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ससुरजी का बुढ़ापे में इतना स्टैमिना

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हाई आइ एम पिकु मिश्रा फ्रॉम पजाब.मैं एक शादी सुदा औरत हूँ..मैं वैसे अन्तर्वासना- स्टोरी डॉट कॉम की रेग्युलर व्यूवर नही हूँ..बस अभी 2 दिन पहले ही किसी के कहने पर मैने साइट देखो ओर मैने स्टोरी पढ़ी..तो मुझे लगा क्यों ना मैं अपने बारे मे कुछ लिखू..मेरी फर्स्ट स्टोरी है तो हो सकता है शायद आप बोर हो या आपको पसंद ना आए..

मैं पिकु शादी सुदा हूँ 32 साल की एज है आंड मेरे पति के साथ मैं लुधियाना मे रहती हूँ.हमारे फॅमिली मे मेरा 4 साल का बच्चा आंड मेरे ससुरजी और हम दोनो है..आज से करीब 10 साल पहले मैं शादी करके आई मेरे हब्बी के घर पर..मैं बहुत खुस थी..मेरे पति मुझे बहोत खुस रखते थे..सास ससुर भी मेरा काफ़ी ख़याल रखते थे मुझे अपनी बेटी की तरह रखते थे.

लेकिन बात तब बिगड़ी जब मेरी सास का देहांत हो गया 2 साल पहले.तबसे मेरे ससुरजी की नज़र मुझ पर बिगड़ी है..वो रिटर्मेंट लाइफ जी रहे है इसलिए पूरा दिन घरपर ही रहते है..और बार बार मुझे वासना की नज़र से देखते रहते है..कई बार अगाशी पर सुखाने रखे कपड़ो मे से वो मेरी ब्रा और पॅंटी से खेलते है वो मेने चोरी छुपे देखा है.

मेने कई बार सोचा कि अपने पति को सब बता दू कि ससुर क्या कर रहे है..पर मेरा मन नही माना कि क्यों बाप बेटो मे झगड़ा करवाना…कुछ दिन वैसे ही निकल गये..और दिन निकलने के साथ साथ मेरे ससुर की हिम्मत भी बढ़ने लगी..वो मेरे पास चाइ बनाने को कहते और जब मैं चाइ बनाती होती किचिन मे तो वो आजाते मुझे हेल्प करने के बहाने..मुझे कोई ना कोई बहाना बना कर छू ने लगे.

एक दिन की बात है मेरे हब्बी सुभह जॉब पर चले गये आंड मेरे लड़के को भी स्कूल पर उतारने को लेके गये..सुबह के 7 बजे थे मैं बाथ के लिए जा ही रही थी मैं ने मेरी ब्रा और पॅंटी ,,टवल बाथरूम मे टाँग दिए थे और अंदर जा कर अपने एक एक करके कपड़े उतारने लगी और पूरी नंगी हो कर जस्ट बाथ लेने ही वाली थी तब मेरे ससुर ने ज़ोर से आवाज़ लगाई अशीईईईईई. …..घर मे मुझे प्यार से सब पिकु की बजाय आशि कहते है.

आषीईईईईईईईई जल्दी आओ..उनकी ज़ोर की आवाज़ से मैं डर गयी..और डर के मारे हड़बड़ाती हुई सोचेते हुवे के कुछ असुभ ना हुवा हो तो अच्छा है..मेने फटाफट अंदर रखी हुई मेरी नाइटी पहनी और बाहर आई सिर्फ़ नाइटी पहने..नही मेने अंदर ब्रा पहनी थी या पॅंटी पूरे बदन पर सिर्फ़ एक नाइटी थी वो भी काफ़ी पतली थी कि उसके आरपार आसानी से देखा जा सकता था.

मैने बाहर निकल कर देखा तो वो कही दिखाई नही दिए तो मैने बाहर जाके देखा तो वो गार्डेन मे गिरे पड़े थे..मैं दौड़ती गयी उनके पास और उनको उठाने की कोसिस करने लगी तभी मैने महसूस किया कि वो मेरे नाइटी से दिखाई देने वाले मेरे बूब्स के निपल को देख रहे है ..मैं शर्मा गयी और जैसे बना वैसे उन्हे जल्दी से उठाया..उठते समय उन्होने अपना एक हाथ मेरी गंद पर रख दिया और उन्हे महसूस हो गया कि मैने अंदर पॅंटी भी नही पहनी है.

