किसी ने कॉल बॉय समझ बिना मांगे चुत दे दिया

हैलो, दोस्तो!! मैं पार्थ… गुजरात से। मेरी उम्र 27 साल है। ये मेरी पहली कहानी है… बात पिछले महीने की है…
मैं ऑफिस के काम से दो दिनों के लिये मुंबई गया था। पहले दिन मैं ऑफिस के काम में व्यस्त रहा। दूसरे दिन ऑफिस का काम खत्म कर, शाम को मैं एक दोस्त के यहाँ चला गया, जो बेलापुर (मुंबई) में रहता है।

रात का खाना मैंने वहीं खाया। बात करते करते रात के 11 बज गये तो मैंने अपने दोस्त से वापस होटल जाने की इजाजत माँगी और उसके घर से निकल गया। बाहर सड़क पर आकर मैं किसी टैक्सी या बस का इंतजार करने लगा। थोड़ी देर बाद मेरे सामने एक लाल रंग की कार आकर रूकी…

मैंने कार की तरफ देखा, तभी कार का शीशा नीचे हुआ। अंदर एक औरत बैठी थीं!! उसने मुझे इशारे से पास बुलाया। मैं गाड़ी के पास गया और उसके कुछ पूछने की प्रतीक्षा करने लगा…

तभी वो बोली – कितना लेते हो… ??
मैं बोला – क्या ??  मेरी बात को न सुनते हुये वो बोली – 2000, 3000 या ज्यादा …

मैं बोला – नहीं, मैंम ऐसी…मैं अपनी बात पूरा करता तभी वो बोली – मेरे पास ज्यादा समय नहीं है, जल्दी से गाड़ी में बैठो। पैसे की चिंता मत करो, ज्यादा दे दूँगी!! ये कहते हुये उसने गाड़ी का दरवाजा खोल दिया। मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा था। मैं बस उसकी तरफ देख रहा था।

वो फिर बोली – अब खड़े-खड़े मुँह क्या देख रहे हो!! जल्दी से गाड़ी में बैठो… …

मैं आदेशपालक की तरह चुपचाप गाड़ी में बैठ गया और वो गाड़ी चलाने लगी!! मैंने उसे गौर से देखा वो बहुत सुन्दर युवती थीं!! उसकी उम्र करीब 35 साल होगी। उसने अभी जींस और टी-शर्ट पहन रखी थी। जिससे उसकी चूची का साईज साफ दिख रहा था!! जो की 36 का होगा!!

कॉल बॉय बन चुदाई का पहला चरण

मन कर रहा था कि अभी उसके चूची को पकड़ के मसल डालूँ और उसकी चूची का सारा रस पी जाऊँ!! उसने मुझे अपनी तरफ देखते हुये पाया, तो वो मेरी तरफ देखकर मुस्कुरा दी और मेरा नाम पूछा।  मैंने अपना नाम बताया और उसका नाम पूछा। उसने अपना नाम रेविका बताया…लगभग आधे घंटे बाद, गाड़ी एक बड़े आलिशान घर के अंदर रूकी!!

रेविका, मुझे अंदर आने के लिए बोली। मैं उसके साथ अंदर गया…उसने मुझे सोफे पर बैठने को बोला और पूछा – क्या लोगे ठंडा या गर्म…

मैंने कहा – आपको जो पसंद हो। वो अंदर कमरे में चली गई। जब वापस आई तो रेविका के हाथ में शराब की बोतल, सोडा, गलास और कुछ खाने की चीजें थी।

रेविका ने शराब गलास में डालकर एक मुझे दी और एक खुद लेकर मेरे बगल में बैठ गई…अब हम शराब पीने लगे। दो-तीन पैग पीने के बाद शराब ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया…रेविका अपने एक हाथ से मेरी जाँघ को सहलाते हुए, मेरे लण्ड को पैंट के ऊपर से पकड़ कर मसलने लगी…!! मैं रेविका के होठों को अपने होठों में लेकर चुसने लगा!!

