Hindi Sex Kahaniya & Sex Pictures http://sexkahani.net Desi Chudai Kahani, Indian Sex Stories, Chudai Pics ,College Girls Pics , Desi Aunty-Bhabhi Nude Pics , Big Boobs Pics Tue, 24 Jan 2017 09:53:05 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=4.7.1 http://i2.wp.com/sexkahani.net/wp-content/uploads/2016/02/Screen-Shot-2016-02-19-at-9.35.10-PM.png?fit=25%2C32 Hindi Sex Kahaniya & Sex Pictures http://sexkahani.net 32 32 91686163 आख़िरकार दिमाग जीत गया और मै चुद गई http://sexkahani.net/%e0%a4%86%e0%a5%99%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%97-%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%a4-%e0%a4%97%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%ae/ http://sexkahani.net/%e0%a4%86%e0%a5%99%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%97-%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%a4-%e0%a4%97%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%ae/#respond Tue, 24 Jan 2017 09:53:05 +0000 http://sexkahani.net/?p=9814 जब मैं जवान हुई तब मुझे भी और लड़कियों की तरह चुदवाने की इच्छा होती थी। पर हमारी सहेलियों में से एक के साथ प्रेग्नेन्सी का हादसा हो गया तब से मैं बहुत डर गई थी। वो पूरे कॉलेज में बदनाम हो गई थी और फिर उसने कॉलेज छोड़ दिया था। आजकल वो बंगलोर में पढ रही है और होस्टल में रह रही है। मैं इस हादसे के बाद से अपने हाथ से ही धीरे धीरे कर लेती थी।

मेरी सहेलियों ने मुझे मस्ताराम डॉट नेट साईट बताई, तब से मैं रात को इसे अकेले में देखती हूँ और मेरे मन की इच्छा के ही अनुरूप इसमें उत्तेजक कहानियाँ पढ़ने को मिल जाती है। इसको पढ़ने से मेरी रातें रंगीन हो उठती हैं, हां कुछ देर तो मैं वासना में तड़पती रहती हूँ और फिर अंगुली घुसेड़ कर पानी निकाल लेती हूँ। सच में इसमें बड़ा सुख मिलता है। इसके लिये मैं धन्यवाद देती हूँ।

मेरा बॉय फ़्रेन्ड अक्सर मुझे चुदवाने के लिये कहता है, पर डर के मारे मैं उसे मना कर देती हूँ। पर शायद उसे एक दिन मौका अन्जाने में मिल गया। घर में कोई नहीं था और विनोद अचानक ही घर पर आ गया। उसे मैंने अन्दर बैठाया और उसकी मेहमानवाजी की।
पर जैसे ही उसे पता चला कि मैं घर में अकेली हूँ, उसने मुझे कहा ” स्वाति आओ, अकेलेपन का फ़ायदा उठा लें ! प्यार करें, किस करें, अभी यहाँ कौन है देखने वाला !”

मुझे भी लगा कि मौका अच्छा है कुछ थोड़ी चुम्मा-चाटी कर लें तो मजा आयेगा। मैं शरमा तो गई पर इन्कार नहीं कर पाई। मैं उसके पास बैठ गई और हम दोनों एक दूसरे को प्यार करने लगे। होठों को चूसने लगे। उसकी जीभ मेरे मुँह में घुस कर मुझे आनन्दित कर रही थी। मेरे बदन में उत्तेजना भी होने लगी थी। इसी बीच विनोद का लण्ड खड़ा होने लग गया। लगता था वो भी उत्तेजित हो रहा था। सच है जब दो जवान तन आपस में मिलने लगे तो जिस्म जलेगा ही। मेरी चूंचियो में भी कड़ापन आने लगा था, दिल में कसक सी उठने लगी थी, मुझे अजीब सा भी लग रहा था कि मेरे स्तन अभी तक क्यूँ नहीं छू रहा था, क्या बात है … क्यूं नहीं दबा रहा है। मुझे तड़प सी होने लगी। मैंने तड़प के मारे उसका हाथ अपनी छाती पर रख लिया।

“विनोद, आह दबा दो ना ! धीरे धीरे !”
उसने हल्का सा दबा दिया। मेरे शरीर में जैसे आग सी लग गई।
“जोर से … आह … !” अब उसने मेरे बोबे ही क्या मेरे पूरे शरीर को दबाना और मसलना आरम्भ कर दिया। मेरे मुख से सिसकारियाँ निकल पड़ी। मेरी चूत में से पानी चू पड़ा। उसने मेरे कुर्ते में नीचे से हाथ डाल दिया और जांघे सहलाता हुआ, चूत तक पहुंचने लगा। जैसे ही उसके हाथ ने मेरी चूत को छुआ मुझे एक झटका सा लगा। मेरा बदन पिघलने लगा। मेरी टांगें स्वत: ही खुलने लगी।

हाथ को चूत तक पहुंचने का रास्ता देने लगी। जैसे ही उसके हाथ ने मेरी चूत को सहलाया, उसकी अंगुली मेरी चूत के रस से गीली हो गई। अंगुली का जोर लगते ही मेरी चूत का दाना छू गया, और अंगुली चूत के द्वार तक पहुंच गई। दाना छूते ही मेरे बदन में जैसे बिजलियां कौंध गई। मैं कांप गई। मैंने तुरन्त उसका हाथ पकड़ कर रोक लिया। उसे सिर हिला कर मना किया। दोस्तों आप ये कहानी न्यू हिंदी सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है l

“स्वाति, ये क्या ? मत रोको … क्या तुम्हें मजा नहीं आ रहा है ?”
उसके व्याकुल स्वर ने एक बार तो मुझे भी विचलित कर दिया। लगा कि चूत खोल कर उसका लण्ड भीतर समा लूँ।
” हाय मेरे विक्की, डर लगता है, ऊपर से ही कर लो ना, मुझे चाहे पूरा मसल दो !”
उसने भी मेरा डर समझा, और अपने लण्ड पर मेरा हाथ रख दिया। मैंने भी उसे निराश नहीं किया और उसका लण्ड थाम लिया। उसका लण्ड बड़ा और मोटा लग रहा था। मन में आया कि चुदवा लूँ, बाद में देखा जायेगा … पर नहीं, अभी नहीं। पर लण्ड के दर्शन को मन मचल उठा।
“इसे बाहर निकाल दो, एक बार देख लूँ !” मेरा मन ललचा गया।

 

विनोद ने अपना पेन्ट नीचे सरका दिया और अंडरवियर नीचे कर ली। उसका गोरा और बड़ा सा लण्ड बाहर आ गया। उसे देखते ही मेरे मन में उसे अन्दर लेने को मन तड़प उठा। मैंने प्यार से उसे पकड़ लिया और चमडी खींच कर सुपाड़ा बाहर निकाल लिया। लण्ड की सुन्दरता मेरे मन में घर गई, ये पहला लण्ड था जो मैंने देखा था, भरपूर जवान, अकड़ा हुआ, फ़ुंफ़कारता हुआ। उसके टिप्स पर निकली हुई दो चिकनी बूंदें।
“हाय विनोद, मेरे शरीर में इसे समा दो, मुझे निहाल कर दो, मुझे चोद दो !” मेरे मुख से अचानक ही ये सब निकल पड़ा।
“चुप, कहाँ से सीखा ये गाली, ये प्यार की पवित्र भावना है, वासना नहीं !”

“सॉरी, यार, मेरे मन में थी सो कह दिया, पर चोदना गाली तो नहीं होती है, ये तो लण्ड को चूत में डाल कर अन्दर बाहर हिलाने से मजा आता है न, उसे कहते हैं, मेरी सहेलियाँ तो ऐसे खूब बोलती हैं !”

 

” प्लीज ऐसे नहीं कहो, मेरी हालत खराब हो जायेगी।” वो मेरी बातों से ही मस्त होता जा रहा था। मेरी तड़प बढ़ गई, मुझसे रहा नहीं गया तो मैंने भी अपना सलवार कुर्ता उतार डाला और नंगी हो गई। मुझे नंगेपन का अह्सास होने से मन में तरंगे उठने लगी। जिस्म कंपकंपाने लगा। मुझ पर वासना पूरी सवार हो चुकी थी। विनोद भी आपे से बाहर हो रहा था। मेरे से वो चिपक कर मेरे अंगो को मसलने और दबाने लगा। मुझे अचानक ही लगने लगा कि अगर मैं चुद गई तो मैं प्रेगनेन्ट हो जाऊंगी और … और … फिर। पर मैं क्या करूँ ??? मेरा मन तड़प उठा, मेरे दिमाग में और मेरे मन में अलग अलग विचार उठने लगे। आखिर में दिमाग की जीत हुई और मैंने तुरंत फ़ैसला ले लिया कि बस मस्ती ही करना है।

“विनोद, मुझे लिटा दो और मेरी चूत चाटो … और ऐसी चाटो कि मैं मस्त हो जाऊँ !” मेरे दिल में कुछ करने की तीव्र इच्छा होने लगी। मुझे ये तरीका बेह्तर लगा। यूँ तो मैं अंगुली का प्रयोग करती हूँ, पर अब तो मेरे पास एक मर्द है, चूस चूस के मेरा पानी निकाल देगा।
विनोद ने मुझे गोदी में उठा लिया और पलंग़ पर लेटा दिया। वो स्वयं भी चूत की तरफ़ मुँह करके करवट पर लेट गया। मेरी दोनों टांगों के बीच उसने अपना चेहरा छुपा लिया और मुँह को मेरी चूत से सटा लिया। उसकी जीभ लपलपा उठी, मैंने भी अपनी चूत का जोर उसके मुँह पर लगा दिया। मैंने अपनी एक टांग उठा कर उसकी कमर में डाल दी और चूत का द्वार खिल कर उसके होंठो से लग गया। उसने भी अपनी एक टांग उठा कर मेरी कमर में मोड़ कर लपेट ली।

पर हाय राम … मैं तो भूल ही गई गई थी कि इससे तो मेरी गाण्ड का छेद भी उसकी नजरों के सामने आ गया था। फिर … मुझे छेद पर ठण्डक सी लगी, उसने मेरी गाण्ड के छेद पर थूक लगा दिया था और उसकी एक अंगुली मेरी गाण्ड के छेद को सहलाने लगी थी, मुझे बड़ा भला लग रहा था। गुदगुदी सी हो रही थी। उसकी अंगुली अब धीरे से छेद में उतर गई। मुझे अंगुली के घुसते ही बड़ा मजा आया। मुख से सिसकारी निकल गई।

उसका लण्ड मेरे मुख के सामने खड़ा हुआ मुझे न्योता दे रहा था। मैंने उसका लण्ड धीरे से अपने मुख में ले लिया और उसे दांतो से हल्के हल्के चबाने लगी। वो और फ़ुफ़कार उठा। विनोद की भी कमर अब थोड़ी थोड़ी हिल कर लण्ड को मुख में अन्दर बाहर कर रही थी। मेरी चूत का बुरा हाल हो रहा था। वो अब जोर जोर से चप चप करके उसे चाट रहा था, चूस रहा था, मेरे दाने को होंठो से खींच रहा था। गाण्ड में उसकी अंगुली अन्दर बाहर हो रही थी और गाण्ड में गोल गोल घुमा कर छेद को चौड़ा कर रही थी। मेरी गाण्ड में मस्ती चढ़ रही थी। लग रहा था कि वो मेरी गाण्ड मार दे अब।

ज़ब मुझसे रहा नहीं गया तो मैंने अपनी चूत उसके मुख से दूर कर ली और उल्टी लेट गई।
“विक्की, मेरी पीठ पर चढ़ जाओ और मुझे मस्त कर दो !” मैंने उसे गाण्ड चोदने का न्योता दे डाला।
उसने मेरी चूत के नीचे तकिया लगाया ताकि मेरी गाण्ड ऊपर की ओर हो जाये। वो मेरी पीठ पर चढ़ गया और उसने मेरी चूतड़ों की गोलाइयों को फ़ैला दिया। मेरी गाण्ड का छेद उसे साफ़ दिखने लगा। उसने पास में पड़ी क्रीम की डिबिया उठाई और छेद में उसे अन्दर बाहर लगा दी। अब उसने धीरे से अपना तना हुआ लण्ड, सुपाड़ा खोल कर छेद पर रख दिया और जोर लगाने लगा। दोस्तों आप ये कहानी न्यू हिंदी सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है l

लण्ड को अन्दर जाने में कोई तकलीफ़ नहीं हुई। मेरी गाण्ड में हल्का सा दर्द हुआ। मुझे बड़ा सा लण्ड मेरी गाण्ड में फंसा हुआ महसूस होने लगा, जैसे कि कोई नरम सी कड़क सी चीज़ गाण्ड में फ़ंस गई हो। उसने जोर लगा कर अन्दर घुसाने लगा, मेरे मुख से चीख सी निकल गई। पर वो जोश में था, उसका जोर बढ़ता ही गया।

क्रीम लगाने से मुझे उतनी तकलीफ़ तो नहीं हुई, फिर भी दर्द तो तेज हुआ ही। पर उसके धक्कों ने जल्दी ही मुझे मेरा दर्द भुला दिया। शायद इसका कारण था कि मैं अकेले में मोमबत्ती को गाण्ड में अक्सर घुसा लेती थी और मजे करती थी। आज तो लण्ड असली था, और उसका अहसास बिल्कुल अलग था। नरम सा पर लोहे जैसा कड़क, मेरे पूरे छेद में चिकनाई के साथ नरमाई के साथ, चुदाई का मजा दे रहा था।

 

उसके दोनों हाथ अब मेरी दोनों चूंचियो पर थे और उन्हें मसल कर मुझे दुगना मजा दे रहे थे। मेरी चूत भी आनन्द के मारे पानी छोड़े जा रही थी। मेरे दोनों पांव पूरे खुले हुए थे। उसका लण्ड अब सटासट अन्दर बाहर आ जा रहा था। मुझे गाण्ड चुदाई में ही इतना आनन्द आ रहा था कि लगा कि वो मेरी गाण्ड रोज मारे। पर अचानक उसका लण्ड बाहर तो आया पर वो गाण्ड में नहीं बल्कि चूत में घुस गया। मुझे अन्दर हल्की सी तकलीफ़ भी हुई, मैं तड़प कर उसे हटाने लगी, उसका लण्ड बाहर निकालने लगी और अन्त में सफ़ल भी हो गई।
“ये क्या कर रहे थे तुम? अगर मेरी झिल्ली फ़ट जाती तो? मैं प्रेगनेन्ट हो जाती तो !” मेरा सारा नशा काफ़ूर हो गया और मैं विनोद पर बरस पड़ी।

“स्वाति, पर मजा तो उसी में है, इसमें नहीं है यार” उसने मुझे समझाया।
“पर मुझे तो गाण्ड चुदवाने में ही बहुत मजा आ रहा था, तुमने सब मजा बिगाड़ दिया।”
“सॉरी, यार मैं तुम्हें ऊपर से ही रगड़ देता हूँ, मस्त कर देता हूँ, बस … अब खुश ?”
“लव यू विक्की, मुझे मंजिल तक ले जाओ, और मैं भी तुम्हें मंजिल तक पहुंचा देती हूँ, पर प्लीज, मुझे चोदना नहीं !” मेरी विनती का उस पर प्रभाव पड़ा। शायद ये भी सोचा होगा कि कहीं ये रिश्ता ही ना तोड़ दे, वो मान गया। उसने मुझे फिर से लेटाया और मेरी चूत का दाना चाटने लगा और मेरे बोबे मसलने लगा।

मैं फिर से वासना की गहराइयों में जाने लगी। मेरे निपल को घुमा घुमा कर मसलने से मेरी उतेजना चरम सीमा तक पहुंचने लगी। मुझे झड़ने जैसा अह्सास होने लगा। मैं विनोद के बाल खींचने लगी। मुख को अपनी चूत पर दबाने लगी। उसका पूरा मुँह मेरे चूत के चिपचिपे पानी से गीला हो गया था। उसकी जीभ मेरी चूत में अन्दर बाहर हो रही थी। मेरा शरीर अब तन चुका था और मेरा पानी निकलने में ही था। मैंने झड़ने के लिये चूत का पूरा जोर ऊपर की ओर लगा दिया और अब … आह रे … मर गई … मेरा रस निकल पड़ा। मेरे शरीर में लहरें उठने लगी और मैं झड़ने लगी। मैंने अपने बोबे पर से उसका हाथ हटा दिया। मेरा रस निकलता रहा, मैं धीरे धीरे निढाल होती गई।

मैंने अधखुली आंखों से विनोद को देखा, उसने अपना चेहरा मेरी चूत से अब हटा लिया था और पंजों के बल बैठा हुआ था। उसका लण्ड वैसा ही कड़क, खड़ा हुआ फ़ुफ़कार रहा था। अब मेरी बारी थी। चूंकि मैं झड़ चुकी थी इसलिये मेरा मन उसे जल्दी ही शांत करने हो रहा था। मैंने उसे वैसे ही पंजों के बल पर बैठे रहने कहा और उसका लण्ड धीरे से पकड़ लिया। और उसे मुठ मारने लगी।

उसने भी मेरे बोबे पकड़ लिये और मसलने लगा पर मुझे अब चोट लग़ रही थी। उसे जल्दी ठिकाने लगाने के लिये मैंने उसके लण्ड को मुठ्ठी में जोर से कस लिया और उसे घुमा घुमा कर मरोड़ कर उसका मुठ मारने लगी। वो तड़प उठा और बिस्तर पर लोट गया। पर मैंने उसका लण्ड नहीं छोड़ा, उसे कस कर पकड़ कर मुठ मारती ही रही। वो हाय … हाय करके करवटें लेता रहा। मैं अब उसके ऊपर लेट गई ताकि वो अधिक ना हिले। उसके मुँह को अपना मुँह से भींच लिया और लण्ड को बुरी तरह से मसलती रही। दोस्तों आप ये कहानी न्यू हिंदी सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है l

“अरे अब छोड़ दे, बस, मेरा हो गया है … हाय रे … बस कर … !” लगभग वो अब चीख सा उठा।
उसकी पिचकारी छूट पड़ी, और वीर्य ऊपर उछल कर बाहर आ गया। मेरा हाथ तर होने लगा। भीगे हुए हाथ से मैं अब हौले हौले उसके लण्ड को निचोड़ने लगी और उसे खींच खींच उसका बचा हुआ रस निकालने लगी। अब वो पूरा झड़ चुका था। उसके वीर्य को उसके ही पेडू पर और पेट पर मैंने मल दिया था, उसकी गोलियां और गाण्ड तक उसे मल दिया था।

“मजा आ गया स्वाति, तुम तो खूब मुठ मार देती हो … देखो मेरा क्या हाल कर दिया।”
“और तुम भी तो देखो, मुझे कितना मजा आया … विक्की तू ऐसे ही मुझे मस्त कर दिया कर, चुदाई में तो डर लगता है।”
हम दोनों ने आपस में लिपट कर प्यार किया और अपने कपड़े पहनने लगे।
मेरे मन का डर कब जायेगा, शायद कभी नही। मैं डर के मारे कभी भी नहीं चुद पाऊंगी। शादी के बाद ही ये डर जायेगा, पर हाय रे जाने कब होगी मेरी शादी … …

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आंटी की तड़पती चूत में बेलन डाला http://sexkahani.net/%e0%a4%86%e0%a4%82%e0%a4%9f%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a4%e0%a5%9c%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%9a%e0%a5%82%e0%a4%a4-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ac%e0%a5%87%e0%a4%b2%e0%a4%a8/ http://sexkahani.net/%e0%a4%86%e0%a4%82%e0%a4%9f%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a4%e0%a5%9c%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%9a%e0%a5%82%e0%a4%a4-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ac%e0%a5%87%e0%a4%b2%e0%a4%a8/#respond Mon, 23 Jan 2017 14:28:10 +0000 http://sexkahani.net/?p=9873 हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम मॅडी है और में 19 साल का हूँ. में दिखने में ठीकठाक हूँ और मुझमें बचपन से ही सेक्स में कुछ ज्यादा रूचि रही है. मैंने बहुत बार अपने पड़ोस में रहने वाली आंटी लड़कियों के बूब्स, गांड को चोरी-छिपे देखा और उनके मज़े लिए. ऐसा करने से मुझे संतुष्टि मिलती थी.

दोस्तों मै पुणे में रहता हूँ और मेरी एक आंटी है वह पुणे में ही रहती है और वो किसी प्राइवेट कंपनी में नौकरी करती है. मेरी आंटी की उम्र करीब 35 साल की है और उनका कुछ सालों पहले तलाक हो गया था, लेकिन उनकी दो बेटियां है. जिसमें से बड़ी लड़की की उम्र 18 साल और छोटी वाली की उम्र करीब 14 साल है और वो दोनों लड़कियाँ पढ़ाई करती है, लेकिन आंटी का फिगर उन दोनों से काफी अच्छा है. उनके फिगर का आकार 40-32-36 है और उनकी भरी भरी गांड है.

दोस्तों में जब भी उनके घर पर जाता हूँ तो बस में उनके बूब्स और गांड को ही देखा करता था और मेरी चोर नजर उनकी गोरी उभरी हुई छाती पर ज्यादा रहती और मुझे उनके आधे से ज्यादा खुले हुए बूब्स अपनी तरफ आकर्षित करते रहते में हमेशा उनको छूने दबाने के बारे में सोचता था और वैसे उनकी बड़ी बेटी के बूब्स का आकार 36-28-34 और उसकी भी बाहर निकली हुई गांड बहुत ही प्यारी थी.

दोस्तों में आंटी को हमेशा अपनी सेक्सी निगाहों से देखता था, लेकिन उन्होंने कभी भी मेरी इस हरकत पर ज्यादा गौर नहीं किया, क्योंकि वो मुझे अपना बेटा मानती थी और इसलिए उनकी सोच मेरे लिए वैसे नहीं थी, वो तो बस अपने घर के कामों में लगी रहती थी और मेरी तरफ ज्यादा ध्यान नहीं देती थी, इसलिए में उसी बात का फायदा उठाकर अपनी आखें सेकता था.

एक दिन जब में उनसे मिलने उनके घर पर गया तो मैंने देखा कि वो उस दिन घर पर बिल्कुल अकेली थी, क्योंकि उनके बच्चे उस समय स्कूल गए हुए थे और उन्होंने हल्के नीले कलर की सिल्की साड़ी पहन रखी थी, जिसमें वो बहुत ही सेक्सी लग रही थी और उनका वो ब्लाउज जो उन्होंने पहना हुआ था वो बहुत ही छोटा था और उसका गला भी कुछ ज्यादा ही बड़ा था, जिसमे से उनके दोनों बूब्स के बीच से निकलती हुई वो पतली सड़क उन दोनों ऊँचे ऊँचे पहाड़ो के बीच की गहराई तक मुझे साफ साफ नज़र आ रही थी और जिसको में लगातार घूर घूरकर देखता रहा में उस गहराईयों में एकदम खो गया था. फिर उन्होंने मुझसे बैठने के लिए कहा और चाय के लिए पूछा तभी मैंने चाय के लिए तुरंत उनको हाँ कर दिया और वो मेरे लिए चाय बनाने चली गई.

में उनके बेडरूम में बेड पर जाकर बैठा हुआ था और टीवी देख रहा था. फिर कुछ देर बाद मेरे लिए चाय ले आई और वो टीवी में चल रहे गाने में एकदम खो गई थी, इसलिए मुझे भी ध्यान नहीं रहा कि वो मुझे चाय का कप दे रही है और में कप को पकड़ना ही भूल गया.

शायद यह सब मैंने जानबूझ कर किया और अचानक से वो गरम गरम चाय मेरी जांघ पर गिर गई और उन्होंने देखा तो वो बहुत ज्यादा घबरा गई बोली कि ओफ्फ्फ्फ़ भगवान यह क्या हो गया? गरम गरम चाय तुम्हारे ऊपर गिर गई, प्लीज मुझे माफ़ कर दो मेरा ध्यान कहीं दूसरी तरफ था. तुम रुको में अभी कुछ करती हूँ और वो बहुत डर गई इसलिए वो जल्दी से किचन में जाकर एक पानी की बोतल लेकर आ गई और मेरी जांघ पर वो ठंडा पानी डाल दिया और जल्दबाजी में कपड़ा ना मिलने की वजह से वो अब ठीक मेरे सामने आकर थोड़ा झुककर अपनी साड़ी के पल्लू से मेरी जांघ को साफ करने लगी और जब उन्होंने अपनी साड़ी का पल्लू अपनी छाती से हटाया तो मुझे उनके बूब्स साफ नज़र आ रहे थे.

फिर जैसे ही धीरे धीरे वो झुकी तो उसकी वजह से अब मेरे घुटनों से उनके वो दोनों बड़े आकार के पपीते लटककर दब रहे थे, जिसकी वजह से मेरा लंड एकदम से खड़ा हो गया और पानी को साफ करते समय अचानक से उनका हाथ मेरे लंड पर जा लगा और वो मेरे लंड को भी पेंट के ऊपर से साफ करने लगी और अपने बूब्स को मेरे घुटनों के और ज्यादा पास करके ज़ोर से दबाने लगी.

कुछ देर बाद मुझसे रहा नहीं गया और मैंने तुरंत उन्हे पकड़कर ज़ोर से उनके गुलाबी रसभरे होंठो पर एक फ्रेंच किस कर लिया में उनको बहुत जोश में देखकर सब कुछ भूलकर चूम रहा था और मेरे लंड अभी भी आंटी के हाथ में था और इसके अलावा मेरे घुटने उनके बूब्स को लगातार दबा रहे थे और जोश में आकर मेरे होंठ उनके होंठो को चूस रहे थे.

करीब 8-10 मिनट तक में उनके होंठो को चूसता रहा और इस बीच में 2-4 बार हम दोनों ने एक दूसरे को बीट मतलब एक दूसरे का थूक चाटा, जिससे मेरा और आंटी हम दोनों के होंठ पूरे गीले हो गये. फिर जब मैंने उसको किस करना बंद करके उसको छोड़ा तब तक वो मेरे लंड को मेरी पेंट के बाहर निकाल चुकी थी और फिर उसने मेरा लंड चूसना शुरू कर दिया और में जोश में आकर आआहह अहहहहा कर रहा था. फिर करीब 15-20 मिनट तक वो मेरा लंड लोलीपोप की तरह चूसती रही.

फिर दोस्तों मैंने भी ज्यादा देर ना करते हुए तुरंत दोनों बूब्स को उसके कपड़ो से बाहर निकाल लिया जिनको अपने सामने देखकर में बहुत चकित हुआ, क्योंकि कपड़ो से बाहर आने के बाद तो वो मेरी उम्मीद से भी ज्यादा बड़े आकार के एकदम गोरे थे और उनकी हल्के भूरे रंग की निप्पल मुझे अपनी तरफ आकर्षित करने लगी, जिसको देखकर में सब कुछ भूल चुका था और अब में दूसरी दुनिया में था और इसका मुझे कुछ नहीं पता कि में क्या और क्यों करने जा रहा हूँ? अब में उसके दोनों एकदम मुलायम बड़े आकार के बूब्स को अपने दोनों हाथों से ज़ोर ज़ोर से निचोड़ रहा था, लेकिन ज्यादा बड़े आकार की वजह से वो मेरे हाथ में भी नहीं आ रहे थे, लेकिन थे और बहुत मजेदार बहुत सुंदर जिनको देखकर कोई भी उन्हें निचोड़ देने की इच्छा रखता है.

उसने अब पूरी तरह से गरम होकर मेरे लंड को अपने दांतों से हल्का हल्का काटना भी शुरू कर दिया था, जिसकी वजह से मेरे पूरे बदन में अजीब सी हरक़त एक हलचल होने लगी थी और फिर मैंने उसके एक निप्पल को अपने अंगूठे की सहायता से ज़ोर से दबा दिया, जिसकी वजह से उनके मुहं से बहुत ज़ोर से चीख बाहर निकल गयी और उन्होंने अब ज्यादा कामुक होकर मेरे लंड को तुरंत छोड़कर मेरे होंठो को फिर से किस करना और हल्का सा काटना शुरू कर दिया, लेकिन थोड़ी देर बाद एक बार फिर से वो मेरा लंड अपने मुहं में लेकर ज़ोर ज़ोर से चूसने लगी और में उनका इतना जोश और पागलपन देखकर खुद में भी पागल हो चुका और में अंदाजा लगा सकता था कि वो उस समय कितने जोश में थी. फिर वैसे भी उनको बहुत दिनों बाद किसी का लंड मिला था, जिसको देखकर वो अपने पूरे होश खो बैठी थी.

अपने तलाक होने के बाद शायद वो पहली बार किसी का मतलब मेरा लंड छूकर लंड को अपने मुहं में लेकर चूस रही थी और मेरे बूब्स दबाने की वजह से वो बहुत अजीब सी आवाजे निकालकर वो मुझसे कह रही थी हाँ और ज़ोर से चूसो मेरे राजा उफ्फ्फ्फ वाह मज़ा आ गया, हाँ आज तुम इनको पूरी तरह से निचोड़कर इनका पूरा रस पी जाओ, में कब से इस पल का मज़ा लेने के लिए तरस रही थी. फिर मैंने इस दिन का कितना इंतजार किया? आह्ह्हह्ह हाँ थोड़ा और ज़ोर से दम लगाओ, वाह तुम तो बहुत अच्छी तरह से यह सब करना जानते हो और तुम इतने दिनों से कहाँ छुपे बैठे थे?

दोस्तों वो यह सभी बातें कहकर खुद भी जोश में आकर मुझे भी जोश दिलवाकर दोबारा मेरे लंड को अपने मुहं में लेकर चूसने लगी और लगातार धीरे धीरे एक अनुभवी की तरह लंड को अंदर बाहर करने की वजह से जो मुझे सुख मिल रहा था.

दोस्तों में उसको किसी भी शब्दों में लिखकर आप लोगो को नहीं बता सकता और फिर कुछ ही देर बाद मेरे लंड से निकला वो वीर्य का गरम लावा उसके मुँह के अंदर ही निकल गया और अब वो बहुत मज़े से मेरे लंड से निकले वीर्य को चाट रही थी और लंड को दोबारा अपने मुहं में लेकर बहुत जमकर चाट रही थी और उन्होंने मेरे लंड को बिल्कुल चमका दिया. अब में थककर बेड पर ही लेट गया और वो मेरे कपड़े उतारने लगी और उसने मेरे पूरे गरम जिस्म पर किस करना शुरू कर दिया, लेकिन उसने अभी तक साड़ी पहन रखी थी.

