सुहागरात किसी और के साथ मनाने का मजा

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हैलो..दोस्तो मेरा नाम अंजली है.. यह बात तब की है जब मेरी शादी को हुए 2 महीने हुए थे। मेरे पति विदेश में काम करते थे। मेरी सुहागरात के दिन वो सब नहीं हुआ.. जो मुझे मेरी सहेलियों ने बताया था। या यह कहो कि बस मैं कुंवारी ही रह गई.. मेरे पति मुझे चोदने से पहले ही गिर गए और सो गए।

शादी के बाद वो 15 दिन ही मेरे साथ रहे.. उसके बाद वो सिंगापुर चले गए, बोले- जल्दी ही मेरा वीसा बनवा कर मुझे ले जायेंगे। शादी के बाद मैं मायके आ गई। मैं घर पर बैठी-बैठी बोर हो जाती थी… तो अपनी दोस्त निशा के वहाँ चली जाती थी या ससुराल चली जाती थी।

एक दिन और मेरी सहेली निशा कैफ़े में बैठे थे.. तो उसके भाई का दोस्त भी वहाँ आ गया। उसका नाम साकेत था.. वो देखने में बहुत ही स्मार्ट था, मैं उसको देखती ही रह गई। निशा ने उससे मेरा परिचय करवाया। हम दोनों एक-दूसरे को देखते ही रह गए यह बात निशा ने नोट कर ली।

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वो जैसे मेरे मन को भा गया। मैं जब भी निशा के घर जाती वो मुझे वहाँ मिल ही जाता था.. उसको देख कर मेरे चेहरे पर एक मुस्कान सी आ जाती थी। यह बात निशा समझ रही थी। एक दिन उसने मुझसे कहा- साकेत तुझसे दोस्ती करना चाहता है। मैंने तुरंत हामी भर दी.. निशा ने मेरा जबाव उस तक पहुँचा दिया। दूसरे दिन जब हम दोनों कैफ़े में बैठे थे.. तो निशा ने साकेत को फोन करके बुला लिया।

जैसे ही साकेत आया तो निशा मुझसे बोली- यार मुझे जाना है.. तू साकेत से बात कर.. मैं अभी 1 घंटे में आती हूँ।
ऐसा कह कर वो चली गई.. हम लोगों ने एक-दूसरे से बात की.. उसके बाद उसने मेरा फ़ोन नंबर ले लिया और वो चला गया।

हमारी फ़ोन पर बात शुरू हो गई.. धीरे-धीरे मैं उसकी तरफ खिंचने लगी। निशा भी मुझे उसका नाम ले कर छेड़ने लगी थी। लगभग दस-बारह दिनों में ही हम एक-दूसरे के करीब आ गए थे।

एक दिन मैं और निशा कैफ़े के केबिन में थे.. जो कि एक प्राइवेट केबिन जैसा था.. जहाँ कोई आता नहीं था। वहाँ साकेत आ गया। निशा ने उसको मेरे पास बैठा दिया और बोली- साकेत जब से तुम इसको मिले हो.. तब से यह बहुत खुश रहती है। मैं इसको ऐसे ही खुश देखना चाहती हूँ।

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उसने मेरे कंधे पर हाथ रखा और बोला- आप फिकर मत करो। मैं इसको ऐसे ही खुश रखूँगा..
फिर निशा बोली- तुम लोग बात करो.. मैं जाती हूँ। जैसे ही वो गई.. उसने मुझे अपनी तरफ खींच लिया और मेरे होंठों को हल्के से चूम लिया। मैं कुछ कहती.. इतने मैं तो उसने मेरा हाथ में अपने लौडा पर से छुआ दिया..

