Hindi Sex Kahaniya & Sex Pictures https://sexkahani.net Desi Chudai Kahani, Indian Sex Stories, Chudai Pics ,College Girls Pics , Desi Aunty-Bhabhi Nude Pics , Big Boobs Pics Fri, 26 May 2017 10:00:57 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=4.7.5 चचेरी बहन की चूत चाटी https://sexkahani.net/%e0%a4%9a%e0%a4%9a%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%b9%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%9a%e0%a5%82%e0%a4%a4-%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%9f%e0%a5%80/ https://sexkahani.net/%e0%a4%9a%e0%a4%9a%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%b9%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%9a%e0%a5%82%e0%a4%a4-%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%9f%e0%a5%80/#respond Fri, 26 May 2017 10:00:57 +0000 https://sexkahani.net/?p=11471 हेल्लो मस्तराम डॉट नेट के प्यारे पाठको, यह मेरी पहली कहानी है। मेरा नाम सुशिल है। मेरी उमर २५ साल है। मैंने अपनी पढ़ाई पूरी कर ली है। मेरी लम्बाई पूरी 6.3 फ़ुट की है। और मेरा तगड़ा लण्ड ८ इन्च लम्बा है।
यह कहानी बताने में मुझे बहुत मजा आ रहा है लेकिन इसे जब मैंने अन्जाम दिया तब तो मुझे बहुत मजा आया। मेरी चचेरी बहन रीमा अभी २० साल की है जिसको मैंने चोदा था। लम्बाई उसकी ज्यादा नहीं है कोई ५.४ की होगी। लेकिन उसकी चूचियाँ बड़ी-बड़ी है। वो स्मार्ट भी है है। उसकी गाण्ड पीछे से उभरी हुई भी है।
एक दिन जब हम लोग सभी शादी में गये थे उस दिन वो घर में थी। हम लोग सब शादी में थे तभी उसकी मम्मी ने मुझे घर जाने को कहा। खाना लेकर जाना था। मैंने गाड़ी निकाली फ़िर जब घर में जब मैं पहुंचा तो
मैंने दखा कि घर में कोई नहीं था। फ़िर मुझे बाथरूम से पानी गिरने की आवाज आई। वो नहा रही थी।
फ़िर मैं बैठ गया फ़िर मैंने देखा कि उसके बाथरूम के दरवाजे में होल था। मैंने जब उस होल से अन्दर देखा तो मेरे होश उड़ गय। रीमा अपने हाथ से अपनी चूत को सहला रही थी। ये देख कर मैं पागल हो गया। मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था। फ़िर मैंने देखा कि वो अपने हाथों से अपनी चूचियां को सहला रही थी। उसके चेहरे के भाव देख कर मेरा लण्ड खड़ा हो गया। मैं अपने लण्ड को सहला रहा था। फ़िर देखने लगा। मुझे यकीन नहीं हो रहा था ये ऐसे भी कर सकती है। फ़िर मैंने सोचा कि हर लड़की की चाहत होती है। फ़िर उसने अपने गद्दे को सहलाया। फ़िर उसमे उसने पानी डाला और फ़िर वो नहाने लगी। मैं बाहर जाकर बैठ गया ,वो कपड़े पहन कर जैसे ही बाहर आई। मैंने अपने लण्ड को सहलाया। उसने मेरे लण्ड के तरफ़ देखा। फ़िर मैंने कहा मैं तुझे खाना देने आया हूं। फ़िर वो किचन में गई। मैं भी उसके पीछे गया। फ़िर मैंने हिम्मत करके उसके कंधे पर हाथ लगाने लगा। वो वहां से चली गई। वो बाल झटकने लगी थी। आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | मैंने कहा- मैं बाल झटक देता हूँ। फ़िर मैं उसके बाल झटकने लगा। मैंने उसके बाल उसके बूबस के उपर रख दिया और हाथ लगने लगा। वो समझ गई कि मैं क्या चाहता हूं। फ़िर मैं उसके बूबस को दबाने लगा। वो शरमाने लगी और नजरें झुकाये जाने लगी। फ़िर मैंने उसे पकड़ा उसके स्तनों को दबाने लगा। वो मदहोश होने लगी। मैं उसके पेट पर हाथ घुमाने लगा। उसने मेरा हाथ पकड़ कर अपनी चड्डी के अन्दर डाल दिया। मै उसकी चूत को सहलाने लगा। वो गरम हो गई थी। फ़िर मैं उसको चूमने लगा वो मुझे इस काम में सहायता करने लगी। उसका हाथ पकड़ कर मैंने अपने लण्ड पर रख दिया। वो जम कर पकड़ कर दबाने लगी और फ़िर वो नीचे बैठ गई। मेरी पैंट की जिप खोली और 8 इन्च लम्बा लण्ड बाहर निकाल लिया। वो तो लण्ड को देख कर पागल हो गई।
वो बोली- यह लण्ड मेरी प्यारी चूत में जायेगा तो मैं तो मर जांऊगी।
मैंने कहा- पहले इसे मुँह में तो ले।
वो बड़े प्यार से जुबान से चाटने लगी। मेरे मुँह से आवाज़ आने लगी- पूरा मुहं में घुसेड़ ले !
मुझे बहुत मजा आ रहा था। फ़िर मैंने उसके पूरे कपड़े उतार दिये। वो शरमा गई।
मैंने कहा- पहले कभी सेक्स किया है?
वो बोली- नहीं।
मैंने बोला- मैं ही तेरी सील आज तोड़ूंगा, बहुत मजा आयेगा।
फ़िर मैं उसके चूचों को जम कर दबाने लगा, वो आआआआह आआआआह्हहह्हह करने लगी उसके गुलाबी गुलाबी निप्पल बहुत प्यारे दिख रहे थे। उसको मैं अपने दांतो से काटने लगा।
वो जोर से आआअह्हह करने लगी, बोली- जम कर दबाओ मुझे आज जवान लड़की बना दो।
मैंने अपना मुख उसके चूत पर रख दिया और चाटने लगा। चूत की खुशबू बहुत प्यारी थी। मैंने एक घण्टे तक उसकी चूत चाटी।
वो मदहोश हो गई, वो बोली- मेरी चूत फाआआआद दो आआआअह व्वव्व्वआआआह आआआअह्हह्हह्ह औउर्ररर्रर्रर्रर जम्मम्मम्मम कीईईईई। मैंने अपना लण्ड उसके चूत पर रख दिया। एक गरम लोहे की सलाख की तरह जल रहा था मेरा लण्ड। वो बोली कितना गरम है तुम्हारा लण्ड ।
मैंने होल पे रखा और पुश किया। वो चिल्लाई। मैंने फ़िर घुसेड़ा, लेकिन मेरा लण्ड छेद से बाहर निकल गया।
वो बोली जा के पहले सीख कर आओ फ़िर मेरी चूत फ़ाड़ना।
मुझे गुस्सा आया। मैंने उसकी टांगो को फ़ैलाया और लण्ड डाल दिया। वूऊऊऊओ चिल्लाई। बोली मत करो बहुत दरद हो रहा है। लेकिन मैं कहां रुकने वाला था वो दरद से चिल्ला रही थी आआआआआआह्हह्ह नहीईईईइ धीईईईईईइरीईईईईई प्लीऽऽऽज सीईईईईईईईए। आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | थोड़ी देर बद वो मदमस्त हो गई और बड़े प्यार से लेने लगी और बोली मेरे राजा जरा जम के चोदो, मजा आ रहा है, उसकी चूत से खून निकलने लगा। वो डर गई। मैंने कहा डरना नहीं ऐसा पहली बार होता है। वो समझ गई और मैं फ़िर चोदने लगा बहुत मजा आ रहा था। फ़िर मैंने उसके दोनो बूबस के बीच में लण्ड रगड़ने लगा। बहुत मजा आ रहा था। फ़िर उसके चूत चाटने लगा। फ़िर चूत में उंगली डालने लगा। फ़िर 8 इन्च लम्बा लण्ड डाल दिया। वो बोली फ़ाड़ दो राजा आह। 20 मिनट तक चोदने के बाद वो ठण्डी होने लगी थी। मेरा माल भी गिरने वाला था। मैंने अपना लण्ड बाहर निकाला और उसके मुख में डाल दिया। वो बड़े प्यार से चता और हम दोनो बाथरूम में चले गये नहा ने लगे वो मुझे नहला रहै थी बहुत मजा आआ रहा था वो फ़िर बथके मेर्रे लण्ड को मूओह में भर के चूसने लगी। मेरा लण्ड फ़िर खड़ा हो गया। फ़िर मैंने उसे बाथरूम में चोदा। वो बिलकुल मदमस्त हो गई थी। मैंने उसको कपड़े पहनाया। इस घटना के बाद मै उसको दो बार और चोद चुका हूं। ये बात नवम्बर २०११ की है।

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मेरी और अम्मी की चुदास https://sexkahani.net/%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%9a%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%b8/ https://sexkahani.net/%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%9a%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%b8/#respond Fri, 26 May 2017 06:00:16 +0000 https://sexkahani.net/?p=11465 हेल्लो मेरे प्यारे मस्तराम डॉट नेट के पाठको मुझे तो आप लोग जानते ही होगे मै हु शबनम… हां तो मेरी प्यारी चूत वाली बहनो और लंड धारी भाइयों आप सब अपने अपने समान पर हाथ रख लीजिए

बात उन दिनो की है जब अब्बू और भाई बाहर गये हुए थे और करीब हफ्ते भर से मेरी और अम्मी 2नो की चुदाई नही हुई थी और हम 2नो ही चूत की बेकरारी से परेशान थे और एक दूसरे की चूत से चूत और चूचियाँ रगड़ कर 4 दिन से सो रहे थे जो लोग मेरी कहानियाँ पढ़े होंगे वो तो मुझे और मेरे घर वालों के बारे मे जानते ही होंगे कि हम लोग किस तराह से घर मे ही चुदाई का खेल खेलते है पर जो नये रीडर्स है वो भी जान ले पर अब चूत और चूची रगड़ने से भला नही हो रहा था हम लोग लंड के धक्के खाने को तरस रहे थे और मामू का लड़का भी अपने हॉस्टिल गया हुआ था और कोई बचा भी नही था जिससे अपनी आग ठंडी करवाते | दोस्तों आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

अम्मी: बेटी शबनम आज 8वाँ दिन है तेरे अब्बू को गये और आज तो चूत मे रह…रह कर खुजली हो रही है अब तेरी उंगली से और मूली,गाजर से भी मज़ा नही आ रहा है

शबनम: अम्मी मूली गाजर तो आप मेरी बुर मे करती है आप का काम तो खीरे और बैगन से भी नही चलता है पता नही कितनी गफैज़ल भोसड़ी है आपकी…?