फिर में उठा और मैंने तुरंत उनका ब्लाउज उतारकर एक तरफ डाल दिया और उनकी काली कलर की सिल्की ब्रा को बिना समय गँवाए उतार दिया और अब मैंने धीरे धीरे उनको पूरा नंगा कर दिया था. फिर जब उनका गोरा कामुक बदन मेरी आखों के सामने आकर मुझे ललचा रहा था तो मैंने उनके बदन को चाटना चूमना शुरू कर दिया.

कुछ देर चूमने के बाद में उठकर गया और एक बर्फ का टुकड़ा अपने साथ ले आया और अब में वो बर्फ का टुकड़ा उसके बदन पर फेरने लगा और अपने एक हाथ में बर्फ लेकर उसकी चूत पर भी लगाने लगा. इसके बाद में अब अपने दाँतों में बर्फ को लेकर उसकी चूत पर रगड़ने लगा, जिसकी वजह से वो चिल्ला रही आहहहह उफफ्फ्फ्फ़ तुम यह क्या कर रहे हो? ऊईईईइ माँ मुझे तो आज ऐसा लगता है कि तुम मेरी जान ही निकाल दोगे और तुम तो बहुत कुछ करना जानते हो, में तो तुम्हे नादान समझ रही थी.

फिर अब वो अपनी गांड को लगातार ऊपर नीचे कर रही थी और तभी अचानक से वो बर्फ का टुकड़ा मुझसे छुटकर सीधा उनकी गीली चूत में फिसलकर अंदर चला गया जिसकी वजह से वो चीख उठी उछल पड़ी और मुझसे कहने लगी उह्ह्ह्ह आह्ह्ह् माँ मर गई, तुमने यह क्या किया? प्लीज इसको जल्दी बाहर निकालो वरना में मर ही जाउंगी थोड़ा जल्दी करो.

फिर मैंने अपनी एक ऊँगली को उनकी चूत में डालकर उस बर्फ के टुकड़े को चूत से बाहर निकाल ही रहा था, तभी ना जाने क्या सोचकर वो मुझसे बोली कि नहीं रहने दो उसको अंदर ही अब मुझे बहुत अच्छा लग रहा है.

मैंने उस बर्फ के टुकड़े को चूत के अंदर ही रहने दिया और अब में उसकी चूत को चाटने लगा और कुछ ही सेकिंड में वो बर्फ का टुकड़ा चूत की गरमी से पिघल रहा था, जिसकी वजह से अब उस बर्फ का पानी और उनकी चूत का पानी मिलकर उस छेद से बाहर आ रहा था और जिसको में बड़े ही मज़े से चाट रहा था. उसकी चूत का वो खट्टा और ठंडा पानी बड़े ही मज़े का था और आंटी ज़ोर ज़ोर से चीख और चिल्ला रही थी उफ्फ्फ्फ़ आह्ह्ह्हह्ह हाँ मादरचोद आज तू मेरी पूरी चूत को खा जा आईईईइ हाँ तू आज अपनी आंटी की चूत को पूरा का पूरा चूस ले, चोद दे इसको, अपनी जीभ को डाल दे पूरा अंदर हाँ और अंदर जाने दे.

फिर मैंने ज़ोर ज़ोर से चूत को चाटना और चूसना शुरू कर दिया, उसकी तरसती हुई चूत को अपने दांतों से हल्के से काटने लगा जिसकी वजह से आंटी कि आवाज़ भी तेज़ हो रही थी और दूसरी तरफ मेरे दोनों हाथ उनके 40 साईज़ के बूब्स को ज़ोर ज़ोर से दबा रहे थे और मैंने ध्यान से देखा तो दोनों बूब्स पूरी तरह से लाल हो गये थे.

जिसकी वजह से अब उनका दूध भी निकलने लग गया था. फिर उनकी चूत को चाटने के बाद उन्होंने मुझे अपने ऊपर लेटा लिया और मुझसे कहा कि चल अब आजा मादरचोद आ तू मेरा दूध भी पी ले और में ज़ोर ज़ोर उनके बूब्स को चूसने लगा. उनका दूध भी बहुत ही स्वादिष्ट था.

करीब 15 मिनट तक उनके बूब्स को चूसने और दूध पीने के बाद मैंने उनको कुत्ते की तरह बैठने के लिए कहा वो तुरंत बैठ गई. फिर मैंने उनको चोदना शुरू किया और सबसे पहले मैंने उनकी गांड पर बहुत सारा मख्खन लगा दिया और अपने 6 इंच लंबे लंड को उनकी गांड के छेद पर रखकर ज़ोर से अंदर की तरफ दबाव बनाते हुए अंदर डाल दिया और वो चीख उठी वो मुझसे कहने लगी उफफ्फ्फ्फ़ आह्ह्ह्ह प्लीज अब इसको बाहर निकालो मुझे दर्द हो रहा है आईईईई में मर जाउंगी प्लीज मेरी बात मान लो, लेकिन मैंने उनके बहुत बार कहने और मुझसे आग्रह करने के बाद भी अपने लंड को बाहर नहीं निकाला और अब में बहुत ज़ोर ज़ोर से झटके देने लगा.

थोड़ी ही देर बाद आंटी को भी मज़ा आने लगा और वो भी मस्ती से अपनी गांड को उठाकर ऊपर नीचे करने लगी और उस समय मेरे दोनों हाथ उसकी गांड पर थे और मेरा लंड उसकी गांड के अंदर था.

करीब दस मिनट धक्के देने के बाद मैंने अपना वीर्य उसकी गांड में ही निकाल दिया. फिर लंड अपने आप छोटा होकर बाहर निकल गया और में तब तक उनके बूब्स को मसल रहा था और जब लंड बाहर निकला तब आंटी लंड को अपनी जीभ से चाटने लगी और उन्होंने लंड को चाट चाटकर पूरा साफ कर दिया और उसके बाद में आंटी के ऊपर ही लेट गया और उनके होंठो को चूसने लगा और चूत में ऊँगली करता रहा.

फिर थोड़ी देर बाद हम दोनों नंगे ही उठे और किचन में चले गये, वहाँ पर हमने थोड़ा जूस और दूध पी लिया तभी मेरे हाथ में रोटी बनाने का बेलन आ गया, जिसको मैंने तुरंत उसकी चूत में डाल दिया. फिर वो मुझसे कहने लगी कि यह बेलन बहुत छोटा है तुम तो अब अपना लंड मेरी चूत में डालो और मेरी जमकर चुदाई करो, मुझे वो सुख दे दो जिसके लिए में बहुत सालों से तड़प रही हूँ, मेरी चूत की प्यास मिटा दो और कर दो आज मेरी चूत को ठंडा, यह मुझे बहुत परेशान करती थी.

मैंने आंटी को अपनी बाहों में लेकर उनको जल्दी से किचन में ही नीचे लेटा दिया और उनके दोनों पैरों को अपने कंधे पर रख लिया और अपना लंड उनकी चूत में डाल दिया. पहले धीरे-धीरे और फिर थोड़ी देर बाद में अपनी तरफ से ज़ोर ज़ोर से झटके देने लगा, जिसकी वजह से वो चीख उठी मादरचोद और ज़ोर से चोद, हाँ तू आज फाड़ दे मेरी चूत को आहहह म्‍म्म्मममम में मर गई. अब वो बहुत सेक्सी आवाज़ें निकाल रही थी, जिनकी वजह से में जोश में आकर और ज़ोर ज़ोर से अपने लंड को चूत में झटके दे रहा था.

करीब 8-10 मिनट चोदने के बाद मैंने उनसे कहा कि में अब झड़ने वाला हूँ बताओ में अपने वीर्य को कहाँ निकालूं? तो उसने मुझसे बोला कि तुम उसको मेरी चूत के अंदर ही डाल दो और फिर मैंने उसके कहने पर उसकी चूत के अंदर ही अपने वीर्य का फव्वारा छोड़ दिया और में आंटी के ऊपर ही लेट गया.

में और आंटी दोनों ही थोड़ी सी थकान महसूस कर रहे थे, इसलिए मैंने उसके ऊपर लेटकर धीरे धीरे उसके बूब्स को चूसने लगा और वो मेरी इस चुदाई से बहुत खुश पूरी तरह से संतुष्ट नजर आ रही थी. फिर चुदाई के कुछ घंटो बाद मैंने उनको एक बार फिर से उनके बच्चे आने से पहले दोबारा चोदा और उसके बाद उन्होंने मेरी हर एक चुदाई में अपना पूरा पूरा साथ दिया. अब मुझे जब भी मौका मिलता में उनको जरुर चोदता और बहुत मजे करता.

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मैने चोदा रे बहन को http://sexkahani.net/%e0%a4%ae%e0%a5%88%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%9a%e0%a5%8b%e0%a4%a6%e0%a4%be-%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%b9%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%8b/ Mon, 23 Jan 2017 09:51:29 +0000 http://sexkahani.net/?p=9812 हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम गुरु है और आज में जो कहानी आप सभी लोगों को सुनाने जा रहा हूँ, antarvasna antarvassna Indian Sex Kamukta Chudai Hindi Sex वो मेरी एक सच्ची कहानी है. दोस्तों सबसे पहले तो में आप लोगों को थोड़ा अपने बारे में बता दूँ कि में दिल्ली का रहने वाला हूँ. मुझे सभी सेक्सी कहानियाँ पढ़ना बहुत अच्छा लगता है. मेरी लम्बाई ठीक-ठाक है और मेरा शरीर भी दिखने में अच्छा लगता है. में एकदम फिट हूँ और अगर दूसरी चीज़ो की बात करे तो मेरा लंड 8 इंच लंबा है और 3 इंच मोटा है, जो कि किसी भी लड़की, भाभी या आंटी को संतुष्ट करने के लिए अकेला ही बहुत है और मुझे सेक्स करना बहुत अच्छा लगता है और अब में अपनी कहानी को शुरू करता हूँ.

मैने चोदा रे बहन को

दोस्तों, यह कहानी मेरे और मेरी पड़ोसन के बारे में है जिसकी मैंने जमकर चुदाई की. वैसे दोस्तों वो दिखने में बहुत ही सुंदर है और वो मुझसे एक साल छोटी है करीब 22 साल, उसका नाम प्रियंका है और में उसके बारे में क्या बताऊँ वो बहुत सेक्सी है, एकदम साफ रंग ऊपर से जब वो टी-शर्ट पहनती है तो उसके गोल गोल बूब्स देखकर तो में बिल्कुल ही पागल हो जाता हूँ और कभी कभी जब वो गहरे गले की टी-शर्ट पहनती थी और में अपनी बालकनी में खड़ा होता था तो में तो बस उसके बड़े बड़े बूब्स की लाइन ही देखता रहता था और उसकी गोल गांड के तो क्या कहने?
में जब भी उसकी गांड को देखता तो मेरा मन करता था कि बस उसी समय उसके कपड़े उतारकर उसे चोदना शुरू कर दूँ, लेकिन यह सब मुमकिन नहीं हो पता था, तो मुझे उसकी चुदाई करने की सारी तड़प अपनी गर्लफ्रेंड पर उतारनी पड़ती या मजबूरी में मुठ मारनी पड़ती थी, लेकिन उससे बुरी बात तो यह थी कि वो अब मुझे भैया बोलने लगी थी, जो मुझे बिल्कुल भी पसंद नहीं था, लेकिन दोस्तों अगर कोई लड़की आपको भाई बोलती है तो उसका सबसे बड़ा फ़ायदा यह है कि आप उससे कभी भी जब मर्ज़ी हो मिलने जा सकते हो और उसे कहीं भी बुला सकते हो और अगर सब कुछ ठीक रहा तो आप कभी भी उसे चोद भी सकते हो और आपके ऊपर किसी को शक भी नहीं होगा.
दोस्तों जब से वो जवान हुई थी में तो उसे चोदने के सपने देखने लगा और में दिन रात उसके बारे में सोचने लगा. में उसके बारे में सोच सोचकर एकदम पागल होने लगा था, लेकिन मुझे यह नहीं पता था कि अगर मैंने कुछ किया तो उसका रिज़ल्ट क्या होगा? फिर भी में तो कभी कभी थोड़ी थोड़ी कोशिश करता रहता था, जैसे कि जब में उसके घर जाता था तो उसके साथ बैठने की कोशिश करता था. उसके हाथ पर अपना हाथ रख देता था या उसे घूरता रहता था, लेकिन उसकी तरफ से कभी भी कोई ऐसा जवाब नहीं आया कि जिससे मुझे लगे कि वो भी मुझसे चुदना चाहती है, लेकिन मुझे उससे क्या लेना, मुझे तो बस उसे चोदना था?
एक दिन हुआ यह कि में अपने कॉलेज के पेपर की तैयारी कर रहा था और में उस समय कॉलेज के आखरी साल में था, उस वक़्त प्रियंका भी अपने दूसरे साल के पेपर की तैयारी कर रही थी. वो अक्सर मेरे पास अपनी समस्या लेकर आती रहती और में उसकी मदद किया करता था. में कई बार मज़ाक मज़ाक में उसे पढ़ाते वक़्त उसके बूब्स और गांड पर हाथ मार दिया करता था, लेकिन वो मुझे कभी कुछ नहीं बोलती थी, शायद वो मुझे अपना भैया समझती थी.
फिर हुआ यह कि प्रियंका के पापा का ऑफिस दिल्ली के बाहर है और इसलिए वो हर रोज अप-डाउन करने की बजाए कभी कभी वहीं पर रुक जाते है और घर नहीं आते और फिर हमारे पेपर शुरू होने के ठीक एक हफ़्ता पहले एक दिन प्रियंका की मम्मी हमारे घर पर आई और उन्होंने बोला कि उनके भाई मतलब प्रियंका के मामा की तबीयत अचानक से बहुत खराब हो गई है और उन्हे और उनके पति को वहां पर जाना पड़ रहा है और वो प्रियंका को अपने साथ नहीं ले जा सकते, क्योंकि उसके पेपर शुरू होने वाले थे और फिर उन्होंने बोला कि आप लोग प्लीज उसका ध्यान रखना और कभी कभी गुरु को प्रियंका के पास भेज देना ताकि वो उसे पढ़ा दे और उस वजह से प्रियंका को अकेलापन भी महसूस नहीं होगा. तो में एक तरफ खड़ा खड़ा यह सारी बातें सुन रहा था और मन ही मन बहुत खुश हो रहा था, अब मुझे लग रहा था कि शायद अब में प्रियंका को चोदने का अपना ख्वाब पूरा कर सकता हूँ.
तो अगले दिन जब में कॉलेज से वापस आया तो में बहुत खुश था, क्योंकि में जानता था कि आज प्रियंका घर पर एकदम अकेली है और आज मेरे पास पूरा मौका है उसे चोदने का, लेकिन में अब भी यही सोच रहा था कि में यह सब कैसे करूँगा? और फिर सोचते सोचते शाम पड़ गई और तब तक प्रियंका भी घर पर आ चुकी थी तो मैंने मम्मी से बोला कि आप प्रियंका और मेरा खाना पेक कर दो में उसके साथ ही खा लूँगा. तो मम्मी ने बोला कि ठीक है. दोस्तों प्रियंका मुझे हमेशा भैया बोलती थी तो इसलिए हम पर कोई भी ऐसे शक नहीं कर सकता था और फिर उसके बाद रात को 9 बजे मैंने खाना पेक करके प्रियंका के घर की घंटी बजाई और जब उसने दरवाजा खोला तो में तो बस उसे देखता ही रह गया. उसने आज एक बहुत छोटी सी स्कर्ट, एकदम टाईट टी-शर्ट पहन रखी थी.
में तो उसकी गोरी गोरी जांघे देखता ही रहा फिर में अंदर गया और में पीछे से उसकी उठी हुई स्कर्ट में से उसकी जांघे झाँकने लगा, लेकिन कुछ ज्यादा नज़र नहीं आ रहा था और अब में उसके बूब्स को घूरने लगा जो उस टी-शर्ट में एकदम सेक्सी लग रहे थे. फिर मैंने प्रियंका को खाना दिया और उसे प्लेट में डालकर लाने को बोला और में टीवी चलाकर बैठ गया. मैंने टीवी पर सारे चेनल चला दिए, लेकिन किसी पर भी कोई सेक्सी फिल्म नहीं आ रही थी तो मैंने टीवी को बंद कर दिया. फिर प्रियंका ने पूछा कि भैया आपने टीवी क्यों बंद कर दिया? तो मैंने बोला कि उस पर कुछ नहीं आ रहा था और मैंने उससे पूछा.
में : और बता क्या चल रहा है?
प्रियंका : सब मस्त है भैया आप बताओ आपका क्या हाल है, क्या पेपर की तैयारी हो गई?
में : नहीं यार, मेरा तो आज कल कहीं मन ही नहीं लगता.
प्रियंका : क्यों भैया ऐसा क्या हुआ?
में : पता नहीं यार, आज कल कहीं दिल नहीं लगता, पता नहीं क्या बात है?
प्रियंका : क्या में बताऊ भैया आपको क्या हुआ है?
में : हाँ जल्दी बताओ?
प्रियंका : शायद आपको कोई पसंद आ गया है और यह सब प्यार में ही होता है. (वो मंद मंद मुस्कुरा रही थी)
में : हाँ शायद तू बिल्कुल सही कह रही है, आजकल तो में बस उसके ही सपने देखता रहता हूँ और हमेशा उसी के बारे में सोचता रहता हूँ.
प्रियंका : वो कौन है भैया प्लीज मुझे भी बताओ ना?
में : कोई नहीं है तू अपना खाना खा और पढ़ाई कर.
प्रियंका : नहीं भैया मुझे नहीं पढ़ना, प्लीज पहले आप मुझे बताओ ना कौन है?
में : अच्छा तू खाना खा ले जब हम पढ़ने लगेंगे तो में तुझे पक्का बताऊंगा.
प्रियंका : क्या पक्का वादा?
में : हाँ पक्का वादा.
प्रियंका : फिर ठीक है.
फिर उसके बाद प्रियंका वहां से उठी और चली गई और फिर थोड़ी देर बाद प्रियंका ने मुझसे बोला कि वो नहाने जा रही है. तो मैंने उससे बोला कि ठीक है, लेकिन थोड़ा जल्दी आ जाना फिर हम पढ़ना शुरू कर देंगे. तब मैंने मन ही मन सोचा कि आज में इसको सब सच सच बता दूँगा और अगर सब ठीक रहा तो आज इसकी जमकर चुदाई भी कर दूँगा और फिर मैंने भी अपने घर पर जाकर बोल दिया कि आज में लेट ही आऊंगा, क्योंकि मुझे आज प्रियंका को पढ़ना है.
मम्मी ने मुझसे बोला कि तो तू वहीं पर सो जाना और अब मेरे तो जैसे लॉटरी लग गई, मैंने मम्मी को झट से हाँ बोल दिया और जल्दी से वापस प्रियंका के घर चला गया और उसके बाद में सीधा प्रियंका के रूम में कुछ किताब लेने के लिए चला गया, उसका दरवाजा खुला हुआ था और मैंने बस अभी तक हल्का सा दरवाजा खोला था और मेरी नज़र जब रूम में पड़ी तो में तो पूरी तरह से हिल गया. मैंने अंदर की तरफ देखा कि प्रियंका सिर्फ़ एक टावल को लपेटकर खड़ी हुई थी और शायद वो कुछ ढूंड रही थी. में तो बस पीछे से उसकी गोरी गोरी जांघे देखने लगा और उसकी गांड भी बहुत बाहर की तरफ निकली हुई थी, कसम से अब तो में और भी पागल होता जा रहा था और मेरा लंड भी अब पूरा खड़ा हो चुका था और मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि में अब क्या करूं?
तभी मैंने देखा कि उसने अलमारी में से अपनी एक काली कलर की ब्रा-पेंटी निकाली जो की बहुत सेक्सी थी और देखकर लग रहा था कि शायद वो वहीं पर चेंज करेगी, लेकिन उसने ऐसा कुछ नहीं किया बल्कि वो तो बाथरूम की तरफ जाने लगी थी तो मुझसे अब और बर्दाश्त नहीं हो रहा था, मैंने दरवाजा खोला और जानबूझ कर उसके रूम में ग़लती से अंदर जाने की एक्टिंग करने लगा. तो वो अचानक से डर गई और मैंने उसे देखते ही सॉरी बोला.
प्रियंका बोली कि भैया अपने तो मुझे डरा ही दिया था. मैंने उससे कहा कि में कुछ किताब लेने अंदर आया था. में उसके हाथ की तरफ देख रहा था, उसके हाथ में उसकी ब्रा और पेंटी थी. जब उसने इस बात पर गौर किया तो उसने झट से अपनी ब्रा-पेंटी को अपनी गांड के पीछे छुपा लिया. मेरा तो बस मन कर रहा था कि उसको यहीं पर लेटाकर चूमना, चाटना शुरू कर दूँ और अब वो भी थोड़ा शरमाने लगी थी, क्योंकि वो मेरे सामने सिर्फ़ एक टावल में खड़ी हुई थी. तो मैंने उससे बोला कि शरमाने की कोई बात नहीं है तुम जाकर चेंज कर लो, में बाहर तुम्हारा इंतजार करता हूँ. यह बात सुनकर उसने मुझे स्माइल दी और जैसे ही वो बाथरूम की तरफ चलने लगी तो अचानक उसका टावल अलमारी के हेंडल में अटक गया और एक ही झटके में वो टावल उसके शरीर से अलग हो गया और जो मैंने उसके बाद देखा.
दोस्तों वो में आपको शब्दो में भी बया नहीं कर सकता, क्योंकि वो ठीक मेरे सामने एकदम नंगी खड़ी हुई थी और उसके मोटे मोटे बूब्स मेरे सामने थे, जिन्हे में पूरा दिन रात चूसने के सपने देखता था और उसकी गुलाबी चूत देखकर तो में पागल ही हो गया और मेरा लंड भी अब मेरी पेंट फाड़कर बाहर आने लगा था. तो उसने मेरे लंड के बड़ते हुए आकार को महसूस कर लिया था और फिर करीब 30 सेकिंड तक उसे समझ में नहीं आया कि वो अब क्या करे? उसके बाद जब वो थोड़ा झुककर टावल उठाने लगी तो तब तक बहुत देर हो चुकी थी में सीधा उसके पास गया और उसे अपने गले से लगा लिया और बोला कि प्रियंका में तुमसे बहुत प्यार करता हूँ, तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो में तुम्हारे बिना नहीं जी सकता. तो उसने अपने आपको मुझसे छुड़वाया और अपना टावल उठाकर लपेट लिया और बोला कि नहीं भैया ऐसा नहीं हो सकता क्या आप पागल हो गए हो और यह आप क्या बोल रहे हो?
फिर मैंने बोला कि में जो भी बोल रहा हूँ वो सब सच बोल रहा हूँ. उसने बोला कि अगर किसी को पता चल गया तो सब क्या बोलेंगे? तो मैंने कहा कि किसी को कुछ भी पता नहीं चलेगा और किसी को बताएगा भी कौन? यह बात हम दोनों के बीच में ही रहेगी. तो उसने बोला कि नहीं भैया प्लीज आप ऐसा मत सोचो, यह सब बिल्कुल ग़लत है. फिर मैंने बोला कि इसमे कुछ ग़लत नहीं है और फिर मैंने धीरे धीरे उसको अपनी तरफ खींचना शुरू कर दिया.
पहले तो वो मेरा विरोध करती रही, लेकिन जब मैंने ज़बरदस्ती अपने होंठो को उसके होंठो पर रखे तो थोड़ी ही देर बाद वो जोश में आकर मेरा साथ देने लगी और मुझे भी अब लगा कि लोहा गरम हो गया है तो मैंने भी धीरे धीरे उसका टावल खींचना शुरू कर दिया, पहले तो वो मेरा हाथ हटाती रही लेकिन जब मैंने उसे खींचकर बेड पर लेटाया और उसके गुलाबी होंठो को चूसने लगा तो वो भी मेरा पूरा पूरा साथ देने लगी और फिर मैंने उसका टावल उसके शरीर से एक बार फिर से अलग कर दिया. अब वो मेरी बाहों में बिल्कुल नंगी पड़ी थी. में उसकी चूत देखकर पागल हुआ जा रहा था. फिर में एक हाथ से उसके बूब्स दबाने लगा और में एक हाथ उसकी चूत पर रखकर उसे मसलने लगा.
फिर वो बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गई और सिसकियों की आवाजें निकालने लगी, लेकिन में उसके होंठो को लगातार चूसता रहा जिसकी वजह से उसकी आवाज़ बाहर नहीं निकली और फिर मैंने उसके बूब्स को चूसना शुरू किया और मैंने बहुत बार उसके निप्पल पर भी काटा जिससे वो एकदम मचल जाती थी और फिर में धीरे धीरे चूमते चाटते नीचे जाने लगा. उसका पेट कांप रहा था और उसे भी अब सेक्स चड़ने लगा था और उसके बाद मैंने भी अपने सारे कपड़े उतार दिए और नंगा हो गया.
फिर मैंने देखा कि अभी तक उसकी आँखे बंद थी और उसने मेरे लंड को नहीं देखा था. फिर मैंने उसके दोनों पैरों को फैला दिया और मैंने देखा कि वो अभी तक पूरी तरह से वर्जिन थी, शायद उसने आज तक अपनी चूत में उंगली भी नहीं की थी. फिर मैंने अपनी जीभ के साथ उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया, वो पूरे मज़े के साथ हवा में उछलने लगी और आवाज़े निकालने लगी प्लीज भैया ऐसा मत करो अहाहहह आईईई, लेकिन कुछ देर बाद ही वो मुझसे कहने लगी अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बहुत मज़ा रहा उह्ह्ह्हह्ह्ह्ह प्लीज थोड़ा और अंदर करो प्लीज भैया और अंदर अह्ह्हह्ह्ह्ह.
उसके मुहं से यह आवाज़े सुनकर मुझमें भी अब जोश आ गया और में अपनी पूरी जीभ उसकी चूत में डालकर अंदर बाहर करने लगा. तो वो बोलने लगी कि भाई अह्ह्ह्ह मुझे कुछ हो रहा है आऐईईई अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो अआह्ह्ह रहा प्लीज भैया रूको, लेकिन में नहीं रुका और उसकी चूत को लगातार चूसता, चाटता रहा और उसी वक़्त वो झड़ गई और उसने अपना सारा माल अपनी चूत से बाहर निकाल दिया. तो मैंने एक टिश्यू पेपर लेकर उसकी चूत को साफ किया और फिर मैंने अपना लंड अपने हाथ में पकड़ा और उससे बोला कि अब जानेमन तुम्हारी बारी है और मैंने उसे इशारे में अपना लंड चूसने को बोला.
पहले उसने साफ साफ मना किया, लेकिन मैंने उसे बहुत देर तक समझाया और उससे थोड़ी सी ज़बरदस्ती की और उसके मुहं में अपना लंड डाल दिया और फिर वो भी बड़े मज़े से मेरा लंड चूसने लगी. दोस्तों में क्या बताऊँ में तो उस समय जैसे सातवें आसमान पर था, वो मेरा लंड ऐसे चूस रही थी जैसे मानो कोई छोटा बच्चा आईसक्रीम खा रहा होता है. वो अपनी पूरी जीभ को मेरे लंड के टोपे पर घुमा रही थी और थोड़ी ही देर के बाद में भी झड़ गया. वो लंड पर से अपना मुहं हटाना चाहती थी, लेकिन मैंने मजबूती से उसका सर पकड़ लिया और सारा माल उसके मुहं में ही निकाल दिया और फिर बाद में उसने उसे थूक दिया.
फिर हम एक दूसरे के साथ ऐसे ही नंगे लेटे हुए थे और वो फिर से मेरे लंड को अपने हाथों से दोबारा सहलाने, दबाने लगी. तो में भी झट से समझ गया कि अब यह मुझसे चुदना चाहती है और अब आज मेरा भी सपना पूरा होने वाला था.
फिर उसने थोड़ी देर मेरा लंड सहलाया और वो तनकर खड़ा हो गया. फिर मैंने उसके दोनों पैरों को खोलकर अपने पेट पर घुमा दिया और उसकी गांड के नीचे एक तकिया रख दिया और एक तेल की बोतल अपने पास रख ली, लेकिन वो अब बहुत डर रही थी और बोल रही थी कि भैया प्लीज रहने दो हम फिर कभी कर लेंगे, आपका लंड बहुत बड़ा है यह मेरे अंदर नहीं जाएगा, लेकिन में कहाँ मानने वाला था?
मैंने तेल की बोतल खोली और उसकी चूत को पूरा तेल के साथ भर दिया ताकि लंड आसानी से अंदर चला जाए और थोड़ा सा तेल अपने लंड पर भी लगा लिया और फिर उसके बाद मैंने अपने लंड का टोपा उसकी चूत के मुहं पर रखकर एक ज़ोरदार धक्का मारा और उसके मुहं से एक बहुत तेज़ चीख निकली आअहहह्ह्ह्ह उह्ह्हह्ह्ह्ह मर गई, इसे बाहर निकालो प्लीज, नहीं तो में मर जाउंगी, प्लीज भैया ऊईइइइईईईई माँ, भैया प्लीज मुझ पर थोड़ा तरस खाओ, प्लीज अह्ह्हह्ह्ह इसे बाहर निकालो, लेकिन में कहाँ रुकने वाला था और मैंने एक और धक्का लगा दिया जिसकी वजह से वो और बहुत तेज़ छटपटाने लगी, उसने छूटने की बहुत कोशिश की लेकिन मैंने उसे अपने पैरों के साथ जकड़ लिया था और उसके मुहं पर अपना मुहं रखा था ताकि उसकी आवाज़ बाहर ना निकल सके.
फिर में थोड़ी देर तक एक जगह पर रुका रहा और मैंने नीचे की तरफ देखा तो उसकी चूत में से खून निकल रहा था, शायद वो वर्जिन थी और यह उसकी पहली चुदाई थी इसलिए खून चूत से बाहर निकला होगा और थोड़ी देर ऐसे ही लेटे रहने के बाद मैंने धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू कर दिए और जब उसकी आवाज़ कम हो गई तो मैंने उसके मुहं से अपना मुहं हटा लिया और उसकी चूत में पूरे ज़ोरदार धक्के मारने लगा और अब उसे भी मज़ा आने लगा था वो भी अब मेरा पूरा पूरा साथ दे रही थी. हमारी आवाज़े पूरे कमरे में गूँज रही थी और में उससे बोल रहा था कि प्रियंका में तुमसे बहुत प्यार करता हूँ और मैंने हमेशा से तुम्हे ऐसे ही चोदना चाहता था.
प्रियंका भी बोल रही थी कि हाँ भैया में भी आपसे बहुत प्यार करती हूँ और अब उसकी सिसकियाँ भी बड़ने लगी थी और वो बोल रही थी कि भैया थोड़ा और ज़ोर से करो अह्ह्हह्ह्ह्ह हाँ आज इसमें पूरा अंदर डाल दो अपना लंड उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ हाँ बहुत मज़ा आ गया, भैया प्लीज आज मुझे अपनी बना लो और हमेशा मुझे ऐसे ही चोदते रहना. तो में भी बोलने लगा कि मेरी रानी तू बिल्कुल भी फ़िक्र मत कर, में अब दिन रात एक करके तुझे चोदूंगा और तेरी चूत को शांत करूंगा, में तुझे अपनी रानी बनाकर रखूंगा.
फिर करीब बीस मिनट की चुदाई के बाद एक तेज धक्के के साथ हम दोनों एक एक करके झड़ गये. मैंने अपना सारा वीर्य उसकी चूत में छोड़ दिया और में बहुत थककर एकदम निढाल होकर उसके ऊपर गिर गया और अब उसके शरीर के साथ साथ उसकी चूत भी ढीली हो गई थी और वो मेरी तरफ देखकर मुझे स्माइल दे रही थी और फिर मैंने थोड़ी देर बाद उठकर उसे एक किस किया और एक कपड़ा लेकर उसकी चूत और अपने लंड से खून को साफ किया और उसके बाद मैंने उस रात उसे तीन बार और चोदा, लेकिन उसके बाद में अब तक में उसे पता नहीं कितनी बार चोद चुका हूँ और हर बार में उसे एक नई स्टाईल में चोदता हूँ, वो हर बार मेरी चुदाई से बहुत खुश हो जाती है.

