Hindi Sex Kahaniya & Sex Pictures https://sexkahani.net Desi Chudai Kahani, Indian Sex Stories, Chudai Pics ,College Girls Pics , Desi Aunty-Bhabhi Nude Pics , Big Boobs Pics Sat, 15 Apr 2017 14:42:22 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=4.7.3 मैं बताउंगी कैसे कुत्ते ने मुझे चोदा, कैसे कुत्ते ने मेरी गांड मारा, कैसे मैंने कुत्ते से बूर चटवाया,कैसे कुत्ते ने मेरी चूत फाड़ दी https://sexkahani.net/%e0%a4%ae%e0%a5%88%e0%a4%82-%e0%a4%ac%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%89%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%88%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%87-%e0%a4%a8/ https://sexkahani.net/%e0%a4%ae%e0%a5%88%e0%a4%82-%e0%a4%ac%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%89%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%88%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%87-%e0%a4%a8/#respond Sat, 15 Apr 2017 14:40:43 +0000 https://sexkahani.net/?p=11016   हेलो फ्रेंड्स, आज जो जानवर से चुदाई की कहानी बताने जा रही हु वो मेरी कुत्ते के साथ चुदाई की कहानी हैं । आज मैं बताउंगी कैसे कुत्ते ने मुझे चोदा, कैसे मैं कुत्ते से चुदी,कैसे कुत्ते ने मेरी चूत चाटा, कैसे कुत्ते ने मेरी गांड मारा, कैसे मैंने कुत्ते से बूर चटवाया, कैसे मैंने कुत्ते से चुदवाया, कैसे कुत्ते ने चूत फाड़ दी, कैसे चुदासी चूत की प्यास बुझाने के लिये कुत्ते से चुदवाया । हालाँकि मुझे चुदाई का तजुर्बा नहीं था लेकिन मैं चुदाई से मुत्तलिक सब जानती थी। सत्रह-अठारह साल की उम्र से ही मैं भी हम-उम्र लड़कियों की तरह सैक्स में दिल्चस्पी लेने लगी थी। स्कूल के दिनों में ‘मिल्स एंड बून’ की रोमाँटिक किताबें बहुत मज़े लेकर पढ़ती थी

 

और फिर बी-कॉम के दिनों से धीरे-धीरे गंदी सैक्सी किताबें पढ़ने का शौक लग गया था। दिन में कईं बार अपनी उंगलियाँ या केले,  मोमबत्ती और वैसी कोई भी चीज़ अपनी चूत में घुसेड़-घुसेड कर चोदते हुए मज़े लेती थी। बी-कॉम के फाइनल इयर में ही थी जब मैंने पहली बार कुछ सहेलियों की सोहबत में ब्लू-फिल्म देखी थी और अब तक पाँच छः दफा ब्लू-फिल्में देख चुकी थी। लेकिन आज तो मैंने चुदाई का एक ऐसा हैरत‍अंगेज़ और चुदास नज़ारा अपनी आँखों से देखा था जो मैंने पहले कभी किसी ब्लू-फिल्म या सैक्सी किताब में भी नहीं पढ़ा था और ना ही ऐसा कभी तसव्वुर किया था। फिर एक हफ्ते बाद मैं नासिक वापस आ गयी और धीरे-धीरे वक्त गुज़र गया। एम-कॉम पूरा करने के बाद मुझे एम-बी-ए करने के लिये बैंगलौर के बहुत ही जाने-माने कॉलेज में दाखिला मिल गया। बैंगलौर में हॉस्टल में रहती थी और इस दौरान मैंने कभी-कभार शराब पीना भी शुरू कर दिया। आप ये कहानी आप रियल हिंदी सेक्स स्टोरिज़ डॉट कॉम पर पड़ रहे है। मैं बेहद खूबसूरत और हसीन थी और स्कूल के ज़माने से ही कितने ही लड़के मुझे लाइन मारते थे लेकिन मैं कभी भी किसी के इश्क़ में नहीं पड़ी ना ही शादी से पहले कभी किसी से चुदवाया। एम-बी-ए पूरा होते ही मेरा निकाह हो गया। मेरे शौहर भी काफी तालीम-याफता थे और उनकी बेहद अच्छी नौकरी थी। शादी के बाद शुरू-शुरू में उनके साथ बेहद खुश थी पर धीरे-धीरे मुझे पता चला कि मेरे शौहर को सट्टे-बाजी का शौक था। अक्सर क्रिकेट मैचों के वक्त बड़ी-बड़ी शर्तें लगाते थे।

मैंने कईं दफा उन्हें समझाने रोकने की कोशीश की लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। आखिर में एक दिन बहुत बड़ी शर्त हार कर दिवालिया भी हो गये तो मुझे दहेज के लिये परेशान करने लगे। आखिर में तंग आ कर शादी के दो साल बाद ही मैंने तलाक ले लिया और मुम्बई में एक बड़े प्राइवेट बैंक में नौकरी कर ली।मुम्बई में मैं अकेली किराये के फ्लैट में रहने लगी। इसलिये हिफाज़त और अकेलापन दूर करने के लिये एक एलसेशन कुत्ता ले लिया। आहिस्ता-आहिस्ता ज़िंदगी बाकायदा चलने लगी। ज्यादा वक्त तो मैं काम में ही मसरूफ रहती और अक्सर मुझे दूसरे शहरों और कभी-कभार गैर-मुल्कों जैसे अमेरिका, यूरोप भी दौरों पर जाना पड़ता। ज़िंदगी वैसे तो पुरसुकून थी लेकिन तन्हाई की वजह से मैं कुछ ज्यादा ही चुदासी रहने लगी थी। हालाँकि ऐसे हज़ारों मौके आये कि जब अगर मैं चाहती तो गैर-मर्दों से चुदवा सकती थी लेकिन मैं कभी हिम्मत नहीं जुटा पायी। आप ये कहानी आप रियल हिंदी सेक्स स्टोरिज़ डॉट कॉम पर पड़ रहे है। पाँच-छः साल पहले स‍इदा आँटी के किस्से के बावजूद अपने कुत्ते जैकी से चुदवाने का ख्याल भी कभी मेरे ज़हन में नहीं आया। लेखिका: शाज़िया मिर्ज़ाअपनी चुदासी चूत की भड़कती प्यास बुझाने के लिये मैं हर रोज़ मैस्टरबेशन का सहारा लेती।  कॉलेज के ज़माने की तरह ही फिर से गंदी सैक्सी किताबों और ब्लू-फिल्मों का चस्का लग गया। इसके अलावा मैंने अक्सर शराब पीना भी शुरू कर दिया।

जब भी काम के सिलसिले में यूरोप जाती तो डिल्डो और ब्लू-फिल्में ज़रूर  खरीद कर लाती। इस तरह मैंने तरह-तरह के छोटे-बड़े कईं डिल्डो जमा कर लिये और रात-रात भर मैं इन डिल्डो से अपनी चूत की आग बुझा कर मज़ा लेती। ऐसे ही करीब दो साल बीत गये। एक दिन की शाम को मैं बैंक से घर लौटी तो मैं बेहद चुदासी महसूस कर रही थी। लौटते हुए रास्ते में मैं चर्च-गेट स्टेशन के नज़दीक सड़क किनारे पटरी पर बिकने वाली हिंदी की दो-तीन गंदी सैक्सी कहानियों की किताबें ले कर आयी थी। अगले दिन इतवार था इसलिये शराब की चुस्कियों के साथ चुदासी कहानियों का मज़ा लेने का प्रोग्राम था। दरसल अंग्रेज़ी की सैक्सी कहानियों के मुकाबले मुझे हिंदी और उर्दू  के गंदे अश्लील अल्फाज़ों वाली चुदासी कहानियाँ पढ़ने में ज्यादा मज़ा आता है। घर पहुँचते ही कपड़े बदले बगैर ही मैं ड्राइंग रूम में सोफे पर बैठ कर वोडका की चुस्कियाँ लेते हुए वो रंगीन चुदासी किताबें पढ़ने में मसरूफ हो गयी। आप ये कहानी आप रियल हिंदी सेक्स स्टोरिज़ डॉट कॉम पर पड़ रहे है। कहानियाँ पढ़ते-पढ़ते जल्दी ही मेरी चूत मचमचाने लगी और शराब का भी थोड़ा नशा होने लगा। मैंने अभी भी काले रंग का फॉर्मल पेन्सिल स्कर्ट और सफेद टॉप पहना हुआ था। इस दौरान शराब और किताब का मज़ा लेते हुए मैं अपनी स्कर्ट का हुक और ज़िप खोल चुकी थी और पैंटी के अंदर हाथ डाल कर चूत सहला रही थी।

ऐसे ही कुछ देर में नशा इस कदर परवान चढ़ गया कि मैं झूमने लगी। किताब में छपे हर्फ भी साफ नहीं पढ़ पा रही थी तो आखिरकार किताब एक तरफ उछाल कर फेंकते हुए मैं खड़ी हुई और सैंडलों में लड़खड़ा कर चलती हुई और रास्ते में अपनी स्कर्ट और बाकी कपड़े उतारती हुई मैं  बेडरूम की तरफ बढ़ी। जब मैं बेडरूम में पहुँची तो पैरों में ऊँची पेन्सिल हील के काले सैंडलों के अलावा मैं मादरजात नंगी थी। बेडरूम में आदमकद आइने के सामने खड़े हो कर मैंने अपना जिस्म निहारा और खुद को आइने में देखते-देखते बेड तक पीछे हटते हुए बिस्तर पर बैठ गयी। आप ये कहानी आप रियल हिंदी सेक्स स्टोरिज़ डॉट कॉम पर पड़ रहे है। अभी भी अपने सामने आइने में देखते हुए मैंने अपनी टाँगें फैलायी और अपनी चूत के ऊपरी लबों पर उंगली फिराते हुए खुद को देखा। फिर आहिस्ता से अपनी दो उंगलियाँ अंदर घुसेड़ दीं। चूत की मचमचाहट और झड़ने की तमन्ना मुझ पर हावी हो गयी और मैं अपनी चूत में दो उंगलियाँ अंदर बाहर करती हुई पीछे बिस्तर पर कमर के बल लेट गयी। मेरे चूतड़ बिस्तर के किनारे पर थे और पैर ज़मीन पर। मेरी चूत बेहद भीगी हुई थी और मैंने तीसरी उंगली भी अंदर घुसेड़ दी और आहिस्ता-आहिस्ता अंदर बाहर करने लगी। दूसरे हाथ से अपने निप्पल उमेठते हुए मैं सिसक रही थी। फिर अपनी भीगी उंगलीयाँ बाहर निकाल कर मैंने आहिस्ते से उन्हें फिसलाते हुए अपने तंग छेद की तरफ खिसका दिया जो मुझे दिवाना कर देता है।

अपनी बीच वाली भीगी हुई चिकनी उंगली मैंने अपनी गाँड के छेद पर फिरायी और फिर आहिस्ता से अंदर घुसेड़ दी। उसी लम्हे मुझे वो महसूस हुआ! यही वो लम्हा था जब मेरी ज़िंदगी में एक नये हसीन दौर का आगाज़ हुआ लेकिन दुनिया की नज़रों में ये मेरी बदकार और बदचलन ज़िंदगी का आगाज़ था! लेखिका: शाज़िया मिर्ज़ा मुझे अपनी गाँड के छेद और उसके अंदर घुसी हुई उंगली के आसपास गरम और मुलायम भीगा सा एहसास हुआ। मैं चौंक कर घबराते हुए हड़बड़ा कर बैठी तो देखा कि कुत्ते ने मेरी उंगली चाट रहा था। उसने मेरी तरफ देखा लेकिन उसने चाटना बंद नहीं किया। मेरे अंदर कतरा-कतरा चींख उठा कि उसे रोक दूँ! उसे परे ढकेल दूँ! लेकिन फिर अचानक कईं साल पहले सईदा आँटी और उनके कुत्ते की चुदाई का नज़ारा मेरे ज़हन में उभर आया और फिर शराब के नशे और अपनी उंगली और गाँड के छेद पर जैकी की ज़ुबान के एहसास ने मुझे कमज़ोर बना दिया। आप ये कहानी आप रियल हिंदी सेक्स स्टोरिज़ डॉट कॉम पर पड़ रहे है। मैं अपनी उंगली अंदर-बाहर करती हुई जैकी को अपनी वो उंगली और गाँड ज़ुबान से चाटते हुए देखने लगी। मैंने नज़रें उठा कर सामने आइने में खुद को कुत्ते की ज़ुबान से मज़े लेते हुए देखा। ज़लालत का एहसास होने की बजाय ये नज़ारा देख कर मेरी चाहत और ज़्यादा बढ़ गयी। मैंने उसे परे ढकेल सकती थी…. चिल्ला कर डाँटते हुए उसे रोक सकती थी… ! लेकिन उसे रोकने की बजाय मैंने उसकी ये हरकत ज़ारी रहने दी।

  सोलवां सावन – Forgen Chudai

मुझे कुत्ते की ज़ुबान अपनी चूत के ऊपर क्लिट की तरफ चाटती महसूस हुई। एक बार फिर उसने ऐसे ही किया लेकिन इस बार उसकी ज़ुबान का दबाव ज्यादा था जिससे कि उसकी ज़ुबान मेरी चूत के अंदर घुस कर चाटते हुए मेरी क्लिट तक ऊपर गयी। चाटते हुए कुत्ते की ज़ुबान मेरी चूत के अंदर बाहर फिसलने लगी। बहुत ही मुख्तलिफ़ एहसास था। मुझे उसकी ज़रूरत थी…उसकी आरज़ू थी। काँपते हाथों से मैंने अपनी चूत फैला दी इस उम्मीद के साथ कि वो मेरी तड़पती चूत को अपनी खुरदुरी ज़ुबान से चाटना ज़ारी रखेगा। कुत्ते ने ऐसा ही किया… अपनी लालची ज़ुबान से कुत्ते ने मेरी चूत चाटते हुए रस पीने लगा। बे-इंतेहा हवस और वहशियाना जुनून सा मुझ पर छा गया था।फिर मैं बिस्तर के बीच में अपने हाथों और घुटनों के बल झुककर कुत्तिया की तरह हो गयी और जैकी को भी बिस्तर पर आने को कहा। वो कूद कर बिस्तर पर चढ़ गया और कुत्ते ने पीछे से मेरी चूत चाटने लगा। मैंने देखा कि उसका लाल-लाल चमकता हुआ लौड़ा कड़क हो कर बाहर निकला हुआ था। उसके लौड़े का नाप देख कर बेखुदी-सी की हालत में मैंने अपना हाथ बढ़ा कर उसका अज़ीम लौड़ा अपनी मुठ्ठी में ले लिया। आप ये कहानी आप रियल हिंदी सेक्स स्टोरिज़ डॉट कॉम पर पड़ रहे है। मेरी इस हरकत से जैकी झटके मारते हुए मेरी मुठ्ठी में अपना लौड़ा चोदने लगा। लेकिन साथ ही उसने मेरी चूत चाटना बंद कर दिया जो मैं नहीं चाहती थी। उसे मसरूर करना उस वक्त मेरी नियत नहीं थी।

मैंने उसका लौड़ा सहलाना बंद कर दिया तो वो फिर से कुत्ते ने मेरी चूत अपनी ज़ुबान से चाटने लगा। मैं मस्त होकर ज़ोर-ज़ोर से सिसकने लगी और कुछ ही देर में चींखते हुए झड़ गयी। जैकी ने फिर भी मेरी चूत चाटना बंद नहीं किया और इसी तरह मेरी चूत ने दो बार और पानी छोड़ा। मुझे ज़बरदस्ती जैकी का सिर अपनी चूत से दूर हटाना पड़ा क्योंकि लगातार चाटने से मेरी क्लिट बहुत ही नाज़ुक सी हो गयी थी और दुखने लगी थी। जैकी के चाटने की मिलीजुली दर्द और मस्ती अब मुझसे और बर्दाश्त नहीं हो रही थी। लेखिका: शाज़िया मिर्ज़ा तीन बार झड़ने के बाद भी मेरी हवस कम नहीं हुई थी। बल्कि अब तो मैं कुत्ते का लंड अपनी चूत में लेने के लिये बेताब हो रही थी। प्यास की वजह से मेरा गला सूख रहा था तो पानी पीने पहले मैं नशे में लड़खड़ाती हुई किचन में गयी। जैकी भी मेरे पीछे-पीछे आ गया। मैं तो नंगी ही थी और जैकी बीच-बीच में मेरी टाँगों के बीच में अपना सिर घुसेड़ने की कोशिश कर रहा था। मैं उसकी ये कोशिश कामयाब नहीं होने दे रही थी तो वो मेरे टाँगें या फिर मेरे पैर और सैंडल चाटने लगता। आप ये कहानी आप रियल हिंदी सेक्स स्टोरिज़ डॉट कॉम पर पड़ रहे है। पानी पी कर मैं पेंसिल हील के सैंडलों में झूमती हुई ड्राइंग रूम में आ गयी और धड़ाम से गिरते हुए सोफे पर बैठ गयी। फिर अपनी टाँगें फैला कर मैंने जैकी के आगे वाले पंजे अपने हाथों में लेकर उसे अपने नज़दीक खींचते हुए अपने कंधों पर रख दिये।

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उसका लौड़ा अब बिल्कुल मेरी बेताब चूत के सामने था। अपना एक हाथ नीचे ले जा कर मैंने कुत्ते का लौड़ा अपनी मुठ्ठी में लिया और उसे अपनी चूत में हांक दिया। कुत्ते ने जोर-जोर से धक्के मारने लगा। मैं भी सोफे से अपनी गाँड ऊपर उठा कर उसके धक्कों का जवाब देने लगी। लेकिन मैं ज्यादा देर तक इस तरह उसका साथ नहीं दे सकी और वापस सोफे पर अपनी गाँड टिका कर बैठ गयी और आगे की चुदाई उस पर ही छोड़ दी। मैंने महसूस किया कि इस पूरी चुदाई के दौरान उसके लौड़े से पतला सा चिपचिपा रस लगातार मेरी चूत में बह रहा था। मैं दो दफा चींखें मारते हुए इस कदर झड़ी कि मेरी आँखों के सामने अंधेरा छा गया। फिर थोड़ी देर बाद इसी तरह ज़ोर-ज़ोर से चोदते हुए अचानक कुत्ते ने एक ज़ोर से धक्का मारते हुए अपने लौड़े के आखिर की गाँठ मेरी चूत में ठूँस दी। आप ये कहानी आप रियल हिंदी सेक्स स्टोरिज़ डॉट कॉम पर पड़ रहे है। मेरी तो दर्द के मारे साँस ही गले में अटक गयी। दर्द इस कदर था कि मैं छटपटा उठी। मुझे अपने शौहर के साथ पहली चुदाई याद आ गयी। थोड़ी सी देर में मेरा दर्द थम गया और मुझे एहसास हुआ कि जैकी झड़ने के बहुत करीब था। उसने चोदना ज़ारी रखा और मैं प्यार से उसके कान सहलाने लगी। फिर अचानक मुझे गरम और बहुत ही गाढ़ा चिपचिपा रस अपनी चूत में छूटता हुआ महसूस हुआ। लेखिका: शाज़िया मिर्ज़ा बाद में मुझे एहसास हुआ कि हम दोनों आपस में वैसे ही चिपक गये थे जैसे मैंने सईदा आँटी और उनके कुत्ते को आपस में जुड़ते हुए देखा था।

