Hindi Sex Kahaniya & Sex Pictures http://sexkahani.net Desi Chudai Kahani, Indian Sex Stories, Chudai Pics ,College Girls Pics , Desi Aunty-Bhabhi Nude Pics , Big Boobs Pics Wed, 22 Feb 2017 17:19:14 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=4.7.2 https://i2.wp.com/sexkahani.net/wp-content/uploads/2016/02/Screen-Shot-2016-02-19-at-9.35.10-PM.png?fit=25%2C32&ssl=1 Hindi Sex Kahaniya & Sex Pictures http://sexkahani.net 32 32 91686163 दोस्त की माँ को चोदकर रंडी बनाया http://sexkahani.net/%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%9a%e0%a5%8b%e0%a4%a6%e0%a4%95%e0%a4%b0-%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%a1%e0%a5%80/ http://sexkahani.net/%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%9a%e0%a5%8b%e0%a4%a6%e0%a4%95%e0%a4%b0-%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%a1%e0%a5%80/#respond Wed, 22 Feb 2017 15:59:41 +0000 http://sexkahani.net/?p=10115 हैल्लो दोस्तों, में पिछले एक महीने से सेक्सी कहानियों को पढ़ता आ रहा हूँ, मैंने कुछ अच्छी और मजेदार सेक्सी कहानियाँ पढ़ी जिनको पढकर मुझे बड़ा मज़ा आया वो मुझे सभी अच्छी लगी, इसलिए एक दिन मैंने भी सोच कि में भी आप लोगों को अपनी एक सच्ची सेक्स घटना को लिखकर आप तक पहुंचा दूँ.

दोस्तों यह मेरी लाईफ का पहला सेक्स अनुभव है और दोस्तों मेरा नाम जगजीत है. में पंजाब का रहने वाला हूँ और में अभी तक अकेला हूँ. मैंने अब तक शादी नहीं की और मेरी उम्र 22 साल और में दिखने में अच्छा लगता हूँ. दोस्तों यह बात एक साल पहले की है, मेरा एक दोस्त है, जिसकी उम्र करीब 22 साल है और उसका नाम करण है और उसकी माँ जिसका नाम बबली है, वो करीब 42 साल की, लेकिन आज भी वो बहुत हॉट सेक्सी लगती है और इस वजह से वो दिखने में अभी भी 30- 32 साल की लगती है. फिर करीब 5.6 इंच लंबी एकदम पतली उनका वजन करीब 55 किलो और उसका फिगर 36-30-38 है.

दोस्तों जब भी में उनके घर पर जाता था तो में उसको देखकर एकदम मदहोश हो जाता और मेरा मन करता कि में उसको उसी समय पकड़कर उसकी जमकर चुदाई कर दूँ उसका पूरा कामुक बदन मुझे हमेशा अपनी तरफ आकर्षित करता और में जब भी बिपाशा बसु की कोई भी फिल्म देखता तो मुझे हमेशा अपने दोस्त की माँ का चेहरा ही याद आता और मेरा उनके घर पर बहुत बार आना जाना लगा रहता है और वो मुझसे हमेशा हंसकर बातें किया करती और उनका मेरे लिए बहुत अच्छा व्यहवार था.

एक दिन में आंटी और मेरा दोस्त करण एक साथ एक शादी में गये हुए थे. यह शादी उनके किसी पास के रिश्तेदार में थी, इसलिए उनको वहां पर जाना जरूरी था और उनके कहने पर मुझे भी उनके साथ जाना पड़ा.

रात को आंटी के सर में अचानक से दर्द होने लगा जो धीरे धीरे बढ़ने लगा था और आंटी ने करण को घर छोड़ने के लिए कहा वो उस समय थोड़ा ज्यादा व्यस्त था और उसके साथ साथ में भी, लेकिन तब भी मैंने करण से कहा कि में अब घर जा रहा हूँ, क्योंकि मुझे कल सुबह कहीं बाहर जाना है. फिर आंटी मुझसे कहने लगी कि बेटा जब तुम जा ही रहे हो तो तुम मुझे भी मेरे घर पर छोड़ देना और मेरा घर उनके घर से बहुत दूर था तो इसलिए करण मुझसे बोला कि तुम भी मेरे घर पर ही सो जाना और कल सुबह में तुझे स्टेशन तक छोड़ आऊंगा.

मैंने उससे कहा कि हाँ ठीक है और में अपनी गाड़ी से आंटी के साथ वापस उनके घर पर आ रहा था और वो मेरे पीछे मुझसे थोड़ा चिपककर बैठी हुई थी. आंटी ने उस समय गुलाबी कलर की साड़ी पहनी हुई थी, जिसमे वो बहुत ही सुंदर लग रही थी और उनके बदन से बहुत ही मस्त मनमोहक खुशबू आ रही थी और जब में किसी भी स्पीड ब्रेकर पर अपनी गाड़ी को ब्रेक लगता तो आंटी के बूब्स मेरी कमर पर छू रहे थे, जिसकी वजह से मुझे बहुत मज़ा आ रहा था और मेरा लंड भी अब धीरे धीरे खड़ा होने लगा था कुछ देर बाद रास्ते में अचानक से बारिश शुरू हो गयी और उसके साथ साथ तेज हवा भी चलने लगी.

मैंने कुछ देर बाद महसूस किया कि अब आंटी ने अपना हाथ मेरी कमर पर रखा हुआ था कि तभी कुछ देर बाद अचानक से मेरी गाड़ी के आगे एक कुत्ता आ गया और उसकी वजह से मैंने एकदम से ब्रेक लगा दिया, तो उसकी वजह से आंटी का हाथ मेरी कमर से फिसलकर मेरी जाँघ पर आ गया और उनका हाथ मेरे खड़े लंड पर छू गया और अब वो मुझसे एकदम चिपककर बैठ गयी, हम लोग करीब 12 बजे घर पहुंच गए और हम दोनों उस समय पूरी तरह से भीग चुके थे उस वजह से मुझे अब आंटी के ब्लाउज के अंदर से उनकी डोरी साफ नज़र आ रही थी.

फिर घर के अंदर पहुंचकर आंटी ने मुझे मेरे दोस्त करण का पजामा पहनने के लिए दे दिया और कहा कि तुम अपने कपड़े बदल लो बहुत भीग गये हो. अब में करण के रूम में अपने कपड़े बदलने चला लगा और आंटी ने टीवी को चालू कर लिया और अब वो टीवी देखने लगी. उस समय मुझे अंदर कमरे में लगे हुए कांच से टीवी साफ नज़र आ रही थी.

उस दिन शनिवार का दिन था और रात को टीवी पर एक्शन फिल्म आती है जब आंटी टीवी चेनल को बदलकर देख रही थी तो सेक्सी फिल्म का चेनल आ गया और आंटी वो फिल्म देखने लगी.

मुझे कमरे के अंदर से सब कुछ साफ नज़र आ रहा था इसलिए में करण की बनियान और उसका पजामा पहनकर कमरे से बाहर आ गया, तो आंटी ने मुझे देखकर एकदम से उस चेनल को बदलकर दूसरा लगा दिया और अब वो भी अपने कपड़े बदलने अंदर पास वाले रूम में चली गयी, तो मैंने जानबूझ कर उसी फिल्म को लगा लिया, क्योंकि वो अंदर रूम में उनके कांच में साफ नज़र आ रही थी और आंटी ने मुझे आवाज़ मारी और कहा कि ज़रा टावल देना में बाहर भूल गयी हूँ.

अब में जैसे ही आंटी को टावल देने अंदर गया तो वो एकदम नंगी खड़ी थी और में उनको उस समय उस हालत में नंगी देखकर घबरा गया और वो मुझे देखकर मुस्कुराने लगी और उन्होंने मेरे हाथ से तुरंत वो टावल अंदर खींच लिया और अब में बाहर आकर बैठ सोफे पर जाकर बैठ गया और दोबारा से टीवी देखने लगा तो मुझे पता ही नहीं चला कि आंटी कुछ देर बाद मेरे पीछे आकर खड़ी हो गई.

जब उन्होंने मुझसे कहा कि जगजीत क्या तुम कॉफी लोगे तो में उनकी आवाज उनको अपने पीछे देखकर एकदम घबरा सा गया और मैंने टीवी का चेनल बदल दिया और मैंने उनसे कहा कि नहीं आंटी. फिर वो मुझसे कहने लगी कि में कॉफी बनाकर लाती हूँ तब तक तुम टीवी देखो. दोस्तों मुझसे इतना कहकर वो रसोई की तरफ बढ़ चली और आंटी ने उस समय सफेद रंग की पतली सी मेक्सी पहन रखी थी उस मेक्सी में से मुझे सब कुछ साफ नज़र आ रहा था, जिसको देखकर में बड़ा चकित था और कुछ देर बाद आंटी हम दोनों के लिए कॉफी बनाकर ले आई और वो मेरे साथ बैठ गयी.

आंटी ने टीवी का रिमोट लेकर वही चेनल लगा दिया और अब वो फिल्म देखने लगी, लेकिन मैंने अपना सर नीचे झुका लिया और में चुपचाप कॉफी पीने लगा. तभी आंटी मुझसे पूछने लगी क्यों क्या हुआ तुम्हे यह फिल्म नहीं देखनी क्या? अब तुम बहुत शरीफ बन रहे हो, उस समय आगे पीछे से मेरे बदन को ऐसे घूरते हो जैसे अभी मुझे तुम खा जाओगे और अब मेरे सामने शरीफ बनकर अपना रस झुकाकर बैठ गये, चलो अब फिल्म देख लो, मुझसे किस बात की शरम है और अब में उनकी यह बातें सुनकर थोड़ी हिम्मत करके फिल्म देखने लगा.

दोस्तों उसी समय मेरा लंड एकदम तनकर खड़ा हो गया था, जिसकी वजह से मेरा पजामा उस जगह से तंबू की तरह तन गया था. फिर आंटी ने नीचे मेरे खड़े लंड को देखकर धीरे से अपना हाथ मेरी जाँघ पर रख दिया और में भी थोड़ी सी हिम्मत करके उनके कंधे के ऊपर से घुमाकर अपना एक हाथ आंटी के बूब्स पर ले गया और में उसके बूब्स को सहलाने लगा.

कुछ देर बाद मैंने महसूस किया कि आंटी भी अब मस्त होने लगी थी और वो अब पजामे के ऊपर से मेरे लंड को सहलाने लगी थी. फिर उसी समय मैंने अपने दूसरे हाथ से आंटी की मेक्सी को धीरे धीरे ऊपर उठा दिया और मैंने अपना हाथ उनकी गरम, चिकनी चूत पर रख दिया. फिर तब मैंने अपने हाथ से छूकर महसूस किया कि उन्होंने उस समय पेंटी नहीं पहनी थी और उनकी चूत एकदम साफ थी.

मैंने अपने होंठ आंटी के होंठो पर रख दिए और मैंने अपनी जीभ को आंटी के मुहं में डाल दिया. में उनकी जीभ को चूसने लगा और उस समय हम दोनों बहुत जोश में थे और उसी समय मैंने अपनी ऊँगली को आंटी की चूत में डालकर धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगा और में अपने दूसरे हाथ से उनके बूब्स को दबाने, मसलने लगा, जिसकी वजह से आंटी मस्त होने लगी और वो मुझसे कहने लगी आह्ह्ह्हह्ह में कब से तेरे लिए कितनी बेचैन थी ओह्ह्ह्हह्हह् सस्स उउउफफफ्फ़ जगजीत आओ ना.

फिर मैंने तुरंत आंटी का जोश देखकर उनकी मेक्सी को झट से उतार दिया और मैंने उनकी ब्रा को भी उतार दिया. तब में उनके बड़े आकार के एकदम गोरे बूब्स को देखकर पागल हो गया, इसलिए में अब झपटकर उनके बूब्स को अपने दोनों हाथों से ज़ोर ज़ोर से दबाने और उनका रस निचोड़ने लगा. फिर आंटी का हाथ मेरे लंड पर पाजामे के ऊपर से बड़ी तेज़ी से घूम रहा था, लेकिन अब उनसे रहा नहीं गया और आंटी ने मेरे पाजामे का नाड़ा खोल दिया और फिर मैंने अपनी अंडरवियर और बनियान को भी उतार दिया, जिसकी वजह से अब हम दोनों एक दूसरे के सामने एकदम नंगे थे.

आंटी मेरे 6 इंच लंबे और 2 इंच मोटे लंड को देखकर बहुत खुश हो गयी और वो मुझसे कहने लगी कि आज कितने दिनों के बाद में इस सुंदर दमदार लंड से अपनी चूत की प्यास को बुझाने जा रही हूँ. में कितने दिनों से अपनी चुदाई के सपने देख रही थी, जो आज पूरा होने वाला है और मैंने इस चुदाई के लिए कितना इंतजार किया है, इसको तुम क्या समझोगे? और मुझसे यह बात कहकर आंटी ने नीचे झुककर तुरंत मेरे लंड को किस किया और फिर वो उसको अपने मुहं में लेकर वो आईसक्रीम की तरह बड़े मज़े लेकर चूसने लगी.

वो शायद उस समय बहुत जोश में थी और अब में अपने एक हाथ से आंटी के बूब्स को दबा रहा था और मेरा दूसरा हाथ उनकी चूत पर था और मैंने अपनी दो उँगलियों को आंटी की प्यासी, तरसती हुई चूत में डाल दिया था, जिसकी वजह से आंटी की चूत एकदम गीली हो चुकी थी और उनकी चूत ने अपना रस छोड़ना शुरू कर दिया था. हम दोनों करीब 10-15 मिनट तक यह सब कुछ करते रहे और उसके बाद मैंने आंटी को अपनी गोद में उठाकर उनके बेडरूम तक ले गया और उनको ले जाकर बेड पर लेटा दिया.

फिर मैंने आंटी की कमर के नीचे एक तकिया रख दिया और अब में एक बार फिर से आंटी के ऊपर आ गया और उनके होंठो पर होंठ रखकर में उनके होंठो को चूसने लगा और उसी के साथ साथ में बीच बीच में उनके बूब्स को भी चूसने दबाने लगा था. दोस्तों मेरा लंड आंटी की चूत से जब भी छू जाता तो आंटी एकदम से तिलमिला उठती और वो मुझसे कहने लगती कि अरे अब तो डाल भी दो क्यों मुझे तुम इतना तरसा रहे हो? मुझसे अब और ज्यादा इंतजार नहीं होता, प्लीज अब तुम जल्दी से मेरी चुदाई करके मुझे खुश कर दो.

अब मैंने उनके दोनों पैरों को अपने कंधे पर रख लिया, जिसकी वजह से चूत अब पहले से भी ज्यादा खुल गई और मैंने आगे बढ़कर अपने लंड का टोपा उनकी चूत के खुले मुहं पर रख दिया और फिर ज़ोर से एक धक्का मार दिया, जिसकी वजह से मेरा लंड उनकी चूत में करीब दो इंच अंदर चला गया और आंटी ज़ोर से एकदम चिल्ला गई अरे आह्ह्ह् प्लीज थोड़ा धीरे से करो आईईई मुझे बहुत दर्द हो रहा है, लेकिन मैंने उनकी कोई भी बात नहीं सुनी क्योंकि में उस समय बहुत जोश में था और मैंने दूसरा धक्का लगा दिया अब मेरा पूरा लंड उनकी चूत के अंदर जा चुका था, तो आंटी चिल्लाई आईईईइ रे उह्ह्ह्हह्ह में मर गई मादरचोद मैंने तुझे कहा था कि धीरे से डाल, लेकिन तूने मेरी बात नहीं मानी, देख तेरे लंड ने मेरी चूत को फाड़ दिया है और मुझे अपनी चूत के अंदर बहुत दर्द के साथ साथ अजीब सी जलन भी हो रही है.

अब में कुछ देर रुककर अपना लंड अंदर बाहर करने लगा और उस समय मेरे दोनों हाथ आंटी के बूब्स के निप्पल को मसल रहे थे. फिर कुछ देर अब आंटी को मज़ा आने लगा था वो भी नीचे से अपनी कमर को उछाल उछालकर मेरा साथ देने और वो कहने लगी कि हाँ उफफ्फ्फ्फ़ और ज़ोर से आह्ह्ह्ह ज़ोर से चोद मेरी चूत को और ज़ोर से ऊऊह्ह्ह्ह इतना मस्त मज़ा मेरी चूत को कभी नहीं आया, मेरे बूब्स को पूरा दम लगाकर दबा दे, ज़ोर से मसल दे, भींचकर फोड़ दे इन गुब्बारों को, आज तू फाड़ दे मेरी इस चूत को, इसको चोद चोदकर भोसड़ा बना दे ऊन्न्ह्हह्ह हाँ ऐसे ही धक्के मारता जा, यह तेरे लंड को लेने के लिए बहुत प्यासी है और तूने आज अपनी आंटी जी को चोदकर अपनी रंडी बना दिया है, हाँ अब तू लगातार चोद मेरी इस चूत को मादरचोद और चोद चोद और ज़ोर से चोद हरामी के पिल्ले, करता जा रुक मत, बस डालता जा तेरा लंड मेरी चूत में.

अब में उनकी इतनी सारी बातें सुनकर जोश में आकर ज़ोर ज़ोर से अपना लंड अंदर बाहर करने लगा था और इतने में आंटी एक बार झड़ चुकी थी और अब में भी झड़ने वाला था, इसलिए मैंने उनसे कहा कि आंटी में झड़ने वाला हूँ क्या में अपना वीर्य बाहर निकाल दूँ? तो आंटी बोली कि नहीं मेरे लाल तू उसको मेरी चूत के अंदर ही डाल दे और मुझे उसमे कोई भी समस्या नहीं है और मैंने एक ज़ोरदार धक्का लगाया और मैंने आंटी की चूत के अंदर ही झड़कर अपना वीर्य चूत में डाल दिया कुछ दो चार धक्के देने के बाद में आंटी के ऊपर ही थककर लेट गया और उस समय में आंटी के होंठो पर अपने होंठ रखकर उनके मुहं को सक करने लगा.

कुछ देर के बाद हम उठे और तब तक 2:45 बज चुके थे. फिर हम दोनों ने कपड़े पहने और में अपने दोस्त करण के बेडरूम में जाकर सो गया. फिर सुबह जब करण आया तो उसने मुझे उठाया और आंटी ने हमारे लिए चाय बनाई. उस समय मैंने देखा कि आंटी के चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी और फिर हमने चाय पी और में नहाकर वहीं पर तैयार हो गया और मैंने करण के पकड़े पहन लिए. फिर उसके बाद करण मुझे स्टेशन पर छोड़कर चला गया और में ट्रेन में बैठकर चला गया.