वो भी मेरा साथ देने लगी और हम एक दूसरे के होंठ व जीभ का रसपान करने लगे। रेविका मेरे पैंट का जीप खोलकर मेरे तने हुये लण्ड को पकड़ कर हिलाने लगी!!… थोड़ी देर बाद हम अलग हुये और बेडरूम में आ गये। रेविका मेरे सारे कपड़े उतारने लगी!! मैंने भी तुरंत रेविका को सिर से पाँव तक नँगा कर दिया… दोस्तों आप ये कहानी न्यू हिंदी सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है ।

अब रेविका मेरे सामने बिल्कुल नंगी थी…क्या मस्त दूधिया बदन था!! सख्त चूची… चिकना पेट… पतली कमर और दो गोल खंभो के जैसी जाँघों के बीच में चिकनी गुलाबी रंग की कोमल चूत!! !!!
मुझसे रहा नहीं जा रहा था… !!!

मैं रेविका की चूची को मुँह में लेकर चूसने लगा और दूसरे चूची को हाथ से सहलाने लगा। उसके मुँह से आह निकलने लगी।  थोड़ी देर बाद रेविका ने मेरे लण्ड को चूसने की इच्छा जताई, तो मैंने चूची चूसना छोड़ दिया और अपना खड़ा लण्ड रेविका के मुँह के सामने कर दिया।

वो मेरा लण्ड लोलीपोप की तरह चूसने लगी और बीच-बीच में मेरे पूरे लण्ड को जड़ तक अपने गले के अंदर तक उतार लेती थी। ऐसा लग रहा था, जैसे वो मेरे पूरे लण्ड को खा जाना चाहती हो…  वो लण्ड चूसने में एकदम माहिर थी…
थोड़ी देर ऐसा करने के बाद हम 69 की पोजिशन में आ गये।

अब रेविका मेरा लण्ड चूस रही थी और मैं रेविका की चूत चाट रहा था!! इतना मजा आ रहा था की मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकता!! !!! रेविका की चूत बिल्कुल गीली हो चुकी थी और पानी निकलने लगा था… …  वो मेरे सिर को अपनी जाँघों के बीच में दबा रही थी और अपनी कमर को ऊपर की ओर उछाल रही थी।

10 मिनट तक इसी तरह चूत चाटने पर रेविका अपने जाँघों से मेरे सिर को मजबूती से जकड़ लिया और झड़ गई!!… पर उसने मेरा लण्ड चूसना जारी रखा। मैं रेविका के चूत से निकलने वाले नमकीन पानी को चाट रहा था!!
रेविका के लण्ड चूसने का तरीका इतना निराला था कि मैं भी अपने आपको ज्यादा देर नहीं रोक सकता था।

मैंने रेविका से कहा – मैं झड़ने वाला हूँ, पर वो लण्ड को चूसती रही!!! एकाएक मेरा पूरा शरीर अकड़ गया और मैं रेविका के मुँह में ही पिचकारी की धार छोड़ते हुये झड़ गया!!…रेविका मेरा पूरा वीर्य पी गई…यह तो आप समझ ही गए होंगे कि जरा सी ग़लतफ़हमी से मुझे जबरदस्त चूत मिल गई थी, पर अफ़सोस ये था कि मैं बेहद जल्दी झड़ गया था!!

क्या करता दोस्तो, लड़की भी तो एक नंबर की चुदक्कड थी… रेविका मुझे एक कॉलबॉय समझ कर अपने आलीशान घर में अपनी चूत को चुदवाने लाई थी, ऐसे में उसकी उम्मीद पर खरा उतारना जरुरी था…थोड़ी देर बाद, हम फिर से एक दूसरे को चूमने लगे। मेरा लण्ड टाईट होने लगा!! !!!

मैं रेविका के चूत के दाने व भगनासा को अपने हाथों से रगड़ने लगा और उंगलियों को उसकी चूत में हिलाने लगा। वो पूरी मस्ती में आकर अपनी कमर को हिलाने लगी। अब मैंने रेविका को सीधा लेटने को कहा और मैं उसके दोनों पैरों को अपने कँधे पर रखकर लण्ड को रेविका के चूत पर रगड़ने लगा।

ऐसा करने से रेविका तड़प उठी और अपनी कमर को ऊपर की ओर उठाने लगी, जैसे लण्ड को जल्दी से अंदर डालने को कह रही हो।  रेविका बोली – पार्थ, अब और न तड़पाओ… जल्दी से डाल दो, अपना लण्ड मेरी चूत में और बुझा दो मेरी प्यास… !!

