वासना की आग इधर भी उधर भी


में आपने पढ़ा कि कैसे मैं पड़ोस वाली लड़की को ठोक कर दिल्ली आ गया था और यहाँ आकर पढ़ाई में बिजी हो गया।

लेकिन लण्ड को बिना चुत कहाँ सुकून था। दिन में तो लाइब्रेरी में किताबों में व्यस्त रहता था लेकिन रात को रूम पर अकेले कहाँ नींद आती। इसीलिए रात का जुगाड़ करना जरूरी था।

जहाँ मैं रहता हूँ ये स्टूडेंट एरिया है और यहाँ पर रहने वाले सब लोग अपने घर के कमरे किराये पर देते हैं। मेरा मकान मालिक जयपुर जॉब करता है लेकिन उसकी पत्नी अपने 8 साल के बच्चे के साथ ग्राउंड फ्लोर पर रहती है और मैं दूसरे फ्लोर पर रहता हूँ।

जब भी मकान का किराया देना होता तो उनको ही देता हूं या जब कोई प्रॉब्लम होती तो उनसे ही सम्पर्क करता हूँ। उनको मैं भाभी बोलता हूँ और वो 30-32 साल की खूबसूरत और मस्त बदन वाली औरत है। कई बार जब मैं रूम पर होता हूँ या जब किसी त्यौहार पर घर नहीं जाता तो वो बातें करने आ जाती हैं।

वैसे भी उनके लड़के ने स्कूल जाना शुरू कर दिया और पति जयपुर था तो खाली वक़्त में टाइमपास करने के लिए मैं भी उनसे गप्पें लड़ा लेता हूँ। इसीलिए अब मेरी उनसे अच्छी बातें होने लगी हैं और एक दूसरे के साथ थोड़ा हंसी मजाक भी कर लेते हैं।

उनसे बातें करते वक़्त कई बार महसूस होता था कि वो अकेली है और उनको किसी साथी की जरूरत है लेकिन मैंने ज्यादा खुलना ठीक नहीं समझा क्यूंकि इस मामले में मैं खुद पहल नहीं करता कभी।

कई बार वो मजाक में पूछ लेती थी कि गर्लफ्रेंड बनायी कोई या बस किताबों से प्यार करते हो?
तो मैं बोल देता था कि फिलहाल तो यही है लाइफ में बाकी टाइम लगने पर देखूंगा।

इस तरह लगभग मुझे एक साल हो गया वहां रहते हुए और हमारी बातें और दोस्ती गहरी होती गयी। धीरे धीरे सर्दियां आ गयी फिर एक दो एग्जाम देने के बाद मैं भी टेंशन फ्री हो गया तो रूम पर ज्यादा रहने लगा.

सर्दी का मौसम था तो लंड भी चुत मांगने लगा क्योंकि खाली दिमाग शैतान का घर। इतना टाइम था नहीं कि लड़की पटाने के लिए स्पेशल टाइम दूँ किसी को, तो सोचा क्यों ना भाभी पर ही कोशिश करी जाए।

एक दिन ऐसे ही रूम पर पड़ा पड़ा फ़ोन में लगा हुआ था तो भाभी आ गयी, बोली- सारा दिन गर्लफ्रेंड से चैट करते रहते हो?
तो मैंने कहा- भाभी जन्म से सिंगल हूँ, मेरी किस्मत में लड़की कहाँ।
भाभी बोली- क्यों नहीं है?
तो मैंने कहा- ना तो कोई आप जैसी खूबसूरत लड़की मिलती और अगर मिले तो उनके नखरे नहीं खत्म होते।

भाभी बोली- मेरे में अब वो बात कहाँ … अब तो बच्चों वाली हो गयी हूँ.
तो मैंने भी बोल दिया- बात तो आप में इतनी है कि मुर्दे भी देख के खड़े हो जायें।

इतना सुनते ही भाभी शर्मा गयी और मेरे पास आकर बैठ गयी।
भाभी पूछने लगी- कैसी लड़की चाहिए?
तो मैंने भी तपाक से बोल दिया कि मुझे तो ऐसी चाहिए जिसे बस मजे लेने और देने हों क्योंकि ये प्यार मोहब्बत वाले टोटके मेरे से नहीं होते।

भाभी बोली- बड़े भोले बनते हो … और निकले ऐसे?
तो मैंने कहा- क्या करूँ सिंगल रह रह के परेशान हो गया हूं और अब इस सड़ी हुई रजाई में अकेले नहीं सोया जाता.

