उस दिन हम सब कॉलेज से निकले तो मुमताज बोली- आज जल्दी छुट्टी हो गई है चल आज तो मेरे साथ मेरी एक सहेली के घर चल, आज तुझे लाइव एक्शन दिखाती हूँ।

उसनें भी पहली बार सब कुछ लाइव होते वहीं देखा था।
तो बस अपनी-अपनी गाड़ी पर सवार होकर हम दोनों पहुंचे मुमताज की फ्रेंड के घर।
एक बड़ी सी बिल्डिंग थी नीचे सब मस्त-मस्त इम्पोर्टेड कार्स खड़ीं थीं, वहां पक्का बहुत रईस लोग रहते होंगे।
और जब हम लोग बाहर गाड़ी खड़ी कर के अन्दर जानें लगे तो एक गार्ड नें हमें रोक लिया- कहाँ जाना है? किससे मिलना है?
मुमताज नें कहा- सेकंड फ्लोर टू बी, जुबैदा के घर, मैं उसकी फ्रेंड हूँ।

उसे शायद हम लोग शक्ल से चोर दिख रहे थे, साले नें पहले फ़ोन लगा कर कन्फर्म किया और तब जाकर हमें अन्दर जानें दिया।
मुमताज मुझे बता रही थी कि कैसे जुबैदा और वो बचपन में साथ में खेला करते थे और वो जुबैदा से कितनी ईर्ष्या किया करती थी और सारी चीज़ों में जुबैदा उसकी गुरु-माता थी। मुमताज की गुरु, मुझे तो लग रहा था कि पता नहीं मैं किस बड़े संत से मिलनें जा रही हूँ।

जब हम लोग ऊपर पहुँचे और डोर बेल बजाई तो गेट खुला और एक स्मार्ट सा बंदा बाहर आया शर्ट के बटन खुले हुए थे, गठी हुई बॉडी, सिक्स पैक एब्स किसी हीरो से कम नहीं था।

उसे देख कर मुमताज नें सीटी बजाई तो मैं तो सकपका ही गई, एक तो हम किसी गलत घर में आ गए और ऊपर से ये ऐसे सीटी मारेगी तो वो गार्ड हम दोनों को घसीटता हुआ बाहर फेंक देगा।

तभी उस बन्दे नें कहा- मुमताज राईट? कम इन बेब!
और हम दोनों घर के अन्दर चले गए, अन्दर एक लड़की आई और मुमताज के गले लग गई- मुम्मू बेबी, आई मिस्ड यू यार। फाइनली पुरानें दोस्तों के लिए टाइम मिल ही गया।

फिर हम दोनों एक दूसरे को ऊपर से नीचे तक देखनें लगे। मैं तो यह देख रही थी की उसनें सिर्फ एक स्पोर्ट्स ब्रा पहन रखी थी हॉट पैन्ट्स के साथ, और वो शायद देख रही होगी कि यह सलवार-सूट में कौन सी बहनजी आ गई मेरे घर।

ओफ! मुझे पहले पता होता तो मैं भी कुछ अच्छा सा पहन कर जाती, पर अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत।
उसनें मुमताज से पूछा- मुम्मू, इस शी विथ यू?
उसनें कहा- येस डार्लिंग, शी ईज़ माय क्लासमेट!

मुझे उस पर थोड़ा गुस्सा आया जिस तरह से उसनें मुझे देखा, मुझे लगा कि वो मुझे हेय दृष्टि से देख रही है, पर मुमताज की सहेली थी इसलिए मैंनें कुछ नहीं कहा।
वैसे अगर वो मुमताज की फ्रेंड नहीं भी होती तो कौन सा मेरे मुंह से कुछ फूट जाता।
हमें काउच पर बिठा कर उसनें कोल्ड ड्रिंक्स पकड़ा दी और उस बन्दे से कहा- सो शुड वी कंटिन्यू?

