हेल्लो दोस्तों ये मेरी पहली स्टोरी हे और मुझे पक्का भरोसा हे की आप लोगो को पसंद आएगी. ये स्टोरी हे मेरी लाइफ की. मैं केडेट स्कुल में पढ़ता था. 12वी में मेरी एक फिजिक्स की टीचर थी जिसका नाम कल्पिता मेडम था. उन्के बूब्स बड़े ही सेक्सी थे. मैं जब भी उन्हें देखता था तो मेडम को चोदने के ख्याल मेरे दिलो दिमाग में चलने लगते थे. मैं अपने ट्यूशन के लिए मेडम के घर पर ही जाता था.

एक दिन मैंने अपनी इस हॉट मेडम को चोदने का प्लान बनाया. उस दिन घर पर वो और उसकी बहन लाक्सिता ही थी क्यूंकि बाकी के सब लोग किसी शादी में गए हुए थे. मैंने एक ज्यूस की बोतल खरीदी और उसके अन्दर लेडिज की सेक्स की गोली डाल दी क्रश कर के.

मेडम को मैंने दिया और कहा, ये लीजिये मेडम मेरी तरफ से!

मेडम बोली, क्यूँ भाई आज इतनी महरबानी कैसे?

मैंने कहा आज मेरे पापा का बर्थ-डे हे!

मेडम ने उसे पी लिया. मैंने देखा की गोली असर करने लगी थी क्यूंकि कुछ देर में ही मेडम को पसीना आने लगा था. मैंने ये भी देखा की मेडम बार बार मेरी तरफ देख के अपने होंठो को दांतों के तले दबा रही थी. मुझे पता चल काया की मेरा काम बन ही गया हे आज तो. मैं मेडम के पास जा के बैठा और उसे एक प्रॉब्लम पूछा. बातें करते हुए मैंने अपने एक हाथ को मेडम की कमर के ऊपर रख दिया. वो कुछ नहीं बोली. मेरी हिम्मत खुली. मैंने धीरे धीरे से हाथ को हिलाया ताकि उसे पता चले. वो अभी भी कुछ नहीं बोली.

मैंने हाथ को थोडा दबाया और फिर उसे जांघ पर रख दिया. मेडम की आहें निकलती हुई मैं देख सकता था. वो कुछ नहीं बोल रही थी और जैसे उसका ध्यान सिर्फ पढ़ाने में था मुझे. लेकिन उसकी जबान स्लर होने लगी थी. मैंने उसकी चूत को छू लिया तो वो जैसे एकदम मचल सी गई. मेडम से अब रहा नहीं गया और उसने मुझे पकड के अपने होंठो को मेरी होंठो पर लगा के डीप फ्रेंच किस देना चालू कर दिया. और वो मेरे होंठो को अपने दांत से काट भी रही थी. मैंने मेडम को खड़ा कर दिया और उसके कपडे उतार दिए और उन्होंने मुझे पूरा नंगा कर दिया.

मेडम ने अपनी मुठी में मेरे लंड को पकड़ के हेंडजॉब देना चालू कर दिया. मैंने उन्के बूब्स को अपने कब्जे में ले के दबाना चालू कर दिया. और फिर अपने हाथ को उनकी फुदी पर ले गया और उसे हिलाई. मेडम की फुदी एकदम से गीली हो चुकी थी. मैंने उनको पकड़ के निचे बिठा दिया और जबरदस्ती से अपने लंड को उन्के मुहं में डाल दिया. मेडम ने शायद अपनी पूरी लाइफ में इतना बड़ा लंड नहीं चूसा था. इसलिए उसकी आँखों से आंसू बहार निकल पड़े. हम दोनों अपने काम में लगे हुए थे और हमें पता ही नहीं चला की मेडम की छोटी बहन लाक्सिता कब से हम दोनों को देख रही थी.

लाक्सिता की आवाज आई: दी ये क्या हे सब?

कल्पिता एकदम से घबरा गई लाक्सिता की आवाज सुनके और उसने मेरे लंड को मुहं से निकाल दिया. लेकिन मैंने लाक्सिता से कहा, मैं और तुम्हारी दीदी सेक्स कर रहे हे. तुम्हारी भी उम्र सही हे सेक्स के लिए, ज्वाइन करना हे तो कर लो लेकिन प्लीज़ खलल मत डालो और लाक्सिता भी आ गई. मैंने उसे भी नंगा कर दिया.

दोनों नंगी बहने मेरे सामने बैठी हुई थी अपने घुटनों के ऊपर. अब की मैंने अपने मोटे लंड को लाक्सिता के मुहं में ठूंस दिया. वो अपनी बड़ी बहन से ज्यादा अनुभव वाली लग रही थी जो उसके ब्लोवजोब के अंदाज से मुझे पता चल गया. वो पुरे लंड को मुहं में डाल के उसे केडबरी के चोकलेट के जैसे चूस रही थी और चबा रही थी. मैंने कल्पिता का हाथ पकड के उसे खड़ा कर दिया. फिर हम दोनों किस करने लगे. कल्पिता के बूब्स से खेलते हुए मैं उसको किस कर रहा था. लाक्सिता निचे अपने लंड चूसने के काम में लगी हुई थी. फिर मैंने सोफे के ऊपर अपनी मेडम को लिटा दिया. उसकी चूत को हाथ से खोला.

मेडम की फुदी एकदम पिंक थी और उसके अन्दर से पानी आ रहा था. जब मैंने अपनी जबान से उसे सहलाया तो मेडम के अन्दर जैसे करंट दौड़ गया. वो उठ के मेरे से लिपट गई. मैंने कहा, जानेमन अभी तो सिर्फ होंठो से टच किया हे अभी तो और भी करंट लगेगा.