तो भाभी ज़ोर ज़ोर से हँसने लगी।
मैंने मौके पे चौका मारना ठीक समझा और बोला- मजे तो आप जैसे शादीशुदा लोगों के हैं जो जब चाहें, जहाँ चाहें कुछ भी कर सकते हैं।

इस बात पर भाभी थोड़ा उदास हो गयी और बोली- तुम्हारे भैया 15 दिन में एक बार घर आते हैं तो मेरी और तुम्हारी जिन्दगी में ज्यादा फर्क नहीं है।
मैं बोला- कोई लड़का दोस्त बना लो जो आपकी इच्छा पूरी कर सके!
तो उन्होंने कहा- मुझे किसी पर विश्वास नहीं है क्योंकि बाद में क्या पता कौन कैसा निकले।

मैंने कहा- अगर आपको ऐतराज़ ना हो तो हम एक दूसरे की जरूरत पूरी कर सकते हैं. ना किसी बाहर वाले को पता चलेगा.
इस पर भाभी थोड़ा गंभीर होकर बोली- देखते हैं क्या होगा क्या नहीं।

बस इतने से ही मैं समझ गया कि बात बन जायेगी लेकिन कोशिश करनी पड़ेगी।

मैंने कहा- देखना क्या है, अगर मन हो तो बता दो … वरना मैं कहीं और ट्राय करूँगा।
भाभी बोली- ठीक है … लेकिन प्रॉमिस करो कि सब बातें अपने बीच में रहेंगी।
मैंने कहा- चिंता ना करो … आपका भरोसा नहीं तोडूंगा मैं।

इसके बाद उनके लड़के का स्कूल से आने का टाइम हो गया तो भाभी बोली- तो जा रही हूँ, कल दोपहर को आऊँगी तुम्हारे पास अपना मजा लूटने!
मैंने कहा- जाते जाते मेरा मुँह तो मीठा करा दो!
इतना बोलते ही भाभी ने मुझे कस के पकड़ लिया, मेरे होंठों से अपने होंठ मिला दिए और ज़ोर ज़ोर से चूसने लगी जैसे कि इनको खा जायेगी।

नयी चुत के बारे में सोचते ही मेरे लंड ने सर उठा लिया और पैंट के ऊपर से ही भाभी की चूत के सामने सलाम ठोकने लगा। भाभी मुझे गर्म करके चली गयी और मुझे अपनी आग बाथरूम में निकालनी पड़ी।
पूरी रात बड़ी मुश्किल से करवट लेके कटी क्योंकि लंड बैठने का नाम ही नहीं ले रहा था।

सुबह उठा, अच्छे से नीचे की सफाई करी और नहाकर थोड़ी देर बाहर घूमने चला गया।
11 बजे आकर मैंने खाना खाया और भाभी का इंतज़ार करने लगा। एक एक पल काटना मुश्किल हो रहा था क्योंकि जो मजा शादीशुदा चुत देती है वो कुंवारी लड़कियों के बस की बात नहीं।

शादीशुदा का इतना ज्यादा चुदाई का अनुभव होता है और इनको पता होता है कि कब और कैसे लंड का असली मजा लेना होता है, ना ही ये लड़कियों की तरह ज्यादा नखरे करती, ना ही इनको कुछ करने के लिए ज्यादा बोलना पड़ता बस अपने आप बढ़िया पोजीशन में चुद लेती हैं।

कुछ देर बाद भाभी का फ़ोन आ गया कि आ रही हूँ। मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं था क्योंकि आज लंड का चुत से दंगल होने वाला था।