और यह सुनते ही उस लड़के नें अपना शर्ट उतार दिया और ज़मीन पर बिछी चटाई पर घुटनें के बल बैठ गया, फिर अपनें दोनों हाथ पीछे अपनें पैरों के तलवे पर रख लिये और जुबैदा भी उसके बाजू में ऐसे ही करनें लगी।
मैं कोल्ड ड्रिंक पीते-पीते यही सोच रही थी कि क्या यही था लाइव एक्शन? क्या यह सेक्स करनें की कोई नयी पोजीशन है? पर दोनों इतनें दूर-दूर थे कि एक ही तरह का सेक्स हो सकता था, ब्लू टूथ सेक्स!

यह बात दिमाग में आते ही मेरी तो हंसी निकल गई और सब लोग मुझे ऐसे देखनें लगे मानो मैंनें कोई गुनाह कर दिया हो।

उतनें में मुमताज नें मुझसे कहा- शीनम, दे आर डूइंग हॉट योगा!
‘हॉट योग? यह किस नई बला का नाम है?’
मैंनें तो पहली बार सुना, पर मुमताज नें बताया कि आज कल अपर क्लास में इट्स अ ट्रेंड और जो बंदा योग सिखा रहा था वो अमेरिका से योगा सीख कर आया हुआ है एँड ही इज़ वैरी फेमस।

यह कमाल की चीज़ है ना… हमारे ही देश की कला है योग, और उसे कोई दूसरे देश से सीख कर आ रहा है और यहाँ आकर हमें सिखा रहा है।
यह तो वही बात हुई कि अपनी ही चीज़ के लिए किसी और को पैसे देना।
उन लोगों का योग सेशन ख़त्म होते ही वो बंदा निकल गया और जुबैदा नहानें चले गई।

उसनें मुझे और मुमताज को अन्दर वाले कमरे में भेज दिया और अन्दर जाते ही मुमताज नें दरवाज़ा बंद कर दिया, मैं तो यही सोच रही थी कि हम लाइव एक्शन देखनें आये हैं या करनें?
‘यह मुझे रूम में बंद करके गेट क्यूँ लगा रही है?’

उतनें में मुमताज मुझे बोली- शीनम, गेट रेडी टू गेट सरप्राईज़ड!

थोड़ी देर बाद जुबैदा नहा-धोकर एक सेक्सी सा गाउन डालकर बाहर आई। उसनें कोई परफ्यूम निकाला और अदाओं के साथ उसे अपनी बॉडी पर लगानें लगी, फिर उसनें कुछ अरोमा कैंडल्स जलाई।

मैं सोच रही थी कि क्या हमें सरप्राइज में कैंडल लाइट डिनर मिलनें वाला है।

इतनें में ही डोर बेल बजी और अपनें बाल ठीक करते हुए जुबैदा दरवाज़ा खोलनें गई।
अब वो दिखाई तो नहीं दे रही थी लेकिन कुछ आवाजें आ रही थीं।
‘हाय बेबी, हाऊ आर यू? आज तो बहुत सेक्सी दिख रही हो। वाओ…द परफ्यूम इस लवली। अरे तुम्हारे बदन की खुशबू ही हमें पागल कर देती है फिर तो आज क़यामत होगी। वाकई में तुम्हारा जवाब नहीं। मौके पे चौका मारना कोई तुमसे सीखे।’

मैं अन्दर वाले रूम से सब सुन रही थी और सोच रही थी कि लड़कियों के पास बन्दों को घायल करनें के कितनें हथियार होते हैं। उतनें में वो बंदा आकर काउच पर बैठा, देखकर ऐसा लगा जैसे मैं इसे जानती हूँ, एँड आई वाज़ राईट। वो बाइक के एड वाला एक्टर अमित कपूर था। उसनें तो एक मूवी भी की थी लेकिन मैं ये सोच रही थी कि वो यहाँ जुबैदा के घर पर क्या कर रहा है?