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मधु की तंग चूत ने मेरा मधु निकाल दिया http://sexkahani.net/%e0%a4%ae%e0%a4%a7%e0%a5%81-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a4%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%9a%e0%a5%82%e0%a4%a4-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%a7%e0%a5%81-%e0%a4%a8/ http://sexkahani.net/%e0%a4%ae%e0%a4%a7%e0%a5%81-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a4%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%9a%e0%a5%82%e0%a4%a4-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%a7%e0%a5%81-%e0%a4%a8/#respond Wed, 22 Feb 2017 15:26:53 +0000 http://sexkahani.net/?p=10113 Hindi Sex Kahani मेरा नाम शशांक है। story मेरे दफ़्तर में एक मधु नाम की sex लड़की थी। वो सच में बला की खूबसूरत थी। जब से वो मेरे दफ़्तर में काम करने के लिए आई, मैं तो बस उसको ही देखता रहता था। उसकी फ़ीगर कमाल की थी और लम्बे लम्बे बाल थे। उसके बड़े बड़े बूब्स देख कर तो मैं पागल ही हो जाता था और हर वक्त सोचता रहता था कि कब मैं इन बूब्स को चूस पाऊंगा। मैं अपने केबिन से छिप छिप कर उसको देखता रहता और उसके साथ सेक्स करने के सपने देखता रहता था। उसने भी मेरी यह बात पकड़ ली थी मैं उसको देखता रहता हूँ लेकिन उसने कभी कुछ नहीं कहा। शायद वो भी मेरी तरफ़ आकर्षित थी।

लेकिन एक दिन ऐसा हुआ कि मेरे सारे सपने सच हो गए।

 

हुआ यूं कि एक दिन मधु मेरे केबिन में आई और उसने मुझे कहा कि उसे वेतन के अलावा कुछ और पैसों की जरूरत है और वो ये पैसे धीरे धीरे वापिस कर देगी। लेकिन मैं उसके साथ सेक्स करना चाहता था इसलिए मैंने उसे कहा कि अगर वो मुझ पर विश्वास करती है तो मैं उससे अकेले में मिलना चाह्ता हूं।

 

वो मान गई। मैंने उसे घर आने को कहा और कहा कि पैसे मैं घर पर ही दे दूंगा। अगले तीन दिन के लिए दफ़्तर बंद था और मेरे घर वाले भी बाहर गए हुए थे इसलिए मैंने उसे अगले दिन सुबह घर पर बुला लिया।

 

अगले दिन जब वो घर आई तो उसने जीन्स और शर्ट पहनी हुई थी और बाल खुले हुए थे। उस वक्त वो कयामत लग रही थी। उसे देख कर मेरा लण्ड एक दम से खड़ा हो गया। मैंने बड़ी मुश्किल से अपने आप को सम्भाला और उसे अपने बेडरूम में ले गया। मैं बस तरीका सोच रहा था कि किस तरह से मैं उसको चोदूं ! तब मैंने उसको अपने पास बुलाया और उसके हाथ अपने हाथों में ले कर कहा,” मधु, मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ.”

उसने यह सुन कर कहा कि वो मुझ से प्यार करती है. यह सुन कर मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा और मैंने उसे अपनी बाँहों में जकड लिया। उसके बूब्स मेरी छाती से छू रहे थे और मैं और ज़्यादा पागल हो रहा था मैंने उसे अपनी गोद में बिठा लिया और उसके चेहरे को अपने हाथों से सहलाने लगा. अब मैं उसको अपने और करीब ले कर आया और अपने होंठो को उसके होंठों पर रख कर चूमने लगा। मैं बड़े प्यार से उसके होंठों को चूम रहा था और वो भी इसका मजा ले रही थी।

 

काफ़ी देर तक चूमने के बाद मैं उसके पूरे चेहरे पर चूमने लगा उसके गालों पर, उसकी गर्दन पर। फिर मैंने उसकी शर्ट का पहला बटन खोला वो एक दम से बोली यह क्या कर रहे हो, मैंने कहा हम एक दूसरे से प्यार करते हैं इसलिए इसमें कोई बुराई नहीं है, यह बोलते बोलते मैंने उसकी शर्ट के तीन चार बटन खोल दिए। अब मुझे उसकी ब्रा नज़र आ रही थी और ब्रा में बंद उसके बड़े बड़े बूब्स बाहर निकलने को तड़प रहे थे।

 

मैंने उसकी शर्ट उतार दी और वो ब्रा में तो कयामत लग रही थी। तब उसका ध्यान मेरे लंड पर गया जो बहुत खड़ा हो चुका था और उसे बार बार चुभ भी रहा था।

मैंने कहा- इसे देखना चाहोगी?

 

तब उसने मेरी पैंट का बटन खोल कर मेरी पैंट और मेरा अंडरवियर भी उतार दिया और मेरे लंड को ले कर जोर जोर से मसलने लगी। तब वो मेरा लंड अपने मुंह में ले कर उसे चूसने लगी। उसके चूसने से मेरा लंड और भी बड़ा हो गया। उसे मेरे लंड को चूसने में और उसके साथ खेलने में बड़ा मज़ा आ रहा था लेकिन मुझ से कंट्रोल नहीं हो रहा था इसलिए मैंने उसे उठा कर उसकी पैंट भी उतार दी। उसने पिंक कलर की पैंटी पहनी हुई थी। वोह सिर्फ़ ब्रा और पैंटी में मेरे सामने खड़ी थी, मैं अपने पर कंट्रोल नहीं कर पा रहा था और मैं उसको पागलों की तरह चूमने लगा।

मैंने उसको उल्टा किया और अपने मुंह से उसकी ब्रा के हुक खोल दिए। अब वो भी तड़प रही थी चुदवाने के लिए। उसके बूब्स को देख कर मेरा लंड ज़ोर ज़ोर से झटके खाने लगा तब सबसे पहले मैंने उसके निप्पल को चूपा। उसके निप्पल भी बड़े सखत हो रखे थे और मुझे भी उन्हें चूपने का बड़ा मज़ा आ रहा था।

वो भी बहुत तड़प रही थी और बार बार बोल रही थी- और ज़ोर से, और ज़ोर से.

 

फिर मैं उसके बूब्स को दोनों हाथों से ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा और वो चीखने लगी फिर मैंने उसकी पैंटी को अपने दांतों से खींच कर उतार दिया। मेरे इस तरह करने से वो और ज़्यादा तड़पने लगी। तब मैंने उसकी चूत को देखा, उसकी चूत पर बाल नहीं थे और उसकी मुंडा चूत बहुत मस्त लग रही थी। उसकी चूत को देख कर मेरे मुंह में पानी आ गया और मैं उसकी चूत को चाटने लगा। मधु ज़ोर ज़ोर से चीखने लगी आ आ आ आ ओ ऊ ऊ ओ ओ करने लगी

 

थोडी देर तक उसकी चूत चुसाई के बाद मैंने देखा की वो बहुत गरम हो चुकी थी लेकिन मैं उसको और गरम करना चाहता था इसलिए अब मैं अपने लंड को उसके पूरे बदन पर घुमाने लगा, पहले उसके चेहरे पर अपने लंड को लगाया फिर उसकी गर्दन पर, फिर उसके बूब्स पर, उसके निप्पल पर, उसके बूब्स के बीच में अच्छी तरह मैं अपने लंड को लगा रहा था। मेरे लंड से जो पानी निकल रहा था वो भी उसके पूरे बदन पर लग रहा था जिससे वो और ज़्यादा गरम हो रही थी। मैंने अपने लंड को उसके बूब्स के बीच में अच्छी तरह दबा दिया वो भी मेरे लंड को अपने बूब्स में रख कर ज़ोर ज़ोर से दबाने लगी।

तब उसने मुझसे कहा- शशांक, अब और सहा नहीं जा रहा इस लंड को मेरी चूत में डाल कर मेरी प्यास शांत कर दो।

मैं नीचे लेट गया और मधु मेरे ऊपर बैठ गई उसने मेरा लंड पकड़ा और पहले अपनी तंग चूत पर घिसने लगी फिर मैंने एक झटके से अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया मेरे लंड डालते ही मधु ज़ोर से चीखी। मेरा लंड उसकी चूत के अन्दर था और मधु ज़ोर ज़ोर से हिलने लगी। वो ज़ोर ज़ोर से हिल रही थी और मैं कभी उसके बूब्स को दबा रहा था और कभी उसके निप्पल को चूप रहा था। थोड़ा देर बाद हम दोनों झड़ चुके थे।

फिर थोडी देर बाद हम दोनों बाथरूम में गए और इक्कठे नहाते वक्त एक बार फिर सेक्स किया। वो तीन दिन मधु मेरे साथ ही रही और हमने उन तीन दिनों में कई बार सेक्स किया, कभी बाथरूम में, कभी किचन में, कभी सीढियों में, कभी डाइनिंग टेबल पर और कभी ज़मीन पर। वो तीन दिन मेरी जिंदगी के सबसे खूबसूरत दिन थे

 
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जवानी की दहलीज पर आ चुकी अपनी बहन को आखिर मैं चोद ही डाला http://sexkahani.net/%e0%a4%9c%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a6%e0%a4%b9%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%9c-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%86-%e0%a4%9a%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%85%e0%a4%aa/ http://sexkahani.net/%e0%a4%9c%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a6%e0%a4%b9%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%9c-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%86-%e0%a4%9a%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%85%e0%a4%aa/#comments Wed, 22 Feb 2017 14:35:17 +0000 http://sexkahani.net/?p=10053 सभी दोस्तों को आसिफ का सलाम वालिकुम. मैं कई सालों से नॉन वेज स्टोरी का रेगुलर पाठक रहा हूँ. यहाँ की सेक्सी कहानियों में एक अजीब सा नशा है. फ्रेंड्स मैं रात में जब भी सोने जाता हूँ तो नॉन वेज स्टोरी की सेक्सी कहानियाँ जरुर पढता हूँ. इन कहानियों को पढ़े बिना मुझे चैन नही आता है. तो फ्रेंड्स, आज मैं भी फैसला किया है की आपको अपनी कहानी मैं भी जरुर सुनाऊंगा.

मैं आसिफ अमृतसर का रहने वाला हूँ. यहाँ के नवाती मोहल्ला में मेरा घर है. मेरे अब्बू और अम्मी दोनों बैंक में नौकरी करते है. अब्बू मेनेजर है और अम्मी क्लर्क है. घर पर मैं और मेरी जवान बहन ही रहती है. मैं घर का जादातर काम करता हूँ. घर पर मेरी बड़ी प्यारी और खूबसूरत की बहन है आलिया. वो अभी १३ १४ साल की है और १० वी में पढ़ रही है. दोस्तों, कुछ साल पहले तक मैं भी १२ वी में था. हम दोनों भाई बहन छोटे थे और जादा वक्त एक साथ बिताते थे. मेरे अब्बू और अम्मी तो अपनी ड्यूटी पर चले जाते थे. इसलिए हम भाई बहन घर पर अकेले रह जाते थे. कुछ साल पहले तक तो आलिया कमसिन और नादान थी, पर जैसे जैसे हम दोनों बदने लगे, हमारे जिस्म, बदन, और मन में तरह तरह के परिवर्तन आते गए. मेरी लम्बाई बढ़ गयी. मैं अपने पापा जितना ६ फुट का लम्बा हो गया. उधर मेरी बहन जवान हो गयी. उसके बदन में बड़े परिवर्तन आ गए. एक तो उसकी लम्बाई बहुत बढ़ गयी.

दूसरे अब उसका जिस्म थोडा भारी हो गया. उसकी छाती चौड़ी हो गयी. और उसके २ मस्त मस्त कबूतर जैसे मम्मे निकल आये. मैं तो दिन रात आलिया के सामने ही रहता था, इसलिए उसके बहन में हो रहें हर परिवर्तन को मैं भली भाति रिकॉर्ड कर रहा था. फिर कुछ दिनों बाद मुझको ब्लू फिल्मो और चुदाई के बारे में पता चल गया. अब मैं १५ या १६ साल का था, मैं रात में छिप छिप कर गंदी फिल्मे देखने लगा. मेरी बहन आलिया मेरे कमरे में ही सोती थी. जब वो गहरी नींद में सोयी होती थी, तक मैं dvd प्लयेर पर गंदी फिल्मे लगाकर देखता था. उस समय आज की तरह लैपटॉप या स्मार्टफोन नही हुआ करते थे. सभी लोग डी वी डी में ही चुदाई की फिल्मे देखा करते थे. धीरे धीरे दोस्तों, मैं मुठ मारना भी सीख गया. मेरे हरामी दोस्तों, ने मुझे ये सिखा दिया.

मेरे बहन मेरे कमरे में सोती रहती और मैं बत्ती बुझाकर मुठ मरता रहता. कई बार तो मन करता ही अपनी सगी बहन आलिया को चोद लूँ. फिर डरता की अगर अम्मी अब्बू को पता चला तो कितनी बेइज्जती होगी. वरना मेरा लौड़ा तो यही कहता की जब गर्म चूत तुम्हारे कमरे में मौजूद है तो मुठ क्यों मारते हो. अपनी बहन आलिया को चोद क्यूँ नही लेते. दिन गुजरते रहें, पर मैं अपनी बहन को चोद नही पाया. क्यूंकि मैं डरता बहुत था. मेरी गाड़ बहुत फटती थी. दोस्तों, एक दिन मेरी जवानी की दहलीज पर आ चुकी बहन सो रही थी. उस वक्त रात के १ बजे थे. पता नही क्यूँ मुझे उस रात नींद नही आ रही थी. सयद मैं दिन में सो लिया था. मैं आलिया की तरफ देखा तो उसका सूट एक दूसरी तरह भाग गया था. उसके मस्त स्तनों के दीदार मुझको हो रहें थे. मैं चुप चाप उठ बैठा. जब जब आलिया करवट लेती थी , उसके मस्त चूचों के दीदार मुझको हो जाते थे.

ये जवानी , ये खुमारी देखकर मैं आप खो दिया. मेरा हाथ मेरी चड्ढी में चला गया. मैं लंड में फेटने लगा. जब तक मैं कुछ और सोचता आलिया से दूसरी ओर करवट ले ली. उसका मस्त पिछवाडा, उसकी बड़ी सी गोल गोल गांड मुझको दिख गयी. मैं उसके पास चला गया. उसके २ बड़े बड़े गोल गोल मटोल चूतडों को सहलाने लगा. आलिया सोती रही. मैं सहलाने के मजा लेता रहा. खुदा कसम दोस्तों, यही दिल कर रहा था की आज सब रिश्ते नाते भूल जाऊं. और अपनी बहन को चोद लूँ, इसको चोद चोद के अपनी रखेल, अपनी बीवी, अपनी रंडी बना लूँ,. पर मैं दुनिया से बड़ा खौफ खाता था. पर मैं अपनी बहन आलिया के दोनों मस्त गोल मटोल चूतडों को सहलाता रहा. डर भी लग रहा था की कहीं जब ना जाए. पर आलिया सोती रही. मेरी हिम्मत और बड़ी. कुछ मिनट बाद आलिया पलती और उसके दोनों चूचे फिर मेरे सामने आ गए. मैंने अब हाथ उसके चूतडों से उठाकर उसके सूट में डाल दिया. उसके दोनों सफ़ेद कबूतरों को हाथ में ले लिया और चुने सहलाने लगा.

बराबर डर लग रहा था कहीं आलिया जग ना जाए. पर वो नही जगी. मेरी हिम्मत और बढ़ी. मैं उसके दुधिया कबूतरों से खेलने लगा. हल्का हल्का दाबने लगा. खुछ देर बाद मेरा उसकी उसकी सलवार पर चला गया. मेरा हाथ उसकी बुर पर चला गया. सलवार के उपर से उसकी चड्ढी के अंडर उसकी बुर पर मैं हाथ रखा तो बड़ा गर्म गर्म लगा. आज पहली दफा मुझे पता चला की किसी लौंडिया की बुर कितनी गर्म होती है. मैं सलवर के उपर से उसकी चूत सहलाने लगा और आलिया जग गयी.

भाईजान, ये क्या कर रहें हो?? आलिया बोली

दोस्तों, मेरी तो गांड फट गयी. मैं अँधेरे में अपने बिस्तर पर भागा पर पर आलिया से लाइट जला दी. मैं अपनी रजाई में घुस पर छिप पाता इससे पहले आलिया ने लाइट जला दी.

भाईजान साफ साफ बताओ वरना मैं जाकर अम्मी को इसके बारे में बता दूंगी?? आलिया बोली. मेरी तो गांड फट गयी. मेरे पैरों से जमीन खिसक गयी.

वो बहन! वो !! मैं ह्क्लाने लगा. मेरी समझ में नही आ रहा था की मैं आलिया से क्या कहूँ.

आलिया! मैं तुझको चोदना चाहता था! आखिर मैं सच सच कह दिया.

चोदना?? ये क्या बला है ?? आलिया से पूछा

चुदाई के बारे में मुझे अभी ही पता चला है. १ सेकंड रुक! मैंने कहा और दौडकर गया और मैंने टीवी में एक गन्दी चुदी चुदौवल वाली पिक्चर चलने लगी. आलिया आँख फाड़ कर चुदाई टीवी में देख रही थी. २ ३ दिन हम भाई बहन इसी तरह रात में अम्मी अब्बू से चिकपे चुदाई देखते थे. धीरे धीरे आलिया को ये गंदी पिक्चर देखने में मजा आने लगा. २ हफ्ते बीते हूंगे की हम भाई बहन जो लग भग लगभग एक ही उम्र के थे, साथ में चुदाई और ठुदाई की पिक्चर देखने लगे. ये सिलसिला कुछ महीने चला. आलिया ने मेरी वो वाली बात अम्मी अब्बू को नही बताई थी. इस पर मैं बहुत खुश था.

भाईजान! हम भी चुदाई चुदाई खेले?? एक दिन आलिया बोली

हाँ हाँ मैंने कहा. दोस्तों, मैं तो अपनी बहन को पहले से ही चोदना चाहता था. अब मैं उसके पास चला गया और उसको चूमने चाटने लगा. मैं फिर से एक ठुकाई वाली फिल्म लगा दी. आलिया तो आज चुदाई ठुकाई खेलना चाहती ही थी.

आलिया अपना सूट तो निकाल! मैं बोला.

बहन आलिया ने सूट निकाल दिया. २ मासूम बेहद नरम गोले मेरे सामने आ गए. मैंने उसको बिस्तर पर लिटा दिया. अपनी बहन के मम्मो को हाथ में ले लिया. हाय , मेरी बहना इतनी जवान और खूबसूरत है. मैं सोचने लगा. कुछ देर तक मैं उनको हाथ में लेकर सहलाता रहा, फिर मसलने लगा. बहुत ही नरम छातियाँ थी, बिलकुल मलाइ कोफ्ते थे. मैं उसको पीने लगा. २ पल के लिए लगा की मेरा बचपना लौट आया है, जब मैं छोटा था और अम्मी के दूध पीता था. मेरे दूध पीने से आलिया गर्म और चुदासी हो गयी. वो रम्भाने लगी. मैं जान गया की आज ये मजे से मुझे कह कहकर चूत देगी और किसी से कहेगी भी नही. मैंने जोर से अलिया के बाये मम्मे पर काट लिया. वो तड़प उठी. उसके स्तन पर मेरे दांत के निशाँन बन गए. फिर भी वो मुझसे अपना दूध पिलाती रही.

मैं जोर जोर से अपनी बहन की छातियाँ दबाता चला गया और पीता गया. हम दोनों जन्नत में घूम रहे थे. अपनी जवानी की दहलीज पर आकर बहन को देखकर मुझे बहुत खुशी हो रही थी, अब मुझे चूत मारने के लिए कहीं और नही भटकना होगा. क्यूंकि चूत का इंतजाम तो मेरे कमरे में ही हो गया है. मेरी बहन आलिया मेरी आँखों में आँख डाल के दे रही थी. बीच में वो आँख मार देती थी. में जान गया की रोज चुदाई देखता था, आज करने का मौका मिलेगा. आलिया ने अपनी सलवार निकाल दी. अभी पिछले हफ्ते ही अम्मी उसके लिए मिकी मोउस वाली चड्ढी लायी थी, आलिया ने इस वक्त वही पहन रखी थी. उसकी मिकी मोउस वाली चड्ढी के उपर से ही उसकी चूत की दरार दिखने लगी. मुझे तो अंगराई आ गयी दोस्तों. मैंने उसपर से २ ४ बार चूत की दरारों की छुआ और चूम लिया.

कुछ देर तक सहलाता रहा. आलिया की चूत गीली होने लगी. वो अंगराई लेने लगी. कमर उथाने लगी. उसने मेरा हाथ पकड़ लिया. पर मैं नही माना और जवानी की दहलीज पर आ चुकी अपनी बहन की मिकी मोउस वाली चड्ढी को मैं लगातार सुपाड़ी की तरह घिसता रहा. खुच देर बाद मैं ये देख के हैरान था की आलिया की चूत उसी तरह पानी चोद रही थी जैसे सबजी का मसाला भुजने पर तेल छोड़ देता है. आलिया मेरे हाथ को रोकने की असफल कोसिस करती रही, मैं उनकी चूत घिसता रहा. एक समय वो आया की आलिया बोली

भाईजान!! चोदना है तो अभी मुझे पटक के चोदो वरना दफा हो जाऊ, मेरी बुर इस तरह मत घिसो! वो बोली.

