शकीना लड़की नहीं रंडी थी

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कहानी बहुत साल पहले की हैं जब हम लोग कोलेज के फायनल इयर में थे. मैं और मेरा दोस्त राजू जिसकी यह कहानी हैं. राजू के मकान के सामने एक बहुत बड़ी कोठी थी जिसमे एक बिजनेशमेन रहता था. वो अपनी बीवी और बेटी के साथ रहता था. उसकी बेटी की उम्र करीब 18-19 साल की होंगी. जब भी मैं राजू को मिलने जाता तो यह लड़की घर के ऊपर के मजले से हमें देखती थी. इस लड़की का कमरा राजू के मकान के बिलकुल सामने ही पड़ता था. उसके बाप के डर से पहले पहले हम उसकी और ध्यान नहीं देते थे.

राजू ने फिर मुझे इस माँ बेटी के बारे में बताया. राजू के मुताबिक़ उस लड़की का नाम शकीना था और उसकी माँ का नाम राबिया था. एक दिन राजू ने शकीना की माँ को गाडी में कही जाते देखा, वो गाडी में बैठी थी और शकीना घर के मेन गेट के पास खड़ी थी. शकीना को उसकी माँ कह रही थी की 4-5 दिन पढने के लिए मत जाना और अपने अब्बू के खाने का ध्यान रखना. घर में अकेली हो तब दरवाजे को बंध ही रखना.

दुसरे दिन राजू के माता पिता कहीं बहार गये थे और वो अपने किचन में मेगी बना रहा था. तभी उसके घर की घंटी बजी. उसने दरवाजा खोला तो सामने शकीना खड़ी थी.

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जी, मेरा नाम शकीना हैं हम आप के नए पडोसी हैं. मेरी माँ बहार गई हैं और मुझे थोडा सा दही चाहिए था.

राजू: शकीना मेरे माता पिता भी दो दिन के लिए बहार गए हैं. मेरे पास दही हैं लेकिन वो ताजा नहीं हैं. लोगी क्या…!

राजू ने लोगी क्या को थोडा खिंचा और उसे दबी आवाज में कहा.

शकीना: राजू आप से मिलकर ख़ुशी हुई मुझे.

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राजू: मुझे उस से भी ज्यादा ख़ुशी हुई.

इतना कह के राजू ने अपना हाथ शकीना की और बढ़ा दिया. दोनों ने हाथ मिलाये और राजू के हाथ को मस्त स्पर्श हुआ मुलायम चमड़ी का.

शकीना: राजू आप का हाथ तो बहुत हार्ड हैं यार.

राजू: हां, वो तो हैं. अच्छा तुम किस कोलेज में पढ़ती हो.

शकीना: मैं सेंट्रल कोलेज में हूँ, लेकिन आजकल कम ही जाती हूँ. मेरे अब्बू कहते हैं की कोलेज रोज जाओंगी तो किसी लड़के को दोस्त बनाओगी, इसलिए मैं उनके डर से नहीं जाती हूँ.

राजू: लेकिन मुझ से तो अब दोस्ती हो गई हैं ना? कहीं तुम्हारे अब्बू इस से तो नहीं डाटेंगे तुम्हे?

शकीना: नहीं मैं उन्हें हमारे बारे में पता ही नहीं चलने दूंगी.

शकीना के यह कहते ही राजू समझ गया की वो एक लंड की प्यासी और रंडी किसम की लड़की हैं. और राजू यह भी जान गया की इसे दही नहीं बल्कि लंड का मख्खन लेना था जिसके लिए वो यहाँ आई थी. राजू ने अपने हाथ को उसके हाथ की और किया और शकीना को अपनी और खिंच लिया. शकीना के बूब्स राजू की चेस्ट से टकरा गए.

शकीना: अरे इतनी जल्दी नहीं हम लोग दरवाजे पे खड़े हैं किसी ने देख लिया तो…!

राजू ने शकीना को अंदर खिंचा और डोर को बंध कर दिया. डोर को बंध करते ही शकीना ने भी राजू को बाहों में भर लिया और उसे लिप किस करने लगी. राजू के हाथ शकीना के बूब्स पर चले गए और वो उन्हें दबाने लगा.

राजू: बहुत बड़े हैं तेरे मम्मे तो शकीना…!

शकीना: राजू जल्दी करो, अब्बू आ जायेंगे कुछ देर में.

राजू: अरे हाँ मेरी रंडी मैं भी जल्दी ही चोदुंगा तुझे. मेरे को भी बहार जाना हैं और अगर 20 मिनिट में नहीं पहुंचा तो पुरे 22 लोग चोदने के लिए आ पहुंचेंगे.

शकीना: क्या?


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