मेरे मन में चल रहे सवाल मेरे चेहरे पर बोल्ड लेटर्स में लिखे थे। जैसे ही मैंनें मुमताज की तरफ देखा उसनें सर हिलाते हुए कहा- यस, अमित कपूर, इन दोनों नें कई एड में साथ में काम किया है, वो इन्शयोरन्स वाला एड याद है? उसमें जुबैदा ही अमित की वाइफ बनी थी। साड़ी में थी तो तुझे पहचान में नहीं आई होगी।

मैंनें फिर जुबैदा की तरफ देखा और तब तक वो अमित की गोद में बैठी उसके बालों को सहला रही थी।
अमित नें जैसे ही उसके गाउन की ज़िप खोली जुबैदा नें उसका हाथ पकड़ते हुए कहा- नॉट सो फ़ास्ट, इतनी जल्दी भी क्या है?

इतनें में ही अमित का मुंह बन गया।
यह देखते ही जुबैदा नें उसे किस करना शुरू कर दिया।
जुबैदा नें फिर उसे रोका और उठ खड़ी हुई, फिर धीरे से उसनें अपना गाउन उतारा और साइड में फेंक दिया, उसके अन्दर जुबैदा नें काली ट्रांसपेरेंट नाईटी पहनी हुई थी।

जुबैदा का गोरा चिकना बदन जो उस ड्रेस में से झाँक रहा था, उसे देखकर मेरा भी ईमान डोल रहा था।
मुझे नहीं पता था कि अमित इतना फ़ास्ट है, जुबैदा के हॉट डांस में ही उससे कंट्रोल नहीं हुआ और… जुबैदा उससे कह रही थी ‘यह क्या अमित, यू केम सो फ़ास्ट… अभी तो कुछ शुरू भी नहीं हुआ था।’

अमित एकदम सकपकाया सा एक्सप्लेन करनें की कोशिश कर रहा था- अरे नहीं, ये तो वो स्टेरोयडस का असर है, आज कल वर्कआउट के लिए इंजेक्शनस ले रहा हूँ ना उसकी वजह से हुआ यह, वरना मेरा स्टेमिना तो घोड़े जैसा है।

जुबैदा नें उसके कॉलर को पकड़ कर कहा- हाउ डेयर यू कम अलोन…
अमित तपाक से बोला- ओह डार्लिंग, बस इतनी सी बात, गेट रेडी टू एक्स्पिरिएँस द हेवन।
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यह कहते हुए उसनें जुबैदा को काउच पर लेटा दिया और उसके पाँव को चूमनें लगा, धीरे-धीरे वो ऊपर आनें लगा और उसके ड्रेस को भी ऊपर खिसकाता जा रहा था।

मैं समझ गई थी कि अब आगे क्या होनें वाला था, मुझे तो लगता था कि ये सब तो बस पोर्न स्टार्स करते होंगे, असली जिन्दगी में कोई कैसे कर सकता है।
पर आज वो सब मेरे सामनें जीता जागता हुआ।

जुबैदा की दोनों टाँगें अमित के कंधों पर थी और उसनें अमित के सर को एक हाथ से पकड़ रखा था।
जुबैदा के चेहरे के भाव बता रहे थे कि अमित से उसे वो मिल रहा था जो हर लड़की चाहती है।
जुबैदा की आवाजें तेज़ हो रहीं थी और उतनें में ही मुमताज उठी और अपना बैग लेकर वाशरूम में चली गई।

गॉड, कब वो दिन आएगा जब मैं भी इन सब चीज़ों का मज़ा ले सकूँगी?
पहली बार मैंनें ये सब कुछ अपनें सामनें लाइव होते देखा, और वो इतना हॉट था कि मैं खुद को संभाल ही नहीं पा रही थी। तेज़ प्यास लगी थी, पर पानी पीनें के लिए वहाँ से उठनें का मन ही नहीं हो रहा था।

एक साथ दो-दो किस्म की प्यास, पर मैं बुझा एक ही सकती थी।
मैंनें इधर-उधर देखा तो एक पानी की बोतल रखी थी टेबल के ऊपर, मैं उठ कर गई और थोड़ा सा पानी पियाम फिर वाशरूम तरफ ये देखनें गई कि यह मुमताज की बच्ची आखिर क्या कर रही है।

