वेब से बेड तक

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मेरी यह कहानी काल्पनिक है। इस कहानी का आधार एक औरत पर है जिससे मैंने एक चैट-साइट पर कई बार बात की। उसके साथ कई बार चैट-रुम में चुदाई भी की। मैं उसको माँ बुलाता हूँ और वह मुझको बेटा।। हम दोनों अलग अलग शहर में रहते है और कभी भी मिले नहीं हैं। मेरा नाम दीपक है और मैं 26 साल का हूँ । मेरे लन्ड का आकार 8 इंच है।

उसका नाम रीमा है। उसने जो मुझको बताया उसके अनुसार वह एक तलाकशुदा औरत है। उसकी उमर 48 साल की है और उसकी फ़िगर 38 डी 30 42 है और वह दिल्ली में रहती है। रीमा को कम उमर के लड़कों से चुदाने में बड़ा मजा आता है। उसकी एक नौकरानी भी है जो 20 साल की है। वह सेक्स में उसका साथ देती है। उसको जवान लौन्डों की कोई कमी नहीं है।

वह जिस ऑफ़िस में काम करती है उसके बॉस के साथ उसके संबन्ध हैं। उसका बॉस शादीशुदा है और कोई 26 साल की उमर का है। वह अपने बॉस के साथ बहुत टूर पर जाती रहती और टूर पर वह अपने बॉस और कलाईन्ट के साथ चुदाई के मजे लेती है।

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चैट-साईट पर हम लोगों में चुदाई की बातें होने लगी। मैंने उसको बताया कि मुझे बड़ी उमर की औरतें बहुत पसन्द हैं। उसने मेरे से पूछा कि मैं किस बड़ी उमर की औरत के बारे में सोच कर हस्तमैथुन करता हूँ ।

मैने कहा- अपनी माँ के बारे में !

उसने पूछा कि मेरी माँ का नाम क्या है और वह कैसी दिखती है तो मैंने बताया कि मेरी माँ का नाम निर्मला है और उसका रंग गोरा है, उसके नयन-नक्श बहुत ही तीखे हैं, उसकी फिगर 36 सी 30 40 है।

फिर हमने इस बारे में बहुत सारी बातें की जो आपको आगे पता चलेंगी। वो मुझसे चैट करके बहुत मजा लेती थी। मुझे भी उसके साथ बड़ा मजा आता था।

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एक दिन उसने मुझसे कहा कि वह सचमुच में मुझसे चुदाना चाहती है। पर मैं मुम्बई में रहता हूँ और उसका बॉस का मुम्बई में कोई टूर नहीं होता, जिसकी वजह से हम लोग कभी भी मिल नहीं पाये थे। पर हम दोनों ने अपने फोन नम्बर और घर का पता एक दूसरे को बता दिया था और एक दूसरे को कार्ड भी भेजते थे और हम चैट-रुम में ही चुदाई का मजा लेते थे।

फिर एक दिन जब हम चैट कर रहे थे तो वह बोली कि उसका बॉस मुम्बई में एक नई शाखा खोलने की सोच रहा है और इसके लिये वे टूर पर मुम्बई आ रहे हैं। और उसने अपने बॉस से बात की कि वह टूर समाप्त होने के बाद चार दिन के लिये मुम्बई में अकेले रुकना चाहती है होटल में, कम्पनी के खर्चे पर। उसका बॉस इस बात के लिये राजी हो गया है।

मैं तो यह खबर सुन कर बहुत खुश हुआ क्योंकि अब हम वह सब कर सकते थे जो कि हमने करने की चैट-रूम में बात की थी। उसने कहा कि वह ताज होटल में रुकने वाली है और उसका कमरा नम्बर वह बाद में मुझको फोन पर बतायेगी। उसने कहा कि वह 4 फरवरी को मुम्बई आ रही है और 8 फरवरी को मुझको फोन करेगी।

पर 4 तारीख को उसका फोन आया कि वह मुम्बई पहुँच गई है और बाद में मुझ को फोन करेगी।

मैंने उसको कहा- मैं तुम्हारे फोन का इंतजार करूँगा।

पर 8 तारीख को उसका फोन नहीं आया। मैंने सोचा कि शायद काम पूरा नहीं हुआ होगा। लेकिन फिर 9 और 10 तारीख को भी उसका फोन नहीं आया अब तो मैं बहुत ही उतावला हो रहा था । सोचने लगा कि कहीं वह मजाक तो नहीं कर रही थी। पर मैं कर भी क्या सकता था उसके फोन के इंतजार के अलावा।

