सेक्स की सच्ची कीमत

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हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम राहुल है और मेरी उम्र 28 साल है, में दिखने में एकदम ठीक ठाक हूँ. दोस्तों में लगातार कहानियाँ पढ़ता आ रहा हूँ और में कहानियाँ करीब पिछले दो सालों से पढ़ता आ रहा हूँ और आज में आप सभी को अपनी भी एक ऐसी ही सच्ची घटना सुनाने जा रहा हूँ और में उम्मीद करता हूँ कि जिसको पढ़कर आपको मज़ा जरुर आएगा. दोस्तों उस समय में MBA का स्टूडेंट था. दोस्तों हो सकता है कि आपको मेरी यह कहानी थोड़ी लंबी लगे, लेकिन मैंने कोशिश की है जो में आज आपको बताने जा रहा हूँ, वो सब आपको आपकी आँखो के सामने एक बार होता हुआ जरुर नज़र आए.

दोस्तों एक बार की बात है, में और मेरे दो दोस्त दीवाली की छुट्टियों में ट्रेन से अपने घर पर आ रहे थे और सभी जवान लड़को की तरह हम भी पूरी ट्रेन में बैठी हुई औरतों को देखते थे और जहाँ मस्त लड़की या भाभी बैठी होती तो हम वहीं चड़ जाते थे, लेकिन इस बार हम थोड़ा लेट हो गये और फिर ट्रेन चल पड़ी तो हमने भागकर ट्रेन पकड़ी और अपने बेग रखकर आपस में हंसी मज़ाक करने लगे और मज़े लेते रहे, करीब 15 मिनट के बाद मेरे एक दोस्त विकास ने मुझसे कहा कि पीछे की सीट पर बैठी हुई एक शादीशुदा औरत मुझे लगातार देखे जा रही है और मेरी पीठ उस तरफ थी, शायद उस भाभी ने ट्रेन में चड़ते समय मुझे नहीं देखा होगा.

में : वो कहाँ है भाई?

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विकास : एकदम तेरे पीछे वो मस्त माल है.

में : साले तू क्या अब तक उसी को लाईन मार रहा था?

विकास : हाँ, लेकिन वो तुझे देखकर मुस्कुरा रही है, तू कोशिश कर में वो सामने वाली लड़की को देखता हूँ अगर कुछ होता है.

फिर मैंने पीछे पलटकर देखा तो वो मुझे देख रही थी और हमारी नज़रे मिली और उसने मेरी तरफ स्माईल किया, उफफफ्फ़ वाह क्या लग रही थी एकदम गोरी और लाल कलर की लिपस्टिक, गोल चेहरा, काजल लगाई हुई बड़ी बड़ी आँखे और वो हरे रंग की साड़ी पहने हुए एकदम कयामत लग रही थी. में तो उसे देखते ही उस पर बिल्कुल फ़िदा हो गया और अब मैंने भी उसे देखना शुरू किया और वो बार बार हंस रही थी और अपने पास वाली औरत से बातें कर रही थी और वो अपने परिवार के साथ थी जिसमें दो आदमी तीन औरते और बच्चे थे और वो माता के दर्शन करके आ रहे थे.

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कुछ देर तक तो ऐसा ही नैन मटक्का चलता रहा, लेकिन फिर मैंने मौका देखकर उसकी तरफ आँख मार दी और वो बहुत ज़ोर से हंस दी, उसकी साथ वाली ने पूछा तो उसने मेरी और इशारा करके उसे कुछ बताया और अब वो भी मुझे देखने लगी, जिसकी वजह से मेरी तो गांड फट गई थी और में मन ही मन सोचने लगा कि कहीं अब यह अपने परिवार वालों को ना बता दे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ और अब में बार बार उसे आँख मारने लगा और फिर मैंने उसे एक हवा में किस भी दे दिया.

कुछ देर बाद कोई स्टेशन आया, लेकिन ट्रेन में बहुत भीड़ थी तो इसलिए वो उतर नहीं सकती थी और में दरवाजे के पास ही खड़ा था तो वो मुझे कुछ कहने वाली थी, लेकिन अचानक रुक गई. फिर मैंने उससे इशारे से पूछा कि क्या हुआ? तो उसने मेरी तरफ बॉटल की इशारा किया और फिर मुझसे कहा कि प्लीज क्या आप थोड़ा पानी ला देंगे? वाह दोस्तों उसकी क्या आवाज़ थी, एकदम मेरे दिल के पार हो गई और दोस्तों आप तो जानते ही हो ऐसे टाईम पर दिल हवा में उड़ने लगता है. मैंने उससे कहा कि जी हाँ आप बैठे रहिए और में अभी लेकर आता हूँ.

