मैं आज एक और सच्ची चुदाई की कहानी लेकर हाजिर हूं। मैं आज आपको ज्योति की चुदाई के बारे में बता रहा हूं कि किस तरह मैंने ज्योति की चूत को तेल लगाकर चोदा था। दोस्तों ज्योति मेरे गांव की है और हम दोनों स्कूल साथ में पढते थे। मैंने ज्योति को ग्यारहवीं में चोदा था। तब वो 18 साल की थी और मैं भी। दोस्तों मैं आपको ज्योति के बारे में बता दूं कि वो सांवली है और कद छोटा है। उसके बूब्स भी ज्यादा बडे नहीं हैं लेकिन उसके पुट्ठे बडे बडे हैं । दोस्तों ज्योति मेरे साथ काफी अच्छी तरह से बातचीत करती थी।

मैं क्लास में उसे देखा करता था और वो मुझे देखती थी और हंसती थी।  मैं पढने में अच्छा था तो मैंने उसकी नोट्स बनाने में बहुत हेल्प की थी। मैंने उसे एक दिन पूछा कि  तुम मुझे देखकर हंसती क्यों हो तो बोली कि मुझे तुम अच्छे लगते हो। मैं बोला क्यूं तो वो बोली कि  सब लोग स्कूल में तुम्हें अच्छा मानते हैं। तुम पढने में भी अच्छे हो।  मैं समझ गया था कि वो मुझे चाहती है। फिर क्या था मेरी और उसकी दोस्ती दिनों दिन बढ रही थी। एक दिन उसने मुझसे कह ही दिया कि आई लव यू ।

मैंने भी उससे आई लव यू कह दिया।

बस फिर तो प्यार बढता ही गया और मुझे ज्योति की चुदाई करने का मौका मिल गया। मैंने अब कभी कभी ज्योति के बूब्स छू लेता था और कभी कभी उसे किस करता था। वो मना नहीं करती थी बल्कि उसे इन सबमें मजा आने लगा । मैं कई दिन तक सिर्फ उसके बूब्स ही दबाता रहा । और कभी कभी उसके पिछवाडे भी छू लेता था।

अब हम दोनों की चाहत बढ गई थी। मैं ज्योति को गिफ्ट्स और चाकलेट देता था। मैंने ज्योति से  एक दिन कहा कि क्या तुम्हें सेक्स पसंद है तो उसने हां में जवाब दिया। मैंने कहा कि मेरे साथ करोगी तो उसने कहा कि करुंगी लेकिन अगर किसी को पता चल गया तो । दोस्तों आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है | वो डर गई थी तो मैंने उसे कहा कि डरो मत किसी को कुछ पता नहीं चलेगा। वो मान गई और बोली ठीक है। जब उसने हां कर दी तो मुझे उससे चोदने की इजाजत मिल गई थी। मैंने उसे अपने घर पर बुलाया। उस दिन घर पर मैं अकेला था।

बस फिर ज्योति आई और मैंने उसे अपने कमरे में बैठा लिया। फिर पानी लाया और उसे पिलाया। तो वो बोली कि गरमी बहुत है तो मैं उसके लिये जूस भी ले आया। फिर हम दोनों ऐसे ही बात करने लगे। बातों बातों में चुदाई की बात आई तो मेरा लंड खडा हो गया और एकदस सख्त हो गया। मैंने उससे कहा कि चलो न अब शुरू करते हैं। तो मैंने सबसे पहले उसके कपडे उतारे और उसको बैठे रहने को कहा फिर मैंने अपने भी कपडे उतार दिए। और नंगी ज्योति को गोदी में उठाकर बेडरूम में बिस्तर पर लिटा दिया। अब हम दोनों निर्वस्त्र थे और घर में एकदम अकेले। मैं ज्योति के माथे पर चुम्मा देने लगा और फिर उसके गालों पर किस किया।

उसके होंठ एकदम लाल थे ।

मैं उसके लाल लाल होंटो को चूमने लगा ।फिर मैने ज्योति की गर्दन और कान पर किस किया। वो सिसकारी ले रही थी। अब मैं उसके बूब्स दबाने लग गया जैसे जैसे मैं जोर से दबाता गया उसकी  उत्तेजना बढने लगी। फिर मैं उसके बूब्स चूसने लग गया और उसका दूध पी गया। अब मैं उसकी नाभि में उंगली देने लगा और उसे अपना लंड चुसवाने लगा। पहले तो उसने मना किया फिर चूसने लगी । मैं भी उसकी चूत चाट रहा था।