 

दोस्तो, मैं नाईट डिअर का नियमित पाठक हूँ और आज मैं Punjabi Pakistani मैने चोदा Indian  Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta Sex Kahani Indian Sex Chudai

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बहन की सील तोड़कर गांड मारी http://sexkahani.net/%e0%a4%ac%e0%a4%b9%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%b2-%e0%a4%a4%e0%a5%8b%e0%a5%9c%e0%a4%95%e0%a4%b0-%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a1-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80/ Sun, 22 Jan 2017 14:26:01 +0000 http://sexkahani.net/?p=9871 हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम सलीम है. दोस्तों मैंने अपने लंड से सदिया की सील तोड़ी और जब में सादिया को चोदकर झड़ गया, तो फिर में बाथरूम में गया और अपने लंड और जिस्म पर लगे खून को धोकर साफ किया और जब बाहर आया तो मैंने देखा कि सादिया अभी तक बिस्तर पर पड़ी थी और उसमें उठने की भी हिम्मत नहीं थी.

मैंने उसे अपनी गोद में उठाया और बाथरूम में ले जाकर उसकी चूत और जिस्म पर लगा हुआ खून और मेरे माल को साफ किया. अब साफ करते-करते एक बार फिर से मेरा लंड उसकी गोरी और साफ चूत देखकर खड़ा होना शुरू हो गया था. में उसे गोद में उठाकर बाहर लाया और बिस्तर पर लेटा दिया और कपड़े से उसकी चूत को अच्छी तरह से साफ किया.

मेरा लंड अभी तक खड़ा हुआ था और सादिया के हाथ में था, अब वो उसे आगे पीछे करके खेल रही थी. फिर मैंने सोचा कि उसे दोबारारा चोद दूँ, लेकिन उसकी हालत देखकर सोचा कि कहीं उसे कुछ हो ना जाए. फिर मैंने अपना लंड उसके मुँह में दे दिया और 69 की पोज़िशन में होकर उसकी चूत चाटने लगा.

करीब 10 मिनट के बाद वो झड़ गई, लेकिन में अभी तक नहीं झड़ा था इसलिए मैंने उसकी चूत को चाटना जारी रखा और उसने मेरा लंड चूसना जारी रखा. फिर क़रीब 20 मिनट के बाद वो फिर से झड़ गई और अब में भी झड़ने ही वाला था और फिर में उसके मुँह में ही झड़ गया. फिर उसके बाद हम दोंनों एक दूसरे को लिप किस करते हुए नंगे ही सो गये.

फिर सुबह जब मेरी आँख खुली तो मैंने देखा कि वो अभी तक सो रही थी. फिर मैंने घड़ी पर नजर डाली तो मैंने देखा कि 11 बज रहे थे. अब मेरा आज का पेपर मिस हो गया था, लेकिन में खुश था कि में अपनी बहन को चोदने के इम्तिहान में कामयाब हो गया हूँ. फिर मैंने उठकर नाश्ता बनाया और फिर सादिया को भी जगाया.

अब उसकी हालत पहले से बेहतर थी और फिर हम दोनों ने एक साथ नाश्ता किया और नाश्ते के दौरान भी हम एक दूसरे से खेलते रहे. अब हमने यह फ़ैसला किया था कि अपने घरवालों के वापस आने तक हम दोनों घर में नंगे ही रहेंगे और एक दूसरे से मज़े लेते रहेंगे. फिर नाश्ते के बाद मैंने उसे फिर से बिस्तर पर लेटा दिया और उसे किस करने लगा.

अब मेरा लंड जो नाश्ते के बाद सो गया था, वो फिर से जाग गया और अपने पूरे मूड में आ गया था. फिर मैंने सादिया से कहा कि में उसे दुबारा चोदना चाहता हूँ. फिर वो कहने लगी कि मुझे अभी तक रात की चुदाई का दर्द है इसलिए अभी नहीं, शाम को चोदना. फिर मैंने कहा कि ठीक है तो फिर में तुम्हारी गांड मार लेता हूँ, जिस पर वो पहले तो नहीं-नहीं करने लगी और फिर तैयार हो गई.

फिर मैंने वेसलिन की शीशी उठाकर उसे अपने लंड और उसकी गांड के छेद में अच्छी तरह से लगाया और फिर अपनी उंगली उसकी गांड में डालकर आगे पीछे करने लगा. फिर पहले तो उसे थोड़ी तकलीफ़ हुई और फिर उसको भी मज़ा आने लगा और वो कहने लगी और जोर से करो. फिर मैंने अपनी दूसरी उंगली भी उसकी गांड के छेद में डाल दी और आगे पीछे करने लगा. फिर कुछ देर के बाद जब मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ तो मैंने उसकी चूत के छेद में अपना लंड डालना शुरू किया.

अभी मेरे लंड का टोपा ही थोड़ा सा अंदर गया था कि वो दर्द से चीख पड़ी और कहने लगी बाहर निकालो. फिर मैंने कहा कि डार्लिंग थोड़ी देर बर्दाश्त करो. फिर बड़ा मज़ा आएगा और उसका मुँह तकिए पर दबाकर एक जोरदार झटका दिया, तो मेरा 3 इंच लंड उसकी गांड में घुस गया और वो दर्द से तड़पने लगी और रोने लगी. फिर में अपना लंड उसी पोज़िशन में रखकर उसके ऊपर लेट गया और उसके बूब्स दबाने लगा. फिर कुछ देर के बाद उसे राहत मिली.

फिर मैंने आहिस्ता-आहिस्ता उसकी गांड मारनी शुरू की और फिर जोर-जोर से मारनी शुरू कर दी. अब उसे भी मज़ा आ रहा था और अब में तो बहुत ज़्यादा इन्जॉय कर रहा था. फिर करीब आधे घंटे के बाद में उसकी गांड में ही झड़ गया और उसके ऊपर ही लेट गया और उसकी कमर पर किस करता रहा और उसके बूब्स को दबाता रहा.

कुछ देर के बाद मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा और मैंने थोड़ी देर के बाद उसकी गांड फिर से मारनी शुरू कर दी. अबकी बार मैंने 45 मिनट तक उसकी गांड मारी और उसके बाद उसकी गांड में ही झड़ गया. फिर थोड़ी देर के बाद मैंने अपना लंड बाहर निकाला तो वो मेरे माल और उसकी गांड के अंदर की गंदगी से भरा हुआ था और सख़्त बदबू मार रहा था, लेकिन इस बदबू में भी एक सेक्स था.

फिर में उठकर बाथरूम में गया और अपने लंड को अच्छी तरह से साफ किया और बाहर आकर उसकी गांड को टिस्सू पेपर से अच्छी तरह से साफ किया और फिर उसके साथ ही लेट गया.

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Bhabhi Ki Chudai Ki Dhamkaane Ke Baad http://sexkahani.net/bhabhi-ki-chudai-ki-dhamkaane-ke-baad/ Sun, 22 Jan 2017 09:48:35 +0000 http://sexkahani.net/?p=9810 Mera naam saurav hai mere umar 27 saal hai mera height 5feet 9 inch hai mai ranchi me apne bhaiya bhabhi ke saath rahta hun bhaiya adhiktar kam ke silsile se sahar ke baher rahte hai, sex stories

Meri bhabhi ka nam ruchi hai unki ek do sal ki beti hai bhabhi ki umar 26 sal hai wo bahut hi sundar hai unki height 5 feet 4 inch hai unka figure 36 26 36 hai wo ek dum gori hai meri niyat unke prati suru se kharab thi unki gaand aur chuchi kamal ki thi mai hamesh tirchi najar se unko napta tha jab wo jhuk kar jhadu lagati hai.

To mai chupke unki gaand ko ghurta hun salwar me side se unki jaangh kamal lagti hai kai bar to jab wo apni beti ko dudh pilati hai to mujhe unki chuchi ki jhalak mil jati hai unki chuchi doodh se bhi gori hai mai unke baare me soch kai bar mutb mar chuka hun .

Mera to mann hamesha unhe chodne ko karta hai par darta tha jab wo chalti hai to unki gori gaand kahar girati hai unki gaand dekh aisa lagta hai bhai ne khub gaand mari hai unki aur marta bhi kyun nahi itni mast gaand jo thi

Ek din bhabhi mujse boli ki unhe bajar jana hai bhaiya bahar gaye hai kuch dino bad aayenge mai bola chaliye bhabhi mai le chalta hun aur hum sham ko bajar chal diye bhabhi ne saadi pahen rakha tha sab mardo ki nigah unki matakti gaand par thi sub unhe ghur rahe the bhabhi sab saman kharidne ke bad kapde ki dukan me gayi mai bhi unke saath gaya waha unhone bra kharida.

Phir hum ghar chale aaye kafi late ho gaya tha hum khana kha so gaya karib 12 baje mujhe bhabhi ke kamre se awaj aayi mai unke room me gaya waha dekh meri halat kharab ho gayi waha teen log pistal liye khade the ek ne pistal meri kanpati par sata diya aur bola chup chap khade raho mai wahi khada raha unme se ek bhabhi ke najdik gaya bhabhi boli kaun ho tumlog yaha kyun aaye ho.

Wo bola ki hum log crimnal hai jab se tujhe bajar me gaand matka chalte dekha hai tabse tera picha kar raha hun bhabhi boli kya bakwas kar rahe ho kamine wo bola chup randi nahi to teri beti ki jaan le lunga aur teri gaand me goli marunga wo dar gayi bhabhi ne us samay patla nigty pahna tha bahut hi sexy lag rahi thi.

Wo bhabhi ke pas gaya aur unki nighty phad di bhabhi ka gora jism baher aa gaya gora gora pet bhabhi ab sirf bra panty me thi unki chuchi bahut badi thi phir usne bhabhi ki bra phad di bhabhi ki chuchi ajad ho gayi kitni mast chuchi thi mera to lund khara ho raha tha us aadmi ne bhabhi ki chuchi jor se dabayi bhabhi chilla uthi wo ro rahi thi.

Wo rote rote boli please mujhe chod do ye mera devar hai mai kya muh dikhaungi ise ispar wo bola muh mat dikhana ise apni gaand dikhana usne bhabhi ki panty bhi phad di unki gaand bilkul nangi thi.

Unke bur par ek bal nahi tha unki gaand bahut badi thi bilku gora tha unka gaand ise dekh bhabhi ko nanga dekh uska saathi bola kya mast mal hai ise le chal apne saath.

Phir wo boli lagta hai sharma rahi hai randi apne devar se kyun na pahle ise iske devar se hi chudwa de taki iska dar aur sharam khatam ho jaye dekh iske devar ka bhi lund khada hai to dura bola devar kya agar iska bhai bhi ise is hal me dekhe to chod de ise meri to jaise lottery lagne wali thi par mai udas chehra kiye khada tha wo bola chal chod apni bhabhi ko mai mana karne laga.

Wo bhabhi ki gaand ke pas pistal rakh bola chod warna gaand me goli mar dunga aur haan blue film type chodna hai maine apne kapde utare aur nanga ho gaya mera lund khada tha bhabhi mera lund dekh chaunk gayi mai bhabhi ke pas gaya aur unke gulabi hoth chusne laga wo saath nahi de rahi thi mujhe bahut maja aa raha tha.

Mai ek hath se unki chuchi daba raha tha phir mai bhabhi ke pet ko chuma aur chuchi chusne laga usme se doodh aa raha tha mai doodh pine laga bada acha taste tha phir mai bhabhi ke bur ko sahlaya aur use chusne laga mai apna jeebh bur ke ander baher karne laga bhabhi ke bur se halka pani aane laga.

Phir maine bhabhi ke bur me lund dala ek hi jhatke me lund ander chala gaya maine jor jor se dhake lagaya aur jharne samay virya ko unke bur me hi gira diya bhabhi bhi jhad chuki thi phir maine bhabhi ko ulta ghumaya aur unki gaand sahlane laga to ek crimnal ne pucha kaisa laga apni bhabhi ki gaand.

Mai bola bahut achi hai har lund aisa hi gaand chahta hai bhabhi ascharya se mera chehra dekh rahi thi ki mai kya bol raha hun mai bhabhi ki gaand chatne laga kya gaand thi chatne se bilkul lal ho gayi thi.

Maine apna lund unki gaand me dala halka hi gaya ki wo tadap gayi aur boli meri gaand mat maro maine kabhi nahi marwaya ye sun mai khush ho gaya ki pahli bar mai hi gaand mar raha hun.

Maine aur jor se dhaka mara wo chilla uthi mai jhatke diye ja raha tha unhe bhi gaand marwa maja aa raha tha isiliye gaand hila rahi thi unka gaand marte marte mera bura hal tha kya gaand thi mai gaand me hi jhar gaya wo leti rahi.

Itne me crimnal ne bola chalo ab humlog chodte hai randi ko aaj iski gaand pharte hai usne paint kholi jaise hi usne paint kholi police ki siren sunai de siren sun usne turant pant pahni aur bhagne lage.

Unke bhagte hi thodi der bad hame goli wo chalne ki awaj sunai di mai kapde pahan baher ghar se thoda dir dekha bhid lagi hai mai waha jakar dekha to saare crimnal jamin pe mare pade the aur bahut police the waha pe.

Mai ghar aa gaya bhabhi bed par sir jhukaye baithe thi maine unhe sab bat bataye wo halka relax hui aur mujse boli saurav ye bat kisiko mat batana mai bola thik hai bhabhi par ab mai apki gaand ke bina nahi rah paung wo boli kya bol rahe ho saurav mai tumhari bhabhi hun.

Mai bola bhabhi thi ab meri biwi hai wo boli tum samajne ki koshis karo mai bola aap samajhe ki koshis kariye bhabhi mai aapko ek bar chod hi diya hai to aage phir dubara chodne me kya dikkat hai aapke pas itne mast do ched hai lund jaane ke liye ek se bhaiya aish karenge ek se mai bahut samjhane.

Par wo man gayi maine unhe rat bhar choda subhah wo chal nahi pa rahi thi unki gaand suj gayi thi unhe potty karne me bhi dukh raha tha mai pucha kya hua bhabhi wo boli ki tune to meri gaand phad di gaand pura dukh raha.

Mai bola ki sorry bhabhi mai kya karta apki gaand dekh raha nahi gaya galti apki hai aap gaand itna matakti hai ki raha nahi jata mai to phir aapki gaandi abhi maruna mai pucha bhabhi bhaiya ne aapki gaand sach me nahi mari.

Bhabi boli wo to marne ki jid karte hai par maine abhi tak nahi diya unhone sirf chata hai mai bola bhabhi sab log aapki gaand dekjte hai.

To wo boli ki aisa kya hai aapki gaand me to mai bola apki gaand ka shape acha hai aur pura gora hai mai bola bhabhi mere pas aaye maine hath blade se kat unki mang bhar di aur bola aaj mang bhar raha hun aur ab mandir me shaadi karunga.

Kahani padhne ke baad apne vichar niche comment section me jarur likhe, taaki DesiKahani par kahaniyon ka ye dor apke liye yun hi chalta rhe.

Bhabhi boli shaadi ki kya jarurat hai bina shadi hi chodte raho mujhe mai bola are pyari bhabhi thoda gaand to phir chusne dijiye bhabhi boli nahi chusne ke bad tum gaand bhi maroge mujhe dard ho raha hai.

Mai bola thik hai bhabhi mujhe aapse bahut pyar hai jab apka dard khatam ho jayega tabhi apki gaand marunga

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Meri Sabse Lambi Chudai ki Kahani- Khub Chudi mai us rat ko http://sexkahani.net/meri-sabse-lambi-chudai-ki-kahani-khub-chudi-mai-us-rat-ko/ Sat, 21 Jan 2017 14:23:49 +0000 http://sexkahani.net/?p=9869

मेरा नाम शबाना इज़्ज़त शरीफ़ है। मैं शादीशुदा हूँ और उम्र तीस साल है। मैं बी-ए पास हूँ। खुदा ने मुझे बेपनाह हुस्न से नवाजा है। मेरा रंग दूध की तरह गोरा है, हल्की भूरी आँखें और तीखे नयन नक्श और मेरा फिगर ३६-सी की उभरी हुई चूचियाँ, २८ की मस्तानी कमर, और ३८ की मचलती हुई गाँड। मैं अक्सर बुऱका पहन कर ही बाहर जाती हूँ लेकिन मेरे बुऱके भी फैशनेबल और डिज़ाइनदार होते हैं। हमेशा रास्ते में चलते लोग मेरी मस्त जवानी को नंगी नज़रों से देखते और कुछ तो कमेन्ट भी कसते कि, “क्या माल है… साली बुऱके में भी होकर लंड को पागल कर रही है…. ऊँची सेंडिल में इसकी मस्त चाल तो देखो…!”

मेरे शौहर असलम इज़्ज़त शरीफ़ सरकारी महकमे में ऑफिसर हैं। हम एक अच्छी मिडल-क्लास कालोनी में तीन बेडरूम वाले किराये के मकान में रहते हैं। घर में आराम की तमाम चीज़ें हैं और मारूति वेगन-आर कार भी है। सरकारी नौकरी की वजह से मेरे शौहर की ऊपरी कमाई भी हो जाती है जिसके चलते मैं कपड़े-लत्ते, जूते और गहनों वगैरह पर खुल कर खर्च करती हूँ।

तीस की उम्र में वैसे तो मुझे दो -तीन बच्चों की अम्मी बन जाना चाहिये था। लेकिन ऐसा है नहीं और इसकी वजह है मेरे शौहर की नामर्दगी। मेरा शौहर “असलम इज़्ज़त शरीफ़” अपनी बच्चे जैसी लुल्ली से मेरी जिस्मानी ज़रूरतें पूरी नहीं कर पाता। इसके अलावा असलम को शाराब पीने की भी बहुत आदत है और अक्सर देर रात को नशे में चूर होकर घर आता है या फिर घर में ही शाम होते ही शराब की बोतल खोल कर बैठ जाता है। शुरू-शुरू में मैं बहुत कोशिश करती थी उसे तरह-तरह से चुदाई के लिये लुभाने की। मेरे जैसी हसीना की अदाओं और हुस्न के आगे तो मुर्दों के लण्ड भी खड़े हो जायें तो मेरे शौहर असलम का लण्ड भी आसानी से खड़ा तो हो जाता है पर चूत में घुसते ही दो-चार धक्कों में ही उसका पानी निकल जाता है और कईं बार तो चूत में घुसने से पहले ही तमाम हो जाता है। उसने हर तरह की देसी दवाइयाँ-चुर्ण और वयाग्रा भी इस्तेमाल किया पर कुछ फर्क़ नहीं पड़ा।

अब तो बस हर रोज़ मुझसे अपना लण्ड चुसवा कर ही उसकी तसल्ली हो जाती है और कभी-कभार उसका मन हो तो बस मेरे ऊपर चढ़ कर कुछ ही धक्कों में फारीग होकर और फिर करवट बदल कर खर्राटे मारने लगता है। मैंने भी हालात से समझौता कर लिया और असलम को लुभाने की ज्यादा कोशिश नहीं करती। कईं बार मुझसे रहा नहीं जाता और मैं बेबस होकर असलम को कभी चुदाई के लिये ज़ोर दे दूँ तो वो गाली-गलौज करने लगाता है और कईं बार तो मुझे पीट भी चुका है।

असलम मुझे भी अपने साथ शराब पीने के लिये ज़ोर देता था। पहले-पहले तो मुझे शराब पीना अच्छा नहीं लगता था लेकिन फिर धीरे-धीरे उसका साथ देते-देते मैं भी आदी हो गयी और अब तो मैं अक्सर शौक से एक-दो पैग पी लेती हूँ। चुदाई के लुत्फ़ से महरूम रहने की वजह से मैं बहुत ही प्यासी और बेचैन रहने लगी थी और फिर मेरे कदम बहकते ज्यादा देर नहीं लगी। अपनी बदचलनी और गैर-मर्दों के साथ नाजायज़ रिश्तों के ऐसे ही कुछ किस्से यहाँ बयान कर रही हूँ। इस कहानी का मूल शीर्षक “शबाना की चुदाई” है।

तीन साल पहले की बात है, तब मैं सत्ताइस साल की थी। हमारा मकान कालोनी के आखिरी गली में है में है जो आगे बंद है। हमारी गली में तीन चार ही मकान ही हैं और बाकी खाली प्लॉट हैं। इसलिये कोई आता जाता नहीं और अक्सर सुनसान सी रहती है। हमारे बाजू वाला घर खाली है जिसमें कोई नहीं रहता। हमारे सामने और दूसरी बाजू में भी खाली प्लॉट ही हैं। इसी बाजू वाले प्लॉट में एक छोटा सा कच्चा कमरा है जिसमें एक बीस-इक्कीस साल का लड़का रहता है और वहीं छप्पर के नीचे कालोनी के लोगों के कपड़े इस्तरी करता है। उसका नाम रमेश है और वो थोड़ा बदतमीज़ किस्म का है। वो अक्सर आते जाते वक्त मुझे छेड़ता रहता और गंदी-गंदी बातें करता। मैंने भी उसे कभी नहीं रोका और उसकी बातों के मज़े लेती रहती। इस वजह से उसकी भी हिम्मत बढ़ गयी थी।

एक दिन की बात है मेरी सहेली असमा ने मुझे नंगी फिल्म की सी-डी दी। वो देसी ब्लू-फिल्म की सी-डी थी। मैंने उस दिन पहली बार ब्लू-फिल्म देखी थी, और उसमें लम्बा मोटा अनकटा लण्ड देख कर मुझे अजीब सा लगा। मैंने अब तक अपने शौहर की कटी लुल्ली ही देखी थी। मेरी भी प्यास भड़क गयी थी और मैं भी अपनी चूत को उस जैसे किसी लण्ड से चुदवाना चाहती थी। खैर मैंने हमेशा की तरह केले से अपनी प्यास बुझायी पर मैं वो लंड भुला नहीं पायी। उसके बाद बुऱका पहन कर मैं कुछ खरीददारी करने बाहर गयी और शाम को घर आते वक्त जब अपनी गली में दाखिल होने लगी तो वहाँ रमेश बैठा था। हमारी गली की दूसरी तरफ़ रास्ता नहीं है, बंद गली है। रमेश पर जैसे ही मेरी नज़र पढ़ी, उसने मेरे हाथ में केलों के थैले की तरफ इशारा करते हुए पूछा कि ये खाने के लियी हो या कुछ और…? मैंने हल्के से मुस्कुराते हुए उसकी तरफ़ देखा। उफ़्फ़ अल्लाह क्या कहूँ, उसका दूसरा हाथ तो उसकी पैंट पर था और वो लंड को पैंट पर से सहला रहा था। मैं थोड़ा सा शरमा गयी लेकिन फिर हिम्मत करके हल्की सी मुस्कुराहट देकर आँख मार दी और घर पहुँच गयी।

जब मैं घर पहुँची तो मेरा शौहर दफ्तर से आ चुका था और टी-वी देखते हुए शराब पी रहा था। मैंने भी बुऱका उतार कर एक पैग बनाया और शौहर के साथ बैठ कर पीने लगी। चार-पाँच मिनट के बाद शौहर असलम शराब पीते-पीते ही मेरी कमीज़ के ऊपर से मेरे मम्मे दबाने लगा और फिर अपनी लुल्ली बाहर निकाल कर मेरा हाथ उसपे रख दिया। मैं भी एक हाथ से उसे सहलाने लगी तो लुल्ली अकड़ कर करीब चार इंच की हो गयी। फिर हमेशा की तरह उसने मुझे इशारे से उसे चूसने को कहा। मैंने अपना शराब का गिलास खाली किया और झुक कर उसकी लुल्ली अपने मुँह में लेकर चूसने लगी। एक मिनट भी नहीं हुआ था कि उसकी लुल्ली ने अपना पानी मेरे मुँह में छोड़ दिया। शौहर असलम हाँफ रहा था लेकिन मैं शायद आज ज्यादा बेचैन थी। मुझे उम्मीद तो नहीं थी पर फिर भी मैंने शौहर की तरफ इल्तज़ा भरी नज़रों से देखा तो उसने मुझे झिड़क दिया। मैंने दिल ही दिल में उसे गाली दी और अपने लिये दूसरा पैग बना कर अंदर दूसरे कमरे में चली गयी। मैं खिड़की के पास बैठी शराब की चुस्कियाँ लेने लगी तो मुझे वो ब्लू फिल्म याद आ गयी। अजीब सा लंड था उस फिल्म में। अचानक मेरा ज़हन लंड की बनावट पर गया जो मेरे शौहर से बिल्कुल अलग थी। उफ़्फ़ ये तो अजीब सा लंड था फिल्म में, जिसपर चमड़ी थी। मेरी चूत बेहद गीली हो गयी थी।

अचानक मैंने खिड़की से झाँक कर देखा तो रमेश की मेरे घर पर ही नज़र थी। असल में ये खिड़की उसी प्लॉट की तरफ खुलती थी जिसमें रमेश का कमरा था। अपने शौहर से मायूस होकर अब मेरा भी दिल उसका लंड लेने को हो रहा था। मैंने कमरा बंद किया और खिड़की खोल ली और अपना पैग खत्म करके जानबूझ कर कुछ काम करने लगी। नीली कमीज़ और सफ़ेद रंग की सलवार और सफ़ेद रंग की ही ऊँची सैंडल पहनी हुई थी मैंने और ओढ़नी नहीं ली हुई थी। मेरे बूब्स काफी तने हुए थे। मैं जान कर ऐसे कर रही थी कि मेरे बूब्स का पूरा मज़ा मिले रमेश को। जब मैंने काम करते-करते उसकी तरफ़ देखा तो उसने अपना लंड निकाला हुआ था। उफ़्फ़ खुदा, क्या अजीब था उसका हिंदू लंड, बिल्कुल उस ब्लू-फिल्म के लण्ड जैसा, बिल्कुल काला, आठ इंच का और काफी झाँटें भी थी उसके इर्द गिर्द। जैसे ही मैंने देखा उसने हाथ से चोदने का इशारा किया। मैं हल्के से हंस दी और अपनी कमीज़ के हुक खोल कर उसे थोड़ा सा नीचे किया जिससे मेरे आधे बूब्स नज़र आ रहे थे। जैसे ही मैंने आधे मम्मों का नज़ारा दिया, रमेश ने अपना लंड पैंट में वापस डाला और मेरी खिड़की की तरफ़ आने लगा। मैंने इशारे से कहा कि रुको…! इस कहानी का मूल शीर्षक “शबाना की चुदाई” है।

मैंने कमरा खोला और बाहर जाकर देखा। मेरा शौहर सोफे पर नशे में धुत्त खर्राटे मार कर सो रहा था। मैंने हिम्मत के लिये एक और पैग जल्दी से पीया। मैं फिर कमरे में वापस आयी और उसे इशारे से कहा कि छत्त पर आओ…! वो पिछली दीवार से छत्त पर चढ़ गया। बाजू वाला मकान खाली होने की वजह से छत्त पर पुरी प्राइवसी है। मैंने कुछ कपड़े लिये और सुखाने के बहाने छत्त पर गयी और ऊपर जाकर सीढ़ियों का दरवाजा बंद किया। रमेश पहले से ही मौजूद था। वो अपना लंड निकाले हुए सहला रहा था। वो मेरी तरफ़ अपना हिंदू लंड ज़िप से बाहर निकाले हुए बढ़ा और मेरा एक मम्मा पकड़ कर मेरे होंठों से अपने होंठ चिपका दिये। उफ़्फ़ खुदा कितना अजीब लग रहा था मुझे। रमेश मेरा एक मम्मा ज़ोर से दबाते हुए अपने होंठों का थूक मेरे मुँह में डाल रहा था। उसका दूसरा हाथ मेरे जवान चूतड़ों को दबाने में लगा था और उसका नंगा हिंदू लंड मेरी बेचैन प्यासी चूत को सलवार पर से दबा रहा था। मैं भी जोश खाने लगी और अपने हाथ में उसका लंड पकड़ लिया। अजीब से लग रहा था कि उसका काला हिंदू लंड मेरे गोरे हाथों में फूल रहा था। फिर उसने मेरे चूतड़ और बूब्स दबाते हुए कहा, “शबाना जान! तुमने शराब पी रखी है क्या?” मैंने कहा, “हाँ थोड़ी सी पी है… कभी-कभार अपने पियक्कड़ शौहर के साथ पी लेती हूँ!”