मैंने लण्ड को रेविका की चूत के छेद पर रखकर हल्का सा धक्का दिया।  लण्ड धीरे से सरकता हुआ रेविका के चूत में आधा घुस गया…  रेविका के मुँह से हल्की सी चीख निकली। इसी बीच मैंने दूसरा धक्का लगाया। इस बार मेरा पूरा लण्ड सरसराते हुये रेविका के चूत में घुस गया… वो सिसक उठी!!

मैंने पूछा – क्या हुआ…??
रेविका बोली – बहुत दिनों बाद चुद रही हूँ और तुम्हारा लण्ड भी मोटा है इसलिए थोड़ी तकलीफ हो रही है।
मैं अब कमर को आगे-पीछे करते हुये रेविका के चूची को चूसने लगा। अब रेविका को भी मजा आने लगा।
वो नीचे से कमर हिलाने लगी और बोलने लगी – पार्थ चोदो मुझे… और जोर से चोदो… फाड़ दो, मेरी चूत को… इसमें बहुत आग है!! अपने लण्ड के पानी से बुझा दो, इसकी आग को… रेविका पूरे जोश में आ चुकी थी!!

मैंने भी अपने धक्के की रफ़्तार तेज़ कर दी। लगभग 10 मिनट इसी तरह चुदाई के बाद रेविका झड़ गई और शांत हो गई!!! !!अब मैं रेविका की गाण्ड मारना चाहता था क्योंकी उसकी गाण्ड बड़ी गुदाज और मुलायम थी। मैं उसकी गाण्ड को सहलाते हुये बोला – रेविका, मैं तुम्हारी गाण्ड मारना चाहता हूँ. दोस्तों आप ये कहानी न्यू हिंदी सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है ।

वो मना करने लगी – नहीं, बहुत दर्द होगा… !! मैं ने कभी गाण्ड नहीं मरवाई… पर मेरे ज्यादा आग्रह करने पर वो मान गई। मैंने उसकी गाण्ड और अपने लण्ड पर तेल लगाया।  अब मैंने रेविका को डौगी की तरह झुकने को कहा और मैंने पीछे आकर रेविका की गाण्ड में अपना लण्ड पेल दिया। वो दर्द से तड़प उठी… पर मैंने दर्द की परवाह किये वगैर उसे चोदना जारी रखा।

वो चिल्लाते हुये मुझसे छोड़ने को कह रही थी!! मैं उसकी परवाह किये वगैर, उसे चोदे जा रहा था… कुछ देर बाद रेविका को भी मजा आने लगा!! वो मुझे जोर से चोदने के लिये कहने लगी…मैं भी रेविका को ताकत से चोदने लगा। अब मैं चरम सीमा पर था। 8-10 धक्को के बाद मैं रेविका की गाण्ड में ही झड़ गया और वैसे ही निढाल हो कर लेट गया…

इस तरह हमने उस रात तीन बार चुदाई की.सुबह मैंने उससे पूछा – कैसा रहा मेरा साथ…??
रेविका बोली – ऐसा मजा तो मुझे कभी आया ही नहीं, मैं इसे कभी नहीं भूल सकती… !!
क्या तुम आज रूक सकते हो… ?? मैंने कहा – नहीं, मुझे आज वापस जाना है।

वो बोली – वापस कहाँ जाना है…??
मैं बोला – अपने घर, मुंबई!!
मुंबई का नाम सुनकर वो चौंकते हुये बोली – क्या तुम मुंबई में रहते हो…?? मैं भी मुंबई में रहती हूँ… यहाँ मेरे पापा का घर है।

कुछ सोचने के बाद बोली – क्या तुम मुंबई में मिल सकते हो… ??
मैंने हाँ कहा, तो उसने वो मेरा मोबाइल नम्बर लिया और एक किस किया!! फिर मैं वापस मुंबई के लिये निकल गया। आप भी सोच रहे होंगे कि क्या किस्मत पाई है गांडू ने, एक छोटी सी गलतफहमी और इसके लिए फ्री में एक जबरदस्त चूत का इंतज़ाम हो गया… पैसे कमाए सो अलग… खैर, आप गलत नहीं है… भरोसा करना तो मेरे लिए भी मुश्किल था कि यह सब मेरे साथ हो रहा है लेकिन आप ही बताएं कि कोई नंगी चूत आपके खड़े लण्ड से खुद आकर कहे – “आ, मुझे चोद…” तो क्या आप छोड़ देंगें… ??
नहीं ना…

तो मैं हाथ आई चूत कैसे छोड़ता, कॉलबॉय समझे या कुछ और, मेरा काम तो हो गया…पर सवाल यह है कि क्या यह कहानी यहीं खत्म हुई या ये सेक्स लाइफ आगे भी बढ़ी जानने के लिए आगे पढ़े..