मैं ने पूछा बाबूजी क्या हुवा कैसे गिर गये वो बोले बहू पैर फिसल गया..और गिर गया..माफ़ करना बहू मुझे तुम्हे इस हालत मे बुलाना पड़ा..मैने कहा पिताजी कोई बात नही..आप आराम कीजिए..मैं बाथ लेके आती हूँ..वो बोले बहू मैं कीचड़ मे हो गया हूँ तुम बाद मे नहा लेना मुझे पहले स्नान कर लेने दो..उनकी बात सुनकार पहले तो मैं सोच मे पड़ गयी पर मुझे लगा वो मेरे पिताजी जैसे ही है मैने कहा ठीक है पिताजी आप स्नान कर लो.

उनके बाथरूम मे घुसने के बाद थोड़ी देर मे वो बाहर निकल गये..और उनके निकलने के बाद मैं नाइटी मे अपने गुप्तँग जो छुप नही रहे थे वो छुपाने की कोसिस करते हुवे अंदर चली गयी बाथ करने के लिए..और मैं मेरी धुन मे और सोच मे ही बाथ करती रही..जब स्नान ख़तम कर कर मैं ने टवल लेने के लिए हाथ बढ़ाया तो मुझे जोरो का झटका लगा वाहा मेरा रखा हुवा टवल नही था. दोस्तों आप ये कहानी अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे है l

तभी मेरे मन मे शक हुवा कि यह ससुरजी की कोई नयी चाल है फिर मैं ने सोचा कि नही वो जल्दी मे स्नान करने आए थे तो ग़लती से मेरा टवल लेगाए होगे..मैने जैसे तेसे कर के अपने आपको पोछा और अपनी पॅंटी हाथ मे ले कर पहनने जा रही थी कि मुझे कुछ गीला सा लगा मैं ने वापस पॅंटी उतार कर देखा तो अंदर पॅंटी के भाग पर चिप चिपा था कुछ मैं समझ गयी कि मेरे ससुर ने मेरी पॅंटी पर मूठ मारकर अपना वीर्य निकाला है और वो मेरी चूत पर भी थोड़ा थोड़ा लग गया था.

मुझे बहुत गुस्सा आया..आंड मैने पॅंटी निकाल कर कचरे के डिब्बे मे फेकदी..मैने ब्रा देखा तो उन्होने उसमे भी अपने वीर्य का पानी छ्चोड़ा हुवा था..मुझे इतना गुस्सा आ रहा था कि मन कर रहा था उनका खून कार डालु..मैं ने गुस्से मे आकर अपनी ब्रा भी कचरे के डिब्बे मे फेक दी..और वापस उनके वीर्य वाली चूत को मैने सॉफ किया आंड दूसरी बार भी बाथ लिया.

अब मैं सोच रही थी बाहर जाउ तो केसे जाउ क्यों की नही अब मेरे पास टवल था या नही ब्रा पॅंटी..मूज़े गुस्सा आ रहा था और अब पछतावा भी हो रहा था कि मैने क्यों जल्दबाज़ी मैने ब्रा और पॅंटी निकाल कर फेक दी कचरे मे..तभी मुझे ना चाहते हुवे भी ससूजी को आवाज़ लगा नी पड़ी.

मैं ने बाथरूम का दरवाज़ा थोड़ा खोलकर हाथ बाहर निकाला और उन्होने मेरे हाथ को टच करते हुवे मुझे टवल दे दिया…मैं ने टवल देखा तो मुझे और भी ज़्यादा गुस्सा आया क्यों कि उन्होने जो टवल दिया था वो एकदम छ्होटी साइज़ का था और उस पर 2 जगह से छोटे छोटे होल भी थे..मैं समझ गयी की आज यह बूढ़ा मुझे छ्चोड़ने वाला नही है.

मजबूरी का नाम महात्मा गाँधी..मैने वो टवल से अपना शरीर पोछा अओर अपने बूब्स से टवल को लपेटा तो देखा कि टवल छ्होटा होने की बजाह से वो मेरी चूत को ठीक तरह से नही ढक पा रहा था..तो मैने ना चाहते हुवे टवल को थोड़ा उप्पर से नीचे किया जिसकी बजाह से अब टवल मेरी निपल से नीचे था यानी की मेरे हाफ बूब्स दिख रहे थे.

