आज भी चुदाती हूँ सिर्फ लंड बदल गया

मेरा नाम प्रीति दास है मेरी उम्र 20 साल है, Story पटना की रहने वाली हूँ मेरा खूबसूरत जिस्म 34 -24 -34 नाप का है रंग गोरा है। यह मेरी पहली Sex कहानी है, इसलिए कह नहीं सकती कि आपको यह पसंद आएगी या नहीं.. क्योंकि सच कईयों को पसंद नहीं आता।मैं देसी सेक्स स्टोरी पर पिछले एक साल से कहानियाँ पढ़ रही हूँ। मैं अभी अपनी स्नातक की पढ़ाई के पहले वर्ष की छात्रा हूँ और मैं आपको अपनी पहली ‘लव-स्टोरी’ या कहें तो काम-कथा सुनाने जा रही हूँ।यह कहानी दो लड़कों की है जो मेरी ज़िन्दगी में आए और मेरी ज़िन्दगी बदल भी गए, यह कहानी मेरे स्कूल के दोस्त अमित और मेरा पड़ोसी राकेश की है।

यह सब तब हुआ जब मैं 12वीं में थी, मैंने अमित को 11 वीं में देखा था, वो मेरी बस में मेरे साथ ही जाता था।
वो एकदम सीधा सा, बहुत ज्यादा शर्मीला, सांवला और औसत जिस्म का बंदा था, मगर उसकी आँखें और उसके होंठ जिनमें बहुत सी शरारत और ढेर सारा प्यार साफ़ झलकता था।

उसकी इसी सादगी की वजह से कई लड़कियाँ उस पर मरती थीं।

वो बहुत ही आकर्षक और सुन्दर छवि वाला लड़का था।

मुझे कब उससे प्यार हुआ.. मुझे भी पता नहीं चला।

हमेशा उसी के बारे में सोचती थी और उसके ही सपने देखती थी कि वो आएगा और मुझसे बात करेगा और फिर मुझे ‘प्रणय-निवेदन’ करेगा।

फिर न जाने क्या.. क्या.. उफ़.. क्या दिन थे वो..!

खैर दिन बीते और एक दिन हमारे स्कूल में चेकिंग शुरू हुई कि कोई मोबाइल तो नहीं लाया।

अमित ने पहली बार मुझसे बात की और कहा- हैलो तुम्हारा नाम प्रीति है ना.. और आप मेरी ही बस से जाती हो ना?

मैंने कहा- हाँ।

तो उसने कहा- क्या आप मेरा फोन थोड़ी देर के लिए अपने पास रख सकती हो?

मैंने बोला- हाँ… क्यों नहीं..

फिर वो अपना फोन मुझे दे कर चला गया।

यार उसका फोन जो था, रखा मैंने अपनी मम्मों के बीच और थोड़ी देर के बाद टॉयलेट में जा कर उसके मैसेज पढ़ने लगी, जिससे मुझे पता चला कि शायद उसकी जिन्दगी में कोई और है या वो किसी और को चाहता है।

मेरा दिमाग घूम गया और मैंने इस बात को पहले साफ़ करना जरूरी समझा।

मैं स्कूल से उसकी नजर बचा कर अपने घर चली आई।

घर पर तो कोई था नहीं.. मम्मी-पापा ऑफिस गए हुए थे और मेरी छोटी बहन स्कूल में थी।
उसका स्कूल दूसरी शिफ्ट में, मतलब 12 बजे से शाम 6 बजे तक होता था।

जैसा मैंने सोचा था, उसने अपने फोन पर फोन किया और मुझसे पूछा- प्रीति कहाँ हो?

मैंने उसे कहा- मेरी तबियत खराब हो गई थी, मैं घर आ गई हूँ।

फिर मैंने उसे अपने घर का पता देकर वहाँ आकर अपना फोन ले जाने को कहा।

वो थोड़ी देर में मेरे अपार्टमेंट के नीचे आया और मुझे फोन करके बोला- आप मुझे नीचे आकर मेरा फोन दे दो।

मैं नीचे आई और फिर उससे मिली और मेरे घर उसे कॉफ़ी के लिए बोला, मगर वो नहीं आया।

मैंने उससे पूछा- तुम इतने शर्मीले क्यूँ हो?