ऐसा कह के मैंने उसे वापस लिटा दिया. अब की मैंने अपनी जबान को फुदी के छेद पर लगा के चुसना चालू कर दिया. कल्पिता मेडम की तो बस हो गई थी इस ओरल सेक्स से. वो जोर जोर से सिसकिया रही थी और मुझे कह रही थी, अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह चुसो इसे और जोर जोर से साली ने बहुत परेशान कर दिया हे मुझे कितने महीनो से.

लाक्सिता ने भी अपनी बहन को ऐसे देखा देखा तो वो सिहर उठी और बोली, दीदी मुझे भी अपनी चटवानी हे.

मैंने कहा आ जाओ तुम भी अपनी दीदी के पास.

वो दोनों बहने सोफे के ऊपर लम्बी हो के बैठ गई. मैं कभी लाक्सिता की फुदी को चूस लेता था तो कभी अपनी मेडम कल्पिता को.

दोनों एकदम मस्तिया गई थी. और मेरा लंड भी इन दोनों के चूसने की वजह से एकदम कडक था. मैंने कहा, चलो अब पहले किसको चुदवाना हे.

लाक्सिता ने कहा, पहले दीदी को चोदो!

कल्पिता मेडम की पिंक फुदी को खोल के मैंने अपने लंड को उसके ऊपर रख दिया. वो एकदम मस्ती में आ गई और बोली, जल्दी से डालो अन्दर इसे. मैंने कहा हां मेरी जान.

एक झटके से मैंने अपने लंड को मेडम की चूत में परो दिया. और वो मस्ती में एकदम से मुझे लिपट गई. मेरे लंड के अन्दर घुसते ही उसकी चीख निकल पड़ी, अह्ह्ह्ह अभ्ह्ह्हह्ह्ह्ह बाप रे कितना गरम हे ये तो, अह्ह्ह प्लीज़ निकाल लो और लाक्सिता को डाल दो.

लाक्सिता हंस रही थी, दीदी आप ने कभी लिया नहीं हे क्या? अभी कुछ देर दर्द होगा फिर आप को मजा आएगा. आप एक काम करो मेरी चूत चाट के ध्यान थोडा उधर करो. दोस्तों आप ये कहानी मस्ताराम डॉट नेट पे पढ़ रहे है।

लाक्सिता ने अपनी फुदी अपनी बड़ी बहन के मुहं पर रख दी. कल्पिता बहन की चूत चाट रही थी और मैंने उसे मशीन की तरह चोदने लगा था. आह्ह आह की चीत्कार पुरे कमरे में थी. मैं भी मजे की वजह से सिसकियाँ रहा था. कल्पिता की चूत में पूरा लंड घुसा के मैंने उसे ऐसे चोदा की उसे अपनी नानी याद आ गई. लाक्सिता की फुदी में उसने पूरी जबान डाल के चाटा. और 10 मिनिट की चुदाई के बाद वो बोली, अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह मै आ रही हूँ. मैंने फट से अपने लंड को फुदी से निकाल लिया, कही मेडम प्रेग्नंट ना हो जाए इसलिए.

लाक्सिता बोली, मैं दीदी का रस पियूंगी.

ये कह के वो अपनी बहन की चूत चाटने लगी. पीछे उसकी सेक्सी गांड उठी हुई थी. मैंने उसे खोला और उसकी फुदी में डौगी स्टाइल में लंड डाल दिया. लाक्सिता की चूत उसकी बड़ी बहन से काफी ढीली थी. पर मजेदार तो वो भी थी. उसने चूत को कस लिया मेरे लंड के ऊपर और अपनी गांड को हिलाने लगी. मैंने जोर जोर से उसे ठोकने लगा था. वो भी आह आह कर के गांड को और तेजी से हिलाती थी और चूत को एकदम कस रही थी मेरे लंड के ऊपर.

5 मिनिट की धमाशान चुदाई के बाद मेरा निकलने को था. मैंने जल्दी से अपने लंड को निकाल के वीर्य की पिचकारी लाक्सिता की नंगी कमर पर छोड़ दी. वो खुश हो गई.

फिर वो दोनों बहने नंगी ही सोफे में लेटी हुई थी. दोनों को मजा आ गया था मेरा लंड ले के.

लाक्सिता ने कहा, दीदी क्या आप वर्जिन थी?

कल्पिता बोली: हां कुछ देर पहले तक वर्जिन थी लेकिन अब मेरे स्टूडेंट ने ही मेरी सिल को तोड़ दिया. लेकिन तू वर्जिन नहीं थी?

लाक्सिता बोली: दीदी मैं तो कोलेज के फर्स्ट इयर से ही लंड ले रही हूँ!

कल्पिता बोली: तुम तो मेरे से बड़ी निकली.

मैंने अपने लंड को हाथ में पकड़ा. उसके अन्दर फिर से उर्जा का संचार होने लगा था. मैंने कहा, लाक्सिता कभी गांड मरवाई हे?

लाक्सिता स्माइल वाला फेस बना के बोली, नहीं!

मैंने कहा, चलो फिर गांड की वर्जिनिटी मैं दूर कर देता हूँ आज तुम दोनों की.

मेडम और उसकी बहन की मैंने फिर गांड भी मारी तेल लगा के. लाक्सिता की गांड में तो घुस गया लेकिन कल्पिता के लिए मुझे खाने का तेल गांड के ऊपर लगाना पडा था!

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