अम्मी: अररी छिनाल अब इतने सालों से पता नही बेचारी किस किस के धक्के खा रही है और फिर तुझे और तेरे गबरू भाई को भी तो इसी मे से बाहर निकाला है तो बुर..भोसड़ा तो हो ही जाएगी पर आज इसका कुछ करना ही पड़ेगा आज तो बिना लंड क काम नही चलेगा पर कोई है भी तो नही वो कमीना ऐसे वक़्त मे दूधवाला ही काम चला देता था पर वो भड़वा भी गाँव गया है | दोस्तों आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |
शबनम: अम्मी 1 बात कहूँ..?
अम्मी— 1 क्यों 4 बात कहो
शबनम: अम्मी देखो आजकल जाड़े का वक़्त है मूँगफली वाले निकलते ही रहते है आप कहो तो बुला लूँ किसी को बेचारे को थोड़े पैसे वगेरा दे देंगे
अम्मी: वाआह मेरी चुद्दो कितने कमाल का आइडिया दिया है जी कर रहा अभी तेरी चूत चूम लूँ चल तो देर किस बात की बुला जल्दी से
शबनम: साली लंड के धक्के खाने को कैसे कुतिया जैसे हालत हुई जा रही है अब ज़रा सब्र तो करो निकलने तो दो किसी को
थोड़ी देर बाद 1 मूँगफली वाले की आवाज़ आई तो हम और अम्मी 1 साथ रॅलिंग पर झपट पड़े पर वो बेचारा तो 1 14…15 साल का दुबला पतला सा लड़का था अम्मी की बहुत मर्ज़ी थी कि बुला लूँ उसे पर मैने नही बुलाया अम्मी झुंझला पड़ी
अम्मी: अररी हरराफ़ा क्या बिगड़ जाता अगर उसे ही बुला लेती तो
शबनम: अम्मी वो बेचारा बच्चा था और कितना कमजोर भी तो था
अम्मी: कमजोर…वम्जोर कुछ नही होता जब सामने 2…2 नंगे जिस्म देखता तो साले का तन्ना कर खड़ा हो जाता बेटी मर्द चाहे कितना भी दुबला पतला हो पर जब बात चोदने की आती है तब वो कमजोर कहीं से नही होता अब अपने भाई को ले लो जब उसने चुदाई सुरू की थी तब उसकी भी क्या एज थी और कितना दुबला पतला था वो तो अब सेहत बनी है उसकी
शबनम: अच्छा बाबा अब बातें तो मत सूनाओ मैं तो कोई कड़ियल जवान की सोच रही थी और आप हो कि मरियल लड़के से ही अपनी बुर चुदवाना चाहती हो तो मुझे क्या अबकी बार कोई भी आएगा बुला लूँगी उसे
और थोड़ी देर बाद फिर से आवाज़ आई पर इस बार जो था उसे देख कर मेरी और अम्मी की झान्टे खिल गयी थी वो ऊँचे कद का मज़बूत काठी वाला और किसी पहलवान सरीखी सेहत वाला करीब 36….38 साला का आदमी थी उसे मैने आवाज़ दी तो वो गॅलरी मे आया और मैने मेन गेट बंद कर लिया | दोस्तों आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |
मूँगफली वाला: जी मेम्साब कहिए कितनी तौल दूं…?
अम्मी: हमे ये नही चाहिए
मूँगफलकी वाला: तो फिर टाइम क्यों खराब कर रही है मुझे ये सब बेच कर घर भी जाना होता है पता नही आप लोगों को परेशान करने मे
अम्मी: अर्रे मेरी बात तो सुनो अगर मैं तुझे इन सारी मूँगफली के पैसे दे दूं तो…?
मूँगफली वाला: मेम्साब क्यों मज़ाक कर रही है जाने दीजिए मुझे देर हो रही है
तभी अम्मी ने 500 का नोट निकाला और उसे देती हुई बोली तुम्हे 1 काम करना होगा
500 का नोट देख कर उसकी आँखें चमक गयी थी पर वो कुछ समझ नही पा रहा था तब अम्मी खुल कर बोली
अम्मी: बात ये है कि इन 500 क बदले तुझे हम 2नो को मज़ा देना होगा
वो परेशान सा हो गया तब मैने अम्मी की चूचियाँ दबा कर उसे दिखाते हुए कहा देखो इनको कितना मज़ा आएगा तुम्हे इनके साथ कभी देखी है ऐसे चूचियाँ..?
मूँगफली वाले की कुछ झिझक कम हुई तो मैने उससे कहा ये टोकरी किनारे रख दो और अंदर चल कर पहले नहा लो
मूँगफली वाला: मेम साहिबा कैसे बातें कर रही है भला इतने जाड़े मे वो भी रात को कोई नहाता है क्या..?
अम्मी: सबसे पहले तो तू ये मेमसाहिबा कहना बंद कर और अपना नाम बता और देख तू ये समझ कि तू पैसे दे कर किसी रंडी को चोदने जा रहा है इसलिए पूरी तराह से अपनी झीजक ख़तम कर दे और फिर जब तेरे सामने 2 नंगी औरतें होंगी तुझे नहलाने के लिए तो भला तुझे जाड़ा कहाँ से लगेगा और पानी भी गरम होगा चल उतार डाल सारे कपड़े और हो जा नंगा
उसने अपनी कमीज़ और धोती उतार दी अब वो सिर्फ़ बड़े से पटार वाली निक्कर मे था और अम्मी उसके चौड़े सीने पे हाथ फिरा रही थी और मैं सारे दरवाज़े बंद करने के बाद वाशरूम मे गयी तो अम्मी उसके नंगे बदन पे पानी डाल रही थी वो पटारे पे बैठा था | दोस्तों आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |
शबनम: अम्मी आप शावर क्यों नही चला देती बच्चे की तराह क्यों नहला रही हैं पानी डाल कर…?
अम्मी: अर्रे बेटी आज बहुत सालों बाद कोई कड़ियल जवान मिला है मुझे मन की करने दे कहाँ ऐसा मौका मिलता है आजा तू भी कपड़े उतार कर और हां रे हरामी तूने अभी तक अपना नाम नही बताया
मूँगफली वाला: जी फैज़ल नाम है मेरा और ये आप मुझे गाली क्यों दे रही है..?
अम्मी: अर्रे भडवे तो तू भी दे ना गाली इससे चुदाई करने का मज़ा बढ़ जाता है मैने तो पहले ही कहा कि तू ये समझ तेरे सामन्मे 2 रंडिया हैं
फैज़ल: आप लोग मा बेटी है…?
शबनम: हां रे मेरे बांके गबरू हम मा और बेटी है
फैज़ल: मैं तो कभी सपने मे भी नही सोच सकता कि ऐसा भी होता है
अम्मी: अभी तूने जाना ही क्या है अर्रे इसका बाप खुद अपने बेटे का लंड पकड़ कर इस चूत्मरानि की बुर मे धकेल्ता है और खुद अपना मेरे मूह मे डाले रहता है
और अब अम्मी के सामने मैं भी अपने सारे कपड़े उतार कर उसके चौड़े सीने पे हाथ फिराने लगी उसका सारा जिस्म गीला हो रहा था और बड़ी सी निक्कर के नीचे उसका लंड किसी साप की तराह फन उठा रहा था अम्मी ने उसकी निक्कर के उपर से ही उस पर हाथ रखा तो फैज़ल क मूह से सिसकारी निकल पड़ी
शबनम: अम्मी उतारो ना इसका कच्छा इतना बड़ा कच्छा तो पर्दे के काम आता है
अम्मी: बेटी तुझे पता नही ये ही पहनना चाहिए मर्दों को इसमे काफ़ी आराम मिलता है आजकल तो वो जोक्की ऐसे और फ्रांची चली है जिसमे कि पूरा लॉडा समा ही नही पाता अब देख कितना बड़ा लग रहा है इसमे और फैज़ल को कितना आराम मिल रहा होगा इसमे क्यों फैज़ल…? दोस्तों आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |
फैज़ल: हां मेरी रानी बहुत आराम मिलता है
और फैज़ल ने मेरी नंगी चूचियों पर अपना हाथ रखा और दबाने लगा उधर अम्मी उसके लंड को रगड़ती जा रही थी और अब पूरी तराह से तन चुका था उसका भी लंड तब अम्मी ने अपने सारे कपड़े उतार डाले अब हम दोनो नंगे थे और फैज़ल की जिस्म पे सिर्फ़ बड़ा सा कच्छा था जिसका नाडा अम्मी ने खीच दिया और झट से उसका निक्कर ज़मीन पे था और लंड पूरी तराह आज़ाद होकर फुंफ़कार रहा था
हां तो फैज़ल की निक्कर उतारने के बाद अम्मी और मैं 1 साथ उसके लकड़ी जैसे सख़्त और मोटे लंड पर टूट पड़े हम 2नो उसके लंड को सहला रहे थे और वो इस जाड़े मे भी पसीने…2 हो रहा था हम लोगों के गरम हाथों की छुअन और सहलाहट उसकी बर्दास्त के बाहर की बात होने लगी तब मैने उसका लॉडा अपने होटो से चूम लिया
फैज़ल: आहह बिटिया ये क्या कर रही हो भला यहाँ भी चुम्मा लिया जाता है…?
शबनम: अर्रे गवार अभी तुझे पता ही क्या है आज तू देख तू जन्नत की सैर करेगा कसम से तेरी बीवी तो बहुत किस्मत वाली होगी जो ऐसा कड़ियल लॉडा मिला है उसे
फैज़ल: पर उसने तो कभी मूह से नही चूमा इसे..?
शबनम: आज पहले तू देखता जा हम लोग क्या और कैसे करते है फिर तुझे इन सबकी कदर पता चल जाएगी
ये कह कर मैं उसका लॉडा अपने मूह क अंदर डाल कर चूसने लगी और अम्मी उसकी लटकी हुई बड़ी…बड़ी गोलियों को मूह मे डाल कर चूस रही थी और 1 हाथ से सहला भी रही थी उसका लॉडा मेरे हलक तक गढ़ रहा था जब उसका लॉडा पूरी तराह से तन कर खड़ा हो गया तब अम्मी ने कहा बेटी चलो अब बेडरूम मे चला जाए और हम लोग बदन पोछने के बाद नंगी हालत मे ही बेडरूम मे आ गये बेड रूम की मखमली कालीन मे उसके पैर धसे जा रहे देर थे और रूम भी काफ़ी गरम हो रहा था उस पर हम मा बेटी की नंगी जवान हसीनाए बेचारे की हालत खराब थी
अम्मी: अच्छा बता कभी हमारी जैसी जवानी देखी है तूने…?
फैज़ल: मेम साहिबा हमने तो सिवाय अपनी महरारू के किसी औरत को नंगा नही देखा और वो बेचारी आपके सामने कुछ भी नही है दोस्तों आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |
अम्मी: मादरचोद भडवे अभी कितनी बार बताऊ तुझे कि मेम साहिबा कहना बंद कर और अपनी रखैल समझ कर बात कर
इसके बाद फैज़ल ने अम्मी की चूचियाँ कस कर दबा दी और मेरे बाल भी पकड़ कर अपनी तरफ खीचते हुए बोला
फैज़ल: आररी रांड़ आज मैं बताता हूँ कि चुदाई किसे कहते है और अब मैने भी सारी शरम हया की मा चोद के रख दी है
अम्मी: हां तो भडवे पहले तू हम लोगों की चूत चूस…काट कर मज़ा ले और दे फिर देख कितना मज़ा आता है चूत चुसाई मे अपनी जोरू की चाटी है कभी चूत…?
शबनम: आप भी कैसे बातें कर रही है
हो सकता है इसने ठीक से अपनी बीवी की चूत देखी भी नही हो क्यों कि ये लोग बस साड़ी उठा कर औरत को धक्के लगाना ही जानते है और ज़्यादा हुआ तो चूची को चूम लिया या मूह मे भर कर चूस लिया क्यों फैज़ल….?
फैज़ल: हां बहन की लौडि बात तो तू ठीक ही कह रही है भला चूत या लंड जैसी गंदी चीज़ को कोई मूह मे लेता है क्या…?
अम्मी: अर्रे भडवे आज मज़ा ले हमारी चूत का फिर देख अपनी बीवी की भोसड़ी मे मूह डाले ही पड़ा रहेगा चल आजा मैदान मे और 1 साथ 2 चूतो को काटने का मज़ा ले
मैं और अम्मी अपनी अपनी चूत पूरी तराह से टांगे खोल कर फैलाकर लेट गयी और फैज़ल अम्मी की चूत के पास आया और किसी कुत्ते की तराह से बुर सूंघने लगा उसके बाद उसने ज़बान निकाल कर अम्मी की बुर चाटना सुरू कर दी तो मैने कहा फैज़ल मैं भी हूँ तो उसने अपना 1 हाथ मेरी बुर पे रख कर सहलाना सुरू कर दिया और अब वो चपर…चपर अम्मी की चूत चाट रहा था और मेरी चूत को पूरी हथेली से रगड़ रहा था पर वो ये सब पहली बार ही कर रहा था उसे चूत से किस तराह मज़ा लेना होता है आता ही नही था मैने अम्मी से कहा अम्मी इसको पहले कुछ बताओ तब ही तो जानेगा
अम्मी: फैज़ल आओ पहले मेरे साथ मेरी बेटी की चूत का मज़ा लो मैं दिल्वाति हूँ तुमको मज़ा आओ
और अम्मी और फैज़ल मेरी फैली हुई टाँगों के बीच पसर गये अम्मी ने मेरी चूत पूरी तराह से फैला दी और फैज़ल से कहा चाटो इसे और अपनी ज़बान अंदर घुसेड कर मज़ा लो फैज़ल ऐसा ही करने लगा फिर अम्मी उठी और मेरे सिरहाने आकर उन्होने अपनी बुर मेरे होंठो पे लगा कर मुझसे चूसने के लिए कहा और अब अम्मी की बुर मैं चूस रही थी और फैज़ल मेरी बुर को बहुत मज़े से चोद रहा था बहुत देर तक चूसने के बाद फैज़ल बोला बहन की लौडियों अब मुझसे बर्दास्त नही हो रहा बताओ पहले कौन चुदवायेगा…?
अम्मी: इतनी जल्दी भी क्या है प्यारे अभी तो रात परवान चढ़ि है
फैज़ल: पर मुझे वापस भी जाना है बीवी परेशान हो रही होगी
अम्मी: कितने बच्चे है तेरे
फैज़ल: =2 ,4साल की लड़की और 2साल का लड़का
अम्मी: तुझे आज 1000 और दूँगी थोड़ा देर से जा घर बीवी पैसा देख कर खुस हो जाएगी अब तुम लोगों के पास फ़ोन भी नही होता वरना फ़ोन करवा देती कि तू रात भर नही आएगा
फैज़ल : मेरे घर के बगल का नंबर है मेरे पास आप फ़ोन कर दो
फिर मम्मी के सेल से फैज़ल ने घर पे फ़ोन कर दिया कि वो नही आ सकता रात को उसके बाद मम्मी और मैने उसका लॉडा चाट कर तैयार किया जब वो खड़ा हुआ तो मैने अम्मी से कहा अम्मी कॉंडम का पॅक निकाल लाइए अलमारी से और कॉंडम देखते ही वो भड़क गया ये क्या है भला इसको चढ़ा कर भी कहीं चुदाई का मज़ा आता है
अम्मी: ओये कबूतर ज़्यादा बद्चोदि ना कर अगर एड्स हो गया तो गान्ड फट जाएगी पता है क्या होता है एड्स साले इस कॉंडम के कई फाय्दे है पहली बात कि तेरी बीवी या जिसे भी तू चोदेगा वो पेट से नही होगी और दूसरी सबसे बड़ी बात की एड्स नही होता दोस्तों आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |
और अम्मी ने उसे कॉंडम पहना दिया
अम्मी: बता किसको चोदेगा पहले…?
फैज़ल: = पहले तुझे ही चोदुन्गा
अम्मी: भला मेरी जवान बेटी को क्यों नही…?
फैज़ल: क्योंकि मेरी रांडो मुझे लगता है तुझमे जवानी का ज़्यादा मज़ा है तेरी बेटी तो अभी बच्ची है बेचारी चीख…पुकार मचाने लगेगी
शबनम: ओये तेरी बेटी को कुत्ते चोदे बहन के लौडे अभी तूने मेरी जवानी काय्दे से देखी ही कहाँ है चल अब जब तूने मेरी अम्मी को चोदने का मन बना ही लिया है तो बेटा तू अभी जानता नही मेरी मा की साली खाई जितनी गहराई है उसकी भोसड़ी की हालत खराब हो जाएगी तेरी पहले तू उसको ही निबटा ले उसके बाद देखती हूँ तेरा कितना दम बचता है तेरा
शबनम= अम्मी कैसे चुइदवाओगि इससे…?
अम्मी: बेटी मैं तो खड़े होकर चुदवाउन्गि इसके हलब्बी लौडे पर झूलने मे बहुत मज़ा आएगा क्यों रे गबरू उठा लेगा मेरा बोझ…?
फैज़ल: हां हां मैं तो तुम दोनो को 1 साथ अपने लंड पर बिठा कर उछाल सकता हूँ
अम्मी: बात उतनी कर जितनी हो सके बहन के लौडे चल भिड़ा अपने लंड को मेरी चूत से
उसके बाद अम्मी की चूत से सेंटर मिलाकर उसने अपनी गोद मे उठा लिया और अम्मी पूरी तराह से अपनी बुर को उसके लौडे पे डाले हुए थी और वो नीचे से गान्ड फाडू धक्के लगा रहा था और सच मे कुछ ही देर मे अम्मी की चीखें निकलने लगी करीब 20 मिनट तक वो धक्के लगाता रहा फिर अम्मी से बोला जानू तुम भी थोड़ी मेहनत करो तो अम्मी बोली बहन के लौडे मुझे ही मेहनत करना है तो तू पैसे किस बात के ले रहा है हरामी मार धक्के उसके बाद वो ताबड़तोड़ धक्के लगाने लगा
हां अब बातें चोदना बंद करके कुछ चुदाई….वुदायि की बाते हो जाए और कहानी वहीं से सुरू करती हूँ जहाँ से ख़तम हुई थी जिन रंडियों और चोदु लोगों ने मूँगफली वाले से चुदाई पार्ट 1 और 2 नही पढ़ा हो तो प्लीज़ यहाँ गान्ड ना मराए पहले इसका पहला और 2सरा पार्ट पढ़े तब ही मज़ा आएगा हां तो उस दिन मम्मी और मेरी चूत मे लंड खाने की खुजली मची हुई थी और जमाने की परवाह ना करते हुए दोस्तों आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |
अम्मी : क्यों रे हरामी तू हम दोनो को 1 साथ चोद पाएगा..?
फैज़ल(मूँगफली वाला) : अरी कुतिया रांड़ अभी तूने हमारे लंड की ताक़त देखी ही कहाँ है वो तो पहले मैं ज़रा शरमा रहा था पर तुम रांड़ मा बेटी को इस तराह खुल्लम…खुल्ला चूत और लंड की बाते करते देख कर मैने भी सारी शरम की मा चोद दी और अब मेरा लंड तुम 2नो की चूत और गान्ड फाड़ने को तैयार है
शबनम: अब हरामी सारी रात क्या बाते चोदने मे ही निकाल देगा चल फटाफट अपने कपड़े उतार और लंड के दीदार करा देखूं तो कितना दम है और फिर हम 3नो लोग पूरी तरह से नंगे हो गये फैज़ल ठीक ही कह रहा था उसका लंड वाकाई मे जानदार था खैर हम मा बेटी भी कम नही थे चुदाई के मामले मे अच्छे अच्छे लंड धारियों की मा चोद थी थी हम लोगों ने फिर तो ये अनपढ़ गवार था
अम्मी: मैं तो इतने कड़ियल लंड पर झूला झूलूंगी
शबनम: अम्मी पहले इसका डंडा खड़ा तो कर लो चलिए पहले इसको लंड चुसाई का मज़ा दे और उसके बाद उसको बेड पर लिटा कर अम्मी और मैं उसके जवान अकड़ते हुए लंड पर भूखी बिल्लियों की तराह टूट पड़े और कुछ ही देर मे उसका लंड जो कि खड़ा होकर 9″ का हो गया था सलामी देने लगा उसके लंड की टोपी भी बहुत सेक्सी लग रही थी वो पूरी तराह से गरम हो चुका था पर अभी ना तो मैं और ना ही मेरी रांड़ अम्मी ही मे ज़रा सी भी गर्मी आई थी वो झट से अम्मी को पलट कर अपना लंड उनकी चूत मे भिड़ाने को हुआ तो अम्मी ने तडाक से उसको छाता मे मार दिया
अम्मी: बहन के लौडे करा ना तूने जलीलो वाला काम ऐसी ही तू अपनी बीवी के साथ भी टाँग उठा कर चोदना सुरू कर देता होगा भोसड़ी के तुझे तो हम लोगों ने गरम कर दिया पर तुझे पता होना चाहिए जब तक औरत गरम नही हो जाती उसको मज़ा नही आता है
फैज़ल: आप लोग इतनी देर से मेरा लंड चूम चाट रही है गरम नही हुई…?
शबनम: अभी ना तो तूने हमारी चूची दबाई और ना ही चूत छाती तो भला कैसे गरम होती और हम लोग पूरी छिनाल है और छिनालों को गरम करने मे अच्छे अच्छों की गान्ड फट जाती है
फैज़ल ने उठा कर हम 2नो को 1 साथ बेड पर पटक दिया और किसी कसाई की तरह दबोच लिया हम 2नो को 1 साथ और हमारी चूचियों को बहुत बेदर्दी से दबाने लगा | दोस्तों आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |
फैज़ल: बहन की लौडियों आज मा चोद दूँगा तुम दोनो की
अम्मी: अर्रे हरामी हम मा बेटी को तो तू चोद नही पा रहा है और तू मेरी अम्मी यानी कि इसकी नानी को नही जानता भडवे 3….4 मर्द एक साथ चढ़ाती थी अपने उपर तब कहीं जा कर उसकी भोसड़ी की आग बुझती थी
फैज़ल: तुम लोग तो बहुत बड़े रंडियो के खानदान से हो खैर आज तुम्हारी चूत की धज्जियाँ तो उड़ा ही दूँगा मैं और कुछ देर तक वो हम लोगों की चूचियाँ चूमता दबाता रहा उसके बाद वो नीचे चूत की तरफ बढ़ गया और अम्मी की चूत को 2नो हाथों से फैला कर चाटने लगा और मैं उसके लंड को काट रही थी तब अम्मी ने कहा शबनम इस हरामी को कोई बढ़िया स्टाइल बताओ जिससे हम तीनो को मज़ा आए चूसने चटवाने मे
शबनम: अम्मी सोफे पर चलते है और सोफे पे जा कर पहले फैज़ल को बिठाया उसके बाद अम्मी को ज़मीन पर उनके चूतड़ उठा कर उल्टा करवा दिया और उनकी बुर की दरार फैला कर फैज़ल से उनकी बुर चटवाने लगी और मैं भी अम्मी की बुर चाट रही थी कुछ देर बाद मैं अपनी चूत फैला कर अम्मी के मूह पर बैठ गयी और अम्मी मेरी चूत चाट रही थी अम्मी: आह शबनम बेटी आसन तो बहुत बढ़िया है पर मेरी कमजोर हड्डिया इस तराह से चटकी जा रही है ये तेरे लिए सही था पर अब तूने लगा ही दिया है तो चाहे गान्ड भले ही फट जाए पर मज़ा पूरा लूँगी दोस्तो फिर मैने और अम्मी ने रात भर आसान बदल बदल कर फैज़ल से ऐसी चुदाई करवाई कि बेचारा हम दोनो की हवस देख कर हैरान रह गया . और सुबह जब वो अपने घर जाने लगा तो मम्मी ने उसे १००० रुपये दिए और कहा जब तुम्हारा दिल करे आ जाना

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बस अब हो गया जीजू https://sexkahani.net/%e0%a4%ac%e0%a4%b8-%e0%a4%85%e0%a4%ac-%e0%a4%b9%e0%a5%8b-%e0%a4%97%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%9c%e0%a5%82/ https://sexkahani.net/%e0%a4%ac%e0%a4%b8-%e0%a4%85%e0%a4%ac-%e0%a4%b9%e0%a5%8b-%e0%a4%97%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%9c%e0%a5%82/#respond Thu, 25 May 2017 14:50:49 +0000 https://sexkahani.net/?p=11463 दोस्तों ये कहानी मेरी साली की चूत मारने के बारे में है। तो उसका नाम था लक्ष्मीना और वो मेरे छोटे भाई की गर्लफ्रेंड थी। उसका मेरे भाई पिंटू से अच्छा चलता था इसलिए मैने कभी उसको खुल के लाईन न मारा। एक दिन फोन किया तो उसने कहा जीजा जी मेरे शहर तो आप आते ही नहीं मैने कहा कैसा गिला शिकवा आप तो ध्यान ही नहीं देती हो हमारे उपर! तो कैसे आएं। वो हंस के बोली “ कैसा ध्यान” तो मैने कहा कि “ एक चुम्मा देने का प्रोमिस करो तो मैं आउंगा भी”। उसने फोन पर एक चुम्मा दिया – “उम्माह्ह्ह!” और कहा बाकी आईये तो देती हूं।
जैसे ही मैं ससुराल पहुंचा तो सीधा उसके कमरे में गया – “ वो छत पर बने कमरे में टीवी देखते हुए आराम कर रही थी। अकेले। मैने देखते ही कहा – “ रानी जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा – आज तो तुम्हें चूत मराना पड़ेगा” फोन पर बात कह देना आसान होता है और जिससे ट्यूनिंग नहीं है, तो सीधी साधी लड़कियां हड़बड़ा ही जाती हैं। उसने मुझे देख कर भागने की कोशिश की और मैने दरवाजे को दोनों हाथों से कवर कर रखा था, उसने जैसे ही किनारे से निकलने की कोशिश की मैने उसे अपने प्यार भरे बाहों में समेट लिया। वो किसी फूल की कली की तरह से मेरे हाथों में आ गयी।मैने उसे दबोचते हुए उसकी कमर पकड़ के दबा दी। जीजा साली का रिश्ता ही ऐसा होता है कि कुछ भी कर लो सालियां बुरा नहीं मानतीं। वो हंस रही थी। पता है लड़कियां ना कुछ भी पहले नहीं कर सकतीं। वो चाहतीं हैं कि लड़के खेल स्टार्ट करें जिससे कि उसका अन्जाम उनके उपर थोपा जा सके। इसलिए मैं उसके इस रिस्पांस से आश्चर्यचकित न था। मैने उसके गुलाबी होटों को चुम लिया। वो शरमा के आंखें बंद करते हुए बोली – “ बस अब हो गया जीजू, अब जाने दो ना” मैने कहा मेरी रानी अभी तो शुरुआत है खेल की। बस देखती जाओ आगे होता है क्या और मैने उसके सेव जैसे फूले फूले गाल काट लिये। बस काटा क्या, एक दम निचोड़ लिया उसके गालों को अपने दांतों के बीच दबा के। वो सिस्काई “उई मां आह्ह! काट के खा जाएंगे क्या?” मैने कहा ईरादा तो कुछ ऐसा ही है और उसकी ब्लाउज के पिछले गले पर जो कि थोड़ा खुला तो होता ही है, मैने हाथ लगाके सहलाते हुए उसके होटों को अपने होटों से कस के दबोच लिया। निचले होट को पीते हुए मैने उसके पीठ को सहलाना जारी रखा। वो मेरे चारों तरफ हांथ फेंक के बिल्कुल खो गयी थी। मैने उसके मुह में अपनी जीभ घुसेड़ते हुए उसकी जीभ को अपने जीभ से उलझा दिया। अब हम दोनों की जीभ की नोक एक दूसरे से टकरा रही थी। वो मादक आवाजें और अदाएं देकर मेरा उत्साहव्वर्धन कर रही थी। मैने अपने हाथों से उसके पेटीकोट को खोला और साड़ी खींच दी। वो नीचे पूरी ही नंगी हो गयी। गोरी गोरी जंघाओं में उसकी काली पैंटी उसके चूत के चांद को छुपा के खड़ी थी। मैने आव देखा ना ताव, उसकी पैंटी खीचते हुए बाहर निकाल दी। वो अब नीचे पूरी नंगी थी। उसकी नन्हीं प्यारी सी भूरे बालों वाली फुद्दी देखकर मेरा मन हरा हो गया। आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | मैने लक्ष्मीना को गोद में उठा लिया। और बेड पर पटक दिया। उसके ब्लाउज के बटन खोल उसके सुन्दर और बड़े बड़े इंडियन चूंचों को आजाद किया। अब वो पूरी ही नंगी थी। छ्त पर गर्मियों के दिन में किसी के आने का अंदेशा न था। ईसलिए मैं खेल शुरु करने वाला था। रूबी ने धीरे धीरे मेरे शर्ट को खोल दिया और पैंट को खोलने लगी। उसे मजा लेने का मन कर रहा था। मैने पूछा – लक्ष्मीना यह पहली बार कर रही हो तो वो बोली हां जीजू। अब तक सिर्फ छुआ छुऔव्वल होता था, अब आज आपके साथ मन कर गया। आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | मैने उसके दोनों स्तनों को अपने मुठठियों के हवाले करते हुए उसके होटों को चूमते हुए अपने होटों को उसके गर्दन, कान और गले के पिछले हिस्से पर फिसलाना शुरु किया। बीच बीच में जगह जगह हल्के दांत भी गड़ा देता। वो मचल मचल के तड़प रही थी और आहें भर रही थी। मैने उसके स्तनों को पीते हुए उसके पेट और नाभि तक के भाग पर पूरा चुंबन दिया। उसका पेट थरथरा रहा था मेरे चुम्बन के आभास से। वो एकदम मगन होकर चुदाने वाली थी कि मैने उसके दोनों गांड की गोलाईयों को पकड़कर मसलते हुए उसे पेट के बल लिटा दिया। अब बारी थी उसकी गांड के स्थल को चूमने की, मैने उसके नितंबों को हल्के हल्के दांतों से चबाते हुए अपनी जीभ को उसकी गोलाइयों पर फिसलाना शुरु किया। वो मस्ताते हुए चुदने लगी और मैने उसके इस हरकत पर फिदा होते हुए उसकी गांड को दबोचते हुए चोदने के लिए अपने लंड को हाथों से मुआयना किया। मेरा ठरकी लंड पहले से ही खड़ा था और उसकी चूत का सत्यानाश करने के लिए हुंकारें भर रहा था। मैने उसकी गांड के छेद पर अपनी जीभ को फिसलाते हुए उसकी जांघों के जोड़ पर निचले हिस्से मतलब की चूत की तरफ रुख किया। भग को चाटते हुए मैने पाया कि उसकी चूत रस से भर चुकी थी। अब मैने उसे सीधा लिटा के उसके उपर आते हुए अपने मोटे लंड के सुपाड़े को उसकी चूत पर रख उसके होटों को होटों से दबोच चूंचियों पर अपने हाथों को काबिज किया और हल्के हल्के अंदर की तरफ रुख किया। वो मचलते हुए मुझसे दूर जाने की कोशिश करने लगी। उसकी चूत अभी कंवारी थी और मैं बिल्कुल एक्स्पर्ट चुदक्कड़ था। इसलिए मैने उसको चोदने के लिए, अपना लंड पहले से गीला कर रखा था। उसको दबोचते हुए मैने एक तेज धक्का दिया। आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | और वो – आह्ह!! मर गयी, उईइ मां बचाओ, आह्ह ऐसा लग रहा है किसी ने मेरी जांघों में लोहा घुसा दिया हो। और मैने दूसरा तेज झटका दिया और लंड उसकी सील को तोड़ता हुआ उसके चूत के गलियारों की सैर करता हुआ आठ इंच अंदर। जड़ तक अंदर घुसे हुए लंड को बाहर खींचते ही खून की पतली धार बहते हुए बेड पर गिरी। मैने उसकी चूत के नीचे अपना गमछा पहले से रख रखा था जिससे कि खून से लोगों को शक न हो। अब लक्ष्मीना कराह रही थी और जैसे ही मैने स्पीड पकड़ी, उसके नितंबों ने उपर नीचे होना शुरु कर दिया। वो मेरे साथ ताल से ताल् मिला रही थी। हर चोट का जवाब चोट से दे रही थी। वो मस्त होकर अपने चूत में लंड को ले रही थी और फिर देखते ही देखते हम दोनों जीजा साली उस कहावत को कि साली आधी घर वाली होती है, पीछे छोड़ चुके थे। मैने आध घंटे तक उसको देसी मिशनरी स्टाइल में चोदने के बाद अपना वीर्य बाहर निकाल कर उसके मुह में पिला दिया। वो इसको पेप्सी मिरांडा की तरह पीकर अपने फटी हुई चूत को निहारने लगी। मैने उसे किस करते हुए दो चार एंटीब्बायोटिक दवाएं दीं और कहा इन्हें खा लेना, सील ठीक हो जाएगी। पहली बार चूत मराने पर ऐसा ही होता है।

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सेक्स की गर्मी उतर गयी https://sexkahani.net/%e0%a4%b8%e0%a5%87%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a5%80-%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a4%b0-%e0%a4%97%e0%a4%af%e0%a5%80/ Thu, 25 May 2017 10:00:08 +0000 https://sexkahani.net/?p=11461 दोस्तों यह एक प्रोफ़ेसर साहब की कहानी है जिन्होंने अपनी स्टूडेंट को ही पटा कर चोद दिया और अब कहानी कुछ एसी है उस सुबह जब नीरज ने आँखें खोली तो सबसे पहली चीज़ जो उसके हाथ में आई वो उसका मोबाइल फोन था. उसने एक नज़र अपनी साइड में सो रही अपनी बीवी पर डाली और बेड से उठकर खिड़की पर खड़ा हो गया.

