सौतेला भाई के साथ जिस्माना ताल्लुकात
दोस्तो मेरा नाम ‘निकिता’ है पर घर मे मुझे सब ‘पिंकी’ बुलाते है क्यूंकी मेरा बदन गोरा और गुलाबी सा है. मेरा जन्म होने के बाद एक साल बाद ही मेरे पहीले पिता ने मेरी मा को और मुझे छोड़ दिया और किसी और के साथ घर बसलिया.तब मैं सिर्फ़ डेढ़ साल की थी. तभी मेरे मामा क दोस्त ने जिनकी बीवी लड़के को पैदा करते हुए मार गयी थी मेरे मा से शादी कर ली. वो लड़का यानी मेरा सौतेला भाई कुणाल है. और मैं और मा उनके साथ रहएने लगे. कुणाल भैया मुझसे 4 साल बड़ा था. पर उसने कभी मुझे सौतेला व्यवहार नही किया.
जब भाई बड़ा हुआ तो पापा ने उसे पढ़ने के लिए मुंबई भेज दिया. तब वो 11 वी क्लास मे था और मैं 8 वी मे थी. मैं तब 13 साल की थी और भाई 17 साल का था. जब भाई उस साल छूतियो मे घर आया तो बड़ा ही खूबसूरत दिख रहा था, उसे मुंबई रास आ गयी थी. पर वो मुझसे आते ही गुस्सा हो गया क्यूंकी वो जाने के बाद मैने उसका कमरा ले लिया था. पर पापा बोले, ‘कुणाल जब तक तू यहा है तब तक पिंकी हमारे कमरे मे सो जाएगी.’ वो और मैं दोनो मान गये.
जब उसे रात मैं पापा-मम्मी के कमरे मे सो रही थी तब रात को मुझे मा की कसमसाहट सुनाई दी और मैं जाग गयी पर सिर्फ़ थोडिसी आखें खोलके देखने लगी, और हक्का बक्का हो गयी. पापा और मा दोनो ज़मीन पे बिल्कुल नंगे लेते थे और पापा मा के दोनो बूब्स को बरी बरी छत रहे थे. मैं ये देख के डांग हो गयी, फिर मा ने पापा के लूँगी मे हाट डाला और उनका लंड बाहर निकाला, इतना बड़ा और लाल था वो मैं तो घबरा गयी और फिर पापा ने उसे मम्मी क छूट पर रख के ज़ोर का झटका दिया और मा कसमसा उठी, तब मैने भी मेरे पिशब की झगाह (मतलब छूट पे) गीला पं महसूस किया और मुझे कुछ अजीबसा लगने लगा. सुबह जब बातरूम जाके मैने मेरी पनटी उतरी और उसे हाथ मे पकड़ा तो मुझे वाहा चिपचिपा लगा और उसे नाक से सूंघने पर एक वासना भारी सुघनध आई. मैं तो जैसे बावरी हो गयी. उसे दिन पहली बार मैने खुद को पूरे कपड़े उतार के नंगा देखा और खुदके छोटे छोटे बूब्स को सावरा. हे क्या बतौ मेरी हालत. उसके बाद मैने चार दिन मा और पापा का वो खेल रोज रात को चुपके से देखा.
