होली में भाई के दोस्तों ने मेरी चूत में गुलाल भरा और घंटों मुझे चोदा

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हेलो दोस्तों, मैं अर्पिता आप सभी को अपनी मस्त चुदाई कहानी सुना रही हूँ. मुझे कुछ दिन पहले की SexKahani.net के बारे में पता चला है. तबसे मैं रोज यही की मस्त ठुकाई वाली कहानियाँ पढ़ती हूँ. तो आपको अपनी कहानी सुना रहीं हूँ. वो पिछली २०१६ की होली की याद आज भी मेरे दिलो दिमाग में फिट है. मैं सुबह सुबह रसोई में थी और अपने भाई नकुल और उनके दोस्तों के लिए गुझिया सेक रही थी. मैंने सफ़ेद रंग का सलवार सूट पहन रखा था. माँ बाप के मरने के बाद मेरी जिन्दगी में बस नकुल भैया ही थे.

हर साल उनकी दोस्त मण्डली कम से कम २० लडकों की फ़ौज होली में आती थी और मेरे हाथों की बनाई गुझिया, पापड़, समोसे, और अन्य चीज चट कर जाती थी. इसलिए आज के दिन भी मैं नकुल भैया और उनके दोस्तों के लिए तरह तरह के पकवान बना रही थी. मैंने थाली भरके पापड़, गुझिया, समोसे बना लिए थे, पर भैया का हुक्म था की मीठे दही बड़े भी उसकी दोस्त मंडली के लिए बनाये जाए. इसलिए अब मैं मीठे दही बड़े बना रही थी. काम हो भी ना पाया की नकुल भैया के दोस्त आ गये. कम से कम २० लडके होंगे. मैं उनमे से हरमन को पहचानती थी. क्यूंकि वो अक्सर घर आता रहता था. सुबह तडके ६ बजे नकुल भैया अपने दोस्तों के साथ होली खेलने निकल गए थे. अब १० बजे उसकी फ़ौज लौट आई थी. सब के सब मोटर साइकिल से होली खेलने गये थे. नकुल भैया जब लौटे तो दरवाजा पीटने लगे. ‘ऐ!! अर्पिता!! जल्दी दरवाजा खोल!!’ भैया बोले.

मैं झट से दरवाजा खोलने गयी. मैंने अपना सोफे पर पड़ा दुपट्टा ले लिया और अपने सीने पर डाल लिया. क्यूंकि भैया अकेले नही थी. उनके साथ में उनके २० दोस्त थे. मैंने जवान थी. मेरी छातियाँ भी उभर आई थी. बड़ी बड़ी हो गयी थी. इसलिए मैंने जल्दी से झपट के दुपट्टा छाती पर डाल लिया. दरवाजा खोला तो नकुल भैया के मुँह से तेज शराब का भभका आया.

क्या भैया ? मैंने आपसे कहा था ना की शराब ना पीना फिर भी आपने पी ली ??’ मैंने गुस्सा करते हुए कहा

भैया शराब के नशे में हँसे.

‘ऐ छोटी!! देख आज होली है. इसलिए शराब कोई बड़ी बात नही. सब पीते है आज के दिन. जा मेरे दोस्तों के लिए गुझिया और सब चीज जो मैंने तुमको बताया था लेकर आ’ भैया बोले. मुझे थोडा ख़राब लगा क्यूंकि भैया शराब पियें ये मुझे कभी पसंद नही थी. उनके दोस्त सोफे पर आकर बैठ गये. सब के सब नशे में टल्ली थे. सबके मुँह से शराब की तेज बू आ रही थी. मैंने मुँह बनाकर अंदर चली गयी. फिर उनके दस्तों के लिए गुझिया और अन्य सामान ले आई. भैया का सबसे ख़ास दोस्तों हरमन ने मेरा हाथ पकड़ लिया. ‘ऐ अर्पिता!! मेरे साथ होली तो खेल!’ हरमन बोला और उसने मेरे गाल , मत्थे पर ढेर सारा गुलाल लगा दिया. मुझे भी शरारत सूझी. मैं हाथ में डार्क हरा रंग छिपाकर लाई और हरमन के लगा दिया. भैया के बाकी १९ दोस्त कुछ जादा ही पिये हुए थे. २ २ गुझिया खाकर सब के सब फर्श पर शराब के नशे में लुढ़क गये. हरमन और मैं पुरे हाल में दौड़ दौड़ कर एक दूसरे को रंग लगाने लगा.