मैं समझ गया की लोहा गरम है. हथोड़ा मार दो. मैंने आलिया की भीग चुकी और गीली हो चुकी चड्ढी को उतार दिया. उसकी टांगे खोल दी. उसकी बुर पीने लगा. अब मेरी जवान हो चुकी बहन की जवान चूत मेरे सामने थी. उसकी चूत के होंठ में शुरू में ३ लाइन बनी थी. २ लाइन किनारे से थी और बीच की लाइन उसकी बुर में जाती थी. मैं उस बीच वाली पीने को पीने लगा. आलिया मचल गयी, कमर उपर उठाने लगी. कुछ देर बाद मैं लौड़ा उसकी बुर पर लगा दिया. आलिया टीवी की उस ब्लू फिल्म को देखने लगी, मैं हच से धक्का मार दिया. आलिया की गांड फट गयी. २ सेकंड के लिए मैं अपना लंड बाहर निकाला तो देखा मेरे लंड के टोपे में उसकी कुंवारी बुर का गाढ़ा खून लग गया था. फिर मैंने लंड अंडर उसकी चूत में डाल दिया और धीरे धीरे अपनी जवान बहन को चोदने लगा.

शुरू में वो आलिया को दर्द हुआ , पर जल्द ही उसको मजा मिलने लगा. आधे घंटे बाद तो खुशी से मुझसे चुदवाने लगी. मैं धिच्चिक धिच्चिक करके अपनी बहन को पेलने लगा. आलिया मेरे सामने अपने दोनों हाथ और दोनों पैरों को खोल के लेती थी. हम दोनों चुदाई की अनोखी  सैर पर निकल गये थे. हम भाई बहन में चुदाई की ऐसी सरगम जमी की बस मत पूछिए. जहाँ एक ओर मेरी कमर डिस्को डांस कर रही थी, वही आलिया की कमर शिलपा शेट्टी जैसी नाच रही थी. आखिर इसे ही तो कहते है असली चुदाई. मुझे तो यही लड़ने लगा दोस्तों की अल्ला ताला ने मुझे ये मजबूत मोटा लंड अपनी बहनिया को पेलने के लिए ही दिया था. आलिया लेटे लेटे कमर नचा रही थी, जैसे उसमे स्प्रिंग लगा हो.

कुछ अंतराल के बाद मैं बड़ी जोर जोर से हुमक हुमक से उसको वहसी की तरह चोदने लगा. पट पट चट चट का शोर बजने लगा. डर लगा की कहीं अम्मी अब्बू ने हम भाई बहनों को चुदाई का खेल खेलते देख लिया तो क़यामत आ जाएगी. पर उपर वाले से साथ दिया. अम्मी अब्बू गहरी नींद में सो रहें और मैं धकाधक अपनी बहन को नंगा करके चोद रहा था.

मेरे ताबड़तोड़ बढते धक्कों ने आलिया की कमर उपर को उठ जाती थी. मेरा लंड उसकी बुर में पूरी तरह धस गया था. आज मैं उसकी बुर फाड़ के रख दी थी.आलिया खुद अपने मम्मो को जोर जोर से दबा रही थी. मैंने उसकी कमर को दोनों हाथों ने पकड़ रखा था. मेरी जोर दार धक्कों ने बहन का पूरा जिस्म काँप रहा था. उसमे झुरझुरी दौड़ रही थी. १ घंटे बाद मैं आउट हो गया. आलिया अभी १४ १५ साल की है, कभी प्रेगनंट ना हो जाए, इससे बचने के लिए मैंने अपना लंड बाहर निकाल लिया. फुच फुच मेरे माल की पिचकारी छुटने लगी और उसके उपर गिरने लगी. मेरा माल उसके मुह, नाक , मम्मो, गले, पेट, नाभि हर जगह गिरा. आलिया उसको ऊँगली में लेकर चाटने लगी. कुछ देर बाद मैं फिर अपनी बहन को चोदा.

उसके बाद तो दोस्तों, मैं बी ए तक अपनी बहन को रोज अपने कमरे में नंगा करके चोदता खाता रहा. कुछ समय बाद उसकी शादी हो गयी. अब तो मेरे दुल्हाभाई ही मेरी बहन को हर रात लेते है. दोस्तों, आपको अगर मेरी यह सच्ची कहानी पसंद आई है तो नॉन वेज स्टोरी डॉट कॉम पर अपनी कमेंट्स जरूर लिखे.

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दोस्त की होने वाली साली के साथ सुहागरात (Sex Stories Hindi: Dost Ki Hone Wali Sali Ke Sath Suhagrat) http://sexkahani.net/%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87/ http://sexkahani.net/%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87/#respond Wed, 22 Feb 2017 12:33:07 +0000 http://sexkahani.net/?p=10051 हाय.. मेरी सेक्स स्टोरी पढ़ने वाली सभी सेक्सी लड़कियां, भाभियां और लंड की शौकीन सभी चुदासी चूतों को अक्की का लन्डस्कार.. मतलब नमस्कार।

मेरा नाम अक्की है। पूरे छह फिट का हट्टा-कट्टा मस्त नौजवान हूँ और मूसल किस्म के लंड का मालिक हूँ। मैं सूरत (गुजरात) का रहने वाला हूँ।

मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ, यहाँ प्रकाशित सभी सेक्स कहानी मुझको बहुत ही पसंद हैं। यहीं से मुझे भी अपने साथ हुए एक अनोखे अनुभव के बारे में लिखने की प्रेरणा मिली है, मुझे पक्का यकीन है मेरी यह कहानी पढ़कर लड़के और बुड्ढे अपना लंड हिला-हिला कर ढीला कर लेंगे और औरतें सपने में मेरे साथ चुदाई करके अपने आपको खुदकिस्मत समझेंगी।

बात आज से करीब एक साल पहले की है, मैं अपने दोस्त पवन से मिलने के लिए उसके घर राजस्थान गया हुआ था। वैसे मुझे तब तक किसी लड़की को पेलने का अनुभव नहीं था।

राजस्थान पहुँचते ही मेरे दोस्त ने मेरा बड़ी अच्छी तरह से स्वागत किया। वो एक अच्छे खानदान का लड़का था.. सो उसका घर भी किसी महल से कम नहीं था।

दरअसल पवन ने मुझे उसके खुद के लिए लड़की चुनने के लिए ही बुलाया था। अगले दिन हमें लड़की देखने जाना था.. इसलिए रात को खाना खाकर में उसके साथ उसके कमरे में ही सो गया।

दूसरे दिन सुबह ही हमें लड़की देखने के लिए निकलना था। सुबह करीब आठ बजे मैं, मेरा दोस्त पवन, उसके पापा-मम्मी और उसकी छोटी बहन.. हम सब उनकी इनोवा गाड़ी में लड़की के घर जाने के लिए निकले। उसके घर से लड़की का घर करीब 3 घंटे की दूरी पर था।

रास्ते में हम काफ़ी मस्ती करते हुए करीब 11:30 पर लड़की के घर पहुँचे।

वहाँ पहुँचते ही हम सबका बड़े ही शानदार तरीके से स्वागत किया गया। जिस लड़की के साथ मेरे दोस्त की सगाई होने वाली थी.. उसका घर भी किसी महल से कम नहीं था। हम सबको आराम के लिए अलग-अलग कमरे दिए गए। उस हिसाब से मेरा कमरा, मेरे दोस्त का कमरा और उसके पापा-मम्मी और उसकी बहन को अलग कमरा दिया गया।

शाम के वक़्त हमें लड़की से मिलना था तो हम सब खाना खाकर सोने की तैयारी में लगे हुए थे। मैं खाना खाकर बाथरूम में नहाने के लिए चला गया, तभी मेरे रूम के दरवाजे पर किसी ने दस्तक दी।

मैं बाथरूम में था इसलिए 3-4 बार आवाज़ देने पर मुझे महसूस हुआ कि कोई मेरे रूम के दरवाजे पर खड़ा होकर नॉक कर रहा है। जल्दबाज़ी में मैं वैसे ही आधा नहाया हुआ दरवाजा खोलने के लिए दौड़ा।

जैसे ही मैंने दरवाजा खोला.. सामने एक बहुत ही सेक्सी लड़की चनिया-चोली में खड़ी हुई नज़र आई। जब मैंने ध्यान से देखा तो पता चला कि ये वही लड़की है जो हमारे स्वागत के वक्त ही मुझे घूर रही थी। उस वक्त मैंने पवन से पूछा था तब मुझे पता चल गया था कि इस लड़की का नाम पूर्वी है और वो पवन की होने वाली साली थी।

उसको इस तरह देख कर मैं हक्का-बक्का हो गया। एक तो मैं नहाते हुए दरवाजा खोलने आया था.. तो पूरा नंगा ही था और ऊपर से ऐसी सेक्सी लड़की को सामने देखते ही मेरा लंड पूर्वी के सामने मानो सलामी देने में लगा हो।

क्या मस्त फिगर था उसका.. हाय.. बड़े-बड़े मम्मे.. करीब 36 की साइज़ के, पतली कमर करीब 27 की साइज़ की और बड़ी सी गांड करीब 36 की साइज़ की होगी। कुल मिला कर एक चोदने लायक फुलझड़ी मेरे सामने खड़ी थी।

पूर्वी मुझे इस हालत में देखकर ज़ोर से हँस दी और फिर से मुझे देखने लगी। थोड़ी देर बाद उसने अपनी नज़र नीचे कर लीं। जब उसने अपनी नज़र नीचे की तब मुझे अहसास हुआ कि मैं पूरी तरह से नंगा हूँ। वो बार-बार मेरे लंड को घूरे जा रही थी।

अचानक मुझे भी याद आया कि मैं तो टॉवेल के बिना ही बाहर आ गया था। मैंने जल्दी से अपनी स्थिति बदल कर उसके सामने उल्टा खड़ा हो गया और एक तकिया अपने लंड के पास रखकर वापिस उसके सामने खड़ा हो गया।

मैंने जब पूर्वी की ओर देखा तो पाया कि उसकी आँखें लाल हो गई थीं जो मुझे कच्चा खा जाने के लिए बेकरार लग रही थीं।

फिर मैंने सीटी बजाई तब वो झेंप गई और फिर से हँस दी। मैं समझ गया कि यह चुदने के लिए तैयार है.. पर मैंने जल्दबाज़ी ना करते हुए उसे पास में पड़े सोफे पर बैठने के लए कहा और वापस बाथरूम जाकर अपना शरीर पोंछकर कपड़े पहन कर वापस उसके पास आकर बैठ गया।

काफ़ी देर तक खामोश रहने के बाद मैंने उसके साथ इधर-उधर की बात चालू की, बातों-बातों में मैंने जाना कि वो अभी पढ़ रही है।

मैंने थोड़ी और बात करने के बाद उससे पूछा- क्या उसका कोई बॉयफ्रेंड है.. या नहीं है?
वो थोड़ी देर मेरे सामने देखती रही, फिर बोली- मैंने आज से पहले किसी लड़के के साथ बात तक नहीं की है।

यह सुनकर मेरे मन में लड्डू फूटने लगे। फिर मैंने अपना हाथ उसकी ओर बढ़ाते हुए पूर्वी को फ्रेंडशिप का ऑफर किया.. तो उसने तुरंत ही अपना हाथ देते हुए मेरी दोस्ती स्वीकार कर ली।

अब मैंने उसके हाथ को अपने होंठों से चूम कर उसका धन्यवाद किया। मेरे छूते ही मानो उसके शरीर में एक सिरहन सी हुई और वो मुझसे लिपट गई।

करीब दस मिनट तक मैं उसे अपनी बांहों में दबाए हुए बैठा रहा। इस स्थिति में मेरा चेहरा उसके चेहरे के सामने आ गया और मेरी साँसें उसकी सांसों में घुल रही थीं।
मैंने हिम्मत जुटाकर धीरे से उसके गुलाबी मखमली होंठों को चूम लिया।

पूर्वी मानो इस पल का ही इंतजार कर रही थी। उसने भी कसकर अपने होंठों के बीच मेरे होंठों को दबा लिया। धीरे-धीरे हमारा चुंबन और रोमांचक होता गया।

हमारे इस आपसी आकर्षण में मुझे याद आया कि कमरे का दरवाजा तो खुला ही है। मैंने पूर्वी के होंठों से अपने होंठ हटा कर दरवाजा बंद करने का इशारा किया। वो मेरी बात को समझते हुए मेरी बांहों से अलग हुई और मैं दरवाजा बंद करने चला गया।

जब मैं दरवाजा बंद करके लौटा तो पूर्वी सोफे पर नहीं थी.. वो बिस्तर के किनारे बैठी हुई थी.. मानो कोई नई-नवेली दुल्हन सज-धज कर अपनी चूत की ओपनिंग का इंतजार कर रही हो।
मैं धीरे से उसके पास गया और उसके सामने बैठ गया। मैं उसके इतने नज़दीक था कि मुझे उसके दिल की धड़कन तक सुनाई दे रही थी।

मैंने फिर से उसके होंठों को चूसना शुरू कर दिया। करीब 5 मिनट की होंठ चुसाई के बाद अब मैंने धीरे-धीरे उसके पूरे बदन को सहलाना शुरू कर दिया।

पूर्वी अब धीरे-धीरे मेरी इस हरकत का मज़ा लेते हुए मेरे अंगों के साथ खेलने लगी। वो मुझे बेतहाशा चूमे जा रही थी और मैं उसके पूरे बदन को अपने होंठों के ज़रिए चाट-चाट कर उसकी वासना की आग को और भड़का रहा था।

अब हम दोनों को हमारे कपड़े मानो हमारे ही दुश्मन लग रहे थे। मैंने पूर्वी के बदन से एक-एक करके सारे कपड़े उतारने चालू कर दिए। पहले मैंने उसके चनिया-चोली के ऊपर डाले हुए दुपट्टे को उसके बदन से अलग किया और उसके एक मम्मे को चोली के ऊपर से ही सहलाने लगा। करीब दस मिनट उसके मम्मों को सहलाकर फिर मैंने उसकी चोली के हुक खोल दिए और अपने होंठों से उसकी चोली को चूम-चूम कर धीरे से उसके बदन से अलग कर दिया।

मेरी इस हरकत से पूर्वी के रोंगटे खड़े हो गए। अब पूर्वी मेरे सामने सिर्फ़ ब्रा और चनिया पहन कर बैठी थी।

इसी दौरान मैंने उसके सामने देखा तो मैंने पाया कि उसका पूरा चेहरा शर्म और उत्तेजना से लाल हो गया था। उसकी आँखें मुझे उसको और भड़काने का निमंत्रण दे रही थीं और उसका एक हाथ मेरी पैन्ट पर बने हुए तंबू पर अपनी मुहर लगा रहा था।

मैंने उसको और भड़काने के लिए उसको बिस्तर के ऊपर खड़ा होने को कहा.. तो वो अपनी अदा का जादू बिखेरते हुए धीरे-धीरे अपनी गांड को हिलाते हुए खड़ी हो गई.. जिस वजह से उसका चनिया मेरे चेहरे के सामने आ गया।

मैंने हल्के से वहाँ अपने होंठ रखकर उसको चूम लिया.. जिसकी वजह से वो और भी मदहोश हो गई।
मैंने दोनों हाथों से उसके चनिए के नाड़े को खींच कर उसका चनिया उसके बदन से अलग कर दिया। अब ब्रा और पैन्टी में खड़ी पूर्वी मुझे बहुत ही सेक्सी लग रही थी।

करीब 5 मिनट तक मैं उसे ऐसे ही देखते रहा। आगे का दौर संभालते हुए वो मेरे बगल में आकर धीरे से लेट गई और मुझे मेरे कपड़े उतारने का इशारा करने लगी।

मैंने उसे खुद ही अपने कपड़े उतारने के लिए कहा और उसके बदन के दोनों साइड अपने पैर रखकर अपना पजामा उसके मुँह तक ले गया।
वो मेरा इशारा समझ गई और मेरे लंड को पजामे के ऊपर से ही सहलाती हुई धीरे-धीरे पजामा को खोलकर नीचे कर दिया।
अब उसके सामने में सिर्फ़ अंडरवियर में था।

अब पूरे कमरे में सिर्फ़ मैं और पूर्वी आधे नंगे होकर बिस्तर के ऊपर एक-दूसरे से ऐसे लिपटे हुए थे.. मानो हम दो बदन से एक बदन होने की नाकाम कोशिश में जुट गए हों।

हमारी इस उत्तेजना में कब हमारे शरीर से बाकी के कपड़े निकल गए.. खुद हमें ही मालूम नहीं चला। हम दोनों पूरे नंगे होकर एक-दूसरे को बेतहाशा चूम और चाट रहे थे, एक-दूसरे के अंगों के साथ खेल रहे थे।

मेरे मुँह में उसके रसभरे आम थे.. जिसके निप्पल मैंने चूस-चूस कर लाल कर दिए थे। पूर्वी की सिसकारियों से पूरा कमरा वासनायुक्त हो गया था।

मैंने धीरे से अपनी स्थिति को बदल कर उसके पूरे बदन तो चाटते हुए उसकी चूत पर अपना सर जमा दिया। जैसे ही मैंने अपनी जीभ उसकी चूत पर रखी.. पूर्वी को मानो कोई झटका लगा हो, वह उछल पड़ी और मारे वासना के उसने मेरा सर उसकी चूत पर कस लिया।

अब उसे भी मज़ा आने लगा था और वासना के मारे उसका पूरा शरीर हिल रहा था।

मैंने स्थिति को समझते हुए अपना लंड जो कि उसके मुँह के पास था, उसे पूर्वी के मुँह में ठूंसने लगा। पूर्वी मेरा इशारा समझ गई और पूरा का पूरा लंड अपने मुँह में गटक गई।
मुझे तो जैसे कोई अफीम का नशा हो उठा।

अब मैं उसकी रसीली चूत चूस रहा था और वो मेरे लंड को खा जाने की कोशिश में जुटी हुई थी।

हम दोनों ही वासना के इस खेल के उस चरण में आ गए थे, जहाँ से हम दोनों का वापस जाना नामुमकिन था। पूर्वी और मैं अब फिर से स्थिति बदल कर एक-दूसरे के मुँह में मुँह डाल कर मानो एक-दूसरे के मुँह में ही झड़ जाने की नाकाम कोशिश कर रहे थे।

इस तरह किस करते-करते ही मैंने पूर्वी के पैर थोड़े फैला दिए और अपने लंड को उसकी रसीली चूत के साथ रगड़ कर उसे मेरा लंड अन्दर लेने के लिए उकसाने लगा। पूर्वी जल बिन मछली की तरह मेरा लंड अन्दर लेने के लए तड़प रही थी और मैं था.. जो उसकी चूत पर अपना लंड बार-बार घिसे जा रहा था।

वैसे ही अपनी करामात दिखाते हुए मैंने अपने लंड को धीरे से पूर्वी की चूत पर रखकर हल्का सा धक्का मारा और मेरे लंड का सुपारा उसकी चूत में फंस गया। लंड का सुपारा फंस जाने की वजह से उसे काफ़ी दर्द हो रहा था, पर मैंने उसके दर्द को अनदेखा करके उसके होंठों को अपने होंठों के बीच दबोच लिया और एक जोर का झटका लगा दिया। इस बम-पिलाट झटके से मेरा आधा लंड उसकी प्यारी चूत में चला गया।
वो दर्द से कलप गई।

मैं थोड़ी देर वैसे ही उसके होंठों को चूसता रहा और उसके दर्द के कम होने का इंतजार करने लगा। जैसे ही मुझे महसूस हुआ कि पूर्वी का दर्द अब कम हुआ है.. मैंने एक और जोरदार धक्का लगाया और मेरा पूरा लंड उसकी चूत को चीरता हुआ अन्दर तक जा पहुँचा।
आख़िर मेरा तीर निशाने पर लग गया और पूर्वी जो कुछ देर पहले एक कच्ची कली थी.. वह अब फूल बन चुकी थी। उसकी चूत से थोड़ा खून निकला जो इस बात की गवाही दे रहा था कि इससे पहले चूत कुंवारी थी.. एक कच्ची कली थी।

अब हम दोनों वासना के इस निराले खेल के आखरी पड़ाव के नज़दीक जा रहे थे। मैंने पूर्वी को उसकी पहली चुदाई में हर तरह से चोद-चोद कर यह एहसास दिला दिया था कि वो बस मेरी गुलाम सी हो गई थी। पूर्वी इस हद तक मुझे चाहने लगी थी कि अगर मैं उसको कहता कि मैं उसकी गांड मारना चाहता हूँ, तब भी वो मना नहीं करती। पर वास्तव में मैं उसे अपने प्यार की तरह ही संभाल कर रखना चाहता था।

मैं अब अपनी स्पीड बढ़ाते हुए ज़ोर-ज़ोर से उसे चोदने लगा। वो मेरी इस सुनामी की ऐसी कायल हो गई कि वो 3 बार झड़ गई थी। अब मुझे भी मेरी मंज़िल करीब आते दिख रही थी।

मैंने पूर्वी से कहा- मैं अब आने वाला हूँ।
तो उसने मुझे अन्दर ही झड़ जाने के लिए कहा और 10-12 धक्कों में ही मेरा ये वासना से निराला खेल अपनी चरम सीमा पर जा पहुँचा।

सच में ऐसी दमदार चुदाई हुई कि हम दोनों ही थक कर एक-दूसरे के ऊपर नशे के मारे दस मिनट निढाल पड़े रहे।

आख़िर जब हमें होश आया तब फिर से एक-दूसरे को लंबा सा किस करके अलग हुए और बातें करने लग गए।
अब वो मुझे बहुत प्यार से देख रही थी, मैंने उससे पूछा- मुझे अन्दर झड़ने के लिए क्यों बोली थीं?