भाभी जब रूम में आयी तो मैं देखता ही रह गया। गुलाबी सुर्ख होंठ, खुले बाल और बदन से चिपका हुआ सूट जिसमें उनकी 34 साइज की चूचियां बिल्कुल सीधी तनी हुई थी। नीचे उन्होंने बिल्कुल टाइट सलवार पहन रखी थी जिसमें उनकी मोटी और गदराई हुई टाँगें महसूस हो रही थी।

आते ही मैंने उनको बांहों में भर लिया और ज़ोर ज़ोर से होंठों पर चुम्बन करने लगा. भाभी ने भी ज़रा सी देर नहीं लगाई और ज्यादा जोश से मेरे मुख में जीभ डाल के चुम्बन का मजा लेने लगी। बहुत देर तक हम ऐसे ही एक दूसरे को चूमते चाटते रहे और लंड ने मेरी पैंट में तंबू बना दिया.

भाभी की भी शायद कुछ ऐसा ही हाल था क्योंकि उनकी साँसें ज़ोर ज़ोर से ऊपर नीचे हो रही थी। मैंने उनका कुरता उतार कर उन्हें बेड पर लेटा दिया। काली ब्रा के नीचे से उनके दूध की तरह गोरी चूचे मुझे पागल कर रहे थे।

मैंने भाभी की ब्रा को उतारा तो इतने गोरे निप्पल थे जैसे की किसी कुंवारी लड़की के हों। मैंने एक चूची को मुँह में भर लिया और दूसरी को हाथ से दबा दबा के चूसने लगा। भाभी की सिसकारियां निकलने लगी।
मेरी आदत के अनुसार मैं निप्पल को मुँह में लेकर दांतों से हल्का हल्का काटकर चूस रहा था तो भाभी भी जोर जोर से आहें भर रही थी। एक निप्पल को जीभ से टॉफ़ी की तरह चूस रहा था और दूसरे को उंगलियों के बीच फंसाकर मसल रहा था। इससे भाभी की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी।

इसके बाद मैंने भाभी की दोनों बांहें ऊपर की तरफ कर दी और उनकी चिकनी और गोरी बगल वाली जगह को चूमने लगा, कभी वह स्थान जीभ से चाटता तो कभी होंठों से किस करता. इससे भाभी को गुदगुदी और मजा दोनों महसूस हो रहे थे और वो नागिन की तरह मुझसे लिपटती जा रही थी।

मेरा एक हाथ साथ की साथ उनकी चूचियों की रगड़ाई कर रहा था। मैं उनके हर अंग को खा जाना चाहता था ताकि पता चले कि उनके कमजोर हिस्से कौन से हैं। इसके बाद मैंने उनकी दोनों चूचियों को पकड़ के आपस में मिला दिया और उनके बीच में अपना मुँह डाल के जीभ से चाटने लगा।

भाभी का पेट किसी मोबाइल की तरह कांपने लगा, उन्होंने अपनी टाँगें कस के बन्द कर ली और सलवार का चुत के सामने वाला हिस्सा गीला होने लगा। चूचियों के बीच से जीभ निकाल कर मैं नीचे की तरफ आने लगा और उनकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ से अपनी तरफ खींच के पेट पर चुम्मों की बौछार कर दी।

भाभी मेरी बांहों में पड़ी पड़ी अंगड़ाइयां तोड़ने लगी और मेरे सर को पकड़ कर चुत के मुंह पर ले जाने लगी। मैंने भी ज्यादा देर न करते हुए उनकी सलवार और पैंटी एक झटके में उतार दी।
भाभी की लंबी केले की तरह भरी भरी चिकनी टाँगें जिन पर हाथ भी फिसल रहा था, उनकी माँसल जाँघें मधुमक्खी के छत्ते की तरह लटक रही थी.

