जहाँ चाह वहीं चूत
चोदने के लिए बेचैन बेलन! ये आरजू है कि एक चूत हमको मिल जाए, लन्ड के धागे से गांड मेरी सिल जाए, फटे जो मुह में घुसाके ही मेरी ले लेना, ऐसा कोई यार हो जो यार मुझपे पिल जाए। ये शायरी गुनगुनाते हुए बेलन जब अपने कालेज जा रहा था तो उसको सुबह की घास पर बिखरी ओस की बूंदें और चारो तरफ खड़ी अरहर की घनी खेती को देख कर कभी भी अंदर घुस कर के मूठ मार लेने का मन कर रहा था। बड़ी ही सूखेपन की...