रमेश मेरी आँखों में देखते हुए बोला, “तभी तेरी ये भूरी आँखें इतनी नशीली हैं! वैसे तू बुऱके में छिपी रुस्तम है!” उसकी बात सुनकर मुझे हंसी आ गयी। वो आगे बोला, “मैं तुम्हें बुऱके में देखना चाहता हूँ अभी!” उसने मेरे लाये हुए कपड़ों में बुऱका देख लिया था। मैंने शरमाते हुए कपड़ों में से बुऱका निकाला और पहनने लगी। मैंने जैसे ही बुऱका पहना उसने मेरा नकाब की तरफ इशारा करते हुए कहा, “ये भी डाल लो…!” मैंने शरारती अंदाज़ में कहा कि “क्यों रमेश! क्या इरादा है?” उसने बुऱके में से उभरे हुए मम्मे को पकड़ कर कहा की, “तू हमेशा बुऱके में ही दिखी है मुझे, बस तेरा हसीन चेहरा और ऊँची सैंडल में गोरे-गोरे नर्म पैर… मैंने हमेशा इसी रूप में तेरा तसव्वुर किया है और आज तेरी जवान मुस्लिम चूत को बुऱके में चोदुँगा!”

रमेश के मुँह से ये बात सुनकर मैं और जोश में आ गयी और नकाब डाल लिया। उसने एक कुर्सी ली और उस पर बैठ गया और बोला, “शबाना इज़्ज़त शरीफ! अब अच्छे से बैठ कर मेरे हिंदू लंड को अपने रसीले मुँह से चूसो!” मैं उसके सामने बैठ गयी और नकाब हटा कर उसके काले अनकटे लंड को अपने होंठों में ले लिया। अजीब मज़ा आ रहा था मुझे। मैं रमेश के लंड को अपने होंठों से चूस रही थी और मेरे दोनों मम्मे उसके घुटनों से दब रहे थे। उसने मेरा सर अपने लंड पर दबाया और उसका सारा हिंदू लंड मेरे मुँह में चला गया। मेरी नाक उसके लंड की झाँटों घुस गयी। रमेश मेरे गालों को सहलाने लगा। लंड चूसते हुए मैंने जब उसकी आँखों में देखा तो उसने शरारत से कहा, “क्यों मेरी शबाना इज़्ज़त शरीफ! कैसा लग रहा है मेरा हिंदू लंड तेरे रसीले मुँह में?” मैंने लंड चूसते हुए “हाँ” का इशारा किया। अब वो कुर्सी से उठा और खड़ा हो गया और मेरा सर पकड़ कर मेरे मुँह में चोदने लगा। मेरे होंठ काफी मुलायम और रसीले हैं। रमेश को बहुत मज़ा आ रहा था शायद। वो मेरे मुँह को ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगा। फिर अपना काला लंड मेरे मुँह से बाहर निकाला और मुझे नीचे लिटा दिया। अब रमेश अपने कपड़े उतारने लगा और देखते ही देखते रमेश नंगा हो गया और उसका हिंदू लंड झाँटों से भरा मेरी तरफ़ देखते हुए इतरा रहा था।

अब वो नंगा होकर मुझे बुऱके पर से लिपटने लगा। नंगा काला हिंदू बदन मेरे शादीशुदा इज़्ज़त वाले बदन को बे-इज़्ज़त कर रहा था। रमेश ने दोनों हाथों से मेरे दोनों बूब्स पकड़ कर कहा, “साली तू तो मस्त माल है…! किसने बड़े किये इतने तेरे बूब्स?” मैंने थोड़ा शरमाते हुए कहा कि, “कौन करेगा! शौहर तो कुछ करता है नहीं तो खुद ही मसल-मसल कर बड़े किये हैं… शौहर के अलावा आज पहली बार किसी गैर मर्द ने छुआ है मुझे!” ये सुनते ही रमेश ने अपने लंड से मेरी चूत के ऊपर धक्का दिया और बोला, “आज अपनी मुस्लिम जवान शादीशुदा चूत में मेरा हिंदू अनकटा लंड लेगी शबाना?” मैंने भी शरारती होकर रमेश का हिंदू लंड अपने मेहंदी लगे हुए हाथ में पकड़ कर कहा, “रोज़ तो जब मैं गली से जाती थी तो सिर्फ बातें बनाता था… ये अपना हिंदू लंड दिखाता क्यों नहीं था मुझे?” रमेश ने मेरे बुऱके के ऊपर के दो बटन खोले और मेरी कमीज़ को नीचे करके मेरा एक गोरा मम्मा बाहर निकाला और बोला, “तू भी तो अपना ये मुस्लिम बूब छुपा कर बस नज़रों के तीर चला कर जाती है रोज़ मेरी शबाना रंडी!”

अब रमेश मेरे बाहर निकले एक नंगे मम्मे पर अपना लंड ले आया और अपने लंड से हल्के से मारते हुए मेरे मम्मे के निप्पल को अपने हिंदू लंड के सुपाड़े से छेड़ने लगा और शरारत भारी नज़रों से मुझे देखने लगा। मैं भी हल्के से मुस्कुराते हुए अपनी ज़ुबान होंठों पर फेरने लगी और उसके लंड की तरफ़ इशारा किया। वो अपना काला लंड मेरे होंठों के पास लाने लगा तो मैंने शरारत में उसके लंड पर थूक दिया। रमेश थोड़ा सा मुस्कुराया और वापस लंड मेरे मम्मे पर रख कर उस पर ठोकने लगा। अब मेरे मम्मे पर मेरा थूक और रमेश का थूक लगा हुआ था। मेरे बूब्स को रमेश हल्के से अपने लंड से मारता रहा और फिर दोबारा अपने लंड पर थूक कर मेरे मुँह के पास ले आया। मैंने बिना हिचकिचाये उसका लंड अपने होंठों में ले लिया और उसकी तरफ़ देख कर मज़े से चूसने लगी।

रमेश ने मस्त नज़रों से मुझे देखा और कहा, “साली छिनाल इतनी अदायें कहाँ से सीखी तूने? बुऱके में तो काफी शरीफ बनकर जाती है मेरी रंडी!” मैंने रमेश का लंड अपने मुँह से निकाला और कहा, “कितनी बार मैंने चाहा कि मैं तेरे इस हिंदू लंड से अपनी प्यासी मुस्लिम चूत को चुदवाऊँ मगर डर लगता था क्योंकि मैं शादीशुदा हूँ रमेश!” ये सुनकर रमेश ने मेरे बुऱके के सारे बटन खोल दिये और मेरी कमीज़ को और नीचे करके मेरे दोनों मुस्लिम मम्मे कमीज़ से आज़ाद कर दिये। मेरे बूब्स काफी उभरे हुए नज़र आ रहे थे। अब रमेश बारी-बारी से मेरे दोनों बूब्स के निप्पलों को चूस-चूस कर गीला कर रहा था और चूसते हुए मेरी तरफ़ देख कर बोला, “तेरे बूब्स पर मेरा थूक मेरी शबाना रंडी!” मेरा बुऱका खुला हुआ था। अब रमेश ने मेरी कमीज़ ऊपर करके मेरी सफ़ेद सलवार पर से मेरी चूत पर हाथ रख कर कहा, “शबाना इज़्ज़त शरीफ की चूत को आज क्या चाहिये?” मैंने रमेश की आँखों में देख कर कहा, “आज अपना हिंदू पानी मेरी शादीशुदा चूत में डाल कर मेरी चूत की प्यास बुझा दे रमेश!” इस कहानी का मूल शीर्षक “शबाना की चुदाई” है।

अब रमेश मेरी सलवार का नाड़ा अपने मुँह से खोलने लगा और मेरी सलवार को मेरी टाँगों और सैंडलों से नीचे खींच कर उतार दिया और मेरे गोरे बदन पर मेरी लाल रंग की छोटी सी पैंटी को देख कर बोला, “आह साली छिनाल! राँड तेरा फिगर तो बहुत मस्त है शबाना रंडी! इतने दिन बुऱके में छुपया क्यों तूने मेरी छिनाल!” मैंने रमेश का अनकटा हिंदू लंड पकड़ कर दबाते हुए कहा, “आज अपने इस हिंदू लंड से शबाना इज़्ज़त शरीफ की चूत को चोद कर मुझे राँड बना दे रमेश!” रमेश ने मेरी पैंटी पर से सहलना शुरू किया और गंदी नज़रों से मेरी तरफ़ देखने लगा। फिर आहिस्ता से मेरी पैंटी में रमेश का हाथ जाने लगा। मैं गौर से देखने लगी कि एक हिंदू का हाथ मेरी शादीशुदा प्यासी चूत पर जा रहा है। रमेश अब एक हाथ से मेरा एक मम्मा और दूसरा हाथ पैंटी में डाले हुए था और आहिस्ता-आहिस्ता मेरी प्यासी शादीशुदा चूत को अपने हाथों से सहलाने लगा। मैं रमेश की आँखों में देखने लगी। रमेश ने अपने लंड की तरफ़ इशारा किया और हल्के से बोला, “छिनाल शबाना!” मैंने रमेश का लंड अपने हाथ में ले लिया और उसे दबाने लगी और दूसरे हाथ से रमेश के गेंदों को सहलाने लगी। अब रमेश मेरी मुस्लिम चूत को सहलाने लगा और मेरे दोनों मम्मों को बारी बारी दबाते हुए मेरी प्यासी चूत को सहलाने लगा। मेरी चूत पर जैसे किसी ने अंगार रख दिया हो। रमेश का गरम हाथ मेरी मखमली चूत पर आग लगा रहा था।

मैं आधी नंगी, कमीज़ से बूब्स बाहर निकाले हुए थी और रमेश का लंड मेरे हाथों में था। रमेश मेरी इज़्ज़त से खेल रहा था और मैं उसके हिंदू लंड और गेंदों से खेल रही थी। अब मेरी चूत बेहद गीली हो गयी थी और रमेश के हाथों को गीलापन लगने लगा। उसने अपना गीला हाथ मेरी चूत से निकाला और मेरे बूब्स पर लगा दिया और कहने लगा, “अब मैं तेरी चूत को हिंदू लंड से चोद कर तेरी प्यास बुझाऊँगा मेरी शबाना इज़्ज़त शरीफ रंडी!” मेरा पूरा नाम जैसे मेरे जिस्म में आग लगा रहा था। मैंने भी जोश में आकर कहा, “आज मैं भी अपनी शरीफ शादीशुदा चूत को तेरे हिंदू लंड से चुदवा कर ही साँस लूँगी रमेश!” अब रमेश ने मेरी पैंटी पर से चूत को किस किया और अपने होंठों से पैंटी उतारने लगा। मैं रमेश की आँखों में देख रही थी और वो मुझे देखते हुए मेरी मुस्लिम चूत नंगी कर रहा था। मेरी चूत ऐसे नंगी हो रही थी जैसे मेरे चेहरे से नकाब उतर रही हो। जैसे ही मेरी चूत पैंटी से बाहर आयी रमेश ने कहा, “हाय राम! क्या मस्त है ये मुस्लिम चूत!” और मेरी पैंटी नीचे मेरे सैंडलों तक खिसका कर उतार दी और अपने होंठ पहले मेरे होंठों से लगाये और चूसते हुए बोला, “मेरी रंडी शबाना! तेरी चूत के होंठों को भी ऐसे ही चूसुँगा” और मेरे बूब्स के बीच से अपनी ज़ुबान चूत की तरफ़ ले जाने लगा।

मैंने अभी भी कमीज़ पहनी हुई थी मगर बूब्स बाहर थे। अब रमेश ने मेरी कमीज़ को ऊपर करके मेरा पेट भी नंगा कर दिया। मैंने कहा, “रमेश मेरी कमीज़ भी उतार दे।” लेकिन वो मेरी चूत की तरफ़ चला गया और मेरी चिकनी बिना बालों वाली चूत पर अपने हिंदू होंठों से चूमने लगा। अब मेरी चूत पर रमेश के होंठों की आग थी। मैं सिसकियाँ भरते हुए रमेश के सर को सहलाने लगी और प्यासी चूत पर रमेश का सर दबाने लगी। मेरी चूत पर रमेश थूकने लगा और ज़ोर-ज़ोर से चूत को चूसता जा रहा था। मैं नशे में उसका सर दबाते हुए बोली, “रमेश! आज चूस कर ही बच्चा पैदा करेगा क्या मेरे हिंदू राजा! अपने जवान काले लंड से भी तो चोद! अब बर्दाश्त नहीं होता!” रमेश ने मेरी मुस्लिम चूत से अपने होंठ हटाये और मेरे होंठों पर रख दिये। मैं रमेश के होंठों को ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगी। नीचे से रमेश का अनकटा हिंदू लंड मेरी चूत पर बार-बार लग कर दस्तक से रहा था। शायद उसका लंड कह रहा था कि अब रंडी बनने का वक्त आ गया। उसके लंड की झाँटें जब मेरी चूत को चुभती तो अजीब सा लगता।

अब रमेश ने मेरे बुऱके को उतार कर चादर बना दी और उस पर लिटा दिया और मेरी कमीज़ उतार कर मेरे जवान जिस्म को नंगा कर दिया। अब मैं रमेश के सामने बिल्कुल नंगी लेटी हुई थी। बस कलाइयों में चूड़ियाँ और पैरों में सफेद रंग के ऊँची हील वाले सेंडल थे। अब रमेश मेरी दोनों टाँगों के बीच अपना लंड सहलाता हुआ घुटनों के बल बैठ गया और मेरी तरफ़ देख कर बोला, “बनेगी मेरे हिंदू लंड की राँड मेरी शबाना?” रमेश का लंड देख कर मेरे मुँह में पानी आ रहा था। मेरी चूत तो जैसे खुल कर उसका लंड लेना चाहती थी। केले और मोमबत्तियों जैसी बेजान चीज़ें ले-ले कर असली लंड के लिये तरस गयी थी। मैंने अपनी दोनों टाँगें फैलाते हुए कहा, “आज हिंदू लंड से मेरी मुस्लिम चूत पर हमला बोल दे और मेरे गोरे जवान शादीशुदा जिस्म को अपने हिंदू बदन से फूल की तरह खिला दे!”

रमेश ने मेरा मेहंदी से भरा हाथ पकड़ा और उस पर किस करके मेरे हाथ में अपना आठ इंच का लंड दे दिया और बोला, “शबाना रंडी! तुझे ज्यादा तजुर्बा है तो तू ही राह दिखा!” और वो मेरे ऊपर आ गया। मैं रमेश का लंड अपने हाथ में लेकर अपनी शादीशुदा प्यासी मुस्लिम चूत जो हमेशा बुऱके में रहती थी उसका रास्ता बताने लगी। रमेश का लंड मेरे हाथ में फूल रहा था और चूत के इर्द गिर्द जैसे जगह ढूँढ रहा हो। अब मैंने अपनी चूत के दरवाजे पर रमेश का बालों से भरा अनकटा लंड जमाया और रमेश को देख कर कहा, “शबाना इज़्ज़त शरीफ की शादीशुदा मुस्लिम चूत के दरवाजे पर तेरे अनकटे हिंदू लंड का सुपाड़ा तैयार है रमेश!” रमेश मेरी आँखों में भूखे कुत्ते की तरह देखते हुए अपने लंड का सुपाड़ा मेरी शादीशुदा इज़्ज़तदार चूत में घुसेड़ने लगा। मैं भी उसकी आँखों में देखते हुए उसके हिंदू लंड के सुपाड़े को अंदर लेने की ख्वाहिश जता रही थी। रमेश का लंड थोड़ा- थोड़ा करके मेरी इज़्ज़त को चोद रहा था। मैं रमेश की पीठ पर अब अपने हाथ से उसके जिस्म को अपनी तरफ़ खींचने लगी। रमेश का आधा लंड मेरी गोरी मुस्लिम चूत में था और वो मेरी आँखों में मुसलसल देख रहा था और मैं उसके हिंदू लंड को अपनी चूत में लेते हुए अपने चेहरे से ज़ाहिर कर रही थी कि “और डाल अपना लंड और मेरी चूत के अतराफ़ अपनी झाँटें गड़ा दे।”

रमेश ने अपना लंड थोड़ा सा पीछे किया और मेरी आँख मिलाते हुए बोला, “छिनाऽऽल राँऽऽड आज मैं तेरी चूत का भोंसड़ा बना दुँगा!” मैं भी रमेश के लंड के जज़्बे भरे झटके का इंतज़ार करते हुए बोली, “बना दे भोंसड़ा मेरी चूत का रमेश! साली बहुत दिन से चुदासी है!” फिर मेरी आँखों में घूरते हुए रमेश ने एक ज़ोरदार झटका लगाया और मेरी चूत को चीरता हुआ मेरी चूत की आखिरी हद तक दाखिल हो गया और अपने हिंदू लंड की झाँटों से मेरी चूत को ढक दिया। मेरे मुँह से एक ज़ोर की हिचकी निकली और फिर चींखते हुए मेरे मुँह से निकला, “हाय अल्लाह! उफ़्फ़ रमेशऽऽऽऽ!” रमेश मेरी आवाज़ में अपनी आवाज़ मिलाते हुए चींखा, “साऽऽली राँऽऽड तेरी चूत में मेरा हिंदू लंडऽऽऽ!” रमेश के करारे झटके से मानो मेरा जिस्म उसके हिंदू लंड के नीचे पिसा जा रहा था। मैं उसके झटके से बेहाल थी। मुझे लगा कि जैसे मेरी सील हकीकत में आज ही टुटी थी क्योंकि आज तक मेरी चूत में इतनी हद तक इस तरह कोई लंड नहीं गया था। बस केले, बैंगन जैसी बेजान चीज़ें ही इस हद तक मेरी चूत में घुसी थीं।

मैंने अपने हाथ रमेश की पीठ से हटाये और रमेश के दोनों चूतड़ों को पकड़ कर कहा, “अभी कुछ देर ऐसे ही रहो मेरे हिंदू राजा!” अब हिंदू नंगा बदन मेरे जवान खूबसुरत नंगे बदन पर था। मेरे बड़े-बड़े गोल बूब्स रमेश के सीने से दब रहे थे। रमेश ने अपनी ज़ुबान निकाली और मेरे होंठों में दे दी। मैं रमेश का लंड अपनी चूत में लिये हुए उसकी ज़ुबान चूसने लगी और साथ ही साथ उसके चूतड़ दबाने लगी। रमेश अब थोड़ा सा ऊपर उठा तो मेरे बूब्स से उसका सीना थोड़ा सा अलग हुआ। उफ़्फ़ खुदा! मैं अब अपनी चूत में रमेश के लंड को घुसे हुए देख रही थी। तमाम लंड मेरी चूत में था और मैं ये देख कर हल्के से मुस्कुराने लगी। मैं अभी गौर से अपनी चूत में घुसे हुए काले लंड को देख ही रही थी कि रमेश ने शरारत से मेरी चूत पर अपने लंड का ज़ोर लगाया और मेरी चूत को दबाने लगा।

मैंने रमेश के चूतड़ दबाते हुए कहा, “क्यों जनाब! कैसी लगी मेरी चूत की आरामगाह तुम्हारे इस जवान हिंदू लंड को?” रमेश ने अपने लंड का ज़ोर कसा और कहा, “तेरी मस्त मुस्लिम चूत में मेरे हिंदू लंड की ही जगह है मेरी रंडी शहज़ादी!” और कहते हुए मेरी चूत से आधा लंड निकाला और फिर झटके से अंदर ठोक दिया। अब दूसरे झटके से मैंने बेखौफ होकर कहा, “तो अब इंतज़ार किस बात का है हिंदू लंड को… रास्ता तो बन ही चुका है… अब आना-जाना ज़ारी रखो मेरे राजा!” और मैं रमेश के चूतड़ों को दबाने लगी। रमेश अब मेरी टाइट चूत में अपना मोटा काला मूसल जैसा हिंदू लंड चोदने लगा और मेरी चूत के रसीले होंठों को खोल कर अपना लंड अंदर बाहर करने लगा। मैं मज़े से उसके लंड को खुशामदीद कहती हुई अपनी चूत के प्यासे होंठों से चूसने लगी। रमेश के मुसलसल झटके मेरी शादीशुदा चूत की इज़्ज़त की धज्जियाँ बिखेर रहे थे।

रमेश अब पूरे जोश में मेरे बूब्स चूसने लगा और लगातार अपने झटके लगाने लगा। मैं भी अपनी प्यासी चूत को उसके कड़क काले लंड के हवाले करके मज़े ले रही थी। मुझे बेतहाशा चोदते हुए उसके मुँह से गालियाँ निकालने लगी, “साली शबाना रंडी! ले मेरा लंड अपनी चूत में और ले साली छिनाऽऽल!” मैं भी चुदते हुए बोल रही थी, “आह चोद मेरी चूत को अपने मोटे लंड से रमेश! फाड़ डाल मेरी चूत को चोद मेरी जान, अपनी जवानी का सारा पानी मेरी प्यासी शादीशुदा चूत में डाल दे मेरे राजाऽऽऽ…!” मेरी बातों से रमेश का ज़ोर बढ़ता जा रहा था और वो मुझे एक बाज़ारू औरत की तरह चोद रहा था। मेरी चूत अब तक कम से कम चार बार पानी छोड़ चुकी थी और हर बार मेरा जिस्म ऐंठ कर सूखे पत्ते की तरह फड़फड़ा जाता।

फिर अचानक मुझे महसूस हुआ के कुछ अजीब सा मेरी चूत में कुछ हुआ है। हाय खुदा। ये तो रमेश के हिंदू लंड का पानी था। रमेश ने अपने होंठ मेरे मम्मों से हटाये और मेरी आँखों में देखने लगा और गुस्से भरे झटके देने लगा। मैंने भी उसकी आँखों में देख कर इकरार किया कि मैं भी यही चाहती थी कि उसके लंड का पानी मेरी प्यासी मुस्ल्म चूत में हो! मेरी चूत की प्यास मानो रमेश ने अपने हिंदू लंड के पानी से बुझा दी। मैंने अपनी दोनों टाँगें रमेश के चूतड़ पर कसकर उसका सारा पानी अपनी प्यासी चूत में ले लिया और रमेश अपना सीना मेरे बूब्स पर दबाता हुआ मेरे जिस्म से लिपट गया। हाय अल्लाह! मैं अजीब सा महसूस कर रही थी। अब रमेश का सारा पानी निकल चुका था और वो मेरे जिस्म के ऊपर ठंडा हो गया और मैं उसके चूतड़ों पर हल्के से हाथ फेर रही थी। ज़िंदगी में पहली दफा मुझे चुदाई का असली मज़ा मिला था।

रमेश ने कहा, “अब तेरी मुस्लिम चूत पूरी तरह से आज़ाद है शबाना इज़्ज़त शरीफ! आज मेरे लंड ने तेरी इज़्ज़तदार शादीशुदा चूत को चोद कर तुझे राँड बना दिया।” मैंने रमेश के चूतड़ों को शरारत से दबाया और कहा, “तुम्हारे लंड को मेरा सलाम मेरे हिंदू राजा! जिसने मेरी इज़्ज़त को अपने हिंदू जज़्बे से चोद कर मुझे मज़े दिये!”

अब रमेश उठा और मेरी चूत से लंड निकाला। मैंने रमेश का लंड अपने नकाब से साफ़ किया और रमेश के अनकटे काले लंड के अपने होंठों से किस किया। रमेश मेरी जिस्म को देखता हुआ कपड़े पहनने लगा और मैं भी कपड़े पहनने लगी। दोनों ने कपड़े पहने और रमेश ने मेरे बुऱके का नकाब उठाया और बोला, “ये निशानी है मेरे पास कि तूने मेरा लंड चूसा है!” और अपनी जेब में रख लिया। अचानक मुझे लगा कि मेरे शौहर ने मुझे पुकारा! मैंने जल्दी से रमेश को कहा कि “अब मुझे इजाज़त दो” और मैंने झुक कर रमेश को सलाम किया। रमेश ने मेरा सर थोड़ा सा झुका कर अपनी पैंट पर ले गया। मैंने उसकी पैंट पर से उसके लंड को किस किया और फिर रमेश ने मेरा एक बूब और चूतड़ पकड़ कर मुझे किस किया और जाते हुए बोला, “अपनी चूत का खयाल रखना!” मैंने भी अपनी कमीज़ उठा कर सलवार के ऊपर से चूत पर हाथ रखा और कहा, “तेरी अमानत है रमेश! जैसे चाहे इस्तेमाल कर मेरे हिंदू चुदक्कड़!” जाते-जाते रमेश ने हाथों से चुदाई का इशारा किया और मैं हंसते हुए सीढ़ियों का दरवाजा खोल कर नीचे चली गयी। मेरा शौहर असलम अभी भी नशे में धुत्त सोफे पर पड़ा खर्राटे मार रहा था। इस कहानी का मूल शीर्षक “शबाना की चुदाई” है।

उस दिन के बाद तो मैं रमेश के हिंदू अनकटे लण्ड से अक्सर चुदवाने लगी। उसकी रखैल जैसी बन गयी थी मैं। वो भी मुझे शराब पिला-पिला कर बाज़ारू राँड की तरह चोदता था। मैं उसके लण्ड की इस कदर दीवानी हो गयी थी की अपनी पाकिज़ा गाँड भी उसे सौंप दी। दिन में जब मेरा शौहर दफ़्तर में होता तो रमेश मेरे बिस्तर में मुझे चोद रहा होता था। कईं बार तो असलम घर में नशे में चूर सो रहा होता था और मैं छत्त पर पानी की टंकी के पीछे रमेश का अनकटा लण्ड चूत में ले कर मज़े लूटती। असलम को इस बात की कभी शक नहीं हुआ कि उसकी नाक के नीचे ही मैं दिन-रात एक हिंदू गैर-मर्द के साथ अपनी चूत और गाँड मरवा कर इज़्ज़त निलाम कर रही हूँ।

रमेश के अनकटे लण्ड से अपनी चूत चुदवाते हुए दो साल निकल गये। एक दिन शौहर असलम इज़्ज़त शरीफ के साथ मैं कुछ खरीददारी करने गयी। वैसे तो हम कभी-कभार ही साथ में बाहर जाते थे लेकिन उस दिन असलम मियाँ को रिश्वत में कहीं से मोटी रकम मिली थी और वो काफी खूश और खर्चा करने के मूड में थे। मैंने भी पूरा फायदा उठाया और अपने लिये खूब खरीददारी की और शौहर असलम शरीफ ने भी कोई आनाकानी नहीं की। आखिर में मेरे लिये सेन्डल खरीदने हम लेडीज़ जूतों के शो-रूम में पहुँचे। वहाँ दुकान का मालिक और एक असिसटेंट मौजूद था।

मेरे शौहर तो हमेशा की तरह दुकान के काऊँटर के पास ही सोफे पर बैठ गये क्योंकि उन्हें तो मेरे कपड़े-लत्ते सैंडल वगैरह पसंद करने में कोई दिल्चस्पी थी ही नहीं। दुकान का असिसटेंट सैंडलों के डब्बे निकाल- निकाल कर लाने लगा और दुकान का मालिक मेरे पैरों में बहुत ही इत्मिनान से नये-नये सैंडल पहना कर दिखाने लगा। मैंने बुऱका पहना हुआ था और हमेशा की तरह नकाब हटा रखी थी। दुकान का मालिक बुऱके में से ही मेरे उभरे हुए ३६-सी के मम्मे और ३८ की गाँड को लुच्ची नज़रों से घूर रहा था और सैंडल पहनाते हुए मेरे गोरे-नर्म पैर सहला रहा था। मुझे भी उसकी इस हरकत से मज़ा आ रहा था और मेरी चुप्पी से उसकी हिम्मत और बढ़ गयी। वो बहुत ही प्यार से मेरे पैरों में सैंडल पहनाते हुए पैरों से ऊपर मेरी टाँगों को भी छूने लगा। बीच-बीच में सेल्ज़मन्शिप के बहाने मेरी तारीफ भी कर देता, “ये वाली सैंडल में तो आप करीना-कपूर लगेंगी… ये पाँच इंच की पेंसिल हील के सैंडल तो आपके खूबसूरत पैरों में कितने जंच रहे हैं…!” मैं एक जोड़ी सैंडल खरीदने आयी थी और अब तक दो जोड़ी पसंद करके अलग रखवा चुकी थी।

दुकान के मालिक की पैंट में से उसके लण्ड का उभार मुझे नज़र आने लगा था। उसकी हरकतों और बातों से मेरी चूत भी रिसने लगी थी। रमेश के लंड से चुदवाते-चुदवाते मैं भी ठरकी और बे-शर्म हो गयी थी लेकिन शौहर की मौजूदगी का भी एहसास था। इसी बीच में दुकान के मालिक ने एक सैंडल पहनाते हुए मेरा पैर अपने लंड के उभार पर रख दिया तो मैंने भी शरारत से सैंडल उसके लंड पर दबा दी। उसने सिर उठा कर मेरी तरफ देखा तो मैं धीरे से मुस्कुरा दी। आखिर में मैंने चार जोड़ी ऊँची हील वाली सैंडलें पसंद किये और दुकान मालिक के साथ बाहर काऊँटर पर आ गयी।

“बेगम ले ली आपने सैंडल!” शौहर का मिजाज़ कुछ उखड़ा हुआ सा लग रहा था पर मैंने ज्यादा त्वज्जो नहीं दी और दुकान के मालिक के हाथों में मौजूद डब्बों की तरफ इशारा करते हुए कहा, “हाँ… मुझे पसंद आ गयीं तो चार जोड़ी ले लीं!” शौहर ने दुकन मालिक से पूछा, “कितने पैसे हुए?” तो दुकान मालिक ने बताया “नौ हज़ार तीन सौ पचास! बहुत ही हाई-क्लास पसंद है मोहतरमा की!” मेरे शौहर ने पैसे निकाल कर उसे दिये और इतने में मेरा मोबाइल फोन बजने लगा तो मैं अपनी सहेली असमा से बात करने लगी। इतने में मुझे एहसास हुआ कि मेरे शौहर और दुकान मालिक में झगड़ा शुरू हो गया है। मैंने जल्दी से मोबाइल बंद किया और शौहर को समझाते हुए बोली कि, “महंगे हैं तो एक जोड़ी कम कर देती हूँ!”