“वेल?” उसने सेल में एक मेसेज टाइप किया और स्मृति को भेज दिया

1 मिनिट बाद ही स्मृति का जवाब आ गया.

“दा पिल्स डिड्न्ट वर्क. आइ आम स्टिल प्रेग्नेंट”

नीरज का दिल बैठ गया.

“आर यू श्योर?” उसने फिर मेसेज भेजा

“ऑफ कोर्स आइ आम श्योर” स्मृति का जवाब आया “आइ आम स्टिल प्रेग्नेंट”

नीरज को जैसे खड़े खड़े चक्कर आने लगे. वो वहीं साइड में रखी कुर्सी पर सहारा लेकर बैठ गया. उसकी सारी दुनिया जैसी इस बात पर टिकी हुई थी के वो गोलियाँ काम कर जाएँगी पर ऐसा हुआ नही था और अब उसको समझ नही आ रहा था के क्या करे.

नीरज शहर के सबसे बड़े कॉलेज में लेक्चरर था. उमर 35 साल, कद 6 फुट, रंग गोरा, बिल्ट अथलेटिक. उसके पास वो सब कुछ था जो एक इंसान को अपनी ज़िंदगी में चाहिए हो सकता था. एक अच्छी नौकरी, एक सुंदर बीवी, एक 5 साल की बेटी, घर, गाड़ी, पैसा सब कुछ. वो अपनी बीवी से बहुत प्यार करता था जिससे की उसने 10 साल के अफेर के बाद लव मॅरेज की थी. वो और उसकी बीवी रूचि एक ही स्कूल में पढ़ते थे और साथ साथ आते जाते थे. वहीं दोनो की बचपन की दोस्ती प्यार में बदली, प्यार 10 साल तक परवान चढ़ा और फिर दोनो ने शादी कर ली.

नीरज की पूरी ज़िंदगी में रूचि के सिवा और कोई दूसरी लड़की नही आई थी और ना ही नीरज को किसी और लड़की की ज़रूरत पड़ी. रूचि एक बहुत खूबसूरत औरत थी. रूचि वो सब कुछ थी जो एक मर्द को अपनी बीवी में चाहिए हो सकता है. दिन में घर में एक ख्याल रखने वाली माँ, बात करने लिए एक बहुत अच्छी दोस्त और रात को बिस्तर पर पूरी रंडी. यही तो चाहता है हर मर्द के औरत से और ये सब कुछ नीरज को रूचि से हासिल हो रहा था. वो उसकी लाइफ में पहली लड़की थी और आखरी भी, ऐसा नीरज ने मान लिया था. आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

और फिर उसकी पूरी लाइफ को उत्पल पुथल करने के लिए आई स्मृति. वो 1st की स्टूडेंट थी और कॉलेज का शायद ही कोई लड़का होगा जो उसके पिछे नही था. पर वो आकर गिरी नीरज की झोली में, कैसे ये उसे खुद को कभी समझ नही आया.

ऐसा नही था के वो इस लायक नही था, पर वो खुद कैसे स्मृति के चक्कर में पड़ गया, ये उसको समझ नही आया.

जब स्मृति ने उसकी तरफ अपना इंटेरेस्ट दिखाया तो ये नीरज के लिए कोई नयी बात नही था. वो शकल सूरत से एक बहुत हॅंडसम आदमी था और अक्सर उसकी कई स्टूडेंट्स उसको लाइन मारती थी. कुछ उसके प्यार में पड़ जाती थी, कुछ बस उसके साथ घूमना चाहती थी क्यूंकी वो बहुत हॅंडसम आदमी था और कुछ उसके साथ सिर्फ़ एग्ज़ॅम में अच्छे नंबर्स हासिल करने के लिए सोना चाहती थी. पर इन सबको नीरज ने कभी कोई लिफ्ट नही दी.

और स्मृति के आने के बाद सब बदल गया. वो शहर के एक बहुत बड़े अमीर बाप की औलाद थी पर उसके हाव भाव से ऐसा बिल्कुल नही लगता था. वो एक सीधी सादी सी, खामोश सी रहने वाली लड़की थी. ना ज़्यादा किसी से बात करती थी, ना ज़्यादा किसी के मुँह लगती थी.

वो दिन नीरज को आज भी अच्छी तरह से याद था जब उसके और स्मृति के रिश्ते की शुरआत हुई थी. कॉलेज ख़तम हो चुका था और सिर्फ़ कुछ प्रोफेस्सर्स ही अपने ऑफिसस में बच गये थे. नीरज भी अपने ऑफीस में बैठा काम निपटा रहा था के दरवाज़ा खुला और स्मृति अंदर आ गयी. आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

“स्मृति” नीरज हैरत से उसको देखता हुआ बोला “वॉट आर यू स्टिल डूयिंग हियर?”

“नतिंग” उसने गोल मोल सा जवाब दिया और चलती हुई नीरज के करीब आई “आइ वांटेड टू टॉक टू यू”

वो नीरज के बिल्कुल करीब आकर खड़ी हो गयी थी.

“यॅ स्यौर” नीरज भी अपना पेन टेबल पर रख कर उसकी तरफ घूमते हुए बोला “अबौट वॉट?”

और इसके जवाब में उसके करीब ही खड़ी स्मृति एकदम नज़दीक आई और झुक कर कुर्सी पर बैठे हुए नीरज के होंठो को चूम लिया.

“वोओओओ उूओ उूओ” नीरज फ़ौरन उठ खड़ा हुआ और स्मृति को दूर करते हुए बोला “वॉट आर यू डूयिंग?”

“वॉट?” स्मृति हैरत से उसकी तरफ देखती हुई बोली “आइ लव यू आंड आइ वॉंट यू”

और उसके बाद अगले 2 घंटे तक नीरज उसको यही समझाता रहा के ऐसा नही हो सकता और के वो शादी शुदा है. उस वक़्त तो स्मृति समझ कर वहाँ से चली गयी और उस एक किस ने जाने ऐसा क्या किया के फिर नीरज खुद उसकी तरफ झुकता चला गया. वो खुद स्मृति को अपना इंटेरेस्ट दिखाने लगा, खुद धीरे धीरे उसके करीब आया और जब उसने पहली बार स्मृति को चोदा था तो वो जानता था के वो बिस्तर पर पहली बार किसी मर्द के साथ आई थी.

स्मृति को बिस्तर तक लाने में नीरज को ख़ासी मेहनत करनी पड़ी थी. और शायद यही वजह थी के वो और उसकी तरफ खींचा चला गया. रूचि बिस्तर पर जैसे एक भूखी शेरनी थी जो नीरज के साथ बराबर की जंग लड़ती थी पर स्मृति सुब्मिस्सिवे टाइप थी. वो उनमें से थी जो बिस्तर पर शरमाती हैं, मर्द के पहेल करने का इंतेज़ार करती हैं, मर्द को ही बिस्तर पर सब कुछ करने देती है पर वो जो भी करना चाहता है, उसके लिए मना भी नही करती. रूचि को भी नीरज शादी से बहुत पहले कॉलेज में ही चोद चुका था पर वो उसकी कम और रूचि की मर्ज़ी से ज़्यादा हुआ था. बहला फुसला कर एक लड़की को बिस्तर तक लाने का खेल उसके लिए नया था और स्मृति के साथ ये खेल खेलते हुए उसको बहुत मज़ा आया था.

और यही वो लम्हा था जब के उसने वो भारी भूल कर दी थी. आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

स्मृति बिस्तर पर आधी नंगी पड़ी थी. नीरज उसके ऊपर चढ़ा हुआ था और उसकी बड़ी बड़ी चूचियाँ चूस रहा था.

“कम ऑन. करते हैं ना” वो स्मृति के होंठ चूस्ते हुए बोला. नीचे से उसने अपने लंड से एक हल्का सा धक्का चूत पर लगाया. नीरज पूरी तरह नंगा था जबकि स्मृति ने अपनी कमीज़ तो उतार दी थी पर सलवार अब तक पहन रखी थी.

“नीरज मुझे डर लगता है” स्मृति बोली

“डरने की क्या बात है. मैं आराम से करूँगा” वो धीरे धीरे अपनी कमर हिला रहा था और अपना लंड सलवार के ऊपर से ही उसकी चूत पर रगड़ रहा था.

“आइ डनो. इट्स वियर्ड” स्मृति बोली

“इट्स नोट वियर्ड. यू विल लाइक इट” वो अपने से तकरीबन आधी उमर की लड़की को समझाता हुआ बोला.

“मुझे शरम आती है” स्मृति बोली

और यहाँ नीरज का पारा चढ़ गया. वो उसके ऊपर से हट कर बिस्तर पर साइड में लेट गया.

“अगर शरम आती है तो यहाँ एक होटेल के कमरे में मेरे साथ आधी नंगी बिस्तर पे क्या कर रही हो” उसने गुस्से से कहा

स्मृति घूम कर उसकी तरफ अपना चेहरा करते हुए बोली

“आइ आम सॉरी नीरू. इट्स जस्ट दट के मुझे शादी से पहले ये ठीक नही लगता”

“हम अब करें या शादी के बाद करें क्या फरक पड़ता है स्मृति” और यहाँ नीरज ग़लती कर गया

“यू विल मॅरी मी?” स्मृति बोली

“यस”

“बट हाउ. यू आर ऑलरेडी मॅरीड. वॉट अबौट युवर वाइफ?”

“मैं उसको डाइवोर्स दे दूँगा” चूत में लंड घुसाने के लिए मरा जा रहा नीरज उस वक़्त बिना सोचे समझे बोल गया “आइ वाना मॅरी यू”

उसके बाद उसने अगले 3 घंटे में स्मृति को 3 बार चोदा. नीरज को लगा था के वो पहले से ही चुदी हुई होगी बस उसके साथ थोड़े नखरे कर रही है पर 3 घंटे बाद उसको यकीन हो चुका था कि स्मृति ने आज पहली बार किसी मर्द को अपने आपको सौंपा है. आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

अगले एक साल तक नीरज ने जी भरकर स्मृति को भोगा. वो तकरीबन रोज़ ही उसको चोद्ता था. स्मृति सूबमीस्सीवे टाइप थी इसलिए खुद तो किसी चीज़ की पहल नही करती थी पर जो कुछ भी नीरज करना चाहता उसके लिए कभी मना भी नही करती थी. नीरज ने उसके साथ वो सब कुछ किया जो वो रूचि से कभी कह भी नही पाया.
रूचि कभी उसको गांड मारने नही देती थी. स्मृति की वो चूत और गांड, दोनो मारता था.

रूचि कभी अपने मुँह में नही निकालने देती थी. स्मृति के साथ वो उसके मुँह में, चेहरे पर, जहाँ चाहे झाड़ जाता था और स्मृति कभी मना नही करती थी. आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |
जब उसने स्मृति को स्वॉलो करने को कहा तो उसने वो भी कर लिया.

उसके दिल में एक डिज़ाइर थी के लड़की की चूत से निकल के उसके मुँह में लंड डाले पर रूचि से वो कभी पूछ नही पाया था. ये काम उसने स्मृति के साथ किया.
अपने से आधी उमर की उस बच्ची के साथ उसने एक साल तक बंद कमरो में वासना का हर वो खेला जो वो खेलना चाहता था. जब भी ना नुकुर करती, उसे शादी की पट्टी पढ़ा देता और उसके प्यार में वो उसको मना भी नही करती थी.
नीरज को लगा था के सब ऐसे ही चलता रहेगा और एक दिन स्मृति कॉलेज पास करके चली जाएगी और ये सब एक भुला किस्सा हो जाएगा. पर जब एक दिन स्मृति ने उसको आकर बताया के वो प्रेग्नेंट है तो नीरज के पैरों के नीचे से जैसे ज़मीन खिसक गयी. आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

प्रेग्नेन्सी कोई बहुत बड़ी बात नही थी. नीरज ये बात संभाल सकता था पर मुसीबत बन गयी स्मृति की बच्चा ना गिराने की ज़िद. वो चाहती थी के नीरज अपनी बीवी को डाइवोर्स दे जो कि वो एक साल से कह रहा था और स्मृति से शादी करे. वो चाहती थी के वो स्मृति के घर आए, उसके पिता से मिले, वो दोनो फेरे लें और अपना पहला बच्चा इस दुनिया में लाएँ.

नीरज जानता था के अगर उसने प्रेग्नेन्सी वाली बात किसी को कह दी तो वो ख़तम हो जाएगा. उसकी बीवी उसे छोड़ देगी, नौकरी जाएगी और सबसे बड़ी बात, स्मृति का अमीर बाप उसको ज़िंदा नही रहने देगा. वो शहर की एक जानी मानी हस्ती था.

और फिर वो स्मृति को इस बात के लिए मनाता रहा के अबॉर्षन हो जाए. जब उसने ये कहा के प्रेग्नेन्सी वाली बात सुनकर शायद स्मृति के पिता शादी ना करने दें तो वो मान गयी. उसने नीरज की इस बात पर यकीन कर लिया के कौन बाप अपनी बेटी हा हाथ ऐसे आदमी के हाथ में देगा जो शादी शुदा होते हुए भी दूसरी लड़की के साथ सो रहा था.

नीरज ने एक झूठा प्लान बताया के पहले वो अपनी बीवी को डाइवोर्स देगा फिर स्मृति के पिता से मिलेगा ताकि उनकी शादी में कोई रुकावट ना आए. वो बेचारी भोली लड़की उसकी बात मानकर अबॉर्षन के लिए राज़ी हो गयी पर तब तक देर हो चुकी थी.

डॉक्टर ने अबॉर्षन के लिए मना कर दिया. स्मृति को मनाने में बहुत वक़्त निकल गया था. वो अबॉर्षन की स्टेज से आगे निकल चुकी थी. आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

एक आखरी रास्ता वो गोलियाँ थी जो नीरज ने कल रात उसको दी थी पर अब जबकि वो गोलियाँ भी फेल हो गयी तो उसको अपनी पूरी ज़िंदगी बिखरती हुई नज़र आ रही थी. ओह गॉड” उसने अपना सर पकड़ते हुए सोचा “काश वो गोलियाँ ज़हर की होती तो मनहूस साली मर ही जाती” और अचानक उसके दिल में एक ख्याल आया.

“नही नही” नीरज ने सोचा “ये ग़लत है. ऐसा नही कर सकता मैं”

उस दिन वो तैय्यार होकर कॉलेज चला तो गया पर दिमाग़ में डर के सिवा कुछ नही था. सिवाय इसके के स्मृति बच्चे को पैदा करे, उनके पास कोई चारा नही था | आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |
वो कॉलेज के एक कॉरिडर में स्मृति से मिला. उन्होने ऐसे दिखाया के एक स्टूडेंट अपने प्रोफेसर से स्टडीस डिसकस कर रही है पर असल में वहाँ खड़े वो धीरे धीरे कुछ और ही बात कर रहे थे.

स्मृति के पेट पर अब हल्का हल्का उठान आना शुरू हो गया था. किसी अंजान को अभी भी ये पता नही लग सकता था के वो प्रेग्नेंट है पर नीरज ये बात जानता था.
कुछ हफ्ते और फिर पूरी दुनिया को दिखाई देगा के ये प्रेग्नेंट है, नीरज ने सोचा.

“अब हमारे पास कोई चारा नही है. अपनी वाइफ को डाइवोर्स दो जल्दी प्लीज़. अब हम ये बात ज़्यादा नही छुपा सकते,” स्मृति कह रही थी थी. आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

“तूने 2 महीने पहले मेरी बात मान ली होती तो ऐसा हुआ ही ना होता” नीरज सोच रहा था. उसको बहुत गुस्सा आ रहा था.

“देखो या तो तुम कुछ करो नही तो मुझे कुछ करना पड़ेगा. भगवान की कसम कुछ कर बैठूँगी मैं” स्मृति ने रोती हुई सी आवाज़ में कहा और वहाँ से चली गयी.

थोड़ी देर बाद अपने ऑफीस में बैठे हुए नीरज को और कोई रास्ता नही सूझ रहा था.

“इसमें मेरी कोई ग़लती नही है” वो अपने आप से कह रहा था “वो खुद मेरे पास आई थी, खुद ही मेरे गले पड़ी और खुद ही अबॉर्षन ना करने की ज़िद. सारी ग़लती उसकी है और उसकी ग़लती की कीमत मैं और मेरा परिवार नही भरेगा. ग़लती की है तो भुगते, मरे” आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

जब नीरज ने अपना चेहरा आईने में देखा तो खुद को ही पहचान नही पाया. कुछ वक़्त पहले वो एक कॉलेज का एक शरीफ प्रोफेसर था पर एक साल में कितना बदल गया था. अपनी बीवी को धोखा, अपने प्रोफेशन को धोका, अपनी एक स्टूडेंट को धोखा और अब मर्डर का प्लान. कितना बदल गया था वो.

प्लान उसने साफ साफ बना लिया था और प्लान का हिंट भी स्मृति उसको खुद दे गयी थी. अगर उसका मर्डर किया जाए तो बेकार इन्वेस्टिगेशन हो जाएगी. सबको पता चल जाएगा कि वो प्रेग्नेंट थी और फिर उसके खुद के पकड़े जाने के चान्सस भी थे. आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |
पर अगर स्मृति स्यूयिसाइड कर ले तो? उसने खुद ही कहा था के वो कुछ कर बैठेगी. नीरज को सिर्फ़ इतना करना था के उस बेवकूफ़ लड़की को इस हद तक उकसा देना था के वो सच में कुछ कर बैठे. नीरज को सिर्फ़ उसे स्यूयिसाइड करने का रास्ता दिखाना था. इस अंदाज़ में के स्मृति को यही लगे के उन दोनो के आस अब कोई चारा नही है. जैसा की हिन्दी मूवीस में होता है.

हम जीकर नही मिल सकते, अपने प्यार को पाने के लिए हमें मरना पड़ेगा.

जीकर हम मिल नही पाए तो क्या, मरकर एक दूसरे के हो जाएँगे.

सिर्फ़ उस साली बेवकूफ़ को इस बात पर राज़ी कर लेना है और स्यूयिसाइड का सामान उसे दे देना है, नीरज ने सोचा.

नीरज को अब 2 काम करने थे और दोनो ही उसको बहुत आसान लग रहे थे.
पहला था स्मृति को स्यूयिसाइड के लिए उकसाना. इस बात पर राज़ी करना के वो दोनो एक साथ स्यूयिसाइड कर लें, यही आखरी रास्ता उनके पास बचा था.

