैं नंगी होके नहाने लगी तो मन किया की क्यूं ना थोडा मजा लिया जाये तो मैं अपनी चूत में उंगी डाल के उसे सहलाने लगी थोडा बहुत मसल मसल के मैंने चूत को गरम कर लिया अपने बूब्स से खेलने लगी उंगली डालने के कारन अब मस्ती छाने लगी थी चूत गरम हो गई थी अचानक मेरे मोबाइल पर किसी का कॉल आया तो मैंने सोचा आने दो नहा के कॉल बैक कर लूंगी पर मोबाइल फिर से बज उठा मुझे बड़ा गुस्सा आया की यहाँ चूत में गर्मी चढ़ रही है जाने कौन है जो मेरी चूत का दुश्मन बना जा रहा है तीसरी बार बजी तो मैंने सोचा की कही पापा का ना हो तो मैं बाथरूम से टॉवेल लपेट के कमरे में आई तो फ़ोन फिर से बज उठा मैंने जल्दी से मोबाइल उठाया तो देखा की धर्मेश ( मेरा बॉय फ्रेंड) का फ़ोन था मैंने हेल्लो बोला तो बोला जान इतना टाइम कैसे लगा किया कॉल ले ने में मैंने कहा की नहा रही थी तुम्हे भी तो चैन नहीं है नहाने भी नहीं दिया ठीक से तो धर्मेश ने शरारत से कहा की वाह जान मैंने भी आ जून क्या नहाने साथ तुम्हारे मैं थोड़ी शर्मा सी गई तो मैंने कहा धत्त शरारती कही की वह हंस पड़ा बोला यार अनुपमा मैं कौन सा आने ही वाला था मरना है | आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है |  क्या वह आके तुम्हारे मम्मी पापा मुझे मार डालेंगे तो अचानक मेरे मुह से निकल गया की अरे वह लोग तो हैं नहीं यार आज घर में मैं अकेली ही हूँ भाई भी नहीं है तो धर्मेश ने कहा की वाह जानेमन आज तो मौका है आ जाऊं क्या थोड़ी मस्ती हो जाये मैंने कहा की पागलो जैसी बात नहीं करो चलो अब मैं जा रही हूँ नहा के आती हूँ फिर खाना भी बनाना है मुझे अपने लिए तुम्हे क्या है तो वह बोला की जानू मैं पिज्जा ले आता हूँ वही पर थोड़े मजे भी कर लूँगा तुम्हारे साथ मैंने कहा की नहीं नहीं आना मत यहाँ पर उसने कहा की जैसी तुम्हारी मर्ज़ी मैं फिर से बाथरूम में घुस गई और नहाने लगी नहाते नहाते मैंने चूत पर साबुन लगाया अपने नीचे के बालो को भी थोडा सा साबुन लगा के साफ़ किया तो जब मैं चूत पर साबुन लगा रही थी तो चूत में फिर से सनसनाहट होने लगी तो मैंने फिर से उंगली डाल के चूत को रगड़ना शुरू कर दिया अचानक मैं वासना से पागल सी हो गई ऐसा लग रहा था की उफ़ यह पतली सी ऊँगली क्या मज़ा देगी कोई मोटी चीज़ होती तो मजा आ जाता बस यही सोचते हुए अचानक मेरे मन में ख़याल आया की अनुपमा आज चूत की गर्मी निकलने का अच्छा मौका है माँ पापा भी नहीं है भाई शाम तक आने वाला नहीं है तो क्यूं ना धर्मेश को बुला लिया जाये बस यह ख़याल आते ही मैंने चूत से खेलना छोड़ के अपने नीचे के बाल रिमूवर से साफ़ किये ताकि पहली बार चुदने जा रही हूँ तो बॉय फ्रेंड को भी तो मजा आना चाहिए फिर मैंने फटाफट नहाया और बाहर आ के धर्मेश को फ़ोन लगाया की उस ने फ़ोन उठाया तो बोला की जानू क्या हुआ कैसे कॉल किया तो मैंने कहा की पिज्जा खाने का मन हो रहा है ला रहे हो क्या (मैंने उसे यह नहीं बताया की आज मैं चुदाई की आग में जल रही हूँ मैंने सोचा की उस को थोडा सा तडपाऊँगी तो अपने आप ही कहेगा की आज कुछ कर लेने दो मन मत करो ) उसने कहा की जानू तुम्हारे लिए कुछ भी बोलो कब आना है मैंने कहा की आ जाओ जल्दी से भूख लग रही है बड़ी (वह बात अलग है की पिज्जा की नहीं चुदाई की) उस ने कहा की डोमिनो से पिज्जा ले के आ रहा है वह बस थोड़ी देर में.उसके बाद मैंने अपनी एक लेस वाली बढ़िया सी ब्रा और पेंटी निकली और पहन ली बढ़िया परफ्यूम लगाया और एक टॉप निकाल के पहन लिया जींस पहन ही रही थी की ख्याल आया की नहीं जींस नहीं कोई मिनी स्कर्ट पहनी जाये ताकी धर्मेश को रिझाने में आसानी रहेगी तो मैंने एक सेक्सी सी मिनी स्कर्ट पहन ली फिर शीशे में देखा की हाँ अब मैं किसी भी लड़के का लंड खड़ा करने लायक दिख रही हूँ आज धर्मेश मुझे खुद कहेगा की आज मुझे अपनी जवानी का मज़ा ले लेने दो. मैं अपने आप को शीशे में निहार रही थी की घंटी बजी मैं समझ गई की धर्मेश आ गया है पिज्जा ले के मैंने तेज़ी में गेट की तरफ गई और दरवाजा खोला तो वह धर्मेश ही खड़ा था. उस ने मुझे देख के कहा की क्या बात है जानेमन आज तो क़यामत लग रही ही देख के ही बिजली गिर रही है दिल पर मैंने शरमाते हुए कहा की चलो बेकार की बातें मत करो रोज़ जैसी ही तो लग रही हूँ अब जल्दी से अन्दर आ जाओ वरना कालोनी वाले देख ना ले मैंने धर्मेश का हाँथ पकड़ा और उसे अन्दर खीच लिया धर्मेश अन्दर आ गया तो