और दोनों टांगों के बीच भाभी की चिकनी चुत को देखते ही मैं अवाक रह गया, बिल्कुल कुंवारी लड़की की तरह गुलाबी होंठ आपस में चिपके हुए पानी से तरबतर थे और बिल्कुल संतरे की फांक की तरह ऐसे लग रहे थे जैसे इनका रस कभी चूसने से भी खत्म नहीं होगा.
चुत ने पानी निकाल के बेड शीट पर भी दाग बना रखा था।

मैंने भाभी की एक टांग को उठा लिया और उनके पैर की उंगलियों को बारी बारी से चूसने लगा और एक हाथ से उनकी गोरी टांगों को सहलाता रहा। उनके चिकनी और गुदगुदी टाँगें मुझे रोमांचित कर रही थी.
मैं उनको चूमने के साथ साथ हाथों से चुचियों को भी बेदर्दी से मसल रहा था और भाभी भी हर हरकत पर पूरे मजे ले रही थी।

मैंने भाभी की टाँगें चौड़ी कर दी और उनकी माँसल जांघों को आइसक्रीम की तरह चूसने और चूमने लगा. भाभी भी आहें भर भर के आनंद लेने लगी और कसमसाते हुए बोली- चुत की तरफ भी देख लो … कही इसका पानी न खत्म हो जाये।

मैं भाभी की टांगें, बांहें और ऊपर का सारा हिस्सा चख चुका था तो अब बस पूरा ध्यान चुत पर देना था। ज्यादा देर न करते हुए मैंने अपनी जीभ हल्की सी बाहर निकाली और चुत के होंठों की दरार के बीच आराम से घुसा दी।

भाभी ने एक लंबी सी सिसकारी ली उम्म्ह… अहह… हय… याह… और मेरे सर को पकड़ के चुत पर दबा दिया। चुत की भीनी भीनी खुशबू मेरी नाक को ठंडी करने लगी और नमकीन पानी को चख कर अलग ही मजा आया।

मैंने पूरी जीभ बाहर निकाल के चुत में डाल दी तो चुत के अंदर की खुरदुरी दीवारों की गर्माहट ने मेरे लंड को एकदम कड़ा कर दिया। मैं कभी जीभ अंदर डालता और कभी चुत के होंठों को बारी बारी से चूसता, बीच बीच में चुत के दाने को टॉफी की तरह जीभ से टच करके भाभी में करंट छोड़ देता. चुत का पानी झरने की तरह बह रहा था और मैं जितना पीने की कोशिश करता, वो उतना ही ज्यादा निकलता।

भाभी ने कहा- अब और ज्यादा मत तड़पाओ … अब इसकी आग शांत कर दो.
मैं भाभी को थोड़ा और तड़पाना चाहता था इसीलिए लंड को उनकी चुत पर रख के ऊपर नीचे फिराता रहा और कभी हल्का सा अंदर डाल के फिर बाहर दाने पर मार मार के चुत पर रगड़ने लगता। इससे भाभी के सब्र का बाँध टूट गया और उनकी आग भड़क उठी।

जैसे ही मैंने दुबारा लंड का मुंह चुत के अंदर डाला, भाभी ने एकदम से मुझे पकड़ा और नीचे से जोर का झटका मारा। लंड एकदम से चुत को चीरता हुआ भाभी के अंदर घुस गया और बच्चादानी से जा टकराया.
भाभी के मुख से एक चीख निकल गयी और चिल्लाकर बोली- मार दिया हरामी ने।

भाभी ने मुझे ज़ोर से जकड़ लिया और नीचे से ही खुद उछल कर झटके मारने लगी। जब वो थक गयी तो फिर मैं शुरू हो गया और चुत को रौंदने लगा. भाभी आँखें बंद करके मजे ले रही थी और हर झटके से उनकी बस आहें निकल रही थी और वो कराह रही थी।

इस पोजीशन में करते करते मैं थक गया तो मैंने भाभी को उठाकर नीचे खड़ा कर दिया और खड़े खड़े उनको बेड पर कोहनियों के बल झुका दिया। उनकी चुत के मुंह पर लण्ड को सेट करके धीरे धीरे अंदर पहुंचा दिया और चुत ने भी अपना मुँह खोल के लण्ड को पूरा निगल लिया. मैंने भाभी की दोनों जांघों को पकड़ के धक्के मारने शुरू कर दिए. लण्ड फच फच की आवाज़ों के साथ चुदाई करने लगा।