कॉल बॉय बन चुदाई का दूसरा चरण

मुझे मुंबई से मुंबई वापस आये हुये, दो दिन हो गए थे।

अभी तक रेविका का कोई फोन या मैसेज नहीं आया था। तीसरे दिन रात के नौ बजे रेविका का फोन आया।
वो कल सुबह मुंबई आ रही है!! अगले दिन रेविका ने मुझे फोन कर कर शाम को अपने घर आने के लिये बोला।
मैंने रेविका से उसके घर का पता पूछा और शाम को उसके बताये पते पर पहुँच गया। उसके घर पहुँच कर मैने डोरवेल बजाया!!

रेविका ने दरवाजा खोला और मुझे अंदर बुलाया। मैं रेविका के साथ अंदर गया और सोफे पर बैठ गया। रेविका भी मेरे बगल में बैठ गई। उस दिन रेविका ने एक पारदर्शी गाऊन पहन रखी थी। जिससे रेविका का गोरा बदन, ब्रा में कसे हुये दो उन्नत चुचे और उसकी कोमल चूत को ढके हुये पैंटी साफ झलक रही थी. दोस्तों आप ये कहानी न्यू हिंदी सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है ।

रेविका मेरे होठों पर एक लम्बा चुंबन देने के बाद बोली – कैसे हो, पार्थ… ??
मैं – ठीक हूँ।
रेविका – पर, मैं ठीक नहीं हूँ!!
मैं – क्या हुआ, तुम्हें?

रेविका – तुम्हारे वापस आने के बाद से मैं तुम्हारे लण्ड के लिये तड़प रही हूँ!! तीन दिन मैंने कैसे गुज़ारे, बता नहीं सकती… …
मैं – मुंबई में अपने घर जैसे मुझे लाई थीं, किसी और को ले आतीं…

रेविका – नहीं, पार्थ!! जब से मैंने तुमसे अपनी चूत चुदवाई है किसी और से चुदवाने में वो मजा नहीं आता है… तुम में जो दम है, वो किसी और में कहाँ है!! अरे, मैं तो बातों में भूल ही गई… मैंने अभी तक तुम्हें कुछ पिलाया भी नहीं।
रेविका उठी और अंदर से शराब ले आई!! शराब को गलास में डालने के बाद, उसने एक मुझे दिया और एक खुद पीने लगी। मैंने अपना पैग खत्म करते हुये पूछा – क्या तुम यहाँ अकेली रहती हो… ??

रेविका बोली – अकेली हूँ, तभी तो तुम्हें बुलाया है… पर हमेशा अकेली नहीं रहती हूँ… मेरी एक उन्नीस साल की ननद है सीमा, जो हमारे साथ रहती है… आज वो अपनी एक सहेली के यहाँ गई है… वो आज नहीं आयेगी, तो मैंने सोचा क्यों न इस मौके का फायदा उठाया जाये… इसलिए मैंने तुम्हें यहाँ बुलाया.

मैंने फिर पूछा – तुम्हारे पति कहाँ रहते हैं। वो बोली – उनको अपने बिजनेस और विदेश घूमने से फुर्सत कहाँ है, जो यहाँ रहेंगे… महीने में एक दो बार आ गये तो बहुत है… अब तक हम दोनों चार-चार पैग लगा चुके थे.

