ब्रा पेंटी बेचने वाले ने कपड़े बेचने के बहाने कसकर मुझे चोद लिया sex Kahani :- दिव्या अवस्थी

हाय दोस्तों, मैं दिव्या अवस्थी आप सभी का sexkahani.net में बहुत बहुत स्वागत करती हूँ। मैं पिछले कई सालों से sexkahani.net  की नियमित पाठिका रहीं हूँ और ऐसी कोई रात नही जाती तब मैं इसकी रसीली चुदाई कहानियाँ नही पढ़ती हूँ। आज मैं आपको अपनी स्टोरी सूना रही हूँ। मैं उम्मीद करती हूँ कि यह कहानी सभी लोगों को जरुर पसंद आएगी।

मैं गोरखपुर की रहने वाली हूँ। मैं बहुत गोरी और सुंदर हूँ। २३ साल की एक जवान, आकर्षक नवयौवना हूँ। मेरी शादी हो चुकी है और मेरे पति बहुत अच्छे है, वो मुझसे बहुत प्यार करते है। हम लोगो की सेक्स लाइफ भी बहुत अच्छी है, मेरे पति रोज रात में मेरी चूत मारते है। मेरा जिस्म बहुत ही छरहरा और सेक्सी है। बदन   की खाल तो इतनी गोरी और मुलायम है की स्वर्ग की अफ़सराये भी मुझसे शर्मा जाए। शादी से पहले कितने लड़के मुझे चोदने की अभिलाषा रखते थे, पर मैं एक पतिव्रता लड़की थी, इसी वजह से मैंने किसी भी लड़के से नही चुदवाया और शादी होने के बाद सुगाहरात पर ही मैंने अपनी बुर चुदवाई और जवानी का मजा लिया। मैं बहुत सुंदर लड़की हूँ। मेरे ओठ, मम्मे, मेरे रेशमी काले बाल, मेरी छरहरी कमर और चूत सब कुछ बहुत मस्त है। मुझे सेक्स करना बहुत पसंद है और रात में नियमित रूप से चूत में मोटा लंड खाना बहुत पसंद है।

दोस्तों, कुछ दिन पहले ही बात है, मेरी पुरानी ब्रा और पेंटी पूरी तरह से फट चुकी थी। मेरे पति मेरे मम्मो को ब्रा के उपर से ही घंटो घंटो मसलते रहते थे और मेरी चूत को पेंटी के उपर से ही पीते रहते थे। इसलिए मेरी ब्रा और पेंटी इस बार जल्दी फट गयी थी।

“ऐजी, मेरी ब्रा और पेंटी फट गयी है, २ जोड़ी ले आना” मैंने अपने पति से कहा

तो पति बोले की उनके पास वक़्त नही है। हजार रूपए उन्होंने मुझे पर्स से निकलाकर दे दिये और ऑफिस चले गये। मैंने सोचा की शाम को पास के माल वी मार्ट से अपने लिए ब्रा और पेंटी ले आउंगी, पर दोपहर के २ बजे ही एक ब्रा पेंटी वाला आदमी आ गया और आवाज लगाने लगा। मैंने उसे रुकवाया और घर के बाहर के बारामदे में उसे बिठाया।

“क्या दिखाऊ मेमसाब???” वो बोला

“३६” साईज में २ जोड़ी ब्रा और पेंटी दिखा दो” मैंने कहा

वो बेचने वाला लड़का काफी जवान था, अपने बड़े से गट्ठर से वो मेरे लिए ब्रा और पेंटी निकालने लगा। इसी बीच मेरी नजर उसकी जींस पर पड़ गयी। असल में वो जमीन पर पंथी मारकर बैठा हुआ था, उनकी आसमानी जींस में मुझे उसका मोटा लौड़ा दिख गया। बाप रे, कितना मोटा लंड है इसका, मैंने खुद से कहा। जो लड़की इससे चुदवाएगी, बड़ा मजा पाएगी वो। मैंने सोचा। वो देखने में भी काफी हैंडसम था।