दोस्तों उसकी चूत एकदम गुलाबी थी और उसक स्वाद भी अच्छा था।

अब मैं उसकी चूत में उंगली डालकर अंदर बाहर कर रहा था। उसकी चूत बहुत ही कसी हुई थी। मैंने भी उसकी चूत को चिकना बना दिया ताकि चोदते वक्त उसे दर्द कम हो।  अब मैंने ज्योति को बाहों में भर लिया और उसे प्यार करने लगा । दोस्तों आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है | फिर मैंने सरसों का तेल लिया और ज्योति की चूत में लगा दिया और अपने लंड पर भी लगा दिया। अब हम चुदाई की शुरूआत करने लगे। मैंने ज्योति को कस कर पकड लिया जिससे वो ज्यादा हिल न सके। फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रख दिया । उसकी चूत एकदम गरम थी मैंने धीरे से धक्का लगाया तो थोडा उसकी चूत के अंदर चला गया। मैं आराम आराम से लंड को अंदर डाल रहा था।

अचानक मैंने एक जोर से झटका मारा और पूरा लं ज्योति की चूत में समा गया वो चिल्लाने लगी तो मैंने अपने होठों से उसके होंठ बंद कर दिये जिससे उसकी चीख न सुनाई दे। इस जोर से झटके के कारण उसकी चूत से खून निकलने लगा और वो रोने लगी । मैंने उसे सहलाया और कहा कि बस अब दर्द नहीं होगा। अब मैं अपना सात इंच लंबा लंड उसकी चूत में अंदर बाहर करने लगा और मेरा लंड भी अब आसानी से चूत में जा रहा था । ज्योति की चूत की सील टूट चुकी थी।

मैंने फिर से लंड और चूत पर तेल लगा दिया जिससे कि चिकनाहट और ज्यादा हो । मैं ज्योति की खून से सनी हुई चूत को चोद रहा था । ज्योति भी मजे से चुदवा रही थी। मेरे लंड से फच्च फच्च की आवाज से कमरा गूंज रहा था और ज्योति आह आह उई उई उम्म उम्म  कर रही थी। मैं एक कुंवारी कन्या को चोद रहा था।

मैं ज्योति को काफी देर तक चोदता रहा।

क्योंकि मुझे ज्योति को उसकी जवानी याद दिलानी थी। वो अब तक पांच बार झड चुकी थी। मैं उसे बीच बीच में रुक रुक कर चोद रहा था जिससे कि मैं देर में झडूं । अब मैं ज्योति को तेज गति से चोदने लगा और वो भी पूरा लंड उसकी चूत में पेल के। ज्योति का चेहरा लाल है गया था।  क्योंकि वो बहुत अच्छी तरह चुद चुकी थी। मैं अब भी झडा नहीं था। अब मैं उसे और भी स्पीड से चोद रहा था । वो कहने लगी उइ मां मरर गई । तुमने तो मेरी जान निकाल ली ।

मैं बोला क्यों तो वो बोली तुम्हारे इस मोटे और लंबे लंड ने मेरी चूत फाड दी अब मैं झडने वाला था तो मैंने उससे पूछा कि मैं अपना मार कहां डालूं । वो बोली मेरी चूत में छोड दो तो मैंने अपना सारा माल उसकी चूत में छोड दिया। और अब हम दोनों करीब आधे घंटे की चुदाई के बाद झड चुके थे। ज्योति की चूत खून से लाल थी और मेरा लंड भी खून से सना हुआ था। दोस्तों आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है | लेकिन ज्योति के चेहरे पर मुझसे चुदने की खुशी थी। वो बोली तुमने तो अच्छी तरह चोदा मुझे । फिर आधे घंटे बाद मैंने ज्योति की गांड भी मारी। और फिर हमने बाथरूम में जाकर नहाए और अपना शरीर ठंडा किया।

ज्योति मुझसे चुदकर बहुत खुश हुई क्योंकि मैंने उसे पूरा संतुष्ट किया था।

तब से अब तक ज्योति को मै पांच बार चोद चुका हूं। अब वो मेरे लंड की दीवानी है गई है और मैं उसकी चूत का। जब भी ज्योति को चोदने का मन करता है तो मैं उसे बुला लेता हूं और जिस दिन न आये उस दिन मुठ मार लेता हूं।

तो दोस्तों कैसी लगी आपको ज्योति की चुदाई। कमेंट जरूर करना। मुझे आपके मेल का इंतजार रहेगा।

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