अब मैं 16 की होगआई थी और पूरी जवान लगने लगी थी. पर मुझे किसी लड़के ने अभी तक छुआ नही था. मेरा भाई भी अब 20 का हुआ था और स.य.ब्कॉम कर रहा था. मैने भी 10त पास कर लिया था और पापा ने मुझे भी भाई के साथ मुंबई उसीके कॉलेज मे 11वी के लिए भेज दिया. भाई और मैं जब मुंबई पह्ोचे तब जोरो की बारिश चल रही थी और हम दोनो भीग गये थे. भाई तब एक चल मे रहता था जिसमे एक छोटसा कमरा किराए पे लिया था. कमरे मे ही टाय्लेट और भतरूम था पर बातरूम को दरवाजा नही था. भाई अकेला होने के वजह से उसे तकलीफ़ नही हुए पर अब मुझे वाहा नहाने को परेशानी होगी ये मैने कहा तो उसने कहा, ‘ जब तुम नहाने जाओगी तब मैं कमरे क बाहर चला जौंगा और तुम अंदर नहा लेना, फिर दरवाजा खोलना.’ मैं इस बात पे मान गयी. दूसरे दिन हम कॉलेज पह्ोचे,उसने मेरा दखला का दिया. और हम रोज़ साथ मे ही घर से कॉलेज जाते और सात्मे ही घर आते. आते आते कभी हम बेज़ार ले आते और मैं घर मे ही खाना पकती और भाई भी मुझे हेल्प करता था. इस दौरान ही मुझपे जवानी चाड़ने लगी थी. कॉलेज मे हमे बहोट लोग बाय्फ्रेंड-गर्लफ्रेंड ही सांझते थे. मुझे भी वो अछा लगता था. जब कभी भाई मुझे खाना बनाने मे हेल्प करता तो उसका हाथ कभी कभी मेरे स्तानो को छू जाता और मेरे बदन मे एक ही सिरसिरी भर जाती, पर ये वो जानभुज के करता या अंजाने हो जाता ये उसे ही पता. ऐसे ही दो महीने बीट गये.
सेप्टेंबर मे हमारे घर के पास एक मेला लगा, मैने भाई को कहा चलो मेला घूम आते है, भाई भी टायर हुआ और हम शाम को मेला देखने चले गये. घूमते घूमते ह्यूम भाई के एक टीचर मिल गये, उन्हे लगा मैं भाई की पत्नी हू, और वो कुछ सुनने के पहेले ही कह गये, ‘जोड़ा खूब जज्ता है, कुश खबर जल्दीही देना.’ और्र मैं और भाई शरम के मारे पानी पानी हो गये. आयेज हम दोनो आकाश झूले मे बैठे, जैसे झूला उपर जाता मैं भाई को कस क पकड़ लेती थी क्यूंकी मुझे बहोट दर्र लगता है. तब मेरे स्तन भाई के खांडे को चिपक जाते, और जाँघ से जाँघ च्पक गई थी. मेरी आखे बंद थी और मेरे सलवार के उपर से मेरे स्तन दिख रहे थे, भाई उन्हे आखे फाड़ के देख रहा था (ये उसने मुझ बाद मे बताया) जब हम झूले से नीचे उतरे तो भाई मेरी तरफ अलग ही नज़र से देख रहा था. घर जाते जाते बारिश ने हमे घेर लिया और मैं और भाई पूरी तरह भीग गये. मेरे सलवार सफेद थी और भीगने के कारण मेरी ब्रा क्लियर नज़र आ रही थी जिसे भाई घूर रहा था. जैसे तैसे ह्यूम रूम पह्ोचे और दरवाजा बंद कर लिया. भाई ने कहा, “पिंकी तुम कपड़े बदल लो मैं बाहर खड़ा रहता हू.’ तो मैने कहा,’भाय्या रहएने दो आप पीठ कर के खड़े हो जाओ, मैं झट से कपड़े बदलती हू.’ वो मान गया. मैं कपड़े बदल रही थी, जैसे ही मैने मेरा सलवार उतरा मुझे कुणाल की हल्की सिसकी सुनाई दी, मैं समझ गयी की वो मुझे देख रहा है. मेरे भी बदन मे एक लेहायर आ गयी और मानो एक सेकेंड मे मेले की बाते और मा-पापा का सेक्स मेरे आखो के सामने आ गया और मुझे नीचे गीला लगने लगा. बाद मे मैने उसके तरफ देखा और कपड़े बदले पर उसने नही देखा. थोड़ी देर बाद उसने उसके कपड़े बदले तब मैं चोरी से उसकी अंडर पंत को देखा तू वो एक तुंबो जैसे लग रही थी. मैं समाज गयी के भाई का लंड खड़ा हो गया है.