उसने बताया- मैं आपके प्यार की मुहर के तौर पर आपका सारा वीर्य अपने अन्दर महसूस करना चाहती थी और आपके वीर्य को अपने अन्दर लेकर मुझे स्वर्ग की खुशी का एहसास हुआ है।

दोपहर की इस प्यारी सी चुदाई के बाद शाम को हमने मेरे दोस्त पवन के लिए उस लड़की मानसी को उसकी मंगेतर के रूप में सिलेक्ट किया.. जो कि पूर्वी की ही बड़ी बहन थी। फिर दूसरे दिन वापस अपने दोस्त पवन के घर जाने के लिए हम निकल आए।

जाते वक़्त पवन और मानसी की आँखों में जो जुदाई का गम था.. उसके कई गुना ज़्यादा दर्द मेरी और पूर्वी की आँखों में था। हमने एक-दूसरे के फ़ोन नंबर लिए और आगे फिर से मिलने के वादे के साथ जुदा हो गए।

तो दोस्तो, सेक्सी लड़कियों और मेरे लंड की आशिक भाभियों.. यह थी मेरी Sex Stories Hindi पूर्वी के साथ.. आप सभी को कैसी लगी, ज़रूर बताना।

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टीचर कि बेटी अनुराधा की चुदाई, लंड खड़ा कर देने बाली कहानी http://sexkahani.net/%e0%a4%9f%e0%a5%80%e0%a4%9a%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%bf-%e0%a4%ac%e0%a5%87%e0%a4%9f%e0%a5%80-%e0%a4%85%e0%a4%a8%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a7%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%9a%e0%a5%81/ http://sexkahani.net/%e0%a4%9f%e0%a5%80%e0%a4%9a%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%bf-%e0%a4%ac%e0%a5%87%e0%a4%9f%e0%a5%80-%e0%a4%85%e0%a4%a8%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a7%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%9a%e0%a5%81/#respond Wed, 22 Feb 2017 10:30:59 +0000 http://sexkahani.net/?p=10049 नॉन वेज स्टोरी डॉट कॉम पर सभी सेक्सी कहानी पढ़ने वाले मित्रों को पंकज मिश्र का गुड इवनिंग. हर दिन जब रात होता है तो हम सभी लड़कों के लंड खड़े हो जाते है. और जब कोई चूत हमारे पास नही होती तो बस हाथ का ही सहारा रहता है. पर सूखे सूखे क्या हाथ मारना. कोई मस्त कहानी तो बनती है. इसलिए दोस्तों, नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर कई सालों से सेक्सी कहानी पढ़ने के बाद आज मैं भी आपक सभी को अपनी सेक्सी कहानी सुना रहा हूँ.

दोस्तों, मैं नया नया जवान हुआ था. सिटी मोंटेसरी स्कूल में साधना मिस हम सब बच्चो को पढाती थी. मैं ८ वी में पढ़ रहा था, पर चुदाई और मैथुन क्या होता है, ये मैं जान गया था. साधना मिस हम बच्चो की क्लास टीचर थी. वो काफी बुड्ढी थी. १० १५ साल से वो पढ़ा रही थी. साधना मिस की मैं बहुत इज्जत करता था. वो मुझे हर टेस्ट में गुड देती थी, क्यूंकि मेरे साले जवाब सही होते थे. मेरे कुछ दोस्त मुझे गंदी फिल्मे दिखाते थे. मैं उस समय नादान था, पर दिल में ख्वाहिश तो थी ही की काश कोई लड़की मेरी गर्लफ्रेंड बन गए. कुछ महीनो बाद जुलाई आई तो साधना मिस से अपनी लड़की अनुराधा का नाम मेरे ९ क्लास में लिखवा दिया. चूँकि अनुराधा मिस जी की लड़की थी , इसलिए वो आगे वाली सीट पर बैठती थी. मैं भी हमेशा आगे वाली सीट पर बैठता था.

मैं पढ़ने में होसियार था, वही साधना मैडम की लड़की भी बहुत होशियार थी. कुछ ही दिन में हम दोनों की अच्छी दोस्ती हो गयी. कई बार वो मुझसे मिलने मेरे घर आती थी. साधना मिस वैसे तो बड़ी सख्त मिजाज थी, पर मेरा रिकॉर्ड अच्छा था, इसलिए अनुराधा को मेरे घर आने देते थे. वो डरती भी थी क्यूंकि अनुराधा अब जवान हो चुकी थी. एक बार में एक लड़का और लड़की क्लास रूम में चुदाई करते हुए पाये गए थे. तबसे सभी टीचर थोडा डरने लगे थे. जब अनुराधा का बर्थडे पड़ा तो उसने मुझे अपने घर पर बुलाया. फिर २ महीने बाद मेरा बर्थडे पड़ा तो मैं अनुराधा को बुलाया.

उस दिन मैं तो उस पर मर मिटा जा रहा था. गुलाब का फूल लग रही थी अनुराधा. जहाँ मैं साढ़े ५ फिट का था वहीँ वो ५ फिट १ इंच की थी. अभी अभी नई नई जवान हुई थी. मम्मे भी अब बड़े होकर पक गए थे. अब वो भोगने और चोदने खाने लायक सामान हो गयी थी. हो सकता है आप लोग कहे की पंकज मिश्र कितना चोदू आदमी है, अपनी मैडम की लड़की की ऐसा कह रहा है. पर इसके जवाब में मैं तो कहूँगा की जब लंड खड़ा होता है और फन मारता है तब माँ की माल लगती है. लंड को तो बस वही ५ इंच गहरा छेद चाहिए होता है. खड़ा लंड तो तब ही बस शांत हो सकता है. सिर्फ बाते पेलने से तो लंड शांत नही होता. इसको तो बस १ छेद चाहिए होता है चोदन के लिए. फिर कैसी मिस और कैसी टीचर.

जब अनुराधा आ गयी तब ही मैं केक काटा. इसमें कोई दोराय नही की मैं उससे प्यार करने लगा था. मैं आज सोच भी लिया था की आज अनुराधा को प्रोपोस मार दूँगा. अनुराधा का बदन भरा हुआ था, उसी से मैं उसके मस्त भरे बदन का अंदाजा लगा सकता था. जैसा फैशन टीवी पर दिखाते है की लडकियां पतली पतली बांस के खंबे की तरह सिकडी पहलवान होती है, अनुराधा उस तरह की बिलकुल नही थी. बिलकुल देसी मछली थी. आह उसके चोदने को मैं कबसे बेक़रार था. कितने सपने देखे थे उसके लिए मैंने. पर साधना मिस से मैं बहुत डरता था, मेरी बड़ी फटती थी उनसे. क्यूंकि बचपन से वो और उनकी डंडी ही मैंने देखि थी. सारे लड़के भी बहुत डरते थे उसने.

बर्थडे का केक कट गया तो सब मेहमान फिर से अपनी अपनी मंडली में खो गए. मैंने अनुराधा को अपने बगीचे में ले आया. एक गुलाब का फूल तोडा और उसको दे दिया.

अनुराधा !! आई लव यू!! मैंने कहा

वो बिलकुल से झेप गयी. कुछ देर तक तो कोई जवाब ना दिया. मैं तो टेंशन में आ गया. क्यूंकि मैं उसे सिर्फ चोदना खाना ही नही चाहता था, पर प्यार भी बहुत करता था. इसलिए मैं थोडा इमोसनल भी था. कुछ देर बाद अनुराधा हँसी और हाँ में उसने सिर हिला दिया. दोस्तों, मैं इतना खुश हुआ की लगा मैंने दुनिया जीत ली है. लगा मैं बिल गेटस बन गया हूँ और दुनिया का सबसे आमिर आदमी हूँ. मैं अनुराधा को अपने कमरे में ले आया.

वो भी अपनी मर्जी से आई थी. मेरे घर में हर तरह पार्टी चल रही थी. हनी सिंह के गाने बज रहें थे. मेहमान ही मेहमान थे. मेरे कमरे में मेरी मौसी की लडकियां बैठी थी, मैं उसको बाहर निकला. अनुराधा मेरे साथ अंडर आ गयी. वो भी जान गयी थी की हम दोनों कुछ ना कुछ करेंगे. अंदर आते ही मैंने अनु [प्यार से मैं उसको कभी कभी अनु भी कह देता था] को सीने से लगा लिया. हम दोनों लिप लोक होकर किस करने लगे. अनुराधा बड़ी ही मासूम थी, जरा भी चंट नही थी. बड़ी सीधी लड़की थी तभी मुझे उससे इश्क हुआ था. मैंने अनुराधा को बाँहों में भर लिया, उसके होठों पर गर्म गरम चुम्बन लेने लगा. पहली बार किसी लड़के के होंठ पी रहा था. बड़ी बात होती है ये.

अनु के होठ पीते पीते हम दोनों गरम हो गए. मैंने अनु की आँखों में बस झाका और मुझे जवाब मिल गया. यही तो प्यार में होता है, बात करने  की जरुरत ही नही होती. सारी बातें बस आँखों आँखों में ही हो जाती है. वो भी चुदने को अपने मन से तैयार थी. अनु ने पिंक रंग की कुर्ती पहन रखी थी. बिलकुल घर का देसी लाग लग रही. मैंने उसके पुरे बदन को बाहों में भर लिया और हर जगह सहलाने लगा. उसकी, कंधे, पीठ पर मेरा हाथ गया. फिर उसकी कमर पर मेरा हाथ गया. और फिर उसके हिप्स पर मेरा हाथ गया. भरे भरे गोल गोल हिप्स को छूते ही मेरे दिल ने कहा रोज रोज अनुराधा तो तुमको मिलेगी नही पंकज. मौके का फायदा उठाओ और इस कच्ची कली को चोद लो. वरना कल किसने देखा है. कहीं साधना मिस किसी और स्कूल में पढाने चली गयी तो.

बस मैंने अनुराधा को अपने बेड पर घसीट लिया. वो भी चुदासी थी और कोई नु नुकर उसने नही किया. मैं भी उसके बगल लेट गया. चुदाई की सुरवात चुम्मा चाटी से हुई. काफी देर तक तो चिपका चिपकी चली. आँखों के इशारे में चुदाई का संकेत हो गया. मैंने खुद अनुराधा की गुलाबी कुरती को उतार दिया. जैसे जैसे उसके बदन से एक एक कपड़ा निकलता गया अनु[ अनुराधा] के भव्य रुपए के दर्शन होते गए. अंत में वो अपने आलसी प्राकृतिक रूप में आ गयी. वो १५ १६ साल की लड़की अपने असली भव्य रुप में आ गयी. वो वस्त्रविहीन हो गयी. मैं भी कपड़े निकाल दिए. अनु के रूप को मैं निहारता रह गया. छरहरा इकहरा बदन आज कल की छोकरियों के बिलकुल विपरीत जो फास्ट फ़ूड खा खाके मोटी और भद्दी हो जाती है. मेरे सामने उसका नया नया यौवन से परिपूर्ण बदन खुला हुआ था. अनुराधा के चेहरे पर नूर ही नूर झलक रहा था, उसकी मासूमियत की खूबसूरती. उसके कुंवारे होठ जिसको अभी तक किसी लड़के ने नही पिया था.

उसके उभरे चिकने चुच्चे जिसके चूचकों पर १० रुँपये के सिक्के की साइज़ के काले घेरे थे. जिसको अभी तक किसी से नही चखा था. बार बार मैं अनुराधा के चेहरे को चूमने लगा. मन तो हुआ की इसकी मासूमियत को नष्ट ना करू. इसको ना चोदू. ऐसे ही काम चला लूँ, पर इस महापापी लंड का क्या करता. इसको तो ४ इंच का छेद चाहिए ही ना. ये मेरी बात ना सुनता. इसलिए मैं चुदाई की दिशा में बढ़ गया. सबसे पहले अनु [अनुराधा] के दोनों गुलाबी कुंवारे होंठों को पी कर उनकी सारी लाली चुरा ली. जैसे मधुमखी फूल पर बैठ कर उसका सारा नूर सारा पराग चुरा लेती है. मेरे हाथ लगातार उसके चुच्चों पर लगातार गश्त लगा रहें थे जैसी पुलिस रात में पुरे शहर में गश्त लगाती. अनु के इस भव्य रूप के मैंने आज पहली बार दीदार किया था. स्कूल ड्रेस में तो वो मुझे हमेशा बहन जी टाइप की लगी थी पर आज ऐसे उसके खुले नग्न रूप में वो मुझे आदर्श प्रेयसी लग रही थी.

मैंने पूरी तरह से उसको अपने में भर लिया. उसके सिर को मैंने प्यार से पकड़ लिया और उसके सिक्के जैसे काले घेरों को पीने लगा. अनुराधा के नंगे बदन की खुसबू मेरे नथुने में चली गयी. मैं अनु को पूरी तरह से अच्छे से भोगना चोदना चाहता था. कहीं कोई कोर कसर नही छोड़ना चाहता था. मैं उसको खुद में लपेट लिया था, रुमाल की तरह वो मुझे सिमट सिकुड गयी थी. साधना मिस से उसके लिए सोने की चैन बनवाई थी. नई नई सोने की चेन उसके गले में बहुत जच रही थी. एक बार तो लगा की मैं उसके साथ गोवा या कोई पर्यटन स्थल पर आया हूँ और हनीमून मना रहा हूँ. उसकी बगलों में बड़ी बारीक़ हल्के हल्के बाल थे. अभी अनु [अनुराधा] पूरी तरह से बालिग भी नही हुई थी और मैं उसको भोगने जा रहा था. उसने अपने लचीले पतले हाथों से मुझे जकड रखा था.

अनुराधा के बदन में बड़ी नवीनता थी. चिकना बदन था जिसको अभी तक किसी से नही चोदा था. मैं उसके दोनों दूध पीने में डूबा था. इसके साथ ही दूसरे खाली दूध को हाथ में लेकर होर्न की तरह दबा देता था. अनु चिहुक उठती थी. उसके रूप और खूबसूरती पर मैं आसक्त था. बाहर मेरे जन्मदिन पर मेरे दुसरे दोस्त और रिश्तेदार और उसके खून चूसूं बच्चे हनी सिंह के गानों पर डांस कर रहें थे. मैं इधर अपनी साधना मिस की लड़की के साथ महा चुदाई की महा पाठशाला लगा रहा था. लहकते, मचलते उसके जिस्म को लेकर मैं कहीं दूसरी दुनिया में खो गया था. अब नीचे की तरह बढ़ रहा था, उसका मखमली पेट, उसकी नाभि को मैंने चूम लिया. अनु खिलखिलाकर हंस पड़ी. नाभि से पेडू से होकर हल्की हल्की बारों की बड़ी महीन बारिक लाइन थी जो उसकी बुर तक जाती थी. चीटियों की तरह मैं एक एक बाल को चूमता चूमता मैं अनु के पेडू पर आ गया. फिर बुर पर आ पंहुचा जैसे अंग्रेज सोने की तलाश करते करते भारत आ पहुचे थे.

अनु की बुर पर हल्की हल्की झांटे थी. उसकी चूत की तरह उसकी झांटे भी अभी कुंवारी थी. मैंने अपना सिर उसकी झांटों के बादल में डाल दिया और कहीं खो गया. मैंने अपना मुह उसकी झांटों में छिपा लिया जैसे जब मासूम छोटा बच्चा अपनी माँ से रूठ जाता है तो घर में कहीं किसी कोने में छिप जाता है. हम दोनों प्रेमी प्रेमिका का चुदाई का बड़ा मन भी था, समय भी था , मौका भी था और दस्तूर भी था. अब तो चुदाई होनी लाजमी थी. हम दोनों एक दूसरे में पति पत्नी की तरह समा गए थे. अनुराधा को आज इस तरह पाकर मैं खुद को बिल गेट्स जितना अमीर समझ रहा था. मैंने झांटों को बीच से अपनी उँगलियों से हटाया तो चूत मिल गयी. मैं पीने लगा. हल्का नमकीन स्वाद मेरे मुह में आया. अनु के चेहरे की भाव भंगिमांए बदने लगी. मैं लपर लपर करके उसकी चूत पीने लगा.

अंततः मैंने अपना लंड उसके भोसड़े पर रख दिया और धक्का मारा. कई दफा लंड इधर उधर भाग गया. मैंने उसकी दोनों जाँघों को पकड़ा, लंड को रिसेट किया और अंडर पेला. उसकी कुंवारी पवित्र सील टूट गयी. मैं अनु को चोदने लगा. उसके सायद बिठाये वो निजी पल सायद बड़े खास थे मेरे लिए. कुछ देर बाद वो चूत का छेद खुल गया. मैं सहजता से अपनी जानेमन को लेने लगा. वो मुझसे लिपट गयी थी , जैसी मुझे अपना पति, अपना दिलबर मान चुकी थी. मैं उसे घपाघप पेल रहा था. कभी उसे दर्द होता कभी नही, पर नए नए चूदाई का सुख तो मेरी अनु उठा रही थी. उसकी नाजनीन पलकें कभी गिरती, कभी उठती, कभी उसकी भौहे फैलती, कभी सिकुड़ती. मैं भवरे की तरह, किसी मधुमख्खी की तरह अनु का सारा नूर , उसका सारा पाराग लूट रहा था. फिर कुछ पलों बाद मैंने अपना अमृत अनु की आत्मा में छोड़ दिया. हम दोनों प्रेमी प्रेमिका आज एक हो गए. हम दो जिस्म थे, पर आज एक जान हो गए. हम दो शरीर थे, पर आज चुदाई के बाद हम एक आत्मा हो गए. मैं भी इधर पूरा हो गया, अनु भी उधर आज चुदकर सम्पूर्ण नारी हो गयी. समय से पहले ही उसे चोदकर मैंने उसके यौवन की कलि को फूल बना दिया. फिर हम दोनों ने अपने अपने कपड़े पहन लिए और बाहर आ गए. अभी भी पार्टी चल रही थी. हनी सिंह का ‘ आंटी पुलिस बुला ले गी, फिर पार्टी यूँ ही चलेगी’ ये गाना अभी भी बज रहा था. मेरी और अनु की पार्टी को पूरी हो चुकी थी.

