बच्चे के लिए मुझे जेठ जी से कई बार चुदवाना पड़ा xxx kahani

 हेल्लो दोस्तों मैं पूनम आप सभी का बहुत बहुत स्वागत करती हूँ। आज मैं आपको अपनी स्टोरी सूना रही हूँ। मैं उम्मीद करती हूँ कि यह कहानी सभी लोगों को जरुर पसंद आएगी।

मेरा घर कानपुर में रावतपुर में पड़ता है। मेरी शादी एक बहुत ही अच्छे परिवार में हुई थी। मेरी ससुराल में ससुर, सास, देवर, जेठ और जिठानी थे। मेरी 2 नन्द थी जिनकी शादी हो चुकी थी। मेरे पति मुझे बहुत प्यार करते थे। मुझे आज भी याद है की जब मैं नई नवेली दुल्हन बनकर आई थी मेरे पति ने सुहागरात पर मुझे बहुत प्यार किया था। अपने 8” लम्बे लंड से मुझे खूब चोदा था। चोद चोदकर मेरी चूत फाड़कर रख दी थी। मेरी पति [आकाश] मुझे बहुत प्यार करते थे। रात में जब भी वो अपने ऑफिस से आते थे मेरे लिए मिठाई जरुर लेकर आते थे। डिनर करने के बाद हम दोनों टीवी देखते थे, फिर वो मुझे नंगा करके मेरी गुलाबी चूत का भोग लगाते थे। वो हर रात मेरी मेरी चूत को चाटते थे, फिर मेरा गेम बजाते थे। पर दोस्तों मेरी खुशियाँ जादा दिन नही चली। धीरे धीरे मेरी शादी को 5 साल हो गया और मुझे कोई बच्चा ना हुआ।

धीरे धीरे मेरी सास और बाकी सब घर वाले रोज मुझसे बच्चे के बारे में पूछने लगे। एक दिन जब मैं अपने पति के साथ डॉक्टर के पास चेकअप करवाने गयी तो डॉक्टर ने बताया की मैं कभी माँ नही बन सकती हूँ क्यूंकि मेरे पति में मर्दाना कमजोरी है। इस तरह मैं घर पर आई तो बहुत रोने लगी। धीरे धीरे मैं डिप्रेस महूसस होने लगी। फिर एक दिन पति ने खुद मुझे अपने बड़े भाई से सेक्स करने को कहा। इस बात पर मैं बहुत नाराज हो गयी थी। आप ये स्टोरी इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

“आकाश!! तुम ऐसा कैसे कह सकते हो?? मैं तुम्हारी बीवी हूँ कोई रंडी नही की किसी के साथ रात बिता लूँ और बच्चा ले लूँ” मैंने पति से कहा

“पूनम! पर हम दोनों को किसी भी सूरत में बच्चा चाहिए। वरना मेरी माँ तुमको घर से निकाल देंगी और मेरी दूसरी शादी कर देंगी” मेरे पति बोले

उसके बाद मैं कई दिनों तक काफी टेंशन में रही। आखिर में मैंने अपने जेठ से चुदवाने के फैसला कर लिया। मैंने दिल पर पत्थर रखकर ये काम किया था। अगली रात मेरे जेठ चुपके से मेरे कमरे में आ गये। मेरे पति ने उनसे बात कर ली थी और सब कुछ समझा दिया था। दोस्तों मेरे जेठ बहुत ही ठरकी टाइप के आदमी थे और शक्ति कपूर की तरह चोदू टाइप के थे। उन्होंने कई बार मुझे नहाते हुए चुपके चुपके देखा था। वो कई सालों ने मेरी रसीली चूत मारना चाहते थे, पर आज तो उनका सपना पूरा होने वाला था। इस बात को लेकर मेरे जेठ जी बहुत खुश थे। उनको नई नई औरतों की नई नई चूत चोदना बेहद पसंद था। औरत के मामले में उनकी लंगोट कमजोर थी और खूबसूरत औरते उनकी कमजोरियां थी।

“भैया!! मेरी खूबसूरत और जवान बीबी को जरा प्यार से चोदना। हैवानियत मत दिखाना और इसकी चूत में इतना माल छोड़ देना की ये पेट से हो जाए और मुझे बच्चा मिल जाए” मेरे पति ने मेरे जेठ से कहा . आप ये स्टोरी इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