मैं हैरान रह गई और वहाँ से चली गई लेकिन मेरे आँखों के सामने उसका चेहरा घूमने लगा। लेकिन तभी मुझे मेरे पति की याद आ गई.. मैं उनसे धोखा नहीं करना चाहती थी। फिर साकेत ने मुझे फ़ोन किया.. उसका नंबर देखते ही मुझे फिर से पता नहीं क्या हो गया।

मैंने फोन उठाया तो उसने सीधा बोला- आई लव यू…मेरे मुँह से भी निकल गया- आई लव यू टू…फिर तो वो बहुत खुश हो गया और मेरी तारीफ़ करने लगा कि मेरा साइज़ बहुत मस्त है.. मेरे मम्मे बहुत मस्त हैं। मेरा साईज उस समय 34-28-36 का था।

उसने मुझसे कहा- तुम मुझे किस करो। मैंने मना कर दिया तो बोला- अरे फोन पर तो चुम्मा दे दो। मैंने उसको ‘पुच्च…’ की आवाज निकाल कर किस दे दिया.. उसके बाद से हम रोज सेक्स पर भी बात करने लगे। दोस्तों आप ये कहानी गुरु मस्तराम डॉट  कॉम पर पढ़ रहे हैl

मैं अन्दर से सुलगने लगी.. लेकिन अपने पति के बारे में सोच कर आगे नहीं बढ़ रही थी। वो कई बार मुझसे रात को मिलने की जिद करता था। मेरा भी खूब मन करता था.. पर मैं मना कर देती थी, मैं अपने पति को धोखा नहीं देना चाहती थी।
इस बात के बारे में निशा को मैंने बता दिया तो उसने कहा- जो तेरी इच्छा हो वो तू कर।

हम लोग मिलते थे.. तो वो मुझे किस भी करता था और सेक्स की मांग करता था.. बात यह थी कि मैं रात को बाहर नहीं जा सकती थी इसलिए वो संभव नहीं था। मेरी शादी को लगभग दो महीने होने वाले थे.. तभी निशा ने बताया कि उसकी बहन और उसके भाई की शादी फिक्स हो गई और उसने मेरे घरवालों से बात कर ली कि मैं 7 दिन के लिए उसके वहाँ रहूँगी।

इस बात के बारे में मैंने साकेत को बताया तो वो बहुत खुश हुआ। निशा की बहन की शादी से एक दिन पहले महिला संगीत को उसने मुझे मना लिया कि मैं उसके साथ रात को खाने पर उसके घर आऊँ। मैं तैयार हो गई.. क्योंकि घर पर उसका परिवार होगा.. महिला संगीत रात को 8 से 11 बजे तक था। उसके बाद मेहंदी और बाकी की रस्में थीं..

मैंने काली साड़ी पहनी.. इसमें में बहुत ही मस्त लग रही थी।
मैंने निशा को बताया- मैं साकेत के साथ उसके घर जा रही हूँ.. डिनर पर.. दस बजे तक आ जाऊँगी।
तो वो बोली- जानेमन मत जा.. वरना तू सुबह तक भी नहीं आ पाएगी।

मैंने पूछा- क्यों?
तो वो बोली- आज वो तेरे साथ सुहागरात मनाने वाला है.. आज वो तुझे रात भर जम कर चोदेगा.. आज रात वो अपनी इच्छा पूरी करके ही रहेगा।
मैंने कहा- नहीं यार.. उसके घर पर उसका पूरा परिवार है.. ऐसा कुछ नहीं होगा।

तो निशा बोली- मेरी जान उसका परिवार तो अभी यहाँ आने वाला है.. और 4 दिन तक यहीं रहेगा और वैसे भी तू आज बहुत सुंदर लग रही है.. वो आज तुझे नहीं छोड़ेगा।
मैंने कहा- वैसे तो ऐसा होगा नहीं.. फिर भी अगर हो ही गया.. तो फिर हो जाने दे.. देखा जाएगा।
तो निशा बोली- ठीक है मेरी जान.. मतलब यह कि आज तेरा पूरा मन हो गया है कि आज तो अपना सब कुछ उसको देकर ही रहेगी..

मैं बोली- यार बेचारे को बहुत तरसा दिया है.. अब आज मौका मिला है तो कर लेने दो.. उसकी मुराद पूरी..


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4 Comments
  1. February 1, 2017 |
  2. February 1, 2017 |
  3. deepak shingh
    February 1, 2017 |
  4. February 1, 2017 |