मैं पलट के दरवाजे को लौक लगाने मुड़ी तो उस ने मुझे वापस खीच लिया और अपने होठ मेरे होठों पर रख दिए मुझे बांहों में भर लिया और मुझे किस करने लगा मैं तो आग में जल ही रही थी जवानी की मैंने भी उस को कस के बाहों में भर लिया और उस के होंठों को चूमने लगी मेरा साथ पा के तो धर्मेश पागल सा हो गया उस ने मुझे अपनी बाहों में मसलना शुरू कर दिया जैसे आज मेरा अंग अंग तोड़ देगा मैंने उस के कहा की उफ़ छोडो भी मुझे पिज्जा उस ने जमीन पर छोड़ दिया था | आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है | और अब मेरे होठो को छोड़ के वह मेरी गर्दन मेरे गाल को चूमते हुए बोल उठा की आज तो ऐसा लग रहा है की कच्चा चबा जाऊं जानेमन कामाल की लग रही हो मैंने कहा हटो भी पिज्जा ठंडा हो रहा है मुझे भूख लगी है उस ने कहा की जानू आज तो तुम इतनी हॉट लग रही हो की पिज्जा भी तुम्हारी जवानी के आगे ठंडा ही लगेगा मैंने उसे धक्का दे कर अपने आप को छुडाया ओउर पिज्जा ले के सोफे पर बैठ गई और टीवी चला लिया तो धर्मेश भी मेरे बगल में आ के बैठ गया उस ने कहा की अनुपमा मैं पिज्जा लगा तो अब कम से कम लेन का मेहनताना तो ले लेने देती ठीक सेमैं हंस पड़ी उसे चिड़ाते हुए मैंने कहा की फिर तो मुझे खुद ही डोमिनो फोन कर के माँगा लेना था और जो पिज्जा देने आता उसे दो चार किस दे के कहती की हो गए तुम्हारे पैसे अब जाओ तो धर्मेश ने कहा की जानेमन वोह चला भी जाता पर अगर उस का खड़ा हो जाता तो तुम्हारी लिए बिना नहीं जाता और कहते हुए उस ने मेरे नंगी जांघ पर हाँथ फेर दिया मैं तो अभी मस्त हो के पिज्जा खाने के नाटक कर रही थी मैंने उसे रोका नहीं तो उस की हिम्मत बड़ी और और ने हाँथ थोड़ा और अन्दर कर दिया अब धर्मेश मेरी स्कर्ट के अन्दर हाँथ ड़ाल के मेरी जांघ को रगड़ रहा था मुझे मजा आने लगा था.मैंने टीवी के चैनल चेंज करने का नाटक किया और फिर से पिज्जा में मस्त हो गई तो उस ने मौका देख के जांघ को मसलना शुरू कर दिया और थोड़ा अन्दर की और हाँथ बड़ा के मेरे पेंटी को छूने लगा तो मैंने थोड़ा सा नाटक करते हुए उस के हाँथ पर चांटा मारा और कहा की हटो भी क्या मस्ती कर रहे हो और उस की तरफ नकली गुस्से से देखा तो मुझे समझ में आ गया की धर्मेश का चेहरा लाल होने लगा था उस पर मस्ती छाने लगी थी मैं समझ गई की तीर निशाने पर लग गया है अब ज्यादा देर नहीं है मेरी सील टूटने में अन्दर से डर भी लग रहा था की पहली बार है ऐसा ना हो की सह नहीं पाऊं मैं लंड को अपनी छोटी सी चूत में फिर सोचा की जो होगा देखेंगे मर जवानी का मज़ा तो लेना है आज चाहे कुछ भी हो जाये मैं फिर से टीवी की तरफ देखने लगी मन टीवी में नहीं लग रहा था पर नाटक तो करना था ना की धर्मेश ये न समझे की उस की गर्ल फ्रेंड तो बिगड़ी हुयी लड़की है मैं चाहती थी की वो ही मुझ से कहे की आज सेक्स कर लेने दो मुझे ताकि मेरा काम भी हो जाये और उस की नज़र में यह भी रहे की मैंने धर्मेश के कहने पर ही अपनी सील तुडवाई हैमैंने धर्मेश को रोका नहीं तो उस की हिम्मत और बढ़ गई उस ने जांघ पर हाँथ फेरना बंद कर दिया और अब उस ने अपना हाँथ मेरे टॉप के नीचे से अन्दर ड़ाल दिया और मेरे बूब्स को मसलने लगा तो मैंने कहा हाय क्या कर रहे हो क्यूं शैतानी कर रहे हो यह कहते हुए मैंने उस के हाँथ को पकड़ लिया तो उस ने कहा की जानू प्लीज थोड़े मज़े ही ले लेने दो ना मैंने कहा हटो यह सब शादी के बाद करने के काम है किस तो चलता है यह सब नहीं. धर्मेश का तो तब तक मन बन गया था की आ मेरी ले के ही मानेगा तो उस ने मुझे प्यार की कसम देते हुए कहा की जानू तुम मुझ से प्यार करती हो तो मुझे आज रोको मत तो मैंने भी थोड़े नाटक करते हुए उसे मेरे बूब्स दबाने दिए तो मुझे भी थोड़ी मस्ती आने लगी मैं भी सिसकारी भरने लगी तो उस को और मजा आने लगा तो उस ने मुझे सोफे पर धकेल दिया और मेरे ऊपर चढ़ के मेरे लिप्स चूमने लगा और अपने हाँथ से मेरे बूब्स को मसलने लगा मैं उफ़ उफ़ करने लगी और उस से कहने लगी की हाय धर्मेश मत करो ना कुछ कुछ होता है अन्दर तो उस ने कहा की होने तो जानेमन प्यार की आग है जो तुम्हारे अन्दर जल रही है आज मुझे अपनी जवानी की आग को बुझा लेने दो कहते हुए मेरी स्कर्ट के उंदर हाँथ ड़ाल के उसे नीचे सरका दिया और फिर मेरी पेंटी में हाँथ ड़ाल के मेरी चूत को रगड़ने लगा | आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है |