“छोटे!! तू परेशान मत हो। तेरी बीवी को मैं बिलकुल अपनी बीबी की तरह चोदूंगा। और जल्द ही तुझे बच्चा हो जाएगा” मेरे जेठ अपनी विश्व प्रसिद्ध मुस्कुराहट में बोले। मेरे पति बाहर चले गये। दोस्तों आज रात मुझे हर हालत में अपने जेठ से अपनी चूत चुदवानी ही थी। मुझे बच्चा जो चाहिए था। इसलिए मैं मजबूर थी। मैंने शाम को अच्छे से साबुन मल मलकर नहा लिया था और भरपूर मेकअप कर लिया था। होठो पर मैंने लिपस्टिक लगा ली थी और आँखों में काजल लगा लिया था। हाथ में मैंने लाल रंग की चूड़ियाँ पहन रखी थी। पैरों में मैंने रंग लगा लिया था। मैं बहुत सज धज गयी थी और किसी नयी नवेली दुल्हन की तरह मैं लग रही थी। जेठ जी मेरे बेड पर आकर बैठ गये और मेरे हाथ पर अपना हाथ रखा दिया। मैं डर गयी और काँप सी गयी। इससे पहले मैंने कभी किसी गैर मर्द से नही चुदाया था। कभी आजतक किसी गैर मर्द का मोटा लंड अपनी चूत में नही लिया था। मुझे ये सब काफी अजीब लगा रहा था। मैंने जेठ जी के हाथ से अपना हाथ खीच लिया। मैं घबरा रही थी।

“पूनम रानी!! अब मेरे करीब आ जाओ। शरमाना बंद करो। आओ मेरी करीब आओ” जेठ जी बोले और उन्होंने कंधों से मुझे पकड़ लिया। और गालो पर किस करने लगे। धीरे धीरे मैं खुलने लगी। मेरे जेठ ने मेरे सिर से साड़ी का पल्लू हटा दिया। वो मुझे बिलकुल पास लाकर घूर घूर पर देखने लगे। मैं शर्म से पानी पानी होने लगी। दोस्तों मैं आज बहुत खूबसूरत माल लग रही थी। मेरा रंग काफी गोरा था। मेरा जिस्म भरा हुआ था। मेरा फिगर 36 30 32 का था। मैं चोदने और खाने लायक परफेक्ट माल लग रही थी। मेरे जेठ ने मुझे बाहों में भर लिया और मेरे होठो पर अपने होठ रख दिए। मैं किसी सूखे पत्ते की तरह कांपने लगी। उसके बाद जेठ ही मेरे गुलाबी होठ चूसने लगे। धीरे धीरे मुझे भी अच्छा लग रहा था। धीरे धीरे मेरी शर्म दूर हो गयी थी। मैंने भी जेठ जी को पकड़ लिया। हम दोनों एक दूसरे के होठ चूसने लगे और पीने लगे। मेरे जेठ से 15 मिनट तक मेरे अंगूर जैसे मीठे होठो को पीया। मेरी चूत गीली हो चुकी थी।

“पूनम!! बोलो किस तरह चुदवाओगी???? जो पोज पसंद हो बोल दो” मेरे जेठ प्यार से बोले

“आपको जिस पोज में मुझे चोदना हो चोद लीजिये पर जरा धीरे धीरे!!” मैंने कहा

उसके बाद मेरे जेठ ने मुझे फिर से पकड़ लिया और मेरे महकते जिस्म की खुश्बू लेने लगे। वो मेरे गाल, ओठो, गले पर ताबड़तोड़ चुम्मा लेने लगे। मेरी साड़ी  के पल्लू को जेठ जी से मेरे ब्लाउस से हटा दिया था। दोस्तों मैंने गहरे रंग का लाल रंग का ब्लाउस पहन रखा था। मेरे बड़े बड़े 36” के शानदार दुधारू मम्मे जेठ जी को दिख रहे थे। उसे देखकर ही उनका लंड खड़ा हो गया था। वो मेरे बूब्स को ब्लाउस के उपर से छूने लगे और चुम्मा लेने लगे। कुछ देर तक वो मेरे मम्मो को बूब्स के उपर से दबाते रहे। धीरे धीरे मुझे भी मजा आ रहा था।

“पूनम रानी साड़ी उतारो!!” जेठ जी बोले

मैंने बेड से नीचे उतर आई। धीरे धीरे मैं अपनी साड़ी अपनी कमर से खोलने लगी। जेठ जी ने अपने कपड़े निकाल दिए। अपनी बनियान और कच्छा भी निकाल दिया। उनका लंड 8” का था और बहुत मोटा था। मैं तो यही सोच रही थी की इतना मोटा लंड मेरी छोटी सी चूत में कैसे जाएगा। धीरे धीरे मैंने अपनी कमर से पूरी साड़ी खोल दी और अब मैं सिर्फ ब्लाउस और पेटीकोट में आ गयी थी। फिर मेरे जेठ ने मुझे बिस्तर पर खीच लिया और अपने पास लिटा लिया। मेरे बड़े बड़े रसीले बूब्स पर उन्होंने हाथ रख दिया और तेज तेज दबाने लगे। मैं “ओह्ह माँ….ओह्ह माँ…आह आह उ उ उ उ उ……अअअअअ आआआआ….” की आवाज निकालने लगी क्यूंकि मैं बहुत चुदासी हो गयी थी।