फिर में जल्दी से गया और पानी ले आया और उसको बोतल देते वक़्त मैंने उसके हाथों को छू लिया और जिसका मुझे एकदम कोमल एहसास हुआ जैसे मैंने कोई मखमल को छुआ हो और उसके बाद फिर वही शुरू हो गया, क्योंकि उसके परिवार वालों के सामने में कुछ रिस्क नहीं ले सकता था और ऊपर से वो एक शादीशुदा भी थी, कुछ देर में उनका स्टेशन आया और वो लोग खड़े हो गये और अपना सामान लेकर दरवाजे के पास आ गये, वो मेरे बिल्कुल पास खड़ी हुई थी, लेकिन उसका मुहं दूसरी तरफ था.

मैंने एक कागज पर अपना मोबाईल नंबर लिखा और उसे देने लगा, लेकिन उसने गुस्सा दिखाया कि कोई देख लेगा और उसने वो नहीं लिया, लेकिन मैंने जब अपने हाथ को उसकी बड़ी गांड पर लगाया तो मुझे मज़ा आ गया और फिर मैंने उसे दबा दिया तो वो मुझे गुस्से से देख रही थी, लेकिन ज्यादा भीड़ की वजह से किसी ने नहीं देखा और पांच मिनट मैंने तक बहुत मजा लिया.

फिर स्टेशन आ गया और वो उतर गये. मुझे बहुत दुःख हुआ कि ना उससे कोई बात हुई और ना उसका पता लिया और ना ही उसे अपना फोन नंबर दिया, लेकिन वो नीचे उतरकर भी मुझे देखे जा रही थी, उसके परिवार के लोग सामान उठाकर जाने लगे और वो सबसे पीछे चल रही थी और अब ट्रेन भी आगे बढ़ने लगी थी.

तभी वो मुझे इशारा करने लगी, में ट्रेन से कूद गया और दौड़ता हुआ उसके पास से निकलकर फिर ट्रेन में चड़ गया और किसी को पता नहीं चला कि मैंने अपना मोबाइल नंबर भागते हुए उसके हाथ में थमा दिया था और अब मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा, लेकिन मुझे अभी तक उसका नाम भी नहीं पता था और मैंने उसका फिगर भी ज्यादा ध्यान से नहीं देखा, क्योंकि में उसकी आँखो में ही खोया रहा. अब में भी शाम को अपने घर पर पहुंच गया और उसका फोन आने का इंतजार करने लगा, लेकिन दो दिन बीत गये और में अपनी दूसरी अप्सरा को लाईन मारने में लग गया.

दोस्तों क्या करे वो उम्र ही कुछ ऐसी होती है. फिर शाम को करीब 7 बजे मेरे मोबाईल पर एक अनजाने नंबर से एक मिस कॉल आया, लेकिन मैंने ध्यान नहीं दिया, क्योंकि में मिस कॉल पर ज्यादा ध्यान नहीं देता था, क्योंकि वो सब रॉंग नंबर ही होते है, लेकिन थोड़ी देर बाद फिर से एक कॉल आया और मैंने बात की.

प्रीति : हैल्लो हैल्लो क्या आप राहुल बोल रहे है? ( दोस्तों मैंने अपने मोबाईल नंबर के साथ साथ अपना नाम भी उस कागज पर लिखा था. )

में : हाँ जी में बोल रही हूँ, लेकिन आप कौन हो और बताइये आपको किससे बात करनी है.

प्रीति : जी मेरा नाम प्रीती हूँ और मुझे आपसे ही करनी है, मुझे लगता है कि आपकी याददाश्त बड़ी कमज़ोर लगती है?

तभी मुझे याद आया कि यह वो ट्रेन वाली ही होगी और अब में ख़ुशी से उछल पड़ा.

में : नहीं मेरी याददाश्त ही क्या मेरा सब कुछ बहुत मज़बूत है बस अंजान नंबर था तो इसलिए में जान नहीं पाया.

प्रीती : वैसे कितनी को जानते हो आप?

में : बस आपको ही जानना चाहता हूँ और बाकी सब तो मोह माया है.

प्रीती : हाँ, लेकिन इस मोह माया ने सबका चेन उड़ाया हुआ है.

में : मुझे तो लगा था कि आप मुझे भूल ही गई और मेरे इतने दिन कैसे गुज़रे में आपको बता नहीं सकता.

प्रीती : सिर्फ़ दो दिन ही हुए है जी और आप ऐसे बोल रहे हो, जैसे पिछले दो साल हो गये.

में : आपके लिए दो दिन होंगे, लेकिन मेरे लिए तो दो जन्म थे प्रीति जी.

प्रीती : हाँ बस बस रहने दीजिए हमे पता है आजकल क्या सब होता है?

में : क्यों आपको ऐसा क्या पता है?

प्रीती : कुछ नहीं पहले हमारी अच्छे से जान पहचान तो हो जाए, लेकिन आप तो मुझे छेड़ने लगे.