वो शर्मा गया और बोला- नहीं.. ऐसी कोई बात नहीं है।

तो मैंने कहा- या फिर मैं बुरी लगती हूँ…

उसे समझ नहीं आया कि वो क्या बोले तो उसने कहा- नहीं.. तुम बहुत अच्छी हो।

फिर वो चला गया और मगर मैंने कोचिंग के बहाने उससे उसका नंबर मांग लिया।

रात में फिर मैंने मैसेज किया- हैलो?

और उससे कोचिंग के बारे में पूछने लगी।

यार… पूछना तो बस बहाना था।

उस रात मैंने दो बार उसके नाम पर उंगली की और अपना पानी निकाला।

फिर हमारी अच्छी दोस्ती हो गई और मैंने एक दिन इम्तिहान के वक्त उसे कंप्यूटर पढ़ाने को बोला और वो मान भी गया।

स्कूल से हम दोनों मेरे घर आ गए, मैं कपड़े बदलने चली गई और जानबूझ कर एक ढीला सा घुटने तक का स्कर्ट पहन लिया।

फिर आकर सोफे पर उसके बगल में बैठ गई।
मैंने ऊपर ऐसा ढीला टॉप पहना था जिसमें से मेरे मम्मे पूरे दिखे क्योंकि ब्रा तो मैंने पहना ही नहीं था।

उसकी नजर मेरे खजाने पर गई, फिर उसने अपनी नजर नीचे किताबों पर कर ली।

मैंने उससे पूछा- क्या तुम अपनी गर्ल-फ्रेंड को भी कंप्यूटर पढ़ाते हो?

तो उसने कहा- मेरी कोई गर्ल-फ्रेंड नहीं है।

मुझे तो इतनी ख़ुशी पहले कभी नहीं हुई। मैं उसके बगल में सट कर बैठ गई और फिर उसके गालों को पकड़ कर बोला- सो स्वीट यू आर…

फिर थोड़ी देर ऐसे ही दांव फेंकने लगी।

उसकी नजर थोड़ी-थोड़ी देर में मेरे मम्मों पर चली जाती थी।

मैंने उसे इतना ज्यादा गरम कर दिया कि उसकी साँसें तेज हो गईं और मेरी भी चुल्ल बढ़ गई।

तभी अचानक हम दोनों ने एक-दूसरे को देखा और हमारे होंठ मिल गए और मुझे भी पता नहीं चला कि सोफे पर ही कब मैं उसके ऊपर लेट गई।

यह मेरी ज़िन्दगी का सबसे हसीन लम्हा था, हमने लगभग पांच मिनट तक एक-दूसरे को चुम्बन किया।

अब मैं इतनी ज्यादा उतावली हो गई कि मैंने अपना टॉप उतारा और उसके सामने अपने मम्मों को आज़ाद कर दिया।

मगर पता नहीं उस उल्लू के पट्ठे.. हरामी को क्या सूझा और उसने कहा- मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है.. इसका मतलब यह नहीं है कि मैं किसी से प्यार नहीं करता।

और वो जल्दी से उठ कर चला गया।

मैं एकदम से सन्न रह गई, मुझे ऐसा लगा कि किसी ने गर्म भट्टी पर ठंडा पानी फेंक दिया हो, मुझे बहुत गुस्सा आया.. मैं उसे गालियाँ देने लगी।
मैं अपने कमरे में टॉपलेस बैठी सी रही।

मुझे इतना भी ध्यान ना रहा कि मेरे फ्लैट का दरवाजा खुला है और मेरे ऊपर के फ्लैट का लड़का राकेश मुझे दरवाजे में से देख रहा है।
राकेश एक लम्बा सा साफ रंग का लड़का था और थोड़ा कामुक भी दिखता है।

मुझे तब होश आया जब वो दरवाजा खोल कर अन्दर आ गया और मुझसे पूछा- एनी प्रॉब्लम?