मेरे जेठ की आँखों में वासना के बादल छा गये थे। आज रात वो मुझे कसके चोदना चाहते थे। जेठ ही के दोनों हाथ मेरी रसीली छातियों पर थे। वो तेज तेज बेदर्दी ने मेरे बूब्स मसल रहे थे। मुझे बहुत मजा आ रहा था। उसके बाद उन्होंने मेरे ब्लाउस की सब बटन खोल डाली और ब्लाउस उतार दिया। फिर मेरी काली रंग की ब्रा भी खोल दी। अब मैं उपर से नंगी हो गयी थी। मैंने जल्दी से अपनी दोनों छातियों को अपने हाथ से ढँक लिया। जेठ जी ने जल्दी से मेरी कलाई को पकड़ लिया और मेरे हाथो को मेरे बूब्स से हटा दिया। मेरे दोनों रसीले चूचे पर जेठ ने अपने हाथ रख दिए और सहलाने लगे। आप ये स्टोरी इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

मैं “ओहह्ह्ह…ओह्ह्ह्ह आआआअह्हह्हह…अई..अई. .अई… उ उ उ उ उ…” बोलकर चीख पड़ी। उसके बाद तो जेठ ने भरपूर मजा लेना शुरू कर दिया और मेरी रसेदार चूचियों पर हाथ फेरने लगे। दोस्तों आज पहली बार कोई गैर मर्द मेरी चूचियों को हाथ में लेकर सहला रहा था। मुझे काफी शर्म भी आ रही थी। उसके बाद मेरे जेठ जी तेज तेज मेरी चूचियों को दबाने लगे। मुझे मजा भी खूब आ रहा था। मेरी चूचियां बहुत ही हॉट और सेक्सी थी। गोल गोल, बड़ी बड़ी, और रसीली थी। दिखने में बिलकुल मुसम्मी की तरह दिखती थी। मेरी निपल्स के चारो तरफ बड़े बड़े काले सेक्सी गोले थे जो देखने में बहुत ही हॉट लगते थे। मेरे जेठ तो पूरी तरह से चुदासे हो गये थे। वो तेज तेज अपने हाथो से मेरे बूब्स को मसल रहे थे। मैं चीख और चिल्ला रही थी।

उसके बाद जेठ जी ने मेरे दोनों हाथ उपर कर दिए और मेरे मम्मे मुंह लगाकर चूसने लगे। मैं“आआआअह्हह्हह…..ईईईईईईई….ओह्ह्ह्हह्ह….अई. .अई..अई…..अई..मम्मी….” की आवाज निकालने लगी। मुझे बहुत अधिक यौन उत्तेजना हो रही थी। बहुत ही सेक्सी फील हो रहा था। इस तरह मेरे जेठ मुंह में भरकर मेरी नर्म नर्म चूची को चूस रहे थे। वो भरपूर मजा उठा रहे थे। अपना मुंह चला चलाकर वो मेरे आम चूस रहे थे। मेरी चूत से अब माल निकलना शुरू हो गया था। अब मेरा भी चुदने का मन कर रहा था। अब मैं भी जेठ जी का मोटा लंड खाना चाहती थी। धीरे धीरे जेठ जी और तेज तेज मेरे दूध चूसने लगे। लग रहा था की आज वो मेरा सारा दूध पी लेंगे। फिर मैं जेठ के बालों में अपनी उंगलियाँ सहलाने लगी और अपनी रसीली चूचियां उनको पिलाने लगी। वो और तेज तेज मेरे आम चूसने लगे। मेरे जिस्म मेंसेक्स की आग जल उठी थी। साफ़ था की आज रात मैं कसके चुदना चाहती थी। जेठ ही ने 40 मिनट तक मेरी रसीली चूचियां चूसी और भरपूर मजा लिया। मैं बहुत जादा गर्म हो गयी थी। अब मैं जल्दी से उनका लंड खाना चाहती थी।