“लो मेमसाब!!” वो जवान लड़का बोला। उसने मुझे ८ जोड़ी नई नई डिसाईन की ब्रा पेंटी दिखा दी। मुझे काफी पसंद आ रही थी। समझ नही आ रहा था कौन सी लूँ

“कितने की है???” मैंने पूछा

“600 में 2 जोड़ी!!” वो बोला

“बड़ी महंगी है भैया…..ये तो, कुछ कम तो करो!” मैंने हँसते हुए उसे लाइन मारते हुए कहा। जानबुझकर मैंने अपनी साड़ी का पल्लू नीचे सरका दिया। मैंने नीला गहरे गले का ब्लाउस पहन रखा था। उस लड़के को मेरे सुडौल, गोल और रसीले मम्मो के दर्शन हो गए। पैसे कम करवाने के लिए मैंने ये चाल चली थी। मेरा ब्लाउस काफी गहरा था। काफी जादा मम्मे मेरे दिख रहे थे। मेरा क्लीवेज (छातियों के बीच का रास्ता) उसे साफ़ साफ़ दिख रहा था। लड़के की नजर कुछ पल के लिए मेरे ब्लाउस में कैद मेरे रसीले मम्मो पर टिक गयी, वो ताड़ने लगा। मेरे गोरे गोरे सुडौल मम्मे जैसे उसे बुला रहे थे। मेरा पतला सुराही जैसा गला बड़ा खूबसूरत था।

“बताओ न  भैया ….कितना पैसा लोगे ब्रा पेंटी का???” मैंने कातिल मुस्कान के साथ पूछा तो समझ लो उस लौंडे का कत्ल हो गया

“मेमसाब, इसमें कोई मार्जिन नही है, पर चलो आप इतने प्यार से कह रही है मैंने कैसे मना कर सकता हूँ….आप 500 दे देना २ जोड़ी ब्रा पेंटी के लिए” वो मुस्कुराकर बोला

“पर….भैया…मैं कौन सा लूँ ?? कुछ समझ नही आ रहा है??” मैंने दुबारा कत्ल कर देने वाली अदा से पूछा

“मेमसाब आप अंदर जाकर ट्राई कर लो। लो फिट हो जाए उसे ले लेना…” वो लड़का बोला

मैं ब्रा और पेंटी लेकर अंदर चली गयी। वो बाहर बरामदे में ही बैठा था। मैं घर में अंदर गयी, दरवाजा मैंने बंद नही किया। मैंने अपना ब्लाउस खोलना शुरू कर दिया, फिर साडी निकाल दी, फिर मैं नई ब्रा पेंटी पहनकर ट्राई करने लगी, कुछ फिट हो रही थी, कुछ नही। एक ब्रा पेंटी मैं पहनती, फिर उसे निकालकर दूसरी पहनती। मैं देख नही पायी पर वो लड़का सायद मुझे चोदना चाहता था, मेरे कमरे के बाहर खड़ा था और वहीँ से छिपकर मेरे नंगे जिस्म का मजा ले रहा था। कुछ देर में मैंने दूसरी ब्रा और पेंटी पहनने के लिए पहली वाली निकाली, मैं पूरी तरह से नंगी थी, वो लड़का अंदर मेरे कमरे में आ गया और उसने मुझे पकड़ लिया।

“तुम????” मैंने कुछ कहना चाह रही थी पर वो नया लौंडा बड़ा तेज निकला। मेरे संगमरमर के नंगे जिस्म को उसने जल्दी से पकड़ लिया और मेरे साल गलबहियां करने लगा। उसने मुझे कंधे से कसकर पकड़ लिया और दूसरा हाथ मेरे सिर के पीछे लगा दिया। उस नये लौंडे ने मुझे हल्का पीछे की तरह झुकाया और मेरे होठ पर अपने होठ रख दिए और मजे लेकर चूसने लगा। “तुमम्मम्म..” मैं कुछ बोलना चाह रही थी, पर उसने मुझे मौका नही दिया और मेरे रसीले संतरे जैसे होठ पीने लगा। मैं पूरी तरह से नंगी थी, मेरे बदन पर एक भी कपड़ा नही था, क्यूंकि मैं वो सारी ब्रा और पेंटी पहनकर देख रही थी। मैं मजबूर हो गयी थी।