उस रात मैं रोज़ की तरह नीचे ज़मीन पे सो रही थी और भाई पलंग पे. वो पलंग पे पेट के बाल सॉयके सोने का नाटक कर रहा था और मेरे उभरो को देखे जेया रहा था. मैने भी उसे उतेज़ित करने के लिए पल्लू निकल दिया था, ताकि उसे मेरे स्तानो क बीच की खाई दिखे. उस रात मैं बहोट देर तक सोचती रही की ये सही है या ग़लत, वो मेरे छूट की खुजली भाई को सोच सोच और ही बढ़ रही थी. वैसे भी वो मेरा सौतेला भाई था और उसके तरफ भी आग लगी थी, पर उसकी हिम्मत नही थी कुछ करने की. फिर मैने ही एक प्लान बनाया.वो ऐसा,
दूसरे दिन सुभह जब मैं नहाने निकली तो भाई बाहर जाने लगा, मैने कहा, ‘कुणाल भाय्या, आप यही रूको, जब आप बाहर जाते हो तो बाजू के लोग, बाड़मे मुझे घूरते है.’ तो भाई रुक गया और पलंग पे पीठ कर के बैठ गया. मैने पल्लू का परदा किया और नहाने लगी. नहाते वक़्त मैं गाना गाने लगी, “सजना है मुझे, सजना के लिए…” तो भाई ने देखे और झट से फिर मूड गया. मैने जानबूजके टवल पलंग पे ही रखा था. नहाना होने के बाद मैने भाई को कहा की मुझे टवल देना, तब मैं स्टूल पे बैठ के दोनो पैर के बीच स्तन छुपाके बैठी थी. और मेरा कुर्ता गीला होने के वजह से मेरी पनटी और गीली भारी हुई जंघे दिख रही थी. मैने परदा हल्के से खिछा और टवल लेने के लिए थोड़ी उठी. उठाते ही मेरा लेफ्ट स्तन पूरा भाई को दिखा और उसके मूह से सिसकारी निकले. मैने ऐसा बर्ताओ किया की ये अंजाने मे हुआ और बैठ गयी, बैठते ही उसे मेरी पनटी दिखी. और उसके पंत मे मुझे हलचल दिखी. मैं जान गयी की तीर निशाने पे लगा है.
उस दिन मैं सोचती रही के अब आयेज क्या करना है और उस रात खाना खाने क बाद, मैने भाई से कहा “ तुम सो जाओ मैने सहेली से नोट्स लाए है जो मुझे कंप्लीट करने है.” तो वो सोने की तायारी करने लगा और मैं नीचे बैठ क नोट्स कंप्लीट करने लगी. वो फिरसे पलंग पे पेट क बाल लेट क सो रहा था. मैं नोट्स लिखते वक़्त थोड़ी झुक क लिख रही थी जिससे मेरी स्तानो क बीच की खाई उसे थोड़ी थोड़ी दिख रही थी. मैने सोचा क भाई को गरम करने का ये चान्स छोड़ना नही छाईए इसलिए मैने गर्मी हो रही है ये दिखा क पल्लू निकल दिया और तोड़ा और झुक क लिखने लगी. उसकी थोड़ी सिसकी से मुझे पता चल गया की चिंगारी ने आग पकड़ ली है.
भाई भी सोने का नाटक कर रहा था और मुझे देख रहा था. ऐसे ही 20-25 मिनिट बीट गये. मैने तोड़ा सोचा और एक बार भाई क तरफ देखा तो झट से उसने आखे बंद की और जताया क वो सो रहा है. मैं झट से उठी और मेरा कुर्ता उतार दिया. ये भाई ने कभी सोचा ही नही था क मैं ऐसा कुछ करूँगी. उसे तो जैसे 440वॉल्ट का करेंट ही लग गया. उसने उसकी उक्सुकता थोड़ी कम की और सोने का नाटक चालू रखा. पर यह मेरे छूट से पानी बहना शुरू हो गया था. वो मेरे दोनो द्तानो को घूर रहा था, मैं भी उसका मज़ा ले रही थी. और 10-15 मीं तक मैने कभी मेरे स्तानो पे का पसीना कभी कुर्ते से तो कभी टवल से पोछा जिसे भाई और उत्तेजित हो. मेरा तो बुरा हाल था, उत्तेजना के कारण मेरे दोनो स्तन कड़क हो गये थे और सीधे हो गये थे. मैने सोचा क अब और खिचना बेकार है, और उठकर सस्यू करने क लिए बातरूम गयी, और किसी तरह का परदा नही लगाया और झट से मेरा पंत उतरी और पनटी भी उतरी, ये सब भाई देख रहा है ये सोचके और मुझे पता था क वो ये देख ही रहा होगा. पनटी उतरने के बाद नीचे बैठ कर मूतने लगी ताकि मेरी गांद का घेरा और छेड़ भाई को सॉफ डीके. भाई तो जैसे सातवे आसमान पर था. मैं ज़ोर देके मूतने लगी ताकि मेरे मुतनी की ज़ोर से आवाज़ हो. उस रात के सन्नाटे मे वो आवाज़ कुछ असर कर गयी. मैं बाहर आए और एक त-शर्ट पहें लिया.