लेकिन वो झगड़ा पैसे का नहीं बल्कि इस बात का था कि मेरे शौहर ने दुकान मालिक को मेरे बुऱके में से मेरे जिस्म को मज़े लेकर घुरते हुए देख लिया था। मेरे शौहर असलम शरीफ चिल्लाते हुए दुकान मालिक को औरतों के साथ तमीज़ से पेश आने की बात कह रहे थे। अब दुकान मालिक काऊँटर छोड़ कर बाहर आ गया और दोनों एक दूसरे को धक्का देने लगे लेकिन वो दुकानदार काफी तगड़ा था। उसने शौहर असलम को इतनी ज़ोर से धक्का दिया के वो ज़मीन पर गिर गये।

वो दुकानदार फिर से शौहर को मारने के लिये आगे बढ़ा पर मैं बीच में आ गयी और वो मेरे जिस्म से टकरा गया। मेरे बीच में होने की वजह से मेरे बुऱके में उभरी हुई गोल मखमली चूचियाँ उस दुकानदार से कईं बार टकरा कर दब गयीं। फिर मैंने मिन्नतें की तब जाकर दुकानदार ने कहा, “ले जाओ मोहतरमा इस साले को वरना इसकी गाँड पर इतना मारुँगा कि साला फिर पतलून कभी नहीं पहन सकेगा।”

शौहर असलम को गुस्सा करते हुए मैं बाहर ले जाने लगी। जैसे ही दरवाजे से उनको बाहर किया और मैं भी सैंडलों की थैलियाँ ले कर बाहर जाने वाली थी कि दुकानदार ने ज़ोर से मेरे चूतड़ों को दबा दिया। “ऊँह अल्लाहऽऽ!” मेरे मुँह से निकला और मैं बाहर आ गयी और भूरी नशीली आँखों से पलट कर दुकानदार को देखकर शरारत से मुस्कुरा दी। फिर शौहर को लेकर घरगर आ गयी। इस कहानी का मूल शीर्षक “शबाना की चुदाई” है।

इस वाक्ये के बाद दो हफ़्ते गुज़रे थे कि एक दिन सुबह-सुबह मैं नहाने के बाद गीले कपड़े सुखाने छत्त पर गयी। अचानक मेरी नज़र अपनी बगल वाले मकान की छत्त पर पढ़ी। अरे ये क्या! इस मकान में तो दो-तीन सालों से कोई नहीं रहता था। अब ये कौन एक मर्द जिस्म पर धागा बाँधे और सिर्फ़ धोती पहने मेरी तरफ़ पीठ किये हुए सूर्य नमस्कार कर रहा है। मैं कुछ देर खड़े होकर कपड़े सुखाते हुए उसे देखने लगी लेकिन जब वो मेरी तरफ़ पलटा तो हैरत की कोइ इंतेहा नहीं थी। ये तो वही दुकानदार था जिसके साथ मेरे शौहर असलम ने झगड़ा किया था और इसने मेरे चूतड़ों को कितनी बेरहमी से दबाया था। मुझे देखकर वो मेरी तरफ़ बढ़ा तो मैं घबरा कर जल्दी से नीचे आ गयी। उधर देखा कि शौहर असलम सो रहे हैं। मैं परेशान थी कि शायद फिर ये कमबख्त शौहर उस दुकानदार से झगड़ा न शुरू कर दे। दूसरी परेशानी ये थी कि अब मुझे छत्त पर रमेश के साथ चुदाई के वक्त एहतियात बरतनी पड़ेगी। दोनों छत्तें सटी हुई थीं और इतने सालों से वो मकान खाली होने की वजह से पुरी प्राइवसी थी और हम बे-खौफ होकर रात को छत्त पर चुदाई करते थे।

दोपहर को मैं शौहर असलम के साथ बुऱका पहने बाहर निकली कि बाजू के मकान से वो दुकानदार भी बाहर निकला और असलम ने उसे देखते ही नज़र फेर ली। मैंने सोचा चलो बला टली कि दोनों ने झगड़ा नहीं किया। वो हिंदू भी अपनी हीरो होंडा हंक बाइक स्टार्ट करके जाने लगा लेकिन जाते-जाते उस हिंदू मर्द ने मेरी तरफ़ देख कर मुँह से किस किया और हंसता हुआ चला गया। उफ़्फ़्फ़ अल्लाह! अब ये क्या! मेरे जिस्म में मिठी सी सिहरन दौड़ गयी और मैं मन ही मन मुस्कुराने लगी।

अगले कुछ दिनों में मैंने देखा कि वो हिंदू मर्द बाजू वाले मकान में अकेला ही रहता है और सुबह जल्दी निकल जाता है और फिर रात को ही वापस आता है। मैंने रमेश को कुछ नहीं बताया और हमारी ऐय्याशी बिना किसी दिक्कत के वैसे ही ज़ारी रही। कुछ दिनों में ईद आ गयी। सुबह-सुबह मैं नहा कर कपड़े सुखाने ऊपर गयी ताकि जल्दी से काम हो जाये और मैं जल्दी से शीर-खोरमा और खाना वगैरह बना लूँ। जैसे ही मैं ऊपर गयी तो बाजू वाली छत्त पर वो हिंदू मर्द मेरी तरफ़ पीठ किये हुए मौजूद था। मुझे लगा कि शायद सूर्य-नमस्कार कर रहा होगा। मुझे जल्दी थी लेकिन फिर भी जाने क्यों मैंने जल्दी नहीं की और उसे देखते हुए आहिस्ता-आहिस्ता कपड़े सुखाने लगी। कुछ लम्हों बाद जब वो पलटा जो मेरी छिनाल मुस्लिम चूत के तो होश उढ़ गये।

वो सूर्य-नमस्कार नहीं बल्कि मेरा ही इंतज़ार कर रहा था। हाथ में एक सैंडल का डब्बा था और धोती से अनकटा हिंदू लंड बाहर निकल कर अकड़ कर खड़ा था। वो खड़े नंगे लंड को लेकर दोनों छत्तों के दर्मियान दीवार के पास आया और मुस्कुराते हुए बोला, “ईद मुबारक! और ये आपके लिये तोहफा… उम्मीद है आपको पसंद आयेंगे!” और वो सैंडल का डब्बा मेरी तरफ बढा दिया। मेरी मुस्लिम भूखी चूत जो शौहर के नकारा छोटे लंड से मायूस और रमेश के हिंदू लण्ड के चुद-चुद कर छिनाल बन गयी थी, अब इस दूसरे हिंदू के खड़े अनकटे बड़े लंड को देख कर जोश खाने लगी। इसके लण्ड की बनावट रमेश के काले अनकटे लण्ड जैसी ही थी लेकिन ये अनकटा लण्ड तो उससे भी मोटा और बड़ा था और काफी गोरा था। मैंने शर्मीले अंदाज़ में उसके लंड को एक बार हसरत से देख कर अपनी नज़रें नीचे कर लीं और उसके हाथ से सैंडल का डब्बा लेते हुए बोली, “शुक्रिया! आपको भी बहुत-बहुत ईद मुबारक!”

उसने लंड को पकड़ कर कहा, “आज दूध का शीर-खोरमा नहीं पिलाओगी मुझे?” मैंने शरारती अंदाज़ में ताना मारते हुए कहा, “आप मेहमान बन कर आओ… फिर पिला दुँगी, बहुत गुस्ताख़ और मग़रूर हैं आप और आपका खड़ा हुआ ये मूसल जैसा मोटा… हाय अल्लाह!” मैं इतना बोल कर हंसते हुए नीचे भाग गयी। मैं नीचे आयी तो शौहर नहाकर तैयार हो रहा था। “बेगम शबाना! जल्दी से टोपी वगैरह दे दो नमाज़ अदा करके आता हूँ!”

मैंने टोपी दी, वो बाहर चला गया और उसके जाते ही मैं ऊपर भाग कर गयी लेकिन वो हिंदू ऊपर नहीं था। फिर मैं नीचे आ गयी और उसके दिये सैंडलों का डब्बा खोल कर देखा। उसमें लाल रंग के ऊँची पेन्सिल हील के बहुत ही खूबसूरत और कीमती सैंडल थे। मैंने वो सैंडल बाहर निकाल कर पहन कर देखे तो बिल्कुल मेरे नाप के थे लेकिन तभी मुझे अपने पैरों में कुछ गीलेपन का एहसास हुआ। मैंने सैंडल उतार कर छू कर देखा तो खुशबू और चिपचिपाहट से पल भर में समझ गयी कि ये उस हिंदू के लण्ड का पानी है। मैंने मुस्कुराते हुए फिर से वो सैंडल पहन लिये और घर के काम में लग गयी। मेरी चूत तो बुरी तरह चुनमुनाने लगी थी।

अल्लाह ने जैसे मेरे मन की बात सुन ली और इतने में रमेश ने घंटी बजायी। “अभी तेरे निखट्टू शौहर को बाहर जाते देखा तो सोचा तुझे और तेरी चूत और गाँड को ईद मुबारक दे दूँ!” कहते हुए उसने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिये। “शुक्रिया मेरे राजा! मेरी चूत भी तेरे लंड को ईद मुबारक देने के लिये बेकरार हो रही थी!” मैंने उसकी पैंट के ऊपर से उसका लण्ड सहलाते हुए कहा। “बस चूत ही बेकरार है और गाँड मेरे लण्ड से गले नहीं लगेगी?” वो मेरे चूतड़ों पर मारते हुए बोला। “रमेश! आज बहुत काम है और शौहर असलम भी नमाज़ अदा करके जल्दी आने वाला है! इस वक्त तो तू सोच ले कि तेरे लण्ड को मेरी चूत से गले मिलना है या गाँड से! वो भी ज़रा जल्दी-जल्दी…” कहते हुए मैंने उसकी पैंट के बटन खोल दिये।

“चलो अभी तो चूत और लण्ड की ही ईद मिलनी कर लेते हैं।” वो बोला और मेरी कमीज़ उतारने लगा। एक दूसरे को चूमते हुए हम दोनों नंगे हो गये। मैंने इस वक्त भी उस दुकानदार से तोहफे में मिले वो लाल सैंडल पहन हुए थे और मेरे पैरों में उसके लण्ड के पानी का गीला और चिपचिपा एहसास मौजूद था। रमेश ने मुझे वहीं ज़मीन पर लिटा दिया और मेरी चूत में अपना काला अनकटा लण्ड पेल कर दनादन चोदने लगा। करीब पंद्रह बीस मिनट तक उसने मुझे खूब चोदा और मेरी चूत ने कईं बार पानी छोड़ा। फिर उसने भी मेरी चूत को अपने लण्ड का शीर-खोरमा पिला दिया।

मैंने उसे जल्दी से रुखसत किया और अपने कपड़े पहन कर रसोई में काम निपटने लगी। मैंने शीर-खोरमा और खाना वैगैर बना लिया और फिर एक बार नहा कर लाल रंग का नया सलवार-कमीज़ पहन लिया और साथ में वही तोहफे में मिले लाल ऊँची हील के सैंडल पहन लिये। कुछ देर बाद असलम की आवाज़ बाहर से आने लगी। शायद किसी से बात कर रहे थे। मैं बाहर गयी और दरवाजा खोल कर देखा तो ये क्या? वो हिंदू दुकानदार मेरे शौहर असलम से बात कर रहा था।

दोनों हंसकर बातें कर रहे थे। मुझे समझ नहीं आया कि ये क्या माजरा है। शौहर की पीठ मेरी तरफ़ थी। मैं पीछे से जैसे ही आयी तो शौहर ने कहा, “बेगम देखो! मैंने और बलराम ने पहले की बातों को भुला दिया है। आज ईद के दिन हमारा झगड़ा खतम!” वो भी शरारती अंदाज़ में आगे बढ़ा और शौहर असलम से बोला, “अब तो गले मिल लो असलम साहब!” और गले मिलते ही उसने मुझे देख कर आँख मारी और अपना हाथ आगे बढ़ा कर मेरी मुस्लिम चूची को नीचे से हल्के से मार कर उछाला और इशारे से उसने आँखें मटकायीं।

मैं समझ गयी कि जो ताना मैंने मारा था ये उसका जवाब है। उफ़्फ़ हिंदू मर्दाना! फिर उसने आँखों से ही मेरे पैरों में उसके लाये सैंडलों की तरफ इशारा किया और आँख मार दी। मैं हंसते हुए उसे देख कर अंदर चली गयी। दोनों अंदर आये और वो भी आकर बैठ गया। “बेगम शबाना बलराम और हमारे लिये शीर-खोरमा लाओ भाई!” शौहर ने हुक्म सुनाया। मैंने भी ओढ़नी सर पर डाली लेकिन उभरे हुए एक मम्मे का नज़ारा खुला रहने दिया।

शीर-खोरमा मैंने पहले शौहर को डाल कर दिया फिर बलराम को शीर-खोरमा डालते हुए चोर नज़र वाले अंदाज़ में मैंने उसे देखा। उसने मेरी झुकी हुई चूची को देखा और अपनी ज़ुबान शरारत से बाहर निकाल दी। मैंने भी दाँतों में अपने होंठ दबाये और उसे अपना शरारती गुस्सा दिखाया। वो थोड़ा हंसा और शौहर की तरफ़ देख कर बोला, “क्या असल्म साहब! आप तो शीर-खोरमा पीने में मसरूफ हो गये, वैसे आपके यहाँ का ये दूधवाला शीर-खोरमा तो राम कसम बहुत मज़ेदार है!” मैं किचन में जाकर पर्दे के पीछे से थोड़ा पर्दा हटाकर शौहर असलम के पीछे से झाँक कर बलराम को देखने लगी। “हाँ जनाब! हमारे यहाँ तो ईद का शीर-खोरमा माशा अल्लाह बहुत मशहूर है!” “हाँ हाँ असलम साहब!” बलराम ने बात मिलाते हुए कहा, “सच कहा आपने! ईद के दिन मुस्लिम घरों में ताज़े दूध को कढ़ा कर उसमें सेंवई और उस पर लाल रंग की स्ट्राबरी सजाकर पेश करते हैं!” और फिर मेरी तरफ़ देख हंस दिया। असलम ने बात काट कर कहा, “अरे जनाब! वो स्ट्राबरी नहीं… वो तो खजूर होता है काला वाला!” बलराम ने असलम के ऊपर मन ही मन में हंसते हुए कहा, “हाँ हाँ वही!” फिर असलम ने कहा कि “चलो खुदा ने आपको हिदायत दी के आप और हम आज ईद के दिन मिल जायें!” बलराम बोला, “सच कहा आपने! मैंने आज सुबह-सुबह ईद का चाँद देखा और फिर मैंने फैसला किया कि आज झगड़ा खतम और देखिये मैं आ गया आपके घर का ये मज़ेदार दूधवाला शीर-खोरमा पीने के लिये असलम साहब!” मैं भी अपने ही आप दिल में हंस रही थी। वो कुछ देर बैठा और चला गया। इस कहानी का मूल शीर्षक “शबाना की चुदाई” है।

फिर कुछ देर बाद कईं लोग ईद मिलने आये और दोपहर के बाद तक घर काफी बिज़ी रहा। जब सब जा चुके तो, असलम गले मिलते मिलते थक चुका था। अब वो बेडरूम में जाकर बोतल खोलकर बैठ गया और मुझे भी बुला लिया, “आओ बेगम शबाना! दो-दो जाम हो जायें इस मुबरक मौके पर!” मैंने देखा कि आज कोई बहुत ही महंगी इंपोर्टेड शराब की बोतल थी जो शायद उसे किसी ने रिश्वत में दी थी। अगले आधे घंटे में मैंने भी दो पैग पी गयी। वाकय में बेहद उमदा शराब थी। शौहर असलम भी इतने में चार-पाँच पैग गटक चुका था। फिर हमेशा की तरह मेरी हसरतों की ज़रा भी परवाह किये बगैर मेरे खुदगर्ज़ नामर्द शौहर ने मुझे अपना लण्ड चूसने का हुक्म दिया। मैंने भी फ़र्ज़ी तौर पर उसका लण्ड चूस कर उसका पानी पिया। फिर मैंने अपने लिये तीसरा पैग ग्लास में डाल लिया और पीने लगी। आमतौर पर मैं दो पैग से ज्यादा नहीं लेती पर शराब माशा अल्लाह बेहद उमदा थी और बलराम के बारे में सोचते-सोचते मैं चौथा पैग भी पी गयी। पहले तो हल्का सा ही सुरूर था पर फिर अचानक तेज़ नशा महसूस होने लगा और मैं हवा में उड़ने लगी। शौहर असलम के भी कुछ ही देर में टुन्न होकर खर्राटे भरने शुरू हो गये।

मैं आज बहुत हसीन लग रही थी। हाथों में मेहंदी, लाल रंग का कीमती सलवार सूट, लाल रंग के ही पैरों में ऊँची पेंसिल हील के खूबसूरत सैंडल और मेरी हसीन मुस्लिम नशीली अदायें! बलराम की आज की हरकत ने मेरी मुस्लिम चूत को पहले ही बहुत जोश दे रखा था। अब शराब के नशे में तो मेरी आँखों के सामने उसका अनकटा गोरा हलब्बी हिंदू लण्ड नाचने लगा और मेरी चूत में चिंगारियाँ उठने लगीं। नशे में झूमती हुई मैं उठी तो चलते हुए ऊँची हील की सैंडल में मेरे कदम लड़खड़ा रहे थे पर मुझे तो कोई होश या परवाह नहीं थी। मैं नशे में झूमती लड़खड़ाती हुई सीढ़ियाँ चढ़ कर ऊपर जाने लगी इस उम्मीद में कि शायद बलराम से छत्त पर मुलाकात हो जाये। लेकिन हाय अल्लाह ये क्या! वो तो पहले से ही मेरे घर की ऊपर वाली सीढ़ियों पर बैठा हुआ था। मैंने नशे में बहकी आवाज़ में कहा, “जनाब पहले से मौजूद हैं! बड़े बेकरार लग रहे हो?” और खिलखिला कर हंस पड़ी।

“मोहतरमा भी खूब नशे में बदमस्त हैं! लगता है शराब की पुरी बोतल ही खाली करके आ रही हैं!” बलराम ने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे ज़ोर से अपनी तरफ़ खींचा तो मैं बलखा कर बलराम की हिंदू गोदी में जा गिरी। उफ़्फ़! बलराम की हिंदू साँसें मेरे मुस्लिम कानों में थीं। मैं बहकी आवाज़ में गाना गुनगुनाने लगी, “थोड़ी सी जो पी ली है… चोरी तो नहीं की है!” फिर मैंने इठलाते हुए नशीली आँखों से बलराम की आँखों में देखा और नशे में फिर हंसने लगी। “शराब से भी ज्यादा तो नशा तो तुम्हारे उस नज़राने ने किया है जो तुमने इन सैंडलों में छिपा कर दिया था! अब तक उसकी मस्त खुशबू मेरे ज़हन में महक रही है!” मैं फिर हंसते हुए बोली। “मैं तो उस दिन दुकान में ही समझ गया था कि तू एक नंबर की मुसल्ली राँड है!” उसने कहा और कमीज़ के ऊपर से मेरा एक मम्मा मसल दिया!

“बेहद पाज़ी हो तुम! वैसे सैंडल हैं बेहद खूबसूरत… हैं भी बहुत कीमती!” मैंने अपना एक पैर उठा कर हवा में हिलाते हुए कहा। “अरे तेरे जैसी हसीना के लिये तो मेरी दुकान में मौजूद हर सैंडल की जोड़ी निसार है!” वो बोला तो मैं फिर हंसते हुए इठला कर बोली, “हाय सच! बेहद शौकीन हूँ मैं ऊँची हील के सैंडलों की! ज़ेवरों से भी ज्यादा… और शौहर की ऊपरी कमाई का बेशतर हिस्सा सैंडल पर खर्च करती हूँ!” उसने भी हंसते हुए कहा, “तू चिंता मत कर! अपनी दुकान समझ और जब चाहे मेरी दुकान पर आकर अपनी पसंद के सैंडल ले जा!”

“सोच लो बलराम जी! लुट जाओगे!” मैंने शरारत से हंसते हुए कहा। नशे में मैं बात-बात पर हंस रही थी। बलराम बोला, “लुटुँगा मैं नहीं बल्कि तेरा शौहर! तेरे शौहर की तो खैर नहीं है आज!” मैंने हल्के से शरारती अंदाज़ में बलराम के सीने पर मार कर कहा, “क्या मतलब है आपका बलराम जी!” वो बोला, “साला हरामी मुझसे झगड़ता है… उसका बदला मैं तेरी मुस्लिम चूत को चोद कर लुँगा! तुझे अपनी रखैल बना लुँगा!”

मैं जोर से हंसी और बोली, “पहले ज़रा शीर-खोरमा तो ले आऊँ… तुम्हें जो ताना मारा था मैंने, तुम्हारी मर्दानगी को पिला ही दुँगी शीर-खोरमा!” मैं बलराम की गोदी से झूमती हुई उठी। “संभल कर जा मुसल्ली राँड! नशे में लुढ़क ना जाना!” मुझे नशे में लहराते देख बलराम हंस कर बोला। मैं भी ज़ोर से खिलखिला कर हंश दी और बोली, “लुढ़क भी गयी तो तुम हो ना मुझे संभालने के लिये!” मैं फिर उसी गाने के टूटे-फूटे से जुमले गुनगुनाती हुई और बीच-बीच में हंसती हुई सीड़ियों की हैंड-रेल पकड़ कर नशे में झूमती लहराती नीचे जाने लगी।

“थोड़ी सी जो पी ली है… चोरी तो… कोई तो संभालो… कहीं हम गिर ना पड़ें…. कैसे ना पियूँ प्यासी ये रात है… कहीं हम गिर ना पड़ें… थोड़ी सी… पी ली…!”

नीचे बेडरूम में झाँक कर देखा तो असलम के खर्राटे अभी भी उरूज पर थे। फिर डगमगाती हुई किचन में जा कर मैंने अबड़-धबड़ किसी तरह शीर-खोरमा कटोरे में डाला क्योंकि नशे में हाथ भी बेतरतीब चल रहे थे। फिर नशे में झूमती लड़खड़ाती हुई ऊपर सीढ़ियों में जाकर बलराम की गोद में जा गिरी और फिर गाँड टिका कर बैठ गयी।

“हाय अल्लाह! ये क्या है?” मैं अचानक चिहुक पड़ी तो वो ज़ोर से हंसा, “तेरी मुस्लिम गाँड और मेरा अनकटा लौड़ा है शबाना राँऽऽड!” मैंने झट से चम्मच भर कर शीर-खोरमा बलराम के मुँह में डाला और बोली, “मेरे हिंदू दिलबर लो पियो अब!” उसे शीर-खोरमा पिलाते हुए बीच-बीच में नशे में लहकते मेरे हाठ से थोड़ा मेरी चूचियों पर भी ढलक जाता था। बलराम ने थोड़ा ही शीर-खोरमा पीया और फिर बोला, “राँड! क्या अब मेरे मुँह में ही डालती रहेगी?” और कहते हुए उसने अपना हिंदू त्रिशूल पैंट से बाहर निकाला और मुझे गोद से उठा कर सीढ़ी पर बिठा दिया। फिर वो कटोरा लेकर मेरे सामने नंगा हिंदू लंड लेकर खड़ा हो गया। उसने चम्मच निकाल कर बाजू में रख दिया और शीर-खुरमे में अपना अनकटा हिंदू लंड डाल दिया। “हाय तौबा ये क्या करा…?” अभी मैं बोल ही रही थी कि बलराम ने अपने लंड को शीर-खुरमे में भिगोया और मेरे मुँह में डाल दिया।

अब तक रमेश के हिंदू लंड से कितनी ही बार उसकी मलाई पी थी मैंने… लेकिन इस तरह लंड से पहली बार इस तरह कुछ पी रही थी थी। मैंने मुस्लिमा अंदाज़ में बलराम के लंड से शीर-खोरमा चूसा और फिर पीते हुए बोली, “शीर-खुरमे से ज़्यादा तो शीर-खुरमे का गोश्त मज़ेदार है!” बलराम ने हंसते हुए फिर से लंड को कटोरे में डाला और मेरे मुँह में दे दिया। “इससे निकलने वाला शीर-खोरमा भी तो मेरे इस शीर-खुरमे से ज्यादा मज़ेदार है!” मैं फिर बोली और वो शीर-खुरमे में अपना लंड डुबो-डुबो कर चुसवाने लगा। उसके अनकटे गोरे हलब्बी लंड का गुलाबी सुपारा भी आलूबुखारे जैसा मोटा था।

फिर बलराम ने अचानक मुझे अपनी मजबूत बाँहों में उठाया और सीढ़ियों से नीचे ले गया। नीचे आकर सीधे मेरे बेडरूम में उसने मुझे सोते हुए शौहर असलम शरीफ के सामने ले जाकर खड़ा कर दिया। उफ़्फ़ खुदा! मेरा शौहर सामने नशे में धुत्त सो रहा है और मैं खुद भी ईद के दिन शराब के नशे की हालत में सजी धजी एक हिंदू मर्द के साथ चिपकी हुई हूँ जिसने अपना अनकटा मोटा हिंदू लंड पैंट से निकल कर खड़ा किया हुआ है। बलराम ने मेरी कमीज़ को नीचे किया और हाथ डाल कर ब्रा में कैद मेरी गोल खूबसुरत बड़ी बड़ी मुस्लिम चूचियों को बाहर निकाला और फिर मेरी कमीज़ ऊपर उठा कर मेरी सलवार का नाड़ा खोल दिया। मेरी सलवार मेरे सोते हुए शौहर के सामने नीचे गिर गयी और मैंने भी अपने सैंडल वाले पैर उसमें से निकाल कर सलवार को ठोकर से एक तरफ खिसका दिया।

बलराम ने मेरी दोनों मुस्लिम चूचियाँ पकड़ कर आहिस्ता से मेरे कान में कहा, “तूने जो ताना मारा था ना… देख अब तेरे ही घर में तेरे ही कटवे मुल्ले के सामने हमेशा बुऱके में छुपे रहने वाले तेरे जिस्म को मैंने नंगा कर दिया!” फिर मेरे कंधे पर दोनों हाथ रख कर मुझे नीचे बिठा दिया और लंड को मेरे चेहरे के आसपास फेरने लगा। मैंने ज़रा सा सहमते हुए अंदाज़ में एक बार शौहर की तरफ़ देखा और फिर बलराम का हिंदू कड़क गदाधारी लंड अपने मुँह में ले लिया और आहिस्ते-आहिस्ते चूसने लगी। मैं बिना सलवार और कमीज़ में से छोटी सी ब्रा में से झाँकती मुस्लिम चूचियाँ बाहर निकाले हुए… खर्राटे मारकर सो रहे शौहर असलम शरीफ के सामने बलराम का हिंदू लंड चूस रही थी।

वैसे तो शौहर के घर में मौजूदगी के वक्त पहले भी रमेश के साथ छत्त पर छिप कर रात-रात भर चुदवाती थी लेकिन शौहर के बिल्कुल सामने इस तरह बलराम का लंड चूसना जोखिम भरा था। मेरे मन में थोड़ा अंदेशा तो था लेकिन बलराम के हिंदू अनकटे लंड की चाहत और शराब के नशे में मैं बिल्कुल बे-हया होकर बलराम का लण्ड चूस रही थी। मैं कभी शौहर को देखती कभी बलराम के हिंदू लंड को चूसते हुए बलराम की आँखों में देखती। जब भी बलराम की आँखों में देखती तो वो मुझे “राँऽऽड! मुल्लनी, हिजाबी रंडी! छिनाल!” जैसी गालियाँ देता हुआ अपने अज़ीम लंड को मेरे मुस्लिम मुँह में घुसेड़ देता।

बलराम ने फिर मुझे उठा कर खड़ा किया। मैं नशे में झूमती हुई उसकी गर्दन में बाँहें डालें उससे चिपक कर खड़ी हो गयी। उसने मेरी कमीज़ को ऊपर से उतार दिया और फिर पैंटी को पहले तो हाथ से मेरे घुटनों तक नीचे खिसकाया और फिर अपने पैर से मेरी पैंटी को बिल्कुल नीचे कर दिया और फिर ब्रा के हूक खोले बगैर उसने ज़ोर से ब्रा खींच कर हुक तोड़ते हुए निकाल दी। मेरे मुँह से हल्के से निकला, “उफ़्फ़ अल्लाह! मर गयी!” अब मैं बस अपने पैरों में बलराम के तोहफे में दिये लाल रंग के ऊँची हील वाले सैंडल पहने हुए बिल्कुल नंगी थी। बलराम ने मुझे उसे नंगा करने का इशारा किया तो मैंने भी नशे में जूझते हाथों से मैंने उसकी शर्ट के कुछ बटन खोले और कुछ तोड़े और शर्ट उतार दी। फिर नंगी बैठ कर उसकी पैंट भी खोल दी। अब बलराम का हिंदू बदन भी नंगा था। मैं बलराम के हट्टे-कट्टे चौड़े हिंदू सीने से अपने मुस्लिम मम्मों रगड़ने लगी।

मुझे थोड़ी प्यास सी महसूस हुई तो मैंने हाथ बढ़ा कर पास ही रखी वो शराब की बोतल उठा ली। उसमें अभी भी थोड़ी शराब बाकी थी। “साली रंडी! पहले ही नशे में इतनी चूर है अब और कितना पियेगी!” मैंने भी बोतल से होंठ लगा कर एक घूँट पिया और फिर दो-तीन गानों के जुमले मिला कर धीरे से उल्टा-सीधा गुनगुनाने लगी, “नशा शराब में होता तो नाचती बोतल… हमें तो है जवानी का नशा… उसपे फिर नशा है तेरे प्यार का…!” और फिर बोतल मुँह से लगाकर पीने लगी। बलराम ने भी मेरी चूचियाँ चूसनी शुरू कर दीं और कुछ देर उसने मेरी मुस्लिम चूचियों को शौहर असलम के सामने ही चूसा। इस कहानी का मूल शीर्षक “शबाना की चुदाई” है।