वो नामुराद जबरदस्ती मेरे रसीले खूबसूरत होठ पी रहा था, हम दोनों खड़े हुए थे। फिर कुछ देर में उसके हाथ मेरे दूध पर पहुच गये। मैं बड़ा अजीब लगा, मेरे यौवन पर आज किसी गैर मर्द ने हाथ रख दिया था। वो ठरकी ब्रा पेंटी बेचने वाला लौंडा मेरे मम्मो को तेज तेज दबाने लगा और मेरे होठ निरंतर पीता रहा। उसने मुझे जरा भी बोलने लगी दिया। मैं मजबूर हो रही थी। मैं अच्छी तरह से जानती थी की वो मुझे चोदना चाहता है। वो खड़े खड़े ही मेरे होठ चूस रहा था। फिर उसने अपना सीधा हाथ मेरी चूत पर रख दिया और सहलाने लगा। वो लौंडा बड़ा चालू आइटम था, उसने अपना मुंह मेरे मुंह से नही हटाया, वरना मैं बोलकर उसवा विरोध करती और उसे भगा देती।

“….आआआआअह्हह्हह… अई…अई…….” मैं आहे भरने लगी। वो निरंतर मेरी साफ़ और चिकनी चूत को सहलाता रहा और मेरे गुलाबी आफ़ताब से होठ पीता रहा। उस लौंडे से ऐसा २० मिनट किया तो मैं भी सरेंडर हो गयी। फिर मैंने भी उसे दोनों हाथों से पकड़ लिया और बाहों में भर लिया।

“ब्रा पेंटी बेचने वाले भैया…..अब तुम मुझे चोद ही लो, पर १ भी नही दूंगी और ३ जोड़ी ब्रा पेंटी लुंगी!!” मैंने कहा

“मंजूर है…..” वो तपाक से बोला, उसको तो जैसे स्वर्ग का पास मिल गया था

फिर मैं उसको लेकर अपने बेडरूम में चली गयी। मेरे पति इसी कमर में मुझे रोज नंगा करके मेरी रसीली चूत मारते थे। आज एक गैर मर्द से मैं चुदने वाली थी। मैं बिस्तर पर लेट गयी और ब्रा पेंटी बेचने वाला लकड़ा भी नंगा हो गया और उसने अपने सारे कपड़े निकाल दिये। वो मेरे उपर लेट गया और मेरे बला के खूबसूरत दबाने लगा। बिना देर किये उस चालाक लौंडे ने मेरे मम्मे को हाथ में ले लिया और उसका साइज पता करने लगा। मेरे दूध बहुत सुंदर थे, छातियाँ भरी हुई, सुडौल और गोल गोल थी, जैसे उपर वाले ने कितनी फुर्सत से बैठकर मेरी जैसी माल और मस्त चोदने लायक औरत बनाई थी। मेरी उजली छातियाँ पुरे गर्म से तनी हुई थी। छातियों के सिखर पर अनार जैसे लाल लाल बड़े बड़े घेरे मेरी निपल्स के चारो ओर बने थे, जिसमे मैं बहुत सेक्सी माल लग रही थी। उस माल बेचने वाले लौंडे की नजर मुझ पर जम गयी। तेजी से उसने मेरी रसीली बलखाती चुचियों को अपने वश में कर लिया और दोनों मम्मो को दोनों हाथ से दबोच लिया और तेज तेज दबाने और मसलने लगा।

““उ उ उ उ उ……अअअअअ आआआआ… सी सी सी सी….” मैं तेज तेज चिल्लाने लगी। वो लौंडा मेरे दूध को किसी हॉर्न की तरह दबाने लगा। मुझे भी काफी मजा आ रहा था। फिर वो लेटकर मेरे दूध मुंह में लेकर पीने लगा। मैं तडप गयी। मुझे तो जैसे जन्नत मिल गयी थी।