मैं सोने क लिए गयी तो बारिश शुरू हो गयी और जहा मैं सोती थी वही से पानी टपकने लगा. और मेरी रज़ाई और चादर भीग गये. पानी की आवाज़ से भाई भी नींद से उठने का नाटक किया और बोला “ कोई बात नही पिंकी यहा आजओ उपर.कल छत ठीक कर लेंगे.” मूज़े जैसा चाहिए था वैसा ही हुआ और मैं झट से पलंग पे लेट गयी. भाई से तोड़ा अंतर ले क सोने लगी(वैसे अब हम दोनो सोने का नाटक कर रहे थे) मैने थोड़े देर बाद नींद मे हू ऐसा दिखाते भाई क पेट पर हाथ रख दिया और तोड़ा तोड़ा हाट उपर नीचे करने लगी. जिस से उसका लंड उत्तेजित हो गया और उसके पाजामे मे तंबू बनाने लगा. उसने भी उसका हाथ मेरे छाती पर रख दिया और तोड़ा स्तानो पे फेरने लगा. अब आग पूरी लग गयी थी और बस मंज़िल थोड़ी ही दूर थी. तभी वो तोड़ा उठा और उसका पाजामा निकल के चड्डी भी निकल दी. तब मेरा हाथ उसके जाँघ को चुराहा था. वो मेरे तरफ मुड़ा और मुड़ते ही उसका लंड मेरे हथेली मे आ गया. मैने भी उसे तोड़ा हल्केसे दबाया और उसे मुट्ठी मे ले लिया, और तोड़ा हिलाया. तभी भाई ने झट से मेरे एक स्तन को ज़ोर से दबाया. बस अब हम दोनो क बीच की सब दीवारे टूट गयी और हम एक दूसरे को लिपट गये.
भाई ने मेरे होतो को चूमा और एक फ्रेंच किस लिया. हे… क्या बतौ वो एहसास. फिर भाई ने धीरे धीरे मेरे स्तन दबाए, मैने भी उसके लंड को धीरे धीरे आयेज पीछे करना शुरू किया. भाई ने मेरा कुर्ता और सलवार उतार दिया अब मैं सिर्फ़ पनटी मे थी . मैने भी भाई का त-शर्ट उतार दिया और उसकी बालो वाली छाती चूमने लगी. भाई मेरे स्तानो को मूह मे लेके चूसने लगा, कभी एक कभी दूसरा. मेरे मुहसे सिसीकिया निकालने लगी, “हे… अफ… आ…और ज़ोर्से…” ये सुनके भाई और ज़ोर्से चूसने लगा. मैं भी उसका लंड हाथ से ज़ोर ज़ोर से हिलने लगी, जिसके वजह से भाई भी सिसकिया निकालने लगा…
अब मैने उल्टा होकर उसका लंड मूह मे ले लिया और वो मेरी छूट चाटने लगा… हम 69 के पोज़िशन मे थे और मुखमैथून का आनंद ले रहे थे, मेरी छूट झड़ने लगी और भाई ने सारा पानी पी लिया. मैने भी उसका पानी झड़ने के बाद पी लिया… वा क्या स्वाद था उसका… हम दोनो का पानी चाड़ने के वजह से हम थोड़े सुस्त होगआय और एकदुसरे के बहो मे लिपट के लेते रहे.