मैं जैकी को खुद से अलग नहीं कर सकती थी इसलिये मैंने उसे उसी हाल में रहने दिया और मैं उसे पुचकारते हुए उसका जिस्म अपने हाथों से सहलाने लगी। जैकी से इस तरह जुड़ कर चिपके हुए मुझे अजीब सा मज़ा और सुकून महसूस हो रहा था। करीब बीस मिनट बाद उसके लंड की गाँठ सिकुड़ी और हम अलग हुए। उस एक नशीली शाम के बाद सब कुछ बदल गया और मेरी ज़िंदगी में फिर से बहारें आ गयी… ज़िंदगी का खालीपन दूर हो गया। मैं तो जैकी की इस कदर दीवानी हूँ कि उससे बकायदा हर रोज़ ही तरह-तरह से चुदवाती हूँ… कुत्ते का लंड चुसती हूँ और अक्सर गाँड भी मरवा लेती हूँ। आप ये कहानी आप रियल हिंदी सेक्स स्टोरिज़ डॉट कॉम पर पड़ रहे है। जैकी भी बहुत शौक से मेरी चूत चाटने और चोदने के लिये मुश्ताक रहता है। इसके अलावा जज़बाती तौर पे भी हमारे दरमियान बेपनाह मोहब्बत है। हमारा रिश्ता बिल्कुल मियाँ-बीवी जैसा ही है। काश की ये ज़लिम दुनिया हमारे रिश्ते को समझ पाती। कैसी लगी कुत्ते के साथ सेक्स की स्टोरी , रिप्लाइ जररूर करना , अगर कोई घोड़े से मेरी चूत की चुदाई करना चाहते हैं तो अब जोड़ना

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जयपुर में सुनीता के घर जाकर कंडोम के बिना उसको चोदा – वो बी मेरा लोडा मजे से चाटती रही https://sexkahani.net/%e0%a4%9c%e0%a4%af%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%98%e0%a4%b0-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%95/ https://sexkahani.net/%e0%a4%9c%e0%a4%af%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%98%e0%a4%b0-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%95/#respond Sat, 15 Apr 2017 12:47:55 +0000 https://sexkahani.net/?p=10922 हेल्लो दोस्तदोस्तो, मेरा नाम अमन है, मैं हूँ। मेरी उम्र 23 साल है.. मैं 18 साल की उम्र से अन्तर्वासना की हिंदी सेक्स कहानी पढ़ रहा हूँ इसलिए मैं सेक्सी भाभियों और आंटियों को देख देख कर अक्सर उन्हें चोदने के सपने देखता रहता था, पर मुझे 20 साल की उम्र तक चुत के दीदार नहीं हुए थे।

मैं 19 साल की उम्र में पढ़ाई के लिए दूसरे शहर गया, मैं वहाँ एक साल हॉस्टल में रहा.. पर मुझे वहाँ रहने में मजा नहीं आ रहा था, इसलिए मैं और मेरे दो दोस्तों ने मिलकर किराए पर एक घर ले लिया था। घर के मालिक भी बाजू के घर में ही रहते थे, उनके घर में वो और उनकी बीवी रहती थी।

उनकी शादी को दस साल हो चुके थे.. पर उनकी अब तक कोई औलाद नहीं हुई थी, इसलिए आंटी और अंकल सब बच्चों से बड़े प्यार से रहते थे। आंटी का नाम नीलिमा था और उनकी उम्र 30 साल थी।

जब मैंने पहली बार उन्हें देखा तो मैं बस उन्हें ही देखता रहा। अब तक मैंने न जाने कितनी ही आंटियों को देखा था, पर इतनी खूबसूरत आंटी को देख कर सबको भूल गया। मैंने तभी तय कर लिया था कि पढ़ाई खत्म होने तक इस घर से कहीं नहीं जाऊँगा।

उन्हें देख कर किसी को भी ऐसा ही लगेगा कि वो एक 22 साल की लड़की हैं। उनका मासूम चेहरा और पतली गोरी कमर देख कर मुझे उनसे प्यार हो गया था।

अंकल की सोने-चांदी की दुकान थी.. इसलिए वो सुबह जाते और शाम को घर आते थे।

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मेरे दोस्तों के घर नजदीक के गाँवों में थे इस वजह से वो दोनों दो-एक दिन की छुट्टी में भी घर जाकर हो आते थे, मैं अक्सर घर में अकेला ही रह जाता था। छुट्टी के दिनों में मैं टाईम पास करने के लिए मकान मालिक के घर चला जाता था। इस तरह मेरी और अंकल आंटी की अच्छी जान पहचान हो गई थी।

ऐसे ही चार-पांच महीने निकल गए।

अब मैं शाम को ही उनके घर जाता था। फिर जब मेरे दोस्त अपने अपने घरों को जाते, तब आंटी को मिलने के लिए किसी न किसी बहाने से जाने लगा। इस तरह मेरी और आंटी की अच्छी दोस्ती हो गई।

आंटी घर पर साड़ी पहन कर ही रहती थीं.. इसलिए मुझे आंटी की गोरी कमर और कभी गोरे दूधों के भी दीदार हो जाते थे। उनके मस्त दूध देख कर मैं बहुत गर्म हो जाता था और मैं रोज आंटी के नाम की मुठ मार लिया करता था।

एक बार अंकल को किसी काम से हफ्ते भर के लिए बाहर जाना था और आंटी रात को अकेली रहने वाली थीं.. इस वजह से अंकल ने मुझे रात को अपने घर सोने आने का आग्रह किया।

यह सुन कर मुझे अपनी और आंटी की चुदाई का सपना सच होता नजर आ रहा था, मैंने तुरन्त ‘हाँ’ कह दी।

सुबह अंकल अपने काम के लिए निकल गए और अब मैं रात होने का इन्तजार करने लगा। खाना खाने के बाद मैं आंटी के घर गया। जब मैं उनके घर पहुँचा, तब तक आंटी ने भी खाना खा लिया था।

फिर थोड़ी देर बातचीत करने के बाद मुझे दूसरे बेडरूम की ओर इशारा करते हुए आंटी कहने लगीं- तुम इस बेडरूम में सो जाना।
मैंने ‘ठीक है..’ कह कर रजामंदी जता दी।

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फिर वो अपने रूम में चली गईं, उस रात में आंटी को चोदने का प्लान बनाने लगा।

आंटी एक सीधी-सादी औरत थीं.. इसलिए मैंने समझ लिया था कि जैसे अन्तर्वासना की कहानियों में पढ़ा था कि सेक्सी मूवी दिखाने से.. या फिर अपना लंड दिखाने से वो अपनी चुत नहीं देने वाली थीं।

मैंने रात को बहुत सोचा.. तब मुझे एक आईडिया आया। मैंने अपने रूम के पंखे को रात में ही बिगाड़ दिया और हॉल में जाकर पता लगाया कि लाईट का मेन स्विच कहाँ पर है.. फिर मैं अपने काम की चीजें तलाश कर रहा था।

तभी मुझे बाथरूम में आंटी की गुलाबी ब्रा और काली पैंटी दिखी।

मैंने वो ब्रा और पैंटी लेकर उसे नाक के पास रख कर आंटी की चुत की मादक खुशबू सूँघने लगा। फिर उन्हें अपने लंड पर रख कर मुठ मारने लगा। उस दिन पहली बार किसी की पैंटी से मुठ मार रहा था, इसलिए मुझे बहुत मजा आया था।

फिर मैं रूम में जाकर सो गया। सुबह मैं जल्दी उठा तो देखा कि आंटी नहाने के लिए जा रही थीं। तब उन्होंने काले रंग की नाईटी पहनी हुई थी। उस समय आंटी को देख कर मन कर रहा था कि उन्हें पकड़ कर अभी नंगी करके चोद दूँ, पर मैं अपने लंड को संभालते हुए अपने कमरे में जाकर मुठ मारने लगा।

कुछ देर बाद मैंने बाजार जाकर एक दवा की दुकान से

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सुंदरी की छोटी चूत में मेने अपना बड़ा लंड डाल के चोदा उसके मुँह मेसे फिन निकल आया https://sexkahani.net/%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%9b%e0%a5%8b%e0%a4%9f%e0%a5%80-%e0%a4%9a%e0%a5%82%e0%a4%a4-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%a8/ https://sexkahani.net/%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%9b%e0%a5%8b%e0%a4%9f%e0%a5%80-%e0%a4%9a%e0%a5%82%e0%a4%a4-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%a8/#respond Sat, 15 Apr 2017 12:46:18 +0000 https://sexkahani.net/?p=10987 दोस्तों, आपने इस कहानी का पहला भाग पढ़ लिया होगा अगर नही पढा हे तो पढ़ लीजिए वो आपको इस नाम से मिलेगा ” लड़की खाते हुए पकड़ा गया “मेने फिर उनकी ब्रा और पेंटी दोनों उतार दिया और उन्हें कुर्सी पे बिता दिया और फिर मैं भी उसी कुर्सी पे उल्टा बात गया उनकी तरफ मुह कर के उन्ही के उपर और फिर उनके दोनों चुचो को हाथ में पकड़ के उन्हें मसलने लगा और एक एक कर के उनके निप्पल को चूसता रहता | वो बोलने लगी चूसले मेरे दूध को निचोड़ निचोड़ के पी ले मेरे दूध को और जोर से हम्म्म्म अह्हह्ह ओह्ह उई माँ अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह स्स्स्स | मैं उसके चुचो को चूस रहा था और वो मेरे लंड को पकड़ के हिला रही थी, दस मिनट तक यही चला फिर में खड़ा हो गया और वो मेरे सामने घुटने के बल बैठ गयी और फिर मेरे लंड को पकड़ के जोर जोर से हिलाने लग गयी | एक मिनट तक मेरे लंड को हिलाई और फिर उसे अपने मुह में भर लिया और उसपे जीभ फेरते हुए उसे चूस रही थी | मैं तो उनके चूसने के कारण हवा में उड़ने लग गया था क्या मज़ा आ रहा था मुझे उस वक्त मैं आपको बता नही सकता था | पाँच मिनट के बाद मुझे लगा की अब मेरा हो गया और यही सोचते सोचते में उनके मुह में ही झड गया और वो मुठ को एक दम से पी गयी जेसे कुछ हुआ ही न हो |फिर मैं उनके साथ उनके कमरे में गया और फिर उन्हें लेता के उनके उपर लेट गया और उन्हें चूमने लगा | चुमते चुमते में उनके चुचो पे आ गया और फिर उनके निप्पल को मुह में भर के कस कस के चूसने लगा | वो मेरे सर पे हाथ फेर रही थी और मेरे सर को अपने चुचो पे दबा रही थी | मैं बिच बिच में उनके निप्पल को काट भी देता और वो उईई कर के चीख पडती | फिर मैं उनके निप्पल को छोड़ के उनकी चुत की तरफ चल दिया और फिर चुत की उपरी हिस्स्सय पे में जीभ फेरने लगा, वो एक दम से सिमट गयी और ह्म्म्म अह्ह्ह्ह्ह्ह उफ़ मर रही हू करने लगी | मेने उनकी चुत की पंखडियो को खोल दिया और देखा की उनकी छेद से पानी निकल रहा हे और फिर मेने उन पानी को जीभ से चाट के साफ़ कर दिया | साफ़ करने के बाद में उनकी छेद में अपनी जीभ डालने लगा और उनकी चुत को जीभ से चोदने लगा वो अब भी जोर जोर से कराह रही थी | वो अब अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह सीईईईई उम्म्मम्म अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह करने लगी और फिर एक दम से मेरे सर को पकड़ के अपनी चुत में घुसेड़ने लग गयी |मैं अब उनकी चुत को कस कस के चाटने लगा और बिच बिच में उनकी चुत को अपने दात से काट भी देता और वो अब और भी जोर से कराहने लग चुकी थी | दस मिनट के बाद आंटी ने मेरे सर को कस के दबा लिया चुत में और बोलने लगी की मैं झड़ने वाली हूँ ये बोलते बोलते मेरे मुह पे ही झड गयी | मैं वो सारा पानी पी गया और फिर उनकी चुत को चाट चाट के साफ़ कर दिया | इतनी होने के बाद मैं आंटी पे फिरसे लेट गया और फिर हम दोनों एक दूसरे को चूमने लगे और एक दूसरे के होठ को चूसते रहे | थोड़े देर के बाद आंटी बोली और नही जल्दी से निचे का गेम बजा दो, और नहीं रुक सकती में जल्दी करो | मैं उठा और फिर उनकी दोनों टांगो को दोनों बाजू खोल दिया और अपने दोनों हाथो से पकड़े रखा और फिर अपना लंड रख दिया उनकी चुत पे | शुरू में तो में उनकी चुत पे अपना लंड रगड़ने लगा तो वो झटपट करने लग गयी और बोली प्लीज़ मत तड़पाओ जल्दी से अंदर डाल दो | मेने फिर उनकी चुत पे लंड सटा दिया और धक्का मारा, मेरा लंड एक ही बार में अंदर चला गया | वो एक दम अहह कर के उठी और फिर शांत हो गयी, और मैं अब जोर जोर से धक्के पे धक्के दिए जा रहा था | आंटी बोली और जोर से हम्म अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह आह आहा हा ह हम और और और जोर से ई हम अह्ह्ह स्सस्सस | मैं आंटी की आवाज़ सुन के और जोश में आ रहा था इसीलिए मेने अपनी तेज बड़ा दी और उन्हें और कस कस के पेलने लगा तो आंटी अह्ह्ह्ह्ह हम्म मर गयी अह्ह्ह्ह्ह हम और जोर से कर और और जोरसे हम्मम्मम इतना चिलाते चिलाते व्वो एक दम से झड गयी और ढीली पड गयी |मैं तो अब तक नही झडा था और मैं उन्हें करीब बीस मिनट तक और पेलता रहा और उसके बाद मेने उन्हें घोड़ी बनने को कहा तो वो घोड़ी बन गयी और फिर मेने अपनी एक ऊँगली उनकी चुत में डाली और दूसरी ऊँगली उनकी गांड में और फिर दोनों को आगे पीछे करने लगा  और फिर कुछ देर के बाद मेने उनकी गांड के छेद पे लंड रखा और कस के दे दिया मेरा लंड आधा ही अंदर गया और उनके मुह से कस के चीख निकल पड़ी जेसे किसी ने उनके गांड में तलवार दे दिया हो | पूरा कमरा गूंज उठा उनकी चीख से, फिर वो बोलने लगी निकालो इसे में नही ले सकती इसे अंदर | मैं फिर उसी हाल में उनके उपर लेट गया और उनके चुचो को मसलने लग गया तक उनका दर्द हल्का हो जाये और फिर जब उनका दर्द कम हो गया तो मैं उनके चुचो को एक हाथ से मसलने लग गया और दूसरे हाथ से उनके चुत को सहला रहा था, उनके मुह से फिरसे सिसकिय निकलने लग गयी तो फिर मेने मोका देख के एक और धक्का दे दिया और पूरा घुसेड दिया | वो फिर से चीख उठी पर इस बार में रुका नही और धक्का देता रहा और कुछ देर के बाद आंटी बोली जोर जोर से धक्के दे, मैं आगे की तरफ दे रहा था वो भी उसी वक्त अपनी गांड पीछे को कर रही थी और एक दम ताल से ताल मिला के चुदाई चल रही थी |बीस मिनट उनके गांड को ठोकने के बाद में लेट गया तो वो मेरे उपर आ गयी और फिर मेरे लंड को अपने चुत पे रगड़ने लग गयी और फिर लंड को अपनी चुत पे सेट किया और फिर मेरे लंड पे बैठ गयी और मेरे सामने मेरा लंड धीरे धीरे गायब होता दिख रहा था | वो अब मेरे उपर उछल कूद करने लग गयी और अपने चुत को मेरा लंड खिला रही थी, मेने भी उनकी थोड़ी मदद की और में निचे से कस कस के शोट देने लगा | जब में निचे से शोट देता तो मेरी जांघे उनके गांड से कस के टकराती जिसके कारण पुरे कमरे में टकराने की आवाज़ गूंज उठती | करीब दस मिनट तक वो मेरे उपर उछालती रही और फिर मेरे उपर ही झड गयी और फिर वो उतरने लगी तो मेने उतरने नही दिया और उन्हें पकड़े रखा और कस कस के धक्के देने लगा निचे से और फिर में उन्हें बोला की मेरा निकल रहा हे तो वो झट से हट के मेरे लंड को अपने मुह में ले ली और फिर चूसने लगी तो मेने दो तीन झटके उनके मुह में भी दिया और फिर उनके मुह में झड गया | वो मेरा लंड को चाट चाट के साफ़ कर दी और फिर मेरे उपर ही लेट गयी |आधा घंटा आराम करने के बाद उन्होंने मेरे छाती पे सर रखा और फिर बोली आज तो मजा आ गया, क्या चुदाई हुई मेरी वह | सुनो मेरे पती तो महीने में एक बार ही पलते हे इसी तरह पर मुझे हर दिन चाहिए और वो तो यहाँ रहते नही इसीलिए क्या तुम हर रोज मेरी चुदाई कर सकते हो ? मैं बोला हर रोज तो नही पर देखूंगा की एक दिन छोड़ के जरुर कर दूँगा वो बोली ठीक हे | मेने उनकी इच्छा दो साल तक पूरी की और साथ ही साथ मेरे क्लास की लड़की की भी इच्छा पूरी की | अब वो दोनों यहाँ नही रहते दोनों यहाँ से चले गए अब में बस वीडियो देख के हिलाता हूँ |

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वो अनजान भाभी को ट्रैन में गोद में बिठा के धीरे धीरे चोदता रहा – वो ऊह्ह्ह्ह आअह्ह करती रही https://sexkahani.net/%e0%a4%b5%e0%a5%8b-%e0%a4%85%e0%a4%a8%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%88%e0%a4%a8-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82/ https://sexkahani.net/%e0%a4%b5%e0%a5%8b-%e0%a4%85%e0%a4%a8%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%88%e0%a4%a8-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82/#respond Sat, 15 Apr 2017 12:45:19 +0000 https://sexkahani.net/?p=10890 हेलो दोस्तों मेरा नाम लकी है और मैं दिल्ली से हु. यह मेरी पहली कहानी है उम्मीद है आप सबको पसंद आएगी.. मैं कानपूर से हु और दिल्ली में रहता हु. मेरी उम्र २३ साल है और मैं दुबली पतली कद काठी का हु पर मेरा लण्ड ६ इंच लंबा और २.५ इंच मोटा है. तो जब मेरी दिल्ली में पहली जॉब लगी तो मैं जोइंग के दिन कानपूर से दिल्ली जा रहा था. मेरा रिजर्वेशन नहीं था सो मैंने पैसे बचाने के लिए जनरल बोगी का टिकट लिया पर जनरल में बहुत भीड़ थी तो मैंने टी टी को २०० रस देकर स्लीपर में घुस गया . रात के ख़रीद १ बजे थे सब सो रहे थे, मैं एक नीचे की सीट पकड़ कर बैठ गया , करीब २ बजे मेरे ऊपर की बर्थ से एक भाभी नीचे उतरी उन्होंने ने मुझे नीचे देखा नहीं सो मैं बी नींद में था जैसे ही वो ऊपर से उतरी उनकी मोटी गांड में मुंह धस गया.. मुझे बड़ा मज़ा आया और जीन्स में लण्ड बी खड़ा हो गया , फिर उन्होंने मुझे घूर के देखा और वापस बाथरूम की तरफ चली गई