‘यार! ये अर्पिता तो बड़ी गजब की मॉल है यार. इसकी चूत बड़ी मस्त होगी. देख कितनी गोरी है’ भैया के एक दोस्त बोला. उसके पुरे मुँह में ढेर सारा नीला, हरा रंग लगा था इसलिए मैं उसको पहचान ना पायी. ‘हाँ नकुल की बहन को चोदने लायक हो गयी है. देख देख!! पीठ कितनी बड़ी और विशाल है. मम्मे तो किसी अमरुद से कम नही है’ दूसरा बोला. मैंने उसे बोलते सुना. तबी तक हरमन ने मुझे भांग वाला लड्डू देसी गुड वाला लड्डू बताकर खिला दिया. उसको खाते की मैं हँसने लगी.

‘भाई हरमन!! इसे कमरे में ले जा और इसको चूत में गुलाल भरके होली खेल!! तब ही तुझे होली का असली मजा मिलेगा’ एक दूसरा लड़का बोला. मैंने उसको ये बोलते साफ साफ सुना. मेरे नकुल भैया शराब के नशे में टल्ली होकर फर्श पर लुढ़क गए थे. इधर मैंने भांग का लड्डू खा लिया था. हरमन मुझे अंदर कमरे में ले गया. उनके मुझे अपनी गोद में उठा लिया था. भांग के नशे से मेरा सर लगातार घूम रहा था. मुझे हर चीज २ २ ४ ४ दिख रही थी. मैं लगातार हसे जा रही थी. मेरे गोरे गाल और पुरे मुँह पर भाई के सबसे ख़ास दोस्त हरमन ने ढेर सारा गीला वाला पक्का रंग डाल लगा दिया था. मैं बिलकुल कोई भूतनी लग रही थी. उधर हरमन को भी मैंने पुरे मुँह में ढेर सारा पक्का रंग लगा दिया था. वो भी किसी भुत से कम नही लग रहा था. उसने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया. मैं नशे में थी और हसे जा रही थी.

हरमन ने मेरा दुपट्टा खींच कर किनारे फेक दिया. मेरा सूट निकाल दिया. मैंने समीज पहन रखी थी. हरमन मेरी जवानी देख के ललचा गया. फिर उसने मेरी समीज निकाल दी. उसको मेरे २ उज्जवल बेहद ठोस मम्मे मिल गये. मेरे सिर्फ चेहरे पर ही रंग लगा था. बाकी का मेरा बहन गोरा और साफ था. मेरी मदमस्त जवानी देख के हरमन की नियत खराब हो गयी. तब तक एक दूसरा दोस्त उस कमरे में आ गया जहाँ हरमन मुझे ले आया था.

‘ऐ हरमन तू गांडू है क्या?? अरे बहनचोद!! नकुल की मस्त मस्त बहनिया को चोदने का तुझे अच्छा मौका मिला है. अबे बहनचोद!! इसकी चूत में गुलाल भर ना’ वो लड़का बोला. ये सुनते ही हरमन का लौड़ा उफान मारने लगा. उसने अपनी रंग से सनी पैंट निकाल दी. फिर चड्ढी निकाल दी. मैं तो भांग के नशे में थी. लगातार हंस रही थी. मैं नही जानती थी की आज पहली बार मेरी चूत में गुलाल भरा जाएगा. फिर मुझे किसी कुतिया की तरह चोदा जाएगा.

‘ऐ नीरज!! आज साथ में अर्पिता की चूत में गुलाल भरते है. फिर साथ में इस कुतिया को पेलते खाते है’ हरमन बोला. उसके कहने पर उस दुसरे लडके ने अपनी रंग से भरी पैंट निकाल दी. कच्छा निकालते ही उसका लौड़ा फनफना गया. मैं हंसती ही रही. हरमन ने मेरी सलवार का नारा सररर की आवाज करते खोल दिया. मेरी सलवार निकाल दी, फिर मेरी पैंटी निकाल दी. कल ही मैंने अपनी चूत की झांटे साफ़ की थी. मस्त मस्त भरी भरी सफ़ेद लाल लाल चूत के दर्शन हरमन और नीरज को हो गये.

‘ले!! अर्पिता! आज तेरी चूत में गुलाल भर दिया मैंने!’ हरमन बोला. उसने अपनी शर्ट की पॉकेट से गुलाल वाली पन्नी खोली. २ बड़ी चुटकी गुलाल लिया और मेरी चूत में नीचे से उपर तक भर दिया. लगा जैसे किसी लड़के ने किसी लडकी की मांग में सिंदूर भर दिया. ‘ये हुई ना बात!!’ नीरज बोला. वो भी अपने मुँह में बिलकुल भालू लग रहा था.