“साली पियक्कड़ मुसल्ली राँड! नशे में ज्यादा शायराना हो रही है! बाद में तुझे लंड की कुदरती शराब पिलाउँगा आज!” वो मेरे निप्पल अपने दाँतों से कुतरते हुए धीरे से बोला। मैं उसका इशारा कुछ-कुछ समझ गयी थी लेकिन शक दूर करने के लिये पूछा, “तुम्हारा मतलब पे-पेशाब?” वो बोला, “हाँ साली कुत्तिया!” फिर मेरे हाथ से शराब की बोतल ले कर रख दी। “बहुत बड़े अव्वल दर्जे के पाजी हो तुम! अब क्या पेशाब पिलाओगे मुझे!” मैंने शरारती अंदाज़ में गुस्सा दिखाते हुए कहा! “एक बार चख लेगी तो रोज़-रोज़ पियेगी। तेरे जैसी चुदक्कड़ी मुस्लिम राँडें बहुत शौक से पिती हैं!” वो बोला।

फिर इशारे से मुझे बाहर चलने को कहा। मैं झूमती हुई बाहर जाने लगी थी कि उसने पीछे मेरे चूतड़ों को पकड़ कर बेदर्दी से भींच दिया। मैंने पलट कर इशारे से पूछा, “क्या हुआ?” तो कान के पास आकर बलराम ने कहा, “साली शबाना राँड मुल्लनी! तेरी चूत का भोंसड़ा साली! कटेले की पियक्कड़ बीवी! हाथ में लौड़ा पकड़ और फिर बाहर चल हिजाबी कुत्तिया।” हिंदू बलराम का अनकटा बड़ा लंड पकड़ कर मैं नंगी नशे में झूमती डगमगाती कमरे से बाहर आ गयी। बाहर आते ही बलराम ने कमरे का दरवाजा बंद कर दिया और बाहर से कुँडी लगा दी। मेरा नशा और परवान चढ़ने लगा था और मुझे झूमते देख बलराम मुझे सहारा दे कर बाहर दूसरे बेडरूम में ले जाने लगा! मैं भी हिन्दू बलराम के सहारे डगमगा कर चलती हुई उसके हिंदू लंड को लगातार पकड़े हुई थी और दबा रही थी।

दूसरे बेडरूम में पहुँचते ही उसने ज़ोर से मेरी चूची दबायी और बोला, “साली हिजाबी रंडी! तेरी रंडी चूत का चाँद आज मैं ईद के दिन हिंदू हलब्बी लंड से चोदुँगा!” फिर मुझे गोद में उठा कर बेड पर फेंक दिया और मेरी दोनों टाँगें फैला कर खोल दीं। मेरी मुस्लिम चूत का दरवाजा उसके कड़क हिंदू लंड के लिये बेकरारी से खुल गया। बलराम ने मेरी चूत के छेद पर अपना हिंदू लंड रखा और एक ज़ोर के झटके में तमाम गदाधारी हिंदू त्रिशूल लंड मेरी मुस्लिमा चूत में घुसेड़ दिया। मेरी तो जान ही निकल गयी और मुँह से एक चींख निकल गयी, “आआआईईईई मर गयीऽऽऽऽ! अल्लाऽऽह!” बलराम मेरी चूत के अंदर अपना लंड दाखिल करके रुक गया। मेरी आँखें दर्द के मारे फाट गयी थी और मुँह खुला हुआ था। मैं रमेश के आठ इंच लंबे मूसल जैसे हिंदू लंड से चुदने की आदी थी लेकिन बलराम का लण्ड तो उससे भी कहीं ज्यादा अज़ीम था।

फिर कुछ लम्हों के बाद मेरी चूत उसके घोड़े जैसे लंबे-मोटे लंड की आदी हो गयी तो मैंने बलराम की आँखों में देखा और कहा, “कटेले की मुस्लिम बीवी की छिनाल चूत में आपके हिंदू लंड को मैं सलाम करती हूँ! उफ़्फ़ अल्लाह! मेरे हिंदू खसम! मेरे हिंदू महबूब! बलराम जानू! मेरी कुत्तिया बनी हिजाबी रंडी चूत को चोदो मेरे हिंदू दिलबर!” बलराम ने मेरी मुस्लिम चूचियाँ हाथ में पकड़ीं और मेरे मुस्लिम होंठों पर अपने होंठ रख कर उन्हें चूसते हुए अपने हिंदू अनकटे त्रिशूल जैसे लंड को मेरी मुस्लिमा चूत में चोदने लगा। उसका भुजंग मोटा अनकटा हिंदू लंड मेरी मुस्लिमा चूत के होंठों को चीरते हुए अंदर बाहर हो रहा था। मैंने अपने हाथों से बलराम के चूतड़ दबाये हुए थे और मैं हिंदू बलराम के नीचे बुरी तरह चुद रही थी। बलराम ने मेरे होंठों से होंठ अलग किये और मेरी आँखों में देखा और अपना हिंदू गदा जैसा लंड आधा बाहर निकाला और बोला, “साली रंडी! हरामी… मुल्ले कटवे की हिजाबी बीवी! तेरी मुस्लिम चूत का भोंसड़ा!” ये कहते हुए मेरे होंठों पर फिर से होंठ रख कर ज़ोर के झटके मेरी मुस्लिम चूत में मारने लगा।

मेरी दोनों टाँगें हवा में खुली हुई थीं और लाल सैंडल वाले पैरों के तलवे छत्त की तरफ थे। मेरे गोरे जिस्म पर मानो जैसे बलराम का हिंदू बदन हुकुमत कर रहा था। उसके चूतड़ मेरी मुस्लिम चूत चोदने के वक्त कभी मेरे हाथों में उभरते तो जब कभी वो पूरा हिंदू लंड मेरी चूत में डालता तो सिकुड़ जाते। उधर शौहर असलम के खर्राटों की आवाज़ और इधर हिंदू बलराम और मेरी चूत की चुदाई की आवाज़।

फिर बलराम ने मेरी चूत में मुसलसिल झटके मारते हुए मुझसे कहा, “अब तैयार हो जा रंडी छिनाल! तेरी मुसल्ली चूत में हिंदू लंड का पानी गिरने वाला है!” मैंने भी दोनों टाँगें और ज्यादा खोल लीं और बलराम की आँखों में देखने लगी। वो मेरी आँखों में देख कर मेरी मुस्लिमा चूत में अपने अनकटे लंड से ज़ोर-ज़ोर के झटके मारने लगा। अब बलराम का चेहरा हल्का सा लाल होने लगा और वो कुछ गुस्सैले अंदाज़ में मेरी आँखों में देखने लगा। मैंने उसकी आँखों में देखते हुए अपनी मुस्लिमा चूत को उससे चिपकाने की कोशिश की। “राँऽऽऽड मुल्लानीऽऽऽ साऽऽली कटीऽऽली छीनाऽऽल! मुल्ले की राँऽऽऽड बीवी! तेरी मुस्लिमा चूत का मुस्लिम भोंसड़ाऽऽऽ शबानाऽऽ मुस्लिमाऽऽ ले साऽऽली। ले अपनी छिनाल चूत में मेरा पानी! भोंसड़ी की!” कहता हुआ झटकों से मेरी हिजाबी मुसिल्मा चूत में अपना पानी डालने लगा। उफ़्फ़ उसके अनकटे लण्ड का सारा पानी मेरी मुस्लिम चूत में था और एक आखिरी झटके के साथ वो मेरी मुस्लिम चूचियाँ अपने सीने से दबाते हुए मेरे मुस्लिम जिस्म पर लेट गया। फिर कुछ देर मेरी चूत में अपने अनकटे लंड को आराम देकर उसने बाहर निकाला और मेरे ऊपर ही लेटा रहा। मेरे सुर्ख गुलाबी होंठों में अपने मर्दाना होंठ रख कर चूसने लगा। मेरा पूरा गोरा पाक मुस्लिमा जिस्म बलराम के हिंदू मर्दाना बदन के नीचे दबा हुआ था।

फिर उसने बैठ कर अपना हिंदू लंड मेरे चेहरे के सामने ला कर मेरे होंठों पर रख दिया। मैंने शरारत से उसकी आँखों में देखते हुए अपने होंठ खोल कर उसका अनकटा लंड जो कि मेरी चूत और उसके खुद के पानी से सना हुआ था, अपने मुँह में ले लिया। उसके मर्दाना हिंदू लंड में अभी भी काफी सख्ती बरकरार थी। मुझे अपनी चूत और उसके लण्ड के पानी का मिलाजुला स्वाद बहुत ही लज़ीज़ लग रहा था। मेरे चूसने से उसका लण्ड फिर फूलने लगा और उसने झटके मारते हुए मेरा मुँह चोदना शुरू कर दिया।

अचानक उसने अपना लण्ड मेरे मुँह से बाहर निकाला। उसका हिंदू अज़ीम लंड फिर से पूरा सख्त हो कर फूल गया था। “चल साली मुसल्ली राँड! घोड़ी बन जा! अब तेरी मुस्लिमा नवाबी गाँड की धज्जियाँ उड़ाउँगा!” उसने कहा। रमेश अक्सर अपने आठ इंच लंबे मोटे लंड से मेरी नवाबी गाँड मारता था और मुझे भी बेहद मज़ा आता था लेकिन बलराम का लंड तो उससे कहीं ज्यादा लम्बा मोटा था। इसलिये मुझे थोड़ी हिचकिचाहट तो हुई लेकिन इतना अज़ीम अनकटा लण्ड अपनी गाँड में लेने के ख्याल से सनसनी भी महसुस होने लगी। मैंने बलराम को देखते हुए कहा, “नहीं! नहीं! तुम्हारा ये गदाधारी लण्ड-ए-अज़ीम तो मेरी गाँड फाड़ डालेगा!” लेकिन मेरी आवाज़ मुस्तकिल नहीं थी और मेरी आँखों और चेहरे के जज़्बातों से भी बलराम समझ गया कि मैं सिर्फ नखरा कर रही हूँ।

“मुझे पता है मुसल्ली राँड! तेरी मोटी गाँड में भी बहुत खुजली है! एक बार मेरा लंड अपनी छिनाल मुस्लिमा नवाबी गाँड में ले लेगी तो हर रोज़ गाँड मरवाने के लिये भीख माँगेगी!” वो बोला और मुझे बिस्तर से उठाकर ज़मीन पर खड़ा किया और मुझे बिस्तर पर झुकने को कहा। “चल मुसल्ली छिनाल! खड़ी-खड़ी ही बिस्तर पर हाथ रख कर झुक जा!” जैसे ही मैं बिस्तर पर झुकी, बलराम ने मेरे चूतड़ों पर दो-तीन थप्पड़ मारे और फिर मेरी गाँड के छेद पर अपने लंड का गदा जैसा सुपाड़ा टिका दिया और फिर धीरे-धीरे मेरी गाँड में घुसेड़ने लगा।

“आआईईईईऽऽऽ! अल्लाहऽऽऽऽ मर गयी!!!” मैं दर्द बर्दाश्त करते हुए चिल्लायी। उसने बिना तवज्जो दिये मेरी गाँड में अपना खंबे जैसा हिंदू मर्दाना लंड घुसेड़ना ज़ारी रखा। “हायऽऽ अल्लाहऽऽऽ! नहींऽऽऽ अल्लाह!” मेरी आवाज़ दर्द और वासना दोनों मौजूद थीं। दर्द भी इस कदर था कि मैं खुद को छटपटाने से रोक नहीं पा रही थी और तड़प कर ज़ोर-ज़ोर से अपने चूतड़ हिलाने लगी। बलराम ने फिर मेरे चूतड़ों पर थप्पड़ मारे और फिर झुक कर मेरे छटपटाते जिस्म को अपनी मजबूत बाँह में कस कर पकड़ लिया और अपना बाकी का हिंदू ना-कटा लंड मेरी गाँड में ढकेलने लगा।

धीरे-धीरे मेरा दर्द काफूर होने लगा और मुझे और मज़ा आने लगा। मेरी गाँड बलराम के हिंदू लण्ड पर चिपक कर कस गयी और मैं उसके नीचे दबी हुई उसका लंड अपनी गाँड में और अंदर लेने की कोशिश में अपने चूतड़ उछालने लगी। कुछ ही लम्हों में उसका तमाम लण्ड मेरी गाँड में दाखिल हो गया। अब बलराम ज़ोर-ज़ोर से झटके मारने लगा और उसके मर्दाना पुट्ठे मेरे चूतड़ों पर टकराने लगे। “चोदो मेरे हिंदू राजा! मेरी मुस्लिमा नवाबी गाँड में अपना शाही लण्ड ज़ोर-ज़ोर से चोदो!” मैं मस्ती में बोलते हुए अपने चूतड़ हिलाने लगी। बलराम अब इतनी ज़ोर-ज़ोर से झटके मार कर अपना लण्ड मेरी छिनाल कसी हुई नवाबी गाँड में पेल रहा था कि मैं ऊँची हील के सैंडल में अपने पैरों पर खड़ी नहीं रह सकी और अपने पैर और टाँगें ज़मीन से हवा में उठा कर बिस्तर पर पेट के बल सपाट झुक गयी। अब मेरी चूत भी नीचे से बिस्तर पर रगड़ रही थी। करीब दस मिनट तक बलराम ने मेरी गाँड अपने हिंदू अज़ीम लंड से मारी और मेरी चूत ने तीन बार पानी छोड़ा। फिर बलराम भी मेरी कमर पर झुका और तमाम हिंदू लण्ड मेरी गाँड में ठाँस कर रुक गया और फिर मेरी गाँड अपने पानी से भर दी।

हम दोनों कुछ देर इसी तरह पड़े हाँफते रहे और पिर धीरे-धीरे बलराम ने अपना हिंदू अनकटा लंड मेरी मुसलिमा गाँड में से बाहर निकाला। फिर वो खड़ा हुआ तो मैं भी पलट कर उसकी आँखों में देखते हुए मुस्कुराने लगी।

मैं बैठ कर अपने खुले हुए बाल बाँधने लगी तो बलराम झुक कर मेरी मुस्लिम चूचियाँ पकड़ कर आहिस्ता से दबाने लगा। उसका लण्ड अब ढीला पड़ गया था लेकिन फिर भी छः-सात इंच का था। मेरे शौहर असलम शरीफ की लुल्ली तो सख्त होकर भी मुश्किल से तीन-चार इंच की होती थी। बलराम का हिंदू लंड अपने पानी से सना हुआ चिपचिपा रहा था। मैंने उसे पकड़ अपने मुँह में भर लिया और चूसते हुए साफ करने लगी। बलराम जी के हिंदू लंड को चूसते हुए मुझे सिर्फ लंड के पानी का ही लज़ीज़ स्वाद नहीं बल्कि अपनी गाँड का भी हल्का-हल्का सा जाना-पहचाना ज़ायका आ रहा था। इससे पहले भी कईं बार मैंने रमेश से गाँड मरवाने के बाद उसके लण्ड से ये मज़ेदार ज़ायका लिया था।

इतने में बलराम ने कहा, “शबाना बेगम! आओ तुम्हें अपने लंड की शराब पिलता हूँ!”

“तुम मुझे अपना पेशाब पिलाये बगैर मानोगे नहीं!” मैं मुस्कुराते हुए अदा से बोली। “एक बार पी कर देख फिर तू खुद ही पेशाब पिये बगैर मानेगी नहीं!” उसने हंसते हुए जवाब दिया। फिर उसने मुझे बिस्तर से उतार कर नीचे ज़मीन पर बैठने को कहा तो मैं उसकी टाँगों के बीच में घुटने मोड़ कर बैठ गयी। अब तो मैं भी उसका पेशाब चखने के लिये मुतजस्सिस थी और गर्दन उठा कर मैं बलराम की आँखों में झाँकते हुए अदा से अपने होंठों पर जीभ फिराने लगी और बोली, “अब जल्दी से पिला दो अपने लण्ड की शराब! मैं भी देखूँ कितना नशा है इसमें!”

उसने मेरे मुलायम सुर्ख होंठों पर अपना लंड टिकाया तो मैंने होंठ खोल कर उसके लंड का आधा सुपाड़ा मुँह में ले लिया। एक लम्हे बाद ही बलराम आहिस्ता-आहिस्ता मेरे मुँह में पेशाब करने लगा। जब मेरा मुँह उसके गरम पेशाब से भर गया तो उसने अपना लंड मेरे होंठों से पीछे हटा लिया। मैंने मुँह में भरे फेशब को धीरे-धीरे मुँह में ही घुमाया और फिर आहिस्ता से अपने हलक में उतार दिया। मेरे मुँह में एक साथ कितनी ही तरह के ज़ायके एक-एक करके फूट पड़े। नमकीन, कसैला, थोड़ी सी खट्टास, थोड़ी सी कड़वाहट और फिर हल्की सी मिठास। उफ्फ अल्लाह! क्या कहुँ! इतने सारे ज़ायकों का गुलदस्ता था। फिर बलराम ने इसी तरह मेरे मुँह में सात-आठ बार अपना पेशाब भरा और हर बार मैं मुँह में पेशाब घुमा-घुमा कर पीते हुए आँखें बंद करके एक साथ इतने सारे ज़ायकों की लज़्ज़त लेने लगी। बलराम के पेशाब का आखिरी कतरा पीने के बाद मैं अपने होंठों पर जीभ फिराते हुए बलराम की आँखों में देखते हुए बोली, “शुक्रिया मेरे हिंदू सरताज़! मुझे पेशाब के मज़ेदार ज़ायके से वाकिफ कराने के लिये! वाकय में बेहद लज़िज़ और नशीली शराब है ये!”

उसके बाद हम नंगे ही उस बेडरूम में गये जहाँ मेरा शौहर असलम शरीफ खर्राटे मार कर नशे में धुत्त सो रहा था। क्योंकि हमारे कपड़े उसी कमरे में थे। मेरा नशा इतनी देर में ज़रा भी कम नहीं हुआ था और मैं बलराम के मर्दाना हिंदू जिस्म के सहारे ही लड़खड़ाती हुई चल रही थी। कमरे में आ कर बलराम अपने कपड़े पहनने लगा और मैं नशे में झूमती हुई नंगी ही बिस्तर पर बैठ कर उसे देखने लगी। शौहर असलम मेरे पास ही लेटा हुआ खर्राटे मार रहा था । अपने कपड़े पहनते हुए बलराम बोला, “ज़रा अपने शौहर का लंड कितना बड़ा है मुझे भी बता!” बलराम की बात सुनकर मैं हंस पड़ी और शौहर असलम के पास खिसक कर मैं आहिस्ते से शौहर का पजामा खोलने लगी। उसने अंदर चड्डी नहीं पहनी थी तो मैंने आहिस्ता से पजामा खींच कर नीचे कर दिया और उसकी लुल्ली की तरफ इशारे करके हंसने लगी। बलराम ने देखा तो वो भी ज़ोर से हंसने लगा। इस कहानी का मूल शीर्षक “शबाना की चुदाई” है।

शौहर असलम की लुल्ली छोटी होने की वजह से ठीक से नज़र भी नहीं आ रही थी। मैंने हंसते हुए बलराम को इशारे से अपनी दो उंगलियाँ फैला कर बताया कि जब असलम की लुल्ली खड़ी होती है तो तीन इंच की होती है। बलराम ने पास आकर अपने हिंदू बड़े कड़क मूसल जैसे लंड पर मेरा हाथ रखा और मसलते हुए बड़ा करने लगा और मेरी आँखों में देखने लगा। उसकी हिंदू अदायें मेरी मुस्लिम चूत को शर्मिंदा कर रही थी लेकिन मैं अपनी चूत और गाँड में उसके हिंदू लंड का पानी लेकर चुदक्कड़ हो चुकी थी।

उसने अपने सारे कपड़े पहन लिये और मैं नंगी ही नशे झूमती उसके साथ फिर से बाहर हॉल में आ गयी। हम दोनों अभी भी मेरे शौहर का मज़ाक उड़ाते हुए हंस रहे थे। बाहर हॉल में आ कर फिर हम दोनों ने कुछ देर किस किया और मैंने उसकी पैंट की चेन खोलकर अपना एक हाथ अंदर डाल कर उसका लंड पकड़ लिया। मेरे होंठों को चूमते हुए बलराम बोला, “लगता है शबाना बेगम का अभी भी मन नहीं भरा!”

“ऊँहुँ!” मैंने ना में सिर हिलाया और फिर बोली, “वादा करो मुझे हर रोज़ इसी तरह चोदोगे!” वो हंसने लगा और पिर बोला, “तेरी मुस्लिमा चूत और गाँड कि तो हर रोज़ रात को छत्त पर अपने हिंदू लण्ड से चुदाई करुँगा मुसल्ली राँड!” फिर उसकी पैंट में आगे से हाथ डाले हुए मैं उसका हिंदू लंड पकड़ कर दरवाजे तक ले जाकर अलविदा कहा।

दूसरे दिन सुबह-सुबह मैं रिश्तेदारों से मिलने जाने के लिये बुऱका पहने शौहर असलम के साथ निकली। बलराम भी बाहर खड़ा सिगरेट पी रहा था। असलम मिय़ाँ अपनी पुरानी गाड़ी स्टार्ट करने लगे और मैं खड़ी होकर बलराम से इशारे लड़ाने लगी। कभी वो किस करने का इशारा करता कभी असलम की छोटी लुल्ली पर हंसकर हाथ से बताता। मैं भी बाहर खड़ी होकर कभी अपनी मुस्लिम चूची उभार कर दिखाती और कभी हवा में किस करती कभी अपना अंगुठा मुँह में डाल कर लंड चूसने का इशारा करती। फिर गाड़ी स्टार्ट हुई तो मैं पीछे बैठ कर जाते हुए बलराम को अपना हिजाब हटा कर किस करती हुई चली गयी।

उस दिन से मेरी ज़िंदगी ही बदल गयी। शुरू-शुरू में मैंने रमेश और बलराम दोनों को एक -दूसरे के बारे में नहीं बताया। मुझे डर था कि उन दोनों में से कहीं कोई नाराज़ ना हो जाये और मैं उन दोनों में से किसी को भी खोना नहीं चाहती थी। मैंने रमेश से बहाना बना दिया कि मेरे शौहर को हमारे तल्लुकात के बारे में शक हो गया है और इसलिये मैं उससे रात को छत्त पर नहीं मिल पाउँगी। दिन में वो जब चाहे मुझे चोद सकता है। उधर बलराम से मैं रात को ही मिल सकती थी क्योंकि दिनभर वो अपने शोरूम में होता था। अब मैं दिन में शौहर के जाने के बद रमेश के हिंदू लंड की रखैल बन कर चुदती। फिर रात को असलम मियाँ के नशे में चूर हो जाने के बाद मैं भी शराब पी कर छत्त पर बलराम के मूसल हिंदू से चुदने पहुँच जाती और आधी रात के बाद तक उसके साथ चुदवा कर नशे में झूमती हुई वापस नीचे आती।

हर रोज़ सुबह-सुबह मैं उसका ताज़ा पेशाब पीने छत्त पर पहुँच जाती। उस वक्त शौहर असलम मियाँ नीचे तैयार हो रहे होते थे। मुझे पेशाब पीने की इतनी लत्त लग गयी कि जब मैं रमेश के साथ होती तो उसका पेशाब भी पीने लगी और यहाँ तक कि कुछ ही दिनों में अपना खुद का पेशाब भी पीना शुरू कर दिया। अब तो आलम ये है कि जब कभी भी मुझे मूतना होता है तो मैं बाथरूम जाने की बजाय एक बड़े गिलास में ही पेशाब करती हूँ और फिर मज़े ले-ले कर पीती हूँ।

बलराम मुझे बहुत ही ज़लील तरीके से रंडी की तरह चोदता था। मुझसे हमेशा नयी-नयी ज़लील और ज़ोखिम भरी हरकतें करवा कर मुझे गरम करता था और मुझे भी इसमें बेहद मज़ा आता था और मैं भी उसकी हर फरमाइश पुरी रज़ामंदी से पूरी करती थी। बलराम हर हफ्ते मुझे नये-नये फैशन की ऊँची हील वाली सैंडल की एक-दो जोड़ी तोहफे में देता था। एक बार उसने बहुत ही कीमती और खूबसुरत ऊँची हील के सैंडलों की जोड़ी दिखाय़ी और बोला कि अगर मुझे चाहिये तो उसके शो-रूम पर आकर लेने होंगे लेकिन मुझे सिर्फ बुऱका पहन कर आना होगा। पैरों में सैंडलों के आलावा बुऱके के नीचे कुछ भी पहनने से मना कर दिया। अगले ही दिन मैंने सिर्फ बुऱका और ऊँची हील के सैंडल पहने और बिल्कुल नंगी रिक्शा में बैठ कर बाज़ार पहुँच गयी। फिर वैसे ही भीड़भाड़ वाले बज़ार में भी करीब आधा किलोमितर पैदल चल कर बलराम के शो-रूम पर पहुँची।

ऐसे ही करीब चार महीने निकल गये। इस दौरान मैंने चुदक्कड़पन की तमाम हदें पार कर दीं। रात को तो मैं अब असलम मियाँ की शराब में नींद की गोलियाँ मिला देती ताकि सुबह तक खर्राटे मार कर सोता रहे। मैं अब छत्त से होकर बलराम के घर में उसके बिस्तर में पुरी-पूरी रात गुज़रने लगी। कईं बार बलराम रात को हमरे घर आ जाता और हम दोनों शौहर असलम मियाँ की मौजूदगी में रात भर ऐय्याशी करते। फिर एक दिन रमेश को मेरे और बलराम के रिश्ते के बारे में पता चल गया। पहले तो थोड़ा नाराज़ हुआ पर फिर मैंने प्यार से उसे मना लिया और बलराम को भी रमेश से अपने ताल्लुकतों के बारे में बता दिया। फिर तो दोनों हिंदू मर्द मिलकर अक्सर रात-रात भर मुझे चोदने लगे। कभी छत्त पर तो कभी बलराम के घर में और कभी मेरे ही घर में। दोनों एक साथ मेरी गाँड और चूत में अपने-अपने हिंदू हलब्बी मर्दना लण्ड डाल कर चोदते तो मैं मस्ती में चींखें मार-मार कर दोहरी चुदाई का मज़े लेती।

ये सिलसिला करीब एक साल तक चला। फिर एक दिन अचानक मेरी ज़िंदगी में फिर से अंधेरा छा गया। मेरे शौहर असलम शरीफ का तबादला दूसरे शहर में हो गया। जिस्मनी तस्कीन और अपनी चूत की प्यास बुझाने के लिये मैं फिर बैंगन और मोमबत्ती जैसी बेजान चीज़ों की मातहत हो गयी। लेकिन अब इस तरह मेरी प्यास नहीं बुझती थी। मुझे तो रमेश और बलराम के लंबे मोटे हिंदू हलब्बी मर्दाना लौड़ों से दिन रात चुदने और दोहरी चुदाई की इतनी आदत हो गयी थी कि मैं कितनी भी कोशिश करती और घंटों अपनी चूत और गाँड में मोटी-मोटी मोमबत्तियाँ और दूसरी बेजान चीज़ें घुसेड़-घुसेड़ कर चोदती लेकिन करार नहीं मिलता। इसी दौरान हमारे घर से थोड़ी दूर एक मदरसे में उस्तानी की ज़रूरत थी तो मैंने दरख्वास्त दे दी और मेरा इन्तखाब भी हो गया। अब मैं सुबह दस बजे से दोपहर में दो बजे तक मदरसे में छोटे बच्चों को पढ़ाने लगी। इस वजह से अब कम से कम आधा दिन तो अब मैं मसरूफ रहने लगी।

फिर एक महीने बाद मेरे शौहर किसी काम से एक हफ्ते के लिए दफ्तर के काम से बाहर गये। मैं भी दोपहर में मदरसे से लौटते हुए बुऱका पहने अपनी प्यासी मुस्लिम चूत लेकर शॉपिंग के लिये बाज़ार गयी। अभी मैं मदरसे से निकल कर चलते हुए बीस मिनट का रास्ता ही तय कर पायी थी कि सामने से एक औरत बुऱका पहने मेरी ही तरह ऊँची हील की सैंडल में शोख अंदाज़ में आ रही थी। उसने भी चेहरे से नकाब हटा रखा था। जब वो पास आयी तो मैंने पहचाना के ये तो नाज़िया है। “हाय अल्लाह! नाज़िया तू!” मैंने खुशी से कहा। “तू शबाना… शब्बो तू?” नाज़िया भी हंसते हुए मुझसे लिपट गयी। हम दोनों खुशी से गले मिले और बातें करने लगे कि अचानक एक बाइक तेज़ी से आयी। हम लोग जल्दी से एक तरफ़ हट गये और उस लड़के ने जल्दी से अपनी बाइक दूसरी तरफ़ मोड़ ली और गुस्से से जाते-जाते बोला, “रंडियाँ साली! देख कर चलो सालियों!” और कहता हुआ चला गया। उसकी गालियाँ सुनकर मुझे रमेश और बलराम की याद आ गयी और जिस्म में एक सनसनी फैल गयी। अपने जज़्बात छिपाने के लिये मैंने नज़रें झुका लीं। फिर नाज़िया की तरफ़ देखा तो उसने शरारत भरे अंदाज़ में कहा, “लगता है ये हज़रत हिंदू लंड वाले हैं!” और कहकर ज़ोर से हंसते हुए बोली, “चल छोड़ ना शब्बो! बता कि यहाँ कैसे आयी?” मुझे हैरत हुई कि नाज़िया जो कॉलेज की सबसे अव्वल दर्जे की तालिबा थी, उसके मुँह से हिंदू लंड सुनकर मेरी आँखें खुली रह गयीं। मैंने कहा, “बेहया कहीं की! चुप कर!”