दोस्तों, जिस बात का डर था वही हुआ, साधना मिस के पति को कहीं सरकारी नौकरी मिल गयी और वो हमारा स्कूल छोड़ के चली गयी. मेरा प्यार मेरी मुहब्बत अनुराधा भी उसके साथ चली गयी. मैं बहुत रोया, कई दिन मैंने खाना नही खाया. पर मैं मजबूर था. आखिर में क्या करता. मेरी मुहब्बत अनु चली तो गयी पर उसका प्यार आज भी मेरे दिल में जिन्दा है और हमेशा जिन्दा रहेगा. अगर आपको मेरी मुहब्बत की दास्ताँ पसंद आई हो तो नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर अपनी कोमेट्स लिखना ना भूले. मनमोहक प्यार की कहानियाँ नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर पढते रहिये, शुभरात्रि.

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पार्टी का टिकट पाने के लिए मुझे नेताजी से अपनी बीवी को चुदवाना पड़ा http://sexkahani.net/%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%9f%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%9f-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%8f/ Tue, 21 Feb 2017 15:26:19 +0000 http://sexkahani.net/?p=10045 सभी दोस्तों को अभिमन्यू चौधरी का बहुत बहुत नमस्कार. मैं नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम का बहुत बड़ा प्रशंसक रहा हूँ. विगत कई वर्षों से मैं इसकी सेक्सी कहानियाँ पढ़ रहा हूँ. मैंने अपने सभी दोस्तों को इसके बारे में बताया है. अब मेरे दोस्त भी हर रोज नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर मस्त सेक्सी कहानियाँ पढते है. आज मैं आपको अपनी कहानी सुनाने जा रहा हूँ. मैं पीछे कई सालों से राजनीत में सक्रिय हूँ. सबसे पहले मैं कांग्रेसी था, पर जब मुझे वहां पैसा कमाने का कोई मौका नहीं मिला तो मैंने पार्टी छोड़ दी. मैं भाजपा में आ गया. पर वहां पर बड़े बड़े स्टार नेताओं की जादा सुनी जाती है. मुझे मेरे छेत्र रामपुर से विधायकी का टिकट नही मिला तो मैं आग बबूला हो गया.

मैंने तुरंत भाजपा पार्टी छोड़ दी और अपना दल नामक नई पार्टी में आ गया. ये पार्टी किसानों के हितों के लिए काम करती थी. पर मुझे इससे कोई लेना देना नही था. मुझे तो बस जल्द से जल्द करोड़पति बनना था. सच्चाई यही है की हर नेता समाजसेवा बाद में करता है, पहले तो अपना पेट भरता है. मैं भी राजनीति में सिर्फ और सिर्फ पैसा कमाने आया था. अपनी बीवी सपना के साथ मैं पार्टी के मुखिया के पास टिकट मांगने पंहुचा. मेरी पत्नी भी राजनीति में सक्रीय थी. हम दोनों मियां बीवी ने अपना दल ज्वाइन कर लिया था. मेरी बीबी बहुत ही खूबसूरत थी. बिलकुल हीरोइन थी. मैं उसको लेकर पार्टी के मुखिया मनमोहन मौर्या के पास टिकट मांगने पंहुचा. मौर्या जी ने ८ साल पहले पार्टी बनायीं थी.

तत्कालिक पार्टी किसानो के विकास के लिए कुछ नही कर रही थी. मौर्या जी से इसको ही अपना अजेंडा बनाया और पार्टी बना ली. अपना दल से यू पी की ५१२ सीटों में १०० सीटे जीत ली और वर्तमान में धीरे धीरे एक मजबूत पार्टी बन रही थी. मैंने इस बात को ताड़ लिया था की अपना दल का भविष्य बड़ा उज्जवल है. यू पी में कुछ महीनो में विधानसभा चुनाव होने वाले थे, इसलिए मैं रामपुर से अपना दल के प्रत्यासी के रूप में टिकट मांगने मंत्रीजी के पास गया था.

मनमोहन मौर्या अपना दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे. वो ही आला कमान थे. किसको टिकट दिया जाएगा किसको नही, वो ही तय करते थे. अपनी बीवी को लेकर मैं उनके बंगले पर पंहुचा.

नेताजी को नमस्कार !! मैंने मनमोहन जी के पैर छुए. मेरी बीवी भी नेताजी के पैर छूने झुकी. सपना ने आज बहुत ही सुंदर पीली रंग की बनारसी साडी पहन रखी थी. सपना बिलकुल मस्त माल लग रही थी. वो बिलकुल कुमोदिनी जैसी सुंदर लग रही थी. मौर्या जी जादा किसी को भाव नही देते थे. क्यूंकि सुबह से लेकर शाम तक लोग उनके पास आते रहते थे और उनके पैर छुआ करते थे. इसलिए वो जादा किसी को भाव नही देते थे. पर आज मेरी बीवी सपना को उन्होंने सिर से पाँव तक देखा. थोडा हाल चाल हुआ. और मैंने अपनी मंशा प्रकट की की मुझे विधान सभा का चुनाव लड़ने का मौका दे.

अभिमन्यु जी ! आप तो अभी ही कुछ महीनो पहले पार्टी में आये है. अभी काम करिये. गांव गांव शहर शहर में जाकर पार्टी से लोगों को जोड़ने का काम करिये. अभी आपको टिकट नहीं मिल सकता’ उन्होंने साफ साफ मना कर दिया. मुझे थोडा बुरा लगा. क्यूंकि मैं चूनाव लड़के का सपना देख लिया था. हम मियां बीवी मुह लटकाकर घर लौट आये. जितनी खुसी से हम दोनों मनमोहन जी से मिलने गए थे, उतना ही दुखी होकर हम लौट आये. मेरी बीवी सपना भी बड़ी उदास थी. कबसे वो स्विट्जरलैंड घुमना चाहती थी. अब वहां टहलने के लिए कुछ लाख तो होने की चाहिए. मेरी भी तमन्ना मर्सिडीज में चलने की थी. एक बड़ा सा बंगला भी मैं बनाना चाहता था. ये सब मजे तब ही हो पाते जब मैं चुनाव लड़ता और जीतता और करोड़ों डकार जाता. पर यहाँ तो सब उल्टा हो गया था.

एक के बाद एक दिन बीतने लगे. हम दोनों मिया बीवी थोड़े उदास रहने लगे. अगले दिन रात में मनमोहन मौर्या जी का फोन आ गया. मुझे तो उम्मीद नही थी. मैंने उनको चरण स्पर्श किया. उन्होंने कुछ देर बाद की. फिर अपने मुद्दे पर आ गए.

अभिमन्यु जो मैं आपको टिकट दे दूँगा पर एक चीज चाहिए आपकी. असल में मुझे आपकी बीवी सपना चौधरी कुछ जादा ही जम गयी है. जबसे उसको देखा है और कुछ सोच ही नही पा रहा हूँ’

‘अब इस दिल का क्या करूँ अभिमन्यू जी?? क्या अपनी बीवी को आप मुझे एक रात के लिए चोदने के लिए दे देंगे?? वो बोले. मेरे तो मुह से गाली निकलने वाली थी. कैसा अध्यक्ष है ?? मैंने सोचा. सीधे सीधे मेरी बीवी को चोदने खाने के लिए मांग रहा है. मैंने सोचा. मुझे बहुत गुस्सा आ गया. सोचा की अभी ही पार्टी से इस्तीफा दे दूँ और सपना को भी इस्तीफा दिला दूँ.

‘अभिमन्यु जी मुझे कोई जल्दी नही है. आप आराम से सोच ले. पर ये तो पक्का है की अगर आपने मेरी फरमाइश पूरी कर दी तो इसी चुनाव में मैं आपको टिकट दे दूँगा. आप चुनाव लड़िए मजे से’ मुखिया जी बोले और फोन काट दिया. ये सब सुंनकर तो मेरा सिर भनभना गया. दोस्तों, उस रात ना तो मैं सो सका और ना  ही मेरी बीवी सपना सो सकी. कई दिन बीत गए. मेरी बीवी सपना बड़ी चालू आइटम है, ये मुझको बाद में पता चला. वो पैसा कमाने के लिए किसी की स्तर पर जाने को तैयार थी.

सुनिए जी! मैं अगर एक रात मनमोहन जी के साथ बिता दूँ तो कौन सी मेरी चूत घिस जाएगी. वैसे भी आप तो मुझे हर रात चोदते ही है. आप उनको फोन करके हाँ बोल दीजिए सपना ने कहा. मेरा तो दिमाग घूम गया.

सपना! ये कैसी बात कर रही हो तुम?? मैंने पूछा

सुनिए, मैं कुछ नही जानती हूँ. आप मनमोहन जी को फोन करके मेरी हाँ कर दिजिए और चुनाव लड़िए  मेरी बीवी सपना ने कहा.

मुझे उसकी बात का दुःख भी हुआ. कुछ दिनों बाद मुझे उसकी एक एल्बम उसकी साड़ियों वाली अलामारी में मिली. मुझे उसके ५० ६० लव लेटर्स और दूसरे लड़कों के साथ हाथ में हाथ डाले कई फोटो मिले. मुझे पता चला की मेरी बीवी एक नंबर इश्कबाज थी. वो एक नंबर चुदक्कड भी थी. जब मेरी शादी उससे हुई थी तो उसने घर वालों से मुझे उसकी सच्चाई के बारे में कुछ नही बताया. वरना मैं कभी जिंदगी में ऐसी चुदक्कड लड़की से शादी ना करता. मैं उसके सारे लव लेटर्स अपने ऑफिस ले गया. वहां एकांत में अकेले में बैठकर मैंने सब प्रेम पत्र लिखे. मेरी आँख में आशुं आ गए. जब मेरी बीवी शादी से पहले कई मर्दों से चुद ही चुकी है तो मनमोहन जी से उसे चुदवाने में क्या हर्ज है. मैंने अपने आशू पोछ लिए. अब तो मैं अपनी बीवी को चुदवाकर अपना टिकट जरुर पकका करूँगा! मैंने सोचा. मैंने अपनी बीवी के सब प्रेम पत्र वहीँ रख दिए जहाँ से मैंने उठाये थे. उससे बिलकुल भी खबर नही हो पायी की मुझे उस्सी सच्चाई और उनके नाजायज रिश्ते के बारे में पता चल गया है. मैं खुसी खुसी शाम को ऑफिस से लौट आया.

सपना! तुम सही कहती हो. मैं अभी मनमोहन जी को फोन करता हूँ मैंने कहा. मैंने मनमोहन जी को फोन कर दिया.

मनमोहन जी! मैं अपनी बीवी आपको एक रात को देने को तैयार हूँ. पर दो शर्तें है. पहला आप वादा खिलाफी नहीं करेंगे. मुझे आप टिकट जरुर देंगे. दूसरी बात की मैं वहीँ आपके घर में छिपा रहूँगा और अपनी बीवी को आपसे चुदते हुए देखूंगा मैंने कहा.

जियो राजा!! अभिमन्यू बेटा, तुम तो मुझसे भी धुरंधर नेता निकल गए. तुम एक दिन एक बड़े नेता जरुर बनोगे. मुझे अपनी मारी माँ की कसम. मैं अगर तुम्हारी बीवी का रात भार भोग लगाऊंगा तो टिकट तुम्हारा पक्का है. आज रात ही आ जाओ बेटा! अपना दल के अध्यक्ष मनमोहन मौर्या जी बोले. कहाँ कुछ दिन पहले तक वो मेरे पैर छूने का जवाब तक नहीं देते थे और कहाँ उनकी फरमाइस पुरी करने के बाद उन्होंने मुझे अपना बेटा बना लिया.

शाम के ७ बजे तो मेरी चुदक्कड इश्कबाज बीवी बाथरूम में नहाने चली गयी. कुछ देर बाद वो परी की तरह बाहर निकली. सपना ने आज अपनी पार्टी वेअर जोर्जेट साड़ी पहनी. वो गजब की माल लग रही थी. मन हुआ की कह दूँ की तेरे खूबसूरत चेहरे के पीछे कितनी बड़ी छिनाल औरत छिपी है मैं जान गया हूँ. पर इससे तो मेरा सब प्लान बिगड जाता. रात ९ बजे मैं सपना को अपनी कार में लेकर नेताजी के बंगले पर पहुच गया. मैंने एक बार फिर से उनके पैर छुए.

अरे जीते रहो बेटा  मनमोहन जी बोले.

सपना उनको देखकर मुस्कुरा दी. वो भी पैर छूने झुकी और मनमोहन जी के पैर छू लिए. नेताजी ने मुझको एक कमरे की तरह आँख मारी. मैंने उधर चला गया. नेता जी [मनमोहन  जी] मेरी बीवी को अपने आलिशान बेडरूम में ले गए. मैं ठीक उसी कमरे के बगल वाले कमरे में था. नेताजी ने अपने बेडरूम में कमरे लगा रखे थे. जिस कमरे में मैं छिप गया था वहां टीवी में कैमरे में हो रही हलचल देख सकते थे. मेरी चुदक्कड बीवी कितनी बड़ी अल्टर है ये बात मुझको आज पता चली. मनमोहन जी साथ अंडर जाते ही वो शुरू हो गयी. मेरी चालू बीवी ने अपना पल्लू अपने सीने से हटा दिया. उसने गहरे गले का ब्लौस पहना था. मौर्या जी मेरी मस्त माल बीवी को देख मचल गए. सपना को उन्होंने अपने आलिशान बेड पर लिटा लिया, उसका ब्लौस खोल दिया और उसकी मस्त कसी ब्रा उतारकर मेरे चुदक्कड बीवी के मम्मे पीने लगे.

सपना के चेहरे पर एक बार भी शर्म, संकोच जैसे भाव नहीं आये. मनमोहन मौर्या जी को ऐसे दूध पिलाने लगी जैसे उनको ज़माने से जानती हो. मनमोहन जी नेताजी भी थे और अपना दल के मुखिया भी थे. इसलिए पाठकconfuse ना हो अगर मैं उनको नेताजी या मनमोहन जी कहकर सम्बोधित करूँ. नेताजी आँख बंद करके मेरी बीवी के मामे पीने लगे. मेरे दोस्त हमेशा से कहते थे की सुंदर लड़कियाँ जादातर अल्टर होती है, पर आज अपनी सुंदर और चुदक्कड बीवी को देखकर मैं ये साक्षात् देख लिया. सपना ने खुद अपनी साड़ी निकाल दी. अपना पेटीकोट का नारा उसने खींच दिया. वो सम्पूर्ण रूप से नंगी हो गयी. मैं नेताजी के उस कमरे के बगल वाले कमरे में बैठा टीवी पर अपनी बीवी की रंगरेलियां देख रहा था. एक बार फिर से मेरी आँखों में आसु आ गए थे. मेरे तो ये समझ में नहीं आ रहा था की ऐसी छिनाल के झासे में मैं कैसे फस गया.

मेरी चुदकक्ड बीवी नेताज़ी के बेड पर अठखेलिया लेने लगी. वो इधर से उधर कुलाचे भरने लगी. अपने हाथ के इसारे से नेताजी को पास आने के लिए बुलाने लगी. नेताजी अपने कमरे उतरने लगे. फिर वो नंगे गो गए. और मेरी जवान चुदक्कड बीवी के पास चले गए. सपना को उन्होंने दबोच लिया और उसके मस्त तिकोने छातियों का स्तनपान करने लगे. अपनी बीवी का असली चेहरा देखकर जी हुआ की रिवोल्वर लेकर जाऊं और उसके सीने में सारी गोलियाँ उतार दूँ. पर मैंने खुद को कण्ट्रोल किया. वैसे मेरी बीवी थी की भोगने लायक सामान. उसका फिगर कमाल का था. गोरा भरा हुआ बदन नीचे से उपर तक. नेताजी मेरी बीवी के दोनों बूब्स पीने लगे. फिर उसके दोनों टांगों को फैलाकर उसको चोदने लगे.

सपना को जरा भी शर्म नही आई. हंस हंसकर मनमोहन मौर्या जी से चुदने लगी. उनका लंड काफी मोटा था, वो जैसे जैसे मेरी बीवी की चूत फाड़ने लगे, वैसे वैसे उसकी बुर और चौड़ी होने लगी, और गहरी हो गयी. दोस्तों, मैं तो शर्म से गडा जा रहा था. मनमोहन मौर्या जी ५० ५५ साल के थे, इस तरह एक बुड्ढा मेरी जवान बीवी का भोग लगा रहा था. कुछ देर तक ताबड़तोड़ धक्के देने के बाद वो मेरी बीवी की चूत में स्खलित हो गए. अब वो अपने मुलायम गुल गुल बेड पर कई मोटी तकिया सिर पर लगाकर लेट गए.

सपना बेटी !! आओ मेरा लंड चूस्सव्वल करो! वो बोले.

सपना उनके पास चली गयी. नेताजी का लंड चूसने लगी. मेरी बीवी के काली घटाओ से काले लम्बे बाल खुल गए और नीचे झूलने लगे. खुले बालों में कामुकता और चोदन की देवी लग रही थी. नेताजी के लंड पर झुककर हाथ से उनके लंड को फेट फेटकर किसी प्रोफेसनल रंडी की तरह उनका लंड चूस रही थी. नेताजी ने अपना हाथ सपना के सिर पर रख दिया था जैसे उसे चुनाव जितने के आशीर्वाद दे रहें हो. मुझे ये देखकर बड़ा आश्चर्य हो रहा था की मेरी बीवी सपना उनका मोटा १० इंची लंड पूरा का पूरा अपने मुह में अंदर तक ले रही थी. जितना मैं समझ रहा था वो उससे बड़ी छिनाल निकल गयी थी. अपना दल के अध्यक्ष मनोमहन जी उसकी सेवा से बहुत खुश थे. उनको तो स्वर्ग मिल रहा था.

घूम जाओ बेटी ! वे बोले.

उन्होंने मेरी बीवी को कुतिया बना दिया. सपना किसी मूर्ति की तरह उलटी होकर बेड पर बैठ गयी. उसने अपना पिछवाडा उपर उठा लिया. अपने दोनों कंधे बेड पर टिका दिया. उसकी गांड पीछे से उभर कर उपर आ गयी. मनमोहन जी से अपनी जीभ उसके गांड के छेद पर फेर दिया और मेरी बीवी की गांड चाटने लगे. सपना सिसकने लगी. कुछ देर बाद वो मेरी बीवी की गांड चोदने लगे. मैं बगल वाले कमरे में सारी रंगरलियाँ देख रहा था. २ घंटे तक उन्होंने मेरी बीवी की गांड चोदी, फिर लंड निकाल के उसके चिकने गोल मटोल चूतडों पर अपनी पिचकारी छोड़ दी.  उन्होंने २ हफ्ते बाद मुझे विधायाकी का टिकट दे दिया. मैं चुनाव लड़ा और जीत भी गया. मुझे विकास कार्यों के लिए २०० करोड़ मिले, जिसने से मैं १५० करोड़ खुद दबा लिए. फिर मैं अपनी बीवी की स्विट्जरलैंड घुमाने ले गया. अगर मेरी बीवी उस दिन मनमोहन जी से ना चुदती तो आज मैं इतना सफल नही होता. आज भी नेताजी का फोन कभी कभी आ जाता है, तो मैं बिना संकोच अपनी चुदक्कड बीवी को उनसे चुदने उनके बंग्ले पर भेज देता हूँ. ये कहानी आप नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहें थे.