‘ले नीरज!! तू भी नकुल की बहनिया के भोसड़े में गुलाल भर दे’ हरमन ने कहा. नीरज ने पिन्नी से २ बड़ी चुटकी गुलाल लिया और एक बार फिरसे मेरे चूत की फाक में नीचे से उपर अच्छे से भर लिया. मैं बांवरी नासमझ थी. भांग वाले लड्डू के नशे में हसे जा रही थी. मैं नही जान पायी की की मेरी कोमल नादान चूत में २ २ बार गुलाल भरा जा चुका है. और मेरी चूत आज होली के दिन २ २ बड़े बड़े खीरे [लौड़े] के साथ होली खेलने वाली है. ‘भाई बड़ी ही तीखी मिर्ची है. जरा कायदे से पेलना इसको!!’ नीरज बोला.

अब दो दो बार मेरी मासूम कच्ची कली वाली चूत में गुलाबी रंग का गुलाल भरा जा चूका था. हरमन मुझ पर लेट गया और मेरे मम्मो को हाथ से दबाने लगा. फिर मेरी को मुँह में भरके पीने लगा. बेटीचोद नीरज वहीँ बगल में खड़ा था. उसका खीरा [ बड़ा सा लौड़ा] उसके हाथ में था. उसका लौड़ा पूरी तरह खड़ा हो गया था. पर हरमन पहले मुझे चोदने वाला था. इस वजह से नीरज अपने खीरे पर मुठ दे रहा था. हरमन मेरे दोनों ठोस ठोस बड़े बड़े दूध पीने लगा. मैं भी चेहरे पर रंग लगवाकर बंदरिया लग रही थी, उधर बहनचोद हरमन जो मेरे भैया का खास दोस्त था वो भी पूरा बन्दर लग रहा था. नकुल भैया के बाकी १८ दोस्त वहीँ हाले में थे. सब के सब शराब के नशे में लुढ़क चुके थे. जबकि हरमन और नीरज मुझे कमरे में चोदने खाने के लये ले आये थे. हरमन मेरे अमरूदों को जोर जोर से दबा रहा था और पी रहा था. मैं नग्न थी. बिलकुल गजब का सामान मैं लग रही थी.

हरमन ने मेरी कमर में नीचे से हाथ डाल दिया और सीने में भर लिया. मेरे गदराए जिस्म और चूत की खुसबू उसकी नाक में चली गयी. ‘अबे ओ बहनचोद हरमन!! तेरे बेस्ट फ्रेंड नकुल की बहनिया है ये!! प्यार से चोदना!! दांत वांत मत काटना बेटीचोद!! दोस्त की बहनिया है ये! कोई रंडी नही है. ध्यान से बे !!’ नीरज पीछे से बोला. हरमन तो जैसे मुझे देखकर पागल हो गया. वो भोसड़ी का मेरे मम्मे, कंधे, पेट को दांत से जोर जोर से काटने लगा. मैं नशे में थी. कुछ नही जान सकी. फिर हरमन मेरी चूत पीने लगा. मेरी चूत में जो दोनों ने ढेर सारा गुलाबी गुलाल दोनों ने भरा था वो हरमन के मुँह और ओंठ पर लग गया. मैं भांग के नशे में हंसती रही. हरमन अपनी ऊँगली से मेरी चूत खोलकर पीता रहा. फिर अपने हाथ में उस बेटीचोद ने ढेर सारा थूक लिया और लौड़े में मल लिया. हरमन ने मेरे भोसड़े में लौड़ा दे दिया. मैं इससे पहले अपने बॉयफ्रेंड से कई बार चुदी थी इसलिए मुझे दर्द नही हुआ. मेरे भोसड़े में लौड़ा देते की हरमन के लौड़े में वो गुलाबी गुलाल लग गया. बेटीचोद मुझे अपना पर्सनल माल समझ के पेलने लगा. मुझे बड़ा अच्छा लगा. हरमन ने मेरे दोनों सुंदर चांदी से सफ़ेद घुटने हाथ से पकड़ लिए और किसी रंडी की तरह मुझे चोदने लगा.

मुझे जादा होश नहीं था. मैं ये भी नही जान पा रही थी की कोई मुझे चोद रहा है. हाँ बस मुझे अच्छा लग रहा था. नीरज से मुझे हरमन से चुदते देखा तो ललचा गया. ‘अबे हरमन!! बेटीचोद! प्यार से पेल इसको. कोई रंडी नही है तेरे दोस्त नकुल की बहनिया है!’ नीरज नशे में बोला.