में : जी हाँ बिल्कुल हो जाए और आपके सामने तो भगवान का भी ईमान डोल जाए और में तो एक मामूली इंसान हूँ.

प्रीती : आप बातें बहुत अच्छी बनाते हो और अब मुझे मस्का ना लगावो, खैर छोड़ीए और मुझे बताए कि आप क्या करते है और कहाँ रहते है?

में : में MBA कर रहा हूँ और अपने कॉलेज के हॉस्टल में रहता हूँ और आप?

फिर प्रीति ने अपने बारे में बताया कि वो पिछले दो साल से शादीशुदा है, लेकिन उसके कोई बच्चा नहीं है, क्योंकि उसके पति अभी बच्चा पैदा नहीं करना चाहते और वो एक बहुत अच्छे इंसान है और वो उसका बहुत ख्याल रखते है, लेकिन बस वो अक्सर बाहर रहते है तो इसलिए थोड़ा अकेलापन लगता है और बाकी लाईफ में सब कुछ ठीक ठाक है.

में : तो फिर तुमने मुझसे दोस्ती क्यों की?

प्रीती : मुझे बहुत अकेलापन महसूस होता है तो इसलिए मुझे किसी दोस्त की ज़रूरत होती है, क्योंकि में अकेली एकदम बोर हो जाती हूँ.

में : ठीक है तो सिर्फ़ हम ऐसे ही बातें करेंगे या आप कभी अपने दोस्त से मिलेगें भी?

प्रीती : वो सब बाद में देखा जाएगा और में तुम्हे सबसे पहले बता दूँ कि कोई ऐसी वैसी नहीं हूँ बस तुम मुझे अच्छे लगे तो इसलिए मैंने तुमसे दोस्ती की.

में : चलो ठीक है अब आप ज्यादा नराजगी मत दिखाओ.

दोस्तों फिर हमारी बातों का सिलसिला ऐसे ही चलने लगा और एक दिन हम एक मॉल में मिले, क्योंकि उसने मुझे बुलाया उसकी शॉपिंग में मदद करने के लिए, में वहां पर एकदम ठीक समय पर पहुँच गया और वो मेरा वहीं पर एक रेस्टरोंट में इंतजार कर रही थी.

दोस्तों वो बेहद सुंदर हुस्न की परी जो किसी के छू लेने से भी मैली हो जाए, वो काली कलर की साड़ी में आई थी और उसकी पतली कमर बिना बाह का वो ब्लाउज जो थोड़ा गहरे गले का था और पीछे की साईड पर खुले बिखरे हुए बाल जो उसकी गोरी पीठ को छुपा रहे थे, गुलाब की पंखुड़ियो से एकदम गुलाबी होंठो से जब उसने ही बोला तब में होश में आ गया और वो मुस्कुराने लगी.

प्रीती : क्या बस ऐसे घूरकर देखते ही रहोगे या कुछ बोलोगे भी?

में : पहले मुझे अपने पूरे होश में तो आने दीजिए हुज़ूर.

प्रीती : अभी से होश खो बैठे जनाब तो इसके आगे तुम्हारा क्या होगा?

में : क्या मतलब?

प्रीती : कुछ नहीं अब जल्दी से चलो मुझे शॉपिंग करनी है और थोड़ा जल्दी करो, मेरे पास समय कम है.

में : तुम हमेशा इतनी जल्दी में क्यों रहती हो?

प्रीती : क्योंकि में आपकी तरह लड़का नहीं हूँ और में एक शादीशुदा हूँ प्लीज यार समझा करो, घर में कितने काम होते है.

में : ठीक है अब बताओ आपको क्या खरीदना है और हम कहाँ चले?

प्रीती : बस मुझे अपने लिए कपड़े और कुछ घर का सामान लेना है.

में : तुम क्या हमेशा साड़ी ही पहनती हो?

प्रीती : नहीं में सब कुछ पहनती हूँ, लेकिन में अपनी शादी होने के बाद ज्यादातर समय साड़ी ही पहनती हूँ, क्यों तुम्हे पसंद नहीं?

में : नहीं यार तुम तो कयामत ढा रही हो, देखो सब कैसे तुम्हे देख रहे है जैसे अभी कच्चा खा जाएँगे.

प्रीती : हाँ में सबको देख रही हूँ और मुझे सबका तो पता नहीं, लेकिन मुझे तो तुम्हारे इरादे बिल्कुल भी ठीक नहीं लग रहे है, प्लीज चलो अब यहाँ से मुझे बहुत जल्दी है.

फिर हमने शॉपिंग की और साथ में लंच भी किया और फिर वो अपने घर पर चली गई, उसने मुझे भी एक जीन्स गिफ्ट किया, लेकिन उसने मुझसे बदले में कुछ गिफ्ट नहीं लिया और वो मुझसे बोली कि में बाद में ले लूँगी जो मुझे चाहिए और उन दिनों उसके पति कहीं बाहर टूर पर थे तो रात को मेरी उससे फिर फोन पर बहुत सारी बातें हुई.