दूसरा, उसको ज़हर लाकर देना. बहुत आसान काम था. वो एक केमिस्ट्री प्रोफेसर था और ऐसे केमिकल्स की लंबी लिस्ट उसके पास थी जो ज़हर का काम करते थे. आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

तीसरा था स्यूयिसाइड नोट, जो कि इस अंदाज़ में लिखवाना था के स्मृति ने ये काम इसलिए किया के वो अपने किए पर शर्मिंदा है और अपने बाप से रिक्वेस्ट कर रही है के उसकी मौत के बाद उसकी प्रेग्नेन्सी की बात को उच्छाला ना जाए क्यूंकी इससे वो खुद भी मौत के बाद बदनाम होगी और अपने परिवार को भी बदनाम करेगी. अगर ऐसा हो गया तो उसके रसूख् वाला बाप कोई इन्वेस्टिगेशन नही होने देगा. स्यूयिसाइड को नॉर्मल मौत बना दिया जाएगा और कोई इन्वेस्टिगेशन नही होगी.

और नीरज की लाइफ फिर नॉर्मल हो जाएगी. आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

यही सब सोचता वो अपने ऑफीस से निकला और केमिस्ट्री लॅब पहुँचा.

एक रॅक पर बहुत सारी केमिकल्स की बॉटल्स रखी हुई थी पर नीरज जानता था के उसको क्या चाहिए. उसने एक बॉटल उठाई और लेबल पढ़ा.

वाइट आर्सेनिक (आस4 ओ6) ** पाय्सन

थोड़ा सा पाउडर उसने बॉटल से निकाल कर एक काग़ज़ में डालकर पूडिया सी बना ली और अपनी जेब में रख लिया. वो जानता था के जितना ज़हर वो ले जा रहा है, इतना एक स्मृति को क्या, 20 लोगों की जान लेने के लिए काफ़ी है. पर वो सारा का सारा ही स्मृति को खिलाने वाला था, जस्ट टू बी ऑन दा सेफर साइड. आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

जस्ट टू मेक शुवर के साली रांड़ ज़िंदा ना बच जाए, उसने दिल ही दिल में सोचा.
कहीं दिल के किसी कोने में उसको स्मृति पर तरस भी आ रहा था. आख़िर वो बेचारी एक कॉलेज जाने वाली लड़की थी और हर वही अरमान था जो एक आम लड़की के दिल में होता है. कॉलेज में किसी हॅंडसम लड़के से मिले और प्यार हो जाए, फिर उनकी शादी हो, बच्चे हों ….. उस बेचारी ने ग़लती ये की के प्यार ग़लत इंसान से कर बैठी और उसकी बहुत भारी कीमत चुकाने वाली थी. आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

“नही” नीरज ने फ़ौरन अपने ख्यालों का रुख़ बदला और अपने दिल को मज़बूत किया “ये सब उसकी ग़लती थी. पहले ज़बरदस्ती गले पड़ी और फिर अबॉर्षन नही कराया. ग़लती उसकी है, ग़लती की कीमत भी वो ही भरेगी”

ज़हर उसके पास आ चुका था. अब स्मृति को स्यूयिसाइड के लिए मनाना है.

“बेवकूफ़ है साली” उसने दिल में सोचा “बहुत आसानी से मान जाएगी”

जैसे वो खुद अपने दिल को तसल्ली दे रहा था के ये काम भी आसानी से हो जाएगा.
कॉलेज में काम निपटा कर वो अपने घर के लिए निकला. रास्ते में एक केमिस्ट की दुकान पर रुक कर कुछ खाली जेलेटिन कॅप्सुल्स ले लिए जिनमें के ज़हर भर कर उसने स्मृति को देना था.

पर तक़दीर को शायद कुछ और ही मंज़ूर था. आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

जब वो अपने घर पहुँचा तो शाम के 7 बज रहे थे. सर्दियों का मौसम था इसलिए भारी कोहरा हर तरफ फेल चुका था. हर तरफ अंधेरा था और लोग अपने अपने घरों में घुस चुके थे.
उसके घर के ठीक सामने स्मृति की गाड़ी पार्क्ड थी.

नीरज को समझ नही आया के क्या करे. वो बेवकूफ़ लड़की खुद उसकी बीवी के पास पहुँच गयी थी और अब तक तो सब बता दिया होगा.

उसे सब कुछ ख़तम होता दिखाई दे रहा था. अपनी पूरी दुनिया ख़तम होती दिखाई दे रही थी. उसकी समझ नही आ रहा था के घर ने अंदर जाए या फिर से अपनी गाड़ी में बैठ कर कहीं दूर भाग जाए.

रूचि से दूर.

स्मृति से डोर.

सबसे दूर.

सारी मुसीबतों से दूर.

यूँ ही खड़े सोचते हुए उसको 15 मिनट बीत गये. आम तौर पर जब वो घर आता था तो उसकी बेटी फ़ौरन भाग कर बाहर आ जाती थी पर आज ऐसा हुआ नही.

घर में उसे कोई हलचल दिखाई नही दे रही थी.

डरता हुआ वो धीमे कदमों से घर के दरवाज़े तक पहुँचा और खोल कर अंदर दाखिल हुआ. ड्रॉयिंग रूम में स्मृति बैठी हुई थी.

“स्मृति तुम यहाँ?” नीरज ने कहा और एक नज़र उसपर ऊपर से नीचे तक डाली. वो पूरी खून में सनी हुई थी.

“क्या हुआ” उसके मुँह से अपने आप ही निकल पड़ा. जवाब में स्मृति ने अंगुली से कमरे के कोने की तरफ इशारा किया.

नीरज की आँखें फटी की फटी रह गयी. कलेजा मुँह को आ गया. आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

कोने में रूचि की लाश पड़ी हुई थी, लाइयिंग इन आ पूल ऑफ हेर ओन ब्लड आंड पिस.

थोड़ी ही दूर पर उसकी 5 साल की बेटी की लाश पड़ी थी. उसकी गर्दन आधी कटी हुई थी, जैसे किसी बकरे को हलाल किया जाता है. उसकी आँखों के आगे जैसे अंधेरा सा छाने लगा. “मैने कहा था ना के मैं कुछ कर बैठूँगी. अब देखो ना नीरज, हमारे पास कोई चारा भी तो नही था. किसी ना किसी को तो मरना ही था तो हमारा बच्चा क्यूँ मरे? मैना अबॉर्षन क्यूँ कराऊँ? इसलिए मैने सारे रास्ते हल कर दिए. तुम ही बताओ, क्या ये सही होता के हम अपने प्यार की निशानी मेरे बच्चे को मार दें? तुमने मुझे वो गोलियाँ खाने को कहा था पर मैने खाई ही नही. क्यूँ मारु मैं अपने बच्चे को? सिर्फ़ इसलिए के लोग उसे नाजायज़ कहते ?” स्मृति कह रही थी
दोस्तो ऐसा भी होता है कि बोए पेड़ बबूल के आम कहाँ से खाय दोस्तो कहानी कैसी लगी ज़रूर बताना आपका दोस्त राहुल
समाप्त

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ऐसा चोदना की मैं रो पडू https://sexkahani.net/%e0%a4%90%e0%a4%b8%e0%a4%be-%e0%a4%9a%e0%a5%8b%e0%a4%a6%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%88%e0%a4%82-%e0%a4%b0%e0%a5%8b-%e0%a4%aa%e0%a4%a1%e0%a5%82/ Thu, 25 May 2017 06:00:54 +0000 https://sexkahani.net/?p=11456 दोस्तों आज एक मजेदार कहानी पेश कर रहा हु वैसे तो मै मस्तराम डॉट नेट पर ढेर सारी कहानिया लिख चूका हु पर आज कुछ अलग ही कहानी लिख रहा हु आशा है की ये कहानी भी आप लोगो को जरुर पसंद आएगी |
दीपक वर्मा ने अपना आईडी और पासवर्ड डाला लोग इन किया. अनुष्का ऑनलाइन थी. वादे के मुताबिक वो उनका इंतेज़ार कर रही थी. लोग इन करते ही फ़ौरन उसकी मेसेज विंडो अपने आप खुल गयी. उसका असली नाम अनुष्का था.
अनुष्का – है. आइ वाज़ वेटिंग फॉर यू.
दीपक – सॉरी थोड़ा लेट हो गया. एक क्लाइंट बैठा हुआ था, जाने का नाम ही नही ले रहा था.
अनुष्का – नही कोई बात. ज़्यादा वेट नही करना पड़ा. मैं भी बस अभी ऑनलाइन आई ही थी.
दीपक – आपने अपना वादा पूरा किया.
अनुष्का – कैसी ना करती, आपने इतने प्यार से आने के कहा था.
दीपक – वैसे एक बात बताऊं आपको?
अनुष्का – बताइए
दीपक – जिस दिन मुझे पता होता है के आज आपसे बात होने वाली है, सुबह से ही मेरा लंड खड़ा रहता है.
अनुष्का – लोल …. तो घर में एक चूत है तो, घुसा दिया कीजिए.
दीपक – मेरी बीवी? उससे बेहतर तो ये है के मैं बाथरूम में जाकर हिला लूँ
अनुष्का – तो क्या ऐसा किया?
दीपक – मतलब?
अनुष्का – हिलाया?
दीपक – हां हिलाया ना. सुबह से 3 बार मूठ मार चुका हूँ
अनुष्का – हिलाते हुए क्या सोच रहे थे?
दीपक – यही के हक़ीकत में आपको चोदुन्गा तो कैसा फील होगा.
अनुष्का – डोंट वरी. जल्दी पता चल जाएगा. वैसे डर नही लगता तुम्हें?
दीपक – किस बात का?
अनुष्का – यू नेवेर नो. हो सकता है के मैं कोई पागल किस्म की सीरियल किल्लर टाइप लड़की निकलूं. या हो सकता है के मुझे कोई एड्स टाइप बीमारी हो?
दीपक = यआ राइट. लोल
दीपक वर्मा एक बड़ी कंपनी में काफ़ी अच्छी पोस्ट पर था. बड़ा सा घर, बड़ी सी गाड़ी, 2 बच्चे और शादी शुदा ज़िंदगी से परेशान. आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | उसकी शादी 22 साल की उमर में ही करा दी गयी थी. ऐसा नही के वो हमेशा से अपनी शादी से परेशान रहा था. उसकी बीवी एक पढ़ी लिखी, बहुत सुंदर और एक अमीर घराने की लड़की ती. शुरू शुरू में दोनो में सेक्स भी बहुत था. कई सालों तक दीपक अपनी बीवी को हर रात चोद कर ही सोता था और सुबह होते ही सबसे पहला काम होता था बीवी पर चढ़ जाना. पर बच्चे होने के बाद धीरे धीरे उसकी बीवी सेक्स के मामले में जैसे बुझती चली गयी. रोज़ रात होने वाला सेक्स अब वीक्ली बेसिस पर होने लगा था और उसमें भी उसे लगता था के किसी सेक्स डॉल को चोद रहा है. पहले कई साल तक उसने अपनी बीवी में फिर से वही चिंगारी पैदा करने की कोशिश की पर जब नाकाम रहा तो फ्रस्टरेट होने लगा. किसी रंडी के पास जाना उसके उसूल के सख़्त खिलफ़्फ़ था इसलिए सेक्षुयल फ्रस्ट्रेशन धीरे धीरे बढ़ने लगी.
और इसी फ्रस्ट्रेशन में उसने इंटरनेट का सहारा लिया. पॉर्न साइट्स पर जाना, पॉर्न वीडियोस देखना, चॅटरूम में जाकर किसी लड़की को ढूँढना और उससे गंदी गंदी बातें करना, उसकी सेक्स लाइफ यहीं तक सिमट गयी थी.
और एक दिन ऐसे ही एक चॅट रूम में उसको अनुष्का मिली. उसका असली नाम अनुष्का था. और उसके बाद फिर जैसे बातों का सिलसिला चल निकला. वो दोनो टाइम फिक्स करके ऑनलाइन आते और एक दूसरे से चॅट करते. पहले दोनो सिर्फ़ साइबर सेक्स और रॉलीप्लेस को लेकर ही बात करते थे पर फिर धीरे बातें सेक्स से हटकर भी होने लगी.
और यही वो टाइम था जब अनुष्का ने उसको सजेस्ट किया था के उन दोनो को मिलना चाहिए और जिस तरह से वो ऑनलाइन सेक्स करते हैं, वैसे ही हक़ीक़त में भी करना चाहिए.
दीपक – मिलने का प्लान पक्का है ना वैसे?
अनुष्का – हां. होटेल में रूम बुक किया तुमने?
दीपक – हां कर लिया. सॅटर्डे आंड सनडे
अनुष्का – अवेसम
दीपक – ब्लॅक ब्रा आंड पॅंटी?
अनुष्का – हां खरीद ली. जैसी तुमने कही थी बिल्कुल वैसी.
दीपक – मेरा तो सोच कर ही खड़ा हो रहा है
अनुष्का – मैं ठंडा कर दूं?
दीपक – करो
ये उन दोनो का हमेशा का रुटीन था. दोनो सेक्स में कोई रोलेपले करते और इस तरफ दीपक अपना लंड हिलाता और जैसा के अनुष्का ने उसको बताया था, वो भी दूसरी तरफ अपनी चूत में अंगुली करती थी. दीपक ने कई बार उसपर ज़ोर डाला था के वो दोनो एक दूसरे को देख कर ये काम करें पर अनुष्का हमेशा मना कर देती थी. उसके हिसाब से एक दूसरे को नंगा उन्हें तभी देखना चाहिए जब वो मिले.
अनुष्का – आइ कॅंट बिलीव के कुच्छ दिन बाद ही तुम मुझे नंगी देखोगे
दीपक – देखूँगा नही जानेमन, बहुत कुच्छ करूँगा
अनुष्का – क्या क्या करोगे?
दीपक – तुम्हें बिस्तर पर रागडूंगा
अनुष्का – ऐसे नही, शुरू से बताओ. इमॅजिन करो के मैं बस अभी कमरे में आई ही हूँ
दीपक – जैसी ही तुम कमरे में आई, मैने कमरे का दरवाज़ा बंद किया
अनुष्का – और मैं आगे बढ़कर तुमसे लिपट गयी.
दीपक – मुझसे इंतेज़ार नही हो रहा था इसलिए बिना कुच्छ कहे मैं अपने होंठ तुम्हारे होंठों पर रख दिए और एक हाथ से तुम्हारी चूची पकड़ ली
अनुष्का – कौन सी? राइट या लेफ्ट?
दीपक – राइट
अनुष्का – आआहह जान. ज़ोर से दबाओ.
दीपक – मैने तुम्हारे होंठों को चूस्ते हुए तुम्हें दीवार के साथ लगा दिया और नीचे दोनो हाथों से तुम्हारी चूचियाँ दबा रहा हूँ
अनुष्का – लंड को भी चूत पर रागडो ना
दीपक – मैं अब अपना लंड कपड़ो के उपेर से ही तुम्हारी चूत पर रगड़ रहा हूँ
अनुष्का – मैने अब अपना एक हाथ नीचे ले जाकर तुम्हारे लंड को सहलाना शुरू कर दिया.
दीपक – चूसोगी नही?
अनुष्का – चुसुन्गि पर पहले तुम मुझे नंगी तो करो.
दीपक – अब मैं तुम्हें धीरे चूमता हुआ धीरे धीरे बिस्तर की ओर ले जा रहा हूँ. बिस्तर के पास ले जाकर मैने तुम्हें बिस्तर पर धक्का देकर गिरा दिया.
अनुष्का – अब चढ़ जाओ मेरे उपेर. एक रंडी की तरह चोदो मुझे.
दीपक – वैसे जब हम रियल में मिलेंगे, सबसे पहले क्या बनकर चुद्वओगि? माइ लवर या एक रंडी?
अनुष्का – रंडी. सबसे पहले मुझे एक रंडी समझकर चोदना. ऐसा चोदना की मैं रो पडू.
दीपक – चिंता मत कर मेरी जान. तेरी चूत में लंड घुसाके निकालूँगा नही. ऐसे धक्के लगाऊँगा के यू विल क्राइ, बोथ इन पेन आंड प्लेषर
अनुष्का – विल यू लिक्क माइ चूत?
दीपक को चूत पर मुँह लगाना बिल्कील पसंद नही था. सोचकर ही उल्टी आती थी. एक ये काम उसने बिस्तर पर कभी नही किया था.
दीपक – ऑफ कोर्स. आइ विल लिक्क उर चूत, रब इट, टीज़ इट, प्ले वित इट
अनुष्का – पर पहली बार में गांड मारने की कोई कोशिश मत करना प्लीज़. आइ नो हाउ मच यू वन्त इट पर पहली बार में नही
दीपक – अंगुली भी नही? आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |
अनुष्का – नही प्लीज़. गांड में कुच्छ मत डालना.
दीपक – ओके
अनुष्का – अच्छा डिड यू गेट दा रोप्स?
दीपक – हां आइ डिड
अनुष्का – कूल. मेरा बड़ा दिल है के मैं तुम्हें बिस्तर से बाँध दूं ताकि तुम हिल भी ना सको और फिर मैं तुम्हारे उपेर चढ़ु.
दीपक – और?
अनुष्का – और फिर मैं तुम्हारे होंठों को चूमूं, जब तक मेरा दिल चाहे
दीपक – और?
अनुष्का – और फिर मैं तुम्हारे गले को चूमते हुए नीचे आऊँ, तुम्हारी चूची पर किस करूँ, फिर तुम्हारे निपल्स को धीरे से काटु.
दीपक – फिर?
अनुष्का – फिर धीरे धीरे नीचे आऊँ और तुम्हारे पूरे लंड को अपनी जीब से चाटना शुरू कर दूं.
दीपक – ओह्ह्ह्ह गॉड …. सोचकर ही कितना मज़ा आ रहा है
अनुष्का – इमॅजिन करो … और तुम बँधे हुए होंगे और हिल भी नही पाओगे और मैं तुम्हारा लंड चूसुन्गि और तुम कुच्छ भी नही कर पाओगे | आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |
दीपक – आइ नो
अनुष्का – थ्ट्स माइ फॅवुरेट पार्ट आक्च्युयली. मेरा बड़ा मंन है. तुम्हें बिस्तर से बाँध दूँगी, फिर तुम्हारी आँखों पर भी एक पट्टी बाँध दूँगी और फिर अपना खेल खेलूँगी.
उस दिन सुबह दीपक उठा तो किसी बच्चे की तरह खुश था. आज वो अनुष्का से मिलने जा रहा था, पूरे वीकेंड के लिए यानी के अगले दो दिन तक वो अनुष्का को जी भरकर चोदने वाला था. घर पर उसने अपनी बीवी को कह दिया था के वो बिज़्नेस मीटिंग के लिए जा रहा है पर शायद ना भी बताता तो कुच्छ बिगड़ने वाला नही था. हमेशा की तरह वो सुबह से ही अपनी दोस्तों के साथ कोई चॅरिटी फंक्षन प्लान करने में बिज़ी थी.
इतना एग्ज़ाइटेड वो तब था जब उसकी शादी हो रही थी या शादी के पहले कुच्छ दिनो में जब उसको पता था के घर जाकर वो अपनी बीवी की चूत मारेगा. ये सोच सोच कर ही के थोड़ी देर बाद उसका लंड एक चूत में होगा, उसके दिल की धड़कन तेज़ होने लगती थी. लंड इस तरह खड़ा हो जाता था के पेंट में च्छुपाना मुश्किल हो जाता था.
यही हाल उसका आज भी था. सुबह से उसका लंड तना खड़ा था. दिमाग़ में सिर्फ़ यही चल रहा था के थोड़ी देर बाद वो एक कमरे में वासना का हर गंदा खेल खेलने वाला है. वो सब करने वाला है जो वो करना तो चाहता था पर कभी बीवी के साथ कर ना सका. जी भरकर चुदाई के दौरान गालियाँ देगा, अनुष्का को जिस नाम से चाहे बुलाएगा, जिस पोज़िशन में चाहे चोदेगा, जब तक चाहे चोदेगा. अनुष्का ने उसे वादा किया था के 2 दिन तक वो दोनो होटेल के रूम में नंगे ही रहेंगे, बिल्कुल कपड़े नही पहनेंगे. दीपक की एक फॅंटेसी थी और वो थी के वो किसी लड़की के साथ नंगा बैठ कर खाना खाए, जब वो और लड़की दोनो डाइनिंग टेबल पर नंगे बैठे हों और खाना खा रहे हों. बीवी से ऐसी फरमाइश वो कभी कर नही सका पर जब अनुष्का से कहा, तो वो फ़ौरन मान गयी. “आज उनसे पहली मुलाक़ात होगी, फिर आमने सामने बात होगी” वो दिल ही दिल में गुनगुना रहा था “अर्रे बात नही, चुदाई होगी” दिल ही दिल में सोचकर वो हंस पड़ा. अनुष्का से बात करते उसको 6 महीने से ज़्यादा हो गये थे. वो औरत जैसे उसका दिमाग़ पढ़ती थी, जैसे उसको जानती थी. पहले दीपक डरता था के कहीं ये कोई लड़का तो नही जो मज़ाक कर रहा हो क्यूंकी वो कभी भी खुद को दिखाती नही थी पर फिर धीरे धीरे उसको यकीन हो गया था के वो एक औरत ही थी. पहले दोनो ऑनलाइन आते, साइबर सेक्स करते और दीपक मूठ मार लेता पर फिर धीरे धीरे अनुष्का ने बात को सेक्स से घुमाना शुरू कर दिया था. बातें फिर सेक्स से हटकर उन दोनो के बारे में होती थी के उन्हें बिस्तर पर क्या पसंद है, क्या नही, सेक्स किस तरह का चाहिए और दीपक को हैरानी होती थी के वो जो कहता, अनुष्का उसी को अपनी भी पसंद बताती. हर गंदी से गंदी ख्वाइश के लिए उसने यही कहा के अगर वो कभी मिले, तो दीपक उसके साथ ऐसा कर सकता है. फिर बातें सेक्स से हटकर उन दोनो की पर्सनल ज़िंदगी की तरफ आ गयी. बातों बातों में अनुष्का दीपक के बारे में थोड़ा बहुत जान गयी थी पर वो उस औरत के बारे में कुच्छ नही जानता था. कौन थी, कहाँ रहती थी, क्या करती थी, कुच्छ भी तो नही. “जैसा के उसने कहा था, वो कोई सीरियल किल्लर भी हो सकती है” उसने दिल ही दी में सोचा और उस बात पर हँस पड़ा. “ऑल राइट बेटा” उसने अपनी बेटी का सर चूमा “आइ विल सी यू ऑन मंडे” बीवी किसी चॅरिटी वर्क में बिज़ी थी और दीपक उसके घर आने से पहले ही निकल लेना चाहता था.
कोई 3 घंटे बाद उसकी कार एक होटेल की लॉबी में आकर रुकी. वो कार से उतरा और पहले सीधा वॉशरूम में गया. अपने आपको शीशे में देखा, एक डियो अपने उपेर च्चिड़का, माउत फ्रेशनेर अपने मुँह में स्प्रे किया और बार में पहुँचा.
जैसा की उन दोनो ने डिसाइड किया था, वो टेबल 7 पर बैठी थी. अनुष्का की पीठ दीपक की तरफ थी पर वो बता सकता था के उसने ब्लॅक कलर की सारी पहेन रखी थी. ये दीपक की एक फॅंटेसी थी के औरत ब्लॅक सारी, ब्लॅक ब्लाउस, ब्लॅक पेटिकट, ब्लॅक ब्रा, और ब्लॅक पॅंटी में हो. वो चाहता था के वो कोई कपड़े ना उतारे, बस औरत को झुकाए, फिर ब्लॅक ब्रा और ब्लॅक पेटिकट उपेर उठाए, ब्लॅक पॅंटी नीचे सरकाए और अपना लंड पिछे से चूत में डाल दे. आगे से उस औरत के ब्लॅक ब्लाउस के बटन खुले हों, चूचियाँ ब्लॅक ब्रा से बाहर लटक रही हो. ये थी उसकी ब्लॅक फॅंटेसी और जब उसने अनुष्का से इस बारे में बात की, तो वो फ़ौरन मान गयी. और आज वादे के मुताबिक वो ब्लॅक कपड़ो में ही आई थी. उसके पास कोई बॅग नही था पर दीपक गेस कर रहा था के बॅग ऑलरेडी रूम में जा चुका होगा क्यूंकी रूम बुक्ड था और वो नंबर जानती थी | आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | दीपक ने भी होटेल आकर अपना समान बेल-बॉय के हाथ रूम में भेज दिया था और खुद बार में आ गया था. वो खुद भी एक ब्लॅक सूट में था. ब्लॅक कोट, ब्लॅक वेस्ट, ब्लू शर्ट, और बॅक ट्राउज़र. ट्राउज़र के अंदर उसने अनुष्का की फरमाइश पर पहेन रखी थी एक पिंक कलर की पॅंटी. चलता हुआ वो अनुष्का के पिछे पहुँचा और उसके कंधे पर हाथ रखा. “अनुष्का?” उसने कहा आवाज़ पर औरत पलटी और उठकर सीधी खड़ी हुई. और अगले ही पल दोनो के चेरे सफेद पड़ते चले गये.  “तुम?” दोनो के मुँह से एक साथ निकला.दीपक के सामने ब्लॅक सारी में उसकी अपनी बीवी स्नेहा खड़ी थी. तो दोस्तो आपने देखा कभी कभी ऐसा भी होता है ये दोनो भी उन्मुक्त सेक्स के दीवाने थे लेकिन कभी एक दूसरे से कह नही पाए इसी का नतीजा था की आज एक दूसरे से नज़रे चुरा रहे थे |