वो काफी देर तक मेरे दूध पीता रहा। मैं तडप रही थी। उसने मेरी रसीली छातियों का २० मिनट सेवन किया। फिर वो मेरे पेट पर आकर बैठ गया और उसने अपना ७” का रसीला लंड मेरे दोनों बूब्स के बीच में रख दिया और दोनों छातियों को कसकर पकड़कर वो मेरे मम्मे चोदने लगा। मैंने कभी सोचा नही था की कभी कोई मर्द मेरे रसीले दूध को चोदेगा। एक नये तरह का नशा पुरे शरीर में चढ़ रहा था। मैं दीवानी हो रही थी। ओह गॉड, ये आदमी तो सच में जैसे कोई कामदेव है। मैं खुद से बुदबुदा रही थी। वो मामूली का ब्रा पेंटी बेचने वाले लौंडा क्या मस्त तरह से जल्दी जल्दी मेरे दोनों मम्मो को चोद रहा था। आज तो मैं उसकी दीवानी हुई जा रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे वो मेरे बूब्स नही मेरी बुर चोद रहा है।

“बहन के लौड़े….माँ के लौड़े…..तेरी माँ की चूत…गांडू रुका क्यों है….जल्दी जल्दी चोद ना….तेरी माँ की चूत…जल्दी चोद ना” मैं किसी देसी रंडी की तरह चिल्लानी लगी तो वो लौंडा और तेज तेज मेरे मम्मे चोदने लगा। मुझे बहुत सुख और मजा मिला दोस्तों।

मेरे मम्मो को चोदने के बाद वो ब्रा पेंटी बेचने वाला लड़का मेरी चूत पर आ गया और उसने मेरी गोरी खूबसूरत टाँगे खोल दी। मैं शर्मा गयी। ‘मेमसाब! आपकी चूत बहुत सुंदर है। मैंने कई चूत मारी है पर आपकी जैसी चूत सबसे जादा सुंदर है’ वो लौंडा बोला। मुझे ये सुनकर गर्व हुआ। किसी ने तो मेरी चूत की तारीफ़ की। दोस्तों, हर सुबह मैं जब भी नहाती थी अपनी चूत जरुर देखती थी। मुझे भी अपनी चूत बहुत खूबसूरत लगती थी। मैं इसे रोज साबुन से मल मलकर चमकाती थी। आज देखो उस लौंडे ने भी मेरी चूत की तारीफ़ कर दी थी। वो बड़ी देर तक मेरी गुलाबी चूत के दर्शन करता रहा। फिर वो मेरी चूत पीने लगा। अपने ओंठ को लगा लगाकर मेरी चूत पीने लगा। वो जीभ लगाकर मेरी बुर की एक एक कली मजे लेकर पी रहा था। फिर उस लौंडे ने अपना बड़ा सा लौड़ा मेरे भोसड़े पर सेट कर दिया। सच में मैंने आज तक कई मर्दों से चुदवाया था। पर इतना बड़ा लौड़ा नही देखा था और ना ही खाया था। वो ब्रा पेंटी बेचने वाला मुझे हप हप करके चोदने लगा।

मैं “आआआआअह्हह्हह….ईईईईईईई…ओह्ह्ह्हह्ह…अई..अई..अई….अई..मम्मी…..” करके सिसकारी लेने लगी। मोटा लौड़ा खाने में कुछ जादा मजा आता है। क्यूंकि इससे चूत अच्छी तरह से चुद जाती है। चूत की दीवारों में मोटा लौड़ा जादा रगड़ और जादा घर्षण पैदा करता है जिससे चरम सुख मिलता है। इस तरह मैं आज ब्रा पेंटी बेचने वाले लकड़े से मजे से चुदवाने लगी। मैं सीधा लेटकर दोनों टाँगे फैलाकर चुदवा रही थी। फिर वो अचानक जोर जोर से इतनी जोर से धक्के देने लगा की मुझे लगा की जमीन ही खिसक जाएगी। मेरे घर में पट पट का शोर बजने लगा।