थोड़ी देर में जब वो वापस आई तो मैं खड़ा हो गया तब उसने मेरा लुंड खड़ा हुआ देख लिया और एक प्यारी सी स्माइल दे कर अपनी बर्थ पर चली गई! उसके बाद वो लगातार मुझे देख रही थी! मेरा बी लुंड उसे देख क्र खड़ा हो गया था क्युकी वो बहुत सेक्सी थी और उसके दूध भी ३४ के थे! थोड़ी देर बाद जब सब सो गए तो उसने मेरे को ऊपर अपनी सीट पर बुला लिया और कहा की आप बैठ जाओ. मैं बैठ गया. उसके उसने मुझे कहा की ठण्ड बहुत है आप मेरा शाल ओढ़ लो तो मैंने उसके साथ शाल को शेयर किया. तब हमारी बात चीत हुयी. उसने बताया की वो दिल्ली एक शादी में जा रही है और कानपूर की रहने वाली है! मैंने शाल के अंदर उसकी जांघ पर धीरे से हाथ फेरना सुरु किया पर उसने कुछ नहीं कहा तो मेरी हिम्मत और बढ़ गई, धीरे मैंने उसकी छूट पर बी हाथ फेर दिया उस बार उसने िश्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् की आवाज़ निकाली! मैं दर गया क्युकी अब धीरे धीरे कुछ लोग जाग चुके थे सुबह के ५ बजने वाले थे. उसने बताया की उसे ग़ज़िआबाद स्टेशन उतरना है तो मैंने उससे सका नंबर मांग लिया. और अपना नंबर उसे दे दिया

तभी ग़ज़िआबाद स्टेशन भी आ गया! उसके ३ दिन बाद मैंने उसे व्हाट्सप्प पर मेसेज किया तो उसका तुरंत रिप्लाई आया . धीरे हमारी बात हुई और उसने मुझे बताय की उसके १ बेबी है और उसके पति अब उसके अच्छे से सेक्स नहीं कर पाते. फिर हम सेक्स चैट करने लगे, उसने मुझसे कानपूर आने को पुछा तो मैंने उसे बताया की मैं अगले हफ्ते कानपूर आ रहा हु. और इस बीच मैंने उसे फ़ोन पर ही उसकी चूत को गीला दिया! फिर फ्राइडे को रात को मैं कानपूर के लिए निकल लिया. सैटरडे को पहुंच कर मैंने उसको शाम को कॉल किया तो उसने मुझे तुरंरत मिलने को बुलाया . मैं तय की हुई जगह पर पहुंच गया और उसका इंतज़ार करने लगा , थोड़ी देर में वो बैकलेस बलउ और ब्लू साड़ी में आई. उसकी कमर के बारे में क्या बताओ दोस्तों बीएस देख कर मुँह में पानी आ गया. मुझसे मिलने पर उसने मुझे चलने का इशारा किया और मैं उसके साथ चल दिया! वो मुझे अपनी एक दोस्त के रूम पर ले गई. और अंडर घुसते ही दोस्त को अलग कमरे में भेज दिया और दरवाजा बंद करके वापस आ गई. और आते ही उसने मेरे होठो को अपने होठो से लगा दिया !

मेरा लण्ड तो पहले से ही तैयार था. मैंने तुरंत उसका बलउ उतार फेंका. उसके होठो को अपने होठो में लेकर चूसने लगा! फिर मैंने धीरे से उसकी साड़ी भी उतार दी. अब वो सिर्फ पिंक ब्रा और पैंटी में थी. बिलकुल सविता भाभी ही जैसे लग रही थी. मैंने तुरंत उसकी ब्रा का हुक खोल दिया और दोनों चूचियों को आज़ाद कर दिया और उसके एक निप्पल को मुंह में लेकर चूसने लगा और दूसरे निप्पल को हाथ से मसलने लगा. वो मदहोस हुई जा रही थी.. और चिल्ला रही थी की और जोर से चूसो , थोड़ा और तेज़ दबाओ. उसकी मदहोस आवाज़ से मुझे भी जोश बढ़ रहा था. फिर मुझसे रहा न गया क्युकी सेक्स करते समय मुझे सबसे ज्यादा पसंद है औरत की गीली चूत को चाटना… मैं लगातार ३० मिनट चूत चाटने का शौक़ीन हु. मैं झट से उसकी पैंटी उतरी और चूत को फैलाया उसने मुझे रोक क्र कहा यह क्या कर रहे हो इसे मत चाटो , मेरे पति ऐसे नहीं करते . मैंने उसे चुप कराया और उसे लिटा दिया , और दोनों टांगो को फैला कर चूत को दोनों ऊँगली से फैलाया और अपनी जीभ चूत के दाने पर लगा दी. दोनों होठो के बीच में दबा क्र चूत को चूसने लगा.. उससे रहा न गया और वो बिना पानी की मछली की तरह छटपटाने लगी.और उसे बड़ा मज़ा आए रहा था और धीरे वो अपनी चूत को मेरे मुंह में धसान लगी फिर मैंने उसे उठने को कहा और खुद लेट क्र उसे अपने मुंह पर बैठा लिया और उसकी गांड के छेद पर अपनी जीभ घुसा दी.. और वो कमर हिल क्र अपनी चूत को मेरे होठ पर रगड़ने लगी

फिर वो अकड़ने लगी और मेरे होठो पर ही झड़ गई. मैंने उसकी चूत को चाट कर साफ़ कर दिया! फिर उसने मुझे कहा की अब मेरी चूत में अपना मोटा लण्ड डाल दो. तो मैंने उससे कहा की पहले उसकी सेवा करो.. तो उसने तुरंत मेरे लंसद को अपने मुंह में ले लिया.. और मेरे लण्ड के टोपे पर अपनी जीभ रगड़ने लगी और १५ मिनट तक उसने मेरा लण्ड चूसा. फिर मैं लेट गया और वो मेरे लुंड के ऊपर चढ़ कर बैठ गई . और ुापर नीचे हो कर उछल उछल कर चुदने लगी .. करीब १५ मिनट बाद वो थक गई तो मैंने उसे घोड़ी बनने को कहा फिर मैंने उसकी चूत को पीछे से छोड़ना चालु किया और १५ मिनट तक छोड़ा. और १५ मिनट बाद हम दोनों साथ साथ झड़ गए. वो मेरे बाहो में सोई रही पर २० मिनट बाद लण्ड दोबारा तन गया तो वो भी दोबारा चुदने को तैयार हो गई और दूसरी बार हमारी चुदाई बहुत लम्बी चली.. पूरी चुदाई के बाद हम अलग हुए.

उसके कुछ ३ दिन बाद मुझे एक अननोन नंबर से व्हाट्सप्प मैसेज आया की मुझे भी मज़ा दे दो… मैंने उनसे जब पुछा तो उन्होंने कहा की मैं वाही हु जिसकी फ्रेंड को तुमने मेरे रूम पर चोदा है…

मैं समझा गया की यह उसकी फ्रेंड है. और फिर मैंने उसे कैसे चोदा यह आपको अगली कहानी में बताऊंगा … अभी के लिए धन्यवाद

आपको मेरी रियल कहानी कैसे लगी मुझे जरूर razlucky181 @gmail मेल करके बताये मुझे मेल करे

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नेता जी की बीवी की चुत प्यासी तड़प रही थी – मेने कहा पैसे दो तो तुजे चोदू – उसने जल्दी पैसे देकर चुदवाया https://sexkahani.net/%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a5%80%e0%a4%b5%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%9a%e0%a5%81%e0%a4%a4-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be/ https://sexkahani.net/%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a5%80%e0%a4%b5%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%9a%e0%a5%81%e0%a4%a4-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be/#respond Sat, 15 Apr 2017 12:42:45 +0000 https://sexkahani.net/?p=10883 किस्मत कभी-कभी आपको किसी पराये के इतना करीब ला देगी यह आपको इस कहनी में पता चलेगा। और अगर आपको ये कहानी पसंद आती है तो मुझे vijaycbr5907@gmail.com रेस्पोंस दे

अन्तर्वासना यूजर के मेल चेक करने के दौरान मुझे किसी सुनीता नाम से मेल मिला उन्होंने अपना पता दिया और कहा- इस जगह पर आ जाना, 5000 दूंगी।और मेरी एक पुरानी मित्र रश्मि का रेफरेंस दिया।
आप यकीन नहीं मानोगे वो पता मेरे घर के पास रहने वाली सुनीता भाभी का था, सुनीता एक शादी शुदा और दो बच्चो की माँ है और किसी जनकल्याण संस्था में काम करती है, मुझसे करीब दस साल बड़ी यानि 33-34 साल की… लेकिन उसे देखकर लगता है कि उनकी कमर 26-28 की होगी, गोरा रंग, 34-30-36 का फिगर, उनके बाल लंबे हैं, कूल्हों तक आते हैं, खुले बाल लेकर जब वो कूल्हे मटकते हुए चलती है तो आग सी लग जाती है या खुले शब्दों में यों कहो क़यामत साथ चलती है…

मुझे उनकी नज़रों से हमेशा लगता था कि वो मुझे चाहती है। मेरे सामने उनकी हरकतें बड़ी मादक होती थी, छेड़छाड़ और मज़ाक वगैरह, कभी कभी वयस्क चुटकले भी, लेकिन मुझे मोहल्ले में रहना था और उनके पति राजनीतिक आदमी थे, भला मैं क्यों अपनी हद पार करता। पर अब उस मेल आने के बाद मैंने तय किया कि चलो इनके पास भी जाकर चूत का रसपान किया जाये, और यदि शिकार खुद आ रहा है तो शिकारी को हर्ज ही क्या है।

तभी मैंने सोचा इनके घर पर कैसे इन्होंने बुलाया, कहीं पिटाई तो नहीं करवाएगी?

उस दिन मैंने सुबह देखा कि सुनीता भाभी के पति सामान पैक करके अपने दोनों बच्चों और उनकी माताजी के साथ कहीं जा रहे थे, साथ में अपने लाव लश्कर को भी ले जा रहे थे।

मैं ठीक समय पर उनके घर पर गया, उनका घर दोमंजिला है, मैं वहाँ पहुँचा तो आवाज़ दी- भाभी…!!

कोई आवाज़ नहीं आई..

फ़िर दरवाज़ा खटखटाया.. तब हल्की सी आवाज़ आई- रुको, मैं आती हूँ।

थोड़ी देर में दरवाजा खुला.. उफ़ ! भाभी के बाल थोड़े बिखरे हुए उनके चहरे पर आ गए थे और सीने पर दुपट्टा नहीं.. क्या मस्त चूचियाँ हैं…

मेरे कुछ बोलने से पहले ही वो बोली- तुम्हारे भाई साहब तो 4-5 दिन के लिए किसी सम्मेलन में गए हैं, ज्यादा जरुरत हो तो उनको कॉल कर लो।

मैंने कहा- नहीं, वो दरअसल मुझे आपसे ही काम है।

उन्होंने कहा- मुझसे क्या काम है?

तब मैंने उनको अपना असली नाम बताया और मेल वाली कहानी बताई तो कुछ देर के लिए तो वो शरमा गई और मुझे नजरें नहीं मिला पाई थी।

करीब 5 मिनट बाद वो खुलकर सामने आई और कहा- तो आप ही असली आदमी हो जो महीने भर से जानते हुए भी जताया तक नहीं और मेरे घर के पास रह रहे हो? खैर मैंने तुम्हारा वो देख रखा है, तुम्हारी फेसबुक की आईडी पर है और मुझे रश्मि ने सब कुछ बता दिया है। चलो अब अन्दर चलो, मैं चाय बनाती हूँ..

अब सुनीता का रंग बदला-बदला सा लग रहा था। मैं चुप रहा और उन्हें देखता रहा !

चाय पीने के बाद सुनीता ने ब्लू फिल्म लगा दी और आकर बिस्तर पर बैठ गई, करीब 15-20 मिनट तक हम दोनों एक दूसरे के बदन को रह-रह कर नोचते रहे।

मैंने हाथों से उनकी चूचियाँ जोर से दबाई तो उनकी आवाज निकली- आआह्ह्ह धीईरे !

यह सुन कर मैं समझ गया कि सुनीता चुदवाना तो बहुत चाहती है… लेकिन बड़े आराम से ! किसी भी प्रकार की कोई जल्दबाजी नहीं..

इधर मैं पूरे उफान पर था।

मैंने उसे अपनी गोदी में खींच लिया, वो भी अपनी गांड मेरे लंड पर दबा रही थी।

मैंने उनकी कमीज़ के अंदर पीछे से हाथ डाल दिया.. नर्म बोबों से होता हुआ मेरा हाथ सीधे ब्रा के हूक पर गया।

मैंने उसे जोर से खींचा तो वो टूट गया…

“इतनी जल्दी है क्या…?”

और वो घूम गई, मैंने इस मौक़े का फ़ायदा उठाया और एकदम उनका चेहरा पास आया तो उनके रसीले लाल होंटों पर अपने होंट चिपका दिये.. वो लम्बा चुम्बन .. गीला… ऊ ओह .. और भाभी मुझसे दूर हटने लगी..

मैंने फ़िर भी नहीं छोड़ा उन्हें और अब उनकी गांड जोर से पकड़ कर खींची.. मेरा लंड उनके पेट पर लगा… उनके हाथ झटके से मेरे गले पर आ गए.. फ़िर एक बोसा…

इस बार गांड दबाते हुये और उन्होंने मुँह मेरे मुँह से नहीं हटाया…

मैंने उनके कमीज़ को ऊपर करना शुरू किया और गले तक ले आया, उनके हाथ ऊपर किये और निकाल दिया…

“क्या कर रहे हो?”

“प्यार, भाभी !”

“क्या कोई काल बॉय इतना भी प्यार करता है?”

मैंने कहा- मैं तो करता हूँ, दूसरों का नहीं पता !

“लेकिन दूसरे तो सिर्फ चोदना शुरू कर देते हैं…!”

मैंने कहा- मेरा अंदाज कुछ अलग है… आप तो संतुष्ट हो ही जाएँगी…साथ में मैं भी तो संतुष्ट हो जाऊँगा…

उन्होंने मेरे शर्ट निकाल फेंका…

मैंने सलवार की इलास्टिक खींची तो साथ में गुलाबी रंग की पैंटी भी नीचे आ गई..

मैंने भी हौले-हौले उनके एक-एक कपड़े को उनके बदन से अलग कर दिया।

मखमली कमर और छोटी पर बहुत कम चुदी हुई गुलाबी बिना बाल की चूत… शायद किसी को पहली नजर में घायल कर दे…

मैंने देर नहीं की, झपट करके उन्हें पकड़ा और निप्पल पर मुँह लगाया..

“आआह्ह हा आदित्य आह्ह्ह्ह्…”

लेकिन मेरा सिर उन्होंने अपनी छाती पर दबा लिया। ऊऊफ़्फ़ धीरे ! इतने ज़ोर से मत दबा !”

मैंने कुछ सुना नहीं, बिस्तर पर धकेला… उनके पैर नीचे लटक रहे थे…

मेरा तो लंड अब बेकाबू होने लगा… . भाभी की गांड पर हाथ फेरा और ज़ोर से मसल दिया..

आअह्ह ह्ह.. मत कर… वो उछल पडी… क्या गोरी और चिकनी गांड थी उनकी।

अब उन्होंने मुझे भी निर्वस्त्र कर दिया… आअह्ह ऊओ इतना बड़ा और मोटा… बाप रे… तभी तो रश्मि को दो-तीन दिन तक दर्द हुआ…

“उनकी बात छोड़ दो भाभी ! लेकिन आपको तो यह अच्छा लगेगा।” मैंने फ़िर से उन्हें दबोच लिया.. अब मेरा लंड उनके पेट के पास था… मैंने उनकी चूचियाँ ज़ोर ज़ोर से मसलनी शुरू की और उनके होंट चूमने लगा… इस बार वो सिर्फ आ आह ही नहीं बल्कि साथ में मुझसे लिपटी जा रही थी…

मेरे लंड का पानी उनके पूरे पेट को गीला कर रहा था।

मैंने उनसे कहा- इसे पकड़ो ना…

और उनका हाथ लंड पर लगाया..

उन्होंने बदमाशी की और उसे पकड़ के जोर से दबा दिया..

“आह भाभी… प्यार से सहलाओ !”

उन्होंने कहा- अरे, मैंने तो सुना था कि मर्द को दर्द नहीं होता…? तुम्हारा बहुत लम्बा और मोटा है… तुम आज मुझे बर्बाद करके छोड़ोगे…

मैंने कुछ नहीं कहा और उनके गोरे पेट को सहलाते हुए जीभ से गीला करने लगा.. भाभी मुझे धकेल रही थी लेकिन उन्होंने मेरा लंड नहीं छोड़ा…

मैंने अब उनके पैर फैला दिये, मुँह जांघों के बीच रखा और चूमा…आआअ अहहछ..

“वहाँ क्यों मुँह लगा रहे हो? वो गन्दी जगह है।”

“भाभी, अभी आप कुछ मत कहो।”

मेरी जीभ चूत के अंदर दाखिल हो गई और अंदर गोल गोल नचाने लगा…

“आह्ह अम मैं पागल हो रही हूँ, ऊ ये मत कर !”

लेकिन मुझे अब उनकी गुलाबी चूत और उनके अंदर का नमकीन पानी ही भा रहा था.. मैंने तेजी से चाटना शुरू किया.. भाभी अपनी गांड उछालने लगी थी… अ..मम…हई.. आअह्ह ! भाभी का बदन अकड़ने लगा था, उनका पानी निकलने वाला है यह मैं समझ गया… मैंने अपनी एक उंगली उनके मुँह में डाली, उन्होंने काट ली, फ़िर उसे धीरे धीरे चूसना शुरू किया..

मैंने अवस्था बदली, उन्हें नीचे बैठाया और मैं बिस्तर के किनारे पर बैठ गया..

उन्होंने पूछा- क्यों?

“आओ तो !”

वो नीचे हुई, मेरा लंड उनके मुँह के सामने था… वो तो तड़प रही थी फ़िर भी वो बैठी रही, मैंने लंड को उनके गालों पर रगड़ा… फ़िर होंटों पर रख कर कहा- इसकी चुम्मी लो !

वो मेरी तरफ देखने लगी… मैंने उनके सिर को पकड़ा और लंड को होटों पर रगड़ा.. चाहती तो वो भी थी…उन्होंने पहले थोड़ा चाटा जीभ से, फ़िर होटों को खोला और लंड का सुपारा मुँह में लिया… मैंने देखा कि उनके छोटे मुँह में लंड नहीं जा रहा था.. बहुत मोटा जो है..

मैंने सिर को कस के पकड़ा और दबाया- बहुत दिनों से तड़पा रही हो अपनी चूची और चूतड़ दिखा-दिखा कर..

अब उन्होंने चूसना शुरू किया, मैं तो जन्नत में पहुँच गया था- ऊऊ ओह मज़ा आ रहा है..