में : हाय, आज तो तुमने मेरा कत्ल कर दिया, क्या ज़रूरत थी इतना सेक्सी लगने की?

( दोस्तों अब तक हम बहुत अच्छे दोस्त बन गये थे और एक दूसरे से बिल्कुल खुलकर बातें करते थे, लेकिन मज़ाक के तौर पर. )

प्रीती : क्यों ऐसा क्या था आज?

में : वही तो में बताने जा रहा हूँ और आज घर पर आने के बाद मुझे कई बार बाथरूम जाना पड़ा.

प्रीती : अच्छा वो क्यों भला?

में : क्यों जैसे तुम कुछ जानती ही नहीं?

प्रीती : अब मुझे क्या पता कि तुम बाथरूम क्यों गये थे? क्योंकि में तो हमेशा नहाने जाती हूँ और वो भी दिन में एक बार.

में : हाँ जी आपको क्या ज़रूरत है बार बार बाथरूम में जाने की, क्योंकि आप तो शादीशुदा हो यह तो हम जैसो का काम है.

प्रीती : क्यों शायद शादीशुदा को ज्यादा जाना पड़ता हो?

में : लेकिन क्यों?

प्रीती : अब आप भी इतने भोले नहीं हो जितना बनना चाहते हो.

में : क्यों तुम अपने पति को सोचती हो ना?

प्रीती : यह भी कोई पूछने की बात है और वो तो हर शादीशुदा लड़की अपने पति को करती है, लेकिन यह मेरी मजबूरी है, क्योंकि मेरे उनका काम ही कुछ ऐसा है.

में : हाँ तो उस कमी को पूरा भी किया जा सकता है.

प्रीती : वैसे में इतनी भी बेकार नहीं हूँ और में अपने पति से बहुत प्यार करती हूँ.

में : हाँ, लेकिन तुम प्यार और सेक्स को एक अलग अलग जगह पर रखकर सोचो, क्योंकि सेक्स एक ज़रूरत है और प्यार एक अहसास है.

प्रीती : लेकिन बिना एहसास के प्यार नहीं होता और प्यार भरा अहसास एक ना एक दिन सिर्फ़ एक सेक्स बनकर रह जाता है.

में : हाँ वो तो उस बात पर निर्भर करता है ना कि सामने वाला आपसे प्यार करता है या सिर्फ़ आपके साथ सेक्स करता है.

प्रीती : यह क्या बात हुई?

में : अच्छा सोचो कि तुम जिससे सेक्स कर रही हो वो तुम्हे प्यार करता है, लेकिन तुम नहीं तो इससे तुम्हे एहसास भी होगा और ज़रूरत भी पूरी होगी.

प्रीती : अब ऐसा आदमी कौन मिलेगा, क्योंकि सब सेक्स के पीछे भागते है.

में : तुम बुरा ना मानो तो में तुमसे कहना चाहता हूँ कि में तुमसे बहुत प्यार करता हूँ और अगर तुम शादीशुदा नहीं होती तो में तुमसे शादी भी कर लेता.

प्रीती : यह क्या बकवास है? मैंने तुम्हे पहले ही कहा था ना कि तुम मुझे ऐसी वैसी मत समझना.

में : प्लीज बिल्कुल भी ग़लत मत समझो, में अपने दिल का अहसास तुम्हे बताने जा रहा हूँ और तुम्हारी कुछ मदद करना चाहता हूँ.

प्रीती : चुप रहो तुम मुझसे सीधा सेक्स करने को कह रहे हो और फिर प्यार जता रहे हो.

में : प्लीज तुम मेरी भी तो बात सुनो, लेकिन उसने फोन कट कर दिया और वो मुझसे बहुत नाराज़ हो गई और कुछ दिन तक हमारी बात नहीं हुई.

फिर मैंने इस बीच उसे कई बार फोन किया, लेकिन उसने कोई भी जवाब नहीं दिया. फिर एक दिन उसका एक मैसेज आया तो उसने मुझे शाम को 6 बजे मिलने के लिए बुलाया, मुझे नहीं पता कि क्या बात होगी और में 6 बजे वहां पर पहुंच गया, लेकिन वो वहां पर नहीं आई और मैंने 7 बजे तक उसका इंतजार किया और फिर घर आ गया और मैंने उसको कई बार फोन भी किया, लेकिन उसका मोबाईल भी बंद आ रहा था. फिर अगले दिन उसका कॉल आया तो उसने मुझसे कहा कि मुझसे गलती हो गई और उसने मुझे बताया कि वो आने वाली थी कि तभी उसका पति आ गया तो इसलिए वो नहीं आई.


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