वो 2 छोटे छोटे होल वो मेरी गंद की साइड पर थे जिससे मेरी गंद का गोरा रंग दिख रहा था…मैं जल्दी से बाहर आई और अपने कमरे मे चली गयी और अंदर से दरवाज़ा बंद कर लिया..बाथरूम से निकलने और रूम मे जाने के टाइम मेरे ससुर ने साले बुढहे ने मेरे जिस्म के भरपूर दर्शन कर लिए थे और मेरा ध्यान उसके पयज़ामे पर गया था उसका लंड तन गया था जोकि उसके पयज़ा मे से पता चलता था.

रात को जब मेरे पति घर आए तब मैने उन्हे बताने का काफ़ी सोचा पर कह नही पाई और मुझे रोना आ गया..उन्होने पूछा भी क्या हुवा मैने कुछ नही बताया..और सुबह हम जब उठे तो मेने देखा कि मेरे पति तैयार हो रहे थे मैं ने पूछा कहा जा रहे हो तो वो बोले कि ऑफीस के काम से 3 दिन के लिए दिल्ली जा रहा हूँ..मेरे उप्पर जैसे आसमान गिर गया.

मैं ने गुस्से से कहा अभी बता रहे हो.तो उन्हो ने कहा डार्लिंग काल रात को तुम रोने लगी थी आंड मुझे तुम्हे और परेशान नही करना तह इसलिए मैं ने नही बताया…मैं ज़िद करने लगी की मुझे भी आना है मुझे साथ ले चलो..वो मेरे उप्पर गुस्सा हो गये और बोले क्या बच्चो जेसे कर रही हो..और उन्होने मुझे सुबह सुबह एक बार अपनी बाँहो मे ले लिया और मुझे नंगा करके किस करने लगे..पर मेरा नसीब ही फूटा हुवा था.

जैसे ही उन्होने मेरी पॅंटी निकाली तो तो वो बोले की अपनी चूत तो सॉफ रखा करो तुम्हे पता है मुझे बालो वाली चूत चोदनी अछी नही लगती..मैं ने कहा आज की बार कर लो मैं अगले टाइम से सॉफ रखूँगी..उन्होने कहा नही..और उन्होने लंड मेरे मूह मे देदिया और और मेरे मूह को चोदने लगे और और उनका सारा वीर्य मेरे मूह मे भर गया..फिर मैने फटाफट कपड़े पहन लिए आंड उन्हे छ्चोड़ने के लिए बस स्टॉप चली गयी.

अब मैं और ससुरजी घर मे अकेले थे..मुझे उनसे डर लग रहा था..मैं आज वापस नहाने चली गयी..मैं ने पहले से ही आज चेक किया था कि ब्रा पॅंटी टवल बराबर है या नही है…नहा ने के बाद मैं ने खाना पकाया और दुपहर मे ने और ससुरजी ने खाना खाया साथ मे..और मेने कहा पिताजी मैं सोने जा रही हूँ..तो उन्होने कहा ठीक है. दोस्तों आप ये कहानी अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे है l

बहू..रात को ज़्यादा रोने की बजाह से मुझे नीद ठीक से नही आई थी रात को तो दुपहर को कुछ ज़्यादा टाइम के लिए आँख लग गयी थी मेरी मेरा लड़का स्कूल से आकर बाहर खेलने चला गया था…थोड़ी देर के बाद मे मेरे रूम के दरवाज़े पार किसी के खिटकिता ने की आवाज़ आई..मैं उठी और मैं ने अपने आपको देखा तो नीद मे मेरी सारी कमर तक आ गई थी.

पॅंटी दिख रही थी..सारी का पल्लू फिसल गया था..मैं ने जल्दी से कपड़े ठीक किए और अपना दरवाज़ा खोला..तो देखा कि ससुरजी थे..मैं ने कहा आप..तो उन्होने मुझे चाई देते हुवे कहा बहू तुम आज कुछ ज़्यादा ही सोई हुई थी तो मैं ने सोचा मैं ही चाइ अपने आप बना लू तो मैं ने बना के पीली और यह तुम्हारे लिए है आंड चितू को भी दूध पीला दिया है.

मैं मन ही मन सोचने लगी कि क्या ये वही ससुर है जो पिछले दिन अपने लंड का पानी मेरी पॅंटी पर डाल गये थे आंड आज मेरे लिए चाइ बना के लाए..मैं ने सोचा आदमी कितना जल्दी रंग बदल लेता है..मैं ने चाइ पीली और अपने काम मे लग गयी..पर अचानक तकरीबान 7 बजे चाइ पीने के 1 घंटे बाद मुझे बेचेनी सी लगने लगी…पूरे बॉडी मे हल्का सा पेन होने लगा सरीर टूटने लगा..और नींद सी आने लगी.