थोड़ी देर बाद मुझे लगा कि मेरे गोटियों में हलचल हो रही है, मेरा हो जाएगा… मैंने भाभी को उठाया और बेड पर लिटा दिया।

पैर नीचे लटक रहे थे… पैरों को उठाया और पैरों को फैलाया अपने कंधे पर रखा… लंड को चूत के ऊपर रगड़ना शुरू किया…

“भाभी कैसा लग रहा है?”

वो बोली- आदित्य, मैंने चार बार काल बाय को बुलाया पर जितना तुमने मजा दिया शायद किसी ने नहीं दिया। तभी तो रश्मि कह रही थी कि तुम पेशेवर नहीं हो, बस तुम भूख मिटाते हो ! तुम्हें जो चाहिए मैं दूंगी, बस मुझे तृप्त कर दो…”

यह सुन कर मुझे तो जोश आ गया और अपना लंड उनकी चूत पर रगड़ने लगा, रगड़ता रहा, भाभी को छटपटाता देख कर मुझे बहुत मजा आ रहा था !!

फ़िर मैं भाभी के मम्मे दबाने लगा !!

वो बोली- बस यार आदी, कितना तड़पाएगा?

मैं हंसा और अपना लंड उनके छेद पर रख कर दबाया।

भाभी तड़प उठी- …ऊओह ह्ह मर गई निकाल्ल निकाल्ल. … बहोत मोटा है, मैं मर जाऊँगीई…”

मैं रूक गया और लंड को बाहर खींच लिया। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉंम पर पढ़ रहे हैं।

भाभी ने आँखें खोली और पूछा- अब क्या हुआ?

मैंने कहा- आपने कहा कि निकाल तो इसलिए निकाल लिया।

” क्यों तड़पा रहा है… कर ना…”

मैंने आव देखा ना ताव और लंड को चूत पर रख कर जोर का झटका मारा… भाभी का पूरा बदन ऐंठ गया- आअ आआह्ह्ह ह्हछ मार डालाआअ रे… ये आदमी का है या घोड़े का, रश्मि की क्या हालत करी होगी तुमने? हाय, ऊफ़ पूरी भर गई मेरी…

मैं अब थोड़ा थोड़ा आगे पीछे करने लगा और भाभी को चूमने लगा… निप्पल चूसने लगा.. वो थोड़ा सामान्य हुई और उनकी चूत ने भी अब फ़िर से पानी छोड़ा…

मैंने आधा लंड बाहर निकाल कर इस बार तूफानी शॉट मारा और … बिल्कुल धोनी की सिक्सर की स्पीड से लंड पूरा भाभी की चूत में पेल दिया।

“आअ उईइ ईई माआआ तुम अब से पहले क्यों नहीं मिले रे…”

मैंने उनके बगल के नीचे से हाथ डालकर उनके कंधों को पकड़ा जिससे वो हिल नहीं पाए और फ़िर मैंने अपनी आदित्य वाली स्टाइल से शुरू की…

वो उफ़ उफ्फ आआह् अह्ह्छ कर रही थी, चूत से पानी की धार लग गई उनकी गांड तक बहने लगी और नीचे चादर भी गीली हो रही थी… मेरी स्पीड जोर की थी.. भाभी के मुँह से निकला-… वाह मेरे आदी !! यह कौन सा स्टाइल है जो न तो आज तक मैंने नेट पर देखा है न किसी ब्लू फिल्म में… वाह, आज मुझे पहली बार इतना मजा आया ऊऊ.. आज मेरी मुराद पूरी हो गई… ऊह् ऊओह् मेरा होने वालाआ है ! और ज़ोर से !

मैं उनके पूरे बदन को चूम रहा था, काट रहा था.. उनके लंबे नाखून मेरी पीठ में गड़ रहे थे।

“फाड़ दे… मेरी फाड़ दे आआह्ह !”

उन्होंने मुझे कस के पकड़ा और वो झड़ने लगी… करीब दो मिनट वो झड़ती रही.. इधर मेरा भी होने वाला था।

उस तूफानी स्पीड में मैंने कहा- भाभी, मेरा झड़ने वाला है, मैं कहाँ निकालूँ?

“मेरे अंदर डाल दो.. आह !”

“लो ये लो !” और मैंने लंड को उनकी चूत के एकदम अंदर मुँह पर टिका दिया और मेरी पिचकारी शुरू हो गई।दोनों ने एक दूसरे को कस कर पकड़ा था.. इसी तरह हम करीब दस मिनट रहे, फ़िर उन्होंने मुझे धकेला और मेरी तरफ देखा- कर दिया ना भाभी को खराब..! और मुझे धकेला। मैंने उनकी चूत से लंड बाहर खींचा, वो मासूम भाभी और मेरे पानी से लिपटा हुआ था..

उसे देख कर भाभी ने कहा- देखो, कैसे मासूम लग रहा है !

उन्होंने नीचे देखा… उनकी चूत फ़ूल गई थी, उन्होंने हाथ लगाया और सिहर उठी- देखो, क्या हालत की तुमने… छोटी सी थी.. कितना सूज गई है.. और कितना दर्द हो रहा है…

उनकी चूत से मेरा सफ़ेद पानी और उनका पानी बह रहा था, चूत का मुँह भी खुल गया था…

वो उठ भी नहीं पा रही थी, किसी तरह मैंने उन्हें उठाया और बाथरूम ले गया..

एक बार की चुदाई के बाद भाभी की हालत तो एकदम खराब हो गई थी.. इस उमर में इतनी जबर्दस्त चुदाई होगी, यह उन्होने सोचा भी नहीं था.. लेकिन मुझे भी उनका वो गदराया बदन काफी मुरादों के बाद मिला.. मैंने जम कर चोदा…

एक बार की चुदाई के बाद भाभी की हालत तो एकदम खराब हो गई थी.. इस उमर में इतनी जबर्दस्त चुदाई होगी, यह उन्होने सोचा भी नहीं था.. लेकिन मुझे भी उनका वो गदराया बदन काफी मुरादों के बाद मिला.. मैंने जम कर चोदा..

भाभी की चूत भी मुँह खोले हुए पूरी लाल दिख रही थी.. बाथरूम साथ में था !!!!

मैंने देखा भाभी ठीक से उठ भी नहीं पा रही है… मैंने उन्हें हाथ पकड़ के उठाया …और हम दोनों बाथरूम में ही चालू हो गए…

सुनीता ने शावर चालू कर दिया और मेरे बदन पर साबुन लगाने लगी और कुछ अपना दर्द मुझसे बाँटने लगी…

मैं अपने लंड को उनकी चूत पर रगड़ने लगा… चूत में से पानी अब भी टपक रहा था.. तभी भाभी से नहीं रहा गया और खुद मेरे लंड को हाथ में पकड़ा और अपने चूत के दाने पर रगड़ने लगी… मैं तो बेकाबू होने लगा, वहीं दीवार पर उनकी पीठ टिका दी और उनके पैर खुद ही फ़ैल गए लंड को रास्ता देने के लिये…

ऊउफ़्फ़ कितना पानी निकाल रही थी भाभी..

लगता है सालों से चूत को लंड नसीब नहीं हुआ था।. मैंने वैसे ही खड़े-खड़े अपना लंड सेट किया और क़मर हिला कर धक्का मारा।

भाभी- आअह्ह ह ! धीरे कर ना ! अपनी बीवी की चूत समझी है क्या? एकाध महीने में पति को भी दर्शन करवाने पड़ते हैं…

मैं- बीवी की नहीं मेरी सेक्सी भाभी की गदराई चूत है इसीलिये तो !

भाभी- अरे अभी तक दर्द हो रहा है.. आअह्ह ह्ह !

उन्होंने हाथ लगाकर देखा.. अभी तो इतना बहार है.. मैं तो मर जाऊँगी…

“आपको दर्द है तो मैं बाहर निकाल लेता हूँ !” मैंने उन्हें तड़पाने के लिए कहा।

भाभी- अरे ..अब इतना डाल के बाहर निकालेगा… और अब उन्होंने खुद चूत को लंड पर दबाया…

“कितना मोटा है..!”

मैं अब क़मर हिला के आगे पीछे कर रहा था…

भाभी की चूत ने इतना पानी छोड़ दिया कि अब लंड आराम से जा रहा था और मैंने भी अब सनसना कर धक्का मारा और पूरा लण्ड अंदर !

मर गई ईई… ! सच में मर्द हो… आज मुझे लगा कि असली मर्द क्या होता है… लव यू आदी… चोदो मुझे ज़ोर से चोदओ ! फाड़ दो मेरी !

मैं धक्के लगाते हुए और उनके निप्प्ल काटते हुये)- क्या फाड़ दूँ भाभी?

भाभी- जो फोड़ रहे हो…

मैं- उनका नाम बोलो..

भाभी- अपना काम करो !

मैं- अभी तो एक जगह और बची है उसे भी फाड़ना है… सबसे सेक्सी तो वो ही है तुम्हारे पास !

भाभी- क्या?

मैंने भाभी के चूतड़ों पर हाथ लगाया और उनकी गांड के छेद में उंगली डाल कर बोला- ये वाली फाड़नी है।

भाभी- आआह्ह हह नहीं वो नहीइ.. वो तो मैंने किसी को भी नहीं दी और मुझसे रश्मि ने साफ़ कहा है कि आदी को पिछवाड़ा मत देना…

मैं- तो क्या हुआ.. मुझे बहुत पसंद है।

भाभी- नहीं नहीं..

मेरे धक्के चालू थे.. मैंने देखा भाभी का बदन अकड़ने लगा है… पैर सिकोड़ कर लंड को कस रही थी और मेरे कंधे पर दांतों से काटने लगी… नाख़ून मेरे पीठ को नोच रहे है…

“यह क्या किया.. आह्ह ! मैं गईई ईइ मेरा हो गया अऊओ ऊओह्ह्ह !”

और भाभी की चूत का पानी निकल गया। मैं रूक गया.. मैंने अब उन्हें दीवार से हटाया और बाथटब के अंदर ले गया, उसमे पानी और साबुन भरने लगा..

मैंने चूत पर भी साबुन लगाया..और उसे साफ करने लगा..

जब चूत पूरी साफ हो गई मैंने गर्म पानी से धोया…मेरा हाथ बार बार उनके दाने से लग रहा था… इधर मेरा अभी तक छुटा नहीं था।

भाभी मेरे लंड को सहला रही थी, कभी मुँह में लेकर काट रही थी तो कभी अपने कानों और बालों को मेरे लंड से सहला रही थी !!!

मैं उनके मुँह के पास लंड को ले गया.. उन्होंने कुछ नहीं किया… मैंने उनकी चूत को देखा.. दोनों जांघों के बीच एक लकीर.. लग रहा था कि एक शर्माई हुई मुनिया.. मैंने हाथ फेरा… लकीर के बीच उंगली डाली.. फ़िर से गीली, लबालब पानी..

मुझसे अब रहा नहीं गया, मैंने भाभी के पेट को चूमना शुरू किया और दोनों पैर भाभी के दोनों तरफ डाले और उनकी चूत पर मुँह रख दिया..

मैंने जबरदस्ती पैरों को फैलाया और उनका रस चाटने लगा.. जीभ को दाने पर रगड़ा… मेरा लंड उनके मुँह के पास लटक रहा था, भाभी से रहा नहीं गया, उन्होंने उसे हाथ में पकड़ा, मैंने क़मर और नीचे की और उसे ठीक उनके होटों पर टिका दिया… थोड़ी देर तो उन्होने कुछ नहीं किया लेकीन फ़िर अचानक उसे जीभ से चाटा और होंट खोलकर अंदर लिया…

मैंने सिहरन सी महसूस की- आअह भाभी चूसो मेरी जान… अआः मजा आ रहा है !

मैं तो उनके गरम होटों के स्पर्श से पागल हो रहा था… अब वो भी पूरी मस्ती में उसे मुँह में ले रही थी.. अचानक मैंने थोड़ा अंदर दबाया.. लंड एकदम उनके हलक तक पहुँच गया। उन्होने तड़प कर उसे बाहर निकाला और कहा- अब क्या मार डालोगे.. इतना लम्बा और मोटा गले के अंदर डाल रहे हो.. मेरी तो सांस रुक जाएगी…

मैं- ओह ! आप इतना अच्छा चूस रही हो..

इधर भाभी की हालत फ़िर खराब होने लगी, मेरी जीभ उनकी चूत के अंदर पूरी सैर कर रही थी.. भाभी ने फ़िर से पानी छोड़ दिया.. उनकी गांड तक बह रहा था.. गांड के छेद तक ! मैंने पूरा चाट लिया, जीभ से पूरा चाटा.. इधर मुझे लग रहा था कि मेरा भी पानी भाभी के मुँह में निकल जाएगा… मैंने अपना लंड उनके मुँह से निकाल लिया, लण्ड उनके थूक से गीला हो कर चमक रहा था और भी मोटा हो गया था, मैं उठ कर कमोड पर बैठ गया और भाभी को अपने पास खींचा…

भाभी- अब क्या कर रहे हो?

मैं- आओ ना, दोनों पैर फ़ैला कर लण्ड पर बैठ जाओ और सवारी करो।

भाभी- मुझसे नहीं होगा..

मैंने उन्हें पकड़ के पोजिशन में लिया, और लंड के ऊपर चूत को सेट किया और कहा- बैठो…

उन्होंने कोशिश की- आआह ! नहीं होगा..

मैंने उनके चूतड़ों पर हाथ रखे और नीचे से धक्का किया.. आधा लंड गप्प से अंदर।

अब मैंने उन्हें कहा- धीरे-धीरे इस पर बैठो…

वो बैठने लगी.. चूत चिकनी तो थी.. अंदर घुसने लगा। फ़िर वो रूक गई.. अभी भी थोड़ा बाहर था..

मैंने उनकी चूची और निप्प्ल चूसना शुरू किया… और पीछे से उनकी गांड के सुराख में उंगली डाली।

“उईईईई….!”

और मैंने उन्हें जोर से अपने ऊपर बैठा लिया… पूरा लंड अंदर और भाभी की चीख निकल गई- आअह्ह्ह ह्ह्ह्ह्ह मर गई ऊओह…!

अभी तक दो बार चुदने के बाद भी चूत इतनी कसी लग रही थी, मुझे मज़ा और जोश दोनों आ रहा था… भाभी मेरे सीने से चिपटी रही.. फ़िर थोड़ी देर बाद वो खुद ही मेरे लंड पर ऊपर नीचे होने लगी… मैं भी नीचे से धक्के मार रहा था।

भाभी बड़बड़ाने लगी- आ आह तुमने मुझे जिन्दगी का मज़ा दे दिया अह्ह्ह्ह.. और उनके उछलने की स्पीड बढ़ गई।

“अह आआह.. … मेरे आदी इतने दिन क्यों नहीं किया.. आआअह्ह मेरा होने वाला है… !’

और ऐसे ही उछलते हुये उनका पानी निकल गया.. वो मेरे सीने से लिपट गई, मैं उन्हें चूमने लगा..

अब मैंने भाभी को खड़ा किया..

मेरे दिमाग में एक नया आसन आया ! कमोद के ऊपर मैंने भाभी को झुकाया दोनों हाथ कमोड के ऊपर रखवाए…

भाभी- यह क्या कर रहे हो?

मैं- मैं तुम्हें और मजा दूंगा जानेमन..

मैं पीछे आ गया.. ऊओह क्या मस्त उभरे हुये चूतड़.. और ऐसे में उनकी चूत का छेद एकदम गीला… और गांड का गुलाबी छेद… मैंने पीछे से लंड को उनके चूतड़ों पर घुमाया… …और गांड के छेद पर लगाया…वो एकदम उछल कर खड़ी हो गई.. नईई वहाँ नहीईईईइ…

“नहीं डार्लिंग ! मैं सही जगह डालूँगा !” और फ़िर से उन्हें झुकाया… चूतड़ और ऊपर किये ताकि चूत ऊपर हो जाए…

और फ़िर..

भाभी- अह्ह धीरे…आआ अह्ह !

मेरा लंड अंदर जा रहा था, लेकिन मैंने उसे बाहर खींचा और एक झटके में पूरा अंदर डाला..

वो तो चिल्ला पडी- अरे मार डालोगे क्या??

मैंने उनके चूतड़ सहलाये और आगे हाथ बढ़ा कर उनकी चूचियाँ दोनों बगलों से दबाने लगा… करीब 3-4 मिनट में भाभी फ़िर पानी छोड़ने लगी.. मैंने उनका एक पैर कमोड के ऊपर रखवाया… और फ़िर तो मैंने भी राजधानी एक्सप्रेस की स्पीड से चोदना शुरू किया।

भाभी उफ़ उफ़ आह अह्ह्ह कर रही थी।

मैंने उनके कानों के पास चूमा- जानू.. मजा आ रहा है ना?

भाभी- बहुत.. और जोर से करो…

अब मुझे लगा कि मेरा निकलने वाला है… एक घंटे से ऊपर हो गया था.. मेरे अंडों में प्रेशर आ रहा था.. मैंने भाभी को बाथ टब के अंदर लिया और लिटाया.. दोनों पैर फैलाये.. घुटनों से ऊपर मोड़ कर एक झटके में अंदर डाला… उनकी आंखें फ़िर बड़ी बड़ी हो गई लेकिन मैंने कुछ देखा नहीं और फ़िर उफ्फ ! वो धक्के लगाए कि भाभी की साँस फूलने लगी, वो सिर्फ अआः इश्ह इश्ह्ह्ह्ह आआः कर रही थी।

मेरा पूर्वानुमान गलत था कि वो बहु चुदी हैं, वो तो सेक्स की बहुत भूखी हैं !

मैं- जानू ऊऊऊ मेरा निकलने वाला है.. अंदर डालूँन या बाहर…?

भाभी- एक बार तो अंदर डाल दिया है, अब बाहर क्यूँ? डाल अंदर !

1-2-3-4-5-5-6-7 ! कितनी पिचकारी मारी, मैं भूल गया और उनके ऊपर लेट गया..

करीब दस मिनट हम ऐसे ही पड़े रहे.. मैंने फ़िर उठकर उन्हें चूमा तो उन्होंने आँखें खोली..

मैंने धीरे से पूछा- जानेमन, कैसा लगा?

वो कुछ बोली नहीं.. सिर्फ मुस्कुरा दी..

फ़िर हम दोनों ने एक दूसरे को रगड़ रगड़ कर नहलाया।

मेरा फ़िर खड़ा होने लगा था.. लेकिन भाभी जल्दी से तौलिया लपेट कर बाहर निकल गई..

मैंने कहा- बस हो गया…?

“बस फ़िलहाल यहीं तक ! अगर जरुरत लगेगी तो मैं बुला लूँगी ! तुम रहते कितनी दूर हो…!”