अब मैंने अपने आप को बचाने के लिए अपने टॉप से खुद को कवर कर लिया, मगर इस साले की भी कुत्ते की आँख थी।

वो मेरे पास आ गया और उसने मुझे कस कर पकड़ लिया।
मैंने छुड़ाने की कोशिश की, मगर वो हरामी अमित मेरी ऐसी हालत कर गया था और इतना गर्म कर गया था कि मैंने बिना किसी हील-हुज्जत के खुद को राकेश के हवाले कर दिया।

उसने मेरा टॉप मेरे हाथ से लेकर सोफे पर रखा और फिर मेरे होंठों की प्यास बुझाने लगा।

इस बार सोफे पर मैं उसके नीचे थी और राकेश मेरे मम्मों को मुँह में ले कर चूस रहा था।

फिर धीरे-धीरे वो नीचे आने लगा और मेरी स्कर्ट को उसने नीचे करके उसने मेरी पैंटी निकाल दी।

मैंने इसमें उसका पूरा साथ दिया, फिर उसने अपना लंड निकाल कर मेरे हाथ में दे दिया और मुझे चूसने को बोला।

मैंने उसे मुँह में ले लिया मगर छी: … उसका बहुत बुरा स्वाद था।

मैंने उसे मुँह से निकाल दिया मगर वो मेरा सर अपने लंड पर दबाए जा रहा था।
फिर मैंने बस उसके लंड को चुम्बन करना शुरू कर दिया।

फिर थोड़ी ही देर में उसका लंड लोहे की रॉड की तरह कड़ा हो गया।

फिर उसने नीचे मेरी चूत में ढेर सारा थूक लगा दिया और उसमे अपना लंड लगा दिया मगर कहाँ ऊँगली और कहाँ इसका मूसल लंड।

उसने थोड़ा सा ही घुसेड़ा था कि मैं दर्द से कराह गई और मेरी चूत में खून छलक आया।

मैंने तुरंत उसका लंड अपने हाथ से पकड़ कर निकाल दिया। मैं बुरी तरह घबरा गई थी, मगर मेरी चुदाई की भूख ख़त्म नहीं हुई और मैं थोड़ी ही देर में फिर से चुदने के लिए तैयार हो गई, मगर अब राकेश का लंड मुरझाने सा लगा था।

तो इस बार मैंने उसमे अपना बहुत सारा थूक गिरा दिया और उसकी गर्मी से उसका लंड फिर से खड़ा हो गया।

उसने फिर से अपना लंड मेरी चूत में घुसा दिया, मैं फिर से कराह गई।

मगर इस बार मैंने वो दर्द सह लिया और वो दर्द थोड़ी देर में मुझे मीठा लगने लगा। उसकी धकापेल चुदाई से मैं थोड़ी ही देर में झड़ने को आ गई और वो भी झड़ने ही वाला था।

उसने पूछा- कहाँ डालूँ?

तो मैंने अन्दर डालने से मना कर दिया और बाहर निकाल कर मुठ मार कर उसका सारा माल निकाल दिया।

अब हम दोनों बिलकुल सुस्त से हो गए और सोफे पर एक-दूसरे के पास गिर गए।

थोड़े ही देर में वो उठा और गुसलखाने को ढूंढता हुआ वहाँ जाकर शैम्पू उठा कर अपने लंड पर लगा लिया।

फिर वो मेरी तरफ आया और मुझे पलट दिया और उसने मेरी गांड पर अपना लंड टिका दिया। उसने बहुत सारा शैम्पू मेरी गांड में भी डाल दिया और अपना मोटा लंड मेरे गांड में घुसा दिया।

मैं बहुत जोर से चिल्लाई मगर उसने पीछे से मेरे मुँह पर अपना हाथ रख दिया और धीरे-धीरे करके पूरा लौड़ा अन्दर तक पेल दिया मेरे आँखों से आँसू आ गए।

मैंने अपनी गांड से उसका लंड निकालने की पूरी कोशिश की, मगर वो निकालने का नाम ही नहीं ले रहा था।

परन्तु थोड़ी देर में ही मुझे अच्छा लगने लगा और मैंने इस बार उसे अन्दर ही गिराने दिया।

मैं पूरे तरीके से तृप्त हो गई और फिर वो उठा और फिर हम दोनों ने अपने कपड़े पहने और साथ कॉफ़ी पी, मगर अब मुझे शर्म सी आने लगी मैं उससे आँखें नहीं मिला पा रही थी।

जो कल बस एक पड़ोस का लड़का था वो अनजाने में ही सही पर आज मेरे जिस्म का मालिक है।

कहानी आगे भी है और अमित के साथ की लव स्टोरी बाकी है।
वो फिर कभी… क्योंकि अगर प्यार सबको मिल ही जाता तो दिल इस मुकाम पर कभी न आता।

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2 Responses

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