“…..अई…अई….अई……अई….इसस्स्स्स्स्स्स्स्……उहह्ह्ह्ह…..ओह्ह्ह्हह्ह…..चोदोदोदो…..मुझे और कसकर चोदोदो दो दो दो” मैं पागलो की तरह गुहार लगा रही थी। ये मेरी चुदाई और गहरी ठुकाई का मीठा शोर था। इस ध्वनि से आज मेरा घर पवित्र हो गया। मेरी चूत फटते फटते बची। फिर वो जवान लौंडा मेरी योनी में ही झड गया। अब जाकर कहीं मुझे चैन मिला। मैंने उसे अपने गले से लगा लिया और उसके गाल, मुंह, और चेहरे पर मैं पागलों की तरह किस करने लगी।

“तू तो बड़ी मस्त ठुकाई करता है रे!!…कहाँ से सीखी तूने ये चुदाई की कामकला??” मैंने उस लौंडे से पूछा

“मेमसाब, मैं घर पर रोज अपनी जवान बहन को चोदता हूँ, वही से मैंने एक कामकला सीखी है” वो बोला। मैंने उसे बिस्तर पर सीधा लिटा दिया और उसका लंड मुंह में लेकर चूसने लगी। ये वही मोटा लंड था जिसे मैंने अभी १ घंटे पहले बाहर बरामदे में देखा था। मैं उसके मोटे रसीले लौड़े को हाथ में ले लिया और तेज तेज फेटने लगी। उसे बहुत मजा आ रहा था। क्यूंकि वो बार बार ““उ उ उ उ ऊऊऊ ….ऊँ..ऊँ…ऊँ..” करता था और अपना मुंह खोल देता था। मैंने और तेज तेज उसका ७” का मोटा और जूसी लौड़ा फेटने लगी। मैं उसका मोटा सुपाड़ा मुंह में लेकर चूस रही थी। मेरे पति का लंड तो सिर्फ 5 इंच का है पर इस बहन के लौड़े का तो पूरा ७ इंच लम्बा और ढाई इंच मोटा है। मैं अपने सिर को जल्दी जल्दी उस ब्रा पेंटी बेचने वाले लकड़े के लंड पर हिलाने लगी। आह मुझे बहुत मजा आ रहा था। फिर मैं उसके लौड़े से मंजन करने लगी। ये सब रति क्रीडाये कमाल की और अद्भुत थी। आज उस गैर मर्द से चुदवाने के बाद मानो मेरा बरसों का सपना पूरा हो गया था। मैं उसके लौड़े को खा जाना चाहती थी।

दोस्तों, मेरे पति थोड़े पुराने जमाने के थे। हमेशा बिस्तर पर लिटाकर मिशनरी स्टाइल से ही मेरी चूत मारा करते थे। इसलिए आज मैं कुछ नया ट्राई करना चाहती थी। फिर मैं कुतिया बन गयी और वो खुद किसी कुत्ते की तरह मेरी चूत सूंघते सूंघते मेरे पीछे आ गया। मैं दोनों घुटनों और दोनों हाथो पर झुककर कुतिया बन गयी। वो ब्रा पेंटी बेचने वाला छोकरा बड़ा होशियार था। मेरे पीछे आकर मेरे मस्त मस्त पुट्ठे पीने लगा। उसकी जीभ मेरे पिछवाड़े को हर जगह छूने लगी। सच में मेरे चूतड़ बहुत आकर्षक थे। बिल्कुल लाल लाल खुर्बुजे की तरह थे। वो ब्रा पेंटी बेचने वाला लड़का ललचा गया। उसने झुक पर मेरे चूतडों पर किस कर दिया और चूत पीने लगा।

फिर उसने अपना मोटा ७” का लौड़ा मेरी चूत में डाल दिया और मुझे पीछे से किसी कुत्ते की तरह बैठकर चोदने लगा। मैं आगे पीछे जल्दी जल्दी हिलने लगी, क्यूंकि वो बहुत तेज तेज ठोंक रहा था। मैं “….उंह उंह उंह हूँ.. हूँ… हूँ. हमममम अहह्ह्ह्हह.. अई…अई….अई……” करके चीख और चिल्ला रही थी। उसने मुझे ४० मिनट पीछे से चोदा और चूत में ही आउट हो गया।  antarvasna,sex kahani,sexy kahani,antervasna

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