उन्होंने मुझे पैसे देने चाहे तो मैंने अपनी एक दिन की सेलेरी ली क्यूंकि उस दिन मैंने ऑफिस से छुट्टी ली थी।

मैं वापिस अपने कमरे में आ गया।

दोस्तों आपको ये कहानी केसी लगी कोई लड़की आंटी मुझसे बात करना चाहे तो मेल कीजिये बात गुप्त रहेगी vijaycbr5907@gmail.com पे मेल करे

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मेने उसको नहीं , उसने मुझे चोद डाला ऐसा कहो – लोडे से लोही निकाल दिया https://sexkahani.net/%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%89%e0%a4%b8%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%89%e0%a4%b8%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%9d%e0%a5%87-%e0%a4%9a/ https://sexkahani.net/%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%89%e0%a4%b8%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%89%e0%a4%b8%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%9d%e0%a5%87-%e0%a4%9a/#respond Sat, 15 Apr 2017 12:40:19 +0000 http://sexkahani.net/?p=10523 नाम है मेरा सुशिल. कहा से हु , क्या करता हु , कैसा दीखता हु .. ये सब मत पूछो ..

चोदने के लिए जिगर चाहिए . इस साइट को बहुत पसंद करता हु .कुछ अच्छी कहानिया भी होती है जो पढ़ते पढ़ते ही लण्ड रगड़ने पे मजबूर कर देती हैं , पर काफी तो ऐसी होती है की लिखने वाले की गांड मारने की इच्छा हो जाती है. बस मेरा नाम ये है , मैं यहाँ से हु , मेरी इतनी हाइट है , मेरा लण्ड इतना लम्बा है , इतना चौड़ा है .. पढ़ कर हंसी आती है की भेनचोद टेप लेकर नापा था और सेंटीमीटर को इंच गीन लिया . जितनी लण्ड की चौड़ाई बताते है हक़ीक़त मैं वो तो लण्ड की लंबाई होगी .

खैर अपनी कहानी पे आता हु .बहुत छोकरियों को चौदा हैं मैंने. चिकने छोकरो की गांड भी मारी है .मज़ा आता है .पर जैसा मैंने बताया की चौदने मैं जिगर चाहिए, लण्ड की साइज उतनी कीमती नहीं है . आज ४५ साल का हु . मैंने स्कूल से छोकरियो को पकड़ना चालू किया था . स्कूल मैं पहली चूत मारी . मैंने क्या मारी , उसने पकड़ा. वो मेरी मामी थी… छुट्टियों मैं गांव गया था. एक दोपहर जब सब सो रहे थे , घर से जुड़ा हुआ खेत था , वहाँ बकरा , बकरी पर चढ़ने की कोशिश कर रहा था . अब उनके इस प्रोग्राम को देखते हुए मेरा खड़ा हो गया. दोपहर थी, सब सो रहे थे . मैंने हाफ पैंट नीचे की और मुठ मारना चालू किया. पूरी तल्लीनता से बकरा बकरी की चुदाई देख रहा था और मस्ती से लण्ड मसल रहा था .

जैसे ही बकरे ने बकरी मैं पूरा लण्ड गुसाया और पूरी ताक़त से पकड़ कर चौद रहा था , मैं भी छुट गया और अचानक से देखा तो मामी पहले माले की खिड़की से सब देख रही थी . हे भगवन ! !! मेरी तो माँ चुद गयी . हाथ का लण्ड हाथ मैं रह गया, पैंट पांव मैं पड़ी रही, मैं धूजने लगा . अब क्या करू ??

नज़र मामी की नज़र से अटकी रही , फिर वो धिरे से खिड़की से घर के अंदर चली गयी. अब मैं क्या करू…

मैं धीरे धीरे , चुपचाप घर गया और सीधे अपने कमरे मैं जाकर नहाया और कपडे बदल कर सो गया. नींद कहा आनी थी पर और जाता भी कहा. अलग अलग विचार मन मैं आ रहे थे ” मान लो मामी ने कुछ पूछा तो क्या बोलूंगा ? अगर पापा को बता दिया या मामा को बता दिया तो माँ चुद जाएगी” . पर चारा ही क्या था इसके सिवाय की कमरे मैं ही पड़ा रहू और जो होगा उसका सामना करू .

शाम को जब मैं खाने के टाइम तक कमरे से बहार नहीं आया तो मामी ने उसके बेटे को जो मुझसे ३ साल छोटा था , उसको भेज़ा. मैंने बोला मेरा खाने का मन नहीं है. फिर बड़ी बहन आयी , उसको भी मैंने एहि बोला.

फिर मामी आयी. मैं बिस्तर पर चादर ओढ़ कर सो रहा था. वो मेरे पास बैठी, प्यार से चादर हटाई, मुस्कुराई और बोली ” क्या तबियत ठीक नहीं है ” , मैं तो नज़र भी नहीं मिला पा रहा था , सिर्फ जुकी गर्दन को हिला दिया की नहीं मैं ठीक हु. तो वो बोली की खाना खाने क्यों नहीं आ रहे हो ? मैंने कमजोर आवाज़ मैं बोला ” मन नहीं है “.. उसने मेरी पीठ पर हाथ फेरा और धीरे से गाल पर एक छोटी सी पप्पी कर दी और बोली ” मन छोटा न करो सुशिल जी , आओ खाना खाते हैं” और मेरे बालो मैं हाथ फेर कर चली गयी.

मुझे उसकी इन हरकतों और बातो से थोड़ा ढाढस बंधा. ये शिकायत तो नहीं करेगी , उस बारे मैं बात करेगी तो माफ़ी मांग लूंगा , ये सोच कर मैं रसोई के बहार गया. सब थाली लगा कर बैठे थे, मेरा इंतज़ार कर रहे थे . बहन बोली ” जल्दी आ जाओ, भूख लगी है “. मैं भी हाथ धो कर बैठ गया. मामी बिलकुल नार्मल थी पर फिर अपने हाथो से एक टुकड़ा मिठाई का खिला दिया. मैं भी नार्मल हो गया था पर मुस्कराहट या हंसी नहीं थी चेहरे पर .

खाना ख़तम होने के बाद हम भाई बहन , मामा आपस मैं बाते करने लगे. पर मैं फिर भी थोड़ा रिजर्व्ड था. मामा ने ये बात नोट की और पूछा की क्या बात है ? मैंने कहा ” कुछ नहीं बस ऐसे ही “. खैर हम छोटी मोटी, इधर उधर की बाते करते रहे . लगभग १० बजे गए थे . मैं अलग कमरे मैं था , भाई बहन अलग कमरे मैं और मामा मामी अपने कमरे . तब मामी ने मामा को बोला की सुशिल जी का मन आज अच्छा नहीं है तो मैं उनको बच्चो के कमरे मैं ही सुला देती हु.. शायद उनको अपने घर की याद आ रही होगी , और मैं भी उन सब को सुला कर आ जाउंगी. मामा ने बोला ” ये सही रहेगा , आज वो वैसे भी थोड़ा चुप चुप था . हो सकता है घर की याद आ रही हो या फिर १२ क्लास का एग्जाम दियाहै तो रिजल्ट का टेंशन होगा. बच्चे हैं , तुम उस से बात करना और जरुरत पड़े तो मुझे बुला लेना” . मामी ने हाँ कहा और मुझे बच्चो के कमरे मैं ले गयी.

हम सब डबल बेड पर बैठ गए और मामी ने कहा आज बाते बाद मैं करेंगे, पहले ताश खेलते हैं” . हम सब ताश खेलने लग गए. मैं और मेरा भाई पार्टनर थे और मामी और बहन पार्टनर थे. कभी वो जित जाते थे कभी हम.. मेरी बहन और भाई चीटिंग भी करते थे तो बड़ा मज़ा आ रहा था. छीना जप्ती चालू थी, एक दूसरे के पत्ते
खिंच लेते थे .बिच मैं मामी मुझे पर जपत पड़ी की मैं चीटिंग कर रहा हु . मैंने कसम खायी पर वो नहीं मानी और मेरे पत्ते छीनने के लिए मुझे पर चढ़ गयी. ऐसे ही धमाल हो रही थी . मैं बिलकुल नार्मल हो गया था.

थोड़ी देर मैं भाई बोला उसको नींद आ रही है तो मामी ने कहा की बिस्तर के एक साइड मैं सो जा. वो सो गया. हम तीनो खेलते रहे . फिर मामी ने बोला चलो बाते करते हैं . हमने ताश रख दी. और मैं दूसरे कोने मैं लेट गया. मामी ने बहन को बोला की भाई के पास लेट जा ताकि वो मेरे और उसके बीच मैं सो जाएगी और दोनों से बाते कर सकेगी. हम सब इस तरह से सो गए. सबसे पहले मेरा छोटा भाई, फिर बड़ी बहन फिर मामी फिर मैं.
गर्मी के दिन थे. एयर कंडीशनर नहीं था पर पँखा फुल स्पीड मैं चल रहा था. बहन ने एक चादर खुद पर और भाई पर ओढ़ ली . मामी ने एक चादर खुद पर और मुझ पर ओढ़ दी .सिर्फ गर्दन बहार थी और बाते चालू थी. मामी ने बाते करते करते कहा की लाइट बंद करदो ताकि जिसको नींद आनी है, आ जाएगी . बहन ने लाइट बंद करदी . हमारी बाते चालू थी. लाइट बंद होने के थोड़ी देर बाद मैंने महसूस किया की मामी का हाथ मेरे हाथ को पकड़ लिया है, नाज़ुकता से .और फिर भी वो नार्मल बात कर रही थी. स्कूल मैं क्या होता है. कितने टीचर हैं .कौन अच्छा पढता है. फ्यूचर मैं क्या करना है वगेरह वगेरह .

अचानक मैंने महसूस किया की बहन बात नहीं कर रही है. मैंने मामी को बोला की क्या दीदी सो गयी तो उसने गर्दन गुम कर देखा और फिर मेरी तरफ गम कर बोली की ” हाँ”.. अब अपन धीरे धीरे बाते करते हैं ताकि वो जग नहीं जाये”. मैंने हाँ कह दिया.. वो मेरी तरफ अच्छे से करवट बदल ली और धीरे से लेफ्ट पांव
मेरे जंगो के ऊपर रख दिया. मैं सीधा सो रहा था. उसकी जांघ मेरे जांगो पर आ गयी. अब मेरी साँसे फूलने लगी. ये सब कुछ ही पल मैं हो गया . लाइट बंद होना, बहन का सोना, मामी का करवट बदलना और फिर मेरी जांगो पर अपनी जांघ रखना. अब यु मैं भले ही बच्चा था पर इस मामले मैं ९थ क्लास से छोकरियों को छेड़ता तो था ही.

उन्होंने धीरे से मेरी छाती पर अपना मुलायम हाथ रखा, गाल पर किश किया और धीरे से कान मैं फुसफुसाया ” बच्चे हो पर जल्दी से मर्द बन रहे हो” . अब क्या था ? मेरा चेहरा लाल लाल हो गया तभी उन्होंने मेरे शर्ट के अंदर हाथ दाल कर मेरी निप्पल को पिंच कर दिया .

अब जरा ये समझ लीजिये की स्कूल मैं ही मैंने क्लास की लड़कियों के बूब्स दबाने शुरू कर दिए थे. हर लड़की ऐसी नहीं होती पर हर क्लास मैं कुछ लडकिया तो ऐसी होती हैं जिनका भी मन करता है इन बातो के लिए. तो २ लडकिया थी जिनको मैंने पटा लिया था .वो अपना शर्ट ऊपर करती थी और बूब्स दिखाती थी.. कई बार हम सबसे पीछे बैठ जाते थे और मैं उनके स्कर्ट मैं हाथ डालता था और चूत दबाता था. एक लड़की ऐसी थी जिसने मुझे गास नहीं डाली.तो मैंने उसको बोला की मैं तुज बदनाम कर दूंगा. या तो मुझे किश करने दे या फिर देखना क्या होता है. वो गबर गयी .उसने फिर भी हिम्मत करके बोला की मैं टीचर को बोल दूंगी. तो मैंने बोला मेरी दोनों फ्रेंड बोल देगी की तूने मुझे पकड़ कर किश किया और मेरी पैंट मैं हाथ डाला. वो रोने लगी और हाथ जोड़ कर बोली की ऐसा मत करो . मैंने फिर बोला ” बस एक दो बार मेरे मन की करने दे, मैं हमेशा तेरे काम आऊंगा . जो बच्चे तुजे छेड़ते हैं उनको सीधा कर दूंगा. पर मेरे मन नहीं रखा तो इतना बदनाम करूँगा की तू घर नहीं जा पायेगी. वो डर गयी और फिर क्या था , मैंने उसके साथ भी दाबने के , मसलने के खूब मजे किये. बस किसीकी भी चुदाई नहीं की . हाँ मेरी दो फ्रेंड्स ने कई बार मेरी मूठ मारी.. २ बार तो चलती हुई क्लास मैं क्यूंकि हम सबसे पीछे बैठे थे.

मैं पढ़ने मैं होशियार था तो मेरी वैसे भी स्कूल मैं बड़ी इज़्ज़त थी. वाद विवाद मैं , फर्स्ट आता था , बेडमिंटन और क्रिकेट मैं स्कूल टीम मैं था. और इनसब काम मैं बहुत ध्यान रखता था. किसी को शक नहीं था इसलिए मेरा काम मज़े से हो रहा था.
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अब ये सब जानकारी मुझे थी, औरत का शरीर कैसा होता है, कहा हाथ लगते है तो कैसा महसूस होता है , ये सब मुझे मालूम था . अब जब मामी की जांघh मेरी जांघ पर आयी तो मेरे लण्ड का कड़कना स्वाभाविक था. उन्होंने जब मेरी निप्पल को धीरे से पिंच किया तो एक करंट मेरे शरीर मैं दौड़ गया. मेरे फूलते लण्ड को उन्होंने भी महसूस कर लिया. वो धीरे से हंस दी और कान मैं बोली ” हाथो मैं वो मज़ा नहीं जो असल मैं आता है . कभी किसी के साथ असल मैं किया क्या.? ” मैंने लाल हुए चेहरे के साथ सर हिलाया और धीरे से बोला ” बस क्लास की लड़कियों ने ऊपर ऊपर से “. वो खिलखिला दी फिर मेरे शर्ट के अंदर डॉल कर छाती पर कोमल कोमल हाथ फेरने लगी. फिर धिरे से फुसफुसाई ” जोर से मत बोलना , और बस जो मैं करती हु करने देना , जो बोलूंगी कर लेना.” .

मैं तो हक्काबक्का बस चुपचाप पड़ा था . शरीर मैं मनो भट्टी जल रही थी . उन्होंने धीरे से मेरी हाफ पैंट खोलदी, दूसरे हाथ से ब्लाउज और बोली ” अब बताओ ऊपर ऊपर से क्या क्या किया ? .. अब मैं भी इतना गया गुजर तो नहीं था सीधा उनकी तरफ पलट गया और लगा चुचिया चूसने .मज़ा आ गया… क्या मस्त बोबे थे … उन्होंने एक हाथ मेरी अंडरवियर मैं डाला और फ़ट से मेरे लण्ड को मुट्ठी मैं पकड़ लिया. अब ४ इंच का मेरा लण्ड.. मैं १९ साल का, मुछे आयी नहीं , जांट के बाल मुलायम , लण्ड मस्त गिला हो गया था.

ये जो चोदू यहाँ अपनी कहानिया भेजते हैं सब बोलते हैं की मेरा ८ इंच का, कोई बोलता है ७ इंच का… सब जूठ है.. मोस्टली ४ या ५ इंच का होता है. खैर मामी ने मसलना शुरू किया और मैंने जोर जोर से चूसना. मस्ती मैं एक दो बार जोर से चूसने की आवाज़ आयी तो मामी ने जोर से कस कर लण्ड दबा दिया और फुसफुसाई ” शशशस आवाज़ मत करो… “

पर क्या बताऊ , १ या २ मिनिट ही हुए थे की उनके मसलने के कारन, माहौल के कारन मैं तो जोर से छुट गया . उन्होंने अपने हथेलियों से मेरे वीर्य को मेरे ही लण्ड पे सब तरफ लगा दिया . फिर धीरे से अपना आधा शरीर मेरे ऊपर ले आयी. पीछे देखा तो भाई बहन सो रहे थे .

उन्होंने चादर हटाई , अपने कपडे पुरे उतार दिए , मेरे भी उतार दिए और खिसक कर मेरे jango के बीच आ गयी . बड़े प्यार से, बड़ी मस्ती से मेरे लण्ड से खेलने लगी . मैं क्या करता , बस हाथ उनकी गर्दन के पीछे , बालो मैं फेरता रहा .

फिर उन्होंने लण्ड मुंह मैं ले लिया.. ये एक अद्भुत एहसास था. कभी सोचा नहीं था ये भी होगा. इस बारे मैं सुना था , पर सुनना अलग होता है और हकीकत अलग. मेरा लण्ड तो फनफना कर फिर से फुफकार मारने लगा . कोई टाइम नहीं लगा .उनका मुंह मैं लेना हुआ और मेरा खड़ा हो गया . मुझे उनकी हलकी सी हंसी सुनाई दी .और उन्होंने धीरे से लण्ड को काट लिया.. ओह my गॉड.. व्हाट आ सेंसेशन , व्हाट आ फुककिंग सेंसेशन ..

मैं तो उठ कर बैठ गया. अंधेरे मैं भी हल्का हल्का तो दिख ही रहा था… मेरे फैली हुई टाँगे , उनका सर का ऊपर नीचे होना. मैंने तो अपनी जंगे आपस मैं दबा दी ,इतना मैं एक्ससिटेड हो चुक था.

और बैठे बैठे ही अब मैंने उनकी एक चूची पकड़ ली और बड़ी बेरहमी से दबाने लगा… अब उनके मुंह से भी सिसकारी निकली . वो उठ गयी , धीरे से मेरी छाती पर हाथ रख कर निप्पल दबाई और मुझे बिस्तर पर लिटा दिया फिर मेरे होठ किश किये और बोली ” चुप रहना प्लीज ” .

आप ही सोचिये,कितना बड़ा रिस्क था .. बच्चे पास मैं ही सो रहे थे पर वो कॉंफिडेंट थी की कोई नहीं जागेगा.
फिर वो मेरे ऊपर आ गयी. अपनी दोनों टाँगे मेरी दोनों टैंगो के बहार रख दी और धीरे से लण्ड पर अपनी गरमा गरम चूत अड़ा दी और धीरे से मेरे पुरे ४ इंच के लण्ड को निगल लिया. फिर मेरे कंधो पर हाथ रख कर , अपनी जांगो से मेरी कमर तो दबा कर पकड़ ली और मस्त गांड को ऊपर नीचे करने लगी .

क्या बताऊ क्या हाल था वो. आदमी अपनी ज़िन्दगी भर पहली चुदाई नहीं भूल सकता. वो भी अगर ऐसी मस्त मज़ेदार हो. अँधेरा कमरा, मस्त ठंडी ठंडी हवा, पास मैं भाई बहन और इस बात का डर की वो जग जायेंगे , उसपर से इतनी मस्त अनुभवी चूत का लण्ड को निगल लेना और फिर धीरे धीरे छोड़ना.
मैं मामी को नहीं चोद रहा था , वो मेरेको चोद रही थी .

मैंने उसके बोबे हाथो मैं लेलिये.. वो ३६/३७ साल की होगी.. बड़ी थी, बोबे भी बड़े थे, निप्पल मानो अंगूर के दाने थे, मस्त लचक लचक के वो चोद रही थी और मैं चुदवा रहा था .मेरा काम तो बस उसके निप्पल तो भींचना, मसलना, खीचना था, .. हम दोनों पसीने से भी तर थे हालाँकि हवा भी थी .