हमें अब नशा होने लगा था। रेविका भी नशे में हिलने लगी थी!! उसकी आवाज लड़खड़ाने लगी थी… तभी रेविका एक और पैग तैयार करने लगी। मैं बोला – शराब पीकर सोना है क्या…?? रेविका बोली – नहीं पार्थ, आज हमें पूरी रात जागकर चुदाई करनी है.तभी मुझे पेशाब लगा, मैं रेविका से बोला – बाथरूम किधर है, मुझे पेशाब करना है।

रेविका बोली – पेशाब तो मुझे भी लगी है!! बस ये आखिरी पैग खत्म करो, मैं भी तुम्हारे साथ चलती हूँ…
हमनें अपना गलास खाली किया और बाथरूम की ओर बढ़े पर रेविका ठीक से चल नहीं पा रही थी।
शराब ज्यादा पीने के कारण उसके पैर लड़खड़ाने लगे थे…मैं उसे अपने बाँहों में उठाकर बाथरूम ले गया।
पेशाब कर लेने के बाद रेविका मेरे लण्ड को पकड़ कर सहलाने लगी।

मैंने सोंचा रेविका ज्यादा नशे में है… यहाँ बाथरूम में गिर गई तो उसे चोट लग सकती है, इसलिए मैंने रेविका से कहा – चलो, बेडरूम में चलते हैं और मैं उसे लेकर बेडरूम में आ गया। रेविका पहुँचते ही मेरे खड़े लण्ड को अपने हाथों से आगे पीछे करने लगी… मुझे मजा आने लगा… … मैं गाऊन के ऊपर से ही रेविका की चूची को सहलाने लगा!!

फिर रेविका मेरे लण्ड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी और मैंने रेविका के गाऊन की डोरी को खोल दिया और ब्रा में कसी उसकी चूची को ब्रा के ऊपर से मसलने लगा!! रेविका ने मेरे लण्ड को अपने मुँह से बाहर निकाला और मेरा पैंट खोलकर निकालने लगी। मैंने भी उसकी मदद की और पैंट निकाल दिया।

अब वो वापस मेरे लण्ड को अपनी मुँह में लेकर चूसने लगी और मैंने उसके गाऊन को उसके शरीर से अलग कर दिया!!
अब वो केवल ब्रा और पैंटी में थी!!… उसका गोरा बदन चमक रहा था… गुलाबी ब्रा में कसे उसके चूचक बाहर आने को बेताब थे… ऐसा लग रहा था मानो रेविका ने अपने चूची को जबरदस्ती कैद कर रखा हो।

चुदाई का नंगा नाच एक बार फिर होने को बेकरार था!! पर कहते है ना दोस्तो कभी कभी हाथी निकल जाता है और पूँछ रह जाती है, क्या आप जानना नहीं चाहेगें की मेरे साथ भी कहीं ऐसा ही तो नहीं हुआ…??  क्या मेरी किस्मत से महीने में एक दो बार आने वाला रेविका का पति अचानक आ टपका या सीमा ने हमें रंगे हाथों और नंगे बदन पकड़ लिया… !! उसके दोनों चूचक आजाद होकर बाहर आ गये!!

अब मैं रेविका की चूची को अपने हाथों से सहलाने लगा और उसके निप्पल को अपने हाथ की दो अँगुलियों से मसलने लगा। वो सितकार उठी… थोड़ी देर बाद मैंने उसकी चूची के अगले भाग को अपने मुँह में ले लिया और उसे अपनी जीभ से रगड़ने लगा। ऐसा करने से वो पूरे मस्ती में आ गई… इस वक़्त रेविका पूरे जोश के साथ मेरे लण्ड को चूस रही थी और मैं भी रेविका के मुँह में अपने लण्ड को आगे – पीछे करने लगा।

फिर मैंने अपना एक हाथ धीरे से नीचे ले जागकर रेविका के चूत के दाने को अपनी हाथ की अँगुलियों से छेड़ने लगा!! वो पूरे जोश जोश में आ गई!! !!!  उसकी चूत बिल्कुल गीली हो चुकी थी… … अब मैं अपनी दो अँगुली रेविका की चूत में घुसा कर आगे पीछे करने लगा। वो आहें भरने लगी – आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ… आह… आह आह… अहह… आहह आहह… उम्म… उम्म्म्म… उफ़… ज़ोर से… हाँ हाँ… ऐसे ही… ऐसे ही… ऐसे ही… उम्म्म्म्म्म्म्म!!