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अब मैं नौकर को बेडरूम में बुलाकर हर रात अपनी चूत की सर्विसिंग करवाती हूँ http://sexkahani.net/%e0%a4%85%e0%a4%ac-%e0%a4%ae%e0%a5%88%e0%a4%82-%e0%a4%a8%e0%a5%8c%e0%a4%95%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%ac%e0%a5%87%e0%a4%a1%e0%a4%b0%e0%a5%82%e0%a4%ae-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ac/ http://sexkahani.net/%e0%a4%85%e0%a4%ac-%e0%a4%ae%e0%a5%88%e0%a4%82-%e0%a4%a8%e0%a5%8c%e0%a4%95%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%ac%e0%a5%87%e0%a4%a1%e0%a4%b0%e0%a5%82%e0%a4%ae-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ac/#comments Tue, 21 Feb 2017 11:04:04 +0000 http://sexkahani.net/?p=10042 गुड इवनिंग फ्रेंड्स. मैं रचना अग्रवाल आप सभी का नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर बहुत बहुत स्वागत करती हूँ. मैं इसकी मस्त सेक्सी कहानियों की बहुत बड़ी फैन हूँ. आज मैं आपको अपनी सेक्सी कहानी सुना रही हूँ. मैं कई दिनों से सोच रही थी की मैं भी आपको अपनी नाजायज रिश्ते की चुदाई की कहानी जरुर सुनाऊंगी. तो मैं आज आपको अपनी कहानी सुनाती हूँ.

मेरे हसबैंड वीरेद्र अग्रवाल एयरटेल कंपनी में सॉफ्टवेर इंजिनियर थे. हम दोनों मियां बीबी और बच्चे मजे से दिल्ली में रह रहें थे. यहाँ उनको काम करते ५ साल हो गए थे. फिर उनके ट्रांसफर का आर्डर आ गया. मेरे पति को बैंगलोर भेज दिया गया. इस ट्रांसफर से मैं बहुत नाखुश थी. क्यूंकि यहाँ दिल्ली में रहते हुए मुझे ५ साल हो गए थे. बच्चों के नाम भी अच्छे स्कूलों में लिखवा दिए थे. उनकी पढाई भी अच्छी चल रही थी. और यहाँ सोसाइटी में मेरे कई अच्छी सहेलियां भी बन गयी थी. मेरी पूरी जिंदगी सेट हो गयी थी. मैं दिल्ली में बहुत खुश थी. फिर ना जाने कहाँ से ये मुआं ट्रांसफर का जिन्न आ गया. मेरे पति ने अपने बोस से ना नुकुर की तो वो गुसा गए और कहने लगे की आपको २ लाख महीना की सैलरी मिलती है. आपको तो कंपनी के मुताबिक चलना होगा.

मेरे पति बेमन से बैंगलोर चले गए. घर के काम के लिए उन्होंने रामनाथ नामक एक जवान नौकर रख दिया. पति के जाने के बाद मुझे बहुत बुरा लगा. बस दोस्तों, पूछिए मत इस बारे में. कई हफ्ते मैं रोटी रही. क्यूंकि एक तो मेरे पति मुझे बहुत प्यार करते थे. उपर से मुझे हर रात खुब मजे देते थे. वो मुझे हर रात तरह तरह से चोदते थे. वो किसी कामदेव से कम ना थे. मैं बहुत रोई. पर पतिदेव को पैसा तो कमाना ही था. सिर्फ प्यार से तो इस दुनिया में कुछ नही होता है, पैसे भी चाहिए अच्छी जिंदगी के लिए. किसी तरह मैंने अपने दिल को बहलाना शुरू किया. मैं अपने मोहल्ले की सहलियों के पास हर दिन किटी पार्टी में जाने लगा. वहां मेरा वक्त आराम से कट जाता था. मेरा नौकर रामनाथ बहुत मददगार निकला. मैं जो भी उसे काम देती ‘जी बीबीजी!! जी बीबीजी !!’ कहता और सारा काम कर देता.

रामनाथ यादव कास्ट का था. यही नॉएडा के एक गांव का रहने वाला था. पर था बहुत मस्त बंदा. उम्र कोई १८ २० की होगी. सुबह जल्दी ६ बजे वो घर आ जाता. बच्चो के लिए नास्ता बनाता. उनको स्कूल छोड़ने जाता. फिर लौटकर मेरे घर का सारा काम करता. सुबह से शाम तक वो शायद ही आराम करता हो. धीरे धीरे मेरी रामनाथ से खूब पटरी खाने लगी.

अपने खाली वक्त में मैं उससे खूब बात करती.

अरे रामनाथ! तू अच्छा ख़ासा जवान है. शादी क्यूँ नही कर लेता??’ एक दिन ऐसे ही मैंने हसी हसीं में उससे पूछ लिया.

अरे बीबीजी ! हमारे सिर पर ५ लाख का कर्जा है. हमारे बापू की दवा में सारा पैसा लग गया. उधर लेकर उनकी दवा कराई. फिर भी बापू नही बचे’ रामनाथ कहने लगा तो उसकी आँखें भीग गयी.

‘मैं समझ सकती हूँ’ मैंने कहा और उसके जवान कंधे पर मैंने सहानुभूति में हाथ रख दिया.

‘रामनाथ, तो क्या तेरी कोई यार भी नही है ???’ मैंने उसका मिजाज हल्का करते हुए पूछा. वो हसने लगा.

नही बीबीजी! हमका लडकियन से बहुत शरम आवत है’ वो जरा गांव की भासा में बोला. मैं हसने लगी.

मेरे पति के जाने के बाद मैं ये कह सकती हूँ की मेरा नौकर मेरा बड़ा हमदर्द, मेरा हमराज बन गया था. मेरे बच्चों को वो तरह तरह से हँसाता था. मेरे बच्चे उसके हाथ से ही खाना खाते थे. उसके साथ ही खेलते थे. मेरी हसबंड वीरेन्द्र मुझे हर रात बैंगलोर से फोन करते थे. मैं उनको बताती थी की किस तरह उनके जाने के बाद नौकर रामनाथ ने बच्चों को बड़ी अच्छी तरह से सम्भाल रखा है. वीरेन्द्र भी बहुत खुश थे. दोस्तों, अपनी माँ की कसम खाके कहती हूँ की सारी चीजे बड़ी तेजी से बदल गयी.

जहाँ मैं हर रात अपने पति से खूब प्यार करती थी, तरह तरह से प्रेम लीलाएं करती थी, अब सब कुछ उल्टा हो गया. अब जब मैं बेडरूम में जाती तो अपने भोले भाले बेहद सज्जन नौकर रामनाथ को लेकर तरह तरह की मीठी कल्पनाएँ करने लगी. मैं अब नंगी हो जाती और डिल्डो लेकर अपनी चूत में डाल लेती और रामनाथ को ही याद करती और तरह तरह से उसको सोचते हुए मैं डिल्डो से खुद को चोदती. दोस्तों, मुझे बहुत मजा आता. अब तो मैं हर रात यही करती. नौकर रामनाथ को लेकर तरह तरह की कल्पना करती की वो मुझको ऐसे पेल रहा है, ऐसे चोद रहा है, मैं मुझे ठोक रहा है. जब जब मैं रामनाथ के बारे में सोचती और अपनी चूत में ऊँगली देती, मुझे परम सुख प्राप्त होता. समज लीजिए की मुझे जन्नत मिल जाती.

धीरे धीरे मेरी ज्वलंत अन्तर्वासना अंगारे की तरह भडकने लगी. जी तो यही करता की कास रामनाथ मुझे एक बार चोदे. उसका १८ साल के जवान लंड का स्वाद कैसा होगा, ये सोच सोच के मैं मरी जाने लगी. कई बार अपनी चूत में ऊँगली करते करते मेरा बदन जलने लगता और मैं बाथरूम में ठन्डे पानी से नहाने चली जाती. तब जाकर मेरी चुदास शांत होती. मेरे हसबैंड बैंगलोर से पैसे भेजते रहते. इसलिए मुझे किसी तरह की कोई दिक्कत नही थी. बस यही दिक्कत थी की कास कोई लंड मेरी चूत की सर्विसिंग कर देता.

जैसे जैसे दिन बीतने लगे मैं नौकर रामनाथ को लेकर जुनूनी हो गयी. अब मैं जल्द से जल्द उससे शारीरिक सम्बन्ध बनाना चाहती थी. उसके जवान शरीर को मैं भोगना चाहती थी. साफ़ सरल शब्दों में कहूँ तो मैं उससे पूरी रात चुदवाना चाहती थी. उसके जवां लंड से मैं अपनी कामवासना बुझाना चाहती थी. मैं ठान लिया की अब मुझे उसका लंड बस किसी भी सूरत में चाहिए. अगली रात को मेरे सारे परिवार से खाना खाया. रामनाथ बच्चों को उनके कमरे में ले गया और उनको लोरी देकर सुला दिया. अब वो अपने घर जाने लगा तो मैंने उसको आवाज लगायी.

जी बीबीजी !! हुकुम! वो बोला.

रामनाथ, मेरे पैर में बड़ा दर्द हो रहा है. प्लीस जरा दबा दो’ मैंने कहा

जी बीबीजी ! वो बोला. मेरे बेडरूम में आ गया. मैंने एक मस्त नाइटी पहन ली. रामनाथ मेरे पैर दबाने लगा. मुझे बड़ा मजा आने लगा. पर मुझे उससे पैर नही दबवाने थे. मुझे तो उसका जवां लंड खाना था.

रामनाथ जरा उपर !! मैंने कहा

वो अब मेरी जाँघों पर दबाने लगा. मैंने जान बूझकर अपनी नाइटी उपर कर ली. रामनाथ मेरे तरासे हुए बदन को देखकर मंत्रमुग्ध तो था. पर उससे ऐसी वैसी कोई हरकत नही की. मैं चाहती थी वो मुझे पकड़ ले और बस चोद ले. पर वो निरा भोंदा बाबा था. मैं अचानक से उसको पकड़ लिया.

रमानाथ, आज मेरी प्यास बुझा दो! मैं कबसे तुम्हारे प्यार की प्यासी हूँ ! मैने कहा. वो बिलकुल हडबडा गया. वो डर गया. उनके सिर पर पसीना छूट गया.

नही नही बीबीजी ! ये आप क्या कह रही है! आप तो मेरी मालकिन है. मैं आपके साथ ये सब कैसे कर सकता हूँ ! वो बोला.

रामनाथ !! तुम मुझे मना नही कर सकते. मुझे आज रात तुम चाहिए किसी भी सूरत में’ मैं किसी चुदासी छिनाल की तरह गुस्से में चिल्लाई. मैं बहुत गुस्सा हो गयी थी.

नही नही बीबीजी !! हम ये नही कर सकते! रामनाथ बोला और वहाँ से बाहर चला गया. मैं उसको बुलाने पीछे पीछे गयी, पर वो सायद कुछ जादा ही घबरा गया था. वो अपने घर चला गया था. मैं उसके जाने पर बहुत बहुत गुस्सा हुई. मैं उसकी मालकिन थी. वो मेरी बात मारे कैसे चला गया. मैं उससे बदला लेना चाहती थी. अगले दिन जब वो आया तो मैंने उसका हिसाब कर दिया. वो नही जानता है मैं ऐसा करुँगी.

नही बीबीजी ! मुझे काम से मत निकालो! मुझे पैसो की बहुत जरुरत है! वो हाथजोड़ के मिन्नतें करना लगा. मैं जान गयी की ऊंट अब पहाड के नीचे आ गया है.

मैं तुमको काम पर दुबारा रख लुंगी, पर जो काम तुम कल रात अधूरा छोड़ कर गए थे, वो तुमको पूरा करना होगा. मैं जब जब तुमको कमरे में बुलाऊंगी, तुमको आना होगा!  मैंने साफ साफ रामनाथ से कह दिया. वो फिरसे सोच में पड़ गया. पर उसको पैसो की बड़ी जरुरत थी. मैंने ताड़ लिया था. जब रात हो गयी तो मैंने धीरे से रामनाथ को इशारा किया और कहा की बच्चो को उनके कमरे में जाकर सुलादे और फिर मेरे कमरे में आये.

रात १० बजे रामनाथ मेरे कमरे में आ गया. मैं लाल पारदर्शी नाईटी पहन रखी थी. रामनाथ मेरे बेड पर आ गया. मैंने अपने हाथों से उसकी शर्ट की एक एक बटन खोल दी. वो उपर से नंगा हो गया. वो सिर्फ १८ साल का था. बिलकुल मस्त जवान बांका छोरा था वो.

मेरे मम्मे चूसो !! मैंने आदेश दिया

जी बीबीजी!! वो बोला और मेरे मम्मे पीने लगा. मुझे बहुत अच्छा लगा. पति को बैंगलोर गए ३ महीने से भी जादा समय हो गया था. पुरे ३ महीने से मैंने कोई लंड नही खाया था. पुरे ३ महीने से किसी मर्द ने मुझको नहीं चोदा था. पर आज मैं अपनी सारी हवस पूरी कर लुंगी. मैं सोच लिया था.

रामनाथ मेरे मम्मे पीने लगा. वो मेरे उपर ही लेट सा गया था. मैं अपना हाथ उसके पेट के नीचे से ले जाते हुए अपनी चूत तक ले गयी. अपनी चूत सहलाने लगी और उसमे ऊँगली करने लगी. रामनाथ एक अच्छे मर्द की तरह मेरे मम्मे पी रहा था. ‘रामनाथ! घबराओ मत, मुझे अपनी बीवी समझ के मेरे दूध पियो और मुझे आज इतना कसके चोदो की मेरी चीख निकल जाए’ मैंने कहा. रामनाथ पहले तो बड़ा चुप चुप था, संकोच व शर्म कर रहा था. अब वो सहज हो गया. मस्ती से मेरे दूध पीने लगा. मुझे जन्नत का मजा मिलने लगा. मैंने अपनी नाईटी उतार दी और अपने नौकर के सामने बिलकुल नंगी हो गयी. मेरी मोहल्ले की हर औरत अपने पति के ना होने पर अपने नौकर से चुदवाती थी. तो मैंने कौन सा गलत किया. रामनाथ एक आज्ञाकारी चेले की तरह मेरे दोनों दूध अपने दांत से मसल रहा था और पी रहा था. मैं अपनी चूत सहला रही थी और उसने ऊँगली कर रही थी. धीरे धीरे मेरी चूत चुदने को बिलकुल तैयार हो गयी थी. मेरा नौकर रामनाथ अब मुझे अपनी बीबी समझ के मेरे मस्त गोल मटोल दूध पी रहा था.

बीबीजी ! अब आपको पेलूँ क्या ?? उसने भोलेपन से पूछा.

बीबीजी नही बुध्दू ! आज रात के लिए मैं सिर्फ तुम्हरी बीबी हूँ! मैंने उसे आँख मारी.

रामनाथ मेरी चूत पर आ गया और मेरी चूत पीने लगा. आह, ओह्ह , म्म्म मेरे मुह से यही सब निकलने लगा. क्यूंकि पुरे ३ महीने से किसी ने मेरी चूत नही पी थी. औरतों को चूत पिलाने में भी खास मजा मिलता है. रामनाथ मेरे दोनों मोटी मोटी जांधों के बीच छिप गया था. वो मस्ती से मेरी बुर पी रहा था. मैं सुख के सातवे आसमान पर थी. वो एक हाथ से मेरी चूत में बड़ी जल्दी जल्दी ऊँगली भी कर रहा था. वो किसी मशीन की तरह मेरी चूत में ऊँगली कर रहा था. सच में दोस्तों, मुझे बहुत मजा मिल रहा था. मेरे पति भी मेरी चूत में ऐसे ही ऊँगली करते थे. अब रामनाथ ने अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया. मेरे पति वीरेंद्र ने मुझको बहुत चोदा था, इसलिए मेरी चूत बहुत फटी हुई थी. रामनाथ का लंड बड़ी आराम से मेरी बुर में चला गया. वो मुझको लेने लगा.

शाबाश रामनाथ !! शाबास! मैं अगले महीने से तुम्हारी पगार १००० बढा दूंगी! मैंने कहा. मेरा वफादार नौकर मुझको चोदने लगा. मेरे मम्मो को वो अपने जवान हाथों से मसल रहा था. मुझे बहुत सुख मिल रहा था.

और तेज रामनाथ !! मुझे और तेज चोदो !! मेरी चीखे निकाल दो ! मैंने कहा

रे रंडी!! तू भी क्या याद करेगी !! वो बोला और जोर जोर से मुझे पेलने लगा. उसके जबरदस्त धक्को से पूरा बेड चरमराने लगा. कुछ देर बाद उसने शताब्दी ट्रेन जैसी रफ्तार पकड़ ली. मुझको घचाघच पेलने लगा. अब मेरी चीखें निकलने लगी.

मैंने अपनी आँखें बंद कर ली.  वो मुझे बहुत अच्छे से चोद रहा था.

ले रंडी !! आज तेरा पति नही है तो नौकर का लंड खा ले जी भरके !! रामनाथ बड़ी उत्तेजना में आ गया. मुझे बड़ी खुसी हुई. मैं इसी तरह गाली खा खाके चुदवाना चाहती थी.

चोद मुझे कसके! तुझे तेरे मरे बाप की कसम !! मैंने कहा

रामनाथ थोडा गुस्से में आ गया. वो मुझे रंडियों के जैसे चोदने लगा. चुदास की उत्तेजना में उसने मुझे ५ ६ तमाचे भी जड़ दिए. मुझे मार मार कर चोदने लगा. फिर उसकी तेज बहुत तेज हो गयी. कुछ सेकंड में उसने मुझे कई सौ बार चोद दिया. अब वो माल छोड़ने वाला था. उसने जल्दी से अपना लंड मेरी चूत से निकाला और सीधा मेरे मुह की तरह ले आया. मैंने अपना मूल खोल दिया. रामनाथ जल्दी जल्दी हाथ से अपना लंड फेटने लगा. माँ अपना मुह खोले रही उसका माल पीने के लिए. कुछ देर बाद फुच फुच्च की पिचकरी उसके लंड से निकली और सीधा मेरे मुह में चली गयी. मैंने उसका सारा माल पी लिया. उसके बाद दोस्तों मैंने उससे कह कह कर अपनी गांड भी मरवाई.

दोस्तों, अपनी कमेंट्स और सुझाव लिखना ना भूले. ये कहानी आप सिर्फ और सिर्फ नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहें थे.

 
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मौसी की लड़की के मैंने सारे छेद चोद डाले http://sexkahani.net/%e0%a4%ae%e0%a5%8c%e0%a4%b8%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b2%e0%a5%9c%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a5%88%e0%a4%82%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%87/ Tue, 21 Feb 2017 11:01:24 +0000 http://sexkahani.net/?p=10040 हेलो दोस्तों, दीपू आपका नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर स्वागत करता हूँ. मैं आपको अपनी सच्ची कहानी सुना रहा हूँ. मैं मानपूरी का रहने वाला हूँ. मेरी मौसी सीमा मौसी दिल्ली में रहती है. पिछले छुट्टियों में मैं उनके यहाँ रहने गया था तो मेरी मुलाकात उनकी लड़की रंजना से हुई. पहली ही नजर में मुझे उससे प्यार हो गया. मुझे बहुत साफ साफ याद है की जब मैं उसको पहली बार देखा था, मैं १५ मिनट तक उसे एक तक देखता रह गया था. मुझे रंजना सायद दुनिया की सबसे हुस्न परी, सबसे हसीन और सुन्दर लड़की थी. मैं तो उसको घूर के देखता ही रह गया था. उसके रूप रंग और खूबसरती ने मेरे उपर तुरंत जादू कर दिया था.