और इन सब मैं कोई ज्यादा वक़्त नहीं लगा, शायद २ या ३ मिनट हुवे होंगे .अचानक से मेरे लण्ड मैं टन्नट आना शुरू हुई . मामी को महसूस हुआ , उसने पहले लंबे स्ट्रोक धीरे धीरे मारे थे , अब वो छोटे छोटे स्ट्रोक जल्दी जल्दी मारने लगी और क्या था बस १५/२० जल्दी जटके लगे और मैं फिर उसकी चूत मैं छूटने लगा .

अब एक कमाल हुआ, उन्होंने अपनी चूत की मांसपेशियों को संकुचित करना और छोड़ना शुरू किया. हे भगवन ,ये तो मेरा सारा जूस चूस लेना चाहती थी .

मैं पगला गया . क्या आनंद था.. क्या मज़ा था.. क्या चुदाई थी .

वो फिर धीरे से मेरे ऊपर सो गयी और मेरे होठो पर अपने होठ रख दिए. अब किस करना तो मुझे आता ही था.. मैं किस करना शुरू किया.. हमारी जबान आपस मैं लड़ने लगी ..जरा सोचो.. मेरा लण्ड अभी भी उसकी गरम चूत मैं और वो चूत अभी भी स्पंदन कर रही थी. होठो पे होठ , मेरे छाती पर उसकी छाती.. उसकी गांड को सहलाते हुए मेरे हाथ..

फिर धीरे धीरे हमारा शरीर नार्मल टेम्परेचर पर आया.. वो धीरे से अपनी साइड पे बैठी और कपडे पहन लिए… मुझे बोला खाली चड्डी पहन लेना .मैंने कहा ” सवेरे भाई बहन जागेंगे तो क्या बोलेंगे ?” वो बोली ” मैं सबसे पहले उठ जाउंगी तब पहन लेना “

मैंने वो ही किया.. थोड़ी देर बाद जब हमारी सांसे कण्ट्रोल मैं आयी तो उन्होंने मुझे अपने से चिपका कर सुला दिया ..

उसके अगले दिन से मेरे जन्नत की यात्रा शुरू हुई.. वो अगले एपिसोड मैं .. हाँ आपका कॉमेंट चाहिए मुझे.

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मेरे छोटे भाई ने मुझे चोद चोद के पूरा रंडी बना दिया – रोज तीन से चार बार ठोकता हे https://sexkahani.net/%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%9b%e0%a5%8b%e0%a4%9f%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%88-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%9d%e0%a5%87-%e0%a4%9a%e0%a5%8b%e0%a4%a6-%e0%a4%9a/ https://sexkahani.net/%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%9b%e0%a5%8b%e0%a4%9f%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%88-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%9d%e0%a5%87-%e0%a4%9a%e0%a5%8b%e0%a4%a6-%e0%a4%9a/#respond Sat, 15 Apr 2017 12:35:23 +0000 https://sexkahani.net/?p=10996 मैं मंजरी आज सभी का नॉन वेज स्टोरी Antarvasna Kamukta डॉट कॉम में स्वागत करती हूँ. आज मैं आपकी अपनी गुप्त स्टोरी सुनाने जा रही हूँ. मैं इस समय २० साल की हूँ. अभी बी ऐ में मैंने एडमिशन लिया है. मैं जवान हो चुकी हूँ. मेरे बूब्स भी ३२” के है. पर मैं आशा करती हूँ की कुछ साल में ये ३६ साइज़ पा लेंगे. दोस्तों , मेरी सहेलियों ने मुझे एक दिन सेक्स के बारे में बताया. असल में मैं सेक्स और चुदाई के बारे में बात करने से बहुत डरती और घबराती थी.

जबकि मेरे सभी फ्रेंड्स अपने मजनुओं से खूब चुदवाती थी और जन्नत के मजे लेती थी. धीरे धीरे मेरा अंदर से सेक्स करते का मन करने लगा. मैं अब अपनी सहेलियों से भागती नही थी. पहले जब मेरी दोस्त चुदाई की बाते करती थी तो मैं वहाँ से उठकर चली जाती थी. मुझे ये बाते सुनने में बड़ी शर्म आती थी. पर धीरे धीरे मैं खुल गयी. अब मैं अपनी फ्रेंड्स की चुदाई वाले किस्से सुनती रहती और मजा लेती रहती.

“यार माधवी !! मेरी भी किसी लड़के से सेटिंग करवा दे. मैं भी चुदाई के मजे लेना चाहती हूँ” मैंने अपनी फ्रेंड से कह दिया.

“ठीक है यार !! मैं तेरे लिए कोई लड़का ढूढूगी” माधवी बोली.

पर दोस्तों उस कम्बक्त से कुछ नही किया. अपने आशिक के साथ सैर सपाटा करती रही. मजे से चुदवाती रही और कामिनी ने मेरे लिए कुछ भी नही किया. धीरे धीरे मैं जान गयी की अपना हाथ जगननाथ. यानी मुझे ही अपना काम करना पड़ेगा. एक दिन मैंने अपने भाई को मुठ मारते रंगे हाथों पकड़ लिया. मेरे दिमाग में आईडिया आया की क्यूँ ना अपने सगे भाई से चुदवाऊ. शाम को जब पापा मम्मी बजार गये थे तो मैंने अपने छोटे भाई महावीर को बुलाया. वो १९ साल का है और मुझसे बस १ साल छोटा है.

“महावीर !! जैसे ही मम्मी पापा आएंगी मैं उनको बता दूंगी की तू बाथरूम में जाकर मुठ मारता है!!” मैंने उसे धमकाया.

“नही दीदी !! प्लीस ऐसा मत करो! तुम जो कहोगी मैं करूँगा. मेरे पास चूत तो मारने को थी नही इसलिए मैं मुठ मारके अपना काम चला लेता हूँ. दीदी प्लीस !! मम्मी पापा से इस बारे में मत बताना!!..तुम कहोगी तो मैं तुमको अपनी पॉकेट मनी दे दूंगा!” महावीर बोला. मैं खुश हो गयी.

“ठीक है मेरे भाई !! मैं मम्मी पापा को तेरे बारे में नही बताउंगी !! ना ही मुझे तेरी पॉकेट मनी चाहिए” मैंने कहा

“….तो क्या चाहिए दीदी ????’’ महावीर बोला

“….भाई तू मुझको चोद और मजे दे. देख तेरे पास लंड है चूत नही. मेरे पास चूत है लंड नही. इसलिए तू मुझे लंड दे, मैं तुझे चूत दूंगी !” मैंने महावीर से कहा

“….पर दीदी तुम ये किसी से कहोगी तो नही ???’ भाई बोला

“….नही रे!!” मैंने कहा

उसके बाद दोस्तों हम दोनों एक दुसरे के चिपक गये. भाई मेरे होठ पीने लगा. कुछ ही देर में मेरे छोटे भाई महावीर ने मुझे नंगा कर दिया और मैंने उसे. मेरे दूध देखकर वो मस्त था. “वाह ! दीदी ! तुम्हारे दूध तो बहुत मस्त है” भाई बोला.

‘पी ले! पी ले !! आराम से पी!” मैं बोली. महावीर मेरे मस्त मस्त दूध मुँह में भरके पी ता था. उसकी नजर कमजोर थी, इसलिय वो चश्मा लगाता था. भाई मेरे दूध पी रहा था, पर उसका चश्मा नही उतरा था. क्यूंकि दोस्तों चश्मा निकलने से उसके सर में घना दर्द शुरू हो जाता है. मैं सोफे पर लेती हुई थी. अपने सगे भाई को दूध पिला रही थी. जल्द ही मैं भाई से चुदने वाली थी. दोस्तों, मुझे तो ये बात समझ में नही आती है की बहने अपने भाइयों से क्यों पर्दा करती है. मेरा तो कहना है की हर बहन को अपने भाई से चुदवाना चाहिए और जिन्दगी के मजे लेने चाहिए. मेरा छोटा भाई किसी बच्चे की तरह अपने मुँह चला चला कर मेरे दूध पी रहा था. वो मेरी तारीफ़ बार बार कर रहा था.

कुछ देर बाद उसने मेरा दूसरा दूध मुँह में ठूस लिया और मजे से पीने लगा. मैंने अपनी सलवार का नारा खोल दिया. सलवार और पेंटी निकाल दी. मैं छोटे भाई के सामने नगी हो गयी. महावीर मेरे नर्म मखमली पेट चूमने लगा. फिर मेरी सेक्सी लम्बी आकार की नाभि चूमने लगा. मुझे बहुत अच्छा लगा. मेरा पूरा शरीर झुनझुनाने लगा. महावीर किसी वीर की तरह मेरी चूत पर आ गया. मेरी चूत बहुत ही सेक्सी थी. बहुत सुंदर लाल चूत थी. महावीर मेरी चूत को टच करके देखने लगा. चूत पर उसकी उँगलियों का स्पर्श मुझे दीवाना कर गया. मेरी चूत में झनझनाहट होने लगी. मैंने सुबह ही झातें साफ़ कर ली थी. इससे मेरी बुर बहुत सुंदर और सेक्सी लग रही थी. छोटा भाई मेरी चूत पीने लगा. दोस्तों, चूत पीने का सबसे जादा फायदा ये होता है की लडकी जल्दी चुदवाने को तैयार हो जाती है. अगर अगर किसी लड़के की माल चुदवाने के मूड में नही है तो उसका भी मन जल्दी से बन जाता है. इसलिए मैं महावीर को चूत पिला रही थी.

जिससे मैं जल्दी से चुदने को तैयार हो जाऊं. महावीर लगातार बिना रुके मेरी बुर पी रहा था. मुझे बहुत मजा आ रहा था. बड़ा मीठा मीठा सा लग रहा था. बड़ी अच्छी फिलिंग आ रही थी. मेरे तन मन में सेक्स और चुदाई का जागरण होना शुरू हो गया था. मेरा छोटा भाई महावीर से अपनी जीभ को निकालकर मेरी बुर पी रहा था. जैसे मेरी मम्मी पराठा सकते वक़्त पराठे में चममच से घी लगाती थी ठीक उसी तरह महावीर अपनी जीभ से मेरी बुर में अपनी लार चुपड़ रहा था. मेरी चूत बहुत गर्म हो गयी थी. मैं अपनी कमर और गांड उठाने लग गयी थी. अब मैं जादा देर बिना लौड़ा खाये बर्दास्त नही कर सकती थी. मैं जल्दी से भाई का लौड़ा खाना चाहती थी. पर माहवीर तो किसी जादा उम्र के अनुभव दार मर्द की तरह मेरी चूत पी रहा था.

फिर वो अपनी ऊँगली से मेरी चूत के होठ सहलाने लगा. मैं तड़प उठी. फिर महावीर अपनी ऊँगली से मेरी भगशिश्न को छूने और सहलाने लगा. मेरी चूत में भूचाल आ गया. महावीर जोर जोर से मेरी चूत घिसने लगा. जैसे सुबह सुबह औरते सिल पर मसाला घिस घिस कर पीसती है. ठीक उसी तरह महावीर मेरी चूत को अपनी ऊँगली से घिसने लगा और पिसने लगा.

“भाई !! अब मुझे जल्दी से चोदो!!….जल्दी से मेरी चूत में अपना लंड डाल दो और कूटना शुरू करो वरना मैं मर जाऊँगी!!” मैंने किसी शराबी की तरह कहा जो शाराब पीना चाहता हो पर उसे कहीं नही मिल रही हो.

महावीर ने अपना कच्छा उतार दिया. मैंने पहली बार अपने सगे भाई का लौड़ा देखा. मेरा भाई अब जवान हो चूका था. मुझे इस बात का गर्व था. महावीर का लौड़ा देखकर मैं बता सकती थी की मेरा भाई अब जवान हो चूका है. महावीर का लौड़ा अच्छा खासा कोई ७ ८ इंच का रहा होगा. अच्छा खासा मोटा भी था. उसने मेरे पैर खोल दिए. मेरी कमर और गांड के निचे एक मोटी तकिया लगा दी. इससे ये फायदा हुआ की मेरी चूत उपर उठ गयी. महावीर ने अपना लौड़ा मेरी चूत पर लैंड करवा दिया जैसे प्लेन हवाई पट्टी पर लैंड हो जाता है. मेरी चूत बिलकुल कुवारी थी. क्यूंकि मेरा कोई आशिक भी नही था जो मुझे चोदता और जन्नत के मजे देता. इसलिए मेरा भाई ही अब मेरा आशिक बन गया था. महावीर ने अपना लौड़ा हाथ में पकड़ लिया और मेरी चूत के दरवाजे पर रखकर अंदर धक्का मारने लगा. पर उसका लंड उपर की तरफ भाग जाता था. मेरी चूत में नही घुस पाता था. महावीर ने मेरी कमर एडजस्ट की. सीधा मेरी चूत के उपर आ गया और लंड हाथ से जड़ के पास पकड़कर उसने १ जोर का धक्का मारा. दोस्तों, मेरी माँ चुद गयी. क्यूंकि मेरी सील टूट चुकी थी. मुझे तेज दर्द होने लगा.

महावीर ने मुझे कसके हाथ पैर से पकड़ लिया और चोदने लगा. मैं अब कुवारी कन्या नही रग गयी. मेरा छोटा भाई होनहार निकला. मुझे मजे से चोदता रहा. उसका लौड़ा मेरी चूत के खून से सन चूका था. मेरी कसी चूत की सीटी खुल चुकी थी. मैंने दर्द के बीच नीचे देखा. मेरा भाई मस्ती से झूमझूमकर मुझे चोद रहा था. मैं खुश थी की अब मैं भी अपनी सहेलियों को अपनी चुदाई के किस्से सुना सकूंगी. मैंने अपना फोन उठा लिया और महावीर से चुदवाते काई तस्वीरें ले ली. कुछ देर बाद महावीर ने मेरी उबलती चूत में अपना खौलता माल छोड़ दिया. अगेल दिन कॉलेज में मेरी मुलाकात मेरी सहेलियों से हुई.

“आई ऍम सॉरी मंजरी !!! यार मैं तू तेरे बारे में भूल ही गयी. तेरी सेटिंग मैं जरुर करवाउंगी !!” माधवी बोली.

“रहन दे !! बहन की लौड़ी !! मैंने अपने लिए लंड ढूढ लिया है!” मैंने कहा. मैं भाव खाते हुए अपना पर्स खोला. फोन निकाला और सबको चुदाई की गर्मा गर्म तस्वीरे दिखाई. सारी सहेलियों की माँ चुद गयी. सबके होश उड़ गये.

“ओ.. बहनचोद !! कौन है ये लड़का ???’ माधवी और बाकी सहेलियां पूछने लगी. सब की सब हैरान थी. सबकी आँखें फटी फटी हो गयी थी.

“….छोटा भाई है मेरा!! कल शाम को उसी का लंड मैंने खाया है!!” मैंने कहा

“ओह बहनचोद !! मंजरी ! तू तो बहन की लौड़ी बन गयी” माधवी बोली

“….हाँ !! और क्या करती. तुम सब की सब तो आपने आशिकों से चिपकी रहती हो. तुम लोगों के पास तो मेरे लिए टाइम नही है” मैंने कहा

“….सही है बहन. बहन की लौड़ी बनकर तूने मस्त मजे लिए कल. सही है मंजरी !!! सही है री!!” सब की सब मेरी तारीफ़ करने लगी. मैंने सबको बताया की कैसे कैसे मेरे भाई महावीर ने मुझे चोदा. दोस्तों कुछ दिन बीते तो मेरा फिर से भाई से चुदवाने के मन था. संडे की सुबह को मेरे घर में सब ११ बजे तक सोते रहते है.. भाई से चुदवाने का ये अच्छा मौका था. मैं सुबह ५ बजे उठकर भाई महावीर के कमरे में चली गयी. वो गांडू नेकर उतार कर सो रहा था. मैं उसकी रजाई में घुस गयी और उसकी गोलियां और लौड़ा सहलाने लगी. दोस्तों लडकों का लंड तो सुबह सुबह वैसे ही खड़ा रहता है. जब मैं महावीर का लौड़ा सहलाने लगी तो वो कुछ सेकंड में ही खड़ा हो गया. महावीर अभी सो रहा था.

पर मैं उसके पास ही लेट गयी और उसने जिस्म को चूमने चाटने लगी. रजाई में वो पूरा नंगा था. सायद वो इसी तरह रोज बिना कपड़ों के लेटता हो. मैं उसके जिस्म को चूमने लगी. उसके सीने को चूमने लगी. अपने दांत गड़ाने लगी. पर फिर भी वो सोता रहा. मैंने उसका पेलर, उसका लौड़ा और उसकी गोलियां हाथ से रगड़ने लगी. धीरे धीरे उसका लौड़ा विकराल आकार में आने लगा. भाई के विशाल आकार लौड़े को देखकर मैं सोचने लगी की क्या ये वही लौड़ा है तो मैंने उस दिन शाम को खाया था. मैं भाई के लंड को हाथ में लेकर जोर जोर से फेटने लगी. कुछ देर बाद दोस्तों, मेरा छोटा भाई महावीर जाग गया.

“भाई !! तुम यहाँ सो रहे हो. और इधर मुझे चुदवाने की तलब लगी है. प्लीस उठो यार !! प्लीस मुझे कसके चोदो भाई !!” मैंने कहा

“मेरी प्यारी बहना !! ठीक है. मैं तेरी इक्षा जरुर पूरी करुँगी !! मैं तुझको जरुर चोदूंगा!!” भाई बोला.

दोस्तों, फिर उसने मेरे सारे कपड़े निकाल दिए. मैं नंगी हो गयी. भाई मेरे उपर चढ़ गया. हाथ से एरे मस्त मस्त चिकने दूध दबाने लगा. मेरी छातियाँ भरी हुई थी और बहुत सेक्सी और चिकनी थी. महावीर हाथ से मेरी निपल्स को कोई रस्सी समझकर ऐठता रहा. मेरी छातियों में एक मर्द की छुअन से बहुत मजा मिल रहा था. पुरे बदन में सनसनी हो रही थी. फाई महावीर ने मेरे दूध को मुँह में भर लिया और मजे से पीने लगा. आआआह !!. दोस्तों मुझे कितना मजा मिल रहा था. मेरा भाई महावीर बड़ी अच्छी तरह से मेरे दूध पी रहा था. ये कमाल की बात थी. फिर वो मेरी चूत पर आ गया और मजे से पीने लगा. कुछ देर तक वो मेरी चूत पीता रहा.

फिर वो मेरी चूत में ऊँगली करने लगा. मैं अपनी कमर और गांड उछालने लगी. आ आ आ हा हा अईई अईई!! करने लगी. महावीर जोर जोर से मेरी चूत अपनी ३ उँगलियों से फेटने लगा. मुझे जन्नत का मजा मिलने लगा. खूब मजा मिला मुझे दोस्तों. कुछ देर बाद भाई ने मेरी गर्म चूत में अपना ७ इंच लम्बा लौड़ा डाल दिया और मजे से मेरी चूत लेने लगा. मुझे चुदास की उतेज्जना होने लगी. नर्म और मुलायम बिस्तर पर मैं उछल उछल कर चुदवाने लगी. ये सब देखकर मुझे बहुत मजा मिल रहा था. कहाँ मैं बाहर जाकर कोई बॉय फ्रेंड बनाती. इस लिए मैं अपने सगे भाई को अपना बॉय फ्रेंड बना लिया था. महावीर मुझे जोर जोर से हौंक हौंक कर पेलने लगा. कुछ देर बाद जब मैं अपनी कमर उठाने लगी तो उसने मेरी दोनों टाँगे अपने कन्धो पर रख ली और मुझे किसी छिनाल की तरह चोदने लगा. मैं कमर उछाल उछालकर मस्ती से चुदवाने लगी.