बीच बीच में मैं उंगलियों से भाभी के दाने को सहला देता तो भाभी का शरीर कांपने लगता। लण्ड सीधा था और चुत का मुँह नीचे की तरफ तो चुत लण्ड के बीच कुंवारी चुत की तरह घर्षण बहुत ज्यादा हो रहा था, इससे भाभी को दुगुना मजा आ रहा था और उनकी आहें बढ़ती जा रही थी जो मेरी भी उत्तेजना बढ़ा रही थी।

मैंने उनके दोनों चुचों को दबा लिया और चुदाई के साथ साथ उनको बुरी तरह रगड़ रहा था. बीच बीच में उनकी पीठ पर सहला देता और कभी चूमता तो भाभी मजे में पीछे मुड़ के मुझे किस करने लगती।
मैं भी उनको और ज्यादा भड़काने के लिए चुदाई करते करते उनके कंधों पर काट काट के नीचे से स्पीड बढ़ा के जोर जोर से लण्ड से ठुकाई कर रहा था।

भाभी बदहवास होकर बड़बड़ाने लगी थी और चिल्ला चिल्ला के कह रही थी- भोसड़ा बना दो चुत का, आज से तुम्हारी रंडी हूँ जब मर्जी चोदना, जब भी लण्ड को भूख लगे बुला लेना कमरे पर चुत हाजिर हो जायेगी।

भाभी की ये बातें मुझे भी भड़का रही थी और मैं चुत को मशीन की तरह चोद रहा था। चुत के पानी ने लण्ड को चिकना बना दिया था और पिस्टन की तरह चुत में तांडव कर रहा था। चुत ने लण्ड के चारों तरफ एक ग्रिप सी बना रखी थी जो लण्ड के अंदर बाहर होने के साथ साथ आगे पीछे हो रही थी।

सेक्स के आनन्द से भाभी का शरीर अकड़ने लगा तो वो बोली कि उनका काम तमाम होने वाला है.
इतना सुनते ही मेरे शरीर से भी करंट सा निकलने लगा और मैंने धक्कों की गति बढ़ा दी, 10-12 गहरे और तेज झटके मारते ही लंड उफान पर आ गया. जैसे ही मेरा लावा निकलने को हुआ, मैंने पीछे से चुत में लण्ड से जोर का झटका मारते हुए भाभी की कोहनी को एकदम से हटा दिया जिससे वो चूचियों के बल बेड पर गिर पड़ी. लण्ड के दबाव को चुत सहन नहीं कर पायी, भाभी ने भी एक ज़ोर की चीख मारी और चुत से पानी का फव्वारा निकल पड़ा जिसकी गर्मी मेरे लण्ड को पिघला गयी और वो भी झटके मारते हुए चुत की दीवारों को नहलाने लगा।

हम एक दूसरे के पानी की गर्मी महसूस कर रहे थे, हमारी साँसें उखड़ रही थी और हम एक दूसरे के अंदर घुसने को बेताब थे।

धीरे धीरे हमारी साँसें सामान्य हुई तब तक मैं उनके ऊपर पड़ा रहा और चुत लण्ड के पानी को पूरा निचोड़ गयी।

मैंने प्यार से उनकी गर्दन पर चुम्बन किया और भाभी के चूतड़ पर थप्पड़ मार के उनकी बगल में लेट गया। उन्होंने प्यार से मेरी तरफ देख के मेरी बाजू पर एक लव बाईट दिया और कपड़े पहनने लगी।

मैंने कहा- अभी तो एक राउंड और मारूँगा!
तो बोली- जल्दी क्या है … अब तो ये चुत तुम्हारी गुलाम है, लड़का स्कूल से आने वाला होगा।

वो मेरे सामने कपड़े पहन रही थी और मैं उनके संगमरमर जैसे शरीर के दर्शन कर रहा था. मैंने उनकी पैंटी को निशानी के तौर पर अपने पास रख लिया और वो कपड़े पहनने के बाद मुझे एक चुम्मा देकर नीचे चली गयी।

आपको मेरी कहानी कैसी लगी? प्लीज जरूर बताएं ताकि मैं अगली कहानी और अच्छे से पेश कर सकूँ।


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