‘अरे कोई भी छिनाल हो. इसकी चूत में तो मैंने गुलाल भर ही दिया है. अब इसको मनमुताबिक खाऊँगा!’ हरमन बोला और जोर जोर से ताबडतोड़ धक्के देने लगा. मुझे बड़ा जूनून चढ़ गया. हरमन मेरे मम्मे को पीने लगा और फट फट करके मुझे चोदने लगा. नीरज मुझे चुदता देख के अपने लौड़े पर मुठ दे रहा था. हरमन मुझे घपा घप पेल रहा था. कोई २० मिनट बाद वो झड गया. उसने लौड़े बाहर निकाल और मेरे मुँह पर झार दिया मुठ देते हुए. मैं भांग के नशे में थी.माँ के लौड़े हरमन ने मुझे १ राउंड चोद लिया तो दूसरा माँ का लौड़ा नीरज आ गया. पहले तो गांडू ने मेरे अमरुद दबा दबाकर पिये. फिर मेरे भोसड़े में लौड़े दे दिया और घर का माल समझ के मेरी बुर का दाना कूटने लगा.

‘ओये नीरज!! बहनचोद! मुझे तो बहुत ज्ञान बात रहा था. अब प्यार से पेलियों इसको. कोई रंडी नही है नकुल की सगी बहनिया है ये!’ हरमन बोला

‘अबे गांडू हरमन! तूने ने इसको मनमुताबिक खाया है इसको. अब मुझे पट्टी पढ़ा रहा है. चुप गांडू!’ नीरज बोला और मुझे पटर पटर ठोकने लगा. एक बार फिर से मुझे बहुत मजा मिल रहा था. मैं ये नहीं जान पा रही थी की मेरे भैया के दोस्त इस वक़्त मुझे होली के बहाने से ठोक रहे है. पर मैं ये समझ रही थी की मेरे साथ कुछ हो रहा है. कोई मेरे साथ कुछ तो कर रहा है. ये बात मुझे साफ साफ पता चल रही थी.

नीरज बहनचोद मेरी चूत के होठ अपने हाथ से सहलाने लगा. मुझे मजा आया. मेरी चूत के दाने को सहला सहला कर हरामी मुझे खाने लगा. कुछ देर बाद नीरज ने जल्दी से अपना लौड़ा मेरी बुर से निकाल लिया और मेरे गोरे गोरे पेट पर माल गिरा दिया. तब तक उस हरमन बहनचोद का खीरा [लौड़ा] फिर से तैयार था. जैसे ही नीरज हटा हरमन फिर आ गया. मेरी चूत के ओंठ पर उसने अपना बड़ा सा खीरा रखा और कुछ देर दाए बाए चूत के ओंठ पर घिसता रहा. मेरी चूत सहम गयी. फिर हरमन ने अपना खीरा मेरे भोसड़े में डाल दिया. मुझे चोदने लगा. मुझे लगा की जैसे कोई मोटा सा रस्सा मेरी चूत में आ और जा रहा है. हरमन जोर जोर से मेरे मम्मे को हाथ से दबा दबाकर मुझे खाने लगा. एक बार फिर से मैं उससे चुदने लगी. मेरे बाल बिखर गये थे. मेरे पुरे मुँह पर रंग लगा था. मैं कोई देसी बंदरिया लग रही थी और अपने भैया के सबसे अच्छे और करीबी दोस्त से चुद रही थी.

मुझे नही मालूम था की आज मेरी चूत २ २ खीरे [लौड़े] के साथ होली मनाएगी. ये बात मुझे जरा भी नही पता थी. बड़ी देर तक हरमन मुझे खाता रहा. फिर उसने मेरी फटी पर गुलाबी गुलाल से रंगी चूत से अपना बड़ा सा खीरा [लौड़ा] निकाल लिया. पास पड़ी २ मोटी तकिया उसने उठाई और मेरी कमर के नीचे लगा दी. मेरी गांड का छेद उपर आ गया. हरमन मेरे भैया का ख़ास दोस्त अब लेटकर मेरी गांड के छेद को पीने लगा. मुझे कुछ नही पता चला. कुछ देर बाद हरमन ने फिर से अपनी हथेली में ढेर सारा थूक मुँह से थूका और गुलाबी लौड़े में मल लिया. मेरे दोनों उजले चुतड को उसने उपर किया और मेरी गांड में लौड़ा दे दिया. मुझे बहुत दर्द हुआ. पर मैं जान नही पाई. हरमन मेरी गांड चोदने लगा. बाप

रे!! उस गांडू का खीरा[लौड़ा] बहुत मोटा था. वो मुझे बड़ी देर तक चोदता रहा. फिर उसने मेरे मुँह पर सारा चिपचिपा माल गिरा दिया. उसके बाद दोस्तों नीरज ने भी मेरी गांड मारी. ये कहानी आपको कैसी लगी, अपनी कॉमेंट्स नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर जरुर लिखकर बताएं.


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