मेरी चूत भरी हुई थी. मांस से बिलकुल भरी हुई थी. मेरा भाई महावीर बड़ी वीरता से मेरी चूत मार रहा था. खूब मजा मिल रहा था दोस्तों. वो मेरी फुद्दी में लंड ही लंड दे रहा था. लंड की बरसात मेरी फुद्दी पर हो रही थी. भाई मुझे किसी रंडी की तरह चोद रहा था. मैं अपने हाथ पैर पटक रही थी. दोस्तों, कुछ देर बाद महावीर ने मेरी गुझिया में अपना माल छोड़ दिया. जब उसने अपना लौड़ा बाहर निकाला तो मेरी गुझिया उसके माल से लबालब भरी हुई थी. फिर उसका माल मेरी चूत से बाहर निकल आया और नीचे की ओर बहने लगा. अगर महावीर का माल बिस्तर पर लग जाता तो मम्मी को हम लोगो के बारे में पता चल सकता था. इसलिए मेरे भाई महावीर ने तुरंत मेरी चूत से निकलता माल अपने हाथ में भर लिया और मेरे मुँह में डाल दिया.

भाई का गर्म गर्म माल मैं पूरा का पूरा पी गयी. मुझे बहुत मजा आया दोस्तों. फिर भाई ने मुझे अपने लंड पर बिठा लिया और चोदने लगा. इस बार भी मुझे खूब मजा मिल रहा था. इसलिए मैं फिर से उछल उछलकर चुदवाने लगी थी. महावीर ने मेरी कमर को अपने हाथों में जकड़ रखा था मजबूती से. जैसे कोई सांप मेरी पतली सेक्सी कमर पर जकड़ा हुआ हो. भाई मेरे नाजुक मखमली पुट्ठों को सहला सहला कर मुझे उपर नीचे उछाल उछालकर चोद रहा था. पेलते पेलते वो बहुत जादा चुदासा हो जाता था, और मेरे दूध किसी रसीले टमाटर की तरह बड़ी जोर से हाथ से दबा देता था. मुझे लगती तो बहुत थी दोस्तों, पर दबवाने में मजा भी खूब आता था. इसलिए मैं कहूँगी की सभी लडकियाँ अपने अपने भाइयों से एक बार तो जरुर चुदवायें. मेरा भाई महवीर मुझे मस्ती से नर्म बिस्तर पर उछाल उछालकर चोदता रहा और मेरे रसीले टमाटर दबाने लगा. मुझे जन्नत का मजा मिल रहा था दोस्तों. फिर भाई ने दूसरा टमाटर अपने हाथ में ले लिया और मुझे ठोंकते ठोंकते उसे भी दबाने लगा. कुछ देर बाद मैं महावीर के लौड़े पर झड़ गयी. ये कहानी आप sexkahani.net कॉम में पढ़ रहे है.

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अपने लंड पर कुदा कुदा के उसके बूब्स ढीले कर दिए https://sexkahani.net/%e0%a4%85%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%82%e0%a4%a1-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%89%e0%a4%b8/ https://sexkahani.net/%e0%a4%85%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%82%e0%a4%a1-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%89%e0%a4%b8/#comments Sat, 15 Apr 2017 08:40:03 +0000 https://sexkahani.net/?p=10985 नमस्कार दोस्तों,

आज मैं आपको दिव्या की कहानी सुनाने जा रहा हूँ जोकि मेरे दोस्त की ही बहन थी और उसका भाई मेरा बहुत अच्छा दोस्त भी था | मैंने अक्सर जब भी अपने दोस्त के घर जाया करता तो उसकी बहन दिव्या मुझे बड़ी ही कामुक नज़रों से मुस्कराहट दिया करती थी जिसपर मैं मजेदार तरीके से उत्तजित ही जाया करता था | पहले तो मैंने काफी उसके इशारों को नज़रंदाज़ करने की कोशिश की और मैं धीरे – धीरे अपने आपे से बहार ही होता चला गया | एक दिन मेरे दोस्त को मेरे साथ कहीं बहार जाना था और उसी वक्त जाते हुए उसने मुझे रास्ते में बताया की उसके घर पर उसके माँ – बा घर पर नहीं है और तभी मेरा दिमाक घूम गया और मैंने बीच रास्ते में ही उससे अपने घर पर कुछ ज़रुरी काम के सिलसिले में वापस लौटने का बहाना मार उसी के घर में चला गया |

मुझे पता था की मेरे दोस्त को वापस लौटन में काफी वक्त लग जाएगा इसीलिए मैंने उसकी बहनके पास पहुँच और अब जाते ही पानी पीने के बहाने उसके हाथ को पकड़ दिवार से सता दिया | मैंने कुछ ही पल में दिव्या से एक दम चिपक गया और मैं उसके उसके चुचों को बेसब्री से मसलते हुए मुंह में उसके होंठों को भरके दबाने लगा | मैंने उसके टॉप को वहीँ उतारा दिया और उसके दोनों चुचों के बीच अपने चेहरे को घुसाये हुए था और वो दूसरी और से दोनों चुचों को दबा रही थी | मैंने अब उसे वहीँ उसके पजामे को भी उतार दिया और नीचे झुककर उसकी चुत में ऊँगली करता हुआ चाटने लगा | मुझे उसकी वही पिलपिली चुत में ऊँगली डालते ही एक सुकून मिल रहा था पर शायद उसे मुझे ज्यादा ही राहत मिल रही थी जिससे वो पागलों की तरह तड़प रही थी |

मैंने अब अपनी जीभ से उसकी चुत को चाटना शुर कर दिया और मैंने कुछ देर में अपने लंड को भी पैंट से निकाल लिया जोकि उसकी चुत से देनादानादन टकरा रहा था | मैंने अब कुछ देर ऐसे ही उसकी चुत को मसलते हुए उसे अपनी गौद में उठा लिया और उसकी दोनों टांगें मेरी कमर के से चिपका लिया जिससे वो मेरे पुरे काबू में आ चुकी थी | उसकी चुत के सही नीचे मेरा लंड खड़ा हुआ तड़प रहा था जिसपर मैंने अब उसे छोड़ उसे चोदना शुर कर दिया | मैं अब उसे जोर – जोर से अपने लंड पर उप्पर उठाकर फिसला रहा था जिससे वो चिल्ला भी रही थी पर उसकी चींखें पुरे घर में गूंज रही थी पर मुझे किसी भी बात की फिकर रही थी और मैंने उसकी चुदाई इस तरह चलाये रखी |

मैंने अब उससे वहीँ खड़े होकर मेरे लंड के लिए अपनी गांड को पीछे को उभारने को कहा और पीछे से पहले उसकी गांड पर थप्पड़ मारते हुए मस्त कर लिए और पीछे से उसकी गांड के छेद को भी चुस्त कर उसकी चुत में अपने लंड को देना चालू रखा जिससे अब तो उसकी धासू वाली चींखें निकल रही थी और मेरे मज़े की तो बात ही कुछ और थी मैंने अपने डॉट के वापस लौटने तक दिव्या की इसी मुद्रा में चुत मारी और ऐसे ही झड उसे चूमने लगा |

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ताऊ जी ने मेरे छोटे छोटे निम्बू दबाये और मुझे चोदकर अपने लौड़े की गर्मी शांत की https://sexkahani.net/%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%8a-%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%9b%e0%a5%8b%e0%a4%9f%e0%a5%87-%e0%a4%9b%e0%a5%8b%e0%a4%9f%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a4%bf/ https://sexkahani.net/%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%8a-%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%9b%e0%a5%8b%e0%a4%9f%e0%a5%87-%e0%a4%9b%e0%a5%8b%e0%a4%9f%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a4%bf/#comments Sat, 15 Apr 2017 06:21:04 +0000 https://sexkahani.net/?p=10863 ताऊ जी ने मेरे छोटे छोटे निम्बू दबाये और मुझे चोदकर अपने लौड़े की गर्मी शांत की

मैं सारा आप सभी का SexKahani.net में बहुत बहुत स्वागत करती हूँ. मैं पटियाला की रहने वाली हूँ. पापा के गुजारने के बाद मैं और मेरी माँ अपने ताऊ भानुप्रताप चौधरी के पास आकर रहने लगे. मेरे पापा फ़ौज में थे. कश्मीर ,पुलवामा जिले में उनकी पोस्टिंग थी. तभी पाकिस्तान की तरफ से आये आतंकवादियों ने अचानक हलमा कर दिया और भारी फाईरिंग शुरू कर दी. और पापा आतंकवादियों का सामना करते हुए शहीद हो गए. तबसे हम लोग ताउजी के घर में रहने लगे. एक दिन मैं रात में बाथरूम करने उठी तो देखा की ताऊ जी के कमरे से जोर जोर से ऊऊऊउन..आआआअ आहा हाह हा की आवाजे निकल रही थी. मैंने दरवाजे से झांक कर देखा तो मेरे पैरों तले जमीन खिसक गयी.
ताऊ जी मेरी मम्मी को जोर जोर से चोद रहे थे. मम्मी अपने मम्मों को हाथो में लिए थी और जोर जोर से चिल्ला रही थी ‘जेठ जी !! जोर से पेलिए …जोर से!! क्या वक़्त के साथ साथ आपकी मर्दाना ताकत भी खत्म हो गयी है??….जोर जोर से चोदिये मुझे!’ मम्मी बोल रही थी. ये देखकर तो मेरा दिमाग ही ख़राब हो गया. पापा को मरे अभी ४ महीने भी नही हुए और माँ ताऊ जी से रात में छिप छिपकर चुदवाने लगी. मुझे एक सोचकर बहुत गुस्सा आ गया. मैंने सोचा की माँ को रोकूँ, फिर सोचा की चलो इनको चुदवा लेने दो. फिर बात करुँगी. मैं वही खड़ी होकर मम्मी को ताऊ जी से चुदते देखने लगी. जितनी बड़ी मम्मी की चूत थी, उससे कहीं बड़ा और हैवी ताऊ जी का लौड़ा था. वो गचागच मम्मी को किसी छिनाल की तरह चोद रहे थे. मैंने उस समय तो कुछ नही कहा पर बाद में जब मम्मी अच्छे से चुद गयी तब सुबह की मैंने उसने सवाल जवाब करने शुरू कर दिए
‘मम्मी!! साफ साफ़ बताइये की कल रात कोई २ बजे के आस पास आपको मेरे साथ कमरे में होना चाहिए. आप कहाँ थी सच सच बताइये??” मैंने उसने पूछा
‘बब्बब्बब्ब….बेटी वो मैं ..वो मैं…’’ मम्मी हडबडा गयी.
‘मम्मी!! मैं सब कुछ जानती हूँ. आप ताऊ जी के कमरे में थी और उनसे मस्ती से चुदवा रही थी. आपको शर्म आनी चाहिए. एक विधवा होकर जेठ का लंड खाती है. आपको तो शर्म से डूब मरना चाहिए’’ मैंने मम्मी से कहा. वो मुझसे माफ़ी मांगने लगी की अब दोबारा ऐसा कांड नही करेंगी. पर दोस्तों मम्मी छुप छुपकर रोज रात में ताऊ के पास जाती और मजे से चुदवाती. उनको चुदाई का ऐसा चस्का लग गया था की दूर ही नही हो रहा था. मम्मी रोज जाकर ताऊ से चुदवाती और मैं छिप छिपकर देखती. ये सिलसला बहुत दिन चला. एक दिन ताऊ जी ने मुझे रात में किसी काम से बुलाया. उन्होंने अपनी दवा मंगाई थी. जब मैं दवा लेकर गयी तो ताऊ जी ने मेरा हाथ पकड़ लिया.
‘सारा बेटी!! जो रात में होता है क्या तुझे अच्छा लगता है???’ उन्होंने पूछा
‘जी ताऊ जी !! …मैंने आपको मेरी माँ को चोदते हुए देखा है!’ मैंने कहा
ताऊ जी से मुझे दोनों हाथों से पकड़ लिया और मेरे गाल पर पप्पी दे दी. ‘बेटी!! जो मैं रात में तेरी माँ के साथ करता हूँ वो मैं तेरे साथ करू तो तुझको भी बहुत मजा आएगा. बोल करूँ???’ उन्होंने पूछा.
‘..जी’’ मैंने सिर हिला दिया.
उसके बाद दोस्तों ताऊ जो वो सब मीठी मीठी हरकते मेरे साथ करने लगे. मेरे गाल पर बार बार पुच्ची देने लगे. मुझे बहुत अच्छा लगा. आज मैं अपने ताऊ जी की माल बनने वाली थी. उनका बडा सा लौड़ा सिर्फ मेरी माँ ही क्यूँ खाये मुझे भी मिलना चाहिए. मैंने नारंगी रंग का सलवार सूट पहन रखा था. मैं २१ साल की जवान लडकी हो चुकी थी. मेरे मम्मे ३० साइज़ के थे. कमर २८ की थी और पिछवाड़ा ३२ का था. मेरी जैसी मस्त जवान कुड़ी देककर ताऊ जी की आँखों में चमक आ गयी. उन्होंने मेरे दुपट्टा हटा दिया. मुझे पास में लाकर मेरी साँस पीने लगे. फिर होठ पीने लगे. कुछ ही देर में ताऊ जी का कड़क पत्थर जैसा हाथ मेरे नर्म नर्म छोटे आकार के पर रसीले मम्मो पर जाने लगा. उनके बड़े से हाथ में तो मेरे दूध किसी नीबू जैसी मालूम पड़ रहे थे.
ताऊ जोर जोर से मेरे निम्बू दबाने लगे और मेरे ओंठ पीने लगे. मुझे बहुत मजा आने लगा. आज ताऊ जी मुझे चोदने वाले थे. ये जानकर मैं बहुत रोमांचित थी. मैं आज तक एक बार भी नही चुदी थी. इसलिए बहुत रोमांचित थी. वो भर भरके मेरे ओंठ पीने लगे. मैं उनके सामने एक बच्ची लग रही थी. वो मेरे सामने एक आवारा छुट्टा सांड जैसे लग रहे थे जो कुवारी गायों को बाजार में दौड़ा के चोद देता है. आज मैं एक बाप की उम्र के आदमी से चुदने वाली थी. उस आदमी से जो मेरी माँ को रोज रात में पेलता था. ताऊ ने बड़ी अच्छी तरह से मेरे होठ चूसे. मेरी चूत पानी से तर हो गयी.
‘सारा बिटिया…अगर चुदाई के मजे लेने है तो सूट निकाल बेटी !’ ताऊ बोले
मैंने तुरंत दोनों हाथ उपर करके सूट निकाल दिया. मैंने समीज पहन रखी थी. मैंने भी चुदवाने के पुरे मूड में थी. इसलिए मैंने समीज भी निकाल दी. मेरे छोटे छोटे निम्बू को देखते हुए ताऊ का दिल बाग़ बाग़ हो गया. वो बांवले हो गये और मेरे निम्बू तोड़ने दौड़े. हाथ में भरके इतनी जोर से दाब दिया की मेरी माँ चुद गयी.
‘ताऊ जी आराम से….आप मेरे निम्बू दबा रहे है, मेरी माँ के बड़े बड़े आम नही’’ मैंने कहा. ये सुनकर उनको याद आया की वो मेरी माँ को नही मेरे दूध दबा रहे है. ताऊ जी का हाथ सनी देवल का ढाई किलो का मुक्का था. वो हल्के हल्के से ही मेरे ३० साइज़ के मम्मे दबा रहे थे, पर मुझे तो लग रहा था की बहुत जोर जोर से निम्बू निचोड़ रहे है. उनका हल्का हल्का मेरे लिए बहुत भारी भारी जान पड़ रहा था. कहाँ ताऊ ६० साल के थे, देखने में तकले प्रेम चोपड़ा लगते थे और कहाँ मैं २१ साल की जावन बच्ची थी. मैं उनके सामने बिलकुल बच्ची लग रही थी. उन्होंने मुझे अपने पास लिटा लिया और मुँह लगाकर मेरे मम्मे चूसने लगी. मेरा एक एक निम्बू पूरा का पूरा आराम से उनके मुँह में समा जा रहा था. वो मजे से लपर लपर करके मेरे निम्बू पीने लगे.
“सारा बेटी!! तेरी माँ के इससे ६ गुना दूध है. मैं तो रात में रोज पीता हूँ. तेरी माँ की चूत तो रबड़ी मलाई जैसी है. अआहाहा….उस छिनाल की चूत मारने में बहुत मौज आती है!!’ ताऊ बे बताया
“ताऊ जी !! आज मुझे भी चोद चोदकर छिनाल बना दो. हाँ, मुझे भी छिनाल बनना है” मैंने दृढ विस्वाश से कहा. ताऊ अब कहीं जादा खुश लग रहे थे. वो कभी दाढ़ी नही बनाते थे. बड़ी बड़ी दाढ़ी रखते थे. ताऊ ने पहला मेरा निम्बू चूसने के बाद दूसरा दूध मुँह में भर लिया और चबा चबा कर पीने लगी. उधर नीचे मेरी चूत पानी पानी हो रही थी. क्यूंकि आज पहली बार कोई मर्द मुझे हाथ लगा रहा था. ताऊ का एक हाथ नीचे को भाग गया. मैं जान गयी की वो क्या करने वाले है. अपना नारा खिंचने की आवाज मैंने सुने. मेरे दिल में खलबली मचने लगी. रोज खिडकी दरवाजे से माँ को हा हा हा ऊँ ऊँ ऊँ करके आवाज करते देखती थी. आज वही सब मेरे साथ होने वाला था. मैं बहुत रोमांचित थी. ताऊ से सलवार खोलने में कामयाबी पाई. मैंने भी दोनों पैर उपर कर दिए.
प्रेम चोपड़ा जैसे दिखने वाले ताऊ जी ने मेरी सलवार निकाल दी. मैंने महरून रंग की सूती हवादार चड्ढी पहन रखी थी. इससे मेरी चूत में अच्छे से हवा आती जाती है. ताऊ जी ने चड्ढी निकाल दी. हाय राम!!…मैंने उनके सामने नंगी हो गयी. ताऊ ने मेरे निम्बू पीने बंद कर दिए और मेरी पतले कमसिन पेट को चूमते हुए मेरी नाभि पर आ गए. अपनी जीभ डालकर मेरी नाभि पीते रही. इससे मुझे बहुत जादा गुदगुदी होने लगी. पर मैंने किसी तरह बर्दास्त नही. ‘नही!….रहने दो ताऊ जी!’’ मैंने हंसते खिलखिलाते हुए कहा. पर वो प्रेम चोपड़ा मेरी नाभी से बड़ी देर तक खेलता रहा.
अंत में ताऊ मेरी रसीली माल से तर चूत पर आ गये.
‘सारा बेटी!!….एक बात कहूँ. तेरी चूत तेरी माँ की चूत से बहुत मिलती है. तो उसकी असली बेटी है!! वो तुलना करने लगे. फिर उन्होंने अपनी जीभ एक बार नीचे से उपर तक सुटक दी और मेरा चूत का सारा माल सुट कर गये. ‘बेटी !! तेरी चूत का स्वाद तो हुबहू तेरी मम्मी जैसा है’’ वो बोले और जोर जोर से सुपड सुपड की आवाज करते हुए मेरी बुर पीने लगे. ताऊ जी की घनी सफ़ेद दाढ़ी में भी मेरा माल लग गया. वो मजे से सुड़क सुड़क के मेरी रसीली चूत पीने लगे. मेरी चूत थी की कोई मीठे पानी का सोता. जितना ताऊ पीते थे उतना पानी निकल आता था. फिर उन्होंने अपना तहमत खोल दिया. वो अंदर कच्छा नही पहने थे. सायद मेरी माँ को रोज चोदते चोदते सोंचने लगे होंगे की कौन रोज रोज कच्छा पहने और उतारे. ताऊ जी मेरे उपर लद गए. उनका वजन ९० किलो या १ कुंतल आराम से होगा.
उन्होंने अपनी मोती तोंद मेरे पतले पेट पर रख दी तो मेरा उनके भारी वजन से दम घुटने लगा. एक बार तो लगा की कहीं चुदवाने से पहले कहीं मैं मर ना जाऊ. ताऊ ने अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया. मेरी सील टूट गयी. ताऊ मुझे चोदने लगे. मेरी चूत में बहुत जोर का दर्द होने लगा. मैं किसी मछली की तरह तड़पने लगी. ताऊ हचाहच मुझे चोदने लगे. मेरी पतली की चूत के बीच में उनका बड़ा लम्बा सा खूटे जैसा लौड़ा बड़ा अजीब और अटपटा लग रहा था. जैसे कोई बाप अपनी बेटी को पेल रहा हो. ऐसा ही लग रहा था. पर ताऊ बिलकुल प्रेम चोपड़ा बन चुके थे और जोर जोर से मुझे पेल रहे थे. मेरी छोटी सी प्यारी सी चूत में उनका लंड बड़ा अजीब लग रहा था. वो मुझे पकापक चोदने लगे. मुझे अपनी नाजुक सी चूत में बड़ी मोटी चीज हरकत करती हुई मालूम पड़ी.
पर फिर भी चुदने में पूरा मजा आ रहा था. ताऊ ने मेरे दोनों हाथ कसके पकड़ रखे थे. मैं हाथ छुड़ाना चाहती थी, पर ताऊ के बलिष्ठ हाथ ने मुझे कसके पकड़ रखा था. ताऊ सटासट चोद रहे थे. कुछ देर बाद मेरा दर्द कम हो गया. ताऊ का लौड़ा आराम से मेरे चिकने भोसड़े में अंदर बाहर जाने लगा. मैं अपनी कमर बड़ी उपर तक उठाने लगी. कुछ देर के लिए मेरी आँखों में अँधेरा छा गया था. मुझे तो लग रहा था की मैं मर चुकी हूँ. पर फिर ताऊ जी जैसे प्रेम चोपड़ा की तस्वीर मेरे सामने थे. मुझे जोर जोर से चोद रहे थे. मेरी चूत में लंड दे रहे थे. उनकी आँखों में मेरी चूत मारने का लालच था. नजरो में वासना थी और मेरी चूत में उनका लंड था. सब कुछ परफेक्ट तरह से काम कर रहा था. ‘हा हा हूँ हूँ हूँ….करके ताऊ हुमक हुमक के धक्के दे रहे थे. फिर वो झड गए.
वो मेरे उपर लेटने वाले थे पर मैंने मना कर दिया. क्यूंकी उनके वजन से मैं मर जाती. ‘’बेटी सारा!!…..तू बड़े कमाल की चीज है. आज तेरा हुनर मैंने देख लिया…तू मस्त माल है!!’ ताऊ अपने टूटे दांतों से मेरी तारीफ करने लगे. एक बार फिर से मेरे निम्बू को हाथ में लेकर दबाने लगे. कुछ देर बाद ताऊ ने मुझे अपने पेट पर बिठा लिया. मुझे उचकाकर मेरी चूत को लंड डाल दिया और मस्ती से मुझे चोदने लगे. मैं नंगी उनके पेट पर बैठी डिस्को डांस करने लगी. ताऊ मेरी नितम्ब दबा दबाके मुझे ठोकने लगे. मेरे कमसिन से ३० साइज़ के छोटे पर ठीक ठाक आकार के दूध मस्ती से थिरक रहे थे. ताऊ मुझे नीचे से चोदने लगे. मेरी पतली कमर किसी नागिन जैसी बल खा रही थी. कमर पर चर्बी का एक भी टुकड़ा नही था. बिलकुल पतली मलाई जैसी कमर थी. ताऊ ने यही पर कमर को दोनों हाथो में पकड़ लिया और मुझे उचका उचकाकर चोदने लगे. मेरे चिकने काले बाल नीचे की ओर झूल रहे थे और बहुत सेक्सी लग रहे थे.
‘ताऊ जी !! जोर से …जोर जोर से मुझे लीजिये जिस तरह रोज रात में मेरी माँ को लेते है!!’ मैं उतेज्जना वश कह दिया ताऊ और ललचा गए और जोर जोर से निचे से मेरी चूत में गहरे और गहरे धक्के देने लगे. मैं निखर के चुदने लगी. ताऊ के खूंटे जैसे मोटे लंड पर मेरा बहन किसी स्टैंड की तरह नाचने लगा. मेरी कमर गोल गोल करके नाचने लगी. ताऊ मेरे चिकने गोल गोल नितम्ब सहला सहलाकर मुझे चोदने लगे. कुछ मेर बाद वो थक गये.
‘बेटी सारा….मैं तो तेरी चूत के आसमान में धक्के दे देकर थक गया हूँ. अब तू धक्के मार!’ ताऊ बोले
ये सुनकर मैं उचक उचक के ताऊ के लंड की सवारी करने लगी. लग रहा था की मैं किसी बड़े समुद्र में किसी छोटी सी नाव पर बैठके चप्पू चला रही हूँ. पर फिर भी मजा मिल रहा था. कुछ देर तक मैं ताऊ के लंड की घुड़सवारी करती रही. फिर ताऊ ने फिर से ताकत बटोर ली और निचे से मुझे जोर जोर से धक्के मारने लगे.फिर उन्होंने अपना गर्म गर्म पानी मेरी बच्ची सी दिखने वाली चूत में छोड़ दिया. मैं ताऊ पर ही गिर पड़ी और जोर जोर से सासें लेने लगी. ‘चुद गयी…चुद गयी …..मेरी मेरी बच्ची!!!’ ताऊ खुस हो गए. फिर वो मेरे उपर और निचे के होठो को चूम चूमकर खेलने लगे.
‘बेटी सारा आपकी चुदाई की बात अपनी माँ से मत बताना. कोई भी माँ चाहे जितनी बड़ी चुदक्कड़ हो, चाहे जितनी बड़ी छिनाल हो पर अपनी बेटी तो किसी गैर मर्द से नही चुदवाना चाहेगी. मैं तेरा कोई खसम तो हूँ नही. मेरे पास तुझको चोदने का कोई लाइसेंस तो है नही. इसलिए बेटी सारा!! गलती से भी ये बात अपनी माँ को मत बताना!!’ ताऊ जी बोले. मैंने अपनी माँ को ये बात नही बताई. और आज भी दोस्तों मैं ताऊ जी का लंड खाती हूँ. आपको कहानी कैसी लगी, अपनी कमेंट्स नॉन वेज स्टोरी डॉट कॉम पर जरुर दें.