“जेठ जी!! ….प्लीस जल्दी से मेरी गर्म में अपना मोटा लौड़ा डाल दो वरना मैं मर जाउंगी!!” मैंने किसी आवारा छिनाल की तरह बोल दिया। उसके बाद मेरे जेठ ने मेरे लाल रंग के पेटीकोट का नारा खोल दिया और निकाल दिया। फिर मेरी पेंटी भी उन्होंने निकाल दी। मैं पूरी तरह से नंगी हो गयी थी। जेठ जी ने मेरे दोनों पैर खोल दिए। मेरी भरी हुई चूत के दर्शन उनको हो रहे थे। मेरी चूत डबडबा गयी थी। पानी पानी हो गयी थी। जेठ जी ने अपना 8” का मोटा लंड हाथ में ले लिया और मेरी चूत दे दाने को जल्दी जल्दी लंड के सुपाड़े से घिसने लगे। मैं तड़पने लगी। जेठ जी मुझे तडपा तड़पा कर चोदना चाहते थे। उन्होंने 10 मिनट तक मेरी चूत के दाने को लंड के सुपाड़े से घिसा। फिर चूत में लंड डाल दिया। मैं ऊँ—ऊँ…ऊँ सी सी सी सी कहकर सिसक गयी। उसके बाद दोस्तों मेरे जेठ जी ने मुझे चोदना शुरू कर दिया। धीरे धीरे उनका लंड मेरी चूत की गहराई में उतर कर मजा करने लगा। मैं चुदने लगी तो मैंने जेठ को कसकर बाहों में भर लिया। वो जल्दी जल्दी मेरा गेम बजाने लगे। मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा था। जेठ के धक्के बहुत गहरे थे। वो मुझे बहुत जल्दी जल्दी चोद रहे थे जैसे कोई ट्रेन छूटी जा रही है। पता नही उनको किस बात की जल्दी थी।

“जेठ जी!! आराम से मुझे पेलिए। पूरी रात पड़ी है। मैं कहीं भाग नही रही हूँ” मैंने कहा। उसके बाद भी वो नही रुके और गचा गच मेरी चूत में लंड की सप्लाई करते रहे। मुझे जन्नत का मजा मिल रहा था। जेठ जी का मोटा लंड मुझे अंदर तक चोद रहा था। मेरी चूत का छेद अब और मोटा हो गया था। फिर वो मुझपर लेट गये और मेरे रसीले ताजे होठ चूसते चूसते मेरी चूत चोदने लगे। मुझे बहुत सुख मिल रहा था। आज तो मैं ऐश कर रही थी। जेठ जी के धक्को से मैं बार बार 2 4 इंच आगे खिसक जाती थी। इतनी तेज तेज वो मुझे चोद रहे थे। मेरे खूबसूरत बड़े बड़े मम्मे मन्दिर की किसी घंटी की तरह उपर नीचे को हिल रहे थे। आप ये स्टोरी इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

मैं चुद रही थी। आज जिन्दगी में पहली बार मैं किसी गैर मर्द का लंड खा रही थी क्यूंकि मुझे एक बच्चा चाहिए था। ये सब इसी के लिए हो रहा था। इसलिए मैंने भी आज खुलकर चुदा रही थी। फिर जेठ जी ने अपनी रफ्तार बढ़ा दी और 200 की रफ्तार ने मुझे चोदने लगे। मेरी चूत से चट चट पट पट की आवाज आने लगी जैसी कोई ताली बजा रहा हो। मेरे होठ उड़ गये। मेरे और जेठ जी दोनों को पसीना छूट गया। उन्होंने मेरी चुद्दी पर बहुत मेहनत की। बड़ी कायदे से मेरी रसीली चूत को चोदा और पेल पेल कर मेरी चुद्दी फाड़ दी। अब मेरी चूत में आग लग रही थी। मैं बार बार अपनी गांड हवा में उठाने लगी। मेरी चूत में तूफान आ गया था। मैं पागल हो रही थी। मैं खुद अपने होठो को अपने दांतों से बार बार काट रही थी। मुझे अभूतपूर्व यौन सुख का अहसास हो रहा था। दोस्तों मेरे जेठ ने मुझे 40 मिनट नॉन स्टॉप चोदा और बुर फाड़ के रख दी।

उसके बाद उन्होंने अपना माल मेरी चुद्दी [चूत] में ही छोड़ दिया। जब उन्होंने अपना 8” का मोटा बाहर निकाला तो मेरी चूत का चबूतरा बन चुका था। मैं चुद गयी थी। उसके बाद मेरे जेठ ने मुझे 3 बार और चोदा और हर बार मेरी चूत में माल गिरा दिया। कुछ दिन बाद मैं पेट से हो गयी। 9 महीने बाद मुझे एक सुंदर का लड़का पैदा हुआ। घर में सब लोग सोच रहे थे की ये मेरे पति का बच्चा है। पर सच्चाई तो सिर्फ मैं, मेरी पति और जेठ जी जानते थे।

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2 Responses

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