थोड़ी देर बाद भाई का लंड फिरसे खड़ा होने लगा, जब उसने मुझे दिखाया तो मैं खुश हो गयी और उसे मूह मे लेकर धीरे धीरे चूसने लगी वो मेरे स्तानो को दबाने लगा. भाई का लंड अब पूरे जोश मे आगेया था, और इस बार मैं उसे मुझमे समाने के लिए बेताब थी. मैं झट से बिस्तर पे लेट गयी और भाई को चढ़ने को कहा. भाई ने भी पोज़िशन ली, और मेरे उपर आ गया, पर उसे मेरे छूट का छेड़ मे डालते ही नही आ रहा था. तो मैने मेरे कुल्हो के नीचे तकिया रखा और टांगे फैला दी, जिससे मेरा छेड़ तोड़ा खुल के दिखने लगा. भाई उस पे आया और एक ज़ोर से धक्का लगाया, जिस से उसके लंड का सूपड़ा मेरी छूट चीरता हुआ अंडर चला गया. मैं ज़ोर से चीलाई पर उतने मे भाई ने मेरे होंटो मे उसके होंटो को डालके चूमा. मुझे बहोट दर्द होने लगा और मैं रोने लगी, तो उसने उसका लंड बाहर निकल लिया. जब मैने अपनी नन्ही छूट को देखा तो उससे खून निकालने लगा था, और ऐसा दर्द हो रहा था जैसे किसीने उसे फाड़ दिया हो…
भाई ने मुझे समझाया, “पिंकी, ऐसा तो होता ही है. आज तू काली से फूल बन गयी है.” भाई के समझने से मुझमे तोड़ा जोश आया और मैं उसे बोली, “कुणाल मुझे बहो मे लेलो.” उसने झट से मुझको लिपट लिया. अब भाई ने मुझे फिरसे लेता दिया और अपनी हाथ के उंगली को मेरी छूट मे डाला और आयेज पीछे हिलाने लगे. इससे मुझे फिर से उत्तेजना होने लगी और मैं तयार होने लगी, थोड़ी देर ऐसे करने के वजह से मेरे छूट से पानी आने लगा और भाई ने उसे पी लिया और मेरी छूट ज़बान से चटकार सॉफ करने लगा. अब मुझेसे रहा नही जेया रहा था. सो मैं ने भाई को उपर आने का आमंत्रण दिया. वो झट से उपर आया पर इश्स बार धीरे धीरे उसका लंड छूट मे डालने लगा. दो-टीन झटको मे ही उसका आधा लंड मेरी छूट मे चला गया. भाई अब आयेज पीछे हिलने लगा, और एक हाथ से मेरा स्तन दबाने लगा. अब मुझे अच्छा लगने लगा और मैं चिल्लाने लगी, “फाड़ दो इश्स साली छूट को… भैया… अपनी बाहें को सारा सुख दे दो… और ज़ोर्से डालो… और… इश्स… अफ…” मेरे ऐसे कहेने से भाई भी जोश मे आगेया और ज़ोर्से झटके मरने लगा… 5मीं बाद मुझे लगा के मैं झड़ने वाली हूँ, मैं कुणाल से बोली “भाई मैं झधने वाली हू… तुम भी साथ मे ही झड़ो और मुझमे ही झड़ो, मैं तुम्हारा पूरा रस अपने मे समलेना चाहती हू…” भाई ने वैसा ही किया और हम साथ ही झाडे. वो मेरे बगल मे लेट गया. और हम दोनो को नींद आ गयी.
सुबह जब मैं उठने लगी तो मुझसे उठे नही जेया रहा था. बहोट कोशिश करने के बाद मैं खड़ी हुई पर जैसे बातरूम जाने के लिए पैर बढ़ाया लड़खड़ा गयी और नीचे बैठ गयी. मेरी पहेली चुदाई के कारण मुझे बहोट दर्द हो रहा था और इसके वजह से मैं चल नही सकती थी. मैं वही पलंग पे बैठ गयी. भाई ने कहा “पिंकी, तुम दो-टीन दिन घर मे ही आराम करो जब ठीक हो जाओ तब ही कॉलेज जाना.” ये कहा और मेरे पास आ के मुझे एक चूमा दे के चला अपने कलाज के लिए चला गया.
उस दिन के बाद मैं और भाई बही-बहन ना होके पति-पत्नी है ऐसे रहेने लगे, जब तक मेरी शादी नही हुई. पर जब भी हम दोनो को अकेला समय मिलता है तब हम फिरसे एक दूसरे के बहो मे खो जाते है
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