मैं ने सोचा ससुर ने ज़रूर चाइ मे कुछ मिलाया होगा..और मैं अपने आपेसे बाहर होने लगी..और किचन मे गिर गयी..पिताजी आए और मेरे सामने देख कर हसणे लगे..मैं थोड़ी बेहोसी की हालत मे थी मुझसे उठा भी नही जराहा था और मेरे हाथ पैर भी नही हिल रहे थे..पर मैं कोसिस कर रही थी उठने के लिए..वो मुझे देख कर हँसने लगे और बोले कुछ भी कर लो 10 घंटे तक तुम अपने आपको नही संभाल पओगि चाइ मे मेने ड्रग मिला दिया था.

उन्होने अब मेरी सारी उतार दी..अब मैं सिर्फ़ उनके सामने पेटिकोट और ब्लाउस मे थी..मैं सारी नाभि के नीचे से पहनती हूँ तो अब मेरी नाभि उनके सामने नंगी पड़ी थी उन्होने मुझे किस करने लगे…मैं अपना मूह हिलाके और मूह से आवाज़ निकाल कर प्रतिक्रिया करने लगी..पर मानो मेरे हाथ पैर पर लकवा मार गया हो वैसा हो गया था.

धीरे धीरे ससुरजी बोलने लगे आज तुझे जी भर के चोदुन्गा..2 साल से भूखा हूँ..मैं ने कहा पिताजी यह क्या कर रहे हो यह ग़लत है..वो बोले कुछ ग़लत नही है..मैं ने कहा मैं रज्जत(मेरे हब्बी) को सब बतादूँगी..उन्हो ने कहा मैं तुझे उस लायक रहने ही नही दूँगा…और कहते ही उन्होने मेरे ब्लाउस के हुक खोलने सुरू कर दिए आंड पेटिकोट भी उतार दिया.

अब मैं सिर्फ़ ब्रा पॅंटी मे थी उनके सामने..उन्होने मेरी रोती हुई आँखे थी पर ज़रा भी दया नही की और मेरे सरीर से मेरी ब्रा को और पॅंटी को निकाल दिया…अब मैं बिल्कुल नेकेड उनके सामने पड़ी थी बिस्तर पर मुझे रोना आ रहा था लेकिन उन्होने मुझ पर कोई दया नही दिखाई..मेरी झांतो वाली चूत देखकार वो बोले” साली रंडी तुझे मेरे बेटे ने कितनी बार कहा है की चूत पार से बाल सॉफ करके रख तू समझती नही है”चल ठीक है रांड़ आज तेरी चूत की शेविंग मैं करता हूँ.

इतना कहने के बाद वो मर्दो वाला रॅज़र और क्रीम लेकर आए..आज तक कभी मैने रॅज़र यूज़ नही किया था मैं हमेशा हेर रिमूवर यूज़ करती थी…मुझे रॅज़र देख कर डर लग ने लगा था..तभी वो मेरी चूत पर क्रीम लगाने लगे..मेरी चूत पर क्रीम लगाते समय उन्होने काफ़ी बार उंगली मेरी चूत मे डाल दी..ऐसा करते करते ना चाहते हुवे भी मैं गरम होने लगी…और मेरी चूत ने पानी छ्चोड़ दिया.

वो हसने लगे और कहा कमीनी नखरे कर रही है..फिर उनको क्या सूझा उन्होने ने मेरी चूत पर लगा क्रीम निकल दिया और कहा तुझे बिना क्रीम के शेव करता हूँ साली तूने मुझे बहोत तडपाया है आज मैं तुझे तडपाउँगा..कह कर वो अकेला रॅज़र मेरी चूत पर घुमाने लगे..मुझे छीलने का काफ़ी डर था..कि कही कट ना जाए और काफ़ी दर्द भी हो रहा था.  दोस्तों आप ये कहानी अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे है l

थोड़ी देर बाद उन्होने मेरी चूत से सब बॉल निकाल दिए…बाद मे वो रूम से चले गये मुझे यूही नंगी छ्चोड़ कर चले गये..थोड़ी देर मे मेरा लड़का चिंटू रूम मे आगेया…मुझे देख कर बोलने लगा”मम्मी मम्मी आपने कपड़े क्यों नही पहने है”बताओ मम्मी आपने कपड़े क्यों नही पहने है.