मन तो तुरंत ख्याल आया की जो भी इसको लेगा, सीधा स्वर्ग जाएगा. मेरी धीरे धीरे रंजना से दोस्ती हो गयी. वो मेरी सीमा मौसी की लड़की थी, रिश्तें में मेरी बहन लगती थी, रंजना मुझे भैया भैया कहके बुलाने लगी. मुझे बड़ा खराब लग रहा था. पर मैं कुछ कर भी नही सकता था, क्यूंकि मैं उसका भैया ही था. मैं उसके साथ पूरा समय बिताने लगा. साथ ही उसके मैं टीवी देखने लगा. वो मुझे भैया की जगह सैंया की नजर से देखे इसलिए मैं जान भुझकर सेक्सी फिल्मे लगा देता. जिससे कुछ बात बन जाए. ऐसा मैं हर दिन करने लगा. फिर एक दिन आशिक बनाया आपने का सेक्सी वाला गाना आ गया. मैंने वही लगा दिया. वो सच में बहुत सेक्सी गाना था. उस सीन के दौरान मैं रंजना के हाथ पर हाथ रख दिया.

उसको सायद बुरा लग गया. उसने हाथ पीछे खिंच लिया. पर वो मेरे बगल बैठी रही. मैं जान गया की रंजना को अगर बहुत बुरा लगता तो वो उठ कर चली जाती. सायद् मेरा काम बन सकता है. अगले दिन मैंने रंजना की कॉपी से एक पन्ना फाड़ा.

रंजना! मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ. तुम मेरे लिए दुनिया की सबसे हसीन और खूबसूरत लड़की को. क्या तुम मुझसे प्यार करोगी. तुम्हारा फैसला चाहे जैसा हो, पर मैं तुमको बतादूं की तुम्हारी तस्वीर मेरे दिल में हमेशा कैद रहेगी. मैं तुमको हमेशा प्यार करता रहूँगा. रंजना! आई लव यू’

दोस्तों, मैं ये लव लेटर लिखकर रंजना के उसी रेजिस्टर में रख दिया और वहां से नौ दो ग्यारह हो गया. मेरा तीर बिल्कुल सही निशाने पर लगा. शाम को जब वो पढ़ने बैठी तो उसको मेरा लव लेटर मिल गया. अगली दिन उसने मुझे जवाब लिख कर दे दिया ‘मैं भी तुमसे प्यार करती हूँ. आई लव यू’ उसने जवाब दिया. मेरी प्यार की कहानी पटरी पर आ गया. मेरा टांका मेरी बहन से भीड़ गया. पर इकदम से मैंने उसको पकड़ वकड़ नही लिया. हमारी मुहब्बत की शुरुवात बड़ी धीरे धीरे हुई. शुरुवात तो देखने से हुई. अब मैं मौसी के घर में कहीं भी होता, रंजना और मैं आँखों से ही बात करते. सभी परिवार वाले वहां होते, मौसाजी, मौसी, रंजना के भाई बहन सब वहां होते पर हम दोनों प्यार के पंछी आँखों में बात कर ही लेती. वो मुझे देख के हल्का सा मुस्का देती, मैं भी जवाब में मुस्का देता. बस हमारी बात हो जाती.

जब सीमा मौसी रंजना को सब्जी वगेरह काटने का काम देती तो मैं भी उसके बगल बैठ जाता. वो मुस्काती रहती और सब्जी काटती रहती. फिर धीरे धीरे हाथ छूना हम दोनों से शुरू कर दिया. कभी कोई बहाने से मैं उसका हाथ छू लेता, कभी कोई बहाने से वो मेरा हाथ छू लेती. मुझे जब खाना परोसने आती तो जरूर छुआ छाती हो जाता. मैं रंजना के रूप रंग पर लट्टू था. मोरनी जैसी लड़की थी. कम लडकियाँ उस जैसी सुन्दर होती है. बड़ा साधा हुआ चेहरा, पान के आकार का तिकोना चेहरा, ना गोल और ना ही लम्बा. उसकी आंखे तो बाप रे बाप बड़ी नशीली. देखो तो देखने ही रह जाओ. नाक बड़ी तराशी हुई, नोकदार और तीखी. होंठ ना बहुत मोटे और ना बहुत पतले. बिल्कुल सही आकार के. पतली गर्दन. मुझपर तो उसके रूप का पूरा जादू चल रहा था. बाकी लड़कों को वो कैसी लगती होगी मैं नही जानता पर मुझे तो वो मोरनी जैसी लगती थी. जब रात को मैं सोता तो यही सोचता की किस दिन इस मोरनी का भोग लगाने का मिलेगा. बस मैं रंजना के सिवा और कुछ नही सोचता था. धीरे धीरे हम दोनों से एक दूसरे से मिलना शुरू किया. पर चुपके चुपके जेम्स बोंड स्टाइल में.

क्यूंकि हम दोनों ही जानते थे की रिश्ते में हम भाई बहन है. इसलिए हमारा रिश्ता कोई जायद रिश्ता नही था. हम दोनों जी १८ पर कर चुके थे. इसलिए दोनों नए नए जवान हुए थे. नई नयी उम्र में ऐसा आकर्षण होना स्वाभाविक होता है. कभी हम एक दूसरे के कमरे में चले जाते और प्यार करते, कभी छत पर भाग जाते और रोमांस करते. पर २० दिन तक केवल हाथ से एक दूसरे को छूना और किस करना हुआ. चुदाई नही हो पायी. एक दिन सीमा मौसी अपनी साडियां खरीदने बजार चली है. वो अपने साथ रंजना के छोटे भाई बहन को भी ले गयी. हम दोनों अकेले हो गए. रंजना नहाने चली गयी तो मैं भी उसके साथ बाथरूम में घुस गया. सायद वो भी कुछ ऐसा ही चाहती थी. बाथरूम की कुण्डी हमसे अच्छे से लगा दी. मैं शोवेर आन कर दिया.

रंजना पानी में भीगने लगी. उसने लाल और काले रंग का बड़ा सुंदर सा सलवार सूट पहन रखा था. जैसी ही वो शोवेर में भीगने लगी, मैंने सारे उसूल तोड़ दिए. सीधा उसका पास गया और उसको कमर से पकड़ के उसके होंठ पीने लगा. गर्मी के मौसम में ठन्डे ठंडे पानी में भीगना बड़ा अच्छा लग रहा था. मैंने इस दिन का कबसे इतंजार किया था. आज तो अपनी मोरनी को मैं कसके चोदूंगा. मैंने सोच लिया. दोस्तों, सबसे अच्छी बात थी की रंजना फूल सपोर्ट कर रही थी. मेरे उपर भी शोवेर से पानी गिरने लगा. हम दोनों नए नए प्रेमी भीगने लगे. रंजना के होठ जब भीग गए तो क्या बताऊँ दोस्तों, मेरे सीने में उसके भीगे होठ देखके आग ही लग रही थी. मुझे रंजना शाकछात् काम की देवी लग रही थी. मेरे सीने में वो मद्धिम लौ भड़क गयी. मैंने रंजना की पतली कमर में हाथ डाल दिया. भीगते हुए उसे एक दिवार के किनारे ले गया, उसके हाथों को मैंने दिवार पर टिका दिया. और दे दनादन अपनी मोरनी के होठ का रस पीने लगा.

भीगी रंजना के भीगे होठ जैसे पानी में आग लगा रही थी. १८ साल की टंच माल रंजना बिल्कुल जवान माल थी. मैं भर भर के उसके होंठ पीने लगा. वो मुझे पूरा सपोर्ट कर रही थी. मैंने खूब उसके होठ पिए. शोवेर के पानी में रंजना बिल्कुल तर बतर हो गयी. उसका सूट पूरा भीग गया और उसके मम्मो से चिपक गया. हालाँकि रंजने का मम्मे कोई बहुत बड़े नही थे, पर ३० साइज़ के तो आराम से थे. वो हल्के चेसिस वाली लड़की थी. उसका सूट उनके बदन से चिपक गया और उसका सारा बदन मुझको दिखने लगे. जैसे जैसे वो और भीग गयी, उसकी काली काली निपल्स उसके सूट के पीछे से दिखने लगी. मेरा दिमाग बिल्कुल ख्रराब हो गया. मन हुआ की पहले तो उसको चोद लूँ, प्यार व्यार, चुम्मा चाटी, किस वगेरह बाद में कर लूँगा. फिर सोचा की जल्दी बाजी में चुदाई का मजा बिगड जाएगा. पुरा मजा लेना है तो इस मोरनी को धीरे धीरे रोमांस करते हुए पेलो.

मुझे बड़ी जोर की चुदास लगी. मैंने रंगना के भीगे टमाटर पर हाथ रख दिया और जोर से दबा दिया.

दीपू भैया क्या कर रहें हो?? बड़ा दर्द हो रहा है? धीरे दबाओ प्लीस !! मेरी मोरनी यानी रंजना बोली. मैं उसे कभी गलती से भी बहन कहकर नहीं बुलाता था. क्यूंकि मैं उसका भैया नही सैंया था. मैं सिर हिला दिया. रंजना के भीगे गीले टमाटर को हाथ में लिया तो आनंद की सीमा नही रही. फिर से मन हुआ मेरा फिसल गया. मैं खुद को रोक नही सका. एक बार फिर से उसके दूसरे टमाटर को मैंने हाथ में लेकर जोर से दबा दिया. रंजना उचल पड़ी.

कुछ देर बाद मैंने उसका सूट निकाल दिया. उसकी ब्रा की निकाल दी. मेरे तो होश उड़ गये. जो लड़की मुझे दुनिया की सबसे हसीन लड़की लगती थी वो मेरे साथ बाथरूम में नहा रही थी और मेरे सामने नंगी हो गयी थी. रंजना के सारे बाल भीग गए थे और उनके गीले कन्धों से लंबे लम्बे चिपक गए थे. घुंघराले भीगे बाल. ऐसा हुस्न देखकर मैं एक बार फिर से उस पर मार मिटा. लगा रंजना कोई मॉडल हो जो फैशन टीवी ले लिए नूड फोटो शूट आउट कर रही हो. वो अफसर से कम ना लगती थी. अब भी हम दोनों बाथरूम के शोवर में भीग रहें थे. मुझे नहीं मालुम था की भीगते हुए रंजना को देखूंगा तो मर मिटूंगा. मैंने उसके दोनों हाथ को उपर दीवाल में लेजाकर चिपका दिया और झुककर अपनी मोरनी के मस्त मम्मो को पीने लगा.

रंजना ने पूरा सहयोग किया. मैंने उसके भीगे स्तनों को पूरा का पूरा मुंह में भर लिया. लगा जैसे इससे सुंदर काम मेरी जिंदगी में हो ही नही सकता था. मैंने भी प्रेम और चुदास में अभिभूत होकर आँखें बंद कर ली, उधर रंजना ने भी आँख बंद कर ली. मैं मस्ती से भीगते भीगते उसके स्तन पीने लगा. मैं सुख की चरम अवस्था में पहुच गया था. कुछ देर बाद मैंने उसकी काली सलवार की पानी में चूती डोरी अपने मुह में लेकर खिच दी, और सलवार निकाल दी. हम दोनों मजे करते रहें और शोवर से नही हटे. रंजना की पैंटी बिल्कुल भीग गयी थी और चूत से चिपक गयी थी. उसकी चूत की बीच की लाइन जो थोड़ी उभरी थी, उपर से चमक गयी थी. मैंने अपने गीले हाथ उसकी पैंटी पर रख दिए और चूत की सहलाने लगा. वो जगह मेरे मेरी किसी रिसर्च लैब से कम नही थी. आज मुझे ही यहाँ सारे प्रयोग करने थे. मैंने उसकी पैंटी निकाल दी तो मेरी मोरनी की चूत या कहें सबसे सीक्रेट अंग के दर्शन हो गए. मैंने घुटनों के बल नीचे बैठ गया. रंजना को मैंने दीवाल से सटाए रखा.

मैं उसकी भीगी गीली चूत पीने लगा.कसम से दोस्तों, मैं सुख की नदी में दुबकी लगाने लगा. रंजना ने सायद आज तक किसी को अपनी चूत नही पिलायी थी. शर्म और लज्जा से उसने आँखे बंद कर ली. मैंने मजे से उसकी चूत पीने लगा. शोवर का पानी रंजना की चूत में पूरा अंदर तक चला गया था. मैं मजे से अपनी मौसेरी बहन की चूत पीने लगा. अपनी जीभ से उसकी बुर के दाने को चाटने लगा. वो मचलने लगी. मैं अपनी इस यादगार दिन का अच्छे से मजा ले रहा था, क्यूंकि जल्दी करता तो मजा खराब हो जाता. रंजना अपनी कमर मटकाती जब जब मैं जोर जोर से उसकी भीगी बुर पीता. कुछ देर बाद मैं खड़ा हो गया. रंजना मुझे ही देख रही थी. उसकी और मेरी आँखों में बस एक चीज ही कॉमन थी और वो थी वासना और चुदास. वो चुदवाना चाहती थी और मैं चोदना चाहता था. वो अपनी सील तुडवाना चाहती थी, और मैं कबसे उसकी सील तोड़ने को मरा जा रहा था.

वो पेलवाना चाहती थी और मैं कितने दिनों से अपनी मोरनी को पेलने खाना चाहता था. मेरी रगों में खून जैसे उबल पड़ा दोस्तों. मैं उठ बैठा और सीधा रंजना के शरीर से चिपक गया. उसका दांया पैर मैंने अपने बांये हाथ ले ले लिया. जरा सा झुका और लंड उसकी चूत पर सेट किया, और अंडर पेल दिया. मेरे लोहे जैसे लंड से उसकी सील तोड़ दी. शोवेर के बहते पानी में उसकी चूत से निकला खून भी नीचे बह गया. मैं उसको चोदने लगा. कभी सोचा नही था की अपनी मोरनी को खड़े खड़े चोदूंगा. पर चुदास जो ना कराय वही कम है. मैं रंजना के बदन से सटकर उसको चोदने लगा. वो मुझसे चुदने लगी. मैं किसी खिलाडी चोदू की तरह अपना पिछवाडा बड़ी expertism महारत और कौसल से जल्दी जल्दी अंदर चलाकर अपनी मौसेरी बहन को चोदने लगा. कभी सोचा नही था की बाथरूम में उसको भीगते हुए पेलूँगा. पर होनी तो यही लिखा था. कुछ देर बाद थोडा अटपटा लगा तो दोनों बाथरूम के फर्श पर लेट गए. रंजना से दोनों पैर खोल दिए. मैं उसपर लेट के उसको देसी स्टाइल में उसको चोदने लगा.

ठन्डे पानी में भीगते १ घंटा तो बहुत पहले हो चुका था, जरा सर्दी लगने लगी थी, मैंने रंजना को सीने से चिपका लिया. उनकी चिकनी गीली भीगी पीठ में हाथ डालकर उसको खुद से चिपका लिया और फट फट फट फट उसको चोदने लगा. हम दोनों ने अभूतपूर्व मजे किये दोस्तों. खूब चोदा मैंने उसको उसदिन बाथरूम में. क्या क्या बातें आपको बताऊँ. हम दोनों लगभग एक समय झड़ने लगे तो उसने मुझे कसके पकड़ लिया. मैं जान गया की वो झड़ने वाली है. कुछ देर बाद मैं उसकी चूत में धंसे अपने लंड पर उसकी गरम गरम चूत की फुहार महसूस की. फिर मैं भी झड गया. १ हफ्ता मैंने उसको छुप छुप के चोदा , फिर घर लौट आया. अपनी कमेंट्स नॉन वेज स्टोरी डॉट कॉम पर जरुर लिखे.

 
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भाभी ने प्यारी चूत मुझसे चुदवा ली (Bhabhi Ne Pyari Chut Mujhse Chudwa Li) http://sexkahani.net/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%9a%e0%a5%82%e0%a4%a4-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%9d%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%9a/ http://sexkahani.net/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%9a%e0%a5%82%e0%a4%a4-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%9d%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%9a/#comments Mon, 20 Feb 2017 17:16:08 +0000 http://sexkahani.net/?p=10104 मेरा नाम कृष्ण है, मैं हरियाणा का रहने वाला हूँ। मैं आपके साथ अपनी एक सच्ची कहानी शेयर करना चाहता हूँ। यह कहानी तब की है जब मैं बारहवीं क्लास में पढ़ता था, मेरे भाई की शादी को तीन साल हो चुके थे। अपनी भाभी का सारा काम घर का भी, बाहर का भी मैं ही करता था। तब तक मुझे सेक्स के बारे में कुछ नहीं पता था। एक दिन मेरा एक दोस्त क्लास में सेक्स स्टोरी की बुक लेकर आया। खाली पीरियड में हम दोनों वो सेक्स स्टोरी वाली बुक पढ़ने लगे। मैंने उससे वो किताब घर के लिए देने को कहा तो वो मान गया। मैंने घर आकर वो बुक पढ़ी तो बुक पड़ने के बाद मुझे सेक्स के बारे में पता लगा। उस दिन के बाद से मैं अपनी भाभी को अलग नज़र से देखने लगा। उस समय ठंड के दिन थे तो मैं अपनी भाभी के साथ रज़ाई में बैठ कर टीवी देख रहा था तो मैंने भाभी से कहा- भाभी मुझे एक चीज़ देखनी है। तो वो बोली- टीवी का रिमोट तुम्हारे पास है, जो देखना है देख लो! मैंने भाभी से कहा- टीवी में नहीं है… वो तो आपके पास है। वो बोली- मेरे पास क्या है ऐसा जो तुम देखना चाहते हो? तो मैंने उनकी चूत की तरफ इशारा करके कहा- मैं इसे देखना चाहता हूँ। भाभी गुस्सा हो गई और मुझसे कहा- आने दो तेरे भाई को, उनको सब कुछ बता दूंगी। और मुझे कमरे से निकाल दिया। उसके बाद मैंने भाभी से डर के मारे कई दिनों तक बात नहीं की। फिर कई दिनों के बाद घर पर कोई नहीं था, मुझे स्कूल जाना था और भाभी नहा रही थी। भाभी ने मुझे तौलिया देने को कहा। मैंने जल्दी से भाभी को तौलिया दिया और ब्रेकफास्ट तैयार करने को कहा। भाभी बोली- तू उस दिन मेरी उसको देखना चाहता था? मैंने जल्दी से हाँ में सिर हिलाया। भाभी ने कहा- तू ऊपर वाले कमरे में चल, मैं कपड़े पहन कर आती हूँ। मैं ऊपर गया, पीछे पीछे भाभी आ गई और बेड पर लेट गई, भाभी बोली- मेरी सलवार खोल ले और देख ले… बस देखना ही, और कुछ मत करना। मैंने जल्दी से सलवार खोली और फ़िर उनकी कच्छी नीचे सरका के भाभी की चूत पर हाथ फेरने लगा। भाभी को मज़ा आने लगा। भाभी बोली- तुमने तो देख ली… अब मैं भी तुम्हारा कुछ देखना चाहती हूँ। मैं कुछ बोलता, उससे पहले ही भाभी ने मेरी पैंट कि चैन खोल दी और मेरा लंड कच्छे से बाहर निकाल कर हिलाने लगी। तब तक मेरा भी खड़ा हो चुका था। भाभी बोली- मैंने तुम्हारी विश पूरी की, अब तुम मेरी विश पूरी कर दो। तो मैं बोला- क्या विश है आपकी? आज आप जो भी मांगेंगी, वो मैं आपको दूँगा। भाभी बोली- मैं तुम्हारा यह लंड अपनी चूत में लेना चाहती हूँ। तो मैंने भाभी से कहा- कोई आ जाएगा तो? भाभी बोली- मैंने नीचे गेट की कुण्डी लगा दी है। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं ! फिर भाभी बोली- जल्दी कर… तुझे स्कूल भी जाना है। मैंने अपनी पैंट नीचे की और बेड पे लेट गया। पहले भाभी ने मेरा लंड साफ किया और मुँह में लेकर चूसने लगी, मेरा लंड और लंबा और मोटा हो गया, इससे पहले मेरा लंड इतना लंबा कभी हुआ था। फिर भाभी ने अपने मुँह से लंड निकला, अपनी सलवार उतारी और मेरे ऊपर आ गई, मेरा लंड अपनी चूत पे सेट किया और बोली- ज़ोर से धक्का लगा! मैंने अपनी पूरी ताक़त लगाई और एक ही झटके में पूरा लंड भाभी की चूत में घुसा दिया। भाभी के मुख से ज़ोर की चीख निकल गई। मैं थोड़ा ऊपर हुआ और भाभी के होटों पे होंट रख कर चूसने लगा। भाभी अपनी चूत ऊपर नीचे करके मज़े ले रही थी। थोड़ी देर बाद भाभी बोली- मेरा होने वाला है! और ज़ोर ज़ोर से उपर नीचे होने लगी। तकरीबन 5 मिनट के बाद भाभी ज़ोर की आवाज़ ‘आई ह्ह्ह्ह्ह्ह’ निकाल के झड़ गई। अपनी चूत से लंड निकाल कर भाभी बोली- अब तुझे भी करना है क्या? करना है तो जल्दी से ऊपर आ जा। भाभी मेरे ऊपर से हट कर बेड पे लेट गई और मैं भाभी के ऊपर आ गया। फिर मैंने भाभी की चूत पे अपना लंड लगाया और अंदर बाहर करने लगा। उस समय सारा कमरा ‘आहह अहहा अह सस्सस्स’ की आवाज़ में गूँज रहा था। मैं 10 मिनट तक भाभी को चोदता रहा और भाभी भी नीचे से चूतड़ उठा उठा कर मज़े लेती रही। तब मैंने भाभी से कहा- भाभी, मेरा होने वाला है। तो भाभी बोली- बाहर मत निकालना, अंदर ही छोड़ दे। मैंने भाभी को कहा- कुछ होगा तो नहीं? तो भाभी बोली- कुछ नहीं होगा, बस जल्दी से कर ले। इतना कहते ही मैंने भाभी की चूत अपने वीर्य से भर दी। भाभी के चहरे पर एक अजब सी मुस्कान थी। उसके बाद मैंने अपना लंड बाहर निकाला और साफ किया। फिर हम दोनों ने अपने कपड़े ठीक किए। उसके बाद भाभी बोली- तुम्हारे लंड का साइज़ बिल्कुल परफ़ेक्ट है, मैं तो इस पर फिदा हो गई हूँ। अब जब भी मैं तुम्हें बोलूँगी तो तुम मुझे चोदोगे ना? मैंने हाँ में सिर हिलाते हुए जवाब दिया। तब तक मेरे स्कूल का टाइम हो चुका था, भाभी ने अपने पर्स से 50 रूपए निकाल कर मुझे दे दिए और मैं स्कूल चला गया। उस दिन के बाद भी मैंने भाभी को कई बार चोदा। आपको मेरी कहानी कैसी लगी, मुझे मेल ज़रूर करिएगा, आपके विचारों का मुझे इंतज़ार रहेगा।