फिर वो मेरा हाथ पकड़ कर अपने घर ले गयी। फिर हम दोनों ने अपने बुऱके उतारे। जैसे ही नाज़िया ने अपना बुऱका उतारा तो मेरे मुँह से निकला, “सुभान अल्लाह नाज़िया!” उसका जिस्म बहुत गदराया हुआ था। गहरे गले की कसी हुई कमीज़ से उसके मुस्लिमा मम्मे उभरे हुए नज़र आ रहे थे और उसके गोल-गोल चूतड़ भी ऊँची हील के सैंडल की वजह से उभरे हुए थे। उसने मेरी चूचियों को देखते हुए कहा, “सुभान अल्लाह क्या? खुद को देख माशा अल्लाह है माशा अल्लाह!” इतने में किसी ने दरवाजा खटखटाया। नाज़िया ने दरवाजा खोला और एक शख्स कुर्ता पजामा पहने अंदर आया। “ये कौन मोहतरमा हैं?” वो बोला तो नाज़िया ने कहा, “जी आपकी साली समझें! ये मेरी कॉलेज की सहेली है शबाना इज़्ज़त शरीफ!” वो अंदर चला गया और नाज़िया ने शरारत से कहा, “ये दाढ़ी वाला बंदर ही मिला था मुझे शादी करने के लिये!” मैंने नाज़िया की बाजू पर मारते हुए कहा, “चुप कर!” फिर थोड़ी देर बाद नाज़िया का शौहर बाहर निकल कर जाने लगा और बोला, “आज काम है… शायद लौटते वक्त देर हो जायेगी!” और कहते हुए चला गया।

नाज़िया ने मुझे बिठया और पूछा, “बता क्या पियेगी?” “कुछ भी चलेगा!” मैंने कहा तो वो चहकते हुए बोली, “कुछ भी?” मैंने कहा, “हाँ कुछ भी

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भाभी की चुत और गांड की जबरजस्त धुनाई http://sexkahani.net/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%9a%e0%a5%81%e0%a4%a4-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a1-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%9c%e0%a4%ac%e0%a4%b0%e0%a4%9c/ Sat, 21 Jan 2017 09:39:37 +0000 http://sexkahani.net/?p=9777 मैं पटना बिहार से एक स्टोरी लेकर आया हूँ. जवान औरत से सेक्स करना और औरत को चोदना हर जवान लड़के का सपना होता है। मेरा भी था की किसी अल्हड़, मस्त, जवान औरत की गांड, चूत मारी जाए और उसकी गांड मे जुभान डाल कर उसका रस चखा जाए।

औरत की भारी-भारी कसी-कसी उठान लिए ब्लाउस मे दूध से भरी चुचियाँ हमेशा हिलते हुए मुझे अपनी ओर आकर्षित करती और मे उनको दबाने के सपनो मे खो जाता की कब ब्लाउस के बटन खोल उन चुचियों को आज़ाद करूँगा। ब्लाउस के हुक खोल कर ब्रा को हटा कर दोनो चुचियाँ अपने हाथों मे ले कर दबाऊंगा. कब औरत के स्तन मेरे हाथो मे आएँगे? कब मे भी उनके निपल्स को मूह मे लेकर पी पाऊंगा?
मोहल्ले की हर जवान, गोरी, सुंदर और प्यारी भाभी के बारे मे सोचता रात को यह कितना मज़ा लूटवाती होंगी और लंड की सवारी कर रोज़ जन्नत घूमने जाती होंगी। हर भाभी भी मुझसे बहुत घुली-मिली रहती, कभी भी कोई काम होता तो यह देवर हमेशा काम करने को तैयार रहता था।
एक बार मेरे एक दूर के भैया हमारे यहाँ अपनी बीवी के साथ रहने आए। बात एक रात की है की मुझे गर्मी के कारण नींद नही आ रही थी। मै एसे ही बाहर आँगन मे निकल आ गया. सामने बेडरूम की खिड़की से हल्की ट्यूबलाइट की रोशनी बाहर आ रही थी। क्योंकि खिड़की के काँच पर कपड़ा था. परंतु खिड़की का एक दरवाज़ा हल्का टेढ़ा खुला था ताकि हवा कमरे मे आ- जा सके।

मैने सोचा यह भैया क्या पढ़ रहें हैं? मैने बस हल्के से दबे पाँव पास जाकर खिड़की के नीचे से अंदर देखा तो मेरी सांस जैसे रुक गयी। भाभी पूरी नंगी होकर पेट के बल लेटी थी और उनकी मस्त गांड उपर की ओर थी। भैया उनकी पीठ पर सरसों के तेल से मसाज कर रहे थे. भाभी हल्के-हल्के मूह से अहह…सस्स्सस्स.अहह.. कर रहीं थी। और जब भैया तेल लगा कर अपनी उंगली भाभी के चूतड़ को फैला कर गांड मे अंदर घुसा डालते तो भाभी कह उठती, “धीरे- धीरे डालो बाबा दर्द होता है.” भैया लूँगी पहने अपने दोनो हाथो से उनके उपर जाँघो पे बैठ कर दोनो चूतडो की मसाज कर रहे थे।

गांड की मालिश से भाभी बहुत खुश नज़र आ रही थी. भाभी के उल्टा होकर लेटने से मैने देखा की भैया हल्के से लेट कर पीछे से उनकी गांड मे अपनी जुबान भी लगा रहे थे। जिससे भाभी याआहह… ऊ.. करती जाती। फिर पीछे से ही भैया ने भाभी के जाघों को फेलाया जिससे उनकी चूत भी दो फांको मे बट गयी और चूत के गुलाबी छेद मे उंगली डाल वो अंदर-बाहर करने लगे। भाभी को अजीब सा नशा चढ़ने लगा. वो मदहोश होने लगी. भैया धीरे से भाभी के चूत के नीचे आ गये और अपनी जुभान से भाभी की चूत को लॅप-लॅप कर चाटना शुरू किया। इससे भाभी की सिसकियाँ और सांसे और गरम और तेज़ हो गयी थी।

फिर भाभी अपनी पीठ के बल लेट गयी और भैया ने आगे वाले हिस्से कि मालिश शुरू की. भाभी के दोनो टांगो को फैला कर उनकी गोरी मसल झांगो को रगड़ कर मालिश किया और अपने अंगूठों से चूत के दोनो सिंघरों का मसाज किया। फिर खूब सारी थूक डाल कर उनकी चुत पे लेप लगा दिया. फिर अपनी जुभान से चूत को रगड रगड लाल कर उसके गुलाबी छेद मे जुभान अंदर-बाहर करके उंगली से तेज़ी से अंदर-बाहर कर चूत को गीला कर चोदने का प्रोग्राम बनाया।

भैया बार-बार भाभी की चूत के ठीक बीच उपर उगी हुई हल्की काली घुँगराली झांटो को भी अपने मूह से होंटो मे दबा कर नोचते जिससे भाभी को बहुत नशा छा जाता. झांटो के नीचे चूत की सुंदरता देखते ही बनती थी. बड़ा ही सुहावना सीन था जिसे देख मेरा लंड तन कर कुतुब मीनार सा टाइट खड़ा हो गया था और लंड ने पानी भी छोड़ दिया था। दोस्तों आप ये कहानी न्यू हिंदी सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है l

मेरा लंड भी खड़ा होकर मन मे भाभी को चोदने का हो गया. मैने देखा भैया भाभी के सर की तरफ टॅंगो को कर लेट गये हैं. ओर भाभी की चूत मे जुभान से खेल रहें हैं और भाभी भैया का 6 इंच लंबा और तीन उंगल मोटा लंड पकड़ कर अपनी जुभान से भैया के लंड का गुलाबी रस चाट रहीं थी। थोड़ी देर मे भाभी ने भैया का लंड मूह मे लिए और अंदर-बाहर का मज़ा ले रही थी. ह्म..ऊओ..यॅ कह कर हाथ से मज़बूती से लंड पकड़ कर लंड को पूरा खड़ा कर दिया। अब भैया ने लंड को भाभी की चूत फैला कर अंदर डाला और खप खप की आवाज़ के साथ नरम रेशम सी चिकनी चूत की मखमली गहरायी मे समा गया. अंदर-बाहर लंड चला। भैया ने भाभी को जन्नत की सैर करवानी शुरू की.

फिर भाभी बोली अब गांड भी तो मारो इतने सूनने पर भैया ने भाभी की चूत से लंड को निकाल कर गांड के छेद पे लगा कर धक्का मारा. गांड की धुनाई कर भैया 3-4 मिनिट मे झड़ गए। उनके लंड से गरम वीर्य का फव्वारा देख मेरा भी लंड भीग आया। पर क्या करता दबे पाँव वापस आकर सोना पड़ा. बड़ी मुश्किल से वो रात कटी।

अब मैने भी भाभी की गांड मारने की सोची कुछ दिन बाद मौका मिल गया. एक दिन मे अचानक भाभी के बेडरूम मे जा घुसा. भाभी नहा कर टॉवल लपेट कर निकली थी. वो मुझको देख कर समझ तो गयी की इस लड़के को मेरी गांड चाहिए पर मुस्करा कर बोली- “आज घर मे कोई नहीं है.. सब शादी मे गये है.. कल तक हम दोनो अकेले हैं इस घर मे..”

मैने कहा -जानता हूँ.. भाभी आप बहुत सुंदर हो..””आज इतनी तारीफ़ क्यों?”- भाभी ने मुस्करा कर कहा. “वो भाभी आज मेरे दिल की तम्मना पूरी कर दो.” “क्या है तुम्हारी तम्मना?”- भाभी के चेहरे पर एक कातिल हसीना वाली मुस्कुराहट थी. “आपकी गांड मारनी है..सच भाभी इतनी खूबसूरत जवान.. मदमस्त भरी-फूली हुई साँचे मे ढली गांड मैने आज तक नहीं देखी.. इतनी मस्त है तुम्हारी गांड.. गोरी गोरी गांड के दर्शन करवा दो भाभी.. तुम्हारी खूबसूरती की कसम ज़िंदगी भर तुम्हारा गुलाम रहूँगा..” यह कह मे उनके टॉवल से लिपट गया. और उनको अपनी बाहों मे उठा लिया।

भाभी को बाहों मे भर गोद मे उठाने से उनका टॉवेल निकल कर ज़मीन पर आ गिरा. और वो ब्रा और पेंटी मे आ गयी थी. हल्की गुलाबी ब्रा और पेंटी मे वो बहुत ही मस्त लग रही थी. वो मुस्करा उठी मैने भी जल्दी से उनके होंटो को अपने होंटो मे क़ैद किया और 3-4 मिनिट तक अपने होंटो मे दबाए रखा। जुभान से जुभान लड़ रही थी और थूक का आदान-प्रदान हो रहा था।

में उनके होट चूसता वो मेरे. बहुत मीठे थे उनके होट. गुलाबी, मुलायम और गुलाब की पंखुड़ी की तरह। में उनको गोद मे उपर उठाए था। उनकी दोनो गोरी जांगे मेरे कमर के पर थी। अब मैने उनको बिस्तर पर लाकर लिटा दिया और उनको मसाज करने लगा।
भाभी की ब्रा खोल उनकी दोनो बड़ी-बड़ी चुचिया पीने लगा. निपल्स तो बहुत ही मीठे थे. अपने अंगूठे से निपल्स की मालिश करता रहा. दोनो बोब्स कि अच्छी तरह मालिस कि. जिससे उनकी चुचियाँ टाइट होकर फूल कर बड़ी हो गयी और गोल गहरी नाभि की महक कस्तूरी हिरण के समान थी।

भाभी बोली जल्दी से पेंटी उतारो और चूत को चाट कर चूत की खुजली मिटाओ. मैने भी उनकी आज्ञा का पालन एक होनहार ड्राइवर की तरह किया ओर बीना टाइम गवाए उनकी चूत मैं अपनी जुभान से सेवा शुरू कर दी। हाययययी…यार कितना मज़ा देते हो.. ययययई..आअहह…ऊ
उनको अपनी चूत की खुजली और जलन शांत करवाने मे बड़ा मज़ा मिल रहा था। लॅप लॅप कर में उनकी चूत को गीला कर पूरी रफ़्तार से चूत चाटने लगा। थोड़ी देर बाद मैने उनके चूतड़ को उपर किए और गांड के नीचे एक तकिया रख दिया जिससे मैने उनके गांड के उपर भी अपने प्यार का लेप लगाया।

में चूत को अपने होंटो मे दबाता फिर जुभान बाहर कर गांड के काले छेद पर भी थूक लगा कर हल्के से जुभान से गांड सहला देता जिससे उनकी जवानी को एक करंट लगता। अब में लंड को तैयार कर चुका था. मैने भाभी को कहा टाँगे फैलाओ ताकि गांड मे लंड डालने मे आसानी हो. ज़ोर लगा कर धक्का दिया। जिससे लंड गांड के अंदर गुस गया. बडा मज़ा लेकर गांड मारी।

फिर में नीचे सीधा लेट गया और भाभी सामने की ओर मूह कर मेरे लंड पर अपनी गांड टिकाकर बैठ गयी. मैने उनकी गांड को फिर चीरना शुरू किया और पीछे से हाथ बढ़ा दोनो चुचियाँ दबाने लगा। नीचे गांड की धुनाई करता जाता और पीछे से दोनो बोब्स की मालिश जिससे उनको आराम मिलता।

गांड के अंदर बाहर करने से लंड को एक अलग ही सुख मिल रहा था. साथ ही मैने अपनी दोनो उंगलियों को सामने चूत के गुलाबी छेद मे अंदर डाल चूत की चुदाई भी की जिससे भाभी को दुगना मज़ा मिल सके और वो जन्नत की सैर का भरपूर आनंद ले सकें। थोड़ी देर बाद मैने लंड को गांड से खींच लिया और भाभी के बोब्स पर सारा वीर्य गिरा दिया। भाभी की गांड की सैर कर में उनका गुलाम बन गया। आज भी उनकी गांड मारने जाता हूँ। दोस्तों आपको मेरी स्टोरी कैसी लगी।

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अपनी गर्लफ्रेंड के साथ हार्ड सेक्स किया http://sexkahani.net/%e0%a4%85%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%ab%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%82%e0%a4%a1-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a5-%e0%a4%b9%e0%a4%be/ http://sexkahani.net/%e0%a4%85%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%ab%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%82%e0%a4%a1-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a5-%e0%a4%b9%e0%a4%be/#comments Fri, 20 Jan 2017 14:20:30 +0000 http://sexkahani.net/?p=9867 हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम विपुल है और मेरी उम्र 21 साल है। मैंने अब तक न्यू हिंदी सेक्स कहानी की बहुत सारी कहानी पढ़ी है और मुझे वो सभी कहानियाँ बहुत अच्छी भी लगी, उनको पढ़कर मुझे बड़ा मज़ा आया, इसलिए में सबसे पहले उन सभी लिखने वालों को बहुत बहुत धन्यवाद देता हूँ, जिन्होंने मेरे और साथ में आप सभी के मज़े के लिए इतनी अच्छी कहानियाँ लिखकर भेजी।

दोस्तों इन कहानियों को पढ़ते हुए एक दिन मेरा भी दिल हुआ मेरे भी मन में एक विचार आया कि क्यों ना में भी अपनी एक कहानी लिखूं? हो सकता है कि मेरी तरह आप लोगों को भी मेरी कहानी वो सच्ची घटना जिसको में आज भी नहीं भुला सका, वो आपको पसंद आ जाए। दोस्तों यह जो कहानी में आप लोगों को आज सुनाने वाला हूँ ।

यह कोई कहानी नहीं मेरे जीवन की एक सच्ची घटना है, जो कुछ साल पहले हमारे साथ घटित हुई और इसने मेरे और मेरी गर्लफ्रेंड के पूरे जीवन को उस रात के बाद बिल्कुल बदलकर रख दिया और पहले हम यह बात किसी को बताने से डरते थे, लेकिन मैंने थोड़ी हिम्मत करके इसको आपके सामने लाने के बारे में विचार किया और आज वो आपके सामने है। दोस्तों अब में ज़्यादा कुछ ना बोलते हुए वो कहानी शुरू करता हूँ।

कुवारी चाची की बुर चुदाई

दोस्तों मेरी एक बहुत ही प्यारी सी दोस्त है, जिसका नाम प्रमिला है और हम दोनों एक ही क्लास में पढ़ते है, वो मेरी सबसे अच्छी और सबसे प्यारी दोस्त है, वो मुझसे अपनी सारी बातें और हर एक समस्या बताती है, चाहे वो कोई भी समस्या हो वो मुझे बताती है और में भी अपनी सारी समस्याएं उसको बताता हूँ, हम दोनों एक दूसरे से बहुत खुले है, वो मुझसे एक साल छोटी है, मतलब उसकी उम्र 20 साल है और हम दोनों एक दूसरे से बहुत ज्यादा प्यार करते है, इसलिए हम दोनों अपना ज्यादातर समय एक दूसरे के साथ में बिताते थे।

एक दिन हम दोनों घूमने के लिए एक पार्क में चले गये, वो पार्क हम लोगों के घर के बहुत ज्यादा दूरी पर था, लेकिन वो पार्क बहुत अच्छा था और वहां पर बहुत शांति थी, इसलिए हम लोग वहाँ पर गये थे और वैसे वहाँ पर जाने के लिए हर कभी बस भी मिल जाती है, हम लोग वहां पर शाम को गये थे l

फिर कुछ देर घूमने के बाद हम दोनों वहाँ पर बने एक रेस्टोरेंट में चले गये, जो उस पार्क से कुछ कदम की दूरी पर ही था, वहाँ पर जाकर हम दोनों ने नाश्ता किया और कॉफी भी पी। उसके कुछ देर बाद हम दोनों घर जाने के लिए बस का इंतज़ार करने लगे, लेकिन बहुत देर तक इंतज़ार करने के बाद भी कोई बस नहीं आई।

अब धीरे धीरे रात होने लगी थी और हम दोनों ने सोचा कि अब क्या किया जाए? तभी हमने देखा कि एक बस बहुत तेज़ी से हमारी तरफ आ रही है। मैंने उस बस को रुकने का इशारा किया और बस के रुकने पर हम दोनों बस में चड़ गये। फिर मैंने बस के अंदर जाकर देखा तो उस समय उस बस में हम दोनों के अलावा दस आदमी और ड्राईवर था और फिर हम दोनों एक खाली सीट देखकर उस पर बैठ गए और बातें करने लगे।

बनारसी रसीली गाण्ड

तभी कुछ देर बाद मैंने बाहर झांककर देखा कि वो लोग हमे कुछ देर बाद ना जाने कौन से एक सुनसान रास्ते पर ले गए और थोड़ी दूरी तय करने के बाद उन्होंने हमें जबरदस्ती एक सुनसान मकान में ले जाकर छोड़ दिया। उसके बाद उन्होंने मेरी गर्लफ्रेंड को एकदम जंगली जानवर की तरह चोदा, जिसकी वजह से उसकी चूत फट गई और उसकी चूत से बहुत सारा खून बहने लगा।

यह सब देखकर मेरे हाथ पैर फूल गए और अब मेरी गर्लफ्रेंड कुछ देर बाद बिल्कुल निढाल हो गई। उसके बाद वो बेहोश हो गई। फिर मैंने उन्हें बहुत बार मना किया, तभी उनमें से एक आदमी बोला अब तू हमारे लंड को शांत कर तब हम इस लड़की को छोड़ देंगे। फिर मैंने बिना सोचे समझे उनसे हाँ कह दिया और फिर उन्होंने मेरी गांड और मुहं में अपना लंड डालकर उन्होंने अपना अपना लंड शांत किया और उसके बाद वो सभी थककर सो गए और हम दोनों एक कमरे में चले गए।

उसके बाद में बाथरूम में चला गया और वहां से बाहर निकलकर वापस नंगा ही में अपनी दोस्त के सामने जाकर खड़ा हो गया। अब वो मेरे तने हुए लंड को देख रही थी और अपनी चूत को दबा रही थी, लेकिन अचानक उसने अपना हाथ एक झटके के साथ चूत से हटा लिया, क्योंकि चूत को दबाने पर उसे दर्द हो रहा था, लेकिन उसको इसका कारण समझ में नहीं आया। आप यह कहानी न्यू हिंदी सेक्स कहानी पर पढ़ रहे है l

पति और बेटे ने मिल कर चोदा

फिर मैंने कपड़े पहने और प्रमिला के पास बैठ गया, प्रमिला को पता था कि मेरा लंड अभी भी भूखा है, इसलिए उसने मेरी पेंट की चेन को खोल दिया और वो मेरे लंड को बाहर निकालकर चूसने लगी। फिर मैंने उससे पूछा कि तुम यह क्या कर रही हो प्रमिला? तो उसने कहा कि जब तुम मेरे लिए इतना सब कर सकते हो तो क्या में तुम्हारी खुशी के लिए यह भी नहीं कर सकती और यह कहकर वो वापस मेरे लंड को चूसने लगी, मुझे तो बहुत अच्छा लग रहा था l

इसलिए मैंने उसे मना नहीं किया और में तो पहले से ही बहुत गरम था, इसलिए थोड़ी ही देर बाद में उसके मुहं में झड़ गया और मेरा वीर्य उसके मुहं में भर गया, वो मेरे वीर्य को पी गयी। उसके बाद हम दोनों ने अपने अपने कपड़े पहन लिए और एक दूसरे से लिपटकर बैठ गए। हमें पूरी रात नींद नहीं आई और में हर बार वो सब सोच रहा था, जो मैंने कुछ देर पहले अपनी आखों के सामने देखा था।

फिर कुछ देर बाद हमने उठकर बाहर की तरफ देखा तो तब तक सुबह हो चुकी थी और हमने वहां से निकलने का पूरा प्लान बना लिया था और हम दोनों वहां से भाग निकले। हमारे बाहर निकलकर थोड़ी दूर चलने पर हमे एक बस मिल गयी, इसलिए हम दोनों उसमें बैठकर हमारे घर के तरफ रवाना हो गए।

दोस्तों जैसा कि मैंने पहले ही आप लोगों को बताया था कि प्रमिला मुझसे कभी भी अपनी कोई बात नहीं छुपाती है, इसलिए रास्ते में उसने मुझसे कहा कि विपुल मेरी चूत में बहुत दर्द हो रहा है। दोस्तों यह सब बातें में पहले से ही जानता था, इसलिए मैंने उससे कहा कि घर जाकर इसका इलाज कर देंगे, लेकिन प्रमिला खुश नहीं थी, वो सोच रही थी कि उसका तो बलत्कार हुआ है और अब मुझसे कौन शादी करेगा?

यह बात आख़िर में उसने कुछ देर बाद मुझे भी बता ही दी। फिर मैंने उससे कहा कि प्रमिला में तुमसे बहुत प्यार करता हूँ, इसलिए में ही अब तुमसे शादी भी करूँगा, में कभी भी तुमसे तुम्हारे इस बलत्कार के बारे में कोई भी बात नहीं करूँगा और तुम भी घर पर जाकर किसी को मत बताना।

प्लीज़ बाहर निकाल लो

दोस्तों उसके घर पर अभी केवल उसकी बूढ़ी दादी और बूढ़े दादाजी थे और मेरे घर में तो अभी कोई भी नहीं था, क्योंकि मेरे घर के सभी लोग किसी रिश्तेदार की शादी में गए हुए थे। अब प्रमिला ने मुझसे कहा कि हाँ ठीक है में बताउंगी तो किसी को नहीं, लेकिन मेरी इस चूत के दर्द का क्या होगा और बलत्कार की वजह से में तो अब गर्भवती हो जाउंगी और उसके बाद सबको पता चल जाएगा।

फिर मैंने उससे कहा कि तुम इस बात की बिल्कुल भी चिंता मत करो, तुम रोज़ सुबह नहाने के बाद पढ़ने के बहाने से मेरे घर पर आ जाना। में तुम्हारी चूत को गरम पानी से सेक दूँगा और मालिश भी कर दूँगा, इससे तुम्हारी चूत ठीक हो जाएगी और रही बात तुम्हारे गर्भवती होने की तो तुम इसकी भी चिंता मत करो, तुम्हारी चूत के ठीक हो जाने के बाद में किसी दूसरे शहर के अच्छे डॉक्टर से तुम्हारा गर्भपात करवा दूँगा।

तब उसने मुझसे कहा कि अगर डॉक्टर ने हमसे यह पूछा कि में गर्भवती कैसे हुई तो हम क्या कहेंगे? तो मैंने उससे कहा कि में बोल दूँगा कि हम दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते है और मैंने ही इससे शारीरिक संबंध बनाया था, इसलिए यह गर्भवती हो गयी है और फिर वो मेरी बातें सुनकर बहुत खुश हुई और हम लोग घर पहुँच गये।

फिर सबसे पहले मैंने प्रमिला को उसके घर तक पहुँचाया और उसके दादाजी ने मुझसे पूछा कि तुम दोनों रातभर कहाँ थे? मैंने कहा कि हमे रात बहुत हो गई थी, इसलिए हम दोनों प्रमिला की एक सहेली के घर पर रुक गये थे। आप लोग प्रमिला को कुछ मत बोलिएगा, वो मेरे कहने पर ही अपनी सहेली के घर गयी थी।

मेरी चुदाई का शौक-1

फिर उसके दादाजी ने कहा कि हाँ ठीक है तुमने अच्छा ही किया और अब प्रमिला घर में जाकर सबसे पहले नहाने के लिए बाथरूम में गई, वहाँ पर अपने कपड़े उतारने के बाद जब उसने अपनी चूत को देखा तो वो एकदम से डर गई, क्योंकि उसकी चूत उस जबरदस्ती की चुदाई से बहुत सूज़ गई थी और उस पर कुछ खून के दाग भी लगे हुए थे और वो अब समझ गयी कि उसके बेहोश हो जाने के बाद भी उसको बहुत बुरी तरह से चोदा गया था, लेकिन उसे यह नहीं पता था कि उसको कितने आदमियों ने मिलकर चोदा था?