अनुपमा – हाय क्या कर रहे हो आग सी लग रही है अन्दर मत करो नाधर्मेश – जानू आज जो हो रहा है हो जाने दो प्लीज मत रोको मुझे आज कहते हुए उस ने मेरे टॉप को ऊपर कर दिया और ब्रा को भी बूब्स से हटा के ऊपर कर दिया और फिर एक निप्पल को मुह में लेके चूसने लगा और दूसरे को अपनी उँगलियों में दबा के मसलने लगा.अनुपमा – क्या कर रहे हो लेस वाली ब्रा है फट जाएगी उतार लेने दोधर्मेश – जानेमन आज तो मैं जाने क्या क्या फाड़ दूंगा तुम नहीं जानती.अनुपमा – चलो हटो ना उतार लेने दो ना प्लीज धर्मेश – ठीक है उतार लो मैंने धीरे से अपना टॉप उतार के साईड में ड़ाल दिया तो उस ने हाँथ बढ़ा के मेरे ब्रा को उतार दिया और मुझे फिर से धक्का दे के नीचे सोफे पर गिरा दिया और फिर मेरे बूब्स को चूसने लगा और मसलने लगाथोड़ी देर बूब्स से खेलने के बाद उस ने मेरी स्कर्ट को खीच के नीचे ड़ाल दिया और मेरी मेंटी सरका के उतार दी और मेरी चूत को रगड़ने लगा अपनी उँगलियों सेधर्मेश – वाह जानेमन आज तो झांटे भी साफ कर रखी हैं तुम ने तोअनुपमा – हाँ आज कोई नहीं थी तो मैंने सोचा की चलो साफ़ कर लेती हूँ.धर्मेश – जानेमन आज तो सब कमाल कर रही हो तुम तो कहते हुए उस ने थोडा झुक के मेरी चूत को चूम लियाअनुपमा- म्मम्म सीईईईई क्या करते हो धर्मेशधर्मेश – इतनी प्यारी चूत को किस नहीं करू क्या अभी तो बहुत कुछ करना है उस ने मेरी चूत को उंगली से फाड़ा और अपनी जीभ अन्दर घुसा दीअनुपमा – सीईईईईईए हाय रे मर गई म्मम्मम्म मेरी सिस्कारिया सुन के उस को जोश आ गया और उस ने मेरी चूत को और जोर से चाटना शुरू कर दियाऔर तभी दरवाजा खुला ( क्यूंकि मैं दरवाजा बंद नहीं कर पाई थी क्योंकि धर्मेश ने मुझे खीच लिया था…

 


जिसकी कहानी पढ़ी उसका नंबर यह से डाउनलोड करलो Install [Download]

और कहानिया

loading...