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अपनी बहन की सहेली मिताली की मैंने वेलेन्टाइन डे पर शानदार ठुकाई की http://sexkahani.net/%e0%a4%85%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%b9%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%b9%e0%a5%87%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%95/ Sun, 19 Feb 2017 14:58:26 +0000 http://sexkahani.net/?p=10038 हाय दोस्तों, मैं रामेन्द्र आपका बहुत बहुत वेलकम करता हूँ. अब तो मुझे नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम का नशा सा हो गया है. रात ढलते ही मैं इसकी कहानी पढ़ने बैठ जाता हूँ. मैं बी एस सी सेकंड यिअर का स्टूडेंट हूँ और अमेठी का रहने वाला हूँ. तो आज मैं भी आपको अपनी सेक्सी कहानी सुना रहा हूँ. मेरी बहन इशानी की कई सहेलिया है तो लगभग हर मेरे घर पर आती थी. आकांशा, संजना, कंचना, ललिता और मिताली हर रोज मेरे घर आ जाती थी. पर उस सभी में से मिताली परमार सबसे खूबसरत थी. मैं सोचता था की काश ये लड़की अगर पट जाए तो जिंदगी ही बदल जाए और खुशनुमा हो जाए.

मिताली गाती भी बहुत अच्छा थी. सभी सहेलिया मेरे घर आकार हर रोज पार्टी करती थी. वहीँ मैंने उसको गानते हुए सुना था. सच में उसके गले में सरस्वती विराजमान थी. देखने में भी वो किसी परी से कम नही थी. मैं भी उसके आसपास रहता था और उसको जोक सुनाता था. धीरे धीरे मेरी मिताली से सेटिंग हो गयी. एक दिन उसको बड़ी देर हो रही थी.

भैया ! तुम मिताली को बाइक से उसके घर छोड़ दोगे?? मेरी बहन इशानी ने मुझसे पूछा. मैं खुश हो गया की मिताली के साथ मैं तो घूमना ही चाहता था.

हाँ हाँ क्यूँ नही ! मैंने कहा. मिताली को मैंने बाइक पर बैठा लिया और उसके घर छोड़ आया. धीरे धीरे मेरी उससे गहरी जानपहचान और दोस्ती हो गयी. एक दिन वो मिताली मुझसे मेरे कमरे में मैथ के सवाल पूछ रही थी. इस बार उसका बी अस सी फर्स्ट यिअर था और मैं पहले हे इसे पास कर रहा था. मेरी बहन इशानी का पूरा गैंग दूसरे कमरे में था. मिताली अपनी बुक्स लेकर मेरे रूम में आ गयी थी. हम दोनों में अच्छी ट्यूनिंग होने लगी थी. सवाल बताते बताते मैंने उससे पूछ लिया.

ऐ मिताली! क्या तुम्हारा कोई बोयफ़्रेंड है क्या ?? मैंने पूछ लिया.

वो हस पड़ी.

नही रामेन्द्र भैया! वो हंस कर बोली.

विल यू बी माय गर्लफ्रेंड ?? मैंने बड़ी प्यार से पूछा.

ओके ! वो हंसकर बोली.

हम दोनों में सेटिंग हो गयी. कुछ दिन बाद १४ फरवरी का वेलेन्टाइन डे आया तो मैंने उसको ढेर सारे वेलेन्टाइन डे कार्ड, गिफ्ट्स और गुलाब दिए. हम दोनों की अब फूल सेटिंग हो गयी. आज का वेलेन्टाइन डे प्रेमियों के लिए बहुत ही खास दिन होता है. ये बात मैं और मिताली दोनों अच्छी तरह जानते थे.

मुझसे मैथ पूछने मेरे कमरे में आई तो मैंने उसको पकड़ लिया. वो थोडा घबरागयी. ‘डरो मत!’ मैंने कहा. वो स्टडी टेबल पर ठीक मेरे सामने ही कुर्सी पर बैठी थी. मैंने पैर से उसकी कुर्सी अपने पास कर ली. उसके दोनों कंधे पकड़ लिए. मैंने मिताली के होठ पर किस करने के लिए आगे बढा. वो थोडा झेपी, पर मैंने मौका हाथ से जाने नही दिया. उसके दोनों कन्धों को मैंने कसके पकड़ लिया. मिताली ने गुलाबी रंग की बड़ी खूबसरत स्कर्ट पहन रखी थी. उसमे वो गजब की माल लग रही थी. स्कर्ट के नीचे किनारे कई झालरे लगी थी, बहुत सुंदर पट्टियाँ थी वो. अपने होठ मैंने उसकी तरह बढाये, वो कुछ इंच पीछे हटी, पर मैंने भी मौका हाथ से नही जाने दिया.

आगे बढ़कर उसके गुलानी चिकने होठों को मैंने मुंह में भर लिया और पीने लगा. मिताली की भीनी भीनी सांसों की महक मेरी नाक में जाने लगी. कुछ देर बाद उसको भी खुमारी छा गयी. उसकी झिझक खतम हो गयी. वो खुल गयी. हम दोनों की मुंह चला चला कर एक दूसरे के होंठ पीने लगे. हम दोनों ने अपनी आँखें बंद कर ली थी. हमारा प्यार परवान चढ़ने लगा. मैंने अपनी कुर्सी पर बैठे हुए ही उसको दोनों हाथ से पकड़ लिया और अपने नजदीक खीच लिया. हम दोनों एक दूसरे का गहरा चुम्बन लेने लगे. मैंने उसके गाल पर काट लिया. उसके गले पर कई जगह मैंने उसकी खाल अपने दांतों से पकड़ ले खीच ली. हम दोनों का धीरे धीरे फूल चुदाई का मूड होने लगा. अब कोई लड़की खुद तो अपने मुंह से कहती नही है की मुझे चोदो. ये तो लड़के की जिम्मेदारी होती है.

मैंने अपनी बहन इशानी की सहेली मिताली को अपनी गोद में बैठा लिया. उसकी पीठ पर हाथ फेरने लगा. धीरे धीरे वो भी मेरी पीठ पर अपने मुलायम हाँथ फिराने लगी. उसने स्लीवलेस वाली स्कर्ट पहन रखी थी. मिताली के दोनों हाथ खूब गोरे गोरे भरे भरे थे. मैं उसके हाथों को चूमने लगे. कामुक अंदाज में उसकी त्वचा को अपने दांत से मैं काट लेता और उपर की ओर खीच लेता. धीरे धीरे मैं उसके गोरे गोरे मांसल कन्धों पर पहुँच गया और कामुकता से अपने दांत से काटते लगा. मिताली पर चुदाई का फुल खुमार छा गया. मैं समझ गया की गुरु यही सही मौका है. मिताली को आज चोद ली. मैंने दौड़ कर अपने कमरे में दरवाजा बंद कर दिया. मैंने उसकी प्रिंटेड गुलाबी शर्ट के बतन खोल दिए और निकाल दी.

मिताली बचने की कोसिस करने लगी. मैंने उसको पकड़ लिया. उसने बचने की असफल कोशिश की पर मैंने उसको पकड़ लिया. उसके दोनों कबूतर मैंने ब्रा में ही देखे. उसका गोरा गोरा दुधिया बदन तारीफ करने के काबिल था. मैंने उसके मम्मो के बीच में उसके क्लीवेज में अपना सिर रख दिया. उसके क्लीवेज की खुशबू मैंने सूँघी तो दोस्तों मेरे बदन में एक नई ताजगी आ गयी. जवान होती लौडिया की मस्त बदन. चुदासी लौंडिया के नए नए बदन की मस्त महक. मैं उसके क्लीवेज को चूमने चाटने लगा. मेरे हाथ ना चाहते हुए भी आखिर मिताली के मस्त मस्त ३२ साइज़ के मम्मो पर चले गए. मैं उसका जायजा लेने लगा, उनको जरा जरा दबाने लगा.

रमेन्द्र ! छोड दो मुझे, कहीं तुम्हारी बहन इशानी ना आ जाए!! मिताली परेशान होते हुए बोली.

शशश!! मैंने कहा.

आज वेलेन्टाइन डे है. आज प्यार का खास दिन है. आज मुझे मत रोको. मुझे आज प्यार करने दो मिताली. इशानी की परवाह बिल्कुल मत करो. वो तुम्हारी बाकी सहेलियों के साथ पार्टी कर रही है ! मैंने कहा. मैंने उसकी पीठ में हाथ डाल दिया और उसकी ब्रा निकाल दी. मुझ पर तो जैसे कयामत ही टूट पड़ी. क्या मस्त सुंदर सुंदर मम्मे थे. मैंने देर करना सही नही समझा. तुरंत उसके कबूतर को मुंह में भर दिया और पीने लगा. मिताली सिसकने लगी. उसकी साँसें तेज हो गयी. इधर मेरी सांसे भी तेज हो गयी. मैं उसके कबूतर पीने लगा. मिताली के मम्मे कमल के जैसे थे, बेइंतहा सुंदर. बड़े ठोस आकार के थे उसके मम्मे पीने लगा. मैं खूब जोर जोर से पीने लगा.

मैंने अपनी सिर्फ पैंट निकाल दी और अपनी टी शर्ट पहने लगा. क्यूंकि जादा वक्त नही था. मेरी शरारती और महाचंचल बहन कभी भी मिताली को बुलाने आ सकती थी. पर अपना मोटा गोरा सुंदर लंड मिताली के गुलाबी गुलाबी होंठों से चुसवाने की तीव्र अभिलाषा तो थी ही. एक बार उसके होठ मेरे लंड को मुंह में भर ही ले. कल तो अपने दोस्तों से सेखी तो मार ही सकता हूँ की की अपने बहन की सबसे खूबसरत सहेली से मैंने अपना लंड चुसवा लिया. मैंने अपना निकर निकाल दिया. मेरा मोटा लंड तो कबसे बेचैन हो रहा था. मैंने मिताली को अपनी कम्पयूटर की कुर्सी पर बैठा दिया. ये बहुत नीची कुर्सी थी. मैंने लंड हाथ में पकड़ा, मिताली को कुर्सी पर बिठाया और उसके मुंह में दे दिया. शुरू में तो उसने मना किया, पर मैंने उसकी एक नही सुनी.

मिताली बेबी !! एक बार मेरा लंड चूसो, तुमको शुरू में चाहे पसंद ना आये, पर दूसरे तीसरे बार में बड़ा मजा आएगा! मैंने कहा

मुझे बड़ा गन्दा लग रहा है रामेन्द्र !! वो बोली. अब मिताली मुझको भैया नही कहती थी. सिर्फ रामेन्द्र कहती थी.

नही बेबी! एक दो बार चूस कर टेस्ट तो लो !! मैंने बड़ा समझाया और उसके मना करने पर भी लंड उसके मुंह में पेल दिया. धीरे धीरे ना चाहते हुए भी और घिनाते हुए भी वो चूसने लगी. मुझे बिल्कुल नही पता की मेरे लौडे का स्वाद कैसा होगा. क्यूंकि मैं तो लड़का था , मैंने किसी का लैंड नही चूसा था. पर जैसा भी मेरे लंड का स्वाद था सायद मिताली का जादा रास नही आ रहा था. पर बेमन से तो वो चूस रही थी. मेरा मोटा गुलाबी सुपाडा पूरा का पूरा वो अंडर ले रही थी. मेरे सुपाडे के गोल छल्ला उसके गुलाबी होठों से टकराता था तो मुझे बहुत मजा मिलता था. कुछ देर बाद मैंने उसका सिर पकड़ लिया और उसके मुंह में चोदने लगा. आह !! बड़ा सुख मिला दोस्तों.

नई नई जवान हुई लड़की से लंड चुसवाना तो किसी पार्टी मिलने से कम नही है. मिताली का चेहरा और पूरा बदन चिकना चिकना था, ये जवानी की चमक थी वो १७ १८ साल तक सभी लड़के लड़कियों पर आ जाती है और २७ २८ तक आते है ये चमक चली जाती है. मिताली आखिर अब मेरा लंड आचे से चूसने लगी.

मेरा लंड फेट फेट कर चूसो मिताली !! मैंने उसको ट्रिक बताई.

अब वो उसी तरह मेरा मोटा लंड हाथ से जल्दी जल्दी फेटने लगी और लंड चूसने लगी. अपने ही घर में और अपने ही कमरे में मुझे आज स्वर्ग मिल गया. मेरे बहन इशानी और उसका गैंग[ उसकी सभी सहेलियाँ] बड़ा शोर मचा रही थी. मन में लगातार थोडा डर भी लगा हुआ था की वो मिताली को बुलाने ना आ जाए. पर मैं अपनी जगह दृढ़ था. लगातार बिना रुके मिताली से मौथ जॉब करवा रहा था. हम दोनों ओरल सेक्स सेक्स रहें थे. फिर मैंने उसकी वो गुलाबी झालर वाली स्कर्ट भी निकाल दी. बैंगनी रंग की उसकी पैंटी थी. उपर एक नॉट लगी थी. लग रहा था की जैसे कोई गिफट आइटम हो. मैंने मिताली को अपनी स्टडी टेबल पर लिटा दिया. और उसकी पैंटी भी निकाल दी. उसकी फुद्दी दिखी. बड़ी छोटी सी आकर के थी. डर लगा की कैसे मिताली की ये छोटी सी फुद्दी मेरा मोटा लंड खायेगी.

मिताली को मैंने टेबल पर किनारे खींच लिया. दोनों पैर उसने स्वंय ही खोल दिए. मैं खड़ा होकर उसकी चूत पर झुक गया और उसकी बड़ी छोटी सी चूत को पीने लगा. मिताली को मजा जरुर आ रहा था, ये तो मैं विश्वास से कह सकता हूँ. उसकी नमकीन स्वाद वाली चूत को मैं पीने लगा. बड़ी सुंदर फुद्दी थी उसकी. गुद्दीदार लंबी नाव की आकार की. बिल्कुल मोर का पंख लग रही थी. मैं जीभ डाल डालकर उसकी बुर पीने लगा. मिताली को और जोर की चुदास लग रही. मैंने अपना लंड उसकी बुर के छेद पर रखा और अंडर ठेला. लंड अंडर चला गया. सायद वो एक दो बार पहले भी चुद चुकी थी. मैंने जादा पूछ ताछ नही की. मैं मस्ती से उसको चोदता चला गया. उसकी चूत अभी भी काफी टाईट थी. सायद वो जादा नही चूदी थी. सायद वो जादा सम्भोग नही कर पायी थी.

मैं उसको लेने लगा. चुदास की खुमारी मुझ पर छा गयी. वो आ आ मंद मंद चिलाने लगी. मुझे बड़ा अच्छा लगा. बड़ा मजा आया. मिताली के खुले हुए स्तन के सामने इधर उधर हिलते थे जब मैं फटके मारता था. मैंने उसको हाथ में भर लिया और दबाते दबाते उसको चोदने लगा. मस्त चुदाई में हम दोनों डूब गए. इतने में पता नही कहाँ से मेरी बहन इशानी टपक पढ़ी.

मिताली !! कितनी देर से पढ़ रही है तू?? चल बाहर निकल! मेरी बहन बोली और मेरा दरवाजा पीतने लगी. मैं तो इकदम भदभदा ही गया. डर के मारे मैंने मिताली को चोदना बंद कर कर दिया.

आ रही हूँ! ये बड़ा कठिन सवाल है, तू चल, मैं एक मिनट में आ रही हूँ ! मिताली ने मेरी स्टडी टेबल पर मुझसे चुदते चुदते ही कहा और मुझे आँखे दिकाए. आँखों के इशारे में उसने कहा की मैं जल्दी अपना काम खतम कर लूँ. मेरी बहन इशानी चली गयी. मुझे चैन मिला. अब मैं एक बार फिर से उसको चोदने लगा. मैं आगे पीछे हिलते हुए उसको दुबारा तेज रफ्तार से लेने लगा तो मेरी स्टडी टेबल ही हिलने लगी. मेज के चारो पावे चूं चूं करके हिलने लगे. मैं पक पक करके मिताली को पेलने लगा. उसकी चूची की काली काली खड़ी खड़ी भुन्दिया मैं अपनी ऊँगली से मसलने लगा तो मेरे आनंद की कोई सीमा नही रही. कुछ देर बाद मैंने अपना लंड निकाल लिया. मिताली को जमींन पर घुटनों के बल बैठा दिया. उसने मुंह खोल लिया. मैंने लंड हाथ में ले लिया और मारे चुदास और उत्तेजना के मैं अपना मोटा लंड हाथ से फट फट करके फेटने लगा. फिर गरम गरम अपनी खीर मैंने उसके मुंह में छोड दी. उसके दुधारू मम्मो पर भी मीर खीर गिर गयी. मिताली ने अपने नुकीले कमल जैसे खूबसूरत मम्मे हाथ में ले लिया, अपने मुंह से लगा लिए और मेरी खीर को चाटने लगी.

उसकी चुदास देख कर मन तो हुआ की उसे रोके रखूं और एक बार और चोदूं, पर ऐसा करना सही नही था. वो कपड़े पहन के चली गयी. ये कहानी आप नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहें थे.

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