शादी के बाद रंडी बनने का सफ़र

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम गरिमा है। में 24 साल की शादीशुदा लड़की हूँ, वैसे तो मेरी लव मैरिज हुई है, लेकिन अब मुझे अपने पति के साथ अच्छा नहीं लगता, क्योंकि प्यार ही सब कुछ नहीं होता, वो मुझे ठीक तरह से चोद भी नहीं पाते है और में प्यासी ही रह जाती हूँ। वैसे मेरा फिगर 32-36-34 है और में स्लिम हूँ, फेयर हूँ, लाईट ब्राउन बाल है, फिर भी मेरे पति का 5 इंच का लंड मुझे नंगा देखकर भी जल्दी खड़ा नहीं होता है। में बहुत दिन से प्यासी हूँ और अब मैंने फ़ैसला कर लिया है कि में किसी गैर मर्द से ही अपनी प्यास बुझाऊँगी।

मेरे पति का एक कज़िन जो 27 साल का है, हमारे पास में ही रहता है, उसका नाम अशोक है, सब उसको प्यार से बल्लू कहते है, वो मेरे पति से काफ़ी स्मार्ट है बस वो पैसे वाला नहीं है, लेकिन उसकी बॉडी एकदम फिट है। उसकी हाईट 6 फीट और कसा हुआ बदन है। अक्सर मैंने देखा है कि वो मुझे गंदी नज़रो से देखता है और जब में झुकती हूँ तो वो मेरे बूब्स की लाईन ऐसे देखता जैसे अभी ही मेरा ब्लाउज खोलकर अपने मुँह में ले लेगा। मुझे पहले तो वो अच्छा नहीं लगता था, लेकिन अब अपनी चूत से जब भी खेलती हूँ, तो वो ही याद आता है।

एक बार वो टायलेट कर रहा था, तो में जानबूझ कर वॉशरूम में घुस गई, जब दरवाज़ा खुला था। अब में  तो बस उसका लंड देखती रह गई, बहुत बड़ा मस्त लंड था। अब 10 सेकेंड तक देखने के बाद उसने बोला कि सॉरी भाभी और में मुस्कुरा कर चल दी। फिर उस दिन के बाद से वो मुझे किसी ना किसी बहाने से छू लेता और सच कहूँ तो जब भी वो मुझे छूता है तो मेरी चूत में खलबली सी मच जाती है।  आज मैंने उसको अपने घर का पंखा सही करने के लिए बुलाया है, में घर पर अकेली हूँ और पति कल सुबह आएगें। मैंने लाल पीले रंग की पारदर्शी साड़ी, लो कट ब्लाउज और अंदर सेक्सी ब्रा पहनी है। अब मेरी आधी चूचियाँ दिख रही है और मेरी साड़ी गांड से चिपक कर अच्छा शेप दे रही है और लाईट मेकअप भी किया है। फिर मेरे घर की डोर बेल बजी तो मैंने दरवाजा खोला और बल्लू से कहा।

में : बल्लू बड़ी देर लगा दी, शाम के 7 बजा दिए।

बल्लू : हाँ भाभी, थोड़ा काम में बिज़ी था। फिर उसने मुझे ऊपर से नीचे तक देखा और फिर बोला कि भाभी आज तो आप कयामत ही लग रही हो, कहाँ जा रही हो?

में : कही नहीं, बस यू ही मन किया कि थोड़ा तैयार हो जाऊं अंदर आओ ना पहले, फिर मैंने दरवाज़ा बंद कर दिया।

में :  बैठो में तुम्हारे लिए पानी लेकर आती हूँ।

अब में अपनी गांड कुछ ज़्यादा ही हिलाती हुई किचन की तरफ जा रही हूँ, तो मुझे खिड़की के कांच में  हल्का सा दिखा कि वो मेरे मटकते चूतड़ देखकर अपना लंड दबा रहा है। फिर मैंने सोचा कि आज तो में इसका लंड ले ही लूँगी। फिर में पानी लाती हूँ और टेबल पर ट्रे रखते हुए झुकती हूँ, फिर मैंने जानबूझ कर अपना पल्लू और फोन जमीन पर गिरा दिया और थोड़ी देर तक नीचे झुकती हूँ, ताकि मेरा बल्लू राजा मेरे बूब्स अच्छे से देख ले। अब मेरे  बूब्स 80% दिख रहे थे और अब उसके लंड में उभार आ गया था, अब वो मेरे बूब्स को घूर रहा था तो मैंने अपना फोन उठाते हुए कहा।

में : देखोगें या पीयोगे भी।

बल्लू :  हड़बड़ाहट से क्या भाभी?

में :  पानी और क्या?

बल्लू स्माइल देते हुए अपने लंड पर ऊपर से हाथ फैरता है और कहता है कि भाभी मुझे लगा कि आज कुछ और ही पिलाने के मूड में हो।

में : उसका लंड देख रही थी।

बल्लू : भाभी तुम भी पी लो, देखो मत।

में :  क्या?

बल्लू : आँख मारते हुए पानी और क्या?

में :  मेरा गिलास कहाँ है?

बल्लू : मेरा पानी पीयोगी?

में :  होंठ दबाते हुए, क्या मतलब?

बल्लू : कुछ नहीं और हँसने लगा।

शायद वो ये चाहता था कि में ही पहले पहल करूँ, फिर में उठी और उसके बगल में बैठ गई और सीधी उसके लंड पर अपना हाथ फैरने लगी।

बल्लू : भाभी क्या कर रही हो?

में :  प्लीज बल्लू, अब तड़पाओ मत, अब मेरी प्यास बुझा दो।

बल्लू : अब वो मेरे बूब्स सहलाते हुए बोला कि  हाँ साली मुझे पता था तू छमिया आज मेरे लंड के लिए बनी है, में उसी दिन समझ गया था कि तू लंड की भूखी है, जब तू टायलेट में मेरा लंड देख रही थी, मुझे ये भी पता है कि तेरा पति तुझे अच्छे से चोदता नहीं है।

में :  तू प्लीज आज मुझे अपनी बना ले और उसे पागलों की तरह किस करने लगी।

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