वहाँ वही चल रहा था जो मैंनें सोचा था। खैर, यह कोई गलत चीज़ नहीं है, मैंनें पढ़ा था कि हस्तमैथुन एक बहुत ही अच्छी और हेल्थी एक्सरसाइज है और इससे स्ट्रेस कम होता है।
ये सारी बातें मैं खुद को समझानें की लिए सोच रही थी, क्यूंकि अभी भी खुद वो सब करनें में मुझे हिचकिचाहट होती है।

तभी मैंनें सोचा कि अगर दिमाग की जगह आँखों का इस्तेमाल किया जाए। बाहर जो सब चल रहा है उससे शायद कोई हेल्प मिल जाए !
पर जब दरवाज़े के पास पहुँच कर बाहर का नज़ारा देखा तो देखा हीरोइन सीन से नदारद थी… कुछ देर बाद जुबैदा पहुँची और अमित से कहनें लगी- अमित सीरियसली, हाउ कैन यू डू दिस? तुम बिना कॉन्डम के कैसे आ गए? भजन करनें आये थे क्या? अगर तुम्हें लगता है कि बिना कॉन्डम के मैं तुम्हें कुछ करनें दूँगी तो यू आर रॉंग…

अमित बोला- आई स्वेअर डार्लिंग, मैंनें कॉन्डम का एक पूरा बॉक्स ले रखा था, लेकिन तुम तो मनोज को जानती हो ना, उसकी भूलनें की आदत, उसनें कार में वो बैग रखा ही नहीं…’
अमित को रोकते हुए, जुबैदा नें उसके होंठों पर हाथ रखा और कॉन्डम का पैकेट खोल कर उसके हाथ में थमा दिया।

भूखे को जैसे खाना मिल गया हो ऐसी चमक अमित के चेहरे पर आ गई- यू आर वैरी स्मार्ट डार्लिंग, मैं जानता था तुम्हारे पास हर प्रॉब्लम का सोल्यूशन होता है। चलो ना… अब देर मत करो मुझसे रहा ही नहीं जा रहा है, कम ऑन…

कसम से आज तो मेरी बॉडी पर मेरा ही काबू नहीं था।
आज अगर मेरे साथ कोई ऐसा करता तो मैं पक्का अपना कुंवारापन कुर्बान कर देती।
आज तो ऐसा लग रहा था कि बस इस आग को कोई बुझा दे। सारा प्यार इस शरीर के सामनें धरा का धरा रह गया और फिर वही हुआ जो होना चाहिए था…

आज खुद-ब-खुद मेरे हाथ मेरी उस जगह पर पहुँच गए, दिमाग यह बात जान चुका था कि जो मुमताज बाथरूम में कर रही थी वही मेरी काया भी मांग रही है लेकिन अपनी सहेली की सहेली के घर ये सब करना क्या सही होगा?

लेकिन जुबैदा और अमित को लव मेकिंग यानि चूत चुदाई करते देख मैं खुद पर काबू नहीं रख पाई। मैंनें वाशरूम के बाहर से धीमी आवाज़ में मुमताज को बुलाया।
‘क्या हुआ शीनम?’ वो बोली।
मैं कुछ कहती इससे पहले ही मैडम नें दरवाज़ा खोल दिया, वो तो एकदम नार्मल और फ्रेश लग रही थी।

मैं उससे कुछ कहे बिना ही वाशरूम में घुस गई और अपनें हाथ…
वैसे तो बहुत अच्छा एहसास था लेकिन अगर यही काम कोई और कर रहा होता तो बात ही कुछ और होती।

ओके! जो भी मैंनें किया उससे थोड़ी तो राहत मिली।

मैं बाहर निकली तो नज़ारा ऐसा था जैसे कुछ हुआ ही ना हो।
अमित जा चुका था और जुबैदा अपनी मिनी ड्रेस में कॉफ़ी की चुस्कियाँ मार रही थी।

 
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