फिर अगले दिन बुधवार था दोपहर को करीब एक बजे रीमा का फोन आया उसकी अवाज सुनते ही मेरा लंड खड़ा हो गया। मैंने पूछा- तुमने फोन क्यों नहीं किया ? मैं तो सोच रहा था कि तुम फोन ही नहीं करोगी।

रीमा ने कहा कि ब्रान्च खोलने के बात पक्की हो गई है इसलिये वह, उसका बॉस और यहाँ का मैनेजर मिल कर दो दिन से मौज कर रहे थे। दोनों ने मिल कर उसको दो दिन तक बहुत जम कर चोदा था। इसलिये दो दिन वह फोन नहीं कर पाई आज सुबह ही उसका बॉस वापस दिल्ली गया है और वह सुबह से आराम कर रही थी जिससे कि मेरे साथ पूरी तरह से मजा ले सके। लेकिन उसको पहले से ही पता था कि वह मुझको 11 तारीख से पहले फोन नहीं कर पायेगी।

मैने पूछा- फिर तुमने बताया क्यों नहीं?

रीमा बोली- मैं तुमको कुछ देर तड़पाना चाहती थी। मुझको जवान लड़कों को तड़पाने में बड़ा मजा आता है।

मैंने पूछा- अब तो बताओ कि तुम्हारा रूम नम्बर क्या है।

रीमा बोली- मुझ से मिलने के लिये तड़प रहे हो?

मैंने कहा- हाँ !

ठीक है, बता देती हूँ तुमको ! तुम भी क्या याद करोगे। मेरा रूम नंम्बर 514 है।

मैंने कहा- ठीक है, मैं अभी वहाँ पहुँच रहा हूँ।

रीमा ने कहा कि वह भी बड़ी बेसबरी से मेरा इंतजार कर रही है और जैसे हो, वैसे ही चले आओ क्योंकि वैसे भी इन चार दिनों में मैं तुमको कोई कपड़े तो पहनने दूंगी नहीं। बस अब चले आओ दौड़ कर अपनी माँ के पास।

मैंने कहा- ठीक है माँ, आता हूँ अभी।

रीमा बोली- मैंने अपने कमरे के बाहर “डू नॉट डिस्टर्ब” का साईन लगा दिया है जिससे कि जब घंटी बजेगी तो मैं समझ जाऊँगी कि तुम हो।

मैंने कहा- ठीक है।

फिर मैंने फोन रख दिया और अपने बॉस के पास गया। मैंने छुट्टी के लिये पहले से ही बोल रखा था इसलिये कोई परेशानी नहीं हुई। नहीं तो जिस तरह की मेरी बॉस थी छुट्टी मिलना बिल्कुल ही नामुमकिन था।

फिर जल्दी से मैं टैक्सी पकड़ कर होटल पहुँच गया। मेरा दिल धक धक कर रहा था। मैं आज तक कुवाँरा था आज मेरे इस कुंवारे लंड को चुदाई-चुसाई का मजा मिलने वाला था। फिर मैं लिफ़्ट से पाँचवे माले पर गया जहाँ पर रीमा का कमरा था। जैसे ही मैं गलियारे से निकल कर रीमा के कमरे की तरफ़ जा रहा था तो दीवार पर लगे साईन को देख कर मैं समझ गया कि उसका कमर होटल के आलीशान रूम में से एक था।

थोड़ी देर में मैं कमरे तक पहुँच गया, मैंने धड़कते हुये दिल से घण्टी बजाई।

अन्दर से रीमा की आवाज आई- आ रही हूँ दीपक बेटा।

कुछ पल बाद कमरे का दरवाजा खुला। और मेरे सामने रीमा खड़ी थी।

मैं अभी उसे ठीक से देख भी नहीं पाया था कि उसने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अन्दर खींच लिया। और एक झटके के साथ दरवाजा बन्द कर दिया। मैं उसकी इस हरकत से एक दम सकपका गया।

रीमा ने कहा- अगर मैं तुमको इस तरह से अन्दर नहीं खींचती तो तुम बाहर खड़े खड़े ही मुझ देखते रहते जो कि मैं नहीं चाहती थी। तुमको मुझको देखना हे तो लो मैं तुम्हारे सामने खड़ी हो जाती हूँ, जी भर के देख लो।

ऐसा कह कर वह मेरे सामने अपने दोनों हाथ कमर पर रख कर खड़ी हो गई। खड़ी होने से पहले उसने अपनी साड़ी का पल्लू उतार कर अपनी कमर से नीचे गिरा दिया। यह सब इतनी ज्लदी में हुआ था कि मुझे उसको देखने का मौका भी नहीं मिला था। अब वह मेरे सामने थी और मैं जी भर कर उसको देख सकता था।


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