दोस्तो कहानी कैसी लगी ज़रूर बताईएगा आपका दोस्त राहुल

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मेरी दीदी और पड़ोसन की चुदाई की कहानी https://sexkahani.net/%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a5%9c%e0%a5%8b%e0%a4%b8%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%9a%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a4%be/ Wed, 24 May 2017 15:00:30 +0000 https://sexkahani.net/?p=11453 मेरा नाम रमेश है और मेरी उम्र २८ वर्ष है। मेरा कद ५ फीट ७ इंच और मेरा रंग गोरा है। देखने में बहुत स्मार्ट हूँ क्योंकि जिम में जाने की वजह से मेरा शरीर भी एकदम गठीला हो गया है। मेरे डोले १७ इंच के है और छाती ४५ इंच की है। इतनी जानकारी से मेरे व्यक्तित्व एवं शख़्सियत का अंदाजा तो अब आप खुद ही लगा सकते हैं।

मेरी दीदी निशा और पड़ोसन निधि द्वारा मेरी वर्षगाँठ और उसके बाद के दस दिन तक तोहफे में मुझे बहुत सेक्स दिया। दस दिनों के बाद दीदी तो अपने घर राजगढ़ चली गई और मेरे साथ सेक्स करने के लिए सिर्फ निधि ही रह गई थी! निधि और मैं लगभग अगले डेढ़ वर्ष तक जब भी हमें मौका मिलता था हम सेक्स करते थे और एक दूसरे को संतुष्ट करके दोनों बहुत ही खुश थे! उन दिनों जब भी निधि के पति किसी काम से शहर से बाहर जाते थे तब मैंने पूरी रात उसके ही घर में ही सोता था और उसे खूब चोदता था!
ऐसी ही एक रात को जब निधि के पति तीन दिनों के लिए शहर से बाहर गया हुआ था तब उसके घर में मेरे साथ सेक्स करते हुए उसने बताया कि उसके पति का स्थानान्तरण जयपुर में हो गया था और वह कुछ ही दिनों में राजस्थान से जयपुर चली जायेगी।
उस रात के बाद अगले पन्द्रह दिन तक निधि ने हर रोज़ पति के जाने के बाद दिन के समय या फिर शाम को उनके वापिस आने से पहले मेरे साथ सेक्स ज़रूर करती थी। जयपुर जाने से पहले वह मुझे अपन पता भी दे गई थी और कह गई थी कि जब भी उसके पति शहर से बाहर जायेंगे वह मुझे फ़ोन कर के बुला लेगी लेकिन अफ़सोस आज तक उसका फोन नहीं आया है।
निधि के जाने के बाद अगले छह माह तक मैं बिल्कुल अकेला ही रहा और अपना हाथ जगन्नाथ के सहारे अपनी इच्छाएँ एवं ज़रूरतें पूरी करता था। बीच बीच में तीन-चार दिनों के लिए जब भी निशा आती थी तब वह अपने वादा निभाती थी और उन तीन या चार दिन एवं रातों में अनेक बार मेरी वासना की संतुष्टि करती थी।
पुरानी बीती बातों में उलझा कर मैं आपका अधिक समय बर्बाद नहीं करते हुए आपको उस घटना का विवरण बताना चाहूँगा जो मेरे साथ तीन वर्ष पहले घटी थी।
तब मैं अपने पड़ोस में रहने वाली अपनी शिष्या रेश्मा के साथ सेक्स किया था, उस घटना के समय रेश्मा की उम्र १८ वर्ष थी और वह शाम सात बजे से आठ बजे के बीच में मुझसे विज्ञान पढ़ने के लिए मेरे घर पर आती थी।
रेश्मा की सुन्दरता और शरीर के बारे में कुछ भी कहने के लिए तो मेरे पास शब्द ही नहीं हैं, वह तो एक अप्सरा थी जिसके शरीर का पैमाना था 36-26-36 और जब वह चलती है तो मानो क़यामत आ जाती है। उसका रंग गोरा और चेहरा अंडाकार है तथा नैन नक्श बहुत ही तीखे हैं! ऐसा लगता है कि वह किसी प्रख्यात मूर्तिकार की एक उत्कृष्ट रचना है। आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | रेश्मा एक उच्च-माध्यमिक स्कूल मैं 10+2 के अंतिम वर्ष में पढ़ती थी और प्रथम तिमाही परीक्षा में विज्ञान के विषये में उसके अंक कम आने के कारण वह बहुत ही चिंतित रहती थी। उसने अपनी चिंता को अपनी माँ के द्वारा मेरी माँ के साथ साझा करी और मेरी माँ से अनुरोध किया कि वह मुझे कह कर रेश्मा को विज्ञान के विषय में पढ़ा दिया करूँ!
माँ ने रेश्मा की माँ की बात सुन कर उन्हें आश्वासन दे कर भेज दिया और सांझ के मेरे से इस बारे में सारी बात बताई! जब माँ ने मुझ पर रेश्मा को पढ़ाने के लिए दबाव डाला तब मुझे उनकी आज्ञा माननी पड़ी और मैंने उनसे कह दिया कि शाम को ऑफिस से वापिस आने के बाद सात बजे से आठ बजे के बीच में ही उसे पढ़ा पाऊंगा।
अगले दिन से माँ के बताये समय पर रेश्मा हमारे घर आई तो माँ उसे लेकर उपरी मंजिल में मेरे कमरे में ले कर आई और मुझसे परिचय कराया।
माँ के जाने के बाद मैंने रेश्मा से लगभग एक घंटे तक उसकी पढ़ाई और स्कूल के बारे में पूछताछ की तथा विज्ञान में उसे क्या आता है और क्या नहीं आता इसके बारे में जानकारी ली।
फिर अगले दिन मैंने उसे क्या पढ़ाना है उसके बारे में तैयारी करके आने के लिए कह कर घर भेज दिया।
उस दिन के बाद रेश्मा रोजाना शाम सात बजे मेरे कमरे में आ जाती और मुझसे आठ बजे तक पढ़ती और फिर अपने घर चली जाती।पहले दस दिन तक तो वह उस एक घंटे में वह मुझ से बहुत ही संकोच से बात करती थी लेकिन आहिस्ता आहिस्ता उसका संकोच दूर हो गया और वह मुझ से खुल कर बात करने लगी।
एक दिन उसने मुझे यह कह कर मेरा मोबाइल नंबर माँगा कि अगर वह किसी कारणवश किसी दिन पढ़ने के लिए आने को असमर्थ होगी तो वह मुझे पहले ही मेरे मोबाइल पर बता देगी।
मैंने उसकी बात को उपयुक्त समझते हुए उसे अपना नंबर दे दिया तो उसने मेरे मोबाइल पर मिस्ड-काल दे कर अपना नंबर मुझे दे दिया। आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | अगले दिन से रोजाना सुबह सुबह छह बजे मेरे फ़ोन पर उसके शुभ-प्रभात के और रात को दस बजे शुभ-रात्रि के सन्देश आने लगे, मैं भी उसे उन संदेशों क उत्तर शुभ-प्रभात तथा शुभ-रात्ति लिख कर भेज देता। धीरे-धीरे वह संदेशों के बदले मुझसे फ़ोन पर शुभ-प्रभात और शुभ-रात्रि कहने लगी और इस तरह हम दोनों की बातचीत का सिलसिला भी शुरू हो गया! पहले तो हम दोनों की सामान्य बातें ही होती थी लेकिन बाद में यह सामान्य बातें सेक्स की तरफ बढ़ने लगी। पढ़ाई के समय तो वह पूरा ध्यान लगा कर पढ़ती और कोई इधर उधर की बात नहीं करती लेकिन उसके घर पहुँचते ही हम दोनों देर रात तक अश्लील बातें करने लगते। जैसे मैं उसे कहता– मुझे तुम्हारा दूध पीने का मन हो रहा है!
तब वह कहती- ज़रूर पिलाऊंगी, लेकिन पहले तुम्हें मुझे अपना मक्खन खिलाना पड़ेगा!
कभी कभी वह कहती- मेरी शर्मगाह में बहुत आग लगी हुई है!
तब मैं उसे उत्तर दे देता- मैं अपनी नली को तुम्हारी शर्मगाह के अन्दर डाल कर उस आग को बुझा दूंगा!
कुछ ही दिनों के बाद रेश्मा ने अधिक अश्लील हो कर लिखा- तुम्हारा लंड कितना लम्बा है?
तब मैंने भी लिख दिया- मुझे उसे नापना नहीं आता, क्या तुम अपनी बिना दांतों वाले मुँह में डलवा कर उसे नाप दोगी?”
उसका जवाब आया- क्या तुम्हारे लंड ने अभी तक किसी चूत में डूबकी नहीं लगाई है?
मेरा उत्तर था- नहीं, अभी तक डुबकी नहीं लगाई है, अगर लगाई होती तो तुम्हें नाप ज़रूर बता देता!!
फिर उसने प्रश्न किया- तुम मेरी चूत में डुबकी कब लगाओगे, मुझे काफी दिनों से उसमें खुजली हो रही है!
उस समय मुझे आगे बात बढ़ाना ठीक नहीं लगा इसलिए मैंने कोई उत्तर नहीं दिया और फ़ोन काट दिया। उसकी बातों पर विचार करने के बाद मुझे विश्वास हो गया था कि आग दोनों तरफ लगी हुई है और रेश्मा मुझसे भी अधिक आतुर थी मेरे नीचे लेटने को ! आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | हम दोनों ही एक दूसरे में समाने के लिए बेताब हो रहे थे क्योंकि मेरे और उसके दिन अपना हाथ जगन्नाथ करते करते कट रहे थे! अक्सर सेक्स की बातें करते करते हम दोनों कब झड़ जाते पता ही नहीं चलता था।
करीब चार महीनों तक हम दोनों के बीच में ऐसे ही बातचीत चलती रहा क्योंकि हमें हम-बिस्तर होने के लिए कोई जगह नहीं मिल रही थी। रेश्मा को मेरा कमरा पढ़ाई का मंदिर लगता था और घर में दूसरी जगह सुरक्षित नहीं थी। रेश्मा की उम्र भी छोटी होने के कारण मैं उसे कहीं बाहर ले जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था!
कहते है कि किसी भी काम में देर हो सकती है परन्तु अंधेर नहीं हो सकता है, और यह भी कहते हैं कि जब मिलता है तो छप्पर फाड़ कर मिलता है। ऐसे ही कुछ दिन हमें भी मिल गए क्योंकि मेरे नाना जी को दिल का दौरा पड़ने से हस्पताल में भरती कर दिया गया! माँ और पापा को उनको देखने के लिए जाना पड़ा और चार दिनों के लिए मेरे घर अन्य कोई नहीं था।  रेश्मा तो मुझे डुबकी लगवाने के लिए पहले से ही बहुत आतुर थी इसलिए जब मैंने उसे बताया कि चार दिनों के लिए मेरे घर में कोई भी नहीं होगा तो वह ख़ुशी के मारे नाचने लगी।
हम दोनों द्वारा बनाई योजना के अनुसार रेश्मा ने अपने माँ से कह दिया कि अगले सप्ताह उसके कक्षा टेस्ट है इसलिए उनकी तैयारी करने के लिए उसे अगले चार दिन शाम छह बजे से आठ बजे तक पढ़ने के लिए जाना पड़ेगा।
और फिर रेश्मा ने माँ से अनुमति लेकर उसी दिन शाम छह बजे मेरे घर पहुँच गई।
रेश्मा को शायद हम-बिस्तर होने की अधिक जल्दी थी क्योंकि जब मैंने उसे पढ़ने के लिए ऊपर कमरे में चलने के लिए कहा तो वह मुँह बनाने लगी। आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |
मैंने उसे समझाया कि पहले पढ़ाई करेंगे और उसके बाद मौज-मस्ती ! अगर पहले मौज-मस्ती करेंगे तो फिर थकान के कारण पढ़ाई में मन नहीं लगेगा और कुछ समझ भी नहीं आएगा।