उसने अब यह बात अपने मन में सोच ली कि जब में विपुल से मिलूंगी तो उससे सारी बातें पूछ लूंगी। फिर वो नहाने के बाद बाथरूम से बाहर निकली और तैयार होकर उसने थोड़ा सा नाश्ता किया और फिर वो मेरे घर पर अपने दादाजी से यह कहकर आ गई कि में विपुल के साथ पढ़ाई करूँगी। आप यह कहानी न्यू हिंदी सेक्स कहानी पर पढ़ रहे है l

दोस्तों उसके दादाजी मुझे बहुत अच्छा लड़का मानते थे और वो मुझे बहुत प्यार भी करते थे, इसलिए उन्होंने प्रमिला को तुरंत मेरे घर पर आने की आज्ञा दे दी। उसके बाद वो बहुत खुश होकर मेरे घर पर अपने साथ एक किताब के साथ पहुँच गयी। दोस्तों उसने सबसे पहले मेरे पास आकर मुझसे यह पूछा कि कल रात को जब में बेहोश हो गई थी, तब मुझे कितने आदमियों ने चोदा था? मुझे यह बात एकदम सच सच बताओ तुम्हें मेरी कसम।

मेरी पहली रात रूचि के साथ

फिर मैंने उससे पूछा कि यह बात तुम मुझसे क्यों पूछ रही हो, पहले तुम मुझे यह बात बताओ? तो उसने कहा कि मैंने अपनी चूत को हाथ लगाकर नीचे बैठकर बहुत ध्यान से देखा है और इसकी इतनी खराब हालत को देखकर मुझे ऐसा लगता है कि जैसे इससे बहुत खून बहा था और मुझे बहुत लोगों ने चोदा, लेकिन तुम मुझे पूरी बात वो सच्ची नहीं बता रहे हो बताओ मुझे? तो मैंने उससे कहा कि नहीं ऐसी कोई भी बात नहीं है, हाँ खून तो निकला था, लेकिन ज़्यादा नहीं। दोस्तों मैंने उसे जानबूझ कर सच नहीं बताया।

मैंने उससे कहा कि कल जिस आदमी ने तुमको चोदा था, उसका लंड बहुत मोटा और लंबा था और उसने जानवर की तरह तुम्हें चोदा था, इसलिए तुम्हारी चूत का यह हाल हो गया है, खैर तुम अब उस बारे में इतना मत सोचो। मैंने गरम पानी कर दिया है, तुम अपने कपड़े उतारकर नंगी होकर बेड पर लेट जाओ। अब उसने मेरे कहने के अनुसार अपने सारे कपड़े मेरे ही सामने उतार दिए और वो पूरी नंगी होकर बेड पर लेट गयी।

मैंने तब देखा कि सचमुच उसकी चूत बहुत ज्यादा सूज़ गई थी और में गरम पानी से धीरे धीरे उसकी चूत को सेकने लगा। कुछ देर सेकने के बाद मैंने थोड़ा सा तेल गरम किया और थोड़ी सा गरम होने के बाद में उस तेल को लेकर बेडरूम में गया। उसके बाद में प्रमिला की चूत को अब गरम तेल से धीरे धीरे मालिश करने लगा, जिसकी वजह से उसको बहुत आराम मिल रहा था और धीरे धीरे वो गरम होने लगी थी और वो मुझसे कहने लगी कि प्लीज विपुल तुम मेरे पूरे शरीर की मालिश कर दो, मेरे पूरे शरीर में बहुत दर्द हो रहा है।

फिर उसके कहने पर में उसकी मालिश करने लगा और मुझे भी उसके नंगे गरम बदन की मालिश करने में बहुत मज़ा आ रहा था। कुछ देर तक मालिश करने के बाद मैंने देखा कि उसकी चूत से अब कुछ निकल रहा है और ज्यादा कामुक होने की वजह से अब उसकी चूत का रस बाहर निकल रहा था।

मैंने उसकी चूत पर अपनी जीभ को रखकर चाटना शुरू कर दिया और मेरे यह काम करने की वजह से वो और भी ज़्यादा गरम होने लगी और वो मेरी पेंट के ऊपर से मेरे लंड को पकड़ने लगी। फिर कुछ देर बाद उसने मुझसे कहा कि प्लीज विपुल आज तुम मुझे चोदो ना प्लीज जब एक अंजान आदमी मुझे चोद सकता है, तब तुम क्यों नहीं? तुम तो मेरे होने वाले पति हो।

डॉक्टर आप सेक्स करना चाहते है या प्यार

फिर मैंने उससे कहा कि अभी तुम कल की चुदाई के उस दर्द को अभी अच्छी तरह से भूली भी नहीं हो और आज फिर से मुझे चुदाई करने की बात कहती हो, यह कभी नहीं हो सकता, पहले तुम पूरी तरह से ठीक हो जाओ और उसके बाद में हर रोज़ तुम्हारी चुदाई जरुर करूंगा, हमारी शादी से पहले में तुम्हें कंडोम लगाकर और शादी होने के बाद कंडोम हटाकर तुम्हारी बहुत जमकर चुदाई करूंगा, लेकिन में अभी किसी भी हालत में तुम्हें नहीं चोद सकता।

अब तुम मेरा लंड छोड़ दो और अपने कपड़े पहनकर घर जाकर सो जाओ और थोड़ा सा आराम करो, क्योंकि कल रातभर तुम मेरे साथ सोई नहीं हो, इसलिए अब तुम जाओ। फिर उसने मुझे किस किया और कहा कि हाँ इसलिए ही तो में तुमसे बहुत प्यार करती हूँ विपुल, मुझे पहले से ही पता था कि तुम मेरे दर्द को समझकर मुझे दोबारा कोई भी दर्द नहीं होने दे सकते, क्योंकि तुम्हें मेरा पूरा पूरा ख्याल है और तुम भी मुझे बहुत प्यार करते हो।

फिर उसने मेरे लंड को एक किस करके छोड़ दिया। उसके बाद उसने अपने कपड़े पहने और घर चली गयी। इस तरह रोज़ उसके पूरे बदन और चूत की मालिश करते करते मुझे पूरे सात दिन बीत गये थे और तब तक उसकी चूत भी पहले से थोड़ी बहुत ठीक हो गई थी। फिर हम लोगों के प्लान के मुताबिक अब हम लोगों को डॉक्टर के पास जाना था, इसलिए मैंने उसके दादाजी से झूठ कह दिया कि प्रमिला का एग्जाम सेंटर कहीं दूसरे शहर में आया हैl

इसलिए कल हम दोनों उस शहर में इसका पेपर का सेंटर देखने जाएँगे, वो शहर थोड़ा दूरी पर है, इसलिए हमे करीब तीन दिन लगेंगे। फिर उसके दादाजी मेरी बात को सुनकर हमारे जाने की बात के लिए पूरी तरह से सहमत हो गये और उन्होंने प्रमिला को मेरे साथ जाने की आज्ञा भी दे दी। आप यह कहानी न्यू हिंदी सेक्स कहानी पर पढ़ रहे है l

कॉल पर मिली श्रुति की चुदाई

फिर दूसरे दिन हम दोनों एक पास के शहर में चले गये और वहाँ पर हमे कोई नहीं पहचानता था, इसलिए हमारे प्लान के मुताबिक प्रमिला का गर्भपात का काम बहुत जल्दी पूरा हो गया। उसमें कोई भी रुकावट नहीं आई और उसके बाद हम दोनों बहुत खुश होकर वापस अपने शहर में आ गये। दोस्तों अब हर रोज़ प्रमिला नहाकर मेरे यहाँ पर आती और में उसको नंगा करके अपने लंड पर कंडोम लगाकर उसकी चुदाई करता था, लेकिन यह काम हमारे बीच सिर्फ़ कुछ ही दिन चला।

उसके बाद मेरे परिवार वाले वापस घर आ गये, इसलिए अब में प्रमिला को दोबारा चोद नहीं पाता था, लेकिन जब भी मुझे मौका मिलता में प्रमिला को उसके घर पर ही चोदता था, क्योंकि वो हमेशा जींस पहनती थी तो मैंने उसको उसके अंदर पेंटी पहनने के लिए मना कर दिया था। अब जब भी मुझे प्रमिला को चोदने का दिल करता तो में उसे पूरा नंगा किए बिना ही चोद देता था।

में अपनी पेंट की चेन खोलकर अपने लंड को बाहर निकाल लेता था और उसकी जींस की चेन को खोलकर उसकी चूत में अपना लंड डाल देता था, वो उसमें मेरा हमेशा पूरा पूरा साथ देती थी और चुदाई के खत्म हो जाने के बाद हम दोनों अपनी अपनी पेंट की चेन को बंद कर लेते, इस तरह हमारी चुदाई पूरी हो जाती और हम दोनों इस तरह से एक दूसरे के साथ और उस प्यार से बहुत खुश थे ।।

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भाभी की इच्छा मोटा लंड लेने का http://sexkahani.net/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%87%e0%a4%9a%e0%a5%8d%e0%a4%9b%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%8b%e0%a4%9f%e0%a4%be-%e0%a4%b2%e0%a4%82%e0%a4%a1-%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%a8/ http://sexkahani.net/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%87%e0%a4%9a%e0%a5%8d%e0%a4%9b%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%8b%e0%a4%9f%e0%a4%be-%e0%a4%b2%e0%a4%82%e0%a4%a1-%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%a8/#comments Fri, 20 Jan 2017 10:09:36 +0000 http://sexkahani.net/?p=9774 हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम प्रिंस है और में हैदराबाद का रहने वाला हूँ. दोस्तों एक भाभी ने मेरे साथ सेक्स करने की अपनी इच्छा जाहिर की. वो भाभी विजयवाड़ा की रहने वाली थी और वो अपने पति से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं थी तो मैंने उनका अपना फोन नंबर लिया और उनको कॉल किया तो उन्होंने मेरा कॉल उठाया और फिर उन्होंने मुझे हैल्लो कहा. दोस्तों उनकी आवाज बहुत मीठी थी और फिर उन्होंने बातों ही बातों में मेरे साथ एक बार सेक्स करने की अपनी एक इच्छा जाहिर की तो मैंने भी उनको तुरंत हाँ कर दिया और दोस्तों उनका नाम विशाखा था.

फिर उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या तुम मुझको अच्छी तरह संतुष्ट कर पाओगे? फिर मैंने बोला कि आप बिल्कुल भी टेंशन मत लो और अगर आपने मेरे साथ एक बार सेक्स कर लिया तो आप भी मान जाओगे कि आपने आज तक सेक्स का ऐसा असली मज़ा लिया ही नहीं था. फिर उन्होंने मुझसे कहा कि वो एक अच्छे परिवार से है और अब यह बात हम दोनों के बीच बिल्कुल गुप्त रहेगी, क्यों ठीक है? फिर मैंने उनको अपने ऊपर विश्वास दिलाया कि में इस काम में माहिर हूँ और यह बात हम दोनों के बीच में ही रहेगी और फिर उन्होंने मुझसे विजयवाड़ा आने को कहा.

फिर मैंने कहा कि में सिर्फ रविवार को ही फ्री रहता हूँ. फिर मैंने उन्हें बताया कि में एक बहुत बड़ी कंपनी में नौकरी करता हूँ, लेकिन उन्होंने मुझे बताया कि रविवार को तो उनके पति पूरा दिन घर में ही रहते है और रविवार को यह सब करना मुमकिन नहीं है. फिर उन्होंने मुझे सोमवार को आने को कहा, क्योंकि सोमवार को वो अपने घर पर बिल्कुल अकेली होती है. फिर मैंने कुछ देर सोचकर सोमवार को हाँ कर दिया.

फिर मैंने सोमवार के दिन अपने ऑफिस से छुट्टी ले ली और फिर सोमवार को उनको फोन करके में विजयवाड़ा के लिए निकल गया और बस स्टेंड पर पहुंचकर मैंने उनको कॉल किया तो उन्होंने मुझे उनके घर का पता बता दिया और मुझे एक ऑटो करके अपने घर पर आने को कहा. फिर मैंने बस स्टेंड के बाहर से एक ऑटो लिया और उनके बताए हुए पते पर पहुंचकर उनको फोन कर दिया. दोस्तों में उस समय उनके घर के ठीक सामने खड़ा हुआ था तो वो बाहर आई और उन्होंने मेरी तरफ हाथ हिलाया और मुझे अंदर आने को कहा.

फिर में तुरंत उनके घर के अंदर चला गया और उन्होंने दरवाजा बंद कर दिया. वो करीब 36 साईज की एकदम चिकनी, सुंदर, सेक्सी बदन की औरत थी और उनका बदन एकदम मस्त था, उनको देखकर मेरे मुहं में पानी आ गया और मैंने अपने आप से कहा कि बेटा प्रिंस आज तो तेरी लौटरी लग गयी, क्योंकि उसके जैसा माल मैंने अभी तक चोदा नहीं था और वो बहुत ही सेक्सी थी, उनकी पतली कमर, गदराया हुआ बदन, बड़े आकर के बूब्स मुझे अपनी तरफ आकर्षित कर रहे थे.

उन्होंने उस टाईम साड़ी पहनी हुई थी और जिसका ब्लाउज बड़े गले का था तो उससे उनकी छाती बहुत ही सुंदर दिख रही थी, मेरा तो उन्हें देखकर ही मन ललचाने लगा था और में उनको नजर गड़ाकर लगातार देखे जा रहा था. तभी उन्होंने मुझसे बैठने को कहा और मेरे लिए कोल्ड ड्रिंक लेकर आई और उन्होंने मुझे दे दिया और एक ग्लास खुद लेकर मेरे पास में सोफे पर बैठ गयी और अब हम दोनों इधर उधर की बातें करने लगे.

उसने मेरी नौकरी और मेरे परिवार के बारे में मुझसे पूछा. फिर उन्होंने बातें करते करते अपना एक हाथ मेरे पैर पर रख दिया और उसको सहलाने लगी और मेरी पेंट के ऊपर से मेरे लंड को धीरे धीरे सहलाने लगी और उनके स्पर्श से ही मेरा लंड तन गया और फिर मैंने भी उनको अपनी तरफ खींचकर उनके होंठो को अपने मुहं में लेकर स्मूच करने लगा, उनके होंठ बहुत ही अच्छे रस भरे थे. फिर मैंने अपनी जीभ को उनके मुहं में डालकर उनकी जीभ को चूसने लगा और वो भी मेरा पूरा पूरा साथ दे रही थी.

दोस्तों हमने करीब बीस मिनट तक स्मूच किया और फिर में उनकी साड़ी के पल्लू को अलग करके उनके बूब्स को दबाने लगा, उनके बूब्स बड़े बड़े और बिल्कुल टाईट थे. मैंने अब उनको एक एक करके तेज़ी से दबाना शुरू कर दिया और वो सिसकियाँ भर रही थी. फिर मैंने उनके ब्लाउज को खोल दिया, उन्होंने लाल कलर की ब्रा पहनी हुई थी और वो उस लाल कलर की ब्रा में बहुत सेक्सी लग रही थी. फिर मैंने उनके बूब्स उनकी ब्रा से आज़ाद कर दिए.

दोस्तों आप सभी को क्या बताऊँ? उनके बूब्स बड़े ही सेक्सी थे, शायद उसने अपने फिगर की बहुत देखभाल की थी और उसके फिगर का साईज करीब 36-30-38 था, उनके निपल्स एकदम गुलाबी थे और बूब्स एकदम गोल मटोल और बड़े बड़े थे. उनके बूब्स को देखकर मुझसे रहा नहीं जा रहा था तो में उनके बूब्स पर टूट पड़ा और उनके बूब्स को अपने मुहं में लेकर ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा और दूसरे बूब्स को अपने हाथों से लगातार दबा रहा था और उसके निप्पल को चूस रहा था.

उसकी साँसे अब बहुत तेज हो रही थी और वो सिसकियाँ भर रही थी और मुझसे कह रही थी कि अहहह्ह्ह्ह आईईईईइ हाँ और ज़ोर से चूसो, खा जाओ अहहह्ह्ह्ह बड़ा मज़ा आ रहा है, उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ चूसो अहहह्ह्ह. फिर में बारी बारी से उसके दोनों बूब्स को चूस रहा था. मैंने करीब 40 मिनट तक उसके बूब्स को सक किया और फिर मैंने उसकी साड़ी को उतार दिया और अब वो मेरे सामने सिर्फ पेटीकोट में खड़ी हुई थी और बड़ी सेक्सी लग रही थी. दोस्तों आप ये कहानी न्यू हिंदी सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है l

फिर उसने मेरी शर्ट को उतार दिया और मेरी पेंट को भी अलग कर दिया और मेरे लंड को अंडरवियर के ऊपर से ही पकड़ लिया और बहुत तेज़ी से सहलाने लगी और एकदम से मेरी अंडरवियर को नीचे कर दिया और मेरे लंड को बहुत गौर से देखने लगी और मेरे लंड को अपने दोनों हाथों में लेकर उसने कहा कि तुम्हारा लंड तो बड़ा ही लंबा और मोटा है? ऐसे ही लंड को लेने की में हमेशा से ही इच्छा रखती थी.

फिर वो मेरे लंड को मुहं में लेकर चूसने लगी और वो बहुत अच्छे से मेरे लंड को चूस रही थी और वो मेरे लंड को अपने हाथों से आगे पीछे करके बड़े मज़े से चूस रही थी, जिसकी वजह से मुझे बड़ा ही मज़ा आ रहा था और वो मेरे लंड को अपने मुहं के अंदर तक डालकर बड़े ही मज़े से चूस रही थी, उसने करीब 25 मिनट तक मेरा लंड चूसा और फिर मैंने उसके पेटीकोट को उतार दिया.

मैंने देखा कि उसने लाल कलर की पेंटी पहनी हुई थी और अब वो सिर्फ पेंटी में मेरे सामने खड़ी हुई थी. फिर उसने मुझे बेडरूम में चलने को कहा तो में उसको अपनी बाहों में उठाकर उसके बेडरूम में ले गया, जहाँ पर उसने ए.सी. चालू कर दिया. फिर मैंने उसकी चूत को उसकी पेंटी के ऊपर से सहलाया, लेकिन वो एकदम से सिहर उठी. फिर मैंने उसकी पेंटी को निकाल दिया और उसकी चूत अब मेरे सामने थी, उसकी वाह क्या मस्त चूत थी? एकदम साफ, फूली हुई जैसे कि दोनों पैरों के बीच में कोई फूल खिला हो.

मैंने उसकी चूत को अपने कोमल हाथ से सहलाया, उसकी वाह क्या चूत थी और मेरा मन कर रहा था कि अभी उसकी चूत को खा जाऊँ. फिर मैंने उसके दोनों पैरों को थोड़ा फैलाकर अपना मुहं उसकी चूत पर रख दिया और में अपनी जीभ से उसकी चूत को ऊपर से चाटने लगा तो वो एकदम से सिहर उठी और सिसकियाँ भरने लगी और वो अब मेरा हाथ अपनी चूत में दबाने लगी थी.

फिर मैंने उसकी चूत का छेद थोड़ा सा खोलकर अपनी पूरी जीभ उसकी चूत में डाल दी और चाटने लगा तो वो तेज़ी से सिसकियाँ लेने लगी, ओहहह और ज़ोर से चूसो अहहह्ह्ह्हह बड़ा मज़ा रहा है और चूसो अहहह्ह्ह्ह में अब तेज़ी से उसकी चूत को चाटने लगा. पूरा बेडरूम मेरे चूसने, चाटने और उनकी सिसकियों की आवाज से गूँज रहा था. फिर उसने मुझे रुकने को कहा और में रुक गया वो उठी और उन्होंने फ़्रीज़ के पास जाकर फ्रीज़ में से मेंगो जूस की एक बॉटल निकाली और मुझे देकर कहा कि आज में अपनी लाईफ का पूरा मज़ा करना चाहती हूँ प्लीज़ इस मेंगो जूस को मेरी चूत पर डालकर चाटो.

मैंने तुरंत उसको बेड पर लेटाकर जूस को उसकी चूत के अंदर बाहर डालकर उस मेंगो जूस को अपनी जीभ से चाटने लगा. ऐसे करते करते मैंने पूरी बोतल को खाली कर दिया और इस दौरान वो दो बार झड़ चुकी थी. में मेंगो जूस के साथ उसकी चूत का पानी भी पी गया. मैंने उसकी चूत को करीब 30 मिनट तक चाटा और फिर उसने मुझसे बोला कि प्लीज अब मुझसे सहा नहीं जा रहा है प्लीज अब अपना लंड मेरी चूत में डालकर मुझे चोद दो तो मैंने उसको डॉगी स्टाइल में खड़े होने को कहा तो वो तुरंत कुतिया बन गयी.

मैंने उसके पीछे जाकर अपने हाथ से अपना लंड अब उसकी चूत पर सेट करके अपना पूरा का पूरा लंड उसकी चूत में डाल दिया वो एकदम से घबरा गई और बोलने लगी कि प्लीज जान थोड़ा धीरे डालो तुम्हारा लंड बहुत बड़ा है, लेकिन में उसकी बात को बिना सुने उसको ज़ोर ज़ोर से धक्के देकर चोदने लगा और उसकी चूत में अपना पूरा लंड डालकर उसको धक्के देने लगा. चुदाई में पहले तो उसे थोड़ा दर्द हुआ, लेकिन फिर उसे भी मज़ा आने लगा और वो भी अपनी गांड को पीछे करके मेरा साथ देने लगी और वो सिसकियाँ भरने लगी अहह्ह्ह्हह्ह चोदो उह्ह्हह्ह और ज़ोर से मुझे उईईईईईईइ बड़ा मज़ा आ रहा है, तुम मेरी चूत को आज फाड़ दो अहहह्ह्ह्हह में बहुत दिनों की प्यासी हूँ अहहहह तुम आज मेरी प्लीज चूत की प्यास बुझा दो, मेरे पति ने मुझे कभी ऐसे नहीं चोदा है अहह्ह्ह्हह्ह ऊईईईईई मज़ा आ गया.

दोस्तों उसकी बातें सुनकर मैंने अपना लंड उसकी चूत में तेज़ी से धक्के देकर डालना शुरू कर दिया और पूरा रूम चुदाई की आवाजों से गूँज रहा था. फिर मैंने उसको करीब 30 मिनट तक लगातार चोदा और फिर हम दोनों एक साथ ही झड़ गये और झड़ने के बाद बेड पर थककर लेट गये वो मेरे पास में लेटकर मेरे बालों को सहला रही थी और कह रही थी कि प्रिंस आज मैंने पहली बार चुदाई में इतना सुख पाया है और तुमने मुझे आज बहुत खुश कर दिया.

फिर वो उठी और मेरे लंड को एक बार फिर से अपने मुहं में भरकर चूसने लगी और थोड़े ही समय के बाद मेरा लंड एक बार फिर से पहले से भी ज़्यादा कड़क हो गया और अब मैंने भी उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया, लेकिन अब उसकी चूत मुझे पहले से भी ज़्यादा स्वादिष्ट लगने लगी थी और में उसकी चूत को लगातार चाटे जा रहा था और वो भी मेरा लंड बड़े मज़े से चाट रही थी.

फिर उसने मुझसे रुकने को कहा और कहने लगी कि प्लीज मुझे दो मिनट के लिए छोड़ दो मुझे टॉयलेट आया है. तो मैंने कहा कि कोई बात नहीं मेरे मुहं में कर दो और में लगातार उसकी चूत को चाटे जा रहा था और अब उसने अपना पेशाब मेरे मुहं में डाल दिया और में उसका सारा पेशाब पी गया. दोस्तों मुझे उसका पेशाब भी बहुत स्वादिष्ट लगा था.

फिर हम अलग हुए और एक बार फिर सेक्स के लिए तैयार थे. मैंने उसको अपने ऊपर आने को कहा और में बेड पर लेट गया. वो मेरे ऊपर आकर मेरे लंड को अपनी चूत में डालकर उस पर बैठ गयी और अब मेरा पूरा लंड उसकी चूत में था. अब वो मेरे लंड के ऊपर नीचे होकर मुझे चोद रही थी और सिसकियाँ भर रही थी अहहह्ह्ह ओहह्ह्ह्हह वो लगातार मेरे लंड पर ऊपर नीचे हो रही थी और मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था. ऐसे ही हमने करीब 40 मिनट तक सेक्स का मज़ा किया और हम दोनों साथ साथ झड़ गये और हम दोनों थककर बेड पर लेट गये. दोस्तों आप ये कहानी न्यू हिंदी सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है l

दोस्तों हम दोनों को अब लगातार सेक्स करते हुए करीब तीन घंटे हो गये थे इसलिए हमने अपने कपड़े पहने और वॉशरूम जाकर अपने आपको फ्रेश किया और में ड्रॉयिंग रूम में आकर बैठ गया और वो मेरे लिए चाय बनाकर ले आई फिर हमने चाय पी और मैंने उनको अब वापस जाने के लिए बोला तो उन्होंने कहा कि आपको जाने देने का मन तो नहीं कर रहा है, लेकिन हाँ फिर भी आपको जाना तो पड़ेगा.

फिर उसने मुझे पैसे देने की कोशिश कि, लेकिन मैंने साफ मना कर दिया और कहा कि मेडम में यह सब पैसे के लिए नहीं करता हूँ, में तो यह सब मज़े के लिए करता हूँ और में एक अच्छी कंपनी में बहुत अच्छी जगह पर नौकरी करता हूँ. फिर में आखरी बार स्मूच करके अपने घर के लिए निकल गया और उसके बाद हमारा कभी मिलना नहीं हुआ और ना ही उन्होंने मुझे कॉल किया.

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रंडी की तरह सुहागरात मनाई http://sexkahani.net/%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%a1%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a4%e0%a4%b0%e0%a4%b9-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a4-%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%88-2/ http://sexkahani.net/%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%a1%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a4%e0%a4%b0%e0%a4%b9-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a4-%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%88-2/#comments Thu, 19 Jan 2017 14:18:55 +0000 http://sexkahani.net/?p=9865 आज जो सुहागरात की चुदाई कहानी बताने जा रहा हू वो मेरी सुहागरात की कहानी हैं. मेरी सुहागरात में मुझे तीन लोगो ने चोदा था, मैं भी खुश थी, मुझे भी पहले दिन ही तीन लंड से चुदाई का मौक़ा मिला, पहले तो मुझे मेरे पति ने जम कर चोदा मैं भी गांड उठा उठा के चुदवाई, चूत चटवाई, गांड मरवाई, दूध पिलाई अपने प्यारे हस्बैंड को, पर हद तो तब हो गयी, जब मेरे पति को झड़ते ही, मेरे हाथ में दुसरा लंड आ गया.

मैंने हैरान होके अपने पति के तरफ देखा, तो मेरा पति बोला कैसा लंड है, तो मैंने कहा ये क्या है, और धीरे धीरे से मसल भी रही थी, तो बोले ये तुम्हारे नंदोई है, मेरी बहन के पति, तभी साइड से एक और बंदा लंड हिला रहा था और सिगरेट पि रहा था,सुहागरात की चुदाई की कहानी सुहागरात में तीन लोगो ने मुझे जम कर चोदा.

मैंने सिर्फ अपने पति के तरफ देखा तो फिर वो बोले ये मेरा दोस्त है, मुझे तो दोनों लंड देखते ही मजा आ गया पर थोड़ा नखरे करने लगी बोली ये सब तो मेरे नंदोई बोल उठे भाभी इनका भी लंड तो हाथ में थाम के देखो, मैंने पति के दोस्त का भी लंड अपने हाथ में ले ली और हिलाने लगी, तभी नंदोई बोला इनका लंड सबसे अच्छा है मेरी बीवी कहती है, आपकी ननद, और आपके पति का लंड मेरी बीवी को चूसने में बहुत मजा आता है.

दोनों भाई बहन खूब एक दूसरे का चूसते है, दोस्तों ये कहानी आप न्यू हिंदी सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पड़ रहे है।आपके पति मेरी बीवी का चूच पिता है और मेरी बीवी आपके पति का हस्बैंड, तभी मेरा पति बोल उठा चिकनी ये आज से ३ महीने पहले से ही सुरु किये है, हम तीनो आपस में अपने पत्नी को शेयर करते है, पर मैं दो महीने से इन दोनों की पत्नी को ही चोद रहा था.

मैंने कहा भाई अभी तो मेरी शादी नहीं हुयी है दो महीने में हो जाएगी तब तक तुम दोनों अपनी अपनी बीवी से चुदवाओ मैं तुम दोनों को सुहागरात में चुदवाऊँगा. तभी ये दोनों आज यहाँ है, तुम्हे भी बहुत मजा आएगा, एक काम करो मैंने तो तुम्हे चोद चूका हु, अब मैं अपनी दोस्त की बीवी को चोदने जा रहा हु, और जीजा जी तुम्हे चोदेंगे, और मेरा दोस्त मेरी बहन को चोदेगा, यहाँ तीनो कमरे में चुदाई चलेगी.

इतना कहते ही मेरे हस्बैंड अपने दोस्त की बीवी जो बगल बाले कमरे में थी वह चले गए और मेरी ननद को चोदने इनके दोस्त चले गए, तभी मेरे नंदोई बोले भाभी आप चिंता ना करो बहुत मजा आएगा जब तीनो एक दूसरे के बीवी को चोदेंगे, मेरी पत्नी को तो बहुत मजा आ रहा है, क्यों की तीन तीन लंड मिल रहे है चुदवाने के लिए, मैं ख़ुशी से मचल उठी और तुरंत ही अपने नंदोई का लंड अपने मुह में ले ली, और चाटने लगी, मेरा नंदोई आअह आअह कर रहा था और मुह से गाली निकाल रहा था, कह रहा था तुम तो एक नम्बर की रंडी की तरह हो भाभी.

तुम तो पहली रात से ही तीन लंडो के मजा लेने लगी सबसे ज्यादा लकी तो तुम्ही ही, तो मैं भी कहा कम थी, मैंने भी कह दिया, की मैं अपने ससुराल में कैसे रहूंगी, आज तक मुझे अपने मायके में कभी किसी चीज की कमी नहीं हुयी थी, मेरा भाई मुझे रात भर चोदता था, पडोश के रामु चाचा मुझे शाम को जब मैं बाहर शौच के लिए जाती थी तब चोदता था.

दिन में जब भी मौक़ा मिलता था, सामने दूकान बाले भैया चोदने चले आते थे, मैं सोच सोच कर घबरा थी थी की मुझे से यहाँ तीन तीन लंड की आदत थी, और मैं जब ससुराल जाउंगी तो मुझे सिर्फ अपने पति का ही लंड मिलेगा, मैं काफी रोइ थी जब मैं विदा हो रही थी पर आज मैं बहुत खुश हु. दोस्तों आप ये कहानी न्यू हिंदी सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

तभी मेरा नंदोई कहने लगा अरे साली तुम तो बहुत बड़ी रंडी है, तुम तो बहुत पहले से पेलवा रही है अपने चूत में, कहा है चूत दिखा साली मुझे तो लग रहा है तेरे चूत का भोसड़ा बन गया होगा, तभी वो मेरा साडी ऊपर कर दिया और टांगो को अलग अलग करके, मेरी चूत को चिर कर देखने लगा और कहने लगा साली तेरी चूत तो होल है, मादरचोद तेरा पति तो मुझे ठग लिया, हरामी कह रहा था टाइट चूत दिलबाउंगा, मादरचोद वो तो ठग लिया, साला कहा है मैंने नहीं चोदता तुम्हे, तभी तो तमतमाता हुआ बाहर गया.

दूसरे कमरे का दरवाजा पीटने लगा और कहने लगा निकल साला हरामी, तभी मेरा पति निकला मैं दरवाजै से झांक कर देख रही थी,बोला क्या बात है जीजाजी चोदने नहीं दे रही है क्या, तो नंदोई बोलने लगे, साली तुम्हारी बीवी तो रंडी है वो कितने लोगो से चुदवा चुकी है, दोस्तों ये कहानी आप न्यू हिंदी सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पड़ रहे है।चूत तो फटा हाल है.

साले तुम कह रहे थे की ताज़ी माल दूंगा, टाइट चूत होगी, तभी मेरा पति कमरे में आ गया और बोला चिकनी तुम यार गांड मरवा लो, जीजा जी एक काम करो आप गांड मार लो गांड टाइट है, मुझे भी कहा आपने टाइट चूत दिया था वो भी तो पहले से कितने लोगो से चुदवा चुकी है.

फिर ये दोनों मान गए और फिर मेरा नंदोई मुझे उलटा लिटा के लंड पे थूक लगाया और गांड में घुसा दिया और मेरी चूच को पकड़ के दबाने लगा, फिर कहा हां ये हुई ना बात, मस्त गांड है तेरी, और फिर वो मुझे गांड मरने लगा, मेरी चूत से पानी निकल रहा था, मुझे गांड मरवाने में काफी मजा आ रहा था, मैं मन ही मन खुश थी, तभी मेरी पति का दोस्त आ गया,थोड़ा देर वो मेरी मुह में लंड डाले रखा.

मेरा नंदोई गांड में डालते डालते सारा वीर्य मेरे चूतड़ पे डाल दी पूरा गांड मेरा चिपचिपा हो गया, फिर क्या था मेरे पति के दोस्त बोले भाभी मैं भी गांड ही मारूंगा, और वो भी सेम पोजीशन में ही मुझे गांड चोदने लगा, करीब ३० मिनट तक गांड मारने के बाद, मुझे घोड़ी बना दिया और चूत में पेलने लगा, मैंने भी हाय हाय कर रही थी और चुदवा रही थी.दोस्तों ये कहानी आप न्यू हिंदी सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

जब तीनो हरेक को चोद लिए तब तक 4 बज चुके थे, अब हम तीनो कपल एक ही कमरे में हो गए और ग्रुप सेक्स करने लगे, क्या मस्त सीन था कोई चाट रहा है कोई चोद रहा है, मेरी चूच कोई दबा रहा कोई चोद रहा है, कोई किसी की गांड में ऊँगली डाल रहा है मजा आ गया था पहले दिन, फिर तो एक साथ चुदवाने का मौक़ा नहीं मिला मैं कभी किसी के यहाँ जाती हु, और कोई मेरे यहाँ आती है अब सिर्फ अदला बदली ही चल रहा है,कैसी लगी सुहागरात की सेक्स स्टोरी , रिप्लाइ जररूर करना , अगर कोई मेरी चूत की चुदाई करना चाहते हैं तो…

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