“मैं इतनी ज़्यादा पहले कभी बेबस नही थी”मुझे अपने आप पर घिन आ रही थी के मैं अपने 4 साल के बच्चे के सामने पूरी तरह नंगी पड़ी हुई थी…उतने मे ससुरजी आए और चिंटू को ले जाकर सुला दिया बगल वाले कमरे मे…और जब वो वापस आए तो देखा की वो सिर्फ़ अंडरवेर मे आए थे..65 साल की एज मे भी उनका सरीर चुस्त था वो सिर्फ़ 45 5० साल के लग रहे थे.

मेरे सामने आक़ार वापस हसणे लगे..और उन्होने एक केमरा निकाला और मेरी तस्वीर खिचने लगे..मेरी चूत का क्लोज़ अप लिया मेरे बूब्स के फोटोस मेरी पूरी तस्वीर खिचने लगे..बाद मे बोले अगर तूने किसी को कुछ बताया तो मैं तो जैल जाउन्गा ही पर तेरी इज़्ज़त के छितरे उड़ाकर जाउन्गा..बाद मे वो आयिल लेके आए और मेरे पूरे बदन पर मसल ने लगे..आयिल की बजाह से मैं काफ़ी चिकनी हो गयी थी.

मेरे बूब्स को बुरी तरह मसल ने लगे…ना चाहते हुवे भी मैं एक औरत हूँ और मेरा सरीर गरम होने लगा मेरे निपल टाइट होने लगे..वो समझ गये कि मैं गरम हो रही हूँ.उन्होने अपना लंड निकल कार मेरी चूत के उप्पर घिसने लगे..बजाय चोद ने के वो सिर्फ़ मुझे ललचा रहे थे..अपनी उंगली से मेरी चूत मे उंगली कर रहे थे…मेरा सरीर भी उनको साथ देने लगा था.

मेरे मुहसे आवाज़ निकल ने लगी..ह. उहह…और मेरी चूत ने वापस एक बार पानी छ्चोड़ दिया…वो हसणे लगे और मैं शरम के मारे मरी जा रही थी…उनका लंड अभी भी ठीक तरह से तना नही था..फिर भी उनके लंड की साइज़ 7″इंच जितनी होगी…उन्होने मुझसे कहा ले मूह मे ले ले..मैने ना कहते हुवे अपना मूह फेर लिया तो वो बोले” क्यों सुबह तो ज़ोर ज़ोर से मेरे बेटे का लंड मूह मे ले रही थी अभी क्या हुवा.

उन्होने ज़ोर से मेरा मूह खोलने के लिए ट्राइ की पर मैं ने मूह नही खोला..तो उन्हो ने एक हाथ से ज़ोर से मेरा नाक पकड़लिया और दबा दिया…मैं साँस नही ले पा रही थी घुटन होने लगी इसके लिए मुझे मजबूरन मेरा मूह खोलना पड़ा..जैसे मेने हवा लेने के लिए मूह खोला उन्होने अपना बड़ा लंड मेरे मूह मे पूरा घुसा दिया.

उनका बड़ा लंड मेरे गले मे लग रहा था और उप्पर से मेरा नाक भी बंद था तो मुझे घुटन भी हो रही थी..लेकिन वो मुझे अनदेखा कर के मेरे मूह को चोदने मे मस्त थे..तभी मेने सोचा क्यों ना उनके लंड को काट लिया जाए..मेने ज़ोर से उनके लंड को काट लिया..वो चिल्ला उठे..और उनके लंड से थोड़ा खून भी निकल ने लगा.

उन्हे मुझ पर गुस्सा आया और ज़ोर से मुझे चाते मारने लगे और खा रुक रंडी काट ती है कुतिया देख मैं तुझे दिखा ता हूँ..और वो बाहर चले गये..मैं डर गयी थी की ना जाने अब वो क्या करेंगे..वो वापस आए और उनका हाथ देख कर मैं डर गयी..उनके हाथ मे एक बड़ा सा डंडा था जो 15 इंच जितना बड़ा और 3 इंच जितना चोडा था.