मेरी बात सुन कर वह मान गई और उपर के कमरे में पढ़ने के लिए चल पड़ी और एक घण्टे तक मुझसे हर रोज़ की तरह पढ़ी।  लगभग सात बजने वाले थे जब पढ़ाई समाप्त हुई तब वह मेरी ओर लालसा भरी नजरों से देखने लगी। मैंने उसकी आँखों से आने वाले संकेतों को पढ़ कर जैसे ही उसके उरोजों पर हाथ रखे तो उसने मेरे हाथों को झटक कर अलग कर दिए। आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |
मैंने विस्मय की दृष्टि से जब उसकी ओर देखा तो उसने कहा- यहाँ इस पढ़ाई के मंदिर में नहीं, कहीं और ले चलो, वहीं पर जो करना होगा वह करेंगे!
उसकी इच्छा का सम्मान करते हुए मैं उसे नीचे की मंजिल में माँ-पापा के बैडरूम में ले आया! उस कमरे में पहुँचते ही रेश्मा का रंग ढंग ही बदल गया और उसका चेहरा ख़ुशी से चमक उठा तथा मेरे साथ चिपक कर बैठ गई।
फिर उसने मेरे दोनों गालों पर अपने हाथ रख कर थोड़ा अपनी ओर खींचा और अपने दोनों होंठ मेरे होंठों पर रख दिए।  मैंने भी उसका साथ देते हुए उसे चूमने लगा और अगले पन्द्रह मिनट तक हम दोनों एक दूसरे से चिपके चुम्बनों का आदान प्रदान करते रहे। मैंने उसके होंठों के साथ साथ उसके माथे, आँखों, नाक, गालों, ठोड़ी और गर्दन को भी चूमा जिससे वह बहुत गर्म हो गई।  उसने मुझे अपने बाहुपाश में जकड़ कर जब मेरे चेहरे को चूम चूम कर गीला कर दिया तो मैं भी गर्म होने लगा, मेरे से रहा नहीं गया और मैं अपने दोनों हाथों से उसके उरोजों को दबाने लगा।
रेश्मा भी मेरा साथ देने लगी और मेरी सहूलियत के लिए उसने अपनी चुनरी हटा कर दूर फर्श पर फेंक दी!
कुछ देर उसके उरोज दबाने के बाद मैंने उसकी कुर्ती को थोड़ा ऊँचा किया तो रेश्मा तुरंत उसे भी उतार कर अपनी चुनरी के पास फर्श पर फेंक दिया!
अब उसके ऊपरी धड़ में सिर्फ एक सफ़ेद ब्रा में कैद थी और उसके गोरे उरोजों के रंग के सामने उसकी ब्रा का सफ़ेद रंग भी फीका लग रहा था। मैंने जब उसकी ब्रा के ऊपर से ही उसके उरोजों को पागलों की तरह दबाने और चूसने एवं चाटने की चेष्टा करने लगा तो रेश्मा ने कहा- ठहरो, इसे अपनी थूक से गीला मत करो, मैं इस भी उतार देती हूँ!
इतना कह कर रेश्मा ने दोनों हाथ पीछे करके अपनी ब्रा का हुक खोल दिया और ब्रा को उरोजों से अलग करते हुए चुनरी और कुरती के ऊपर फेंक दी।
उसके दृढ़ और उठे हुए उरोजों को देख कर मैं आपे से बाहर हो गया और उन रेशम से मुलायम उरोजों की चुचूक को अपने मुँह में ले कर चूसने लगा।
कुछ ही क्षणों में मैंने देखा कि रेश्मा आहें एवं सिसकारेश्माँ भरने लगी है और अपनी सलवार के ऊपर से ही अपनी शर्मगाह पर हाथ रख कर उसे दबाने लगी थी।
मुझे एहसास हो गया कि मेरे द्वारा उसके चुचूक चूसने से उसकी शर्मगाह के अन्दर खलबली होनी शुरू हो गई थी और वह उसे दबाने की कोशिश कर रही थी। मैंने रेश्मा से अलग होकर तुरंत उसे खड़ा किया और उसकी सलवार का नाड़ा खींच कर खोल दिया, उसकी खुली सलवार नीचे सरक कर फर्श गिर गई और अब वह मेरे सामने सिर्फ आधी गिठ कपड़े से बनी पैंटी में खड़ी थी। आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | मैं अपने को रोक नहीं पाया और मैंने उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसकी शर्मगाह पर जब हाथ फेरा तो उसे बहुत गीला पाया। उस गीलेपन को महसूस करते ही मैं उत्तेजित हो उठा और तब मैंने रेश्मा की पैंटी को नीचे की ओर खींच कर उसके पैरों में डाल दिया। अब रेश्मा मेरे सामने बिल्कुल नग्न खड़ी थी और अगले ही क्षण मैं उसके एक नग्न उरोज को चूस रहा था और अपने हाथों से उसके दूसरे उरोज और उसकी शर्मगाह को मसल भी रहा था।
मेरे चूसने और मसलने की क्रेश्मा से रेश्मा बहुत उत्तेजित हो उठी और उसने मेरे लोअर पर अपना हाथ फेर कर मेरे लंड को ढूंढने लगी! मैंने उसकी सहायता करी और उसके हाथ को पकड़ कर अपने लोअर के अंदर डाल दिया! मेरा लंड उसके हाथ में आते ही उसने लंड और टट्टों को जोर से मसलने लगी और उत्तेजना की वृद्धि के कारण बहुत ही जोर से आहें एवं सिसकारेश्माँ भरने लगी!
मैं उससे अलग हो कर उसकी चूत को चूसने की सोच ही रहा था तभी उसने मुझे अपने से अलग किया और मेरे कपड़े उतारने शुरू कर दिया। मैंने भी उसकी सहायता की और शीघ्र ही हम दोनों एक दूसरे के सामने नग्न खड़े थे।
रेश्मा ने मुझे ऊपर से नीचे देखा और मेरे लंड को देखते ही अपने दोनों हाथों से अपने खुले मुँह को ढकते हुए बोली- हाय माँ, इतना बड़ा लंड है तुंम्हारा ! अगर तुम इसे मेरी चूत के अन्दर डालोगे तो वह तो ज़रूर फट जायेगी और मैं दर्द के मारे चीखते चिल्लाते मर जाऊँगी!
मैंने पूछा- तुम कैसे कहती हो कि यह बहुत बड़ा है?
उसने कहा- इतना लम्बा और मोटा है, मैंने तो पहले कभी ऐसा लंड देखा ही नहीं है!
मैंने कहा- ऐसे ही बोले जा रही हो, पहले इसे नाप कर तो देख लो, यह ज्यादा बड़ा नहीं है!
मेरी बात सुन कर रेश्मा ने मेरे लंड को पकड़ा और उसे उलट पलट कर देखने लगी और फिर बोली- लम्बाई में तो यह लगभग छह से सात इंच के बीच में होगा लेकिन मुझे इसकी मोटाई बहुत ज्यादा लग रही है! मुझे डर लग रहा है कि इसकी मोटाई तो मेरी चूत को बुरी तरह फाड़ कर रख देगी और उसे सिलवाने के लिए किसी डॉक्टर के पास ही जाना पड़ेगा!
रेश्मा की बात सुन कर मैंने अपनी हंसी पर नियंत्रण कर के बोला- ठीक है, तो फिर हम आगे कुछ नहीं करते! तुम अपने कपड़े पहन लो और मैं तुम्हें थोड़ी देर और पढ़ा देता हूँ!
मेरी बात सुन कर चुप हो गई और आगे बढ़ कर मुझसे चिपक कर बोली- नहीं, अब आगे जो करना है वह करो! जो होना होगा वह देखा जाएगा! उसकी बात सुन कर मैंने उसे उठाया और बिस्तर पर लिटा दिया! फिर मैंने उसकी टाँगे चौड़ी करी और उसकी चूत पर अपना मुँह रख कर उसे चाटने लगा। तभी रेश्मा मेरे लंड को खींचने लगी और अपना मुँह खोल कर मुझे इशारे से उसे चुसवाने के लिए कहने लगी। आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | तब मैंने 69 की स्तिथि बनाई और अपनी टांगों के बीच उसका सिर करके उसके मुँह में अपना लंड दे दिया।
मैंने अभी रेश्मा की चूत को पांच मिनट के लिए ही चाटा था कि वह आईई… आईई… करके चिल्लाई और अपने शरीर को अकड़ाते हुए अपने कूल्हों को ऊँचा उठा कर मेरे मुँह में अपना पानी छोड़ दिया।
जब उसका थोड़ा नमकीन और थोड़ा खट्टा पानी मुझे अच्छा लगा तब मैंने सारा का सारा चाट लिया। इसके बाद अगले नौ मिनट में रेश्मा ने इसी तरह हर तीन मिनट के बाद अपना पानी छोड़ा जिसे मैं चाटता रहा।
वह आह.. आह… आह… आह… की सिसकारेश्माँ निकाल रही थी और मुझसे बार बार लंड को उसकी चूत के अन्दर डालने के लिये आग्रह कर रही थी।
मुझे चुदाई का अनुभव नहीं होने के कारण वह उसे होने वाले दर्द और दिक्कत से डर भी रही थी। मैंने उसे समझाया कि मुझे जो कुछ भी ब्लू फ्लिम्स देखने तथा दोस्तों से पता चला था उसके अनुसार करने से उसे कोई भी दिक्कत नहीं होने दूंगा।
मेरे द्वारा उसके भगांकुर पर जीभ से चाटने से बहुत ही गर्म हो गई थी इसलिए उसने कह दिया- तुम चुदाई शुरू तो करो, जो भी होगा मैं सह लूंगी!
रेश्मा ने मेरे लंड को लौलीपॉप की तरह चूस कर मुझे बहुत ही अधित उत्तेजित कर दिया था जिसके कारण मुझे बहुत मुश्किल हो रही थी। मेरा लंड उत्तेजना में फूलता जा रहा था और ऐसा लगता था कि वह फटने जा रहा था इसलिए मैंने अपने लंड को उसके मुँह से बाहर निकाल लिया, फिर सीधा होकर उसकी टांगों के बीच में बैठ गया और पहले उसकी चूत में खूब सारी थूक लगा कर उसमें एक उंगली डाली!
उसकी चूत उत्तेजना के कारण बहुत कसी हुई थी और उंगली अन्दर जाते ही वह दर्द से कराहने लगी।
मैंने उसका ध्यान बंटाने के लिए उसके चूचे भी दबाने लगा तो वह आह… आह… ऊह… ऊह… जैसी सेक्सी आवाजें निकालने लगी। वह बार बार लंड को चूत में डालने के लिए कहने लगी तब मैंने देर न करते हुए पहले से ही लाये हुए कंडोम को अपने लंड पर चढ़ा लिया, फिर अपने लंड को उसकी चूत के होंठों के बीच में रख कर उसे अन्दर घुसाने की कोशिश करने लगा लेकिन उसकी चूत बहुत कसी हुई थी।
मैंने उसकी चूत पर अपने लंड को पकड़ कर थोड़ा जोर लगा कर लंड को दबाया तो ‘फक्क’ की आवाज करते हुए उसका सुपारा अन्दर घुस गया। चूत के अन्दर सुपारे के जाते ही वह चिल्लाई- आहह… हाईई… मर गई, प्लीज मुझे छोड़ दो, बहुत दर्द हो रहा है!
वह जोर जोर से चिल्लाते हुए दर्द से छटपटाने लगी तब मैंने उसे कस के जकड़ लिया और साथ में उसके होंठों को चूमने लगा और उसकी चूचियों को भी दबाने लगा!
जब वो थोड़ी देर में सामान्य हो गई तब मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ जोर से दबा कर उसकी जीभ अपने मुँह में ले ली और नीचे से अपने लंड को धीरे धीरे अन्दर बाहर करना शुरू दिया!
कुछ देर के बाद जब उसे आनन्द आने लगा मैंने एक धक्का मारा और तीन इंच से ज्यादा लंड उसकी चूत के अन्दर घुसा दिया। आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | वह एक बार फिर दर्द से बुरी तरह छटपटाने लगी लेकिन उसकी जीभ मेरे मुँह में थी और मेरे होठों से उसके होंठ बंद होने की कारण उसकी आवाज नहीं निकल पाई। मैंने भी उसे पूरी तरह से अपने नीचे जकड़ा हुआ था जिससे वह हिल भी नहीं पा रही थी। उसकी चूत से खून निकलने लगा था क्योंकि उसकी झिल्ली फट चुकी थी।
मैं अगले पांच मिनट तक उसे इसी तरह चूमता रहा और उसकी चूचियाँ भी दबाता रहा। जब उसे कुछ ठीक महसूस होने लगा तब मैं उसके चुचूकों को अपनी उँगलियों से रगड़ने लगा जिससे उसकी उत्तेजना बढ़ गई और उसे दर्द भी काफी कम महसूस होने लगा था।
तब मैं आहिस्ता आहिस्ता हिलने लगा और अपने लंड को उसकी चूत के अन्दर बाहर करने लगा जिससे रेश्मा को आनन्द आने लगा था। वह उस आनन्द अनुभूति में बह गई और उसने मुझे आगे करने का इशारा कर दिया, तब मैंने उसे थोड़ा ढीला छोड़ा और अपने लंड को आगे पीछे करते हुए धीरे धीरे उसे पूरा अन्दर तक घुसा दिया।
अब रेश्मा की चूत में मेरा साढ़े छह इंच का लंड पूरा घुस कर अन्दर बाहर हो रहा था।
रेश्मा अब आह… आह… उह… उह… आह… आउच… आह मर गई… आह… ऒह… की सिसकारेश्माँ भरने लगी थी। साथ में वह अपनी कूल्हे उठा उठा कर चुदाई के लिए मेरा साथ देने लगी थी। हम दोनों के आनन्द में जब कुछ वृद्धि हुई तभी उसके कहने पर मैंने लंड को तेजी से उसकी चूत के अन्दर बाहर करने लगा। तेज़ चुदाई करते हुए मुझे अभी दो से तीन मिनट ही हुए थे कि रेश्मा जोर से आईई… करके चिल्लाई और टाँगें भींच कर थोड़ा सा अकड़ते हुए अपना पानी छोड़ दिया। आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | उस पानी से चूत के अन्दर फिसलन हो गई थी और उसमे मेरा लंड बहुत ही तेज़ी से अन्दर बाहर होने लगा जिससे कमरे में फच फच की आवाज़ भी गूंजने लगी! इस फच फच को अभी दो से तीन मिनट ही हुए थे कि रेश्मा एक बार फिर आईई… करके चिल्लाई और बहुत जोर से टाँगों को भींचते हुए उसका पूरा शरीर अकड़ गया और उसकी चूत सिकुड़ गई तथा मेरे लंड को जकड़ लिया! मैं फिर भी हिलता रहा जिससे हम दोनों को जो रगड़ लगी उसके कारण हम दोनों एक साथ ही झड़ गए।
रेश्मा उस अकड़न और खिंचावट होने के बाद एकदम निढाल सी बिस्तर पर लेटी रही और मैं भी थक कर निढाल सा उससे चिपक कर उसके ऊपर ही लेट गया। हम दोनों की साँसें हमारे काबू में नहीं थी हम बुरी तरह हांफ रहे थे। थोड़ी देर बाद जब मेरी सांस में सांस आई तब मैं उसके ऊपर से उठा तो देखा की उठने की चेष्ठा करने पर भी उससे उठा नहीं जा रहा था।
तब मैंने उसे गोदी में उठाया और अपने साथ ही बाथरूम लेकर जा कर उसकी चूत तथा अपना लंड साफ़ किया!
जब हम वापिस बैडरूम आने लगे तब रेश्मा से ठीक से चला नहीं जा रहा था इसलिए मैं उसे सहारा देकर बिस्तर तक लेकर आया! बिस्तर पर बिछी चादर पर जब उसने खून देखा तो वो थोड़ा घबरा गई और उसके चेहरे पर हवाइयाँ उड़ने लगी!
तब मैंने उसे समझाया कि यह सिर्फ पहली बार ही होता है अब अगली बार जब करेंगे तब खून नहीं आएगा! मेरी बात सुन कर वह कुछ आश्वस्त दिखाई दी और कपड़े पहन कर घर जाने को तैयार हो गई!
मैं रेश्मा को जब उसके घर तक छोड़ने गया तब रास्ते में उसे परामर्श दिया कि चूत की दर्द को दूर करने के लिए वह सोने से पहले उसको गर्म पाने से सेक कर लेगी तो हम कल फिर डुबकी लगा सकते हैं!
रेश्मा को छोड़ कर वापिस आने के बाद मैंने बिस्तर की चादर को धोकर सुखाने के लिये डाल दिया और नई साफ़ चादर बिस्तर पर बिछा दी और खाना खाकर सो गया!
अगले दिन रेश्मा साढ़े पांच बजे ही मेरे घर आ गई और कहा कि मैं उसे ‘जल्दी से पढ़ाई करा दूँ क्योंकि उसने मेरे लंड को डुबकी लगवानी है!’
मैं भी यही चाहता था इस लिये आधे घंटे में उसे पढ़ा कर हम नीचे वाले बैडरूम आ गए और एक दूसरे को नंगा करके 69 की स्थिति में एक दूसरे को चूस एवं चाट कर उत्तेजित कर दिया। उत्तेजित होने के बाद रेश्मा को बहुत ही जल्दी थी इसलिए वह बिना प्रतीक्षा करे मेरे ऊपर चढ़ कर बैठ गई और मेरा लंड अपनी चूत में डाल कर उछल उछल कर चुदना शुरू कर दिया।
अगले पन्द्रह मिनट में उसने तीन बार अपना पानी छोड़ा और फिर मेरे नीचे आकर लेट गई और मुझे उसे चोदने के लिए कहा। मैं इसके लिए तैयार था इसलिए बिना समय गवाएं मैंने उसकी चुदाई शुरू कर दी और पांच मिनट में ही उसे चरम-सीमा पर पहुँचा दिया! पिछले दिन की तरह उसने चिल्लाते हुए शरीर के अकड़ाया, चूत को सिकोड़ा और मेरे साथ ही झड़ गई! फिर मैं उसी तरह अपने लंड को उसकी चूत में डाले ही उसके साथ कर चिपट कर लेट गया।
थोड़ी देर आराम करने के बाद हमने एक दूसरे को दुबारा तैयार किया और चुदाई शुरू कर दी।
इस बार मेरा आधा घंटे बाद झड़ा और तब तक वह चार बार झड़ गई! उसके बाद हमने बाथरूम में जाकर एक दूसरे को साफ़ किया और तारो ताज़ा हो अपने कपड़े पहन कर दोनों ने मिल कर बैडरूम को ठीक किया! दोस्तों आपलोगों की कहानिया मै रोज मस्तराम डॉट नेट पर पढता हु और आज मैंने भी अपनी कहानी लिख डाली फिर दोस्तों आगे अभी ढेर सारी लडकियों को चोद चूका हु मैंने करीब १७ लडकियों की सील तोड़ी है वो सब कहानिया लिख के बताऊंगा तब तक इन्तेजार करते रहिये और पढ़ते रहिये मस्तराम डॉट नेट मस्त रहिये | समाप्त

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बाप बनने की चाहत में अपनी पत्नी को चुदवाया https://sexkahani.net/%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%aa-%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%a4-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%85%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%aa/ https://sexkahani.net/%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%aa-%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%a4-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%85%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%aa/#comments Wed, 24 May 2017 10:00:00 +0000 https://sexkahani.net/?p=11451 नमस्कार दोस्तों में समीर गुप्ता आगरा से हूँ यह मेरी मस्तराम डॉट नेट पर पहली कहानी है।यह एक सत्य घटना पर आधारित है जो मेरे साथ हुयी ।में  आप लोगो को अपने बारे में थोड़ी जानकारी दे दूँ ।मेरी लम्बाई 5 फ़ीट 3 इंच है और मेरी उम्र 22 साल है। दिखने में गोरा हूँ और लण्ड की लम्बाई 6 इंच है ।अब में आपको कहानी की और लेकर चलता हूँ।यह बात अभी मार्च की है। मेरी फेसबुक पर  एक अंकल मेरे साथ जुड़े  हुए थे एक दिन उनका मेसेज आया- फिर हम लोगो  की  रोज बात होने लगी थी वो गुजरात से थे उनके घर में वो दो लोग ही थे अंकल और आंटी ।
अंकल ने अपनी उम्र 45और आंटी की उम्र 38 साल बताई एक दिन मेने उनसे पूछा अंकल आपके बच्चे नहीं है तो उन्होंने कहा नहीं ।फिर उन्होने खुद ही मुझे पूरी बात बताई – मैं बहुत दुखी हूँ सेक्स की परेशानी को लेकर, बहुत इलाज करवाया पर डॉक्टर कहते हैं कि मैं बाप नहीं बन सकता यह कहकर वो रोने लगे ।  फिर उन्होंने मुझसे कहा क्या आप मेरी मदद कर सकते है ।मेने कहा जी कहिये में आपकी क्या मदद् कर सकता हूँ ।उन्होंने कहा -क्या आप मेरी पत्नी के साथ सम्भोग करके मुझे बाप बनने का सुख दे सकते हो में आपका यह एहसान कभी नहीं भूलूंगा अगर आप चाहो तो में आपको इसके बदले में पैसे भी दे सकता हूँ।

मेने कहा अगर आपकी पत्नी को कोई परेशानी न हो तो में तैयार हूँ।मेरी बात सुन कर वो बहुत खुश हुए उन्होंने कहा मेरी पत्नी तो तैयार है फिर मेने आंटी से भी बात की।। फिर अंकल ने कहा में और मेरी पत्नी एक हफ्ते बाद देल्ही आ रहे है और आपको यह काम वही करना है मेने कहा नही में यह काम वहां नही आगरा में करूँगा वो अपने किसी काम से डेल्ही आ रहे थे ।मेने कहा आप अपनी पत्नी को आगरा में छोड़ जाना और आप अपना काम डेल्ही में कर लेना वो राजी हो गया।फिर उसने मुझसे मेरा wharsapp नंबर लिया ।फिर हमारी बात whatsapp पर होने लगी ।वही उसने मुझे अपनी पत्नी की फोटोज दिखाई और उसकी पत्नी ने भी मेरी फ़ोटो देखी उसने मुझे अपने सेक्स की 2 वीडियो बनाकर की भेजी ।ऐसे ही 1 हफ्ता गुजर गया और जैसे ही वो डेल्ही आये उन्होंने मुझे कॉल किया मेने कहा आप आगरा आ जाओ शाम को 9 बजे वो आगरा आ गए  आगरा आते ही उसने मुझे कॉल किया मेने उसे एक होटल का नाम बताया वो हॉटेल मेरे एक दोस्त का था मेने कहा आप उसमे एक रूम ले लो में सुबह वहां पहुँच जाऊंगा।उसने कहा ठीक है ।सुबह 10 बजे में वहां पहुच गया और में उन अंकल आंटी से मिला अंकल ने मुझसे कहा ये तुम्हारे साथ यहाँ 6 दिन तक रहेंगी तुम अपना काम अच्छे से करना 6 दिन काफी है ।इस काम के लिए ।फिर अंकल कहने लगे अब में डेल्ही जा रहा हूँ और 6 दिन बाद वापस आऊंगा ।फिर अंकल वहां से रवाना हो गए।
फिर मेने कमरे का दरवाजा बंद कर लिया और आंटी के पास जाकर बैठ गया आंटी ने साडी पहनी थी, में आंटी से बात करने लगा  मैंने आंटी  की जांघ पर हाथ रख दिया, और में उनसे बाते करते जा रहा था और उनकी साडी के ऊपर से ही उनकी जांघ  को सहलाने लगा  | आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |
मेने आंटी से कहा आंटी में आपको सेक्स का पूरा मज़ा दूंगा और आपको मेरा पूरा साथ देना होगा।आंटी ने हां में सर हिलाया। यह कहते ही आंटी ने मुझे बाहों में भर लिया और फिर  हमारे मुँह जुड़ गये कभी उनकी जीभ मेरे मुँह में जाती तो कभी मेरी जीभ उनके मुँह में!