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काव्या के गोर बूब्स को मेने बहोत दबाये और चुत में भी लंड डाल के जबरस्त ठोका https://sexkahani.net/%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%97%e0%a5%8b%e0%a4%b0-%e0%a4%ac%e0%a5%82%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%a8/ Fri, 14 Apr 2017 11:38:04 +0000 https://sexkahani.net/?p=10983 नहीं मैं अपना नाम नहीं बताना चाहता हूँ, लेकिन इतना समझ ले की मैं अपने दील की बात जो एक अरसे से छिपा के बैठा था उसे सकसेक्स के माध्यम से निकालना चाहता हूँ. बात तब की हैं जब मैं ग्रेज्युएशन के लास्ट इयर में था. अच्छे दिन थे जब 5 रूपये पॉकेट मनी मिलती थी जिसमे से भी 1 रुपया बच जाता था. चाचा जी बगल वाले घर में ही रहते थे, और उनकी बेटी काव्या भी. काव्या के बारे में बस इतना कहूँगा की उसकी फिगर करीना कपूर से कम नहीं थी यदि ज्यादा नहीं तो. और मैं एक अरसे से उसके बूब्स का दीवाना था.

एग्जाम नजदीक थी इसलिए मैं कोलेज नहीं जाता था और घर पे ही पढता था. मेरे माँ-बाप उस दिन किसी काम से मौसी के गाँव गए थे. मुझे बाद में पता चला की वो मेरे रिश्ते की बात करने के लिए गए थे. काव्या से मेरी अच्छी बनती थी, वो मुझ से कुछ 4 महीने बड़ी हैं.

उस दिन मेरा ध्यान पढाई में बिलकुल भी नहीं लग रहा था. मैं मुठ मारना चाहता था क्यूंकि घर में कोई नही था मेरे बगेर. मैंने मोबाइल में एक बड़े बूब्स वाली लड़की की क्लिप निकाली और लंड सहलाने लगा. बहार देखा तो काव्या बाथरूम से नहाकर निकली थी. उसने छाती तक रुमाल लपेटा था और उसके बूब्स मादक आकार बना रहे थे. मैं वही खिड़की में खड़े खड़े लंड को शांत किया और वीर्य को कोपी के एक पेज में भर के उसे बहार फेंक दिया.

काव्या के सेक्सी बूब्स

मेरी इच्छा अब काव्या से सेक्स करने को हो रही थी. मैंने थोड़ी देर पहले ही चाची को बहार जाते देखा था, और चाची तो सुबह ही दुकान पर निकल जाते है. वो भी घर पर अकेली ही थी…! मैं उठा और उसके घर में चला गया. डोर खुला ही था, मैं सीधा उसके बेडरूम की और गया. काव्या शायद कहीं बहार जा रही थी क्यूंकि उसने बेड के ऊपर जींस और पेंट रखा हुआ था. मैं फट से अंदर घुस गया. काव्या शीशे के सामने सिर्फ ब्रा और पेंटी में खड़ी थी.  उसने मुझे देखा और उसके होश उड़ गए, उसने थित्हरे हुए गले से कहा, क्या कर रहे हो तुम अंदर क्यूँ आये बिना नोक किये हुए.

मैंने कहा, काव्या मुझे कुछ काम था इसलिए आ गया. मुझे नहीं पता था की तुम ऐसे खड़ी हो.

यह सुन के वो कुछ नहीं बोली, मैं उसे देख रहा था. काली ब्रा में उसके सफ़ेद बूब्स सेक्सी लग रहे थे.

क्या देख रहे हो?

तुम मस्त दिखती हो.

अच्छा बहार जाओ अब कोई आ जायेंगा तो पंगे होंगे.

देख तो लेने दो दो घडी.

मुझे पता हैं अभी तुम खिड़की के पास खड़े क्या कर रहे थे, पर्दा हवा से उठा था 2 सेकंड के लिए. और मैं यह भी जानती हूँ की तुम यहाँ क्यूँ आये हो.

बाप रे उसने मुझे मुठ मारते हुए देखा था. तब तो उसने मेरा काला नाग भी देखा होंगा ना. मैंने कहा, फिर कुछ मजे करा दो ना काव्या, बहुत अरसे से तमन्ना थी तुम्हारे साथ की.

चुप कर, ऐसे नहीं होता हैं. हम भाई बहन हैं.. वो टी-शर्ट उठा के बोली.

मुझे लगा की अभी नहीं तो कभी नहीं. मैं फट से उसके नजदीक गया और बोला, कजिन हैं इसलिए ही एक दुसरे को हेल्प करेंगे ना. और इतना कह के मैंने उसके बूब्स पर हाथ रख दिया. काव्या ने कहा, कोई आ जाएगा यार..

अरे कोई नहीं आयेंगा, सभी लोग बहार हैं.

और मैं उसके बूब्स को दबाने लगा. फिर एक पल की भी देर किये बिना मैंने पीछे हाथ कर के उसकी ब्रा की हुक को खोल दी. बाप रे क़यामत थे उसके बूब्स तो. काव्या को शर्म आ गई और उसने अपना हाथ छाती के ऊपर रख दिया. लेकिन मैंने उसके हाथ कको हटा दिया और उसके बूब्स मसलने लगा. उसकी निपल्स अकड चुकी थी और वो आह आह करने लगी थी. मैंने उसे मसलते हुए ही अपनी पेंट खोल के लंड बहार निकाल लिया. काव्या का हाथ पकड के मैंने अपने लंड पर रख दिया. वो उसे मसलने लगी. मेरा लंड काफी गर्म हो चूका था. काव्या ने अब मेरे लंड को मुठ्ठी में बंध किया और वो उसे ऐसे हिलाने लगी जैसे की मुठ मार रही हो.

मैने कहा, इसे अपने मुहं का मजा भी दे दो काव्या.

नहीं मैं मुहं में और पीछे नहीं लुंगी, यह सब गंदी चीजें हैं और मुझे नहीं पसंद.

मैंने मन ही मन सोचा की कोई नहीं फिर चूत ही अच्छी तरह दे देना साली रंडी. काव्या की चूत के ऊपर हाथ रखने के लिए मैंने पेंटी को खिसकाया और मैंने महसूस किया की उसकी चूत बहुत ही गर्म हो गई थी. उसने शायद आजकल में ही चूत के बाल निकाले थे क्यूंकि चूत के ऊपर सब सफाई की हुई लगती थी. मैंने हलके से ऊँगली को चूत के दाने पर रख दिया और उसे मसलने लगा. काव्या के मुहं से आह आह की आवाज निकलने लगी. मैंने उसके बूब्स मसलते हुए ऊँगली को चूत के छेद में डाल दी. इस से तो काव्य जैसे उछल पड़ी. उसने लंड छोड़ दिया और मेरे कंधे को पकड के दबाने लगी. मैंने उसे कहा की चलो बेड में लेट जाओ.

वो बेड के ऊपर की जींस और पेंट को साइड में कर के लेट गई. मैंने सरकाई हुई पेंटी को निकाल फेंका और उसकी टाँगे फैला दी. काव्या की चूत मस्त गुलाबी थी जिसे देख के मेरा लंड मानो उसे सलामी दे रहा था. मैंने अपनी ऊँगली को उसकी चूत में डाला और उसे अंदर बहार करने लगा. काव्या की आँखे बंध हो गई और उसके मुहं से वही आहा आह निकलने लगा. वो बड़ी गर्म हो चुकी थी और चुदने के लिए भी बेताब लग रही थी. मैंने उसकी चूत की साइज़ चेक करने के लिए दूसरी ऊँगली भी डालनी चाही.

उफफ्फ्फ्फ़ अरे क्या पागल हो, अंदर बैठोगे क्या, कितना दर्द हुआ मुझे… काव्या दूसरी ऊँगली नहीं ले पाई उसका मतलबी था की उसकी चूत ढीली नहीं बल्कि टाईट ही थी. मैंने अब चूत से अपनी ऊँगली निकाली और उसे सूंघी. चूत की खुसबू पूरी ऊँगली से आ रही थी, मैं समझ गया की काव्या ने चूत के ऊपर भी लक्स रोस लगाया था. अब मैंने ऊँगली चाटी और काव्या ने टाँगे और खोली. मैंने अब लंड को चूत के छेद पर सेट किया. काव्या ने हाथ बढ़ा के लंड की बागडोर अपने हाथ में ले ली और उसे चूत प् रगड़ने लगी.

एकदम से मत घुसेड देना, जब मैं कहूँ तब झटका देना धीरे से..उसने चूत पर लंड रगड़ते हुए कहा.

गांड उचका के चुदवाया

मुझे उसकी चूत की गर्मी लंड पर मिलते ही बड़ा मजा आ रहा था. वो करीब पुरे दो मिनिट चूत के ऊपर मेरा लंड घिसती रही. और उसकी चूत से बहुत सी चिकनाहट निकल के पूरा गिला कर चुकी थी. मैं समझ गया की वो चूत में घर्षण नहीं चाहती थी इसलिए उसे चिकनी बना रही थी. काव्या ने अब आँखों से इशारा किया और मैंने हलके से पेला. मेरा लंड उसकी चूत में जाते ही उसकी आह निकली लेकिन उसमे सुख के भाव भी थे. मैंने लंड को थोडा और अंदर किया और मेरे अंडकोष उसकी चूत के होंठो को छूने लगे. मेरा लंड पूरा अंदर घुस गया था और काव्या आह आह कर रही थी. काव्या की चूत में मेरा लंड अब गोते लगा के गिला हो रहा था.

2 मिनिट तक आह आह करने के बाद अब काव्या भी मचलने लगी. उसकी कमर और गांड हिलने लगे और उसकी वजह से उसके बूब्स भी हवा में उड़ रहे थे. मैंने निचे झुक के बूब्स को मुहं में भर लिया और जोर जोर से झटके देने लगा.

मजा आ रहा हैं, और जोर से करो, आह आह आह…काव्या ने अब चुदने का मजा लूटना चालू कर दिया था.

मैं भी उसके बूब्स चूस के उसे जोर जोर से ठोकने लगा. मेरा लंड उसकी चूत में पूरा जाकर बहार आता था और जब वो चूत को दबाती थी तब तो मेरी जान ही निकल जाती थी जैसे. काव्या की मोनिंग बढ़ने लगी और उसके साथ ही मैं और भी जोर से उसे चोदने लगा. 10 मिनिट की धमाकेदार चुदाई के बाद मैं अपना माल उसकी चूत में ही छोड़ दिया. काव्या ने चूत को दबा के सब अंदर ले लिया. मैंने लंड चूत से निकाला और उसे हिलाकर बचीकुची बुँदे भी उसके शरीर पर ही निकाल दी. काव्या ने उठ के अपने बदन को मेले कपडे से साफ़ किया. वही कपडे से मैंने अपना लंड भी पोंछ लिया. काव्या खुश थी मेरी चुदाई से.

क्यूँ मजा आया के नहीं? मैंने पूछा.

मजा तो बहुत आया, लेकिन अब तुम भागो कोई आ गया तो पंगे होंगे.

मैंने कपडे पहले और काव्या के बूब्स दबा के घर से निकल गया. उस दिन से चालु हुई हमारी चुदाई अब और भी गहरी हो चुकी थी. काव्या भी कई बार मुझे फोन कर के बुलाती थी जब घर कोई नहीं होता था. मुझे उसके बूब्स और चूत का लहावा पूरा मिलता था. और जैसे उसने पहले ही कहा था गांड और मुहं में मैं उसे आजतक नहीं दे पाया हूँ. लेकिन उसका कोई गम नहीं हैं क्यूंकि उसके बूब्स और चूत कसर पूरी कर देते हैं…! चलो मिलते हैं दोस्तों, बाय बाय…!

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