भैया ने भी मुझे चोद दिया
भैया के खींचने से मैं उनके ऊपर गिर गई। मुझे भैया पर हँसी आ गई और मैंने भैया के ऊपर से उठते हुए कहा- भैया मैं भाभी नहीं हूँ.. पायल हूँ..
मगर भैया ने मेरी बात को अनसुना कर दिया.. वो मेरे सर को पकड़ कर मेरे गालों पर चुम्बन करने लगे और फिर से मुझे अपने ऊपर खींच लिया। मैं कुछ और बोल पाती इससे पहले भैया ने मेरे दोनों होंठों को अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगे.. जिससे मेरे बदन में भी सिहरन सी होने लगी।
मुझे भैया पर हँसी भी आ रही थी और गुस्सा भी.. इसलिए मैं अपने होंठों को छुड़वा कर जोर से चीख कर कहा- भैया.. मैं भाभी नहीं हूँ.. पायल हूँ.. पायल.. आपकी बहन..! desi sex story
मैं यह कहते हुए फिर से खड़ी होने की कोशिश करने लगी।
मगर भैया को तो जैसे मेरी कोई बात सुनाई ही नहीं दे रही थी।
मैं अपने आपको भैया से छुड़वा ही रही थी कि अचानक भैया ने करवट बदल कर मुझे नीचे गिरा लिया और वो मेरे ऊपर आ गए।
मुझे भैया से ये उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी कि वो इतनी जल्दी ये सब कर देंगे।
भैया फिर से मेरे होंठों को चूसने लगे और एक हाथ से नाईटी के ऊपर से मेरे उरोजों को भी दबाने लग गए।
भैया का उत्तेजित लिंग मेरी जाँघ पर चुभता हुआ सा महसूस हो रहा था मेरे पूरे बदन में चींटियां सी काटती महसूस होने लगीं.. और ऊपर से मौसम भी इतना सुहावना हो रहा था, अब तो मुझे भी कुछ होने लगा था।
मैंने भी भैया को अपनी बाँहों में भर लिया.. मगर तभी मुझे ख्याल आया कि यह मैं क्या कर रही हूँ.. भैया नशे में हैं.. मैं नहीं.. मुझे समाज का और भाई-बहन के रिश्ते का ख्याल था।
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मेरा भी दिल तो मचलने लगा था.. मगर मैं भाई-बहन के रिश्ते को कलंकित नहीं करना चाहती थी.. इसलिए मैंने भैया को अपने ऊपर से धकेल कर अपने आपको छुड़वा लिया और फिर से कहा- भैया.. आप ये क्या कर रहे हैं.. होश में आओ.. मैं आपकी बहन हूँ। भैया ने भी मुझे चोद दिया
कमरे में अँधेरा था जिस कारण भैया मेरी सूरत नहीं पहचान पा रहे थे.. मगर भैया पर मेरे चीखने का भी कोई असर नहीं हो रहा था।
उन्होंने भाभी का नाम बड़बड़ाते हुए फिर से मुझे दबोच लिया और अचानक मेरी नाईटी को उलट दिया। नीचे मैंने पैन्टी भी नहीं पहन रखी थी.. इसलिए मैंने अपने घुटने मोड़ लिए और अपनी नाईटी को पकड़ने लगी।
मैं अपनी नाईटी को ठीक कर पाती.. इससे पहले भैया ने एक हाथ से मेरी दोनों जाँघों को दबाकर मेरे घुटनों को सीधा कर दिया और मेरी नंगी योनि पर अपना मुँह टिका दिया।
यह सब भैया ने इतनी जल्दी और अचानक किया कि मैं कुछ समझ ही नहीं पाई।
मैंने अपनी दोनों जाँघें एक-दूसरे चिपका कर बन्द कर रखी थीं.. जिससे भैया की जीभ मेरे योनि द्वार तक तो नहीं पहुँच पा रही थी.. मगर भैया मेरी योनि की फाँकों को चूसने लग गए।
अब तो मेरे लिए अपने आप पर काबू करना कठिन हो गया था.. क्योंकि अब भैया मेरे सबसे संवेदनशील अंग पर अपनी जीभ से हरकत कर रहे थे.. जिससे मेरे रोम-रोम में चिंगारियां सी सुलगने लगीं।
अब तो मैं भी बहकने लगी थी और मेरी जुबान भी कपकँपाने लगी। मैंने फिर से काँपती आवाज में भैया को कहा- भ..अ..ऐ..य..आ.. अ..आ..प..अ… ये..ऐ.. क..अ..य..आ.. क..अ..र..अ…र.. अ..ह..ऐ… ह..अ..ओ…!