इसके साथ ही उनके हाथ मेरी बेल्ट पर पड़े, उसने मेरी बेल्ट खोल दी और पेंट के हुक खोलने की कोशिश कर रही थी। मैंने उन्हें थोड़ा सा पीछे किया और पैंट उतार दी और साथ ही उसकी साडी भी उतार दी।
सफेद ब्रा में कसे हुए उसके स्तन एकदम गोरे  मस्त लग रहे थे उनके स्तन बहुत बड़े थे , उन्हें देखते ही मुझे नशा हो गया, मैंने उसके स्तनों को ब्रा के ऊपर से ही दबाना शुरू कर दिया और ऐसे ही लिपटे हुए हम दोनो पलंग तक पहुँचे।

पलंग पर पहले हम दोनों बैठे और फिर ऐसे ही लिपटे हुए हम लेट गये, उसका सिर मेरी बाँईं बाँह पर था और दाँये हाथ से मैं उसका स्तन चूस रहा था।
मेरे होंठ उसके चेहरे पर घूम रहे थे, कभी मैं उसके होंठ चूस रहा था तो कभी उसके गाल और कभी उसकी गर्दन पर जीभ से चाट रहा था।
मेरी इन हरकतों से वो पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी।
अचानक वो एक झटके से उठी और मुझे नीचे गिरा कर मुझ पर सवार हो गई, मेरी जांघों पर बैठ कर मेरी शर्ट के बटन खोलने लगी।मैंने उसे हटाया और अपनी शर्ट और बनियान उतार दी।

मैंने जल्दी से उसकी ब्रा की हुकें भी खोल दीं।
अब मेरे शरीर पर अंडरवियर था और उसके शरीर पर केवल पैंटी उनके निप्पल की घुंडी एकदम कड़ी थी और उसने निचे काला गोला बना था। आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

इतने सुंदर स्तन ! उन्हें देखकर मेरे मुह में पानी आ गया।
मैं ज़्यादा देर ना करते हुए उसके बाँयें स्तन को मुँह में भर लिया और चूसने लगा और दाँयें स्तन को अपने हाथ से दबाने लगा और कभी उनके निप्पल को उंगली और अंगूठे में लेकर मसलता आंटी  से अपनी उत्तेजना बर्दाश्त नहीं हो पा रही थी, वो मुझे पकड़ कर अपने ऊपर खींच रही थी, एक हाथ मेरे बालों में फेर रही थी और दूसरा हाथ मेरे अंडरवियर में घुसा कर कभी मेरे चूतड़ों को  तो कभी मेरे लण्ड को मसल रही थी, मुझे अपनी तरफ पूरे ज़ोर से खींच रही थी।

मैं समझ गया कि आंटी की चूत लण्ड लेने के लिए तड़फ रही है फिर मेने  उनकी पेंटी उतार दी और अपना अंडरवियर भी उतार दिया।

मेने फिर से आंटी के  दोनों स्तनों को बारी बारी से चूसना शुरू कर दिया और फिर धीरे धीरे मैं छाती कमर और पेट को कभी चूसता और कभी हल्के दाँतों से काट लेता।
इसी तरह से मैं उसकी जांघों तक पहुँच गया।

आंटी के  मुँह से आआअह्ह ह्ह्ह्ह… सीईई ईईईई… की आवाज़ निकल रही थी।

अब मैंने अपनी जगह बदल दी और उसके पैरों की तरफ आ गया।
वो बेड पर लेटी हुई थी, उनको घुटनों से पकड़ कर मैंने बेड से नीचे की ओर खींचा तो वो भी नीचे को सरक गई।
मैं फर्श पर घुटनों के बल बैठ गया और उसकी पिंडलियों से चाटना शुरू कर दिया और बारी बारी से दोनों पिंडलियों से चाटता हुआ ऊपर जांघों की ओर बढ़ा और मैं उसकी जांघों को कभी बहुत प्यार से और कभी एकदम से जीभ को सख़्त करते हुए चाट रहा था  ।वो बहुत गर्म हो चुकी थी, तड़प रही थी, कहने लगी- अब चोदिये ना मुझे

मैंने कहा- रुको अभी  आओ 69 करते हैं।

वो कहने लगी- नहीं, अभी तुम मेरी चूत चोदो बस !

पर मैंने माना नहीं, वो मेरे लण्ड को चूसने लगी और मैं उसकी चूत को चाटने लगा। क्या मादक खुशबू थी उसकी चूत की ! नशा सा होने लगा मुझे उसकी चूत की खुसबू से ! आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

बाल भी नहीं थे उसकी चूत पर ! शायद मेरे लिए ही साफ़ किये थे हम दोनों एक दूसरे की चूत और लण्ड चुसाई करते रहे। 5 मिनट के बाद ही आंटी के पैर थरथराने लगे, उसने मुझे जोर से अपनी चूत पर दबा दिया और अपना पानी निकाल दिया। मेने आंटी का पानी उनकी पैंटी से साफ़ कर दिया।

अब वो शांत हो गई थी  अब हम दोनों थोड़ी देर एक दूसरे की बाहो में ऐसे ही लेते रहे ,में फिर से आंटी के स्तन को हाथ से दबाने लगा में एक हाथ से आंटी के स्तन को दबा रहा था और एक हाथ से आंटी की चूत में उंगली अंदर भाहर कर रहा था और आंटी भी अपने हाथ से मेरे लण्ड को सहला रही थी । अब मैं फिर से आंटी की चूत को चाटने लगा आंटी फिर से गरम होने लगी में उनकी चूत को चाट रहा था और उनके स्तन भी दबा रहा था थोड़ी देर बाद आंटी मेरे  लण्ड को मुह में लेकर चूसने लगी उनकी चुसाई से मेरा लण्ड फिर से तैयार हो गया अब मेने आंटी को सीधा लिटाया और उनकी  चूत  पर अपना लण्ड सेट किया और एक जोर का झटका दिया एक ही झटके में उनकी चूत मेरे पूरे लण्ड को निगल गयी आंटी थोड़ी कसमसाई पर लण्ड अन्दर पूरा उनकी चूत में फच की आवाज के साथ घुस गया।अब में धीरे धीरे दक्के लगाने लगा  पर मेरा मुँह उसकी छातियों में घुस गया और मैंने उसके बाँये स्तन को मुँह में भर लिया, कभी तो उसे पूरे ज़ोर से चूसता और कभी उसके निप्पल को अपनी ज़ुबान से छेड़ता, कभी उसके निप्पल को होंठ और दाँत से हल्का हल्का काटता।वो आहे भर रही थी आआह्ह आआह्ह्ह आआअह्हह्हह आअह्ह्ह

मैंने एक हाथ उनके चूतड़ के नीचे डाला और दूसरे से उसके सिर के बालों को सहलाने लगा
अब उसने नीचे से ज़ोर लगाना शुरू कर दिया, मैंने भी अपनी धक्के मारने की गति को थोड़ा सा बढ़ाया पर मैं बीच की गति से लेकिन गहरे धक्के लगा रहा था, साथ ही मैं उसके मुँह में अपनी जीभ घुमा रहा था और साथ ही अपने बाँये हाथ से उसके दाहिने निप्पल को मसल रहा था। आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |
मैं जैसे ही उसके निप्पल को मसलता तो वो आह्ह्ह करती

इधर मेरे धक्कों की गति बढ़नी शुरू हो गई थी पर फिर भी स्पीड बहुत तेज़ नहीं थी, उनकी  आँखें बंद थीं और वो नीचे से पूरा ज़ोर लगा रही थी।फिर वो तुरंत मेरे ऊपर आ गई, ऊपर आकर उसने अपने आपको सेट किया और फिर मेरे उसकी चिकनाई से सने हुए लिंग को पकड़ कर सेट किया और उसके ऊपर बैठती चली गई, मेरा लिंग भी उसकी योनि में सटाक से घुस गया
जैसे ही मेरा लिंग उसके अंदर गया उसके मुँह से बहुत ही सेक्सी आवाज़ निकली आआआ आआअह्ह्ह ह्ह्ह्ह ह्ह्ह्ह्ह ओह्ह ह्ह्ह उफ्फ्फ्फ्फ्फ आआअह्ह्ह्ह

अब वो मेरे ऊपर हिल रही थी तो उनके स्तन हिलते हुए बहुत मनमोहक लग रहे थे। मेने लपक कर उनके स्तन अपने मुँह मे ले लिए और उनको चूसने लगा।

जितने ज़ोर से मैं उनका स्तन चूस रहा था, उतनी उनकी उत्तेजना अधिक बढ़ रही थी, और उनकी  ऊपर नीचे होने की गति तेज हो गयी। आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |
अब मेंने उनका दाँया स्तन मुँह में भर लिया और बाँये स्तन को मैंने मुठ्ठी में भर कर दबाना शुरू कर दिया, मैं कभी तो उसके स्तन को पूरा मुठ्ठी में भर कर दबा रहा था ।
अब वो मेरे ऊपर से उतर कर बेड पर  गाण्ड को  मेरी तरफ करके कुतिया की तरह हो गई। मैं समझ गया.. मैंने पीछे से अपना लंड उसकी चूत में पेल दिया और धक्के लगाने लगा। वो ‘उईईए.. आईईई.. हईईईई..’ करने लगी और अपनी चूत मेरे लंड पर जोर-जोर से मारने लगी।मेने आंटी की कमर को पकड़ा और उनकी चूत में लण्ड को जोर जोर से पेलने लगा आंटी नशे में बड़बड़ाने लगी आआह्ह्ह्ह आःह्ह्ह ह्म्म्म ऐसे ही बहुत मज़ा आ रहा है चोदों हां उफ्फ्फ्फ्फ़ थोड़ी देर बाद

अब हम दोनों बिस्तर से नीचे आ गए। मैंने उसकी एक टांग को बिस्तर पर टिका दिया और एक नीचे ही रहने दी। फिर मैंने उसके पीछे खड़े होकर उसकी चूत में लंड पेल दिया और उन्हें चोदने लगा अब आंटी के लड़खड़ाने लगे वो काँपने लगी फिर मेने उन्हें बिस्तर पर लिटाया और में उनके ऊपर चढ़ गया और उनकी चूत को चोदने लगा आंटी ने अपनी दोनों टाँगे मेरी कमर से लपेट ली थी और अपने दोनों हाथ से मेरी पीठ को सहला रही थी आंटी पागल हुए जा रही थी वो अब मेरी पीठ पर नाखून गड़ा रही थी और नीचे से अपने चूतड़ उछाल रही थी उन्होंने मुझे अपनी बाहो में बहुत तेज जकड लिया और मेरे मुँह पर इधर उधर किस करने लगी में समझ गया की आंटी झड़ने वाली है तभी आंटी का शशीर अकड़ने लगा और आंटी का पानी निकल गया आंटी ने मुझे ढीला छोड़ दिया अब में भी जड़ने वाला था सो मेने आंटी के कंधो को कस कर पकड़ा और अपनी पूरी ताकत से उनकी चूत को चोदने लगा जब लण्ड उनकी चूत में अंदर जाता तो मेरे टट्टे उनकी चूत पर जाकर लगते उसकी आवाज आती पट पट पट और उनकी चूत ने पानी छोड़ दिया था उसकी भी आवाज आती फच फच फच  5 या 6 झटके देने के बाद मेने अपना पूरा माल आंटी की चूत में गिरा दिया और 5 मिनट तक उनके ऊपर पड़ा हांफता रहा अब में उनके ऊपर से उतर कर उनकी बगल में लेट गया।आंटी समझदार थी उन्होंने अपनी दोनों टाँगे ऊपर कर ली और लेती रही (ऐसा करने से वीर्य बच्चेदानी में पूरा चला जाता है और वीर्य भाहर नही निकलता इससे गर्भ ठहरने में सहायता मिलती है।) आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

दोस्तों ये मेरी पहली कहानी है अगर मुझे आप लोगो का प्यार मिलेगा तो में आगे भी आपको अपने जीवन की सत्य घटना बताता रहूँगा।
मुझे आपके प्यार का इंतजार रहेगा।मुझे मेल करके बताइये आप लोगो को मेरी ये कहानी पसंद आई या नही ।
मेरी मेल ID है ये- guptasameer453@gmail.com  और यही मेरी फेसबुक ID है। आप मुझसे FB पर जुड़ सकते है।

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बीवी की प्रेगनेंसी में सास ने चुदवाया https://sexkahani.net/%e0%a4%ac%e0%a5%80%e0%a4%b5%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%97%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a4%be/ Wed, 24 May 2017 06:00:31 +0000 https://sexkahani.net/?p=11446 मेरे ससुर जी तो मेरी शादी के पहले से ही मर गए थे. ससुराल में सिर्फ मेरी सासू माँ और मेरा एक साला हे. मेरी वाइफ जब प्रेग्नंट थी तब की ये बात हे. वाइफ अपने मइके में डिलीवरी के लिए गई थी और मैं भी उसे मिलने के लिए वहां गया था. वाइफ ने कहा कुछ दिन रुक जाओ तो मैं रुक गया. पहले कुछ दिन तो सास के साथ कुछ नहीं हुआ. बस मैंने उनको न्यूड नहाते हुए बाथरूम के अन्दर देख लिया. सासू माँ का फिगर बड़ा ही सेक्सी था किसी जवान औरत के जैसा ही. पेट भी स्लिम था गांड और बूब्स के मुकाबले में. वो मच्योर पर बड़ी हॉट हे. सास ने भी मुझे देख लिया था की मैं उन्हें नहाते हुए छिप के देख रहा था. वो बहार आई तो मुझे साइड में ले जा के डांटा उन्होंने!

मैंने अपनी सास को बताया की मीनल (मेरी वाइफ) प्रेग्नंट हे इसलिए किसी के साथ रिलेशन नहीं बनाये हे. फिर मैंने अपनी सास को सोरी कहा. मेरी वाइफ को मैंने कहा की मैं छत के ऊपर सो जाता हूँ गर्मी थी इसलिए. रात को लगा की कोई मुझे टच कर रहा हे. मैंने धीमे से आँख खोल के देखा तो मेरी सास ही थी. मैंने कुछ भी रिएक्ट नहीं किया. थोड़ी ही देर बाद मेरी सास का हाथ मेरे लंड के ऊपर था. तब मैंने एकदम से उनका हाथ पकड़ लिया और कहा मम्मी ये क्या कर रही हो आप? फिर मैं कुछ करूँगा तो आप मुझे डांटेंगी. मुझे तो उन्होंने कहा की मैं ये सब अपनी बेटी की लाइफ के लिए ही कर रही हूँ ताकि कोई और गलत काम ना करूँ तुम. और तुम्हे ऐसे प्यासा देख के मैं भी अपने ऊपर कंट्रोल नहीं कर पाई!

तो मैंने उनको गले से लगा लिया तब उन्होंने मुझसे कहा की साहिल मैं आज अपना सब कुछ तुम्हे दे रही हु उसके बदले में मुझे एक चीज दे देना. तो मैंने पूछा की क्या? तो वो बोली की कभी किसी और अनजान के साथ सेक्सुअल रिलेशन मत बनाना!

तो मैंने हां कह दिया. फिर मैंने उन्हें कहा की आप दिल से करो तो ही करना हे नहीं तो मुझे कोई शौक नहीं हे. तो वो कहने लगी की दिल से ही कर रही हूँ ना इसलिए तो मैंने सामने से पहल की इस संभोग के लिए! तो मैंने कहा फिर कपडे उतारने में भी पहल करो मम्मी जी. तो इतना सुनते ही वो हंसने लगी और मेरी बेड से उठकर उसने अपने कपडे उतारना चालु कर दिया. उसके ऊपर चाँद की लाईट पड़ रही थी और वो बड़ी ही सेक्सी लग रही थी. उन्होंने अपनी ब्रा और पेंटी पहनी ही नहीं थी इसलिए सलवार और टॉप के खुलते ही वो 100% नंगी थी! मच्योर लेडी बड़ी ही सेक्सी होती हे उसका अहसास मुझे आज अपनी इस सेक्सी सास को देख के हुआ. फिर मेरे पास आकार किस दे दी उसने. मैंने कहा मेरे कपडे भी आप ही उतारो मम्मी जी. फिर उन्होंने ही वैसा किया और मेरी निकर उतार दी.

फिर मैने अपने लंड उन्के हाथ में दे दिया और उनको कहा की इसे सक करो. लेकिन उन्होंने मना कर दिया तो मैंने जब जोर डाला तो वो 69 पोजीशन में आने के लिए कहने लगी. फिर हमने इस पोजीशन में आके सकिंग चालु की और फिर मैंने उनको सीधे लिटाकर बूब्स चाटने शरु किये. तब तक उनकी चूत भी गीली हो चुकी थी और वो लंड लेने के लिए तडप रही थी.

फिर मैंने अपना लंड उनकी चूत में डाला तो वो कहने लगी की ये फिलिंग तो मैं भूल ही गई थी और फिर उन्होंने मुझे गले से लगा के थेंक्स कहा. इतना सुनते ही मेरी स्पीड और बाधा दी मैंने और लगातार 10 मिनिट चोदता रहा. फिर उन्होंने कहा की उनका पानी निकलने वाला हे. लेकिन मैंने कहा मुझे अभी टाइम लगेगा तो वो कहने लगी की तुम एक बार होने दो हम कुछ देर बाद फिर अलग तरह से करेंगे! तो मैं मान गया. और उन्होंने अपना पानी निकाल दिया.

कुछ देर तक हम वैसे ही सोये रहे क्यूंकि उनका पानी निकल चूका था तो मैंने उन्हें कहा की अब क्या मूड हे तो वो बोली साहिल तेरा तो हुआ ही नहीं इसलिए पहले वो करना जरुरी हे. तो मैंने कहा फिर बताओ की किस तरह से अलग करें और ऐसा करना हे की ये हमारा पहला सेक्स हमें हमेशा याद भी रहे. हम दोनों इस बारे में सोच भी रहे थे की उतने में उन्होंने कहा की मैं नहाने जा रही हु तुम वहां आ जाना हो सका तो वही पर करेंगे संभोग मौका सही रहा तो नहीं तो वापस बेडरूम में आ जायेंगे. और ये कह के वो बाथरूम में चली गई. दोस्तों आप ये कहानी मस्ताराम डॉट नेट पे पढ़ रहे है।

फिर कुछ देर में मैं भी बाथरूम के दरवाजे के पास जाकर खड़ा हो गया तो मैंने देखा की वो अपनी चूत को साबुन लगा के अच्छे से धो रही थी. तो मैं अन्दर गया और उनका एक पैर को बाथरूम में बनी हुई शेल्फ के ऊपर रखवा दिया और फिर निचे बैठ कर साबुन वाली चूत को धोकर चाटने लगा. और अपनी पूरी जीभ उसमे डाल दी मैंने. मेरी सास का चहरा एकदम लाल हो गया था और वो आँखे बंद कर के आह्ह्ह अहह कर रही थी. 3-4 मिनिट चटाने के बाद वो अब मेरा लंड लेने के लिए रेडी थी. मैं उठा और ऐसे ही उसके पाँव को ऊपर रख के अपना लंड मैंने उसकी चूत में डाल दिया. और मैंने हल्का शोवर भी चालू कर दिया. वो फिलिंग एकदम अलग थी. मैं अपनी कमर हिला हिला के सासू माँ को चोद रहा था. और वो भी अपनी सेक्सी गांड को हिला हिला के मेरे लंड को मजे से ले रही थी. 5 मिनिट के अन्दर ही मेरे लंड का पानी छुट गया क्यूंकि बड़े ही मजे से चोदा था मैंने उन्हें!

फिर मैंने अपना लंड जल्दीस इ बहार निकाला और उन्हें चूसने के लिए कहा. लेकिन उन्होंने वीर्य वाला लंड चाटने से मना कर दिया तो मैंने भी उन्हें फ़ोर्स नहीं किया. और फिर हमने एक दुसरे की बॉडी को साफ़ किया तोवेल से और बेडरूम में आ गया. और हम वही पर लेट गए. रात के 3 बजे चुके थे लेकिन ना मुझे नींद आ रही थी और ना ही मेरी सास को. उसे तो बहुत समय के बाद लंड का मजा मिला था.

फिर मेरी सास ने कहा की अब क्या विचार हे तो मैंने कहा आज रात एक बार और करेंगे कुछ अलग तरीके से और फिर सो जायेंगे. वो कहने लगी ठीक हे. मैंने कहा लेकिन इस बार आइडिया मेरा होगा. वो बोली ठीक हे. फिर मैं सोचने लगा और मेरा आईडिया ये था की मैंने उनको कहा की आप लेट जाओ और मैं किचन में जा के फ्रीजर से आइसक्रीम ले आया. मैंने आइसक्रीम अपनी सास के बूब्स और चूत के ऊपर लगा दी. ठंडी ठन्डी आइसक्रीम की वजह से उन्हों पता नहीं क्या होने लगा की वो बेड की चद्दर को अपने हाथो से नोंचने लगी थी.

फिर उनके बॉडी की आइसक्रीम को मैं चाटने लगा. पहले बूब्स सक किये और फिर चूत के अन्दर जीभ पे आइसक्रीम रखकर चूत को चाट लिया मजे से. फिर मैंने कुछ आइसक्रीम को अपने लंड के ऊपर रखा और सासू माँ को कह आप भी आइसक्रीम खाओ मम्मी.

सास ने मजे से मेरे लंड को चूसा और सब आइसक्रीम को वो चाट गई. मेरा लंड अब एकदम जोश में आ चूका था. मैंने सासू माँ के मुहं को खूब चोदा. और फिर उनको उल्टा होने के लिए कहा. सासू माँ अपनी मोटी नंगी गांड दिखा के उलटी हो गई.

और मैंने सास की गांड में ही लंड डाल दिया. वो उछल पड़ी लंड के अन्दर घुसते ही. मैंने धीरे धीरे से चोदा पहले सास की गांड को और फिर जोर के धक्के लगाए. सास भी अह्ह्ह अह्ह्ह ओह ओह कर के अपनी कमर को मटका रही थी और मेरा लंड अन्दर तक ले रही थी.