कुछ देर तक रेविका की चूत को अँगुलियों से चोदने के बाद, हम 69 वाली अवस्था में आ गये। अब मैं रेविका की चूत को चाट रहा था और रेविका मेरा लण्ड चूस रही थी!! … मैं अपनी जीभ को रेविका की चूत में अंदर तक डालकर हिलाने लगा।

रेविका भी कमर नचा – नचा कर अपनी चूत चटवा रही थी!!… दस मिनट तक हम एक – दूसरे का लण्ड व चूत चाटते रहे… !! और लगभग एक साथ झड़ने लगे…रेविका की चूत से पानी बहने लगा!! मैं रेविका की चूत के पानी को अपने जीभ से चाटने लगा!!

इधर मेरे लण्ड ने भी रेविका के मुँह में पानी की बौछार शुरू कर दी थी।
बौछार खत्म होने के बाद रेविका ने मेरे लण्ड को चूसते हुये बाहर निकाला और मेरे रस को पी गई।
फिर हम एक – दूसरे से लिपटकर निढाल हो गये… … …

कुछ देर हमने इसी तरह चिपके हुये अपनी साँसों को काबू में किया, पर मेरा मन अभी नहीं भरा था।
मैं अपना लण्ड फिर से रेविका की चूत में डालकर उसे चोदना चाहता था।
रेविका आँखें बँद कर लेटी हुई थी।

मैंने सोचा – शायद रेविका शराब की वजह से इतने में संतुष्ट हो गई है!!
मैं उससे अलग होते हुये बोला – रेविका, थक गई क्या… ??  वो मुझसे जोर से लिपटते हुये बोली – पहले एक बार अपना लण्ड मेरी चूत में डाल कर मुझे ज़ोर से चोदो तब अलग होना।

 

मैने कहा – तुम ने तो मेरे मन की बात कह दी… … ये कहते हुये, मैं उसके होंठों को चूसने लगा।
वो तुरंत ही अपनी जीभ मेरे मुँह में डालने लगी। हम एक – दूसरे की जीभ व होंठ चूसने लगे!!
अब मैं अपने हाथों से उसके चूची को सहलाने लगा और वो मेरे लण्ड को अपने हाथ से मसलने लगी!!!
मेरा लण्ड खड़ा होने लगा… … दोस्तों आप ये कहानी न्यू हिंदी सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है ।

वो मेरे लण्ड को आगे – पीछे कर हिलाती हुई, अपने मुँह में लेकर चूसने लगी!!
मेरा लण्ड अब तक बहुत कठोर हो चुका था!!
मैं भी अपना एक हाथ रेविका की चूत पर मसलने लगा। उसकी चूत भी बहुत गीली हो गई… …

रेविका बोली – पार्थ अब अपना लण्ड मेरी चूत में डालकर मेरी चूत की प्यास बूझा दो!! !!!
मैंने उसे बेड पर सीधा लेटा कर, उसके दोनों पैरों को फैला दिया और बीच में आ गया… और अपने लण्ड को रेविका के चूत पर रखकर अंदर ठेल दिया।

मेरा आधा लण्ड रेविका की चूत में धँस गया। वो सी… सी… की आवाज निकालने लगी। मैंने तुरंत ही बाहर बचा हुआ लण्ड भी रेविका की चूत उतार दिया और कमर हिलाते हुये उसे चोदने लगा…वो – चोद चोद चोद चोद चोद… आ आ आ… आआ… करती हुई चुदवा रही थी।

मेरे हर धक्के के साथ वो नीचे से अपनी कमर उठाकर धक्का दे रही थी. अब रेविका को मैंने बेड से नीचे उतार दिया और उसे बेड को पकड़ कर झूकने के लिये बोला और मैंने पीछे आकर अपना लण्ड उसकी चूत में पेल दिया।
वो कहने लगी – जोर से चोदो मुझे, पार्थ… और जोर से…मैंने अपने धक्के की रफ्तार को बढ़ा दिया और रेविका को जोर-जोर से चोदने लगा.

इस प्रकार चोदने से रेविका जल्दी ही झड़ गई…मैं तुरन्त अपना लण्ड रेविका की चूत से बाहर खींचा और उसकी गाण्ड में पेल कर उसे चोदने लगा!! … थोड़ी देर बाद मैं झड़ने लगा तो मैंने अपना लण्ड बाहर निकाल कर रेविका की गाण्ड के पास अपनी पिचकारी छोड़ दी और हम दोनों बेड पर लेट गये। हमने उस रात तीन बार चुदाई की.

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