मैं भैया को हटा कर उठने की कोशिश करने लगी.. मगर तभी भैया ने मेरे कूल्हों के नीचे अपने दोनों हाथों को डालकर मेरी कमर को थोड़ा सा ऊपर उठा लिया और मेरी योनि की फाँकों को अपने मुँह में भर कर इतनी जोर से चूस लिया कि मुझे अपनी योनि का अंदरूनी भाग खिंचकर भैया के मुँह में जाता सा महसूस हुआ और मेरे मुँह से ‘इईईई.ई..ई…ई.. शशशश..श.. भैया.. आहह..’ की आवाज निकल गई।
भैया ने भी मुझे चोद दिया
भैया मेरी योनि में अपनी जीभ से लगातार हरकत करने लगे.. जिससे मेरे पूरे शरीर में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी और पता नहीं कब मेरी जाँघें खुल गईं।
अब मेरी पूरी योनि पर भैया का अधिकार हो गया था। भैया कभी मेरे दाने पर.. तो कभी योनि द्वार पर.. अपनी जीभ को घुमाने लगे।
मेरे मुँह से, ‘इईश.. श..श..अआहह…अह..’ की हल्की-हल्की सिसकियाँ फूटने लगीं।
मुझे भी पता नहीं क्या हो गया था.. मैं भैया का बिना कोई विरोध किए शान्त होकर पड़ी रही। मेरा दिमाग तो कह रहा था कि ये सब गलत हो रहा है.. मगर दिल साथ नहीं दे रहा था। antarvasna story
भैया ने अपनी जीभ से मेरे तन-बदन में आग लगा दी थी और आखिर में दिल के आगे दिमाग ने घुटने टेक दिए और मैंने अपनी जाँघें पूरी तरह फैलाकर भैया को अपने आपको समर्पित कर दिया।
कुछ देर बाद भैया ने मेरी योनि को छोड़ दिया।
कमरे में अँधेरा था मगर फिर भी मैं भैया को अपने कपड़े उतारते हुए देख पा रही थी।
भैया अपने सारे कपड़े उतार कर मेरे ऊपर लेट गए, मैं भी आँखें बन्द करके पड़ी रही और भैया के लिंग के प्रवेश कराने का इंतजार करने लगी। भैया ने भी मुझे चोद दिया
भैया ने एक हाथ से अपने लिंग को मेरी योनि के प्रवेश द्वार पर रख कर जोर का धक्का मारा.. एक ही झटके में भैया का पूरा लिंग मेरी योनि में समा गया.. जिससे मुझे हल्का सा दर्द हुआ और दर्द व उत्तेजना के कारण मेरे मुँह से ‘अआआह..ह…ह..’ की आवाज निकल गई।
मेरे दिमाग में एक बार फिर से खयाल आया कि मैं यह क्या कर रही हूँ? मगर उत्तेजना के कारण मेरा ख्याल दिमाग में ही दब कर रह गया..
क्योंकि अब भैया धीरे-धीरे अपनी कमर को हिलाने लग गए थे.. जिससे मुझे मजा आ रहा था और वैसे भी अब तो सारी सीमाएँ और मर्यादाएँ टूट चुकी थीं इसलिए मैं भी अपने पैर भैया के पैरों में फंसा कर अपने कूल्हों को उचका-उचका कर भैया का साथ देने लगी और मेरे मुँह से ‘इईई.ई..ई…ई.. शशशश..श.. अआआह.. उहहह..’ की आवाजें निकलने लगीं।
भैया लगातार धक्के लगाते रहे और मैं ऐसे ही सिसकियाँ भरती रही। धीरे-धीरे भैया की गति बढ़ने लगी और फिर से वो मेरे होंठों को अपने मुँह में भर कर चूसने लगे।
इस बार मैं भी उनके एक होंठ को चूसने लगी।
भैया तो बिल्कुल नंगे थे मगर मेरी नाईटी बस मेरे पेट तक ही उल्टी हुई थी.. जिससे मेरा शरीर भैया के नंगे शरीर को स्पर्श नहीं कर रहा था और भैया भी नाईटी के ऊपर से ही मेरे उरोजों को दबा रहे थे.. इसलिए मैंने खुद ही अपनी नाईटी को खिसका कर अपने उरोजों के ऊपर तक उलट लिया और भैया की पीठ को अपनी बाँहों में भर कर दबाने लगी। hindi sex kahani
भैया जितनी तेजी से धक्के लगा रहे थे.. मैं भी उतनी ही तेजी से अपने कूल्हे उचका रही थी।
मेरे होंठ भैया के मुँह में थे.. फिर भी उत्तेजना के कारण मेरे मुँह से मादक आवाजें निकल रही थीं।
खिड़की से ठण्डी हवा आ रही थी और बाहर मौसम भी ठण्डा था.. मगर फिर भी मैं और भैया पसीने से लथपथ हो गए थे।
आज करीब दो अढ़ाई साल के बाद मैंने किसी के साथ यौन सम्बन्ध बनाया था.. इसलिए मैं जल्द ही चरम पर पहुँच गई। भैया ने भी मुझे चोद दिया
मैं भैया के शरीर से किसी जौंक की तरह चिपक गई और शान्त हो गई।
कुछ देर बाद भैया भी अपनी मंजिल पर पहुँच गए और उनका लिंग मेरी योनि में गर्म वीर्य उगलने लगा, भैया ढेर होकर मेरे ऊपर गिर गए।
कुछ देर तक हम दोनों ऐसे ही पड़े रहे.. मगर काफी देर होने के बाद भी जब भैया मेरे ऊपर से नहीं उठे तो मैं उन्हें उठाने लगी.. मगर मैंने देखा कि भैया तो मेरे ऊपर ही सो चुके थे।
मैंने भैया को अपने ऊपर से धकेल कर बिस्तर पर गिरा दिया और उठ कर अपने कमरे में आ गई।
मेरे खड़े होने से भैया का वीर्य मेरी योनि से रिस कर मेरी जाँघों पर आ गया.. जिससे मेरी जाँघें चिपक रही थीं.. इसलिए मैंने बाथरूम में जाकर अपनी योनि और जाँघों को साफ करके अपने कमरे में आकर बिस्तर पर लेट गई।
अब मुझे पछतावा हो रहा था कि मैंने ये क्या कर दिया? मुझे भैया को कैसे भी करके रोकना चाहिए था।
यही सब सोचते-सोचते ही मुझे नींद आ गई।
सुबह जब मैं उठी तो मेरा पूरा बदन दर्द कर रहा था।
मित्रो, यह कहानी कैसी लगी।
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