मेरा पूरा लंड जब सास की गांड में घुसता था तो अलग ही मजा आता था मुझे. मैंने आगे हाथ कर के बूब्स को अपने हाथ में पकडे और निपल्स को दबा के पिंच किया. सास ने अपनी उँगलियों को चूत में डाला और वो गांड मरवाते हुए चूत को अपनी ऊँगली से हिलाने लगी. और एक मिनिट के अन्दर ही वो झड़ गई और उसकी चूत में से बहुत सब पानी निकला! वो जोर जोर से चूत के दाने को मसल के सब पानी निकाल बैठी अपना.

फिर मैंने उसकी गांड को दोनों हाथ से पकड़ के आगे पीछे किया. मेरे लंड के ऊपर भी बहुत प्रेशर बना हुआ था. मैंने एक मिनिट चोदने के बाद सास को कहा मेरा पानी निकलेगा. वो बोली निकाल दो साहिल!

मैंने गांड के अन्दर ही वीर्य की गर्म गर्म पिचकारी मारी और वो खुश हो गई. हम दोनों चिपक के सोये एक घंटे जितना. फिर वो उठी और बोली, साहिल मैं अपने कमरे में जाती हूँ अब.

मैंने कहा, मम्मी आप ने एक बार कहा था लेकिन आप ने तो मुझे अपना दीवाना बना दिया हे!

वो हंस के बोली, अब मैं भी एक बार में नहीं रुक सकती हूँ.

ऐसा कह के वो अपनी गांड हिलाते हुए वहां से निकल गई!!!

चोदने के बाद जो मस्त नींद आती हे वो सच में सुकून देती हे.

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Didi ko apna banaya aur pyar kiya https://sexkahani.net/didi-ko-apna-banaya-aur-pyar-kiya/ https://sexkahani.net/didi-ko-apna-banaya-aur-pyar-kiya/#comments Wed, 24 May 2017 05:00:11 +0000 https://sexkahani.net/?p=11193 Hi friends. Aaj me apko mere aur meri Didi ke pyar ki kahani batana chahta hu. Me 20 sal ka hu. Meri Didi 21 sal ki he. Hum upper middle class family se he. Ghar me Papa, Mummy,Me aur meri Didi 4 log rahte he. Ghar me kisi bhi chij ki koi kami nahi he. Mene aaj tak meri Didi jesi sundar, talented, sexy ladki nahi dekhi he. Bachpan se lekar aaj tak me unki bahut hi respect karta hu aur hamessa karta rahunga.

Muje vo bahut hi pasand he. Jese jese me bada hota gaya me unki taraf aakarshit hone laga aur dhire dhire unse pyar ho gaya. Par unke sath sex karne ki me kabhi soch bhi nahi sakta tha. Kyunki itni unchi soch vali ladki jo sabse itna pyar karti he unke sath pyar to vohi kar sakta he jo khud bahut hi accha insan ho. Ekdin me cricket khel kar aaya to mene unhe sari me dekha. Unhone blue color ki sari pehni thi. Bal khule the aur kandhe par lehra rahe the. Unki aankho me ajib sa tej tha. Vo ekdam goddess lag rahi thi. Mene pucha Didi aap kahi ja rahi ho?

Didi- Ha Aakash. Mere dost ki birthday party he. Me vahi ja rahi hu. Tu Ghar pe hi rehna. Mummy bas abhi aati hi hogi.
Me- Thik he.
Us din mene Didi ko dekha tabse muje unse pyar ho gaya. Mene apne man ko samjane ki bahot kosis ki. Lekin me unki taraf aur aakarshit hone laga tha. Us din ke bad meri ek hi iccha thi- Didi ka pyar pana. Uske liye me kuchh bhi karne ko taiyar tha.

Kuchh din bad mere parents Ghar se bahar gaye the. Ghar pe me aur Didi akele the. Vese Didi pure din busy rehti thi. Aur me bhi college me jata tha. Mummy bhi Ghar pe hoti thi to muje Didi ke sath akele jyada time nahi milta tha. Lekin aaj accha moka tha. Me niche hall me TV dekh raha tha. Didi vaha aayi.
Me: Didi, chalo koi movie dekhte he.
Didi: okay, konsi sweetie?
Didi ki aadat thi ki vo muje ya fir parents ko Honey, sweetie keh kar bulati thi. Khas kar muje. Vo muje bahut pyar karti he.
Mene zee cinema pe dekha to Rowdy Rathore chal raha tha. Mene kaha chalo yahi dekhte he. Vo sofa par aakar mere pas beth gayi.
Film bas suru hui thi. Aur thodi der me Akshay aur Sonakshi ka romantic scene aaya. Jab Akshay Kumar Sonakshi ke pet ko chhuta he. Mene ye scene bahut bar dekha tha. Lekin Didi sayad pehli bar dekh rahi thi. Vo thodi excited ho gayi. Par kuchh boli nahi. Kuchh der bad hamne lunch kiya. Me apne room par tha. Me aaj Didi ko ji bhar ke pyar karna chahta tha. Par samaj me nahi aa raha tha kese karu?
Me Didi ke room me gaya. Vo koi novel padh rahi thi. Me unke bed par betha.
Me: Didi, ye to koi love story ki book lag rahi he.
Didi: Nahi Aakash ye to biography he. It’s not a love story at all.
Didi ne jyada romantic scenes nahi dekhe the nahi unhone koi love story padhi thi. Unhe pyar ka ehsas kabhi hua hi nahi tha. Isiliye vo aaj TV par romantic scene dekh kar excited ho gayi thi.
Me: Didi aap kisi se pyar karti he?
Didi: Nahi.
Me: kya aapko kabhi pyar ka ehsas nahi hua?
Didi: Nahi Honey. I was busy always.
Uske bad me chala gaya. Me lagbhag ek ghanta soya apne room me. Jab me hall me aaya to vaha ka najara dekh me chaunk gaya. Didi ne vohi blue sadi pehni thi jise dekh kar me unka diwana ho gaya tha. Unhone kuch jewelry bhi pehni thi. Chudiyo ki aawaz aur jewelry ki chamak muje aur bhi uttejit kar rahi thi. Unhone muje dekha aur muje bulaya.
Didi: Dekhna jara ye sadi yaha kamar se dheeli he. Me vaha gaya aur sari thik karne ka try karne laga. Tabhi muje vo Rowdy Rathore ka scene yad yaha. Me niche betha. Didi ka dhyan sadi thik karne me tha. Unhe laga me bhi sadi thik kar raha hu. Me niche betha aur unki sari pet ke upar se thik kar raha tha. Mene dhire se pet ke upar se sari hata li aur vaha par ek kiss kar di.
Achanak hue is kiss se Didi chaunk gayi. Aur unhone meri taraf dekha. Me moka khona nahi chahta tha. Aur nahi unse bat kark moka khona chahta tha. Me khada hua aur Didi ko gale laga liya. Didi ne bhi mere pith ke piche hath laga liye. Lekin unhe kuchh samaj me nahi aa raha tha ki kya ho raha he. Tabhi mene didi ke gale ke piche ke bal hataye aur vaha par halke se kiss kiya aur kaha I love you Didi. Ab ham alag hue aur pehli bar hamne ek dusre ki aankho me dekha. Me khus tha ki Didi ne abhi tak kuchh nahi kaha. Unhe pehli bar pyar ka ehsas ho raha tha. Me unke karib gaya. Unhone apni aankhe band kar li. Mene unke gale ke piche hath dala unka sir thoda niche kiya aur unke forehead par kiss kiya aur phir gale laga liya. Me apne aap ko bahut hi lucky samaj raha tha ki me apni didi se pyar kar raha hu. Me unse real me pyar karta tha. Isiliye ye sex sex nahi balki pyar aur sex ka mix feeling tha. Me bas Didi ke pyar me dub jana chahta tha. Esa lag raha tha jese mene puri duniya jit li ho. Mene ab Didi ko apni god me utha liya. Unki aankhe band hi thi. Aur vo kuchh nahi bol rahi thi. Bahut hi bholi aur masum lag rahi thi meri Didi. Mera pyar. Me unhe god me utha kar sofa me beth gaya. Vo abhi bhi meri god me hi thi. Me bhala unhe apni god se kyun utaru?
Ab Didi ka ek hath mere kandhe pe tha. Mene Didi ka gala chumna suri kiya. Unke chehre par ajib si chamak thi. Unka dusra hath mere balo me tha. Gala chumne k bad me unke baho ko chum raha tha tabhi muje unki armpit ki khushbu aayi. Me pagal ho raha tha. Kya khushbu thi unki armpit ki. Mene unka hath jo mere balo me tha usko mere sir par se hataya. Mera dusra hath jo unke kandhe ke piche tha usse mene unko apne aur karib khincha. Unke hatho me apni ungaliya bharayi. Ab unki armpit dikh rahi thi. Mene vaha par dhire se ek kiss ki. Unhone ek lambi sans li. Muje unpar bahut hi pyar umad raha tha. Mene jor se unhe gale laga liya. Mera ek hath unke kandhe par tha. Dusre hath se mene unke gale ke pichle hisse par se bal hataye aur vaha dhire se ek kiss kiya aur kaha I love you Didi. I love you so much. Didi ne mere sir par hath gumaya aur muje vese hi gale laga kar rehne diya.

So, this is the end of part 1. Part 2 is coming soon. Please tell how was my love story.

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मेरी बीवी की चूत में दो आगे एक पीछे https://sexkahani.net/%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a5%80%e0%a4%b5%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%9a%e0%a5%82%e0%a4%a4-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%a6%e0%a5%8b-%e0%a4%86%e0%a4%97%e0%a5%87/ https://sexkahani.net/%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a5%80%e0%a4%b5%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%9a%e0%a5%82%e0%a4%a4-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%a6%e0%a5%8b-%e0%a4%86%e0%a4%97%e0%a5%87/#comments Tue, 23 May 2017 15:00:02 +0000 https://sexkahani.net/?p=11444 दोस्तों मुझे आप सभी चुदक्कड भी कह सकते हैं क्योंकि में बचपन से ही चूत का बहुत शौकीन रहा हूँ.. कभी कभी मैंने अपनी सोती हुई बहन की चूत को सूँघा है तो कभी अपनी माँ की पेंटी को। मेरे काले लंड में एक इस्प्रिंग है जब देखो जहाँ देखो खड़ा हो जाता है और हर जगह गांड और चूत ढूंढ़ता फिरता है। लेकिन मेरी सबसे मन पसंद एक ही है मेरी जानू चुड़क्कड़ अनुपमा.. मतलब मेरी बीवी। अनुपमा एक जवान २१ साल की मस्त गदराई हुई गांड, बड़ी बड़ी चूची, रसीले होंठ और काली गुलाबी रसभरी चूत। अनुपमा से मेरी मुलाकात पहली बार एक मॉल में हुई थी.. आज से ठीक ४ साल पहले मॉल में अपनी मोटी मोटी गांड मटकाती हुई घूम रही थी और सबके लंड में आग लगा रही थी। फिर मेरे लंड को ना जाने क्या सूझी और उसके पीछे पीछे चल दिया.. मुझे याद है वो त्यौहारों का समय था और मॉल में भीड़ बहुत ज़्यादा थी और वो आगे आगे और में उसके पीछे। तभी मौके का फायदा उठाते हुए मैंने उसकी गांड पर हाथ मसल दिया.. वाह! क्या मोटे चूतड़ थे उसके.. मेरे लंड में तो करंट ही दौड़ गया। शायद उसके चूतड़ में भी खुजली हुई और उसने अपनी ऊँगली को अपनी पेंटी के अंदर सेट किया.. फिर उसकी गांड की लकीर देखकर मुझे तो मेरी तक़दीर पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं हो रहा था। यह तो बस पहली मुलाक़ात थी और फिर बात बनती गई और हमारे लंड चूत का मिलन होता गया। आज हम दोनों एक दूसरे के साथ बहुत खुश हैं और एक दूसरे की चूत, गांड और लंड, बूब्स सबका बहुत ध्यान रखते हैं। मेरे पूरे मोहल्ले में मेरी चुड़क्कड़ जानू का चर्चा होता रहता है और हर कोई उसका नाम लेकर अपनी बीवियों और रंडियों को बहुत चोदता है। हमारी गली का हाल तो यह है कि धूप में सूखती हुई उसकी ब्रा पेंटी तक लोग चुरा ले जाते हैं। कोई मूठ मारकर उन्हे वापस हमारे घर पर फेंक जाता है तो कोई उन्हें काम में लेता रहता है और में तो ना जाने कितनी जोड़ी ब्रा पेंटी ला चूका हूँ और चुदाई के समय फाड़ भी चूका हूँ। वो खुद भी बहुत खरीद कर लाती है और यहाँ तक कि मेरे पिता जी भी मेरी अनुपमा के नाम की ही मुठ मारते हैं और मुझे यह सब देखकर बहुत खुशी मिलती है.. मेरी जान बहुत मस्त है.. ऐसे ही किसी को अपने पास फटकने नहीं देती। यह बात इसी साल की है.. सारा शहर नये साल की तैयारियों में डूबा पड़ा था और ना जाने मेरी चुड़क्कड़ जानू के मन में ना जाने क्या था? इस बार वो बाहर जाने की जिद भी नहीं कर रही थी.. वर्ना उससे बहुत पसंद है बाहर डिस्को जाना और क्योंकि वहाँ पर सभी लड़के उसको घूरते हैं और मौका मिलने पर हाथ भी डालते हैं। फिर उस दिन में सारा दिन घर पर ही था और अनुपमा सूबह से ही नंगी घूम रही थी | आप यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | वो घर पर अधिकतर नंगी ही रहती है। तो मुझे जब भी मौका मिलता में उसकी चूची दबा देता या गांड में उंगली कर देता। तभी शाम होते ही मैंने मेरी जानू से कहा कि आज कहीं चलना नहीं है क्या? आज 31 दिसम्बर है और सारे मोहल्ले वाले सभी लोग बाहर गये हुए है कहीं ना कहीं घूमने.. तो क्या हम भी चलें? तभी उसने कहा कि नहीं.. मन नहीं है। आज हम घर पर ही नया साल मनाते हैं। अब मुझे सुनकर बड़ी हैरानी हुई.. लेकिन जैसा मेरी बीवी कहेगी वैसा ही होगा.. तो मैंने वाईन की बॉटल निकाली और अनुपमा के लिए एक पेग बना दिया और हम वैसे कुछ ख़ास पीते नहीं लेकिन आज सेलिब्रेशन के मूड में थे और उसने एक छोटी सी स्कर्ट पहनी थी.. जिसमे उसके चूतड़ नहीं छुप रहे थे और उसके नीचे जाली वाली पीले रंग की पेंटी चूतड़ो के बीच में चिपक रही थी और मोटे बूब्स उसके टाईट टॉप से बाहर निकलने को बैचेन थे। फिर मैंने अपने हाथों से उसको वाईन पिलाई और उसके होंठों को चूसने लगा। अब अनुपमा की चूत में भी आग लगने लगी थी और उससे अब रहा नहीं जा रहा था। फिर उसने कहा कि जान चलो कहीं बाहर घूम कर आते हैं। में कार निकालने लगा.. लेकिन अनुपमा ने कहा कि नहीं बाईक पर चलेंगे। मुझे तुम्हारे पीछे चिपककर बैठाना है। फिर में मुस्कुराया और मैंने बाईक निकाल ली उसने अपने चूतड़ उठाए औट बाईक की सीट पर रख दिए उसके मोटे मोटे बूब्स मुझे अपनी पीठ पर चुभते हुए महसूस हो रहे थे और मुझे बहुत मजा आ रहा था। लेकिन यह मजा जब तक में पूरा लेता.. उससे पहले सुनसान रास्ते पर दो पुलिस वालों ने हाथ देकर मुझे रुकने को कहा और मैंने तुरन्त ब्रेक लगाए और बाईक एक साइड में लगा दी। अनुपमा अब भी नशे में थी। पुलिस वालों ने हमे घूरते हुए कहा कि कहाँ से अय्याशी करके आ रहा है तू और यह रंडी बैठा रखी है.. क्या चुदाई करने ले जा रहा है इसे? फिर मैंने गुस्से से कहा कि यह मेरी वाईफ है। फिर पुलिस वाला बोला कि तो साले मैंने कब कहा की ये मेरी है। तू रात को घूम रहा है.. क्या तुझे पता नहीं इतनी रात घूमना ठीक नहीं है और तुमने क्या दारू पी रखी है.. साले दारू पीकर गाड़ी चलाता है.. अंदर करूंगा.. उससे दूसरे पुलिस वाले से कहा कि अरे शर्मा इसको पकड़ कर चेक कर साले ने दारू पी रखी है। पंप ला और इसके मुँह में लगा और उस पुलिस वाले ने मेरे मुँह में चेक करने के लिए पंप लगाया और फिर उस पुलिस वाले ने कहा कि शर्मा दूसरा पंप और दे इस लड़की का भी मुहं चेक करना है। शर्मा : दुबे यार दूसरा तो नहीं है एक इसके मुँह में दे रखा है। दुबे : अच्छा लेकिन चेक तो करना पड़ेगा.. अभी देता हूँ इसके मुँह में पंप (हंसते हुए उसने अपना काला लंबा मोटा लंड मेरी बीवी अनुपमा के मुँह में दे दिया) मेरी बीवी की तो साँस ही अटक गई और अंदर तक लंड उसके मुँह में घुस गया और उसकी आँखे बाहर आ गई। फिर में चिल्लाया यह क्या कर रहे हो? और शर्मा ने मुझे एक थप्पड़ मारा और कहा कि ज़्यादा मत बोल वरना अभी अंदर कर दूँगा.. समझा। दुबे : सुन लड़की चुपचाप यह लंड चूस वरना दोनों की खड़े खड़े यहीं पर गांड मार दूँगा और अनुपमा ने मेरी तरफ देखा और उसे कोई रास्ता नज़र नहीं आया और उसने अपनी दोनों आंखे बंद की और लंड को पकड़कर ज़ोर ज़ोर से चूसने लगी। फिर दुबे उसके मुहं में लंड अंदर बाहर करने लगा.. अब शायद अनुपमा को भी मजा आने लगा था.. काला लंड उसके मुँह में था और वो उसे लोलीपोप के जैसे चूस रही थी और अब मेरी और शर्मा की पेंट टाईट हो गई। आप यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | फिर शर्मा ने भी अपना काला लंड बाहर निकाला और उसके मुँह में दे दिया वो एक साथ दो दो लंड चूस रही थी। अब मुझसे भी रहा नहीं जा रहा था और में उसके पीछे जाकर उसके चूतड़ दबाने लगा और ज़ोर ज़ोर से उसकी चूचियाँ खींचने लगा.. वो तड़पने लगी और उनका लंड चूसने लगी और उसकी चूत टपकने लगी थी। फिर मैंने एक हाथ उसकी पेंटी में घुसा दिया और चूत मसलने लगा.. वाह! क्या नज़ारा था। में दबाए जा रहा था और वो लोग उसे लंड चुसाए जा रहे थे। तभी शायद रात के 12 बजे और आसमान में आतिशबाज़ी शुरू हो गई और नया साल आ गया था और साथ में उन दोनों के लंड का पानी भी अनुपमा की चूंचियों पर गिरने लगा और में उसी पानी से उसकी चूचियों को मसल रहा था। दोनों पुलिस वाले झड़ चुके थे और फिर दोनों ने एक साथ कहा कि.. आह्ह्ह्ह हेप्पी न्यू ईयर ओफ्फ्फ। फिर पुलिस की गाड़ी पर वायरलेस पर मैसेज आने लगे तो दोनों ने हमसे रफूचक्कर होने को कहा और दारू पीकर गाड़ी ना चलाने की हिदायत दी.. लेकिन अनुपमा अब भी गरम थी और मैंने अनुपमा को आगे बैठाया और अपना लंड उसके हाथ में दे दिया और किक मारकर बाईक स्टार्ट की और वहाँ से निकल गया और सारे रास्ते में उसकी चूची को चूसता हुआ उन्हें खींचता हुआ घर पर आया और आते ही उसकी पेंटी फाड़कर चूत में घुस गया और सारी रात में उसकी चूत, गांड में घुसा रहा और वहीं ज़ोर ज़ोर से चूत चाटने लगा.. वो सिसकियाँ लेने लगी और मेरे सर को चूत पर जोर जोर से दबाती रही.. 10 मिनट चूत चाटने के बाद मैंने उसे लेटा दिया और चूत में लंड डालकर धक्के देने लगा अब मैंने उसकी नये साल की चुदाई शुरू कर दी और जोर जोर के धक्को के साथ जोर से कहता रहा.. हैप्पी न्यू ईयर.. मेरे लंड देवता घुस जा और फाड़ दे इसकी चूत.. आज अच्छे से नया साल मना दे हमारा। फिर 20 मिनट की चुदाई के बाद में उसकी चूत में झड़ गया और उसके ऊपर सर रखकर ऐसे ही हम दोनों सो गये ।।

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