उन्होने मुझे घोड़ी बनाया और मेरी गंद पर आयिल लगाने लगे..मैं डर गयी अओर ज़ोर ज़ोर से रोने लगी पर वो काफ़ी गुस्से मे थे..और उन्होने मेरी गंद के होल मे भी तेल डाला..और ज़ोर से लकड़ी को मेरी गंद के छेद पर रख कर धक्का दिया..मेरे मूह से चीख निकल गयी..पर वो हंसते हुवे बोले अभी तुझे पता चले गा कि दर्द क्या होता है.

ज़ोर से दूसरा धक्का लगाया और मेरी जान निकली जा रही थी..शायद उन्होने मेरी गंद फाड़ डाली थी..डर के मारे मुझे पिसाब हो गया बिस्तेर मे मेरे पिसाब(मूत) से पूरा बेड गीला हो गया था..और उन्होने मेरी गंद मे से वो डंडा निकाला तो मैने देखा कि उस पर काफ़ी खून लगा हुवा था..ससुरजी ने कहा के देख रांड़ मुझे काटने का नतीजा..अभी पहले मैं तुझे चोदुन्गा बाद मे तेरी चूत को भी भोसड़ा बनाऊंगा..यही डंडे से. दोस्तों आप ये कहानी अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे है l

बाद मे उन्होने वापस मुझे लंड मूह मे दे दिया..अब मैं ने हार मान ली थी मैं उनके लंड को चूस रही थी थोड़ी देर चूसने के बाद उन्होने अपने वीर्य की पिचकारी मेरे मूह पर मार दी..और उनका लंड ढीला पड़ गया…मेरे बूब्स पर भी उनके वीर्य की बूँद थी…वापस उन्हो ने कहा चल अब इसे चूस चूस कर वापस खड़ा कर दे..थोड़ी देर चूस ने के बाद वो वापस खड़ा हो गया मुझे विस्वास नही आ रहा था कि इतने बुड्ढे आदमी का इतना जल्दी वापस तन कर खड़ा हो गया.

अबकी बार उन्होने उप्पर आकर मेरी छूट पर उनका लंड रखा और दोनो हाथो से मेरे बूब्स को दबाने लगे मेरे निपल को मसल्ने लगे…और एक धक्का दिया मेरे मूह से ह…निकल गयी उन्होने अपना लंड मेरी चूत मे डाल दिया था..और वो धक्के लगा ते रहे..मैं भी वापस गरम होने लगी थी पर गंद मे दर्द भी बहोत हो रहा था..और खून अभी भी रुक ने का नाम नही ले रहा था.

ससुरजी के चोद्ते छोटे और करारे धक्को के साथ मेरी चूत भी उन्हे साथ देने लगी और मैं शरम के मारे मरी जा रही थी…..मेरी चूत ने पूरी चुदाई के टाइम पर 3 बार पानी छ्चोड़ दिया था..मैं वो बुड्ढे का स्टेमीना देख कर हैरान हो गयी थी..और थोड़ी देर की चुदाई के बाद उसके लंड ने मेरी चूत मे पानी छ्चोड़ दिया…उन्होने लंड बाहर निकाला तो उनके लंड पर खून था.

मैं हेरान हो गयी कि चूत मे तो दर्द हुवा नही तो चूत से खून कैसे निकला..पर तभी मुझे ख्याल आ गया कि मैं एमसी मे हो गयी हूँ…तभी भी मेरे ससुर ने मुझे कपड़े नही पहनने दिए..ऐसे दिनो मे भी मुझे नंगा रखा और लगातार मेरी चूत से प्रियड्स का खून निकले जा रहा था..मुझे दर्द हो रहा था..आंड पूरा बिस्तेर भी गंदा हो गया था फिर भी वो बुड्ढ़ा लगातार दूसरे दिन दोपहर तक मुझे ज़ोर ज़ोर से अलग अलग स्टाइल मे चोदता रहा.

जब उसने मिरर मे मुझे अपनी गंद का होल दिखाया तो मैं हेरान हो गयी कि मेरी गंद का छेद मानो किसी फटी हुई चूत के जैसा था कई जगह से फॅट गया था…अब मुझ मे थोड़ी जान आने लगी थी मैं उठ पा रही थी पर अभी भी बुड्ढे का जी नही भरा था पूरी रात और दिन मुझे चोदने के बाद भी वो कुछ नया नया करता था..
तो दोस्तो कैसी लगी ये मस्त कहानी फिर मिलेंगे एक नई कहानी के साथ तब तक के लिए विदा लेते है.


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